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Pasandida Aurat Season 2 – 103

Pasandida Aurat Season 2 – 103

Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

सभी रस्मो के बाद अवनि एक बार फिर कमरे में चली आयी और पृथ्वी बाकि सबके साथ हॉल में आ बैठा। सबने नाश्ता किया और फिर बैठकर हंसी मजाक करने लगे। रवि जी ने अवनि के घरवालों को आज रात के रिसेप्शन में रोक लिया और हिमांशु से कहकर अगले दिन के लिए ट्रैन की टिकट बुक करने को कह दिया। कौशल चाचा ने देखा पृथ्वी के घरवाले बहुत ही सीधे और समझदार थे। अब वे अवनि को लेकर निश्चिन्त थे और उन्हें विश्वास हो चुका था कि अवनि इस घर में खुश रहेगी और सुरक्षित रहेगी।

रवि जी के घर में पृथ्वी के कमरे में बैठी अवनि अभी भी उस पल के बारे में सोच रही थी जिस पल उसने पृथ्वी के होंठो को छूआ था। उस पल को याद करते ही अवनि को एक सिहरन सी होती। लता अवनि के लिए नाश्ता ले आयी। सुरभि दीपिका और सलोनी भी अवनि के साथ ही थी इसलिए सब साथ बैठकर खाने लगी। लता ने अवनि से थोड़ी देर आराम करने को कहा क्योकि दोपहर बाद उसकी मुँह दिखाई की रस्म होने वाली थी

वही पृथ्वी भी खा पीकर दूसरे कमरे में सो रहा था। दोपहर बाद रवि जी कौशल चाचा और मयंक चाचा को बड़े पापा के घर चले गए। अवनि की मुँह दिखाई की रस्म की तैयारियां हो रही थी इसलिए घर के मर्दो को वहा आने की परमिशन नहीं थी। कार्तिक और नितिन भी मोहित और लक्षित के साथ पृथ्वी के फ्लेट पर चले आये और चारो में जल्दी ही दोस्ती भी हो गयी।

घर के हॉल में सभी महिलाये जमा थी और सोसायटी से भी कुछ महिलाये भी अवनि की मुँह दिखाई में आयी थी। लता ने अपनी तरफ से एक बहुत ही सुन्दर साड़ी और कुछ गहने अवनि को दिए और मुँह दिखाई की रस्म के लिए तैयार होने को कहा। इस बार अवनि को तैयार साक्षी ने किया और सुबह की तरह अवनि इस बार भी बहुत सुन्दर लग रही थी। साक्षी और बाकि सब अवनि को लेकर हॉल में चली आयी। अवनि आकर एक पाटले पर बैठी और फिर उसकी मुँह दिखाई की रस्म शुरू हुई। शुरुआत दादी ने की , उन्होंने अवनि का घूँघट उठाकर उसको देखा और तोहफा दिया।

इसके बाद सभी एक एक करके अवनि का घूँघट उठाकर उसे देखते , उसकी तारीफ करते और उसे तोहफा या फिर पैसे देते। अवनि सब अपने पास बैठी साक्षी को पकड़ा देती। अवनि ने देखा इस रस्म में सिर्फ महिलाये है घर का कोई भी मर्द यहाँ मौजूद नहीं है। सुबह के बाद से उसने पृथ्वी को देखा तक नहीं था। सब अवनि को तोहफे दे चुके थे तभी साड़ी में लिपटी एक हट्टी कट्टी महिला अवनि से भी लंबा घूंघट निकाले वहा आयी और अवनि के सामने आ बैठी।  

सभी उस हट्टी कट्टी महिला को देखकर हैरान थे लेकिन ऐसे रस्म में किसी को आने से रोक भी तो नहीं सकते इसलिए किसी ने उस से कुछ नहीं कहा। महिला अवनि के सामने आ बैठी उसने बाकी सबकी तरफ पीठ की हुई थी और उसका मुँह अवनि और साक्षी की तरफ था। महिला ने जैसे ही अपना घूँघट हटाया सामने बैठी साक्षी उसे देखकर चौंकी और उसका मुँह खुला का खुला रह गया क्योकि साड़ी में लिपटी वो हट्टी कट्टी महिला कोई और नहीं बल्कि पृथ्वी था जो अवनि की मुँह दिखाई में आया था।

उसने अपने होंठो पर ऊँगली रखकर साक्षी से चुप रहने का इशारा किया और फिर अवनि का घूँघट उठाकर उसका चेहरा देखा। अवनि ने अपनी झुकी पलकों को उठाकर जैसे ही सामने देखा पृथ्वी को देखकर हैरान रह गयी। पृथ्वी ने अपनी बाँयी आँख दबाई और अपने होंठो से दूर से ही अवनि को चुम्मा देकर घूंघट वापस गिरा दिया। उसने अपना घूंघट खींचा और उठकर मटकते हुए जैसे ही जाने लगा दादी ने कहा,”दुल्हिन का मुँह तो तुमने देख लिया जरा अपना घूंघट भी हटाओ तो हम भी देखे,,,,,,,,,,,,,,!!!”

