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Pasandida Aurat – 80

Pasandida Aurat – 80

Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

जाने से पहले पृथ्वी कोई कड़वी याद नहीं चाहता था , वह नहीं चाहता था उसकी बातो से अवनि और उदास हो इसलिए उसने कहा,”वापस जाने से पहले एक एक कप चाय हो जाये ?”
अवनि ने नम आँखों  के साथ हामी में सर हिलाया तो पृथ्वी उठा और दोनों के लिए चाय लेने चला गया। अवनि ने हाथ में पकड़े फूलों को अपने सीने से लगाया और धीरे से बड़बड़ाई,”ओह्ह्ह पृथ्वी तुम नहीं जानते तुम कितने अच्छे हो , तुम्हारा मन नदी सा साफ और आसमान सा विशाल है लेकिन मेरा दिल , मेरा दिल अब पहाड़ो की भांति कठोर हो चूका है ,

मेरा मन नदी के उस किनारे सा हो चूका है जहा बस पत्थर और जंगली बेले है। तुम बहुत मासूम लड़के हो पृथ्वी तुम्हे सिर्फ प्यार करना आता है और अभी तुम उस प्यार में टूट जाने के अहसास से वाकिफ नहीं हो , जो दर्द मैंने सहा मैं नहीं चाहती वो दर्द तुम्हारी जिंदगी का हिस्सा बने। मैं महादेव से प्रार्थना करुँगी तुम हमेशा मेरे साथ रहो मेरे अच्छे दोस्त बनकर , ऐसे दोस्त जिसके सामने मैं रो सकू , जिसके सामने खुलकर बात कर सकू,,,,,,,,,,!!!”

चाय के इंतजार में दुकान पर खड़ा पृथ्वी दूर से अवनि को देख रहा था , जिस मोहब्बत से वह उन फूलों को अपने सीने से लगा रही थी पृथ्वी का मन हुआ कि काश जाने से पहले एक बार वह अवनि को भी ऐसे ही अपने सीने से लगा पाए और कुछ देर के लिए सब भूल जाये। वो भूल जाये अपने और अवनि के बीच उम्र का फासला , वो भूल जाए दो शहरो के बीच की असीम दूरी , वो भूल जाए अवनि का अतीत और भूल जाये कितनी ही दफा अवनि के मुँह से निकला “ना”

“भैया आपकी चाय”,दुकानवाले की आवाज पृथ्वी के कानो में पड़ी तो उसकी तंद्रा टूटी। उसने चाय के कप लिए और अवनि की तरफ बढ़ गया। पृथ्वी बेंच के पास चला आया और एक कप अवनि की तरफ बढाकर कहा,”चाय,,,,,,!!”
“थैंक्यू,,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा

“वैसे आपकी दोस्त ने कहा था कि वो मुझे सी ऑफ करने स्टेशन आएगी”,पृथ्वी ने कहा
“आपने नाम लिया और मैं हाजिर,,,,,,,,,,,,हाय इतनी सिद्दत से तो मुझे आज तक मेरे बॉयफ्रेंड ने भी नहीं याद किया”,सामने से आती सुरभि ने कहाअवनि सुरभि को अचानक देखकर हैरान थी वही पृथ्वी खुश था कि सुरभि उस से मिलने आयी है , आखिर वही तो है जो अब पृथ्वी की मदद कर सकती है।  

“आपका बॉयफ्रेंड भी है ?”,पृथ्वी ने अपनी चाय सुरभि की तरफ बढाकर कहा
“हाँ,,,,आप पहले नहीं मिले न पृथ्वी जी,,,,,,,,,,,!!”,सुरभि ने पृथ्वी जी पर कुछ ज्यादा ही जोर देकर कहा
“शुक्र है मैं बच गया,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने सुरभि की टाँग खींचते हुए कहा तो सुरभि ने उसे घुरा।
“तुम ये पी लो,,,,,,!”,अवनि ने अपनी चाय पृथ्वी की तरफ बढाकर कहा तो पृथ्वी ने कहा,”अरे आप लोग पीजिये ना मैं अपने लिए दूसरी ले आता हूँ”

