Pasandida Aurat – 97
मयंक और कौशल अपने अपने हाथो में पकडे पेपर्स को हैरानी से देख रहे थे। विश्वास जी ने घर का आधा हिस्सा मयंक के नाम कर दिया और आधा कौशल के नाम कर दिया साथ ही उन्होंने बच्चो के नाम जो हिस्सा था वो भी उन सबको दे दिया। बीती रात पृथ्वी की बातो से मयंक और कौशल चाचा पहले ही शर्मिंदा थे और अब विश्वास जी के दिए पेपर देखकर उन्हें और ज्यादा शर्मिंदगी महसूस होने लगी। कौशल चाचा ने विश्वास जी की तरफ देखा और कहा,”भाईसाहब ! ये सब क्या है ? आपने ये घर,,,,,,,,,,,,!!!”
“हाँ कौशल ! मैंने ये घर और अपनी जायदाद का कुछ हिस्सा तुम सब के नाम कर दिया है बाकि अवनि के नाम करके मैं हमेशा के लिए उसके पास जा रहा हूँ। बहुत अत्याचार कर लिया मैंने अपनी बेटी पर , बहुत रख लिया उस खुद से दूर लेकिन अब नहीं , अब उसे एक पिता की जरूरत है , एक परिवार की जरूरत है और अब मैं बनूंगा उसका परिवार,,,,,,,मैं उसे माँ और बाप दोनों का प्यार दूंगा। जिस समाज और खानदान की परवाह में मैंने अपनी बेटी को खुद से दूर किया आज वही खानदान सिर्फ मेरी दौलत और इस घर के लिए मेरे साथ है,,,,,,,,,
मुझे ऐसा परिवार और ऐसी दौलत नहीं चाहिए कौशल जो मुझे अपनी ही औलाद से दूर कर दे,,,,,,,,,मैं गलत था बहुत गलत था , वो कहती रही कि मैं एक बार उसकी बात सुनु उस पर विश्वास करू लेकिन समाज की झूठी शान में मैंने उसकी बात नहीं सुनी और अपनी जिद और घमंड के चलते उसे दर दर की ठोकरे खाने पर मजबूर कर दिया। मुझे अपनी गलती का अहसास हो चुका है इसलिए मैं ये सब तुम सबके हवाले करके हमेशा के लिए यहाँ से जा रहा हूँ,,,,,,,,,,!!!”
घरवालों ने जब सुना तो कुछ के चेहरे पर परेशानी और कुछ चेहरों पर शर्मिंदगी के भाव उभर आये। कौशल कुछ कहता इस से पहले मयंक ने हाथ में पकडे कागजो को फाड़ा और जमीन पर फेंककर कहा,”मुझे आपकी जायदाद नहीं चाहिए भाईसाहब , ना ही मुझे ये घर चाहिए। सिर्फ आप ही नहीं मैं भी अवनि का गुनहगार हूँ,,,,,मैंने भी कितना गलत समझा उसे , आपको रोकने के बजाय हम सबने गलत का साथ दिया
कुछ वक्त के लिए मैं अपने स्वार्थ में अंधा हो गया था मैं देख ही नहीं पाया कि इन सब में अगर कोई सबसे ज्यादा गलत था तो वो थे हम सब , हमने अवनि को समझने के बजाय उसे ही सबके लिए जिम्मेदार ठहराया और आज वो हम सब से दूर है,,,,,,,!!”
