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Pasandida Aurat Season 2 – 10

Pasandida Aurat Season 2 – 10

Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

जयदीप के सामने खड़ा पृथ्वी उस से नजरे चुराते हुए साइड में देख रहा था ये देखकर जयदीप ने अवनि से कहा,”क्या ये तुमने अवनि को सिखाया है ?”
“हाँ ! क्यों कोई प्रॉब्लम है ?”,पृथ्वी ने कहा
“अह्ह्ह नहीं बिल्कुल नहीं,,,,,,,तुम लोग यहाँ क्यों खड़े हो चलो बिलिंग करवाते है”,कहते हुए जयदीप पृथ्वी के बगल में चला आया और अवनि से आगे चलने का इशारा किया।

अवनि ट्रॉली लेकर आगे बढ़ गयी और जयदीप पृथ्वी के बगल में चलने लगा तो पृथ्वी ने धीमे स्वर में कहा,”आप क्यों कबाब में हड्डी बन रहे है क्या आपको कुछ और सामान नहीं खरीदना ?”
“मैं सब सामान ले चूका हूँ पर तुम कुछ भूल रहे हो”,जयदीप ने पृथ्वी की तरफ देखकर कहा
पृथ्वी ने जयदीप की तरफ देखकर आँखों ही आँखों में सवाल किया तो जयदीप ने कहा,”तुम्हारी नयी नयी शादी हुई है हनीमून पर जाने के बजाय तुम अवनि को डी-मार्ट घुमा रहे हो , तुम इतने अनरोमांटिक कैसे हो सकते हो मिस्टर उपाध्याय ?”

पृथ्वी ने सुना तो नजर बिलिंग काऊंटर के पास अपनी बारी का इंतजार करती अवनि पर चली गयी। अब पृथ्वी जयदीप को कैसे बताये कि उसकी और अवनि की शादी तो हुई है लेकिन शादीशुदा जिंदगी तो अभी ठीक से शुरू भी नहीं हुई है। पृथ्वी को खोया देखकर जयदीप ने कहा,”ओह्ह्ह तुम कही ये तो नहीं सोच रहे न कि तुम्हे ऑफिस से छुट्टी मिलेगी या नहीं ? अगर तुम्हारा हनीमून पर जाने का प्लान हो तो मैं तुम्हारी एक हफ्ते की छुट्टी अप्रूव कर सकता हूँ”

“फ़िलहाल मैं कही नहीं जा रहा और परसो से मैं ऑफिस आ जाऊंगा”,पृथ्वी ने कहा
“ओह्ह्ह्ह पृथ्वी तुम कितने कठोर हो By the way तुम्हारे घरवालों की तरफ से कोई पॉजिटिव रिस्पॉन्स आया ?”,जयदीप ने पृथ्वी के साथ आगे बढ़ते हुए कहा
“आ जाएगा,,,,,,,,थोड़ा टाइम लगेगा पर आ जाएगा,,,,,,,,मुझे यकीन है”,पृथ्वी ने बुझे स्वर में कहा
अवनि बिल बनवा चुकी थी और अकेले ही सब सामान बैग में जमा रही थी ये देखकर पृथ्वी उसकी तरफ बढ़ गया और उसकी मदद करने लगा।

दोनों को साथ देखकर जयदीप ने मन ही मन कहा,”हे बप्पा ! इन दोनों की जिंदगी की उलझन जल्दी ही सुलझा देना”
पृथ्वी ने सब सामान लिया और अवनि के साथ आगे बढ़ गया। जाते जाते उसने पलटकर जयदीप को देखा और अपना हाथ हिला दिया।