कहकर पृथ्वी वहा से चला गया। सुरभि चाय का कप हाथ में पकडे अवनि के बगल में आ बैठी और कहा,”क्या बात है अवनि “तुम ये पी लो” इतने प्यार से आज तक मुझे तो कभी अपनी चाय नहीं दी तुमने”
“शट अप ! ये बताओ तुम यहाँ क्या कर रही हो ?”,अवनि ने कहा
“मैं आपके पृथ्वी जी को बाय बोलने आयी हूँ”,सुरभि ने चाय का घूंठ भरकर कहा
“वो मेरा पृथ्वी नहीं है,,,,,,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा
“अरे नहीं है हो जाएगा , जल्दी क्या है”,सुरभि ने बेपरवाही से कहा

दोनों सहेलियों को बाते करते देखकर पृथ्वी अपनी चाय लेकर बेंच से कुछ ही दूर प्लेटफॉर्म के किनारे चला आया और अपनी चाय पीने लगा। बेंच पर बैठी अवनि पृथ्वी को देख रही थी ये देखकर सुरभि ने कहा,”ज़रा देखो उसे कितना सही बन्दा है यार , अच्छी हाइट है , बॉडी भी अच्छी है , वाइट टीशर्ट और ग्रीन जैकेट के साथ इन कपड़ो में कितना प्यारा लग रहा है बिल्कुल कॉलेज जाने वाले लड़के जैसा , बाल भी अच्छे है और आँखे तो उफ्फ्फ कितनी मासूमियत है इसकी आँखों में ,, तुम दोनों साथ में बहुत अच्छे लगोगे Like a perfact couple,,,,,,,!!”

सुरभि की बात सुनकर अवनि की आँखों के सामने वो पल आ गया जब झुमके लेते वक्त उसने शीशे में खुद को और पृथ्वी को साथ साथ देखा था और पृथ्वी ने कहा था “वैसे साथ में अच्छे लग रहे है हम दोनों,,,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी की कही बात याद आते ही अवनि ने सुरभि की तरफ देखा , सुरभि भी वही कह रही थी जो कुछ देर पहले पृथ्वी ने कहा था। ये इत्तेफाक था या फिर सच में ये कहानी कोई ऐसा इंसान लिख रहा था जिसने अपनी जिंदगी में बेइंतहा मोहब्बत देखी है।

अवनि को खामोश देखकर सुरभि ने उसके हाथ पर अपना हाथ रखा और कहा,”कुछ देर बाद वो वापस मुंबई चला जाएगा , अगर तुम्हारे दिल में उसके लिए ज़रा सा भी अहसास है तो उस से कह दो अवनि , वो सच में बहुत अच्छा लड़का है मेरा दिल , मेरा दिल झूठ नहीं बोल सकता,,,,,,,मैंने उसकी आँखों में तुम्हारे लिए बेइंतहा मोहब्बत देखी है अवनि , जिस मोहब्बत से वह आज सुबह तुम्हे देख रहा था ये ठीक वैसे ही था जैसे तुम अपनी किताबो को देखा करती हो,,,,,,,,,

तुम्हारे साथ खड़े होकर जो ख़ुशी उसके चेहरे पर थी वो आज से पहले मैंने उस किसी शख्स के चेहरे पर नहीं देखी जिसे तुमने चुना था। ये लड़का तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता है अवनि कुछ भी,,,,,,,,,,,,,,,क्या अब भी तुम इसे एक मौका नहीं दोगी ?”
“हाह ! उसकी ट्रेन आने का वक्त हो गया है , हमे अब उसे अलविदा कहकर यहाँ से चलना चाहिए”,अवनि ने भारी मन के साथ गहरी साँस लेकर उठते हुए कहा

सुरभि ने सुना तो उसका दिल टूट गया , उसे चुभन का अहसास हुआ और साथ ही अवनि पर गुस्सा भी आया कि आखिर क्यों अवनि खुद को पीछे खींच रही है क्यों वह पृथ्वी को खुद से दूर कर रही है। सुरभि उठी और कहा,”ओह्ह्ह अवनि तुम इतनी पत्थर दिल कैसे हो सकती हो ? देखो उसे , क्या तुम्हे उसका उतरा हुआ चेहरा नजर नहीं आता ? तुम , तुम इतनी सेल्फिश कैसे हो सकती हो अवनि ? वो इतनी दूर तुम्हारी शक्ल देखने नहीं आया है वो तुम्हे यकींन दिलाने आया है कि उसका प्यार सच्चा है उसकी भावनाये सच्ची है और वो ,

