Pasandida Aurat Season 2 – 100
गेस्ट हॉउस के लॉन में बहुत ही प्यारा और आलिशान स्टेज लगा हुआ था। स्टेज के ठीक सामने शादी में आये मेहमानो के लिए सोफे और कुर्सिया लगवाई हुई थी। पूरा गार्डन लाइट और रौशनी से चमचमा रहा था। पृथ्वी के सभी घरवाले , सोसायटी के लोग , रिश्तेदार सब वहा मौजूद थे। नकुल , रिया , लक्षित ,मोहित और पृथ्वी के बाकि सब दोस्त स्टेज पर खड़े थे। सजा धजा पृथ्वी स्टेज पर खड़ा उनसे बाते कर रहा था लेकिन उसका ध्यान बातो में कम और उस रास्ते पर ज्यादा था जहा से चलकर अवनि आने वाली थी।
पृथ्वी बार बार अपनी कलाई पर बंधी घडी में समय देखता और सामने देखता , ये वही घडी थी जो अवनि ने उसे तोहफे में दी थी। बेचैनी उसके चेहरे पर साफ नजर आ रही थी ये देखकर नकुल उसके पास आया और उसके कंधे पर हाथ रहकर धीरे से कहा,”आ जाएगी भाई थोड़ा सब्र रख”
पृथ्वी नकुल की तरफ पलटा और मुस्कुरा कर कहा,”पता नहीं यार क्यों ऐसे अजीब सी ख़ुशी और घबराहट हो रही है। सोचा नहीं था इतनी जल्दी सब मान जायेंगे और,,,,,,,,,,,,,!!”
कहते हुए पृथ्वी के होंठ काँप रहे थे ये देखकर नकुल ने कहा,”और , और ये सब भूल जा आज से तू अवनि के साथ नयी जिंदगी शुरू करने वाला है उसके बारे में सोच,,,,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी नकुल से बात कर ही रहा था कि तभी जयदीप पत्नी रीना के साथ वहा आ पहुंचा। रीना पृथ्वी के घरवालों से पहले ही मिल चुकी थी इसलिए सीधा लता जी और बाकि सब की तरफ चली आयी। जयदीप मुस्कुराते हुए स्टेज पर चला आया और पृथ्वी के सामने आकर कहा,”शेरवानी अच्छी लग रही है तुम पर”
“आपने आने में इतनी देर क्यों कर दी ?”,पृथ्वी ने कहा
“अरे हमारी मैडम जी , उनको तैयार होने में कितना समय लगता है जानते हो ना तुम बस उनकी वजह से ही देर हुई लेकिन चिंता मत करो मैं अब कल सुबह तक यही हूँ , अवनि को बहन कहा है तो उसे विदा करके ही घर जाऊंगा”,जयदीप ने कहा
पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुराया और एक बार फिर उस रास्ते की तरफ देखा जहा से अवनि आने वाली थी। पृथ्वी ने देखा नीचे सब घरवाले और मेहमान है लेकिन दादी कही नजर नहीं आ रही। उसने लक्षित को अपने पास बुलाया और धीरे से कहा,”दादी कहा है ,कही नजर नहीं आ रही ?”
“मैं देखकर आता हूँ”,लक्षित ने कहा और वहा से चला गया।
कुछ देर बाद पृथ्वी के ऑफिस से अंकित , मनीष , कशिश और तान्या भी चले आये। सब आकर पृथ्वी से मिले और फिर नीचे जाकर बैठ गए। जयदीप पृथ्वी के साथ स्टेज पर ही था। उसने देखा पृथ्वी आज बहुत खुश है तो उसने पृथ्वी से भरत के बारे में बात नहीं की।
कुछ देर बाद लॉन में कोई बहुत ही प्यारी सी धुन बजने लगी , लाईटे हल्की हो गयी। पृथ्वी ने सामने देखा और इस बार उसकी धड़कनो ने उसका साथ छोड़ दिया। वह जहा खड़ा था वही खड़ा रह गया और अपलक सामने से आती अवनि को देखता ही रह गया। लाल रंग की पोशाक पहने , गहनों से लदी , हल्का घूंघट निकाले अवनि दादी के साथ चली आ रही थी। दादी अवनि का हाथ थामे उस के साथ चल रही थी जबकि नीलम भुआ , हिमानी ,साक्षी और कुछ और मेहमान अवनि के पीछे ,
वहा मौजूद कई लोगो को हैरानी भी हुई कि अवनि ने घूंघट क्यों निकाला है जबकि ये अवनि के घर की परम्परा थी जिसे अवनि राजस्थान में ना होकर भी निभा रही थी। पृथ्वी एकटक अवनि को देखता रहा और वह पलकें झुकाये पृथ्वी की तरफ बढ़ती रही। आज से पहले पृथ्वी ने अवनि को ना जाने कितनी ही बार देखा होगा लेकिन आज से ज्यादा खूबसूरत और दिलकश मंजर उसने पहले कभी नहीं देखा था। एक तरफ बेइंहा मोहब्बत थी तो दूसरी तरफ था शर्म-ओ-हया में लिपटा इंतजार,,,,,,,,,,,,,,!!
