Pasandida Aurat Season 2 – 102
अवनि और पृथ्वी की शादी पुरे विधि विधान से हो चुकी थी और सब इस शादी से खुश थे , सबसे ज्यादा खुश था पृथ्वी आखिर उसकी पसंदीदा औरत अब पुरे रस्मो रिवाज से उसकी पत्नी जो बन चुकी थी। पृथ्वी ने दादी को छेड़ा तो दादी ने उसे अवनि के नाम से छेड़ा। पृथ्वी ने सुना तो उठकर अंदर जाने लगा लेकिन तभी बड़ी मम्मी ने कहा,”अब तुम कहा चले ?”
“अब तो मेरी शादी हो चुकी है , अब तो मैं उस से मिल सकता हूँ ना ?”,पृथ्वी ने कहा
कमरे से बाहर आती नीलम भुआ ने जब सुना तो पृथ्वी के पास आकर कहा,”जी नहीं तुम उस से नहीं मिल सकते”
“क्यों नहीं मिल सकता ?”,पृथ्वी ने हैरानी से कहा
“क्योकि अभी शादी की कुछ रस्मे बाकी है उसके बाद ही तुम उस से मिल सकते हो , चलो जाओ चुपचाप दूसरे कमरे में जाओ”,नीलम भुआ ने पृथ्वी के अरमानो पर पानी फेरकर कहा
बेचारा पृथ्वी पिछले 5 दिन से अवनि के बात करने , उसके साथ वक्त बिताने के लिए तरस रहा था और उस पर घरवाले उसे और तंग कर रहे थे।
उसने मुँह बनाकर दादी की तरफ देखा तो दादी ने कहा,”सही तो कह रही है नीलम , अरे सिर्फ आज रात की बात है उसके बाद तो जिंदगीभर तुम्हे उसके साथ ही रहना है,,,,,,,चल जा जाकर आराम कर”
दादी की बात सुनकर पृथ्वी वहा से चला गया लेकिन कमरे में आकर भी उसको किसी ने आराम करने नहीं दिया। हिमांशु , लक्षित , मोहित हिमानी और घर के कुछ बच्चे भी उसी कमरे में चले आये और सब शोर गुल करने लगे। पृथ्वी कपडे बदलकर आया और जब सबको कमरे में देखा तो अपना सर पकड़ लिया। देर रात सब बाते करते रहे और उसके बाद सोने चले गए।
अवनि ने भी कपडे बदले और सब गहने उतारकर लता को दे दिए बस गले में पृथ्वी का पहनाया हुआ मंगलसूत्र था। लता ने सब सम्हालकर रखा और अवनि से आराम करने को कहा। घर आने के बाद से ही अवनि ने पृथ्वी को देखा तक नहीं था , बिस्तर पर लेटी वह पृथ्वी के बारे में ही सोच रही थी। उस पृथ्वी से बात करनी थी बहुत कुछ था जो अवनि के मन में चल रहा था और वह पृथ्वी से जानना चाहती थी लेकिन पृथ्वी इस वक्त उस से दूर था। यही सब सोचते सोचते अवनि को नींद आ गयी।
पृथ्वी के अपार्टमेंट में अवनि के सभी घरवालों के साथ सुरभि रुकी हुई थी। यहाँ किसी की आँखों में नींद नहीं थी बल्कि सब हॉल में बैठकर गप्पे मार रहे थे।
सभी अवनि और पृथ्वी की शादी से खुश थे। दीपिका की सगाई हो चुकी थी और जल्दी ही उसकी शादी होने वाली थी इसलिए सब उस बारे में भी बाते कर रहे थे। चारो ओर बस खुशिया ही खुशिया थी लेकिन बालकनी में अकेली खड़ी सुरभि कही खोयी हुयी थी। ये देखकर दीपिका उसके पास चली आयी और कहा,”क्या हुआ सुरभि दी ? आप यहाँ अकेली क्यों खड़ी है ? अवनि जीजी को मिस कर रही है क्या ?”