पृथ्वी अवनि के साथ मार्ट से बाहर आया। मार्ट के सामने ही सब्जी और फलों की दुकाने थे पृथ्वी अवनि को साथ लेकर वहा चला आया अवनि से अपनी पसंद से सब्जी और फल लेने को कहा। अवनि छांटकर सब्जिया लेने लगी पृथ्वी बैग हाथो में उठाये यहाँ वहा देख रहा था तभी उसकी नजर पास ही खड़ी बाइक पर चली गयी। पृथ्वी ने देखा ये उसकी ड्रीम बाइक थी जिसे पिछले 2 साल से वह लेने की सोच रहा था लेकिन हर बार कुछ न कुछ काम निकल आता और पृथ्वी की सपनो की बाइक फिर से एक सपना बनकर रह जाती।

पृथ्वी एकटक उस बाइक को देखता रहा उसे पता ही नहीं चला कब अवनि उसके बगल में आ खड़ी हुई , उसकी तंद्रा तब टूटी जब अवनि ने कहा,”तुम्हे बाइक बहुत पसंद है ना ?”
“अह्ह्ह्ह नहीं नहीं मैं तो बस ऐसे ही देख रहा इसका मॉडल अच्छा है। आपने सब ले लिया ?”,पृथ्वी ने अवनि की तरफ पलटकर कहा
“हम्म्म,,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा

“ठीक है फिर चलते है,,,,,,,,टेक्सी”,पृथ्वी ने अवनि से कहा और फिर सामने से गुजरती टैक्सी में बैठे ड्राइवर को आवाज दी। अवनि और पृथ्वी दोनों उस तरफ बढे और चलते चलते पृथ्वी ने एक बार फिर पलटकर उस बाइक को देखा और आगे बढ़ गया।

अवनि और पृथ्वी घर आये तब तक अँधेरा हो चुका था। लिफ्ट में आकर पृथ्वी अवनि से कुछ दूर खड़ा हो गया और 7वे माले पर जाने के लिए बटन दबा दिया। जब अवनि पृथ्वी से दूर थी तब पृथ्वी के पास अवनि को कहने के लिए बहुत कुछ होता था लेकिन अब जब अवनि साथ थी तो पृथ्वी को समझ नहीं आ रहा था वह अवनि से क्या बात करे ? लिफ्ट ऊपर आकर रुकी पृथ्वी और अवनि अपने फ्लेट के सामने चले आये और पृथ्वी दरवाजा खोलने लगा।

पृथ्वी के फ्लेट के सामने रहने वाली महिला ने दरवाजा खोला और किसी काम से बाहर आयी उसने जब पृथ्वी के साथ अवनि को देखा तो अवनि की तरफ देखकर कहा,”हेलो,,,,,,!!!”
अवनि जो कि पृथ्वी के सिखाये सबक को अब तक अच्छे से रट चुकी थी वह उस महिला की तरफ पलटी और मुस्कुरा कर कहा,””पृथ्वी माझा नवरा आहे आणि मी त्याच्यावर खूप प्रेम करते, मी त्याला कधीही सोडणार नाही”

पृथ्वी ने सुना तो पहले अवनि की तरफ देखा और फिर महिला की तरफ देखकर शर्माने लगा। महिला ने सुना तो मुस्कुराई और पृथ्वी से कहा,”तुमची बायको खूप गोड आहे ( तुम्हारी घरवाली बहुत प्यारी है )”
“हम्म्म Thankyou”,पृथ्वी ने कहा और फिर अवनि के साथ अंदर चला आया
अवनि ने जब महिला के मुँह से बायको सुना तो उलझन में पड़ गयी , अवनि इस शब्द का मतलब जानती थी इसलिए अंदर आते ही पृथ्वी से कहा,”उन्हें कैसे पता मैं तुम्हारी पत्नी हूँ ?”

पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा और मन ही मन खुद से कहा,”पागल लड़की अभी तुमने ही तो उन्हें बताया कि पृथ्वी तुम्हारा पति है”
“पृथ्वी , पृथ्वी,,,,,,,,,!!”,अवनि ने पृथ्वी के सामने हाथ हिलाकर कहा तो पृथ्वी की तंद्रा टूटी और उसने कहा,”हां ! हाँ वो आज से पहले मेरे फ्लेट में कोई लड़की नहीं आयी न इसलिए उन्होंने अंदाजा लगा लिया,,,,,,,!!!”
“ओह्ह्ह,,,,,!!”,अवनि ने कहा
“आप थक गयी होंगी आप बैठिये मैं ये अंदर रख देता हूँ”,पृथ्वी ने अवनि के हाथो से बैग लेकर कहा और किचन की तरफ बढ़ गया

अवनि की नजर हॉल में लगी घडी पर पड़ी तो उसने पाया शाम के 7 बज रहे है और सूर्यास्त हो चूका है। वह वाशबेसिन के सामने चली आयी और हाथ मुँह धोकर हॉल में लगे मंदिर के सामने सामने चली आयी। अवनि ने अपने गले में पड़ा दुपट्टा निकालकर सर पर ओढ़ लिया और मंदिर में दीपक जलाने लगी। पृथ्वी ने किचन में सामान रखा। किचन के सामान में वह अपने लिए एक बड़ा पैकेट चिप्स भी लेकर आया था इसलिए उसने उसे फाड़ा और खाते हुए बाहर आया तो देखा

हॉल में मंदिर के सामने खड़ी अवनि हाथ जोड़े आँखे मूँदे पूजा कर रही है। चिप्स का टुकड़ा पृथ्वी के हाथ में ही रह गया और वह एकटक अवनि को  देखने लगा। इस वक्त वह कितनी मासूम नजर आ रही थी ये सिर्फ पृथ्वी ही जानता था। वह खोया हुआ सा उसे देखते हुए उस की तरफ बढ़ने लगा। अवनि के होंठ धीरे धीरे कुछ बुदबुदा रहे थे और उसके चेहरे पर एक सुकून था जो दीपक की रौशनी में और भी साफ नजर आ रहा था। पृथ्वी अवनि से कुछ दूर खड़ा हो गया और प्यार से उसे देखने लगा।

कुछ देर बाद अवनि ने जैसे ही आँखे खोली भगवान के साथ साथ उसे पृथ्वी भी नजर आया।
पृथ्वी ने देखा अवनि पूजा कर चुकी है तो उसने हाथ में पकड़ा चिप्स का पैकेट अवनि की तरफ बढ़ा दिया अवनि ने ना में गर्दन हिलायी और कहा,”मैं अपने लिए
चाय बनाने जा रही हूँ तुम लोगे ?”

मैं आपकी हेल्प कर देता हूँ”,पृथ्वी ने अवनि के पीछे आते हुए कहा तो अवनि एकदम से पलट गयी और पृथ्वी अवनि से टकराते टकराते बचा साथ ही हाथ में पकडे पैकेट से चिप्स भी बाहर आ गिरे ये देखकर अवनि ने कहा,”तुम इतने बेसब्र क्यों हो ?”
“जिस मर्द सामने उसकी पसंदीदा औरत हो वह शांत कैसे रह सकता है ?”,पृथ्वी ने मन ही मन कहा लेकिन अवनि को कुछ सुनाई नहीं दिया। पृथ्वी को खामोश देखकर अवनि वहा से चली गयी और पृथ्वी ने अपना हाथ अपने ललाट पर मार लिया तो बचे चिप्स भी नीचे आ गिरे।

पृथ्वी उन्हें उठाने का सोचता इस से पहले हॉल की टेबल पर रखा पृथ्वी का फोन बजा। पृथ्वी टेबल की तरफ आया और अपना फोन देखा तो स्क्रीन पर सुरभि का नंबर देखकर मुस्कुरा उठा। उसने कॉल रिसीव किया और फोन कान से लगाकर बालकनी की तरफ चला आया।
“हेलो मिस सुरभि,,,,,,,तुम्हे जरा भी कॉमन सेन्स नहीं है कि इस वक्त एक न्यूली मैरिड कपल को फोन करके डिस्टर्ब नहीं करना होता,,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने इतरा कर कहा

