Pasandida Aurat – 98
पृथ्वी सुरभि को साथ लेकर बाइक के पास आया और उसे लेकर वहा से निकल गया। पृथ्वी बहुत अच्छे से बाइक चला रहा था और सुरभि उसे रास्ता बता रही थी। पृथ्वी के पीछे बैठी सुरभि ने घबराहट भरे स्वर में कहा,”ए पृथ्वी ! वहा जाना जरुरी है क्या ?”
“अहहह्म्म जरुरी तो नहीं है पर मेरा मन है , मुझे देखना है आखिर वो कौन है जिसने अवनि को ठुकरा दिया ?”,पृथ्वी ने कहा
“अह्ह्ह मेरा मतलब लास्ट टाइम जैसे तुमने सिद्धार्थ से मार खायी कही यहाँ भी,,,,,,,,,,,!!”,सुरभि ने कहा
पृथ्वी ने सुना तो एकदम से ब्रेक मारा और अपनी गर्दन घुमाकर सुरभि से कहा,”तुम कहना चाहती हो कि मैं यहाँ मार खाने वाला हूँ ?”
“अह्ह्ह्ह नहीं नहीं मैंने ऐसा कब कहा लेकिन लास्ट टाइम तुम हॉस्पिटल,,,,,,,,!!”,सुरभि कहते कहते रुक गयी तो पृथ्वी ने कहा,”हाह ! वो तो बस सिर्फ अवनि के लिए वरना पृथ्वी उपाध्याय को कोई मार सकता है क्या ?”
“ऐसा है क्या तो फिर चलो दूल्हे राजा के घर”,सुरभि ने ख़ुशी से चाहकर अपना हाथ पृथ्वी की पीठ पर मारकर कहा
पृथ्वी बेचारा आगे गिरते गिरते बचा और कहा,”तुम्हारा हाथ कितना भारी है कभी अपनी दोस्त का हाथ देखा है कितना नाजुक है”
“अवनि की तारीफ करने का एक मौका नहीं छोड़ते न तुम”,सुरभि ने कहा
पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुराया और बाइक आगे बढ़ा दी। कुछ देर बाद ही बाइक एक घर के सामने आकर रुकी पृथ्वी और सुरभि बाइक से नीचे उतरे और दोनों घर के दरवाजे की तरफ चले आया। पृथ्वी ने एक नजर सुरभि को देखा तो सुरभि ने पृथ्वी से बेल बजाने का इशारा किया। पृथ्वी ने एक गहरी साँस ली और बेल बजा दी।
कुछ देर बाद दरवाजा घर में काम करने वाले किसी नौकर ने खोला तो पृथ्वी ने कहा,”क्या आप मुकुल को बुला देंगे ?”
“आप रुकिए मैं उन्हें भेजता हूँ,,,,,,,,,!!”,कहकर आदमी अंदर चला गया
पृथ्वी और सुरभि मुकुल के आने का इंतजार करने लगे , कुछ देर बाद एक अच्छे नैन नक्श वाला लड़का बाहर आया और पृथ्वी से कहा,”जी कहिये”
पृथ्वी ने एक नजर सुरभि को देखा तो सुरभि को लगा पृथ्वी मुकुल से बात करने आया है और उस से पूछने आया है कि उसने अवनि के साथ ऐसा क्यों किया ?
सुरभि अपनी सोच पर सहमत हो पाती इस से पहले ही पृथ्वी ने खींचकर एक थप्पड़ मुकुल के गाल पर रसीद कर दिया। पृथ्वी के एक थप्पड़ से ही मुकुल का पूरा सर झन्ना उठा , वह कुछ समझ पाता इस से पहले पृथ्वी ने उसके दूसरे गाल पर भी एक थप्पड़ जड़ दिया और सुरभि हक्की बक्की सी कभी पृथ्वी को देखती तो कभी मुकुल को , उसने सोचा भी नहीं था कि पृथ्वी ऐसा कुछ करने वाला है।
“ये सब क्या है कौन हो तुम ?”,मुकुल ने हड़बड़ाकर कहा
पृथ्वी हल्का सा मुस्कुराया और मुकुल के करीब जाकर कहा,”पहला थप्पड़ अवनि के साथ इतना गलत करने के लिए और दूसरा थप्पड़ मेरे दोस्त को सबके सामने बेइज्जत करने के लिए,,,,,,,,,!!”