सुरभि मुस्कुराई और कहा,”सोच रही हूँ यहाँ तक पहुंचने के लिए उन दोनों को कितना कुछ देखना पड़ा है,,,,,,,,लेकिन खुश हूँ कि आज दोनों साथ है और किसी को उनसे कोई शिकायत नहीं है,,,,,,,,,!!!”
“सुरभि दीदी ! दोनों इतने अच्छे है कि किसी को उनसे शिकायत हो भी नहीं सकती,,,,,,,,,और फिर पृथ्वी जीजाजी जैसा हमसफ़र हो तो सब आसान हो जाता है,,,,,,,,,,,चलिए चलकर सो जाते है फिर रिसेप्शन भी तो है”,दीपिका ने कहा तो सुरभि उसके साथ चली आयी और कमरे में सोने चली गयी।
रवि जी का घर , पनवेल
सुबह से ही घर में चहल पहल और शोर शराबा चल रहा था। देर रात सब घर आये थे और सुबह जल्दी ही उठ गए क्योकि आज घर में बहुत सारे काम थे और
आज शाम अवनि और पृथ्वी का रिसेप्शन भी था। अवनि सुबह नहा धोकर तैयार हुई और साड़ी पहन ली क्योकि कुछ रस्मे होनी अभी बाकि थी तो वही पृथ्वी को भी जबरदस्ती उठाकर नहलाया गया। पृथ्वी भी जींस और सफेद शर्ट पहनकर हॉल में सबके बीच चला आया। रसोईया सबके लिए चाय नाश्ता बना रहा था। अवनि के घरवाले भी आ चुके थे और सुरभि तो सीधा अवनि के पास चली आयी।
उसे साड़ी में देखकर सुरभि को बहुत अच्छा लग रहा था , उस पर अवनि की माँग में भरा सिंदूर , गले में पड़ा मंगलसूत्र , हाथो में सुहाग की चुडिया देखकर सुरभि ने अवनि की बलाये ली और कहा,”हाह ! कब से मैं तुम्हे ऐसे देखना चाहती थी अवनि , आज जाकर मेरी वो ख्वाहिश पूरी हुई है,,,,,,,,तुम्हे किसी की नजर ना लगे”
अवनि मुस्कुराई और कहा,”मैं भी चाहती हूँ जल्दी ही तुमहू ऐसे देखू”
सुरभि ने सुना तो उदास हो गयी , कही न कही अनिकेत का दिया धोखा आज भी उसके चेहरे पर उदासी ले आता था।
अवनि ने देखा तो समझ गयी और सुरभि का गाल छूकर प्यार से कहा,”मैं जानती हूँ तुम क्या सोच रही हो ? पर मैं ये भी जानती हूँ कि महादेव ने तुम्हारी जिंदगी में उस से भी बेहतर कुछ लिखा है और देखना वो जल्दी तुम्हे मिलेगा”
सुरभि ने सुना तो इस बार सिद्धार्थ का चेहरा उसकी आँखों के सामने आ गया और साथ ही सिद्धार्थ की कही बात याद आयी “मैं जिंदगी भर तुम्हारा इंतजार करने के लिए तैयार हूँ”
सुरभि मुस्कुराई और अवनि के चेहरे को अपने हाथो में लेकर कहा,”जब आएगा तब देखा जाएगा अभी तो मैं तुम्हारे और पृथ्वी के लिए बहुत खुश हूँ,,,,,,,,,,,अच्छा तुमने पृथ्वी के लिए कोई तोहफा लिया,,,,,,,,,,,,,,!!!”
