Pasandida Aurat – 84
नकुल ख़ामोशी से सर झुकाये रवि जी के सामने खड़ा था। रवि जी राजस्थान का नाम लेकर नकुल को उलझन में डाल दिया। वह सच नहीं बोल सकता था इसलिए अपने दोस्त के लिए पहली बार रवि जी से झूठ कहा,”राजस्थान ? पृथ्वी राजस्थान क्यों जाएगा ? वो तो ऑफिस मीटिंग में गया था ,, अच्छा अच्छा हो सकता है इस बार उसके ऑफिस की मीटिंग राजस्थान में हो,,,,,,,,अंकल वो आई ने मुझसे कुछ सामान मंगवाया है मुझे वो लेकर घर जाना है तो मैं आपसे बाद में मिलता हूँ,,,,,,,,,!!”
रवि जी कुछ कहते इस से पहले नकुल वहा से भाग गया। नकुल की बातो पर रवि जी को रत्ती भर भी विश्वास नहीं हुआ , उन्हें कुछ तो गड़बड़ लग रही थी और इसके बारे में अब सिर्फ पृथ्वी ही बता सकता था। लता रवि जी के लिए चाय का कप लेकर आयी और उन्हें खोया देखकर कहा,”क्या हुआ आपको ? आप यहाँ ऐसे क्यों खड़े है ?”
रवि जी ने लता के हाथ से चाय का कप लिया और कहा,”मैं पृथ्वी के बारे में सोच रहा हूँ लता , क्या पृथ्वी हम सबसे कुछ छुपा रहा है,,,,,,,,,आज तक मैंने कभी उसके मुँह से राजस्थान का नाम नहीं सुना फिर उसका ऐसी हालत में राजस्थान में मिलना तुम्हे अजीब नहीं लग रहा ?”
“अजीब तो लग रहा है , पता नहीं आजकल इस लड़के के दिमाग में क्या चल रहा है ? पिछले कुछ वक्त से काफी बदला बदला भी नजर आ रहा है। अभी वो इस हालत में नहीं है कि उस से कुछ पूछा जाये। मुझे तो ये सोचकर ही कितनी घबराहट हो रही है कि अगर उसके साथ कुछ गलत हो जाता तो क्या होता ?”,कहते हुए लता जी भावुक हो गयी
रवि जी ने देखा तो उन्हें अपने सीने से लगाकर कहा,”लता ! पृथ्वी अब ठीक है और हमारे घर में है , कुछ नहीं होगा उसे,,,,,,,बाप्पा का शुक्र है कि वह सही सलामत है,,,,,,,!!”
“हाँ मैं कल ही मंदिर जाकर उनके दर्शन करके आउंगी”,लता ने अपने आँसू पोछकर कहा
रवि जी ने चाय खत्म की और जरुरी काम से बाहर चले गए। लता किचन में खाना बनाने लगी और आज लक्षित भी उनकी मदद करने लगा। हमेशा पृथ्वी को छेड़ने वाला , उसे बात बात पर परेशान करने वाला लक्षित भी आज उसे इस हाल में देखकर उदास था।
सिरोही , राजस्थान
दो दिन गुजर चुके थे और आज शाम अनिकेत को वापस उदयपुर जाना था। आज अवनि और सुरभि की गवर्मेंट छुट्टी थी इसलिए दोनों घर पर थी। अवनि अब पहले से ठीक थी लेकिन इन दो दिनों में वह एक बार भी नहीं मुस्कुराई , हर वक्त उसके जहन में बस पृथ्वी का ख्याल रहा। दिन में 50 बार वह अपना फोन चेक करती लेकिन पृथ्वी का कोई फोन कोई मैसेज उसे नहीं मिला
सुबह के नाश्ते के बाद अवनि बालकनी में खड़ी उदास आँखों से बाहर देख रही थी। अनिकेत अंदर हॉल में बैठा अपने लेपटॉप पर कुछ काम कर रहा था तो वही सुरभि किचन साफ कर रही थी। उदासी अवनि के चेहरे से हटने का नाम नहीं ले रही थी और ये देखकर सुरभि का मन भी उदास था। वह अवनि को हँसाने की कोशिश करती लेकिन अवनि बुझी आँखों से उसे देखकर वहा से चली जाती या मुँह घुमा लेती। पृथ्वी से उसकी बात नहीं हुई और ना ही वह ये जानती थी कि पृथ्वी किस हाल में है ?