“हाँ क्यों नहीं,,,,,,,,,,,!!”,कहकर पृथ्वी ने अपना घूँघट हटाया तो सब उसे देखकर हैरान रह गए और दादी ने कहा,”नालायक , बेशर्म रुक अभी बताती हूँ तुझे,,,,,,,,!!!”
दादी पृथ्वी को पकड़ पाती इस से पहले हसते हुए वहा से भाग गया ये देखकर अवनि हस पड़ी। अवनि को हसते देखकर पास ही बैठी एक महिला ने कहा,”खुशकिस्मत हो दुल्हन जो ऐसा नवरा मिला है , जिंदगीभर तुम्हे ऐसे ही हसाता रहेगा”

अवनि ने सुना तो मुस्कुराने लगी , महिला की बात सुनकर उसे अपनी किस्मत पर नाज हो रहा था और होता भी क्यों पृथ्वी के रूप में उसे इतना अच्छा हमसफ़र जो मिला है।

मुँह दिखाई की रस्म खत्म होते होते शाम हो गयी। रवि जी भी सबके साथ घर लौट आये थे और सब रिसेप्शन के लिए तैयार होने लगे। हिमानी सुरभि के साथ अवनि को लेकर पार्लर चली गयी। रवि जी ने रिसेप्शन के लिए हॉल बुक किया था। अवनि और पृथ्वी के सभी घरवाले तैयार होकर वहा पहुंच चुके थे। मेहमान और सब दोस्त भी आ चुके थे। सब अवनि और पृथ्वी का ही इंतजार कर रहे थे।

हॉल के कमरे में हिमांशु और नकुल पिछले एक घंटे से पृथ्वी को तैयार कर रहे थे। पृथ्वी ने काले रंग की कमीज , ग्रे रंग की पेंट और उस पर ग्रे रंग का कोट पहना था। हिमांशु और नकुल पिछले 15 मिनिट से बहस कर रहे थे कि पृथ्वी को टाई पहननी चाहिए या नहीं और जब ये तय हुआ कि टाई पहननी चाहिए तो दोनों परेशान क्योकि दोनों को ही टाई बांधना नहीं आता।

अवनि तैयार होकर आ चुकी थी रिसेप्शन एरिया में ना जाकर वह भी हिमानी और सुरभि के साथ अंदर चली आयी और उसी कमरे में जिसमे पृथ्वी था। अवनि ने देखा हिमांशु भैया टाई हाथ में लेकर परेशान से खड़े है तो वह उनके पास आया और कहा,”मैं बाँध देती हूँ”
“तुम्हे आती है”,हिमांशु भैया ने पूछा तो अवनि ने हामी में गर्दन हिला दी। नकुल मुस्कुरा उठा। अवनि पृथ्वी की तरफ आयी आज उसने हील पहनी थी इसलिए पृथ्वी के गले तक उसका हाथ आराम से जा सकता था।

पृथ्वी ने अवनि को देखा तो बस देखता ही रह गया क्योकि आज अवनि ने वही हरे रंग का जोड़ा पहना था जो उदयपुर में पहना था। पृथ्वी एकटक अवनि को देखता रहा। इस वक्त अवनि इतनी खूबसूरत लग रही थी कि पृथ्वी के पास उसकी तारीफ में कहने के लिए कोई शब्द ही नहीं थे। अवनि पृथ्वी की आँखों में देखते हुए उसके गले में टाई बांधने लगी। सुरभि ने देखा पृथ्वी और अवनि के साथ बाकि सब भी वही मौजूद है तो उसने धीरे से हिमांशु भैया से कहा,”भैया ! आई थिंक हमे यहाँ से चलना चाहिए”