“कैसा तोहफा ?”,अवनि ने पूछा
सुरभि ने सुना तो थोड़ा धीमे स्वर में कहा,”अरे शादी की पहली रात में तुम उस कोई तो तोहफा दोगी ना,,,,,,,,,,,,,आई नो तुम्हारी फर्स्ट नाईट बहुत पहले ही हो चुकी है लेकिन अब दोबारा शादी हुई है तो तोहफा तो बनता है”
“हमारी फर्स्ट नाईट कभी हुई ही नहीं सुरभि,,,,,,,!!!”,अवनि ने धीरे से कहा तो सुरभि चौंकी
“क्या ? तुम सच कह रही हो अवनि ? तुमने उस बेचारे मासूम से लड़के को अभी तक खुद से दूर रखा है ,, ओह्ह्ह्ह अवनि तुम कितनी जालिम हो,,,,,,,,,,!! तुम्हे उसके साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था,,,,,,,,,,,,,खैर जाने दो मेरे पास तुम्हारे लिए एक बहुत ही अनमोल तोहफा है जो आज रात तुम पृथ्वी को दे सकती हो”,सुरभि ने पहले पृथ्वी के लिए अफ़सोस जताया और फिर खुश होकर कहा
“अनमोल तोहफा ?”,अवनि को कुछ समझ नहीं आया
“हाँ अनमोल तोहफा , आज रात रिसेप्शन के बाद मैं तुम्हे तुम्हारी अमानत सौंप दूंगी”,सुरभि ने कहा
अवनि नहीं समझ पायी सुरभि किस अमानत की बात कर रही है क्योकि वह पृथ्वी के लिए लिखे गए खत और उस तोहफे को भूल चुकी थी। अवनि सुरभि से कुछ पूछ पाती इस से पहले सीमा चाची , मीनाक्षी , दीपिका , सलोनी और अंशु नीलम भुआ के साथ कमरे में दाखिल हुई। सभी अवनि से मिलने आये थे इसलिए अवनि और सुरभि की बात बीच में ही रह गयी और सुरभि सबको अवनि के पास छोड़कर खुद पृथ्वी से मिलने चली गयी।
पृथ्वी बाहर बालकनी में खड़ा फोन पर किसी से बात कर रहा था। उसे अकेले देखकर सुरभि उसके पास आयी तब तक पृथ्वी बात कर चुका था और फोन काटकर जैसे ही पलटा सुरभि को वहा देखकर मुस्कुराया। सुरभि पृथ्वी के पास आयी और उसे छेड़ते हुए कहा,”क्या बात है जीजाजी शादी के बाद कुछ ज्यादा ही खुश नजर आ रहे है आप , आखिर इस ख़ुशी का राज क्या है ?”
पृथ्वी मुस्कुराया और कहा,”क्यों तुम्हे नहीं पता मेरी ख़ुशी का राज,,,,,,,,,और तुम सब लोग यहाँ क्या कर रहे हो ? शादी हो गयी ना तो जाओ सब अपने घर और मुझे मेरी बीवी के साथ अकेला छोड़ दो,,,,,,,,,,,,!!!”
“हाआआआआ ! कितने मतलबी आदमी हो तुम पृथ्वी , शादी होते ही बदल गए। हम सबको यहाँ से भगाना चाहते हो,,,,,,,,,वैसे भी आज रिसेप्शन है तो सॉरी आज रात तो हम लोग कही नहीं जायेंगे”,सुरभि ने इतराकर कहा
पृथ्वी ने सुना तो मन ही मन बड़बड़ाया,”मतलब आज भी मुझे अवनि से दूर रहना पड़ेगा , ये सब लोग मिलकर अवनि से मेरी शादी करवा रहे है या मुझे उस से दूर कर रहे है,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी को खोया देखकर सुरभि वहा से जाने लगी तो पृथ्वी ने उसकी कुर्ती का कोना पकड़कर उसे रोका और कहा,”ए सुनो”
सुरभि रुकी और पृथ्वी को घूरकर कहा,”अच्छा ए सुनो ?”
