Site icon Sanjana Kirodiwal

Pasandida Aurat – 87

Pasandida Aurat – 87

Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी के घरवाले उसके खिलाफ थे और लता ने उसे धर्मसंकट में डाल दिया। पृथ्वी के सामने एक बड़ी समस्या थी जिसका कोई हल उसे नजर नहीं आ रहा था। वह अपने घरवालों को परेशान नहीं कर सकता था लेकिन वह अवनि को भी खुद से दूर नहीं कर सकता था। पृथ्वी को खामोश देखकर सबने फिर बोलना शुरू कर दिया और इस बार भी सबने अवनि के खिलाफ ही कहा और इन सब के लिए उसे जिम्मेदार ठहराया। सबको बस यही लग रहा था कि अवनि ने पृथ्वी को फंसाया है जबकि ऐसा नहीं था।

पृथ्वी को खामोश देखकर लता ने कहा,”चुप क्यों हो पृथ्वी जवाब दो ? आज के बाद तुम उस लड़की से बात से नहीं करोगे , उस से सारे रिश्ते तोड़ दोगे और अगर तुमने उस से बात की या कोई रिश्ता रखा तो तुम मेरा मरा मुँह देखोगे,,,,,,,,,,,!!!”
“आई,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने दर्दभरे स्वर में कहा , लता की बात सुनकर उसके मुँह से बस यही एक शब्द निकल पाया। लता उसे अवनि से सारे रिश्ते तोड़ने के लिए कह रही थी। वे पृथ्वी को हमेशा हमेशा के लिए अवनि से दूर जाने को कह रही ही , वे पृथ्वी से अवनि को भूल जाने के लिए कह रही थी।


पृथ्वी ख़ामोशी से लता को देखता रहा , उसे इस वक्त कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे और क्या नहीं ? , अब तक वह अवनि को कितनी ही उम्मीदे
दे चुका था कि वह उसकी जिंदगी में सब ठीक कर देगा और आज वही अवनि की जिंदगी में सबसे बड़ा दर्द बनने जा रहा था। लता ने पृथ्वी से ऐसी बात कह दी जिसका विरोध पृथ्वी चाहकर भी नहीं कर सकता था।

पृथ्वी को खामोश देखकर लता ने अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ाया और कहा,”मेरे हाथ पर अपना हाथ रखकर कसम खाओ पृथ्वी कि आज के बाद तुम उस लड़की से कभी बात नहीं करोगे,,,,,,,,,तुम उस से हमेशा के लिए दूर चले जाओ , मेरी कसम खाकर ये वादा करो पृथ्वी,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी का दिल धड़क रहा था , चेहरे पर दर्द के भाव थे उसने पलटकर एक नजर सबको देखा कमरे में खड़ा एक भी शख्स उसके साथ नहीं था , सब उसके खिलाफ थे और ये देखकर पृथ्वी का दिल टूट गया।

उसने लता की तरफ देखा और नम आँखों से अपना हाथ उनके हाथ की तरफ बढ़ा दिया। उसका हाथ काँप रहा था , दिल अंदर ही अंदर टूटकर बिखर रहा था और साँसे जैसे गले में जम गयी हो। उसने अपना हाथ लता के हाथ पर रखा और काँपते स्वर में कहा,”मैं आपकी कसम खाकर वादा करता हूँ आई आज के बाद मैं उस से कभी बात नहीं करूंगा , मैं बस एक आखरी बार उस से बात करना चाहता हूँ”


“हम्म्म,,,,,,!!!”,लता ने नम आँखों के साथ कहा
पृथ्वी उठा और धीरे धीरे वहा से चला गया। पृथ्वी के जाने के बाद बाकि सब भी वहा से चले गए। लक्षित और रवि जी लता के पास आ बैठे और पृथ्वी को लेकर बात करने लगे।

अपना टुटा हुआ दिल लेकर पृथ्वी अपने कमरे में चला आया। उसने अपने फोन से अवनि को फोन लगाया लेकिन उसके हाथ काँप रहे थे। वह अवनि से क्या कहेगा सोचकर ही उसका दिल तकलीफ से भरा जा रहा था। पृथ्वी ने रिंग जाने से पहले ही कॉल कट कर दिया। उसने एक गहरी साँस ली और अपनी आँखों में आये आँसुओ को बहने से रोक लिया। उसने कभी सोचा नहीं था कि उसकी जिंदगी में ऐसा भी कोई मोड़ आएगा जब उसे खुद अपने ही हाथो से अवनि को खुद से दूर करना होगा।


