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Pasandida Aurat – 79

Pasandida Aurat – 79

Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी की जिंदादिली और खुशमिजाजी देखकर आख़िरकार अवनि मुस्कुरा उठी। वह भी पृथ्वी के पास चली आयी और दोनों ने अनजानी बारात में दिल खोलकर डांस किया। आज पहली बार पृथ्वी अवनि को इतना खुश और हँसते मुस्कुराते देख रहा था। वही अवनि ने महसूस किया कि वह आज दिल से खुश थी , इतना खुश वह आज से पहले कभी नहीं हुई थी। अवनि को डांस का बहुत शौक था और आज कितने ही दिनों बाद अवनि नाच रही थी। बारात आगे बढ़ गयी तो अवनि ने पृथ्वी का हाथ पकड़ा और उसे चलने को कहा क्योकि दोनों की विपरीत दिशा में जाना था।

पृथ्वी अवनि के साथ साइड में आया और दुकान से एक पानी की बोतल लेकर ढक्कन खोला और पहले अवनि की तरफ बढ़ा दी। अवनि ने पानी पीया और बोतल पृथ्वी को देकर कहा,”मैंने सोचा नहीं था तुम इतने पागल हो,,,,,,,!!”
“लेकिन मेरा ये पागलपन कम से कम आपके होंठो पर मुस्कुराहट तो ले आया”,पृथ्वी ने कहा और पानी पीने लगा
पृथ्वी की बात सुनकर अवनि ने पास ही खड़ी गाड़ी के शीशे में खुद को देखा तो पाया आज उसके चेहरे पर अलग ही ख़ुशी और आँखों में एक अलग ही चमक थी। अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखा जो कि पानी पी रहा था।

वह मुस्कुराते हुए पृथ्वी को देखने लगी तो पृथ्वी ने अपनी भँवे उचकाई और अवनि ने ना में गर्दन हिला दी। शाम के 4 बज रहे थे और पृथ्वी के पास अब बस 3 घंटे बचे थे। वक्त तेजी से बीत रहा था और जैसे जैसे वक्त बीत रहा था पृथ्वी का दिल उदासी से भरा जा रहा था। दोनों वहा से पैदल ही मार्किट की तरफ चल पड़े क्योकि ये 3 घंटे पृथ्वी अवनि से बातें करते हुए बिताना चाहता था। सड़क किनारे डिवाइडर पर चलते हुए अवनि पृथ्वी को अपने बचपन , अपनी पढाई और अपने घरवालों के बारे में बता रही थी।

वह पृथ्वी के साथ इतना सहज हो चुकी थी कि उसे अपने बारे में सब बता देना चाहती थी इसलिए नहीं कि पृथ्वी उसे चाहता था बल्कि इसलिए क्योकि पृथ्वी बड़े प्यार से उसे सुन रहा था। सड़क से 1 फुट ऊपर फुटपाथ पर चलते हुए पृथ्वी एकदम से नीचे उतरकर सड़क पर चलने लगा।  
 चलते चलते पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा , अवनि की हाइट अब पृथ्वी की हाइट से मैच कर रही थी और ये देखकर पृथ्वी मुस्कुरा उठा। पैदल चलकर दोनों मार्किट पहुंचे।

पृथ्वी ने देखा ये सिरोही का एक छोटा सा मार्किट था जहा कई छोटी छोटी दुकानो के साथ ठेले लगे थे। अवनि पृथ्वी की तरफ पलटी और कहा,”तुम चाहो तो यहाँ से कुछ खरीद सकते हो”
“अह्ह्ह्ह ठीक है , चलो मुझे आपके लिए कुछ लेना है”,पृथ्वी ने कहा

“मेरे लिए क्यों ? तुम्हे अपने घरवालों के लिए या खुद के लिए कुछ लेना चाहिए”,अवनि ने हैरानी से कहा
“आपने मेरे लिए शर्ट खरीदा तब मैंने चुपचाप आपसे लिया ना,,,,,,,,अब मेरी बारी वैसे भी आपसे मिलने की ख़ुशी में मैं आपके लिए कोई तोहफा लाना भूल ही गया”,पृथ्वी ने कहा
“तुम पहले ही मुझे बहुत कीमती तोहफा दे चुके हो पृथ्वी,,,,, तुम्हारे साथ बिताया वक्त ही मेरे लिए सबसे बड़ा तोहफा है”,अवनि ने कहा