“अह्ह्ह मेरा मतलब सुनिए , सुरभि जी,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने शब्दों में चाशनी घोलकर कहा
“हम्म्म्म कहो”,सुरभि ने कहा
“तुम अभी अवनि से मिलकर आ रही हो ना ? तो मुझे बताओ ना वो कैसी लग रही है और उसने क्या पहना है ? वो खुश है ना , घबरा तो नहीं रही ? उसे बहुत ज्यादा सोचने की आदत है कही ये सब इतनी जल्दी होते देखकर वह टेंशन में तो नहीं है ? अरे मुझे घूर क्या रही हो बताओ ना , बताओ ना वो कैसी लग रही है ? उसने तुमसे कुछ कहा क्या ?”,पृथ्वी ने बेचैनी भरे स्वर में कहा
सुरभि मुस्कुराई और कहा,”बहुत सुन्दर लग रही है,,,,,,,,इतनी सुन्दर कि अगर तुम उसे देखोगे ना तो तुम्हे उस से फिर से प्यार हो जाएगा। शादी के बाद लड़कियों के चेहरे पर अलग ही नूर आ जाता है पृथ्वी , उसकी मांग में भरा सिंदूर , गले में पड़ा तुम्हारे नाम का मंगलसूत्र , हाथो में शादी का चूड़ा और शादी के बाद वाली वो शर्म-ओ-हया,,,,,,,बस तुम अपना दिल थामकर रखना”
पृथ्वी ने सुना तो उसकी आँखों के सामने अवनि का चेहरा आ गयाा। जैसा सुरभि ने बताया पृथ्वी वैसे ही कल्पना करने लगा। तभी अवनि सबके साथ कमरे से बाहर आयी और पृथ्वी की नजर उस पर पड़ी।
सुरभि पृथ्वी के ठीक सामने खड़ी थी इसलिए पृथ्वी ठीक से अवनि को देख नहीं पा रहा था। सुरभि नॉनस्टॉप पृथ्वी से कुछ कहे जा रही थी लेकिन पृथ्वी को तो जैसे कुछ सुन ही नहीं रहा था उसकी नजरें तो बस सामने थी और जब उसे सुरभि की वजह से अवनि ठीक से दिखाई नहीं दी तो उसने अपने हाथ को सुरभि की कनपटी से लगाया और अवनि की तरफ देखते हुए सुरभि को साइड कर दिया। बेचारी सुरभि हक्की बक्की रह गयी और पृथ्वी एकटक अवनि को देखते हुए उसकी तरफ बढ़ा।
पृथ्वी अवनि के सामने आ खड़ा हुआ , अवनि ने नजरे उठाकर पृथ्वी को देखा और शर्माकर नजरे वापस झुका ली। अब से पहले वह बेझिझक पृथ्वी के सामने आ जाया करती थी पर अब उसे शर्म आ रही थी। पृथ्वी अवनि से कुछ कहता या बात कर पाता इस से पहले दादी ने दोनों को रस्म के लिए बुला लिया और दोनों साथ साथ आ बैठे।
पृथ्वी और अवनि के साथ उनके घरवाले और कुछ मेहमान भी शामिल थे। खूब हंसी मजाक के बीच सब रस्मे हुयी और दादी ने कहा,”चलो भई ! सब रस्मे पूरी हुई”
पृथ्वी ने सुना तो एकदम से कहा,”अब तो मैं अवनि से बात कर सकता हूँ ना ?”
पृथ्वी की जल्दबाजी देखकर सब हंस पड़े और अवनि ने शर्माकर अपना सर झुका लिया तभी नीलम भुआ ने कहा,”अरे आई ! ऐसे कैसे रस्म खत्म हो गयी अभी एक रस्म बाकि है , उसके बिना महाराष्ट्र की शादी शादी नहीं मानी जाती”
“कौनसी रस्म ?”,दादी ने कहा
“अरे “पाण-तोड़” रस्म आई , वहिनी चलो चलो आँगन में इस रस्म की तैयारी करो”,नीलम भुआ ने चाची से तैयारी करने को कहा
पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुरा उठा क्योकि उसे इस रस्म के बारे में पता था वही उसके घरवाले और उसकी तरफ के मेहमान भी खुश हो गए लेकिन अवनि और अवनि के घरवालों को समझ नहीं आया ये “पाण-तोड़” रस्म क्या थी ? इस रस्म में घर के बड़े मर्दो का होना जरुरी नहीं था इसलिए लता जी ने अवनि के दोनों चाचा और अपने घर के रवि जी , बड़े पापा और चाचा के लिए नाश्ता लगवा दिया सभी वहा साथ बैठकर बाते करने लगे और बाकी सब आँगन में चले आये।