मयंक की बात सुनकर विश्वास जी खाली आँखों से उसे देखने लगे
मयंक की बातें सुनकर कौशल चाचा को भी अपनी गलतियों का अहसास हुआ और आज विश्वास जी का फैसला सुनकर तो वे और ज्यादा शर्मिंदा थे।
उन्होंने भी अपने हाथो में पकडे पेपर्स को फाड़ा और उन्हें साइड में फेंककर विश्वास जी से कहा,”मयंक सही कह रहा है भाईसाहब ! सिर्फ आप ही नहीं बल्कि हम सब अवनि के गुनहगार है , अवनि की जगह हमारे बच्चे होते तो हम शायद ही उन्हें इस घर से जाने को कह पाते लेकिन हमारे कहने पर आपने अवनि को ही इस घर से निकाल दिया। हमसे बहुत बड़ी गलती हुई है भाईसाहब , आप इस घर से नहीं जायेंगे बल्कि हम सब जायेंगे ,
ये घर आपका है और आपका ही रहेगा , इस घर को बनाये रखने के लिए आपने क्या क्या नहीं किया लेकिन हमने , हमने कभी आपके समर्पण को समझा ही नहीं , मैं बहुत शर्मिंदा हूँ भाईसाहब , बहुत शर्मिन्दा हूँ”
पृथ्वी खामोश खड़ा मंद मंद मुस्कुरा रहा था आखिरकार वह जो चाहता था वह हो रहा था। पृथ्वी बिना किसी छल कपट के अवनि के घरवालों का मन बदलना चाहता था और वही हुआ उसके सामने खड़े अवनि के घरवाले इस वक्त पछतावे की आग में जल रहे थे और साथ ही उन्हें अपनी गलतियों का अहसास भी था।
कार्तिक ने अपने पापा और चाचा की बात सुनी तो दीपिका , सलोनी , नितिन और अंशु के हाथो से पेपर लिए और विश्वास जी के सामने आकर सभी पेपर उनकी तरफ बढाकर कहा,”ताऊजी ! हम में से किसी को भी ये नहीं चाहिए अगर आप सच में हम सबको कुछ देना चाहते है तो “अवनि दीदी” को इस घर में वापस ले आईये ताऊजी , बस इस से ज्यादा हमे कुछ नहीं चाहिए।
जब तक आप नहीं कहेंगे वो इस घर में नहीं आएगी,,,,,,,,अवनि दीदी ने उस दिन कुछ गलत नहीं किया था ताऊजी उन्होंने आपके लिए ही शादी तोड़ी थी,,,,,,,,,प्लीज ताऊजी ये सब हमे नहीं चाहिए इस से बड़ी दौलत अगर हम सब के लिए कुछ है तो वो अवनि दीदी है,,,,,,,,!!”
कहते हुए कार्तिक की आँखों में आँसू भर आये। विश्वास जी ने सुना तो उन्होंने नम आँखों से कार्तिक के गाल को छुआ ,
सलोनी जो कि अवनि से ज्यादा बात नहीं करती थी और घर के मामलो से दूर ही रहती थी आगे आयी और विश्वास जी से कहा,”ताऊजी ! दीदी ने अपने स्वाभिमान के लिए नहीं बल्कि आपके सम्मान के लिए शादी से इंकार किया था , कल को अगर मैं अपने पापा के सम्मान के लिए ऐसा करू तो क्या आप मुझे भी घर से निकाल देंगे ?”
विश्वास जी ने सुना तो महसूस किया कि सच में उन्होंने कितनी बड़ी गलती की थी , उनकी आँखों में भरे आँसू गालों पर लुढ़क आये और उन्होंने ना में गर्दन हिलायी तो सलोनी ने उनका हाथ अपने हाथो में थामकर कहा,”तो फिर अवनि दीदी को इस घर में आने दीजिये ना ताऊजी”
विश्वास जी ने सुना तो सलोनी को अपने सीने से लगा लिया , इस घर के बड़ो में जो दया भावना नहीं थी वो इस घर के बच्चो में नजर आ रही थी। दीपिका की आँखों में आँसू थे वह विश्वास जी के पास आयी और कहा,”हम बेटियां तो वैसे भी मायके में कुछ सालों की मेहमान होती है और फिर शादी के बाद हमेशा के लिए विदा होकर अपना ये घर छोड़कर चली जाती है , हम सबकी तरह अवनि दीदी को भी ये हक़ है कि वो पुरे रीती रिवाज से इस घर से जाए,,,,,,,,,,,,विदा होकर,,,,,,,उन्हें वापस ले आईये ताऊजी,,,,,,,,,उनके बिना ये घर घर नहीं लगता”
विश्वास जी ने दूसरी तरफ दीपिका को सीने से लगाया और रो पड़े। नितिन ये सब देखकर उदास सा कार्तिक के पास चला आया। अंशु जो कि घर में सबसे छोटी थी वह भला इन सब का मतलब क्या समझती इसलिए विश्वास जी के पास आकर उनका कुर्ता खींचकर कहा,”ताऊजी ! ताऊजी क्या हुआ आप सब रो क्यों रहे है ? बोलिये ना ताऊजी अवनि दीदी को कुछ हुआ है क्या ?”
