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Pasandida Aurat – 94

Pasandida Aurat – 94

Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी अवनि के घर में था उसके पुरे परिवार के साथ और विश्वास जी ने उसे सबसे अपना दोस्त कहकर मिलवाया लेकिन पृथ्वी ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि विश्वास जी ने पृथ्वी को अपना दोस्त क्यों कहा जबकि वह तो उनके बेटे की उम्र का है ? पृथ्वी , मयंक और कार्तिक हॉल में बैठे थे। सीमा और मीनाक्षी रसोई में थी साथ ही दीपिका भी उनकी मदद कर रही थी। अंशु और नितिन दोनों सीढ़ियों पर बैठे पृथ्वी की दी हुई चॉकलेट खा रहे थे। विश्वास जी अपने कमरे में फोन पर वकील साहब से बात कर रहे थे।

कार्तिक से बात करते हुए पृथ्वी काफी सहज था और साथ ही घर भी देख रहा था। जितना बड़ा अवनि के घर का हॉल था उतना तो पृथ्वी का पूरा फ्लेट था। मीनाक्षी पृथ्वी के लिए पानी लेकर हॉल में चली आयी , उसने पानी का गिलास पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिया।
“थैंक्यू”,पृथ्वी ने ट्रे से गिलास उठाकर कहा
“आप सच में मुंबई से आये है ?”,मीनाक्षी ने दबी आवाज में पूछा
“जी,,,,,!”,पृथ्वी ने कहा

“फिर तो आपने वहा अमिताभ बच्चन , शाहरुख़ खान और माधुरी दीक्षित को सामने से देखा होगा ?”,मीनाक्षी ने आँखे चमकाते हुए पूछा
“हाँ देखा है,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा
“अगर मैं कभी मुंबई आयी तो आप मुझे उनसे मिलवा देंगे क्या ? वो क्या है ना माधुरी दीक्षित मुझे बहुत ही अच्छी लगती है,,,,,,उनका वो गाना है न तेरा करू दिन गिन गिन के इंतजार , आजा पिया आई बहार”,मीनाक्षी ने कहा और कहा क्या वह गाना गाते हुए माधुरी दीक्षित की तरह डांस भी करने लगी

मयंक ने देखा तो दबी आवाज में मीनाक्षी को झिड़ककर कहा,”मीनाक्षी ! क्या कर रही हो ? मेहमान है वो,,,,,,,,,अंदर जाओ”
“अह्ह्ह्ह हहहह हां मैं मैं आपके लिए नाश्ता लेकर आती हूँ,,,,,,,,!!”,मीनाक्षी ने झेंपते हुए कहा और रसोई की तरफ भाग गयी। पृथ्वी पानी का गिलास हाथ में पकडे मुस्कुरा उठा। मयंक ने देखा तो झेंपते हुए कहा,”वो एक्चुली मीनाक्षी थोड़ी फ़िल्मी है तो,,,,,,,,,!!”

“इट्स ओके,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा और इसके बाद मयंक पृथ्वी से उसके बारे में बात करने लगा। कार्तिक को मयंक ने मार्किट से गर्म समोसे लाने भेज दिया। हालाँकि मयंक पृथ्वी की सच्चाई नहीं जानता था ना ही घर में किसी को ये पता था कि पृथ्वी अवनि को जानता है या उस से मिल चुका है।
“माफ करना बेटा ! एक जरुरी फोन था तो थोड़ा समय लग गया”,विश्वास जी ने आकर सोफे पर बैठते हुए कहा
“जी कोई बात नहीं,,,,,,,,,आपका घर बहुत सुन्दर है,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा

“ये घर मैंने अपनी मेहनत से बनवाया है बेटा , इसकी जो बनावट देख रहे हो वो मेरे पिताजी के समय की है उनके बाद इस घर में हमेशा बस रंग-रोगन हुआ कभी इसकी एक ईंट भी यहाँ से वहा नहीं हुई,,,,,,,,,,बहुत सम्हाल कर रखा है इस घर को”,विश्वास जी ने कहा तो पृथ्वी मुस्कुरा दिया
मीनाक्षी , सीमा और दीपिका पृथ्वी और बाकि सब के लिए चाय-नाश्ता ले आयी। पृथ्वी ने देखा टी-टेबल खाने की प्लेटो से पूरा भर चुका है इतना सब एक साथ खाना उसके बस की बात नहीं थी उसने कहा,”इतना सब,,,,,,,,,,,,,,!!”