पृथ्वी ने काँपती उंगलियों से अवनि को लिखकर भेजा
“मैडम जी”
अवनि ने जैसे ही पृथ्वी का मैसेज देखा उसने जल्दी से लिखकर भेजा
– तुम्हारी आई ठीक है न पृथ्वी ?
“हाँ वो ठीक है , बस एक माइनर अटैक था अभी घर ले आये है उन्हें”
– महादेव का शुक्र है कि वो ठीक है , मैं तुमसे रिक्वेस्ट करती हूँ पृथ्वी प्लीज , प्लीज अब ऐसा कुछ मत करना जिस से तुम्हारी फॅमिली को प्रॉब्लम हो


“मैंने सबसे बात की मैडम जी लेकिन , लेकिन कोई मेरी बात सुनने को तैयार ही नहीं है। सब आपको गलत समझ रहे है,,,,,,,,,,मैं क्या करू ? कैसे समझाऊ इन सब को,,,,,,,!!”
– तुम्हे किसी को समझाने की जरूरत नहीं है पृथ्वी और उन्होंने मुझे गलत समझा भी है तो कोई बात नहीं मुझे बुरा नहीं लगेगा , हमारा मिलना किस्मत में नहीं लिखा पृथ्वी और इसके लिए तुम प्लीज अपनी फॅमिली को तकलीफ मत दो
“अगर हमारा मिलना किस्मत में नहीं लिखा है तो फिर आप मेरी जिंदगी में आयी ही क्यों ? क्यों मैं आपसे मिला , क्यों मुझे आपसे प्यार हुआ ? क्यों मैंने आपके साथ सपने देखे मैडम जी ?”


– किसी भी इंसान का हमारी जिंदगी में आना हमारे हाथ में नहीं होता है पृथ्वी , हो सकता है हमारा साथ यही तक हो,,,,,,,,,मैं तुम्हे अपना भी लू तो इस बात का दुःख मुझे जिंदगीभर रहेगा कि मैंने अपने स्वार्थ के लिए तुम्हे तुम्हारे घरवालों से दूर कर दिया। मैं तुम्हारे बिना रह सकती हूँ पृथ्वी लेकिन तुम्हारे माँ-बाप की बददुदा लेकर तुम्हारे साथ नहीं रह सकती,,,,,,,,तुम बहुत अच्छे लड़के हो पृथ्वी बस हम एक दूसरे से गलत वक्त पर मिले है
“मैं आपको कभी भूल नहीं पाऊंगा , मैडम जी”


– वक्त के साथ सब ठीक हो जायेगा पृथ्वी , मैं अपने महादेव से दुआ करुँगी तुम खुश रहो और मुझे भूल जाओ
“आज के बाद आपसे बात नहीं कर पाऊंगा मैडम जी,,,,,,,,मैं मजबुर हूँ”
अवनि ने जैसे ही पढ़ा वह नम आँखों के साथ मुस्कुराई और लिखकर भेजा – कोई बात नहीं ! मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं है


“हो सके तो मुझे ब्लॉक कर दीजिये क्योकि मैं खुद ये नहीं कर पाऊंगा”
– हम्म ठीक है कर दूंगी
“अपना ख्याल रखना , मैडम जी”
– हम्म्म तुम भी
इसके बाद पृथ्वी का कोई मैसेज नहीं आया और अवनि ने उसे हमेशा के लिए ब्लॉक कर दिया।

आखरी मैसेज भेजने के बाद पृथ्वी ने अपना फोन साइड में रखा और एक गहरी साँस ली , उसे इस वक्त बहुत तकलीफ हो रही थी ठीक वैसे ही जैसी किसी अपने को खोने के बाद होती है। उसकी आँखों में भरे आँसू बह गए और उसका दिल भारी होने लगा। वह रो पड़ा और आज से पहले शायद ही कभी ऐसा हुआ था जब वह ऐसे रो रहा था। उसका चेहरा लाल होने लगा , आँखे जलने लगी और होंठ काँप रहे थे। लता से उसने जो वादा किया था उसके बाद वह बुरी तरह टूट गया।