विश्वास जी ने सुना तो दीपिका सलोनी को छोड़कर नीचे बैठे और अपने आँसू पोछकर कहा,”तुम्हारी अवनि दीदी को कुछ नहीं हुआ है वो बिल्कुल ठीक है और मैं उस से हूँ”
“आप अवनि से मिलने नहीं जायेंगे भाईसाहब”,काफी देर से खामोश कड़ी सीमा ने कड़कदार आवाज के साथ कहा तो सभी हैरानी से उसे देखने लगे। मीनाक्षी भी हैरान थी क्योकि बाकि सबके साथ उसका भी दिल अवनि को लेकर पिघल चुका था और साथ ही अपने किये का पछतावा भी था।
सबको अपनी और देखता पाकर सीमा आगे आयी और कहा,”भाईसाहब अवनि से मिलने नहीं जायेंगे,,,,,,,,,अभी इन्होने कहा ना कि अवनि को एक परिवार की जरूरत है तो क्या उसे माँ की जरूरत नहीं है ? चाचा-चाची , अपने भाई बहनो की जरूरत नहीं है,,,,,,,खबरदार जो आपने ये कहा कि सिर्फ आप अवनि से मिलने जायेंगे , हम सब को छोड़कर कही नहीं जायेंगे आप बल्कि आप अवनि को यहाँ बुलाएँगे , उसके अपने घर में , अपने परिवार के बीच , वो भी पुरे हक़ से,,,,,,!!”
कहते हुए सीमा रो पड़ी , उन्होंने अब तक अवनि का जितना दिल दुखाया था उसे कड़वे शब्द कहे थे वो सब सीमा के आँसुओ में बह गए। विश्वास जी ने सुना तो
नम आँखों से मुस्कुराये। मीनाक्षी ने सुना तो ख़ुशी से चहककर कहा,”हाँ और हम सब धूमधाम से अवनि का स्वागत करेंगे,,,,,,,क्यों मयंक जी ?”
“आज पहली बार तुम्हे ढंग की बात कही मीनाक्षी,,,,,,,इतने वक्त बाद अवनि इस घर में आ रही है स्वागत तो करना पडेगा”,मयंक ने भी अपनी आँखों के किनारे साफ करके कहा।
विश्वास जी की आँखों में आँसू देखकर कौशल चाचा उनके सामने आये और उन्हें गले लगाकर कहा,”मुझे माफ़ कर दीजिये भाईसाहब ! अवनि सिर्फ आपकी नहीं हम सब की बेटी है और देखियेगा आप बहुत धूम धाम से उसकी शादी करेंगे और पुरे रीती रिवाज से इस घर से उसकी विदाई होगी”
कौशल की बात सुनकर विश्वास जी फूट फूट कर रो पड़े। पृथ्वी ये सब देख नहीं पाया इसलिए वहा से साइड में चला गया। सभी बड़ो के मन का मैल आज आँसुओ से धूल गया तो वही बच्चो के चेहरे ख़ुशी से चमक रहे थे आखिर उनकी अवनि दीदी जो आने वाली थी।
सीमा को रोते देखकर मीनाक्षी ने उसे गले लगाया और कहा,”अरे अरे दीदी बस थोड़े आँसू अवनि और दीपिका की विदाई के लिए बचाकर रखिये,,,,,,,,!!”
मयंक चाचा ने विश्वास जी को रोते देखा तो वे भी उनके पास चले आये और उनसे माफ़ी मांगी , विश्वास जी ने भी अपने दोनों भाईयो को माफ़ कर दिया। कौशल ने सीमा से सबके लिए चाय बनाने को कहा और खुद मुँह धोने चले गए। मयंक भी मुँह धोने अपने कमरे की तरफ बढ़ गया।
सीमा और मीनाक्षी रसोई में चली गयी और बच्चे सभी हॉल में आ बैठे। विश्वास जी ने अपने आँसू पोछे और देखा पृथ्वी कही नजर नहीं आ रहा तो वे घर के दरवाजे की तरफ बढ़ गए जहा उन्हें पृथ्वी दिखाई दिया।
विश्वास जी ने आकर पृथ्वी के कंधे पर हाथ रखा तो पृथ्वी अपनी नम आँखों को पोछते हुए उनकी तरफ पलटा और कहा,”जी जी सर,,,,,,,,!!”