सिरोही में बैठी सुरभि का मन किया वही से फोन फेंककर पृथ्वी के सर पर मारे और उसका सर फोड़ दे लेकिन अपने गुस्से को काबू में रखकर उसने शांत स्वर में कहा,”मिस्टर पृथ्वी ! मैंने तुमसे बात करने के लिए फोन नहीं किया है , अवनि कहा है मुझे उस से बात करनी है और कल से उसका फोन बंद क्यों आ रहा है ? वो ठीक तो है ना ?”

पृथ्वी ने जब सुना सुरभि उसे सीधा सीधा पृथ्वी कहकर बुला रही है तो उसने चिढ़कर कहा,”मिस्टर पृथ्वी,,,,,,,,,,,,ओह्ह हेलो मैं तुम्हारी बेस्ट फ्रेंड का पति हूँ समझी तुम और तुम हो कि मुझे नाम से बुला रही हो,,,,,,,,,,तुम्हे मुझे जीजू या फिर पृथ्वी जी कहकर बुलाना चाहिए”
“अच्छा,,,,,,,,अवनि ने भी बुलाया है कभी तुम्हे पृथ्वी जी कहकर”,सुरभि ने पृथ्वी के जले पर नमक छिड़ककर कहा

पृथ्वी ने सुना तो मायूसी से मुँह बनाया और कहा,”कहा यार वो तो मुझे शादी के बाद भी सीधा पृथ्वी और तुम कहकर बुलाती है”
“अरे अरे बेचारा,,,,,,,,तुम्हारी उस से शादी हो गयी ये क्या कम बड़ी बात है , वो तो मैं थी जिसने अवनि को सब सच बताकर उसे मनाया वरना अब तक किसी कोने में बैठकर आँसू बहा रहे होते”,सुरभि ने इतरा कर कहा

“ओह्ह्ह रियली ? उस से शादी करना मेरा टेलेंट है तुम बीच में खुद को क्रेडिट मत दो समझी,,,,,,,,,,,वैसे अवनि से क्या बात करनी है तुम्हे ?”,पृथ्वी ने फिर चिढ़कर कहा
“वो मैं तुम्हे क्यों बताऊ ? चुपचाप उसे फोन दो मुझे उस से बात करनी है”,सुरभि ने भी चिढ़कर कहा
“तुम्हे लगता है तुम ऐसे बोलोगी तो मैं उसे फोन दे दूंगा हरगिज नहीं”,पृथ्वी ने पहले प्यार से कहा और फिर गुस्से से
“तो ?”,सुरभि ने कहा

“रिक्वेस्ट करनी होगी”,पृथ्वी ने कहा
सुरभि ने सुना तो थोड़ा गुस्से से कहा,”देखो बकवास मत करो वरना मैं तुम्हारा मुँह तोड़ दूंगी”
 पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुराया और कहा,”उसके लिए तुम्हे मेरे मुँह तक पहुंचना होगा , अपनी हाईट देखी है”
“हाह ! तुम कितने बद्तमीज हो पृथ्वी ओके फाइन पृथ्वी प्लीज अवनि को फोन दो मुझे उस से बात करनी है”,सुरभि ने पहले गुस्से से कहा और फिर बड़े ही प्यार से बोली

जिसे सुनकर पृथ्वी ने बच्चो की तरह कुनमुनाते हुए कहा,”ऐसे नहीं पहले मुझे जीजाजी कहो , कहो जीजू प्लीज मुझे अवनि से बात करवाईये”
“अह्हह्ह्ह्ह ये लड़का”,सुरभि ने पहले खुद से कहा और फिर प्यार से बोली,”जीजाजी ! क्या मैं अवनि से बात कर सकती हूँ प्लीज ?”
सुरभि के मुँह से जीजाजी सुनकर पृथ्वी की तो जैसे आत्मा ही नाच उठी , वह ख़ुशी से घूमकर हॉल में आया और सामने से आती अवनि की तरफ फोन बढाकर शर्माते हुए कहा,”आपके लिए फोन है”