वो सच में तुम्हे बहुत चाहता है अवनि वरना एक लड़का तुम्हारे लिए अपना सब कुछ छोड़कर किसी अनजान शहर में क्यों आएगा ? अगर इसके बाद भी तुम्हे लगता है कि वो गलत है और तुम सही तो फिर तुम ही उसे अलविदा कहो मैं यहाँ से जा रही हूँ क्योकि मैं उसका दिल टूटते नहीं देख सकती,,,,,,,,,,,,,!!”
“सुरभि , सुरभि , सुरभि सुनो,,,,,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा लेकिन सुरभि तब तक वहा से जा चुकी थी। अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखा तो पाया वह फोन पर किसी से बात कर रहा है।

पृथ्वी फोन रखकर अवनि की तरफ पलटा तो देखा कि अवनि अकेले खड़ी है सुरभि वहा नहीं है। वह अवनि के पास आया और कहा,”सुरभि कहा गयी ?”
“वो चली गयी , उसे कुछ जरुरी काम था”,अवनि ने झूठ कह दिया
पृथ्वी ने अपनी कलाई पर बंधी घडी में समय देखा 6.50 हो रहे थे , ट्रेन आने में बस 10 मिनिट बाकी थे इसलिए उसने अवनि से कहा,”आपसे मांगा वक्त खत्म हो गया , काश मैं इसे थोड़ी देर के लिए और रोक पाता,,,,,,,हाह !

लेकिन ये मेरे हाथ में नहीं है , 10 मिनिट बाद ट्रेन आ जाएगी और मैं मुंबई वापस चला जाऊंगा , मैं नहीं चाहता हम दोनों एक दूसरे को जाते हुए देखे इसलिए अब आप घर जाईये,,,,,,,,,मुझे अलविदा कहते हुए आप यहाँ प्लेटफॉर्म पर खड़ी होंगी और मैं ट्रेन के दरवाजे पर खड़ा आपको देखता रहूंगा वो पल मेरे लिए किसी तकलीफ से कम नहीं होगा। मैं खुद को आपसे दूर जाते हुए नहीं देख पाऊंगा मैडम जी इसलिए आपसे जाने को कह रहा हूँ ताकि हम दोनों ही उस तकलीफ से ना गुजरे,,,,,,,,,,,,!!”

अवनि ने सुना तो ख़ामोशी से पृथ्वी को देखने लगी , अवनि देख पा रही थी कि ये सब कहते हुए पृथ्वी का मन भारी हो रहा था और वह बहुत मुश्किल से खुद को रोके हुए था। अवनि को खामोश पाकर पृथ्वी ने आगे कहा

आपसे मिलकर अच्छा लगा मैडम जी , इन 12 घंटो में मैंने जैसे आपके साथ पूरी जिंदगी जी ली हो लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि मैंने हार मान ली है मैं फिर भी कोशिश करता रहूंगा,,,,,,,,, तो आपकी ना सुनने की आदत हो चुकी है , पता है आज तक कभी किसी से डर नहीं लगा पर अब डरता हूँ आपको खोने से,,,,,,हाह ! बहुत कुछ है कहने के लिए लेकिन हिम्मत नहीं हो रही , यहाँ गले में चुभ रहा है कुछ और ऐसा लग रहा है जैसे कुछ कहा तो रो दूंगा,,,,,,!!”