“आपका बहुत बहुत शुक्रिया बेटा अगर कल रात आपने मुझे समझाया नहीं होता तो शायद ये कभी नहीं होता , आज इन सबके मन से अवनि के लिए नफरत कम हो गयी और मुझे मेरा परिवार भी वापस मिल गया , इसके लिए मैं आपका जितना शुक्रिया करू उतना कम होगा,,!!”,कहते हुए विश्वास जी ने पृथ्वी के सामने अपने हाथ जोड़ दिए
ये देखकर पृथ्वी ने कहा,”अरे ये आप क्या कर रहे है सर , आप मेरे बाबा जैसे है आप ऐसा मत कीजिये,,,,,,,,,,मैंने कुछ नहीं किया बस जिस चीज के पीछे ये सब भाग रहे थे वो जब आपने सामने से दी तो इन्हे अपनी गलती का अहसास हो गया। वैसे ये सब इतने बुरे भी नहीं है बस थोड़े भटके हुए थे,,,,,,,,,,,अब सम्हल गए है”
विश्वास जी मुस्कुराये और कहा,”हाँ भटके हुए तो हम सब ही थे बेटा , आपने हम सबको सही रास्ता दिखाया है कहिये मैं आपके लिए क्या कर सकता हूँ ? आप जो चाहो वो मांग सकते हो ?”
पक्का मैं जो मांगूंगा वो आप मुझे देंगे ?”,पृथ्वी ने कहा
“हां बेटा जी आप जो मांगोगे मैं आपको देने के लिए तैयार हूँ,,,,,,,,,,,आप एक बार मांगकर तो देखिये”,विश्वास जी ने आँखों में चमक भरकर कहा
पृथ्वी मुस्कुराया और कहा,”चलिए फिर अंदर चलकर सबके सामने मांगूंगा और आप मना नहीं करेंगे”
“हम्म्म,,,,,,,आओ”,कहकर विश्वास जी पृथ्वी के साथ अंदर चले आये। सभी हॉल में जमा थे , मयंक और कौशल चाचा मुस्कुराते हुए पृथ्वी को देख रहे थे। सीमा भी सबके लिए चाय लेकर हॉल में चली आयी।
पृथ्वी ने विश्वास जी से बैठने का इशारा किया , उसने एक नजर सबको देखा और कहा,”मैं यहाँ एक मेहमान बनकर आया था लेकिन आप लोगो से मिलकर लगा जैसे अपने ही परिवार के बीच हूँ , आप सभी मुझे बहुत अच्छे लगे इसलिए नहीं कि आपने मेरे साथ अच्छा बर्ताव किया बल्कि इसलिए कि आपने एक अनजान की बात सुनी और उसे इतनी अहमियत दी कि अवनि को फिर से अपना लिया। थैंक्यू सो मच और अंकल ने अभी मुझसे कहा कि मैं उन से कुछ माँगू तो मैं आप सबके सामने कुछ मांगना चाहता हूँ”
पृथ्वी की बात सुनकर सलोनी ने दीपिका के कान में धीरे से कहा,”कही ये पापा से तुम्हारा हाथ तो नहीं मांगने वाला”
“चुप रहो , बिना सोचे समझे कुछ भी बोलती हो,,,,,,,!!”,दीपिका ने सलोनी को फटकार लगायी
“हाँ पृथ्वी कहो ना तुम्हे क्या चाहिए ?”,कौशल चाचा ने कहा
“अवनि,,,,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने एक गहरी साँस लेकर कहा