“अरे ये तो कुछ भी नहीं है बेटा , हमारे यहाँ मेहमानों का आदर सत्कार ऐसे ही किया जाता है,,,,,,,,, आप शुरू करो”,विश्वास जी ने कहा
“अरे पृथ्वी तुम तो अभी से घबरा गए , लगता है राजस्थान पहली बार आये हो ?”,मयंक चाचा ने हँसते हुए कहा
“पहले भी एक बार आ चुका है लेकिन ऐसे सबके साथ बैठकर पहली बार खा रहा हूँ”,पृथ्वी ने कहा

विश्वास जी ने देखा पृथ्वी कुछ भी लेने से झिझक रहा है तो उन्होंने खुद ही पृथ्वी के लिए प्लेट में नाश्ता परोसा और उसकी तरफ बढ़ा दिया। दीपिका को वहा ऐसे रुकना ठीक नहीं लगा तो वह ऊपर अपने कमरे में चली गयी। मीनाक्षी और सीमा भी वही बैठ गयी और सभी पृथ्वी से बातें करने लगे।

चाय नाश्ते के बाद पृथ्वी थोड़ी देर सबके साथ बैठा और कुछ देर बाद उसका फोन बजा। पृथ्वी ने देखा फोन घर से है तो वह उठा और कहा,”मैं ज़रा एक कॉल अटेंड करके आया”
“हाँ हाँ आराम से बात करो”,मयंक ने कहा तो पृथ्वी फोन कान से लगाए बाहर लॉन में आ गया। इस बार भी पृथ्वी ऑफिस मीटिंग का बहाना बनाकर आया था हालाँकि आने से पहले उसने लता को बताया भी था लेकिन अचानक उनका फोन देखकर पृथ्वी टेंशन में आ गया उसने फोन उठाया और लता से बात करने लगा।

लता ने उसे बस हाल चाल पूछने के लिए फोन किया था। पृथ्वी लता से बात करके वापस अंदर चला आया।
विश्वास जी ने पृथ्वी को रोक तो लिया लेकिन अब वह रहेगा कहा विश्वास जी यही सोच रहे थे कि तभी मयंक ने कहा,”भाईसाहब ! ऊपर अवनि का कमरा पिछले सालभर से खाली है , पृथ्वी वहा रह जायेगा”

मयंक चाचा के मुँह से अवनि का नाम सुनकर पृथ्वी का दिल धड़क उठा। इस घर में आने के बाद पहली बार पृथ्वी उसका नाम सुन रहा था जिस से उसे लगा कि इस घर में अभी तक उसे कोई भुला नहीं है। 
“हाँ ! ये सही रहेगा,,,,,,,पृथ्वी बेटा आओ आपको कमरा दिखा दू”,विश्वास जी ने कहा
 पृथ्वी अपना बैग लेकर विश्वास जी के साथ सीढिया चढ़ने लगा , जैसे जैसे सीढ़ी चढ़ रहा था उसका मन भारी हो रहा था क्योकि पृथ्वी जानता था उस कमरे में उसे अवनि कही दिखाई नहीं देगी।

पिछले 6 महीनो से उसने अवनि को देखा तक नहीं था और बस हर दिन यही दुआ कर रहा था कि एक बार तो उसे अवनि की झलक दिखाई दे। विश्वास जी उसे अवनि के कमरे में लेकर आये और कहा,”आप यहाँ रुक जाईये और किसी भी चीज की जरूरत हो तो बेझिझक कहना बेटा,,,,इसे अपना ही घर समझना”
“जी थैंक्यू”,पृथ्वी ने कहा
“आप आराम कीजिये इतनी दूर से आये है थक गए होंगे , मैं नीचे जाता हूँ फिर शाम में चलते है ये शहर घूमने”,विश्वास जी ने कहा
“जी जरूर”,पृथ्वी ने मुस्कुरा कर कहा

विश्वास जी कमरे से बाहर निकल गए और जाते जाते कमरे का दरवाजा बंद कर दिया। पृथ्वी ने अपने कंधे से बैग उतारा और बिस्तर पर रखा उसने बड़े प्यार से उस कमरे को देखा। कमरा बहुत ही साफ सुथरा और व्यवस्तिथ नजर आ रहा था। एक एक चीज करीने से जमाई हुई थी। कमरे की एक दिवार पर अवनि की प्यारी सी तस्वीर थी। पृथ्वी उस तस्वीर के सामने चला आया और प्यार से उसे देखने लगा। तस्वीर में अवनि टेबल के सामने कुर्सी पर बैठी मुस्कुराते हुए कोई खत लिख रही थी।