“तुम्हे क्या हुआ है ?”,अवनि ने फोन लेकर पृथ्वी से कहा
“उसने मुझे जीजाजी कहा”,पृथ्वी ने अपने शर्ट की कोलर मुँह में दबाकर शरमाते हुए कहा और फिर वहा से चला गया।
अवनि कुछ समझ नहीं पायी और फोन कान से लगाकर कहा,”हेलो,,,,,,,,,!!!”
“हेलो अवनि मैं सुरभि बात कर रही हूँ , तुम्हारा फोन कल से बंद क्यों आ रहा है तुम ठीक तो हो ना ?”
– मैं ठीक हूँ सुरभि , तुम कैसी हो ?

“मैं ठीक हूँ लेकिन तुम्हारे फोन को क्या हुआ है पता है मैंने तुम्हे कितनी बार फोन किया लेकिन हर बार बंद आया”
– वो मैंने अभी तक अपना फोन ऑन ही नहीं किया सुरभि वैसे भी अब किसका फोन आएगा उस पर घरवाले मुझसे नाराज है और पापा तो,,,,,,,,,,,,
कहते कहते अवनि की आँखों में आँसू भर आये

“अवनि तुम इन लोगो की चिंता मत करो , अभी सब थोड़ा गुस्से में है धीरे धीरे सब ठीक हो जाएगा। तुम बताओ वह सब ठीक है ना ? पृथ्वी के घरवालों ने तुम्हारे साथ कोई बदतमीजी तो नहीं की ना ?  

सुरभि की बात सुनकर अवनि की आँखों के सामने वो पल आ गया जब पृथ्वी के घरवाले उसके और पृथ्वी के खिलाफ खड़े थे। अवनि को खामोश पाकर सुरभि ने कहा,”हेलो अवनि ! तुम सुन रही हो न वहा सब ठीक है ना ?”
“हाँ हाँ सुरभि यहाँ सब ठीक है , पृथ्वी के घरवालों ने हमे एक्सेप्ट नहीं किया इसलिए पृथ्वी मुझे लेकर अपने फ्लेट चला आया। मेरी वजह से उसे कितनी तकलीफ उठानी पड़ रही है सुरभि”,अवनि ने उदास होकर कहा

“अवनि ! इन सब के लिए खुद को दोष देना बंद करो , अगर पृथ्वी ने सबके खिलाफ जाकर तुमसे शादी की है तो तुमने भी तो सबके सामने उसका हाथ थामा है , ख़ुशी की बात ये है कि तुम दोनों साथ हो और रही बात घरवालों की तो वो भी जल्दी ही मान जायेंगे,,,,,,,,,!!”,सुरभि ने अवनि को समझाते हुए कहा

सुरभि अवनि से बात करने में बिजी हो गयी और गैस पर रखी चाय भूल गयी लेकिन पृथ्वी को याद था उसने चाय दो कप में छानी और लेकर बालकनी में चला आया जहा खड़ी होकर अवनि सुरभि से बात कर रही थी। पृथ्वी ने चाय का कप अवनि की तरफ बढ़ा दिया और दूसरा कप खुद लेकर हॉल में चला आया। उसके पास ऑफिस की कुछ पेंडिंग फाइल पड़ी थी जिनका काम अधूरा था।

चाय पीते हुए पृथ्वी ने अपना लेपटॉप खोला और उस पर काम करने लगा। अवनि चाय पीते हुए सुरभि से बात करती रही। अवनि से बात करके सुरभि को तसल्ली हो गयी कि अवनि पृथ्वी के साथ है और सुरक्षित है। जल्दी ही मुंबई आकर अवनि से मिलने की बात कह के सुरभि ने फोन काट दिया।