पृथ्वी के मुँह से अवनि का नाम सुनकर सभी हैरानी से उसे देखने लगे लेकिन पृथ्वी ने अगले ही पल सबकी हैरानी दूर कर दी और कहा,”अवनि को आप लोग कभी ये नहीं बताएँगे कि आप सब मुझसे मिल चुके है”
पृथ्वी की बात सुनकर सबको और ज्यादा हैरानी हुई कि वह ऐसा क्यों कह रहा है ? जबकि घरवालो के हिसाब से पृथ्वी और अवनि एक दूसरे को नहीं जानते।
“तुम ऐसा क्यों कह रहे हो , क्या तुम अवनि को जानते हो ?”,मयंक चाचा ने शकभरे स्वर में पूछा
“अह्ह्ह्हह नहीं , मैं उसे नहीं जानता,,,,,,!!”,पृथ्वी झूठ बोल गया
“फिर तुमने अवनि को तुम्हारे बारे में बताने से मना क्यों किया ?”,कौशल चाचा ने पूछा जबकि विश्वास जी अभी भी हैरानी से पृथ्वी को देख रहे थे
पृथ्वी कुछ देर खामोश रहा और कहने लगा,”अगर आप लोगो ने अवनि को मेरे बारे में बताया तो उसे लगेगा मेरी वजह से आप सब ने उसे माफ़ किया है और फिर से इस घर में जगह दी है। ऐसा हुआ तो वह कभी उस दर्द को अपने दिल से निकाल नहीं पायेगी जो आप लोगो से दूर रहकर उसे हुआ।
एक अनजान के कहने या समझाने पर आपने अपने दिलो की नफरत खत्म कर दी है जब उसे ये पता चलेगा तो उसका दिल फिर से टूट जाएगा और इसके बाद वह कभी पुरे दिल से आप सबको , इस घर को , आपके प्यार और परवाह को स्वीकार नहीं कर पायेगी। एक मलाल हमेशा के लिए उसके मन में रह जाएगा और मैं ये नहीं चाहता,,,,,,,,,,,मेरे लिए इतना ही काफी है कि आप सबने मुझे इतना मान सम्मान दिया और मेरी बातों को इतनी अहमियत दी,,,,,,,,बस इस से ज्यादा मुझे कुछ नहीं चाहिए”
पृथ्वी ने अपनी बात खत्म की और खामोश हो गया। कौशल और मयंक ने एक दूसरे को देखा , पृथ्वी की बात में सच्चाई तो थी। अगर घरवाले अवनि को पृथ्वी के बारे में बताकर उसे घर लाये तो यकीनन अवनि के मन में एक मलाल रहेगा और हो सकता है वह पहले की तरह घरवालो पर पहले जैसा विश्वास ही ना कर पाए। विश्वास जी ने सुना तो उठे और पृथ्वी के सामने आकर उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा,”ये कहकर आपने सच में मेरा दिल जीत लिया बेटा , खुश रहो”
विश्वास जी को पृथ्वी की बात पर सहमत देखकर बाकि सब भी सहमत हो गए लेकिन दीपिका को थोड़ा अजीब लगा , आखिर एक अनजान होकर भी पृथ्वी इस घर के लिए , अवनि के लिए इतना सब क्यों कर रहा था ? दीपिका सबके बीच थी इसलिए कुछ नहीं कहा लेकिन वह पृथ्वी से बात करना चाहती थी और जानना चाहती थी कि आखिर पृथ्वी ये सब क्यों कर रहा है ?