पृथ्वी एकटक उस तस्वीर को देखता रहा और फिर अपने फोन में उस तस्वीर की फोटो क्लिक करके धीरे से बुदबुदाया,”काश ! किसी रोज तुम मेरे लिए भी ऐसे ही खत लिखती तो उन खतों को मैं ताउम्र सम्हाल कर रखता,,,,,जानती हो क्यों क्योकि इंस्टाग्राम व्हाट्सप्प के ज़माने में किसी के लिए ख़त लिखना आज भी संसार की सबसे खूबसूरत घटनाओ में से एक है”

उस तस्वीर के सामने से हटकर पृथ्वी बिस्तर की तरफ चला आया , वह उस कमरे की हर एक चीज को छूकर देख रहा था बस इस ख्याल के साथ कि कभी न कभी अवनि ने भी उन्हें छुआ होगा। पृथ्वी कमरे की खिड़की के पास चला आया और उसे खोल दिया तो हवा का एक झोंका आया और पृथ्वी के चेहरे को छूकर गुजरा उसी के साथ पृथ्वी ने आँखे मूँद ली , खिड़की से आती हवा में उड़ते परदे पृथ्वी के चेहरे को सहलाने लगे , ऐसा लग रहा था जैसे अवनि की नाजुक उंगलिया उसके चेहरे को छूकर गुजरी हो। अवनि के ना होने पर भी पृथ्वी उसकी मौजूदगी को महसूस कर रहा था।

उसने धीरे से अपनी आँखे खोली उसके बाल बिखकर ललाट पर आ गए। वह अपने हाथो को बांधकर खिड़की के किनारे खड़ा हो गया और बाहर देखते हुए धीरे धीरे खुद से ही कहने लगा,”मैं इस घर में कभी ऐसे नहीं आना चाहता था अवनि , मैं तो बारात लेकर हमेशा के लिए तुम्हे लेने आना चाहता था पर शायद हमारी किस्मत को कुछ और ही मंजूर है,,,,,,,,तुम्हारे घरवाले बहुत अच्छे है , हाँ मानता हूँ बीते वक्त में इन से गलतिया हुई है लेकिन वो गलतिया इसलिए हुई क्योकि इन्हे समझाने वाला कोई नहीं था ,,

सच क्या है , सही गलत क्या है , ये दिखाने वाला कोई नहीं था,,,,,,,मैं जितना तुम से दूर जाने का सोचता हूँ मेरी किस्मत मुझे तुम्हारे उतना ही करीब ले आती है,,,,,,,,,!!!”
कहते हुए पृथ्वी मुस्कुराया और मुस्कुराते हुए बिस्तर पर बैठते हुए कहा,”तुम जो अपने दिल के दरवाजे मेरे लिए बंद करके बैठी हो , यहाँ आओ और देखो किस्मत ने मेरे लिए तुम्हारे कमरे के दरवाजे खोले है,,,,,,,,,,,क्या अब भी तुम कहोगे हम एक दूसरे की किस्मत में नहीं है ,

तुम कह सकती हो क्योकि तुमने अब तक अपनी जिंदगी में सिर्फ तकलीफ ही देखी है लेकिन मैं वादा करता हूँ अवनि तुम्हारी हर तकलीफ को ख़ुशी में बदल दूंगा,,,,,,,,,,क्या कहा था तुमने उस दिन मुझसे पापा तुमसे बात नहीं करते , चाचा लोग तुमसे नाराज है और चाची लोगो को तुम्हे ताने मारती है,,,,,,और अगर मैं कहू कि आज के बाद ये सब लोग तुम से प्यार करेंगे तो कैसा रहेगा ? अवनि अवनि अवनि कितनी मासूम हो ना तुम तुमने इन सबके नफरत करने की , ताने मारने की , गुस्सा होने की वजह तो देखी लेकिन तुमने कभी उस वजह को खत्म करने का नहीं सोचा,,,,,,