पृथ्वी के मुँह से अवनि का नाम सुनकर मुकुल समझ गया कि पृथ्वी ने उसे अवनि के लिए मारा है , उसने गुस्से से पृथ्वी को देखा तो पृथ्वी ने अपना मुँह मुकुल के कान के पास लाकर कहा,”भलाई इसी में है कि चुपचाप खड़ा रह वरना वो हाल करूंगा कि अंजलि भी पहचान नहीं पायेगी”
पृथ्वी के मुँह से अंजलि का नाम सुनकर मुकुल के चेहरे का रंग उड़ गया , अंजलि वही लड़की थी जिस से मुकुल प्यार करता था और अगले महीने शादी करने वाला था। पृथ्वी पीछे हटा , मुकुल का सीना थपथपाया और बहुत ही सधे हुए स्वर में कहा,”आज के बाद अवनि से दूर रहना”
पृथ्वी बाइक की तरफ बढ़ गया और बेचारी सुरभि अभी भी सदमे में थी , वह नहीं जानती थी पृथ्वी ने मुकुल से क्या कहा लेकिन इतना तो समझ गयी कि मुकुल और सिद्धार्थ को टक्कर अगर कोई दे सकता है तो वो है पृथ्वी,,,,,,,,,,,,!!”
पृथ्वी को जाते देखकर मुकुल ने सुरभि से कहा,”कौन था ये ?”
“अवनि का होने वाला पति”,सुरभि ने ख़ुशी भरे स्वर में कहा और पृथ्वी के पीछे चल पड़ी। मुकुल ने इधर उधर देखा कि कही कोई उसे पृथ्वी से थप्पड़ खाते तो नही देख रहा और अंदर चला गया।
सुरभि पृथ्वी के पास आयी और कहा,”मैंने सोचा नहीं था तुम ऐसा कुछ करने वाले हो , वैसे तुम मुकुल के सामने किस दोस्त की बात कर रहे थे ?”
पृथ्वी सुरभि की तरफ पलटा और कहा,”तुम्हारा नेक्स्ट मूव क्या होना चाहिए ये किसी को पता नहीं चलना ही तुम्हारी सबसे बड़ी जीत है , वैसे दोस्त मैंने अवनि के पापा को कहा,,,,,,,,,,!!”
“क्या बात है होने वाले ससुर को ही दोस्त बना लिया,,,,,,,,सच में तुम कमाल हो”,सुरभि ने ख़ुशी से चहककर कहा
पृथ्वी मुस्कुराया और बाइक स्टार्ट कर सुरभि से पीछे बैठने को कहा। सुरभि पृथ्वी के पीछे आ बैठी और पृथ्वी उसे लेकर वहा से निकल गया। रास्तेभर सुरभि पृथ्वी को अवनि के बारे में बता रही थी। मुकुल के बाद पृथ्वी अनुज सर से मिला जिन्होंने अवनि की पढाई से लेकर नौकरी लगने तक में मदद की। अनुज सर को पृथ्वी से मिलकर बहुत अच्छा लगा इसके बाद पृथ्वी ने सुरभि को वापस घाट पर छोड़ा और खुद अवनि के घर की तरफ निकल गया।
दोपहर बाद पृथ्वी घर पहुंचा , बाइक लगाकर जैसे ही अंदर आया देखा विश्वास जी अपने भाईयो के साथ हॉल में बैठे किसी बात पर हंस रहे है। उन्हें साथ देखकर पृथ्वी के दिल को एक सुकून मिला वह मुस्कुराते हुए उनकी तरफ आया तो मयंक चाचा ने कहा,”अरे पृथ्वी ! आओ आओ , नाश्ते के बाद अचानक कहा चले गए थे तुम ?”
“वो मैं किसी काम से बाहर गया था”,पृथ्वी ने कहा
“कोई बात नहीं अब आ गए हो तो बताओ खाने में क्या खाओगे ? आज का सारा खाना तुम्हारी पसंद से बनेगा”,कौशल चाचा ने कहा
“हाँ पृथ्वी ! तुमने गट्टे की सब्जी खाई है ? सोच रही हूँ आज वही बनाऊ”,सीमा ने कहा
“हाँ और साथ में मक्की की रोटी भी,,,,,,,,वो भी सफ़ेद मक्खन के साथ क्यों जीजी ?”,मीनाक्षी ने चहककर कहा
“हाँ सही रहेगा साथ में मठ्ठा बनाना मत भूलना”,इस बार कौशल ने कहा क्योकि गट्टे की सब्जी और मक्की की रोटी उसे पसंद जो थी। बच्चे अभी आये नहीं थी कोई स्कूल था तो कोई कॉलेज तो कोई अपनी कोचिंग,,,,,,,,!!!