पृथ्वी की बात सुनकर अवनि का मन भी भारी हो गया , उसने नजरे घुमा ली और दूसरी तरफ देखने लगी। पृथ्वी ने अंदर ही अंदर खुद को सम्हाला और कहा,”अच्छा मैडम जी ! एक बात पुछु आपसे ?”
“हम्म्म पूछो,,,,,,!!”,अवनि ने खुद को मजबूत दिखाते हुए कहा
“आप मुझे भूल तो नहीं जायेगी ना ?”,पृथ्वी ने पूछा

अवनि ने नम आँखों के साथ अपनी गर्दन ना में हिला दी तो पृथ्वी मुस्कुरा उठा और जबरदस्ती हँसते हुए कहा,”मैं भूलने दूंगा भी नहीं,,,,,,,मुंबई जाकर फिर परेशान करने वाला हूँ आपको और तब तक करूंगा जब तक आप खुद आकर मुझसे नहीं कहती कि “पृथ्वी ! मुझसे शादी करोगे ?”
ये बात पृथ्वी ने हँसते हुए कही लेकिन ना जाने क्यों उसकी आँखों में आँसू भर आये। अवनि उसकी आँखों में आये आंसुओ को देख ना ले ये सोचकर पृथ्वी पलट गया और कहा,”आप जाईये मैडम जी ! अपना ख्याल रखियेगा”

पृथ्वी तो पलट गया लेकिन अवनि की आँखों में भरे आँसू उसके गालों पर लुढ़क आये जिन्हे पृथ्वी नहीं देख पाया। वह चाहती थी जाने से पहले पृथ्वी एक बार उसे अपने सीने से लगाये , उसका सर सहलाये और पीठ थपथपाकर कहे कि “वह हमेशा उसके साथ है” लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भारी मन के साथ अवनि ने अपने कदम पीछे ले लिए और पृथ्वी के दिए फूलों को हाथो में उठाये सीढ़ियों की तरफ बढ़ गयी क्योकि अब तक वह प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर खड़ी थी और स्टेशन से बाहर जाने के लिए उसे ब्रिज क्रॉस कर प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर जाना था।

भारी मन के साथ अवनि ब्रिज क्रॉस कर प्लेटफॉर्म 1 पर चली आयी चलते चलते उसका दिल किया कि वह पलटकर एक बार तो पृथ्वी को देख ले क्या पता इसके बाद वह उस से फिर कभी मिल ही न पाए। अवनि ने जैसे ही पलटकर देखा ट्रेन उन दोनों के बीच आ गयी ,, पृथ्वी इस तरफ और अवनि उस तरफ और दोनों ही ट्रेन के गुजरने का इंतजार कर रहे थे।  

अपने सामने से गुजरती ट्रेन को देखते हुए अवनि मन ही मन खुद से कहने लगी,”ये सब क्या है अवनि ? आखिर क्यों रोक रही हो तुम खुद को इसलिए कि कुछ लोगो ने तुम्हारा दिल तोड़कर तुम्हे तुम्हे ठुकरा दिया या फिर इसलिए कि तुम आज भी अतीत की यादों से खुद को दूर नहीं कर पायी हो ? उस पार खड़ा वो शख्स तुमसे बेइंतहा मोहब्बत करता है अवनि और तुम तुम उसे ठुकरा कर जा रही हो सिर्फ इसलिए कि कभी किसी ने तुम्हे भी ठुकराया था।

इन दिनों तुम जो महसूस कर रही हो वो तुम भी जानती हो अवनि फिर क्यों भाग रही हो इन अहसासों से , क्यों तुमने पृथ्वी से जाने को कह दिया ? क्यों तुमने उसे नहीं रोका ? आज वो चला गया तो क्या वो फिर लौटकर आएगा ? मोहब्बत हर बार लौटकर नहीं आती है अवनि,,,,,,,,,,,,क्यों तुम्हारे होंठ उसे अलविदा नहीं कह पाए ? क्यों उसे जाते देखकर तुम्हारी आँखों में आँसू थे ? क्यों तुम्हारे दिल ने चाहा कि वो जाने से पहले तुम्हे एक बार गले लगा ले ? क्या तुम इन सबका मतलब नहीं जानती अवनि ?