अवनि हॉल में आयी और फोन पृथ्वी की तरफ बढाकर कहा,”खाने में क्या खाओगे ?”
पृथ्वी ने सुना तो लेपटॉप के कीबोर्ड पर चलती उसकी उंगलिया रुक गयी उसने अवनि की तरफ देखा और कहा,”फिर से पूछना ?”
“खाने में क्या खाओगे ?”,अवनि ने अपना सवाल फिर दोहराया तो पृथ्वी ने एक ठंडी आह भरी और कहा,”हाह ! जो तुम प्यार से खिला दो,,,,,,,,,,,!!”

अवनि ने हामी में गर्दन हिलायी और वहा से किचन की तरफ चली गयी। पृथ्वी गाल से हाथ लगाकर जाती हुई अवनि को देखता रहा और फिर खुद में ही बड़बड़ाया,”2 साल , पुरे दो साल इंतजार किया है मैंने अवनि के मुँह से ये 4 शब्द सुनने के लिए,,,,,,,,,,,,इसके बाद तो तुम मुझे जहर भी खिला दो तो मैं ख़ुशी ख़ुशी खा लूंगा,,,,,,,,,,,वैसे वो आज खाने में क्या बनाने वाली है ? कही कुछ स्पेशल तो नहीं ,, वैसे एक बार उसने मुझे बताया था कि वो बहुत अच्छा खाना बनाती है,,,,,,,,,तो क्या आज वो मेरे लिए पनीर बनाने वाली है ?

अह्ह्ह या फिर छोले , अह्ह्ह्ह नहीं नहीं वो कुछ यूनिक बनाने वाली है तो हो सकता है वह मेरे लिए कुछ चटपटा बनाये,,,,,,,,वैसे वो कुछ भी बनाये मैं खा लूंगा और अगर वो मुझे अपने हाथो से खिलाये तो कितना अच्छा लगेगा मुझे ,, मेरा तो एक निवाले में ही पेट भर जाएगा”

पृथ्वी मीठे मीठे सपनो में खोया हुआ था कि तभी उसका फोन बजा और उसने स्क्रीन पर नंबर देखे बिना ही फोन उठाकर कान से लगाकर कहा,”हेलो”
“कटारिया ग्रुप्स की फाइल कम्प्लीट होने में कितना वक्त लगेगा ?”,फोन के दूसरी तरफ से जयदीप की आवाज उभरी
“एक निवाला काफी होगा”,अवनि के ख्यालो में खोये पृथ्वी ने कहा

“एक निवाला , मैं क्या तुम्हे बावर्ची लगता हूँ ? मैं प्रोजेक्ट फाइल की बात कर रहा हूँ,,,,,,,,,ध्यान कहा है तुम्हारा ?”,जयदीप ने पृथ्वी को झिड़ककर कहा
पृथ्वी होश में आया और हड़बड़ाकर कहा,”अह्ह्ह सॉरी सर वो , वो फाइल तैयार है मैं बस चेक करके अभी आपको भेजता हूँ,,,,,,,,!!”

“फाइन कल आई थिंक तुम छुट्टी पर हो तो मैंने परसो की मीटिंग रखी है प्लीज तुम अटेंड कर लेना”,जयदीप ने कहा और फोन काट दिया
पृथ्वी ने राहत की साँस ली और फोन साइड में रखकर अपना ध्यान काम पर लगा लिया ताकि पर्सनल और प्रोफेशनल काम मिक्स ना हो।  

(  क्या अवनि के साथ रहकर बदल जाएगा पृथ्वी और करने लगेगा फिर से ईश्वर में विश्वास ? क्या कभी ख़त्म होगी सुरभि और पृथ्वी के बीच की ये मीठी नोक झोंक ? क्या हो पाएंगे अवनि को लेकर पृथ्वी के ये छोटे छोटे सपने पुरे ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal
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