अपने हक़ में बोलने के बजाय तुमने उनके थोपे गए फैसलों को स्वीकार कर लिया और आज तुम तकलीफ में हो पागल लड़की,,,,,,हो सकता है मैं गलत हूँ लेकिन लोगो को पढ़ने का मेरा हुनर गलत नहीं हो सकता,,,,,,,,ये सब बदल जायेंगे , सब तुमसे इतना प्यार करेंगे कि तुमने कभी सोचा भी नहीं होगा,,,,,,!!”
पृथ्वी अपने दिल का हाल अवनि के बजाय उसके कमरे को सुना ही रहा था कि तभी उसका फोन बजा। पृथ्वी ने देखा फोन नकुल का था।

पृथ्वी ने फोन उठाकर कान से लगा लिया वह कुछ कहता इस से पहले नकुल की आवाज उसके कानों में पड़ी,”कमीने तू फिर से राजस्थान चला गया , लास्ट टाइम क्या हुआ था भूल गया”
पृथ्वी पहले तो हंसा और फिर कहा,”लास्ट टाइम पिटकर आया था इस बार पीटकर आऊंगा”
“तू फिर उस लड़की से मिलने गया है ना,,,,,,,,भाई 7 महीने हो चुके है अब तो भूल जा उसे”,नकुल ने हताशा भरे स्वर में कहा
“एक बात बता तेरी धड़कन कब रुकेगी ?”,पृथ्वी ने अजीब सवाल किया
“जब मैं मर जाऊंगा”,नकुल ने चिढ़कर कहा

“राइट ! तो समझ ले जिस दिन मेरी धड़कने रुकी उस दिन मै भी अवनि को भूल जाऊंगा”,पृथ्वी ने कहा तो नकुल कुछ देर के लिए खामोश हो गया। उसे अवनि और पृथ्वी के रिश्ते से प्रॉब्लम नहीं थी वह बस पृथ्वी को लेकर थोड़ा चिंता में था इसलिए कहा,”मैंने बस ऐसे ही तुझे फोन किया और मैं तुझे उस से मिलने से नहीं रोकने वाला बस अपना ध्यान रखना”
“मैं उस से मिलने नहीं आया”,पृथ्वी ने कहा
“मतलब ? उस से मिलने नहीं गया तो फिर तू वहा गया क्यों है ?”,नकुल ने हैरानी से पूछा

“मैं अवनि के पापा के घर में हूँ , उनसे मिलने आया हूँ”,पृथ्वी ने कहा
“अब तू ये मत बोलना कि तू उनसे शादी के लिए अवनि का हाथ माँगने आया है”,नकुल ने और भी हैरानी से कहा
“हाथ का मैं क्या करूंगा मुझे तो पूरी अवनि चाहिए”,पृथ्वी ने कहा
 “हाह ! तुम्हारे अंदर का आशिक़ फिर जाग गया , अब ये बताओ तुम उसके पापा के घर में क्या कर रहे हो ?”,नकुल ने पूछा तो पृथ्वी ने उसे थोड़ी बाते बताई और ये बताया कि कैसे विश्वास जी उसे अपने घर लेकर आये और उसकी आव भगत की।

ये सुनकर नकुल ने कहा,”बेटा पृथ्वी ! कही ऐसा तो नहीं मेहमान नवाजी के बाद ससुर जी फुर्सत से आपका बैंड बजाने की सोच रहे हो , जैसे बकरे को हलाल करने से पहले खूब अच्छे से खिलाया पिलाया जाता है वैसे ही,,,,,,,,!!”
“तुम कितनी नेगेटिव बाते करते हो ऐसा कुछ नहीं है , मैं उन से पहले भी मिल चुका हूँ वो मेरे और अवनि के बारे में कुछ नहीं जानते,,,,,,मैं उनके लिए बस एक अजनबी हूँ जिस से वे कुछ महीनो पहले स्टेशन पर टकराये थे,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने अपनी तरफ से क्लियर करके कहा

“हम्म्म फिर भी ख्याल रखना अपना,,,,,,अच्छा पृथ्वी”,नकुल ने एकदम से कहा
“हम्म्म,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा
“तू सच में बहुत अच्छा है यार,,,,,,,,मतलब जिस लड़की से तू प्यार करता है उसके लिए ये सब करने की हिम्मत सब में नहीं होती है , कोई तेरा साथ दे या ना दे मैं तेरे साथ हूँ,,,,,,,,,!!!”,नकुल ने भावुक होकर कहा
पृथ्वी मुस्कुराया और कहा,”मैं नहीं जानता वो मेरी किस्मत में है या नहीं , मैं अब बस उसे खुश देखना चाहता हूँ यार”