जयदीप ने देखा पृथ्वी अवनि को देखकर खो चुका है तो उन्होंने आकर पृथ्वी के कंधो पर अपनी बाँह रखी और अवनि को देखकर मुस्कुरा दिया। पृथ्वी का दिल धड़क रहा था , होंठ काँप रहे थे और आँखों में हलकी नमी थी। अवनि के साथ आये सभी लोग नीचे रुक गए और दादी अवनि का हाथ थामे उसे लेकर स्टेज पर चली आयी। साक्षी और नीलम भुआ भुआ भी ऊपर चली आयी। पृथ्वी अवनि से कुछ दूर उसके सामने खड़ा था। अवनि ने पलकें उठाकर पृथ्वी को देखा और जैसे ही अवनि की नजरे पृथ्वी की नजरों से मिली पृथ्वी ने एक ठंडी आह भरी और उसका दाहिना हाथ सीने के बाँयी तरफ चला गया।
स्टेज पर खड़े पृथ्वी के सभी दोस्त और मेहमान एक तरफ चले आये बस नकुल पृथ्वी के साथ खड़ा रहा। अवनि ने दादी की तरफ देखा तो दादी ने अवनि से पृथ्वी की तरफ जाने का इशारा किया ये देखकर पृथ्वी ने जैसे अवनि की तरफ जाने के लिए पैर उठाया नकुल ने उसका हाथ पकड़कर उसे रोक लिया और धीरे से कहा,”हर बार तुम उसकी तरफ गए हो पृथ्वी ! आज उसे आने दो”
पृथ्वी ने सुना तो रुक गया। अवनि ने अपने पैरों में पहनी हील्स को उतार दिया। हिमानी ने वरमाला उसे थमा दी और मुस्कुराते हुए जाने का इशारा किया। पृथ्वी की वरमाला नकुल के हाथो में थी तो उसने उसे थमा दी। अवनि पृथ्वी की तरफ बढ़ी , नीचे बैठे सभी लोगो की नजरे और हसंते मुस्कुराते चेहरे अवनि और पृथ्वी की ओर थे।
“उन्होंने अपने हील्स क्यों निकाल दिए ?”,रिया ने पास खड़ी साक्षी से पूछा
“पता नहीं , हो सकता है अवनि के यहाँ ऐसा कोई रिवाज हो”,साक्षी ने कहा क्योकि उसे भी नहीं पता था कि अवनि ने हील्स क्यों निकाले तभी पास खड़ा जयदीप मुस्कुराया और कहा,”उसने अपने हील्स इसलिए निकाले क्योकि वह पृथ्वी से ऊपर नहीं जाना चाहती”
जयदीप की बात सुनकर वहा खड़े सभी लोग मुस्कुराये बिना ना रह सके और जयदीप प्यारभरी नजरो से पृथ्वी और अवनि को देखने लगा।
जैसे जैसे अवनि पृथ्वी की तरफ बढ़ रही थी वैसे वैसे पृथ्वी की धड़कने बढ़ती जा रही थी। उसके हाथ काँप रहे थे और वह बाहर से खुद को शांत दिखाने की कोशिश कर रहा था। अवनि पृथ्वी के सामने आ खड़ी हुई। पृथ्वी के सामने आने से पहले अवनि ने घूंघट हटा दिया था और ओढ़नी को अपने सर पर रख लिया था , पृथ्वी एकटक उसे देखने लगा , लाल रंग की पोशाक , सलीके से लगा दुपट्टा , आँखों में डला गहरा काजल , होंठो पर लगी लिपस्टिक , नाक में पहनी बड़ी सी नथ , ललाट पर भोंहों से थोड़ा ऊपर लगी लाल बिंदी , माथे पर लगा शीशफूल ,
हाथो में बाजूबंद और चूड़ा ,ठुड्डी पर बना तिल उसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा रहा था और उस पर शर्म की लाली उसके गालों को और गुलाबी किये जा रही थी। अवनि ने अपनी बड़ी बड़ी पलकें उठाकर सामने खड़े पृथ्वी को देखा , पृथ्वी को पता ही नहीं चला कि कब अवनि को देखते हुए उसकी आँखों में भरे आँसू गालों पर लुढ़क आये। अवनि ने अपना हाथ बढाकर पृथ्वी के आँसुओ को पोछा और धीरे से ना में गर्दन हिला दी तो पृथ्वी खुद को रोक नहीं पाया और पलट गया।