बालकनी में खड़ी अवनि पृथ्वी के बारे में सोच ही रही थी कि तभी उसका फोन बजा , फोन पृथ्वी का होगा सोचकर अवनि जल्दी से अंदर आयी और टेबल पर रखा अपना फोन उठाकर जैसे ही स्क्रीन पर लिखे सिद्धार्थ के नाम को देखा उसका दिल धड़क उठा , आँखों में डर और चेहरे पर परेशानी के भाव झिलमिलाने लगे। सिद्धार्थ का नाम देखकर ही अवनि की आँखों के सामने उस शाम की घटना आ गयी जब उसने सिद्धार्थ का सबसे बुरा रूप देखा था। अवनि के हाथ काँपने लगे। अनिकेत ने देखा फोन अवनि के हाथ में है और लगातार बजे जा रहा है लेकिन अवनि अवाक् खड़ी उसे देख रही है।
“क्या हुआ अवनि , किसका फोन है ?”,अनिकेत ने कहा लेकिन अवनि ने कोई प्रतिक्रया नहीं दी उसकी आँखों में आँसू भर आये
अनिकेत उठा और अवनि की तरफ आया इतने में सुरभि भी वहा चली आयी। कॉल कट चुका था और अगले ही पल अवनि का फोन फिर बजा। स्क्रीन पर सिद्धार्थ का नाम देखकर सुरभि की भँवे तन गयी उसने अवनि के हाथ से फोन लिया और उठाकर कान से लगाते हुए कहा,”तेरी हिम्मत कैसे हुयी अवनि को फोन करने की ? तूने जो किया है उसके लिए अवनि भले ही तुझे माफ़ कर दे लेकिन मैं तुझे कभी माफ़ नहीं करुँगी ,,
तुम इतने घटिया कैसे हो सकते हो ? अवनि के साथ ये सब करते हुए तुम्हे ज़रा भी शर्म नहीं आयी ? और पृथ्वी , उस लड़के ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था उसके साथ भी तुमने,,,,,,,,,,,,हाह ! अगर तुम मेरे सामने होते तो इतना मारती तुम्हे जिंदगीभर याद रखते तुम समझे,,,,,,,,,,आइंदा अवनि को फोन मत करना तुम”
“सुरभि,,,,,,,,,,!!”,सिद्धार्थ ने बहुत ही शांत स्वर में कहा जिस से सुरभि रुकी और फोन कट नहीं किया
सिद्धार्थ ने आगे कहा,”मैं जानता हूँ मुझसे बहुत बड़ी गलती हुई है , गुस्से में आकर मैंने अवनि को चोट पहुंचाई और इसके लिए मैं बहुत शर्मिन्दा हूँ,,,,,,,,,,मैं एक बार अवनि से मिलना चाहता हूँ सुरभि , प्लीज मुझे मेरी बात समझाने का एक मौका तो दो”
सुरभि ने सुना तो उसका गुस्सा और बढ़ गया और उसने थोड़ा ऊँची आवाज में कहा,”अब क्या समझाना बाकी रह गया है अवनि को ? उसके साथ पहले ही इतना गलत कर चुके हो तुम अब क्या बाकि रह गया है ? अवनि तुम से नहीं मिलेगी और न ही उसे तुम से कोई बात करनी है और अगर आइंदा तुमने उसे परेशान करने की कोशिश भी की तो सीधा पुलिस स्टेशन में बात करुँगी तुम से समझे तुम,,,,,,,,,,,!!”