“वो तेरी किस्मत में है , वो तुझे ही मिलेगी और देखना साले तेरे जितना प्यार उसे कोई कर भी नहीं पायेगा,,,,,,,जिस दिन इस बात का अहसास होगा ना उसे भागते हुए आएगी तेरे पास,,,,,,,,,!!”,नकुल ने कहा
“चल ठीक है अभी मैं रखता हूँ , फ्रेश हो जाता हूँ फिर मुझे बाहर जाना है”,पृथ्वी ने कहा और फोन रख दिया।
पृथ्वी यहाँ आराम करने या घूमने नहीं आया था बल्कि वह आया था किसी खास मकसद से , पृथ्वी ने बैग से कपडे निकाले और नहाने चला गया। नहाकर तैयार होकर पृथ्वी नीचे चला आया। मयंक ने अपना खुद का कारोबार शुरू कर लिया था इसलिए वह वहा चला गया।

अंशु और नितिन के स्कूल की छुट्टी थी लेकिन सीमा ने उन्हें शाम के बजाय दोपहर में ही ट्यूशन भेज दिया क्योकि दीपावली के बाद ही उनके हाफ इयरली एग्जाम थे। पृथ्वी नीचे आया तो कार्तिक ने कहा,”अरे भैया ! मुझे लगा आप रेस्ट कर रहे होंगे”
“वो तो मैं घर जाकर कर लूंगा , वैसे अंकल दिखाई नहीं दे रहे ?”,पृथ्वी ने पूछा
“ताऊजी बाहर गए है,,,,,,,,,,,,!!”,कार्तिक ने कहा

“ताऊजी ?”,पृथ्वी ये नाम पहली बार सुन रहा था इसलिए उसने हैरानी से पूछा
“अह्ह्ह हमारे यहाँ बड़े पापा को ताऊजी कहते है,,,,,,,,,!!”,कार्तिक ने कहा तो पृथ्वी ने हामी में सर हिला दिया
“आप बाहर कही जाना चाहते है ? मेरी बाइक ले जाईये या मैं आपको लेकर चलता हूँ”,कार्तिक ने कहा उसे तो बस पृथ्वी के साथ वक्त बिताने का बहाना चाहिए था ताकि उस से जिम वगैरह के बारे में बातें कर सके।

“ठीक है चलते है”,पृथ्वी ने कहा तो कार्तिक उसे अपने साथ लेकर घर से निकल गया। कार्तिक ने उसे शहर घुमाया , उदयपुर की फेमस जगह भी दिखाई और खाना दोनों ने बाहर ही खाया , शाम होते होते दोनों घाट चले आये। मौसम अच्छा था ना ज्यादा गर्मी ना ज्यादा ठण्ड घाट पर आकर पृथ्वी को लगा जैसे वह बनारस में आ गया है। वही अहसास , वही शांति , वही सुकून सब वही था। पृथ्वी कार्तिक से बातें करते हुए घाट घूमने लगा। इस पुरे वक्त में पृथ्वी अगर सबसे ज्यादा किसी को मिस कर रहा था तो वो थी अवनि , ये शहर अवनि का था और वह उसके साथ इस शहर में घूमना चाहता था।

शाम होते होते दोनों घाट से बाहर चले आये और कार्तिक ने कहा,”भैया ! चलिए आपको यहाँ की स्पेशल चाट खिलाता हूँ”
पृथ्वी ने हामी भर दी तो कार्तिक उसे अपनी बाइक पर लेकर चल पड़ा। कुछ देर बाद दोनों मार्किट पहुंचे पृथ्वी ने देखा मुंबई के जैसे यहाँ भी एक फ़ूड मार्किट लगता है। कार्तिक पृथ्वी के लिए एक प्लेट लेकर आया और उसे देकर कहा,”आप खाइये मैं अपने लिए लेकर आता हूँ”

कार्तिक के जाने के बाद पृथ्वी चाट खाने लगा , टेस्ट काफी अच्छा था अभी उसने एक निवाला खाया ही था कि किसी ने उसके कंधे को थपथपाया। पृथ्वी जैसे ही पलटा निवाला उसके मुँह में ही रह गया और उसके चेहरे पर परेशानी के भाव झिलमिलाने लगे।

( क्या पृथ्वी बदल पायेगा अवनि के लिए घरवालों की सोच ? आखिर क्यों है पृथ्वी को अब भी अपनी किस्मत पर यकीन ? क्या पृथ्वी फिर किसी मुसीबत में फसने वाला है ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal
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