कुछ पल के लिए वह इतना भावुक हो गया कि अपनी आँखों पर अपनी बाजु लगाकर अपने आँसुओ को छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगा। यहाँ तक पहुंचने के लिए वह जिन तकलीफो से गुजरा था वह सब एकदम से उसे याद आ गए। अवनि ने देखा तो उसका दिल पीड़ा से भर गया लेकिन आज उसकी आँखों में आँसू नहीं थे बल्कि सुकून था। दूर खड़े जयदीप ने देखा तो वह पृथ्वी के पास आया उसे शांत किया और अपने जेब से रुमाल निकालकर उसकी आँखे साफ की और उसकी बाँहे थामकर उसे कुछ कहा और हिम्मत दी।
पृथ्वी ने हामी में गर्दन हिलायी और एक गहरी साँस लेकर अपने होंठो में पहले वाली मुस्कान ले आया और यकीनन ये मुस्कान पहले से भी जायदा दिलकश थी क्योकि इस बार सिर्फ उसके होंठो नहीं बल्कि उसकी आँखे भी मुस्कुरा रही थी। जयदीप ने नीचे हैरान परेशान होते पृथ्वी के घरवालों और मेहमानो को देखकर सब ठीक है का इशारा किया और वापस दादी की तरफ चला आया।
“ए ! तुम दोनों के बीच कुछ चल तो नहीं रहा ?”,दादी ने जयदीप से पूछा
“अरे क्या आई आप भी,,,,,,,,,,,!!!”,जयदीप ने झेंपते हुए कहा और दूसरी तरफ चला गया। वैसे दादी का सवाल भी सही था क्योकि इतने लोगो में जयदीप ही था जो पृथ्वी के आँसू पोछने गया था।
पृथ्वी एक बार फिर अवनि के सामने था। नकुल को अपने साथ खड़े देखकर पृथ्वी ने उसे वहा से जाने का इशारा किया लेकिन नकुल ने नजर अंदाज कर दिया और कहा,”जो कहना है मेरे सामने कह ना”
पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा और बड़े प्यार से कहा,”अवनि ! मुझसे शादी करोगी ?”
अवनि ने सुना तो हलके से मुस्कुराई और हामी में गर्दन हिला दी ये देखकर नकुल को वो पल याद आ गया जब पृथ्वी ने उस से कहा था “मैं बस चला तो मैं शादी वाले दिन भी उस से पूछूंगा कि अवनि क्या तुम मुझसे शादी करोगी”
आज पृथ्वी की कही बात को सार्थक होते देखकर नकुल मुस्कुराने लगा।
“स्माइल क्या कर रहा है जा ना”,पृथ्वी ने नकुल को धक्का देकर कहा
“सही है भाई ! लड़की मिल गयी तो भाई को भूल गया,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,नकुल ने बाकि सबकी तरफ जाते हुए कहा तो पृथ्वी मुस्कुरा उठा।
“अरे अब एक दूसरे की शक्ल क्या देख रहे हो ? वरमाला पहनाओ”,दादी ने कहा तो अवनि और पृथ्वी ने एक दूसरे से नजरे हटाई। अब चूँकि पहले वरमाला लड़की पहनाती है इसलिए अवनि ने अपने हाथो में पकड़ी माला को सही किया लेकिन पृथ्वी उस से लंबा पहनाये तो कैसे पहनाये ? वही पृथ्वी के भाई और पृथ्वी के दोस्त चिल्लाने लगे,”झुकना नहीं है , झुकना नहीं है”
पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुराया और एक नजर अवनि को देखा। सबने कह तो दिया कि झुकना नहीं है लेकिन पृथ्वी के सामने खड़ी थी उसकी पसंदीदा औरत , उसके लिए तो पृथ्वी पूरी जिंदगी झुकने को तैयार था।
उसने एक नजर सबको देखा और फिर अवनि के ठीक सामने घुटनो के बल आ बैठा। अवनि ने देखा तो धीरे से कहा,”आपको झुकना नहीं चाहिए था”
पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा और कहा,”अगर तुम मेरे लिए अपने हील्स उतारकर आ सकती हो तो मैं भी तुम्हारे लिए झुक सकता हूँ अवनि,,,,,,,,,,,,,और सिर्फ अब नहीं मैं जिंदगीभर तुम्हारे सामने झुकने के लिए तैयार हूँ”
अवनि ने सुना तो एकटक पृथ्वी को देखने लगी और मन ही मन सोचने लगी आखिर कैसे , कैसे कोई उस से इतनी मोहब्बत कर सकता है ?