मजबूरन उसे अवनि को खुद से दूर करना पड़ा और ये उसके लिए किसी हादसे से कम नहीं था। पृथ्वी रोता रहा तब तक जब तक उसे साँस लेने में तकलीफ न होने लगी। वह बिस्तर पर लेट गया आँसू उसकी आँखों के किनारे से निकलकर कनपटी पर बहने लगे। अवनि के साथ बिताया एक एक पल उसकी आँखों के सामने आने लगा।

अवनि का फ्लेट , सिरोही
पृथ्वी को ब्लॉक करने के बाद अवनि ने अपना फोन साइड में रख दिया और अपना चेहरा अपने हाथो में छुपाकर रोने लगी। पृथ्वी के साथ जो हो रहा था उसके लिए अवनि खुद को जिम्मेदार मानने लगी। सुरभि ने देखा तो अवनि के पास आयी और उसे सम्हाला लेकिन अवनि इस वक्त इतना दुखी थी कि सुरभि भी उसे सम्हाल नहीं पायी। जैसे तैसे करके सुरभि ने उसे शांत करवाया तो अवनि ने उसे सब बता दिया। अवनि की सुनकर सुरभि का भी दिल टूट गया।

ऐसा कुछ होगा इसकी कल्पना सुरभि ने नहीं की थी। यहाँ ना पृथ्वी गलत था ना ही अवनि गलत था तो बस उनका वक्त और उनके वक्त ने उन्हें एक दूसरे से अलग कर दिया।
अवनि थोड़ा शांत हुई तो सुरभि ने कहा,”सब ठीक हो जाएगा अवनि,,,,,,!!!”
“कुछ ठीक नहीं होगा सुरभि , मेरी वजह से आज वो इस हाल में है। ना मेरी उस से कभी बात होती न हम कभी एक दूसरे से मिलते और ना ये सब होता,,,,,,,,उसे उसे मेरी जिंदगी में आना ही नहीं चाहिए था सुरभि”,अवनि ने रोआँसा होकर कहा

“अवनि किसी का हमारी जिंदगी में आना हमारे हाथ में नहीं होता है , महादेव ने अगर तुम दोनों को एक दूसरे से मिलवाया है तो भरोसा रखो उन्होंने तुम दोनों की जिंदगी में कुछ बेहतर भी लिखा होगा,,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने अवनि को समझाते हुए कहा
“और बेहतर अब यही होगा कि वो मुझे भूलकर अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाए और जहा उसके घरवाले चाहते है वहा शादी कर ले”,अवनि ने तड़पकर कहा


“अच्छा और उसके ऐसा करने से क्या सब ठीक हो जाएगा ? क्या तुम उसे भूल जाओगी ? क्या तुम उसे किसी और से शादी करते देख पाओगी ?”,सुरभि ने गुस्से से कहा क्योकि अवनि की कठोरता देखकर अब वह भी थक चुकी थी
“भूल जाउंगी,,,,,,,,!!”,अवनि ने उतनी ही कठोरता से कहा
“ओह्ह्ह कम ऑन अवनि ! किसे पागल बना रही हो मुझे या खुद को ? तुम उसे नहीं भूलेगी , तुम उसे कभी भूल ही नहीं पाओगी,,,,,,,तुम सब से छुपा सकती हो लेकिन मुझसे नहीं , तुम भी उसे चाहती हो क्या ये सच नहीं है ?”,सुरभि ने उसी गुस्से से कहा


“इन सब बातो का अब कोई मतलब नहीं है सुरभि,,,,,,,,,वो अपनी दुनिया में खुश रहे मैं अपनी दुनिया में खुश हूँ”,अवनि के चेहरे पर अभी भी कठोरता थी
“खुश ? तुम्हे लगता है वो खुश रह पायेगा , जैसा वो है ना अवनि मुझे नहीं लगता आज के बाद वो मुस्कुरा भी पायेगा,,,,,,,,,,तुमने एक बार भी उसे रोकने की कोशिश नहीं की , तुम इतनी पत्थर दिल कैसे हो सकती हो अवनि ?”,सुरभि ने तड़पकर कहा