आमने सामने बैठने के लिए दो लकड़ी के पाटले रखे गए और बीच में एक बड़ा सा थाल था जिसमे पान , सुपारी , लौंग , नारियल के टुकड़े और कुछ सामान रखा था। अवनि ये सब पहली बार देख रही थी तो वही अवनि के बाकी घरवाले ये सब देखने के लिए एक्साइटेड थे। अवनि और पृथ्वी दोनों पाटलो पर एक दूसरे के आमने सामने आ बैठे। पृथ्वी मुस्कुराते हुए अवनि को देख रहा था और अवनि नजरे झुकाये बैठी थी।
अब चूँकि नीलम भुआ घर की बेटी थी और बड़ी भी इसलिए वह इस रस्म के बारे में बताने आगे आयी और कहने लगी,”पृथ्वी तुम्हे सामने पड़े थाल में रखे सामान से कोई एक चीज उठाकर अपने होंठो के बीच रखनी है और हमारी अवनि उसे निकालेगी , तुम पान रख सकते हो चाहो तो नारियल भी रख सकते हो ये तुम पर है”
पृथ्वी ने सुना तो पान की तरफ हाथ बढ़ाया लेकिन तभी नीलम भुआ की बात सुनकर सलोनी ने तपाक से बोल पड़ी,”अरे ये तो बहुत इजी है,,,,,,,,,हमारी जीजी तो दो सेकेण्ड में ये कर देगी”
नीलम भुआ ने सुना तो सलोनी की तरफ देखा और मुस्कुरा कर कहा,”अरे बेटा पहले पूरी बात तो सुन लो,,,,,,,,,,,,अवनि को इसमें अपने हाथो का इस्तेमाल नहीं करना है बल्कि अपने मुँह से उसे निकालना है”
अवनि ने सुना तो उसका दिल धड़कने लगा और यहाँ उसने पहली बार पृथ्वी की शैतानी देखी , पृथ्वी जो कि रस्म के लिए पहले पान उठा रहा था अब उसने वह छोड़कर एक लौंग उठाया और मुस्कुराया। सुरभि ने सुना तो अवनि की तरफ देखकर मुस्कुराई और बाकी घरवाले भी मुस्कुरा उठे क्योकि वे तो ये सब पहली बार देख रहे थे।
सलोनी ने सुना तो हैरानी से कहा,”क्या भुआ ! ऐसे तो उनके बीच किस हो जायेगा”
“धत पगली ! ये रस्म होती है , इस रस्म का उद्देश्य दूल्हा-दुल्हन के बीच की झिझक, शरम और असहजता को दूर करना होता है। चलो चलो पृथ्वी शुरू करो अभी बहुत काम बाकी है”,नीलम भुआ ने सलोनी को समझाया और फिर पृथ्वी अवनि से रस्म शुरू करने को कहा।
पृथ्वी के लौंग उठाने के बाद साक्षी ने उस थाल को दोनों के बीच से उठा लिया और दोनों एक दूसरे की तरफ खिसककर बैठ गए। अवनि तो रस्म के बारे में सुनकर ही शर्म से सिमटी जा थी।
पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखते हुए लौंग को अपने सफ़ेद चमकते दाँतो के बीच रख लिया। अवनि का चेहरा शर्म से लाल हुआ जा रहा था लेकिन रस्म है तो निभानी पड़ेगी इसलिए उसने धीरे से अपने होंठो को पृथ्वी के होंठो की तरफ बढ़ाया और लौंग निकाल लिया लेकिन ऐसा करते हुए पृथ्वी के होंठो ने उसके होंठो को छू लिया जिसका अहसास अवनि को था। पृथ्वी का दिल धड़क उठा आज पहली बार उसके होंठो ने अवनि के होंठो को छुआ था और जैसे ही अवनि पृथ्वी से दूर हटी पृथ्वी ने आँखे बंद कर ली क्योकि वह उस अहसास को थोड़ी देर और जीना चाहता था।
( सब अच्छा चल रहा है तो एक काम करते है वो दिल धड़काने वाले सवाल को जाने देते है )
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संजना किरोड़ीवाल