पृथ्वी ने अवनि से वरमाला पहनाने का इशारा किया , अवनि ने जैसे ही वरमाला पहनाने के लिए अपने हाथ बढाए एक कड़क और तेज आवाज सब कानों में पड़ी
“ठहरो ! ये शादी नहीं हो सकती”
अवनि के हाथ रुक गए और चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये। पृथ्वी ने सुना तो वह भी उठ खड़ा हुआ और अवनि के बगल में चला आया। दोनों ने सामने देखा और बाकि सबकी गर्दन भी एंट्री की तरफ घूम गयी।
कुछ लोग चलकर स्टेज की तरफ आये और जैसे ही अवनि की नजर उनपर पड़ी उसकी आँखों में आँसू भर आये और दिल धड़कने लगा। उसने बगल में खड़े पृथ्वी का हाथ थाम लिया। अवनि के हाथ का कम्पन महसूस कर पृथ्वी ने उसके हाथ को कसकर थाम लिया जैसे वह अवनि को ये अहसास दिला रहा हो कि “डरो मत ! मैं तुम्हारे साथ हूँ”
स्टेज के सामने कोई और नहीं बल्कि अवनि का पूरा परिवार खड़ा था , हाँ वही परिवार जिसने अवनि से हमेशा हमेशा के लिए रिश्ता तोड़ दिया था। सबसे आगे कौशल चाचा खड़े थे और उनके पीछे मयंक चाचा , सीमा और मीनाक्षी चाची ,दीपिका , सलोनी , कार्तिक , नितिन और अंशु के साथ साथ अवनि की भुआ जी भी खड़ी थी। अवनि को नहीं पता था ये सब यहाँ क्यों थे उसे सब ये शादी रोकने आये है जबकि अवनि के बगल में खड़ा पृथ्वी मंद मंद मुस्कुरा रहा था।
रवि ने एक साथ इतने अनजान लोगो को देखा तो उठकर आये और कौशल चाचा से कहा,”कौन है आप लोग और ये क्यों नहीं हो सकती ये शादी ?”
कौशल चाचा ने रवि जी को पहले कठोर भाव से देखा और फिर मुस्कुरा कर कहा,”अवनि के मायके वालो के आशीर्वाद के बिना ये शादी कैसे हो सकती है ?”
रवि जी पहले तो कुछ नहीं समझे लेकिन बाद में सबके हँसते मुस्कुराते चेहरे देखकर कहा,”आप सब अवनि के घरवाले है ?”
मयंक चाचा आगे आये और कहा,”जी हाँ ! बस आने में थोड़ी देर हो गयी,,,,,,,,,,,,,,,,या यू कह लीजिये अपनी भूल का अहसास होने में देर हो गयी”
अवनि ने जब सुना कि सब घरवाले ये शादी रोकने नहीं बल्कि उसकी में शामिल होने आये है तो उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा उसने नम आँखों के साथ खुश होकर पृथ्वी की तरफ देखा तो पृथ्वी ने बड़े प्यार से कहा,”मैंने कहा था न अवनि मैं सब ठीक कर दूंगा ,ये मेरी तरफ से तुम्हे शादी का तोहफा,,,,,,,,,!!!”