कहकर सुरभि ने फोन काट दिया और दूसरी तरफ सिद्धार्थ बोलता ही रह गया। सुरभि वापस अवनि और अनिकेत की तरफ आयी देखा अवनि घबराई हुई खड़ी है तो उसने अवनि के कंधे पर हाथ रखकर कहा,”फ़िक्र मत करो अवनि , तुम्हे सिद्धार्थ से डरने की कोई जरूरत नहीं है वो तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता मैं तुम्हारे साथ हूँ,,,,,,,,,,,!!!”
“लेकिन वो अवनि से क्यों मिलना चाहता है ?”,अनिकेत ने पूछा
“उसे बहाना चाहिए अवनि को फिर से मेन्युप्लेट करने का इसलिए वो इस से मिलना चाहता है ताकि एक बार फिर अपनी गलतियों पर पर्दा डालकर अवनि को अपनी मीठी मीठी बातो के जाल में फंसा सके”,सुरभि ने गुस्से से कहा
“लेकिन सुरभि मुझे लगता है अवनि को एक बार उस से मिलकर सारी बात क्लियर कर देनी चाहिए और हमेशा के लिए उस से रिश्ता खत्म कर देना चाहिए जिस से वह आगे अवनि को परेशान ना करे। एक बार चीजे क्लियर हो जाएगी तो हो सकता है सिद्धार्थ को भी समझ आ जाये और वह अवनि की जिंदगी से हमेशा के लिए चला जाये”,अनिकेत ने कहा
“ये तुम क्या कह रहे हो अनिकेत ? तुम चाहते हो मैं अवनि को फिर से उस घटिया इंसान से मिलने भेज दू। तुम उसे जानते नहीं हो वो बहुत चालाक किस्म का इंसान है , वो फिर फंसा लेगा अवनि को”,सुरभि ने हताश होकर कहा
“मैं उस से मिलना चाहती हूँ,,,,,,,,,,,,!!”,काफी देर से खामोश खड़ी अवनि ने कहा
“अवनि ये क्या कह रही हो तुम ? इतना सब होने के बाद भी तुम सिद्धार्थ से मिलना चाहती हो,,,,,,,!!!”,सुरभि ने हैरानी से कहा
“हाँ सुरभि मैं चाहती हूँ , मैं चाहती हूँ मैं उस एक आखरी बार मिलु और ये सब हमेशा के लिए खत्म कर दू,,,,,,,,,तुम्हे मुझ पर भरोसा है ना ?”,अवनि ने सुरभि की आँखों में देखकर कहा तो सुरभि ने हामी में गर्दन हिला दी।
“लेकिन तुम अकेली नहीं जाओगी मैं और सुरभि भी तुम्हारे साथ जायेंगे”,अनिकेत ने कहा तो अवनि ने अपनी पलकें झपकाकर स्वीकृति दे दी। अवनि ने सुरभि के हाथ से अपना फोन लिया और सिद्धार्थ को फोन लगाया।
एक रिंग के बाद ही सिद्धार्थ ने फोन उठा लिया और कहा,”मैं जानता था तुम मुझे फोन करोगी , अवनि , अवनि आई ऍम रियली सॉरी ! मैं बहुत शर्मिन्दा हूँ गुस्से में आकर मैंने तुम्हारे साथ जो कुछ भी किया वो बहुत गलत था और मुझे इसका अहसास है ,, पिछले 3 दिन से सो नहीं पाया हूँ , दिन रात तुम्हारे साथ किये बुरे बर्ताव के बारे में सोच रहा हूँ और अब अहसास हो रहा है कि मैं बहुत गलत था ,हमेशा गलत था। मुझे माफ़ कर दो अवनि प्लीज मुझे माफ़ कर दो,,,,,,,,,,!!!”