हिमांशु ने सुना तो उसे अहसास हुआ कि सुरभि की बात सही है इसलिए उन्होने नकुल से वहा से चलने का इशारा किया और सुरभि भी हिमानी के साथ बाहर चली आयी। अवनि और पृथ्वी एक दूसरे के सामने , एक दूसरे की आँखों में देखते हुए कमरे में अकेले खड़े थे।
अवनि ने पृथ्वी की टाई बाँधी और अपना हाथ उसके सीने के बायीं तरफ रखकर कहा,”हो गया”
पृथ्वी की तन्द्रा टूटी तो उसने अपने बाँये हाथ को अवनि के हाथ पर रखा जो उसके सीने पर था और मुस्कुरा उठा।

पृथ्वी के हाथ थामने के अहसास से अवनि ने ये अंदाजा लगा लिया कि आज पृथ्वी बहुत खुश है। उसने पृथ्वी की आँखों में देखा और धीरे से कहा,”तुम जीत गए पृथ्वी”
पृथ्वी ने अवनि के हाथ को अपने सीने से हटाकर उसकी हथेली को अपनी हथेली से लगाकर उसके हाथ को अपने होंठो से छुआ और कहा,”मैं नहीं हम जीत गए”
अवनि ने सुना तो मुस्कुरा उठी पृथ्वी ने अवनि के जिस हाथ की हथेली को थामा था उसमे “पृथ्वी” लिखा था और जिस हाथ से थामा था उस हाथ की हथेली में लिखा था “अवनि” और यहाँ दो नाम एक हो चुके थे हमेशा हमेशा के लिए,,,,,,,,,,,,,,,!!

पृथ्वी अवनि के बगल में आया और अपना हाथ अपनी कमर पर रख लिया अवनि ने पृथ्वी की बाँह थामी और दोनों कमरे से बाहर निकल गए। बाकि चारो बाहर उनका इंतजार कर रहे थे इसलिए सब साथ साथ रिसेप्शन वाली जगह पर चले आये। हिमांशु दूसरी तरफ चला गया। हिमानी और सुरभि भी बाकि सबकी तरफ चली गयी और नकुल  तरफ , पृथ्वी की बाँह थामे अवनि स्टेज की तरफ चल पड़ी। सब उन्हें देख रहे थे , मुस्कुरा रहे थे और बहुत खुश थे।

अवनि और पृथ्वी स्टेज पर चले आये और सभी आकर उन्हें बधाईया देने लगे , उनके साथ तस्वीरें खिंचवाने लगे। जयदीप भी अपनी पत्नी रीना के साथ आया था लेकिन आज वह पृथ्वी के पास ज्यादा नहीं गया बस उसे मुबारकबाद दी , शादी का तोहफा दिया और नीचे चला आया। जयदीप जानता था आज उसके साथ अवनि है इसलिए जयदीप पृथ्वी के घरवालों के साथ बाते कर रहा था।

पृथ्वी के दोस्त और ऑफिस के सब लोग भी पृथ्वी और अवनि को विश करने आये और सबने खूब तस्वीरें खिंचवाई। रिसेप्शन काफी देर तक चला। रिसेप्शन के बाद सभी खाना खाने चले आये। एक बड़े से फॅमिली टेबल के इर्द गिर्द पृथ्वी और अवनि के घरवाले बैठे थे। वही अवनि और पृथ्वी के लिए भी साथ में दो कुर्सियां लगायी गयी। अवनि और पृथ्वी वहा आ बैठे।

अवनि के घर में ये रिवाज था कि खाने की टेबल पर घर की सास दामाद को अपने हाथ से एक निवाला खिलाये इसलिए सीमा चाची और मीनाक्षी चाची दोनों ही प्लेट में मिठाई लेकर पृथ्वी के पास चली आयी ! सबके पहले सीमा चाची ने मिठाई का एक टुकड़ा उठाया और जैसे ही पृथ्वी को खिलाना चाहा पृथ्वी ने खुद ना खाकर बगल में बैठी अवनि को पहले खिलाने का इशारा किया। सीमा चाची मुस्कुरा उठी अवनि के लिए पृथ्वी के दिल में कितना प्यार है ये बात तो वे पहले से ही जानती थी लेकिन पृथ्वी भी हर बार ये जताने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा था।