“उसका चले जाना ही सही था सुरभि , मैं अपने स्वार्थ के लिए उसकी जिंदगी में दर्द नहीं लिख सकती सुरभि , मैं उसे उसके माँ-बाप , परिवार से दूर नहीं कर सकती ,, पृथ्वी की फॅमिली मुझे कभी एक्सेप्ट नहीं करेगी,,,,,,हमारा दूर जाना ही सही है”,अवनि ने इस बार रोआँसा होकर कहा
“ऐसा मत करो अवनि , घरवाले मान जायेंगे ,, मुझे मुझे पृथ्वी पर पूरा यकीन है वो अपने घरवालों को मना लेगा”,सुरभि ने कहा


“प्लीज सुरभि,,,,,,,,,,प्लीज ! मैं अब उसे और तकलीफ देना नहीं चाहती”,अवनि ने कहा और आँसू एक बार फिर उसकी आँखों में भर आये ये देखकर सुरभि को बहुत तकलीफ हुई उसने आगे अवनि से इस बारे में कोई बात नहीं की।
अवनि मुँह धोने बाथरूम में चली गयी और सुरभि उदास सी कमरे से बाहर चली आयी। वह अवनि और पृथ्वी दोनों को ही बहुत पसंद करती थी और चाहती थी दोनों साथ रहे लेकिन किस्मत को शायद कुछ और मंजूर था।  

आज की रात पृथ्वी और अवनि दोनों के लिए क़यामत की किसी रात से कम नहीं थी। दोनों दर्द में थे और दोनों रो रहे थे। देर रात सुरभि ने खाना लगाया और अवनि से खाने को कहा। ऐसे दुःख में भला भूख किसे लगती है लेकिन फिर भी सुरभि के सामने अपनी तकलीफ बया ना करते हुए अवनि हॉल में आ बैठी। सुरभि ने अपने और अवनि के लिए खाना लगाया और दोनों चुपचाप खाने लगी। खाते खाते अवनि को पृथ्वी का ख्याल आया और उसकी कही बातें अवनि के कानो में गुंजी


“मैडम जी ! आपको पता है मैं कभी कभी क्या सोचता हूँ ? किसी दिन हम साथ होंगे , मेरे फ्लेट के किचन में साथ खड़े होकर खाना बनाएंगे,,,,,,,लेकिन मैं आपसे पहले बोल रहा हूँ मैं गंवार फली और करेला बिल्कुल नहीं बनाने दूंगा,,,,,,,,,,मुझे इन दोनों से ही नफरत है”
खाते खाते अवनि मुस्कुराई तो सुरभि उसकी तरफ देखने लगी , सुरभि को अपनी तरफ देखते पाकर अवनि की तंद्रा टूटी और अगले ही पल उसे याद आया कि अब पृथ्वी की ये अजीबोगरीब बाते उसे सुनने और पढ़ने को नहीं मिलेगी तो उसकी आँखों में एक बार फिर नमी उभर आयी।


“तुम्हारी प्लेट में सब्जी नहीं है मैं रख देती हूँ”,सुरभि ने अवनि का ध्यान भटकाने के लिए कहा और उसकी प्लेट में थोड़ी सी सब्जी रख दी। खाना खाकर अवनि ने खुद को व्यस्त करना चाहा जिस से वह पृथ्वी के बारे में ना सोचे पर पृथ्वी तो हर जगह था। अवनि सिंक में रखे जूठे बर्तन धोने लगी तो उसे फिर पृथ्वी की कही बात याद आयी
“कितना अच्छा होता अगर मैं आपको बर्तन धोते देख पाता”
– तुम इतने अजीब क्यों हो ? मतलब ऐसा कौन सोचता है कि वो किसी लड़की को बर्तन धोते देखे ,, उसमे क्या नया है ?