“मैं तुमसे 1 घंटे बाद इस शहर के उसी मंदिर में मिलूंगी जहा हम पहली बार मिले थे”,कहकर अवनि ने फोन काट दिया और कपडे बदलने चली गयी
1 घण्टे बाद अवनि सिद्धार्थ के सामने थी उसी शिव मंदिर में जहा वह सिद्धार्थ से पहली बार मिली थी। अनिकेत और सुरभि दोनों से कुछ दूर खड़े थे , इतनी दूर कि वे उन दोनों को आसानी से देख सकते थे बस उनके बीच क्या बात हो रही थी वो नहीं सुन पा रहे थे। अवनि ने आज वही सूट पहना था जो उस रोज पहना था जब वह सिद्धार्थ से पहली बार मिली थी बस आज अवनि के चेहरे पर वो रौनक नहीं थी , आँखों में खालीपन था , चेहरा उदासी से घिरा था , सुर्ख होंठ जो सिद्धार्थ की पहली पसंद थे वे सूखे और बेजान नजर आ रहे थे।
अवनि के सामने खड़े सिद्धार्थ ने अवनि को देखा और कहा,”अवनि ! मैं जानता हूँ मैंने तुम्हारे साथ जो किया वो माफ़ी के लायक नहीं है। मैंने तुम्हारे साथ बहुत ही बुरा बर्ताव किया और इसके लिए मैं बहुत शर्मिन्दा भी हूँ। मैंने जब अचानक तुम्हे किसी और के साथ देखा तो मैं बर्दास्त नहीं कर पाया और ये सब , ये सब हो गया। मैं तुम्हे किसी और के साथ नहीं देख सकता अवनि , मुझे अब अहसास हुआ है कि मैं तुम से बहुत प्यार करता हूँ। मै तुम्हारे बिना नहीं रह सकता अवनि,,,,,,,,,,,
जानता हूँ अब तुम्हे मेरी किसी भी बात पर विश्वास नहीं होगा लेकिन मैं वादा करता हूँ मैं खुद को बदल लूंगा अवनि , जैसा तुम चाहती हो मैं वैसा बन जाऊंगा , अपने घमंड और गुस्से के चलते मैंने तुम्हे खुद से दूर कर दिया लेकिन मैं तुम्हे , मैं तुम्हे खोना नहीं चाहता अवनि,,,,,,,,,,,,,,,तुम चाहो उतना वक्त ले सकती हो मैं तुम्हे फ़ोर्स नहीं करूंगा , मैं खुद को तुम्हारे लायक बना लूंगा , खुद को पूरी तरह बदल लूंगा , बस मुझे तुम्हारा साथ चाहिए अवनि,,,,,,,,,,!!”
अवनि ने ख़ामोशी से सिद्धार्थ की बात सुनी और कहा,”मेरा साथ तुम्हे कभी चाहिए ही नहीं था सिद्धार्थ , तुम मेरे साथ सिर्फ इसलिए थे क्योकि तुम मुझे अपना लकी चार्म समझते थे।
तुमने कभी मुझे इंसान समझा ही नहीं बस मुझे इस्तेमाल करने की चीज समझते रहे ,, मैं तुम्हारे लिए मन बहलाने वाला एक खिलौना थी जिसकी याद तुम्हे बस अपने खाली वक्त में आयी। तुमने मेरे साथ जो किया वो सब एक वक्त के बाद शायद मैं भूल भी जाऊ लेकिन तुमने जो पृथ्वी के साथ किया वो मैं कभी नहीं भूलूंगी,,,,,,,,उसकी क्या गलती थी सिद्धार्थ ? वो तो तुम्हे जानता तक नहीं था , वो इतना बड़ा पागल इंसान है कि सिर्फ मुझसे मिलने इतनी दूर चला आया और तुमने उसके साथ इतना बुरा किया , तुम्हे मुझसे शिकायत थी तो मुझसे बदला लेना था उसे चोट क्यों पहुंचाई ?
तुम्हारे बदलने या न बदलने से मुझे अब कोई फर्क नहीं पडेगा सिद्धार्थ क्योकि अब मैंने अपना मन बदल लिया है , तुम्हे अपनी जिंदगी में फिर से शामिल कर मैं दूसरी गलती नहीं करना चाहती ,, मैं अकेले खुश हूँ ना मुझे तुम्हारी जरूरत है ना ही किसी और की क्योकि तुम्हारे साथ रहकर मैंने ये जान लिया है दुनिया में मोहब्बत नाम की कोई चीज नहीं होती है,,,,,,,,तुम्हारी किसी भी बात का अब मुझ पर कोई असर नहीं होगा सिद्धार्थ , आज तक तुमने मुझे जो महसूस करवाया है वो मैं कभी नहीं भूल सकती,,,,,,,,,,,,
ये हमारी आखरी मुलाकात है सिद्धार्थ और आज के बाद अगर तुमने मुझे या मुझसे जुड़े किसी भी इंसान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की तो मैं भूल जाउंगी कि मैंने कभी तुमसे मोहब्बत की थी,,,,,,,,,,!!”