अवनि ने एक टुकड़ा खाया तो पृथ्वी ने सीमा चाची की तरफ देखा ताकि वे बचा हुआ टुकड़ा उसे खिला दे। सीमा चाची ने भी वही किया अवनि का जूठा पृथ्वी को खिलाया और साथ ही प्यार से पृथ्वी की नाक भी खींच दी और अपने हाथ में पकड़ा पैसो का लिफाफा उसे थमा दिया।
मीनाक्षी ने भी पहले अवनि को खिलाया और फिर पृथ्वी को , उन्होंने भी पृथ्वी को लिफाफा दिया और फिर सबके साथ आ बैठी। खाने की टेबल पर कुछ रस्म हुयी और फिर सब खाना खाने लगे।

पृथ्वी अवनि को अपने हाथ से खिलाना चाहता था लेकिन सबके सामने उसे मौका नहीं मिला। खाना खाने के बाद सभी कुछ देर वहा रुके और फिर घर के लिए निकल गए। घर पहुंचते पहुंचते रात का 1 बज चुका था और सुबह 5 बजे अवनि के घरवालों की ट्रेन थी इसलिए रवि जी ने उन सबको अपने घर पर ही रोक लिया ताकि सुबह उन्हें स्टेशन पंहुचा सके।
रिसेप्शन के लिए आने से पहले सब अपना सामान और बैग पहले ही रवि जी के घर छोड़कर आये थे। बाकि सब घरवाले अपने अपने घर चले गए बस चाचा रवि जी के घर रुके।

हिमांशु पृथ्वी और अवनि को अपनी गाडी से लेकर गेस्ट हॉउस से निकल गया। अवनि और पृथ्वी गाड़ी की पिछली सीट पर बैठे थे। अवनि खामोश थी और पृथ्वी भी लेकिन पृथ्वी की उंगलिया अवनि के हाथ पर शरारत कर रही थी। अवनि ने जैसे ही अपना हाथ हटाना चाहा पृथ्वी ने उसके हाथ को कसकर पकड़ लिया और मासूम बनकर खिड़की से बाहर देखने लगा।
कुछ देर बाद उसने देखा हिमांशु भैया की गाड़ी आनंद निलय अपार्टमेंट की तरफ जा रही है तो उसने कहा,”भाई ! हम फ्लेट क्यों जा रहे है ? घरवाले तो सब बाबा के घर में है ना”

“इतने दिन सबके साथ रह के तुम दोनों का मन नहीं भरा ? शादी हो चुकी है , रिसेप्शन भी हो चुका अब तुम दोनों थोड़ा समय एक दूसरे को दो”,हिमांशु भैया ने सामने देखते हुए कहा
हिमांशु भैया की बात सुनकर पृथ्वी का दिल किया अभी उन्हें गले लगा ले , पुरे घर में एक वही थे जो उसके दिल का हाल समझ रहे थे। गाडी अपार्टमेंट के बाहर पहुंची। हिमांशु पृथ्वी और अवनि के साथ गाड़ी से बाहर आया और लिफ्ट की तरफ बढ़ गया। गार्ड ने जब पृथ्वी और अवनि को देखा तो मुस्कुराया और दूर से ही खुश रहने का आशीर्वाद देते हुए अपने दोनों हाथो को उठा दिया।

लिफ्ट आकर रुकी हिमांशु भैया , अवनि और पृथ्वी के साथ अंदर आये तो पृथ्वी हिमांशु की तरफ देखने लगा क्योकि वह समझ नहीं पा रहा था हिमांशु भैया उन दोनों के साथ क्यों जा रहे है ? लिफ्ट सातवे माले पर आकर रुकी तीनो लिफ्ट से बाहर आये और पृथ्वी के फ्लेट के सामने चले आये। हिमांशु भैया ने जेब से चाबी निकाली और फ्लेट का दरवाजा खोलकर खुद बाहर खड़े रहे और अवनि-पृथ्वी से अंदर जाने का इशारा करके दोनों से कहा,”Happy Married Life”

पृथ्वी ने देखा घर अंदर से सजा हुआ है एंट्री गेट से लेकर अंदर जाने के लिए फूल बिछाए गए है। उसने हिमांशु भैया की तरफ देखा और कहा,”ये सब ?”
हिमांशु भैया ने पृथ्वी का गाल छुआ और धीरे से कहा,”मेरी तरफ से शादी का तोहफा,,,,,,,,मैं चलता हूँ”