पृथ्वी ने सुना तो सीमा की तरफ देखने लगा हालाँकि अवनि के साथ एक बार उसने ये सब खाया था लेकिन आज उसे अवनि के ही घर में ये सब खाने को मिलने वाला था इसलिए उसने उठते हुए कहा,”मैं सिर्फ खाऊंगा ही नहीं बल्कि आपकी मदद भी करूंगा और आपसे सीखूंगा भी,,,,,,,!!”
“अरे बेटा आप मेहमान है आप ये सब,,,,,,,,,!!”,विश्वास जी ने कहा
“मेहमान बोलकर मुझे पराया कर रहे है आप , भूल गए आपने मुझे दोस्त कहा था और वैसे भी आज शाम मैं वापस जाने वाला हूँ तो चाहता हूँ सबके साथ थोड़ा वक्त बिता लू”,पृथ्वी ने उठते हुए कहा
तुम वापस जा रहे हो ? इतनी जल्दी ,, कुछ दिन और रुक जाते”,कौशल चाचा ने कहा
“मैं जरूर रुकता लेकिन ऑफिस में एक जरुरी मीटिंग है इसलिए मुझे जाना पड़ेगा”,पृथ्वी ने कहा
“हम्म्म्म ठीक है बेटा ऑफिस का काम है तो हम लोग तुम्हे नहीं रोकेंगे लेकिन वादा करो अवनि के आने के बाद तुम यहा फिर आओगे”,विश्वास जी ने कहा
“हम्म्म्म जरूर,,,,,,,,,,,चले चाची आई मीन आंटी”,पृथ्वी ने जल्दबाजी में सीमा को चाची कह दिया जैसे हमेशा अवनि कहा करती थी
“चाची ही कहो अच्छा लगता है”,सीमा ने प्यार से कहा और फिर पृथ्वी उनके पीछे पीछे किचन की तरफ चल पड़ा। मीनाक्षी भी वहा से चली गयी। कौशल चाचा एकटक पृथ्वी को देख रहे थे ये देखकर विश्वास जी ने कहा,”क्या बात है कौशल ?”
कौशल चाचा विश्वास जी की तरफ पलटे और कहा,”भाईसाहब आपने पृथ्वी को देखा , दो ही दिन में सबसे ऐसे घुल मिल गया है जैसे इसी घर का सदस्य हो,,,,,,,,,मैं सोच रहा हूँ अगर वह हमेशा के लिए इस घर का सदस्य बन जाये तो कैसा रहेगा ?”
“तुम अवनि के बारे में बात कर रहे हो ?”,विश्वास जी ने पूछा तो कौशल चाचा की आँखे चमक उठी और उन्होंने हामी में गर्दन हिला दी।
“बात तो तुम्हारी सही है कौशल लेकिन इस बार ये फैसला मैं अवनि पर छोड़ता हूँ , वह जिसे अपने जीवनसाथी के रूप में चुनेगी उसकी शादी वही होगी। शादी के नाम पर पहले ही हम सब उसके साथ ज्यादती कर चुके है लेकिन अब नहीं,,,,,,,,,पृथ्वी बहुत अच्छा लड़का है लेकिन जब तक अवनि हाँ नहीं कहेंगी घर में कोई इस बारे में बात नहीं करेगा”,विश्वास जी ने गंभीरता से कहा
विश्वास जी के सामने भला अब कौशल और मयंक क्या कहते ? उन्होंने विश्वास जी की बात में सहमति जताई और दीपिका की सगाई को लेकर बाते करने लगे।
सीमा और मीनाक्षी के साथ किचन में खड़ा पृथ्वी उनसे खाना बनाना सीख भी रहा था और साथ ही साथ उनसे बाते भी कर रहा था। सीमा आज स्पेशली पृथ्वी के लिए गट्टे की सब्जी बना रही थी , पृथ्वी को बड़े ध्यान से सब बनाते देखकर मीनाक्षी ने कहा,”क्या बात है पृथ्वी तुम इतना ध्यान से खाना बनते क्यों देख रहे हो , तुम्हे भी किसी को बनाकर खिलाना है क्या ?”