“नया है ना मैडम जी , आप बर्तन धो रही होंगी और मैं साइड में खड़ा प्यार से आपको देख रहा होऊंगा ,, आपके बालो की लटें यहाँ वहा झूलते हुए आपको परेशान करेंगी और यकीन मानिये तब भी आप उतनी ही खूसबूरत लगेंगी जितना अपनी तस्वीरों में लगती है,,,,,,,,,अह्हह्ह्ह्ह नहीं उस से भी ज्यादा खूबसूरत”
– कसम से दुनिया के आठवे अजूबे हो तुम

ये बातें याद आते ही अवनि के हाथ रुक गए और वह खोयी हुई सी सिंक के पास खड़ी रही। सुरभि बचा खाना रखने किचन में आयी तो देखा सिंक का नल खुला है और पानी बह रहा है। वह सिंक के पास आयी नल बंद कर दिया। सुरभि ने अवनि के हाथ से प्लेट ली और उसे सिंक में रखकर अवनि से कहा,”इन्हे मैं साफ़ कर दूंगी तुम चलकर आराम करो,,,,,,,,,,,!!”
“आई ऍम सॉरी,,,,,,,,,,,,!!”,अवनि ने रोआँसा होकर कहा क्योकि इस वक्त वह खुद भी अपने हालात समझ नहीं पा रही थी।

“कोई बात नहीं तुम चलकर आराम करो मैं आती हूँ”,सुरभि ने कहा तो अवनि कमरे में चली गयी
सुरभि ने सभी बर्तन धोये , किचन प्लेटफॉर्म साफ किया और उसके बाद तेल को हल्का सा गर्म करके कटोरी में उड़ेला और लेकर कमरे में चली आयी। सुरभि ने देखा अवनि अपनी स्टडी टेबल पर बैठी है और उसके हाथ में कुछ खत है जिन्हे उसने पृथ्वी के लिखा था। सुरभि अवनि का दर्द और पृथ्वी की तकलीफ दोनों समझ रही थी पर इस वक्त उसके हाथ में कुछ नहीं था। सुरभि को कमरे में आया देखकर अवनि ने उन खतों को समेटा और दराज में रख दिया।


“जब पृथ्वी यहाँ आया था तब तुमने उसे ये खत क्यों नहीं दिए अवनि ?”,सुरभि ने तेल की कटोरी बिस्तर के साइड टेबल पर रखते हुए पूछा
“पता नहीं , ये खत उसे देने का ख्याल ही नहीं आया”,अवनि ने बुझे मन से कहा
“तो अब तुम इनका क्या करोगी ?”,सुरभि ने अवनि का मन टटोलते हुए कहा
“ये खत जिंदगीभर इसी दराज में बंद रहेंगे सुरभि,,,,,,,!!”,अवनि ने कुर्सी से उठते हुए कहा


“ये तो इन खतों के साथ नाइंसाफी हुई ना अवनि , और उसके साथ भी जिसके लिए ये लिखे गए है,,,,,,,,,,,क्या उसे ये जानने का हक़ नहीं है कि इन खतों में क्या लिखा गया है ?”,सुरभि ने अवनि की तरफ देखकर कहा
“महादेव ने चाहा तो एक दिन ये खत उसके हाथ में होंगे,,,,,,मैं उस दिन का इंतजार करुँगी सुरभि”,अवनि ने फीका सा मुस्कुरा कर कहा
अवनि को शायद अब भी उम्मीद थी कि उसकी जिंदगी में एक दिन ऐसा आयेगा जब वह पृथ्वी से मिलेगी वरना उसके लिए लिखे गए खत वह उसे मिलकर भी क्यों नहीं दे पायी जबकि पृथ्वी उसके सामने था ?


अवनि की बात सुनकर सुरभि के दिल को तसल्ली मिली उसने कहा,”आओ तुम्हारे सर में थोड़ा तेल लगा दू , जानती हूँ इस वक्त तुम्हारा सर बहुत दुःख रहा होगा,,,,,,तुम्हे आराम मिलेगा”
अवनि मन से इतना थक चुकी थी कि वह सुरभि को ना नहीं बोल पायी और सुरभि के पास आकर उसकी गोद में सर रखकर लेट गयी। सुरभि ने भी अपनी उंगलियों के पोरो को तेल में भिगोया और धीरे धीरे अवनि के सर पर मलने लगी।


अवनि आँखे मूँदे खामोश लेटी रही लेकिन बंद आँखों में भी उसे पृथ्वी का हसता मुस्कुराता चेहरा नजर आ रहा था और साथ ही याद आया उसे पृथ्वी का बच्चो की तरह रोना। दर्द अवनि के चेहरे पर उभर आया , वह आँखे खोलना चाहती थी लेकिन उसने अपनी पलकों को बंद रखा