हिमांशु भैया पृथ्वी और अवनि को छोड़कर वहा से चले गए। पृथ्वी ने अपना हाथ अवनि की तरफ बढ़ाया। अवनि ने पृथ्वी का हाथ थामा और उसके साथ अंदर चली आयी। पृथ्वी ने दरवाजा बंद किया और अंदर चला। अंदर आकर अवनि ने देखा पूरा घर बहुत ही खूबसूरती से सजाया गया था। यहाँ आकर अवनि को लगा जैसे वह अपने घर में आयी है क्योकि इस शहर में आने के बाद उसने सबसे ज्यादा वक्त इसी घर में बिताया था। पृथ्वी के दिल में इस वक्त कई अरमान थे तो वही अवनि के दिल में घबराहट और शर्म,,,,,,,,,

पृथ्वी अवनि के साथ उस कमरे में आया जो उनका अपना था और कमरे में आकर पृथ्वी ने देखा कि घर की तरह पुरे कमरे को भी सजाया गया है। कमरा फूलों की खुशबु से महक रहा था था।  बिस्तर पर बिछे फूल , नए परदे , कमरे में जलती हलकी रौशनी , ड्रेसिंग के
पास रखे जलते खुशबूदार केंडल्स , बिस्तर के पीछे दिवार पर लगा “Just Married” का बोर्ड सब काफी खूबसूरत था।

अवनि को खामोश देखकर पृथ्वी बिस्तर की तरफ आया और फूलों को हटाते हुए कहा,”अह्ह्ह्ह लगता है ये सब मेरे भाईयो ने , मैं इन्हे हटा देता हूँ”
अवनि ने सुना तो धीरे से कहा,”पृथ्वी ! रहने दीजिये”
पृथ्वी ने सुना तो रुक गया और अवनि की तरफ पलटकर कहा,”अह्ह्ह ठीक है,,,,,,,,!!!”
सिर्फ अवनि ही नहीं बल्कि घबराहट पृथ्वी के मन में भी थी , ऐसे वह अवनि से चाहे जितना फ्लर्ट करे , उसे तंग करे , उसके करीब आये लेकिन आज , आज वह घबरा रहा था। उसने अवनि की तरफ देखा और कहा,”मैं , मैं कपडे बदल लेता हूँ , तुम तुम खड़ी क्यों हो बैठो ना”

पृथ्वी ने कबर्ड से कपडे लिए और बाथरूम की तरफ चला गया। अवनि अंदर चली आयी वह ड्रेसिंग के सामने पड़ी कुर्सी पर आ बैठी। उसका दिल तेजी से धड़क रहा था। अवनि ने अपनी पलकें उठाकर शीशे में खुद को देखा तो पाया कि शर्म से उसका चेहरा लाल हुआ जा रहा है। अपनी आँखों में वह पृथ्वी के लिए बेइन्तहा मोहब्बत देख पा रही थी। उसने अपनी हथेलियों को देखा , मेहँदी में सबसे गहरा पृथ्वी का नाम ही रचा था। अवनि ने अपनी हथेलियों को अपने होंठो से छू लिया। उसका फोन बजा अवनि ने फोन देखा तो स्क्रीन पर सुरभि का नाम देखकर अवनि ने फोन उठाया और कहा

हेलो सुरभि
“अवनि ! पृथ्वी तुम्हारे आस पास है क्या ?”
– नहीं वो बाथरूम में है
“अच्छा अब ध्यान से मेरी बात सुनो ! सबसे पहले तो तुम्हे नयी जिंदगी के लिए बहुत बहुत शुभकामनाये है। आज मैं बहुत खुश हूँ अवनि , तुम्हे तुम्हारा प्यार मिल गया और उस से भी ज्यादा ख़ुशी की बात तुम्हे पृथ्वी जैसा हमसफ़र मिला। मैं महादेव से दुआ करुँगी तुम दोनों दोनों हमेशा एक दूसरे के साथ खुश रहो। तुम्हारी शादी को दो दिन हो चुके है और हम में से कोई नहीं चाहता था कि अब तुम और पृथ्वी अलग रहो इसलिए हम सब सुबह की ट्रेन से वापस उदयपुर जा रहे है,,,,,,,,,,,,,तुम गुस्सा करोगी इसलिए मैंने तुम्हे पहले नहीं बताया सॉरी”

– लेकिन ऐसे अचानक , मै तुम सब से मिली भी नहीं और तुम सब जा रहे हो
“अवनि ! कौशल चाचा ने कहा है कि वे जल्दी ही तुम्हे और पृथ्वी को उदयपुर बुलाएँगे,,,,,,,,,,,!!”
– लेकिन फिर भी,,,,,,,,,,,तुम तो रुक जाओ सुरभि
“मुझे माफ़ करना अवनि लेकिन मुझे जाना होगा,,,,,,,,,,,,,,,सुरभि ने कहा और फिर धीरे से बुदबुदाई “कोई मेरा इंतजार कर रहा है , देर हो इस से पहले मुझे उसे बताना होगा कि मैं उसे चाहने लगी”
– सुरभि ! क्या बड़बड़ा रही हो ?