विश्वास जी उनका परिवार वापस मिल चुका था , अवनि को वे माफ़ कर चुके थे। सभी नाश्ते की टेबल पर आ बैठे और एक बार फिर पृथ्वी की खातिरदारी में लग गए , इस बार तो पहले से भी ज्यादा आखिर पृथ्वी ने घर का माहौल इतना अच्छा जो कर दिया था। नाश्ता करने के बाद पृथ्वी कुछ देर सभी बच्चो के साथ बैठा और बातें करने लगा। हॉल में बैठे पृथ्वी की नजर घडी पर पड़ी जिसमे साढ़े दस बज रहे थे
पृथ्वी को याद आया उसने सुरभि से 10 बजे घाट पर मिलने को कहा था। पृथ्वी जल्दी से उठा और कार्तिक से उसकी बाइक की चाबी लेकर घर से निकल गया। कार्तिक ने साथ आने की बात कही तो पृथ्वी ने मना कर दिया और चला गया।
गणगौर घाट , उदयपुर
पृथ्वी बाइक पार्किंग में लगाकर घाट पर आया , उसके पास ना सुरभि का नंबर था ना ही वह सोशल मिडिया पर सुरभि को फॉलो करता था इसलिए उसे अब सुरभि को ऐसे ही ढूँढना था। पृथ्वी की किस्मत अच्छी थी कि कुछ देर ढूंढने के बाद ही उसे सीढ़ियों पर खड़ी सुरभि दिखाई दी पृथ्वी भागते हुए उसके पास आया और जैसे ही सुरभि गुस्से से उसकी तरफ पलटी पृथ्वी ने अपने दोनों हाथो को ऊपर उठा दिया और कहा,”आई ऍम सो सॉरी मैं भूल गया था,,,,,,,!!”
“हहहहह भूल गए , तुम मुझसे मिलना कैसे भूल सकते हो मिस्टर पृथ्वी उपाध्याय ? मैं तुम्हारी लव स्टोरी की सबसे मैन कैरेक्टर हूँ मैं नहीं होती तो तुम्हारी लव स्टोरी कभी शुरू ही नहीं होती समझे तुम,,,,,,,,,!!”,सुरभि ने लगभग पृथ्वी पर चढ़ते हुए कहा
अब पृथ्वी तो ठहरा पृथ्वी , वह सुरभि के बगल में आया उसके कंधो पर अपनी बाँह रखी और उसे लेकर आगे बढ़ते हुए कहा,”अवनि से लव करना मेरा टेलेंट है तुम बीच में क्रेडिट मत लो समझी,,,,,,,अब मेरे साथ चलो और मुझे सब बताओ”
“हहहहह क्या सब बताओ ? तुम मुझे बताने वाले थे कि तुम यहाँ क्या कर रहे हो ?”,सुरभि ने पृथ्वी के साथ चलते हुए चिढ़े हुए स्वर में कहा
पृथ्वी आज अच्छे मूड में था इसलिए जिस हाथ को कंधे पर रखा था उसी हाथ से उसका गाल खींचकर कहा,”अरे मेरी रसमलाई बताता हूँ ना जल्दी क्या है ? पहले चलकर मुझे अच्छी सी चाय पिलाओ , चाय पीते पीते बताता हूँ”
सुरभि पृथ्वी के साथ घाट से बाहर चली आयी , वह पृथ्वी को लेकर चाय की दूकान पर आयी दो कप चाय ली और दोनों चाय पीते हुए बाते करने लगे। पृथ्वी ने सुरभि को अपने उदयपुर आने की असली वजह बताई तो सुरभि ये सब सुनकर हैरान रह गयी लेकिन साथ ही खुश भी हुई कि पृथ्वी अवनि के इतना सब कर रहा है
साथ ही पृथ्वी ने सुरभि को अपनी कसम देकर उस से ये वादा भी ले लिया कि वह अवनि को कुछ नहीं बताएगी। सुरभि जो कि अवनि के प्रति ईमानदार थी लेकिन अब पृथ्वी से भी उसका अच्छा रिश्ता बन चुका था इसलिए उसने पृथ्वी की बात मान ली।
“तो अब ?”,सुरभि ने चाय का खाली कप डस्टबिन में डालकर पृथ्वी से कहा
पृथ्वी ने अपना कप डस्टबिन में डाला और उठकर अंगड़ाई लेते हुए कहा,”अब मुझे अवनि के ना हो सके दूल्हे राजा से मिलना है”
सुरभि ने सुना तो हैरानी से पृथ्वी को देखने लगी और पृथ्वी मंद मंद मुस्कुरा उठा !
( आखिर पृथ्वी ने अवनि से घरवालों को क्यों कहा कहा कि वे अवनि को उसके बारे में ना बताये ? क्या विश्वास जी जान पाएंगे पृथ्वी के उदयपुर आने की असल वजह ? आखिर पृथ्वी किस दूल्हे राजा से मिलने की बात कर रहा है ? जानने के लिए पढ़ते रहे “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