इतना कहकर अवनि चुप हो गयी। सिद्धार्थ ने सुना तो फीका सा मुस्कुराया लेकिन आज उसकी मुस्कराहट में घमंड नहीं बल्कि बेबसी का भाव था।
उसने अवनि को देखा और कहा,”तुम्हारा गुस्सा होना जायज है अवनि , मैंने तुम्हारे साथ जो किया उसके बाद तुम तो क्या कोई भी इतनी आसानी से मुझे माफ़ नहीं करेगा लेकिन मैं इंतजार करूंगा अवनि क्योकि मैं अपनी आने वाली पूरी जिंदगी तुम्हारे नाम कर चुका हूँ। तुम्हारे अलावा मैं अब किसी और के साथ खुश नहीं रह पाऊंगा , मैं खुद को बदलकर दिखाऊंगा अवनि और जिंदगीभर तुम्हारा इंतजार करूंगा। हाँ मैं वादा करता हूँ आज के बाद मैं तुम्हे परेशान नहीं करूंगा , ना ही तुम्हे ना तुम से जुड़े किसी इंसान को , मैंने जो गलतिया की है मैं बस उन्हें सुधारूंगा और खुद को वैसा बनाऊंगा जैसा लड़का तुम डिजर्व करती हो ,
मैं उस दिन का इंतजार करूंगा अवनि जब तुम मुझे माफ़ कर दोगी और मेरी जिंदगी में वापस लौट आओगी”
अवनि ने सुना तो सिद्धार्थ को देखा , सिद्धार्थ को लेकर अवनि के मन में अब कोई भावनाये नहीं थी इसलिए उसने कठोरता से कहा,”मैं अपने महादेव से प्रार्थना करुँगी कि इस जिंदगी में हम दोबारा कभी ना मिले”
“अगर तुम्हे अपने महादेव पर इतना भरोसा है तो मुझे भी उन पर भरोसा है अवनि वो हमे एक दिन जरूर मिलाएंगे,,,,,,,,,अपना ख्याल रखना”,सिद्धार्थ ने उदासी भरे स्वर में कहा और वहा से चला गया।
अवनि ख़ामोशी से सिद्धार्थ को जाते हुए देखती रही वह समझ नहीं पा रही थी कि सिद्धार्थ सच में बदल गया है या ये फिर उसकी कोई चाल है ? सिद्धार्थ को जाते देखकर अनिकेत और सुरभि अवनि की तरफ आये और अनिकेत ने कहा,”अवनि ! सब ठीक है न ?”
“हम्म्म्म ! उसने कहा है आज के बाद वो मुझे परेशान नहीं करेगा”,अवनि ने बुझे स्वर में कहा
सुरभि ने सुना तो उसने अवनि को साइड हग किया और राहत की साँस लेकर कहा,”thank god उसने ये बात कही , अब तुम बिल्कुल फ़िक्र मत करो अवनि और अपना मूड सही करो,,,,,,,,,पिछले 4 दिन से मैंने एक बार भी तुम्हे मुस्कुराते नहीं देखा है”
अवनि ने सूना तो फीका सा मुस्कुराई और कहा,”मुझे बहुत भूख लगी है कुछ खाने चले ?”