“अह्ह्ह्ह कुछ नहीं ! अच्छा सुनो ! मैंने तुम्हारी अमानत ड्रेसिंग के ड्रॉवर में रखी है , उसे पृथ्वी को देना मत भूलना,,,,,,,,,,,,और एक बात”
– क्या ?
“अब तक तुमने पृथ्वी को खुद से दूर रखा है अवनि है अब अगर वो तुम्हारे करीब आना चाहे तो उसे मत रोकना,,,,,,,,,,,,,वो सच में तुमसे बहुत प्यार करता है , और मैं जानती हूँ तुम भी उस से बहुत प्यार करती हो,,,,,,,अपने दिल की बात उस से कह देना अवनि,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
– हम्म्म्म

“अच्छा मैं रखती हूँ , अपना ख्याल रखना मैं जल्दी ही तुम्हे फोन करुँगी”
– तुम भी अपना ख्याल रखना , बाय
“बाय”
कहकर सुरभि ने फोन काट दिया।  

सबके जाने की बात सुनकर अवनि उदास हो गयी। उसने फोन साइड में रखा और सुरभि की कही बात याद आने पर ड्रॉवर खोलकर देखा। अवनि ने ड्रॉवर में रखे खत और वो तोहफा उठाया जो उसने पृथ्वी के जन्मदिन पर उसके लिए लिया था। उन खतों को देखते ही अवनि की आँखों में आँसू भर आये और उसे बीते वक्त की तकलीफ याद आयी। उसने उन खतों को साइड में रखा और उस डिब्बे को खोलकर देखा। काले रंग के धागे में पिरोये गए चाँदी के ॐ को अवनि ने अपने हाथ में लिया और निरखने लगी। अवनि को याद आया कितनी ही दुकानों के चक्कर काटे तब जाकर उसे ये मिला था।

अवनि ने नम आँखों के साथ उसे वापस डिब्बे में रख दिया। बाथरूम का दरवाजा खुला और पृथ्वी बाहर आया। उसने ट्राउजर और सफ़ेद टीशर्ट पहना था और इन कपड़ो में काफी सहज और प्यारा लग रहा था। अपने बालों में से हाथ घुमाते हुए पृथ्वी अवनि की तरफ आया और उसे खामोश देखकर कहा,”तुम ठीक हो ?”
“पृथ्वी ! यहाँ आईये”,अवनि ने पृथ्वी से अपने पास आने का इशारा करके कहा
पृथ्वी अवनि के सामने आ खड़ा हुआ तो अवनि ने हाथ में पकड़ा डिब्बा उसकी तरफ बढाकर कहा,”ये मैंने आपके लिए खरीदा था बस आपको दे नहीं पायी”

पृथ्वी ने डिब्बा लिया तो अवनि ने खत उठाये जो कि पुरे 13 खत थे , उन्हें पृथ्वी की तरफ बढाकर कहा,”और ये कुछ खत जो मैंने आपके लिए लिखे थे”
पृथ्वी ने खत भी ले लिए और पास ही टेबल पर रखकर डिब्बा खोलकर देखा उसमे रखा ॐ उठाया और मुस्कुराया। अवनि नम आँखों से पृथ्वी को देखती रही तो पृथ्वी ने ॐ को देखते हुए कहा,”मुझ जैसे महादेव को ना मानने वाले इंसान के लिए दिल में महादेव के लिए विश्वास जगाने वाली तुम हो अवनि , क्यों ना तुम ही इसे अपने हाथो से मेरी कलाई पर बांध दो”

कहते हुए पृथ्वी घुटनो के बल अवनि के सामने आ बैठा और अपना हाथ आगे बढ़ा दिया। अवनि ने पृथ्वी के हाथ से वो धागा लिया और उसकी कलाई पर बांधने लगी , ये करते हुए उसकी आँखों की नमी आँसुओ में बदल गयी और सहसा ही उसके जहन में आये पृथ्वी के कहे शब्द “क्या कर लिया तुम्हारे महादेव ने”
अवनि ने धागा पृथ्वी की कलाई पर बांध दिया और उसकी आँख से निकलकर आँसू की एक बूँद पृथ्वी की कलाई पर जा गिरी।