“हाँ मेरी बायको को,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने एकदम से कहा
पृथ्वी के मुँह से बायको सुनकर मीनाक्षी और सीमा ने हैरानी से उसे देखा क्योकि दोनों ही इस शब्द का मतलब नहीं जानती थी। उन्हें अपनी तरफ देखकर पृथ्वी ने कहा,”अह्ह्ह्ह बायको मतलब मेरी होने वाली वाइफ,,,,,,!!”
“ओह्ह्ह तो तुम्हारे यहाँ घरवाली को बायको कहते है”,सीमा ने कहा और अपना ध्यान फिर खाने में लगा लिया
“जी ! और आपके यहाँ ?”,पृथ्वी ने पूछा
“यहाँ ? यहाँ मारवाड़ी में घरवाली को “बींदणी” कहा जाता है”,सीमा ने कहा
“क्या बिडनी ?”,पृथ्वी वह शब्द बोल ही नहीं पाया
“बिडनी नहीं बींदणी,,,,,,,हाहाहाहा रहने दो तुम्हारे बस की नहीं है,,,,,,एक हफ्ता यहाँ रहोगे तो सब सीख जाओगे”,मीनाक्षी ने हँसते हुए कहा
“नेक्स्ट टाइम आऊंगा तब जरूर”,पृथ्वी ने इतना ही कहा कि उसका फोन बजा और वह बात करते हुए बाहर चला गया
पृथ्वी जिस मकसद से अवनि के घर आया था वह पूरा हो चूका था। विश्वास जी के साथ साथ सभी घरवालों ने अवनि को माफ़ कर दिया और चाहते थे इस दिवाली अवनि अपने घर वापस आये। कौशल चाचा और मयंक चाचा की ग़लतफ़हमी भी दूर हो चुकी थी और दोनों ने ही अपने किये के लिए विश्वास जी से माफ़ी भी मांगी। दोपहर के खाने के बाद पृथ्वी ने सबके साथ थोड़ा वक्त बिताया और फिर आराम करने अवनि के कमरे में चला आया
कमरे में आकर पृथ्वी ने अपनी बाँहे फैला दी , आँखे मूंदी , सर उठाया और एक गहरी साँस ली ,, वह अवनि की मौजूदगी उस कमरे में महसूस करना चाहता था।
जाने से पहले पृथ्वी कुछ वक्त अवनि के कमरे में बिताना चाहता था जिसमे अवनि भले ही ना हो पर उसके होने का अहसास था। पृथ्वी कुछ देर आँखे मूंदे ऐसे ही खड़ा रहा , मन ही मन वह अवनि के लिए खुश था और साथ ही दिमाग में चल रहा था प्यारा सा ख्याल कि वो पल कितना सुकूनभरा होगा जब पृथ्वी ऐसे ही अपनी बाँहे फैलायेगा और अवनि उसके सीने से आकर लगेगी।
पृथ्वी ने अपनी आँखे खोली और बिस्तर पर आ बैठा। मुस्कुराहट पृथ्वी के होंठो से जाने का नाम नहीं ले रही थी। आज उसने जो अवनि के लिए किया उसके बाद अवनि एक बार फिर अपने घर , अपनों के बीच वापस आ पायेगी। पृथ्वी बिस्तर पर लेट गया , उसके पैर नीचे लटक रहे थे और इस वक्त उसे अवनि की बहुत याद आ रही थी। पृथ्वी ने साइड में पड़ा अपना फोन उठाया और गैलरी खोलकर अवनि की एक तस्वीर निकाली जो उसकी पसंदीदा थी ,
वह एकटक उसे देखने लगा और मुस्कुराने लगा। उसका मन शांत था और आँखों में चमक थी। पृथ्वी ने फ़ोन अपने सीने पर रखा और आँखे मूँद ली। उसके दिल को सुकून पहुंचाने के अवनि का अहसास ही काफी था।
शाम में पृथ्वी उठा अपना बैग जमाया और सब सामान रखा , उसने एक बार फिर कमरे की एक एक चीज को बहुत ही प्यार से छुआ और फिर बैग लेकर कमरे से बाहर निकल गया। पृथ्वी नीचे आया तो देखा सब नीचे हॉल में जमा है और उसी का इंतजार कर रहे है। पृथ्वी नीचे आया सबसे मिला , विश्वास जी ने उसे एक तोहफा दिया। सीमा ने उसके लिए खाना और कुछ सूखा नाश्ता बनाया था वह पैक करके दिया। पृथ्वी सभी बच्चो से मिला और जैसे ही जाने लगा विश्वास जी ने कहा,”अह्ह्ह्ह पृथ्वी”