वह उस चेहरे को भूलना नहीं चाहती थी और सहसा ही अवनि को याद आया वो पल जब अस्सी घाट पर गंगा आरती के उस पार खड़े होकर उसने देखा था एक शख्स का चेहरा , अवनि एकदम से उठ बैठी उसके चेहरे पर परेशानी के भाव थे और आँखों में बेचैनी ,, उसे याद आया कि जिस चेहरे को उसने गंगा आरती में देखा था वो कोई और नहीं बल्कि पृथ्वी था।

ये याद आते ही अवनि की आँखों में फिर आँसू भर आये। वो चेहरा जो अवनि को हमेशा दुःख के समय नजर आता था वो चेहरा किसी और का नहीं बल्कि पृथ्वी का था,,,,,,सहसा ही अवनि को याद आये पृथ्वी के दोनों हाथ जब वह मंदिर में अवनि के साथ खड़ा था और अवनि ने उसके दोनों हाथो को आपस में जोड़कर उसे महादेव से प्रार्थना करने का इशारा किया था और इसी के साथ अवनि को याद “काशी विश्वनाथ मंदिर” का वो पल जब ऐसे दो हाथो में फूल रखकर अवनि ने ईश्वर में विश्वास जगाने की बात कही थी।

अवनि को याद आया वो हाथ भी पृथ्वी के ही थे,,,,,,,,,,,,अब तो अवनि का मन और बैचैन हो उठा सुरभि ने उसे देखा तो उसका गाल छूकर कहा,”क्या हुआ अवनि , तुम ठीक हो ना ?”
अवनि ने सुरभि की तरफ देखा और हाँ में गर्दन हिला दी , वह एक बार फिर सुरभि की गोद में अपना सर टिकाकर लेट गयी बस इस बार उसने अपनी आँखे बंद नहीं की। पृथ्वी से अवनि पहले भी मिल चुकी थी अपने पसंदीदा शहर में बस वह समझ नहीं पायी कि महादेव ने उसकी जिंदगी में जिसे भेजा है वो असल में सिद्धार्थ नहीं बल्कि पृथ्वी था।

अवनि का मन भारी होने लगा , सुरभि उसका सर दबाती रही और कुछ देर बाद अवनि ने अपनी आँखे मूँदकर कहा,”सुरभि ! इस कमरे की ख़ामोशी मुझे बैचैन कर रही है,,,,,,,,!!”
“हम्म्म रुको मैं कोई हल्का म्युजिक लगा देती हूँ,,,,,,,,तुम्हे अच्छा लगेगा”,कहकर सुरभि ने अवनि के सर के नीचे तकिया लगाया और टेबल पर रखे लेपटॉप में धीमी आवाज में अवनि का पसंदीदा गाना चला दिया।
सुरभि बिस्तर के एक तरफ बैठकर कमरे में फैले कपडे तह करने लगी और लेपटॉप पर गाना धीमी आवाज में बजने लगा।

“हमको मिली है आज ये , घडिया नसीब से
जीभर के देख लीजिये , हमको करीब से
फिर आपके नसीब में , ये रात हो न हो
शायद फिर इस जन्म में मुलाकात हो न हो
लग जा गले के फिर ये हंसी रात हो न हो
शायद फिर इस जन्म में मुलाकात हो ना हो
लग जा गले,,,,,,,,,,,!!”


ये वही गाना था जो बीती रात अवनि ने पृथ्वी को ख़ुशी ख़ुशी सुनाया था और विडंबना देखिये कि उस रात के बाद पृथ्वी और अवनि हमेशा के लिए दूर हो गए ,, सच ही थी उस गाने की वो लाइन कि “फिर आपके नसीब में ये रात हो ना हो , शायद फिर इस जन्म में मुलाकात हो न हो”  
धीरे धीरे अवनि नींद के आगोश में चली गयी।

 ( क्या पृथ्वी निभायेगा लता से किया वादा और भूल जाएगा अवनि को ? क्या पृथ्वी से दूर जाकर होगा अवनि को उसके प्यार का अहसास ? सच में ये गाना अवनि और पृथ्वी की नियति था या फिर था कोई इत्तेफाक ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87

Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87Pasandida Aurat – 87

संजना किरोड़ीवाल

Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal
Exit mobile version