पृथ्वी ने देखा तो उस आँसू को अपने होंठो से लगाया और अवनि के चेहरे को अपने हाथो में थामकर कहा,”यहाँ तक पहुंचने के लिए हमने अपने मन पर ना जाने कितने जख्म खाये है अवनि , अपने आँसुओ से उन्हें फिर से ताजा मत करो,,,,,,,,,,,,वो हमारा कल था ये हमारा आज है , और मेरा यकीन करो हमारा कल इस से भी ज्यादा खूसबूरत होगा,,,,,,,,,,!!!”

पृथ्वी के शब्दों ने अवनि को हिम्मत दी उसने हामी में सर हिलाया तो पृथ्वी उठा और खतों को उठाकर कहा,”मैं इन खतों को आज नहीं पढूंगा अवनि , क्योकि मैं जानता हूँ इन्हे लिखते हुए तुम्हे बहुत तकलीफ हुयी है और उसे भी ज्यादा तकलीफ मुझे इन्हे पढ़ते हुए होगी,,,,,,,,,,,,मैं इन्हे जरूर पढूंगा क्योकि तुम्हारा मेरे लिए खत लिखना मेरे जीवन में घटने वाली सबसे खूबसूरत घटनाओ में से एक है,,,,,,,,,,,,!!”

अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखा तो पृथ्वी को अवनि का उदास चेहरा अच्छा नहीं लगा और उसने अवनि छेड़ने के लिए कहा,”आज तो मैं तुम से अपने बदले पुरे करूंगा”
अवनि ने सुना तो उसका दिल धड़का और उसने अपनी पलकें झुका ली। पृथ्वी ने खतों को बिस्तर के बगल में पड़ी अपनी टेबल की दराज में रखा और बिस्तर पर आ बैठा। अवनि अभी भी खामोश ड्रेसिंग के सामने बैठी थी ये देखकर पृथ्वी ने बड़े प्यार से कहा,”अवनि ये सब तुम्हे बहुत भारी लग रहा होगा , तुम इन्हे निकाल क्यों नहीं देती ?”

अवनि ने सुना तो हामी में गर्दन हिला दी और ड्रेसिंग की तरफ घूमकर बैठ गयी। उसने अपने कानो के झुमके निकाले और ड्रेसिंग पर रख दिए , गले से हार निकाला उसे भी सामने रख दिया , टीका निकालकर रखा , हाथो में पहनी चूडिया निकालने लगी तो पृथ्वी उसके पास चला आया और दिवार से पीठ लगाकर अपने हाथो को बांधकर प्यार से अवनि को देखने लगा। अवनि ने धीरे धीरे दोनों हाथो की चूडिया निकालकर रखी बस कुछ रहने दी जो आज सुबह ही उसे पहनाई गयी थी।

हेयर स्टाइल बनाने के लिए बालों में ढेर सारे क्लिप लगाए गए थे अवनि उन्हें निकालने लगी। ये देखकर पृथ्वी उसके पीछे आया और उसके हाथो को बड़े प्यार से नीचे करके कहा,”इन्हे मैं निकाल देता हूँ”
अवनि ने पृथ्वी को नहीं रोका। पृथ्वी बड़े ध्यान से एक एक करके सभी क्लिप निकाल कर अवनि को देने लगा। पृथ्वी का ध्यान क्लिप निकालने में था और अवनि का पृथ्वी पर , सामने शीशे में नजर आते पृथ्वी के अक्स को देखते हुए अवनि को एक बार फिर उस से प्यार हो रहा था। पृथ्वी ने सब क्लिप निकाल दिए।

अवनि ने उन्हें सामने रख दिया। पृथ्वी ने अवनि की तरफ अपना हाथ बढ़ाया और कहा,”मेरे साथ आओ”
अवनि ने धड़कते दिल के साथ पृथ्वी का हाथ थामा और उठकर उसके साथ चली आयी। पृथ्वी अवनि को खिड़की के पास चला आया। उसने पर्दे हटाए और खिड़की खोलकर अवनि को आसमान में चमकता चाँद दिखाकर कहा,”इस संसार में अगर खूसबूरती की बात करे तो वो सबके लिए चाँद पहले नंबर पर आता है पर मेरे लिए दूसरे नंबर पर आता है जानती हो क्यों ?”