क्या सच में तुम्हारा दिल पत्थर हो गया है या फिर तुम पत्थर होने का दिखावा कर रही हो ? उसे रोक लो अवनि अपने लिए ना सही अपनी बिखरी जिंदगी के लिए जिसे सिर्फ पृथ्वी संवार सकता है , अपने दिल पर लगे उन जख्मो के लिए जिन पर मरहम लगाने का हक़ तुमने सिर्फ उसे दिया है , उसे रोक लो अवनि,,,,,,,,,,रोक लो”
एक बार फिर अवनि की आँखे आँसुओ से भर गयी और वह उस ट्रेन के गुजरने का इंतजार करने लगी

अपने सामने से गुजरती ट्रेन को देखते हुए पृथ्वी मन ही मन खुद से कहने लगा,”तुमने उसे जाने को क्यों कहा पृथ्वी ? 10 मिनिट थे न तुम्हारे पास क्या पता इन 10 मिनिट में उसे भी वो महसूस होता जो तुमने उस रोज 40 सेकेंड में कर लिया। क्या लगता है तुम्हे , आज के बाद तुम उसे भूलकर अपनी जिंदगी में आगे जाओगे ,, नहीं बल्कि वो तो तुम्हारे और करीब आ चुकी है , उसे भूलकर आगे बढ़ना तो दूर तुम्हारी तो ये शहर छोड़कर जाने की हिम्मत नहीं हो रही है।

तुम उसके बिना जिंदगी जीने की कल्पना भी नहीं कर पा रहे हो पृथ्वी,,,,,,,,,आज से पहले किसी को अलविदा कहते हुए शायद ही तुम्हारी आँखों में नमी उभरी हो या तुम्हारा मन भारी हुआ हो पर आज हो रहा था क्योकि तुम उसे अलविदा कहना नहीं चाहते थे , तुम नहीं चाहते थे वो जाए बल्कि तुम तो चाहते थे एक बार सिर्फ एक बार वो पुरे हक़ से तुम्हारे सीने से लगे , तुम उसका सर सहलाओ और उसकी पीठ थपथपाकर कहो कि “मैडम जी ! मैं हमेशा आपके साथ हूँ”

इतना तो वो डिजर्व करती थी ना पृथ्वी पर तुम्हारी हिम्मत नहीं हुई जानते हो क्यों ? क्योकि तुम आज डरते हो , तुम डरते हो कही तुम्हारी कोई बात उसे आहत ना कर जाए , तुम डरते हो कही बाकि सबकी तरह तुम उसका दिल ना दुखा दो , तुम डरते हो कही वो तुम से दूर ना चली जाए और तुम डरते हो , डरते हो उसे खो देने से,,,,,,,,,,,,जब इतना ही डरते हो तो फिर तुमने उसे जाने क्यों दिया ?”
पृथ्वी खुद से ये सब कह ही रहा था कि तभी किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा , पृथ्वी ने पलटकर देखा तो एक तेज घुसा आकर पृथ्वी के मुँह पर लगा और पृथ्वी मुँह के बल नीचे जा गिरा।  

पृथ्वी को घुसा मारने वाला कोई और नहीं बल्कि सिद्धार्थ था जो कि अपने कुछ दोस्तों के साथ वहा आया था। सिद्धार्थ ने जब देखा कि अवनि से मिलने वाला लड़का कोई और नहीं बल्कि वही लड़का है जिस से सिद्धार्थ पहले भी बनारस में मिल चुका है तो उसका गुस्सा और बढ़ गया। सिद्धार्थ ने अपने दोस्तों को इशारा किया और उन्होंने पृथ्वी को मारना शुरू कर दिया। पृथ्वी ने कोशिश की लेकिन 6 लड़के एक साथ उस पर हावी हो चुके थे और अब तक उसे खूब मार पड़ चुकी थी। इत्तेफाक से स्टेशन पर इस वक्त कोई पुलिसवाला या गार्ड भी मौजूद नहीं था , ना ही किसी ने पृथ्वी को छुड़ाने की कोशिश की।

मार खाते हुए पृथ्वी ने जब सामने खड़े सिद्धार्थ को देखा तो थोड़ा हैरान हुआ क्योकि पृथ्वी उस से पहले मिल चुका था लेकिन अभी तक पृथ्वी ये नहीं जानता था कि जिस लड़के ने अवनि का दिल तोडा है वो सिद्धार्थ है उसे लगा सिद्धार्थ शायद बनारस वाले झगडे का बदला उस से ले रहा है इसलिए उसने कहा,”पीछे से वार करके खुद को मर्द समझ रहा है , हिम्मत है तो सामने से लड़ ना,,,,,,,,,,तुझे तो बनारस में ही दो फटके पड़ने चाहिए थे ताकि अकल आ जाती तुमको”