अवनि ने सुना तो उसकी आँखों में भरे आँसू बह गए। वह पृथ्वी के कदमो में आ बैठी और अपने हाथो से उसके दोनों पैरो को छू लिया ,, पृथ्वी ने उसके लिए जो किया उसके सामने ये शायद कुछ भी नहीं था। अवनि का यू सबके सामने पैर छूना पृथ्वी को अच्छा नहीं लग रहा था उसने अवनि को उठाया और कहा,”ये करके मुझे पूजनीय मत बनाओ अवनि,,,,,,,,,,मैंने जो किया तुम्हारी ख़ुशी के लिए लिया,,,,,,,,,,,,,,मैं तुम से प्यार करता हूँ , बहुत प्यार करता हूँ और तुम्हारी ख़ुशी के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ,,,,,,,,,जाओ जाकर सब मिलो”
अवनि ने सुना तो हाथ में पकड़ी वरमाला पृथ्वी को थमा दी और नीचे अपने घरवालों के पास चली आयी। सबने अवनि से अपने किये की माफ़ी मांगी और अवनि ने सबको माफ़ भी कर दिया। सुरभि के सामने आकर अवनि की मुस्कराहट गायब हो गयी और उसने कहा,”ये कोई आने का वक्त है ?”
“अरे यार वो ट्रेन लेट हो गयी और फिर इन सबको भी तो लेकर आना था’,सुरभि ने कहा तो अवनि ने आगे बढ़कर उसे गले लगा लिया। सच कहा था पृथ्वी ने कि आज का दिन अवनि की जिंदगी का सबसे खूबसूरत दिन होने वाला है , वही हुआ। उसका पूरा परिवार उसके साथ था , उसकी सबसे अच्छी दोस्त उसके साथ थी , उस से बेइंतहा मोहब्बत करने वाला शख्स उसके सामने था जिसके साथ आज वह नयी जिंदगी शुरू करने जा रही थी।
पृथ्वी के सभी घरवाले ख़ुशी ख़ुशी अवनि के घरवालों से मिले। दादी भी स्टेज से नीचे चली आयी और सबसे मिली तो कौशल और मयंक चाचा ने आकर उनके पैर छुए। सबसे मिलने के बाद अवनि के एक तरफ कौशल चाचा खड़े हुए और दूसरी तरफ मयंक चाचा आ खड़े हुए। अवनि के बाकि सब घरवाले उन्हें पीछे चले आये और सब अवनि को साथ लेकर पृथ्वी की तरफ बढ़ गए।
पृथ्वी मुस्कुराते हुए अवनि को देखता रहा और अवनि भी प्यारभरी नजरो से पृथ्वी को देखते हुए उसकी तरफ बढ़ती रही। जयदीप , नकुल और स्टेज पर खड़े बाकि सब लोग पृथ्वी की तरफ चले आये। अवनि और पृथ्वी ने एक दूसरे को वरमाला पहनाई। लॉन तालियों से गूंज रहा था। वरमाला के बाद सबने अवनि और पृथ्वी को आशीर्वाद दिया और उनके साथ तस्वीरें खिंचवाई।
आशीर्वाद समारोह खत्म होने के बाद आगे की रस्मो के लिए अवनि और पृथ्वी को अंदर चलने को कहा। अवनि ने जो हील्स उतारे थे वे अब स्टेज पर नहीं थे शायद इधर उधर कही गिर गए थे। हर कोई अवनि को अपनी चप्पल देने की बात कर रहा था पृथ्वी ने देखा तो अवनि की तरफ आया और सबके सामने उसे गोद में उठाकर स्टेज से नीचे उतर गया।
हर कोई पृथ्वी और अवनि को ही देख रहा था। दादी मुस्कुरा रही थी तो वही कुछ लोग खुश हो रहे थे और कुछ मुस्कुरा बेचारे रवि जी इधर उधर देखने लगे। अवनि को अपनी गोद में उठाये पृथ्वी सबके बीच से निकल गया और अवनि को याद आया वो पल जब पृथ्वी ने उस से कहा था “देखना मैडम जी ! एक दिन सबके सामने आपको गोद मे उठाकर ले जाऊंगा वो भी पुरे हक़ से”
पृथ्वी की कही बात याद करके अवनि प्यारभरी नजरो से उसके चेहरे की तरफ देखने लगी।
आज कोई सवाल नहीं बस पढ़िए और मुस्कुराईये ?
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संजना किरोड़ीवाल