अवनि ने ना में गर्दन हिला दी तो पृथ्वी ने कहा,”क्योकि पहले नंबर पर मेरे लिए तुम आती हो”
अवनि ने सुना तो खिड़की के दूसरे किनारे से अपनी पीठ लगा ली और पृथ्वी की तरफ देखकर कहा,”आप मेरे साथ फ्लर्ट कर रहे है”
पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुराया और नाक चढ़ाकर हामी में अपनी गर्दन हिला दी।

अवनि मुस्कुराई तो पृथ्वी ने खिड़की के दूसरे किनारे से अपनी पीठ लगाकर हाथो को बांधा और उसे देखते हुए कहा,”मैं रातभर यहाँ खड़े होकर तुम्हे देख सकता हूँ अवनि”
अवनि ने सुना तो पृथ्वी की तरफ देखा , पृथ्वी एकटक अवनि को देखता रहा और कहा,”मैं जिंदगीभर तुम से ऐसे ही प्यार करूंगा,,,,,,,,,तुम 60 साल की हो जाओगी तब भी,,,,,,,,,,,,!!!”

कहते हुए पृथ्वी ने पहली रात के लिए सजाये गए बिस्तर की तरफ हाथ करके कहा,”ये सब , ये सब बस शादीशुदा जिंदगी का एक हिस्सा है। शादी की पहली रात इसलिए होती है ताकि दो लोग एक दूसरे को समझे , एक दूसरे को जाने पहचाने , एक दूसरे की भावनाये समझे और एक दूसरे का सम्मान करे,,,,,,!!!”
अवनि ने सुना तो उसके मन का डर और घबराहट एक पल में गायब हो गयी।
अवनि को खामोश देखकर पृथ्वी ने अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ाया तो अवनि ने बेझिझक पृथ्वी के हाथ को थामा और पृथ्वी अवनि को अपने करीब ले आया।

अवनि उसके सीने से आ लगी और इस वक्त वह उसकी धड़कनों को साफ सुन पा रही थी। पृथ्वी की छुअन में आज एक सुकून था। अवनि पलटी और अपनी पीठ पृथ्वी के सीने से लगा ली। उसका और पृथ्वी का चेहरा चाँद की तरफ था। उसने पृथ्वी के हाथो को अपने हाथो में थामा में और अपने हाथो के साथ उसके हाथो को अपनी कमर से लपेट लिया। दोनों के मन शांत थे और चेहरे पर सुकून के भाव थे। चाँद की रौशनी दोनों पर पड़ रही थी और दोनों प्यार भरी नजरो से चाँद को निहार रहे थे। खिड़की से आती ठंडी हवाएं दोनों को छूकर गुजर रही थी

कबूतर पक्षियों का एक जोड़ा सामने तार पर आकर बैठा और कुछ देर दोनों चाँद की रौशनी को निहारते रहे और फिर एक दूसरे के प्रेम आलिंगन में ऐसे डूबे जैसे उन्हें दुनिया की खबर ना हो। दोनों चाँद की रौशनी में नहाये थे। अवनि और पृथ्वी की नजर उन पर पड़ी। दो प्रेमियों के खास पलों को देखना अवनि को गवारा नहीं था इसलिए अवनि पृथ्वी की तरफ पलट गयी। अवनि की नजरे पृथ्वी से जा मिली और इस वक्त दोनों के दिल एक ही लय में धड़क रहे थे। पृथ्वी को देखते हुए अवनि ने धीरे से अपनी पलकें बंद कर ली।

पृथ्वी ने अपनी गर्दन को थोड़ा सा झुकाया और उसके होंठ अवनि के होंठो से जा मिले।
चाँद की दूधिया रौशनी अब उन दोनों पर पड़ रही थी और पक्षियों का जोड़ा वहा से उड़कर जा चुका था।

समाप्त  

( निराश मत होईये कहानी का ये सीजन यही खत्म होता है लेकिन बहुत से सवाल अभी बाकि है जिनका जवाब कहानी के अगले सीजन में मिलेगा और मुझे यकीन है इस कहानी का आखरी सीजन आप पाठको के दिलों में अपनी छाप जरूर छोड़ जाएगा। मिलेंगे जल्द ही तब तक के लिए पढ़ते रहिये क्योकि हर कहानी कुछ कहती है। )

संजना किरोड़ीवाल 

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Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal
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