पृथ्वी के कदम रुक गए , कही विश्वास जी को उस पर शक तो नहीं हो गया सोचकर उसका दिल धड़कने लगा। पृथ्वी कंधे पर अपना बैग उठाये धीरे से पलटा और विश्वास जी की तरफ देखा तो विश्वास जी उसकी तरफ आये और कहा,”चलिए आपको स्टेशन तक छोड़ देता हूँ”
पृथ्वी चाहकर भी मना नहीं कर पाया और अगर करता भी तो विश्वास जी उसकी नहीं सुनते इसलिए वह चुपचाप उनके साथ चल पड़ा।
विश्वास जी पृथ्वी को लेकर रेलवे स्टेशन चले आये। ट्रेन आने में 10 मिनिट बाकि थे इसलिए विश्वास जी पृथ्वी को साथ लेकर वहा खाली पड़ी बेंच पर आ बैठे। पृथ्वी अब तक विश्वास जी से जितनी बातें कर रहा था अब उनके सामने उतना ही शांत था। विश्वास जी भी खामोश थे और उनकी ख़ामोशी पृथ्वी का मन बेचैन कर रही थी। पृथ्वी से जब रहा नहीं गया तो उसने कहा,”आप मुझसे कुछ कहना चाहते है ?”
“अह्ह्ह्ह नहीं ! वैसे आप सीधा मुंबई जा रहे है ?”,विश्वास जी की तंद्रा टूटी तो उन्होंने पूछा
“नहीं मुंबई से पहले मैं कही और जाना चाहता हूँ , वहा से फिर सीधा मुंबई निकल जाऊंगा”,पृथ्वी ने कहा
“दो दिन से आप साथ है पर लग रहा है जैसे सालों से हम एक दूसरे को जानते है , कितना अजीब इत्तेफाक है न पृथ्वी ?”,विश्वास जी ने कहा
“इत्तेफाक नहीं है सर,,,,,,कुछ जगह आप बुलाये नहीं जाते नियति आपको खुद लेकर जाती है। मेरी नियति मुझे यहाँ लेकर आयी और देखो मुझे आप मिल गए”,पृथ्वी ने कहा तो विश्वास जी मुस्कुराने लगे।
ट्रेन आने से पहले विश्वास जी ने पृथ्वी को चाय पिलाई और कुछ इधर उधर की बात भी की। ट्रेन आ चुकी थी पृथ्वी ने विश्वास जी से हाथ मिलाया और ट्रेन में चढ़ गया , वह दरवाजे पर खड़ा विश्वास जी को देखने लगा तो विश्वास जी उसके पास आये और अपनी जेब से एक छोटी सी तस्वीर निकालकर पृथ्वी की तरफ बढ़ाते हुए कहा,”पिछली बार ये तस्वीर आपके पर्स से गिर गयी थी , सोचा आपको लौटा दू”
पृथ्वी ने धड़कते दिल के साथ तस्वीर ली और जैसे ही उसे देखा उसका दिल कुछ सेकेण्ड के लिए रुक गया वो तस्वीर अवनि की थी जिसे पृथ्वी अपने पर्स में रखता था। पृथ्वी ने तस्वीर को पलटकर देखा जिस पर लिखा था “मेरी पसंदीदा औरत”
पृथ्वी के चेहरे का रंग उड़ गया , इसका मतलब विश्वास जी सब जानते थे और जैसे ही पृथ्वी ने सामने देखा ट्रेन चल पड़ी। वह अवाक् सा विश्वास जी को देखता रहा और विश्वास जी बिना किसी भाव के पृथ्वी को देखते रहे। ट्रेन ने तेजी पकड़ ली और विश्वास जी पृथ्वी की आँखों से ओझल हो गए
( क्या घरवाले बताएँगे अवनि को पृथ्वी के घर आने के बारे में ? क्या ये दिवाली होने वाली है अवनि के लिए यादगार ? क्या विश्वास जी पहले से जानते थे पृथ्वी का सच ? जानने के लिए पढ़ते रहे “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
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