सुरभि ने सुना तो मुस्कुराई और फिर तीनो वहा से निकल गए। तीनो ने एक अच्छे रेस्त्रो में आकर खाना खाया। अनिकेत शाम में वापस जाने वाला था इसलिए अवनि ने सुरभि से उसे शहर घुमाने को कहा और खुद अकेले ही फ्लेट पर चली आयी ताकि सुरभि और अनिकेत को एक दूसरे के साथ वक्त मिल सके हालाँकि अनिकेत और सुरभि ने मना किया लेकिन अवनि ने नहीं सुना।
फ्लेट पर आकर अवनि अपने कमरे में चली आयी। बालों को समेटकर उसने जुड़ा बनाया और उसमे कल्चर खोंस लिया। नजर ड्रेसिंग टेबल पर रखे झुमको पर पड़ी तो अवनि को याद आया ये वही झुमके थे जो पृथ्वी ने उसके लिए खरीदे थे। अवनि ने उन्हें उठाया और देखा तो अवनि की आँखों के सामने वो पल आ गया जब पृथ्वी ने अपने हाथो से अवनि को ये पहनाये थे। वो पल याद आते ही अवनि की आँखे फिर नम हो गयी और उसने उन झूमको को अपने ललाट से लगा लिया। अवनि ने कबर्ड खोला और बहुत सम्हालकर उन्हें अंदर रख दिया।
अवनि बिस्तर पर आ बैठी और खामोश आँखों से कमरे की दिवार को देखने लगी। सिद्धार्थ से मिलने के बाद अवनि काफी हल्का महसूस कर रही थी आखिरकार उसने आज अपने दिल से उस डर को निकाल दिया जो उसे सिद्धार्थ को लेकर था। अवनि ने गर्दन घुमाई तो नजर स्टडी टेबल पर पड़े अपने बैग पर चली गयी। अवनि को कुछ याद आया वह उठी और बैग से सामान निकालकर बाहर रखने लगी। हरे काँच की चूड़ियों का डिब्बा उसके हाथ में आया। अवनि ने उसे बाहर निकाला और खोला। अवनि ने उन्हें छूकर देखा तभी उसके जहन में अपनी ही लिखी बात कौंध गयी
“मर्द हरी चूड़ियाँ सिर्फ अपनी “पसंदीदा औरत” के लिए ही खरीदता है”
अवनि मुस्कुरा उठी उसने डिब्बा बंद किया और उसे भी झुमको के साथ ही कबर्ड में रख दिया। दिनभर अवनि पृथ्वी के बारे में सोचते हुए घर के काम करती रही और शाम होते होते थककर बिस्तर पर लेट गयी। उसे कब नींद आयी पता ही नहीं चला।
अनिकेत की ट्रेन शाम 7 बजे की थी उसे भेजकर सुरभि घर आयी देखा अवनि सो रही है तो उसने अवनि को नहीं उठाया और खुद ही रात का खाना बनाने लगी।
खाना तैयार कर सुरभि ने अवनि को जगाया और उसे खाना खिलाया। खाना खाकर दोनों बालकनी में चली आयी। आज अवनि का मन शांत था और अवनि को नार्मल देखकर सुरभि भी खुश थी साथ ही वह खुश थी कि सिद्धार्थ हमेशा के लिए अवनि की जिंदगी से चला गया है।
पुरे 4 दिन बाद पृथ्वी थोड़ा ठीक था और जैसे ही ठीक हुआ उसे अपने फोन की याद आयी। उसने लता से अपना फोन लिया और सबसे पहले अवनि को मैसेज किया। फोन अवनि के हाथ में ही था जैसे ही बजा अवनि ने देखा पृथ्वी का मैसेज है तो उसका दिल धड़क उठा और आँखों में फिर वही नमी लेकिन ये नमी ख़ुशी की थी।
( क्या अवनि के लिए सिद्धार्थ बदलकर दिखायेगा खुद को या हो जाएगा नाकामयाब ? क्या धीरे धीरे अवनि को हो रहा है अहसास पृथ्वी के प्यार का ? क्या अब होगी पृथ्वी और अवनि की असल प्रेम कहानी शुरू ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84
Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84Pasandida Aurat – 84
- Continue With Pasandida Aurat – 85
- Visit https://sanjanakirodiwal.com
- Follow Me On http://instagram.com/sanjanakirodiwal/
संजना किरोड़ीवाल