“तुझे क्या लगता है तू मेरे नाक के नीचे से अवनि को ले जाएगा और मैं चुपचाप देखता रहूंगा,,,,,,,,,उसके करीब आने की तेरी हिम्मत भी कैसे हुई ? इतना मारो इसे कि सपने में भी ये अवनि के आस पास फटकने की हिम्मत ना करे”,सिद्धार्थ ने गुस्से से कहा  
पृथ्वी ने सिद्धार्थ के मुँह से जब अवनि का नाम सुना तो हैरान रह गया।

अवनि को जिसने इतने दर्द में डाला वो इंसान कोई और नहीं बल्कि सिद्धार्थ था पृथ्वी को जैसे ही पता चला उसने लड़को को साइड में फेंका और सिद्धार्थ के सामने आकर उसकी कोलर पकड़कर गुस्से से कहा,”तेरी हिम्मत कैसे हुई उसे दर्द देने की,,,,,,,,,तूने उसके साथ जो किया वो सब वो डिजर्व नहीं करती थी,,,,,,,!!”

सिद्धार्थ कुछ करता इस से पहले पृथ्वी ने गुस्से एक घुसा सिद्धार्थ के मुँह पर दे मारा और सिद्धार्थ की नाक से खून बहने लगा। पृथ्वी उसे और मार पाता इस से पहले पृथ्वी के पैर पर आकर हॉकी लगा और पृथ्वी नीचे गिर गया। लड़को ने उसे फिर पकड़ लिया। पृथ्वी लहूलुहान था उसके नाक मुंह से खून आ रहा था और पैर जख्मी था।

ट्रेन गुजर चुकी थी और जैसे ही अवनि की नजर पृथ्वी और बाकि सब पर पड़ी तो वह सीढ़ियों की तरफ भागी , भागते हुए फूल उसके हाथो से गिर गए , ब्रिज से भागते हुए दूसरी सीढ़ियों पर आयी और भागते हुए दुपट्टा भी गले से निकलकर नीचे गिर गया। अवनि को ना सिद्धार्थ दिखाई दिया ना ही बाकि सब उसे बस नजर आ रहा था पृथ्वी , अवनि भागते हुए जैसे ही पृथ्वी की तरफ जाने लगी सिद्धार्थ ने उसकी कलाई पकड़कर उसे रोक लिया ये देखकर अवनि की आँखों में डर और तकलीफ के भाव उभर आये और उसने काँपती आवाज में कहा,”सिद्धार्थ , सिद्धार्थ उसे छोड़ दो , उसने कुछ नहीं किया है , उसे छोड़ दो प्लीज”

पृथ्वी बस अवनि को देख रहा था , अवनि को अपनी परवाह करते देखकर पृथ्वी को इतना यकीन तो हो गयी कि अवनि भी उसे चाहती है और ये बात तब साबित हो गयी जब अवनि की आँखों में पृथ्वी के लिए आँसू थे।
अवनि सिद्धार्थ से कह रही थी कि तभी एक लड़के ने हॉकी पृथ्वी के मुँह पर मारा और अवनि तड़प उठी ये देखकर पृथ्वी मुस्कुराया और घुटनो के बल नीचे जा गिरा। उसे मार खाने के दुःख से ज्यादा अवनि की आँखों में अपने लिए मोहब्बत देखने की ख़ुशी थी।

अवनि की आँखों से आँसू निकलकर बह गए और सिद्धार्थ खींचते हुए उसे वहा से ले गया। पृथ्वी वही गिर गया क्योकि वह इतना घायल हो चुका था कि उठकर सिद्धार्थ को नहीं रोक पाया। वह बंद होती आँखों से अवनि को जाते देखता रहा और बेहोश हो गया। अवनि का सफ़ेद दुपट्टा उड़ते हुए आया और पृथ्वी पर आ गिरा और कुछ ही पलों में लाल हो गया,,,,,,,,,,,!!!

( क्या सुरभि समझा पायेगी अवनि को पृथ्वी के लिए भावनाये ? सिद्धार्थ क्या करने वाला है अवनि का हाल ? क्या ख़त्म हो जाएगी ये कहानी इसके बाद ? जानने के लिए पढ़ते रहे “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal
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