“हो गया आपका , अब चलो”,कहते हुए पृथ्वी ने एक बार फिर पुरे हक़ से अवनि के हाथ को पकड़ा और आगे बढ़ गया। जैसे ही पृथ्वी ने अवनि का हाथ पकड़ा अवनि को एक पॉजिटिव फीलिंग आयी , जैसे किसी अपने ने उसके हाथ को थामा हो ये वैसा ही अहसास था जैसे कभी विश्वास जी अवनि के हाथ को थामकर चलते थे। अवनि पृथ्वी के पीछे चली आयी। पृथ्वी जिस भी दुकान पर अवनि को लेकर जाता वह जान बूझकर मना कर देती या अच्छा नहीं लगा बोलकर नजरअंदाज कर देती क्योकि वह नहीं चाहती थी पृथ्वी खर्चा करे।

उसे पृथ्वी से तोहफा लेने में न जाने क्यों हिचकिचाहट हो रही थी। पृथ्वी ने देखा अवनि हर जगह मना कर रही है तो वह थोड़ा उदास हो गया और हताश होकर कहा,”ठीक है अब मैं आप पर छोड़ता हूँ , आपको जो पसंद है वो आप ले लीजिये बस ले लीजिये प्लीज”
अवनि ने सुना तो पृथ्वी के साथ सामने चूड़ियों के ठेले की तरफ बढ़ गयी। ठेले पर काँच की रंग बिरंगी चूड़ियों का ढेर लगा था। पृथ्वी ने अवनि को देखा और कहा,”ये तो बहुत मामूली लग रही है इनका क्या करेंगी आप ?”

अवनि जान बूझकर वहा आयी थी ताकि पृथ्वी का ज्यादा खर्चा ना हो , उसने पृथ्वी की बात पर ध्यान नहीं दिया और हरे रंग की चूड़ियों का एक सेट उठाया और ठेलेवाले से कहा,”भैया ! ये दीजिये”
पृथ्वी को अच्छा नहीं लगा अवनि ने उस से तोहफा लिया भी तो इतना मामूली और सस्ता , ठेलेवाले ने डिब्बा अवनि की तरफ बढ़ा दिया , पृथ्वी ने उसे पैसे दिए और अवनि से कहा,”ये क्या मैडम जी ! आपने इतनी सस्ती चूड़िया क्यों ली ?”

अवनि मुस्कुराई और कहा,”पृथ्वी तोहफे में क्या है ये इम्पोर्टेन्ट नहीं होता , तोहफा किसने दिया है ये इम्पोर्टेन्ट होता है और ये तोहफा मेरे लिए बहुत अनमोल है , जब भी मेरी जिंदगी में कोई बहुत बड़ा दिन होगा मैं इन्हे जरूर पहनूंगी,,,,,फिर इनकी कीमत और अहमियत अपने आप बढ़ जाएगी”
पृथ्वी ने सुना तो हल्का सा मुस्कुराया और कहा,”आप मुझसे कहती रहती है कि ‘पृथ्वी तुम बहुत अजीब हो’ लेकिन मुझसे ज्यादा अजीब तो आप हो मैडम जी,,,,,,,पसंद किया भी तो क्या ? काँच की चूड़िया,,,,,,,!!”

“इतना मत सोचो ये बहुत अच्छी है , अब चलो”,अवनि ने कहा
“हम्म्म एक मिनिट,,,,,,,,!!”,कहकर पृथ्वी अवनि को लेकर दूसरी तरफ आया जहा एक छोटी सी दुकान पर ढेर सारे झुमके थे। पृथ्वी ने दुकानवाले की तरफ देखा और कहा,”दादा ! इनके इनके लिए कुछ अच्छा सा दिखाईये”
दुकानवाले ने अवनि की तरफ देखा और एक एक करके झुमको की जोड़ी पृथ्वी के सामने रखने लगा। पृथ्वी जिसने आज तक कभी सेफ्टी पिन तक नहीं खरीदा था वह बड़े ध्यान से अवनि के लिए झुमके पसंद कर रहा था।

अवनि जानती थी कि पृथ्वी जिद्दी लड़का है वह नहीं मानेगा इसलिए वह पृथ्वी के बगल में आयी और खुद ही उठाकर देखने लगी। उसने एक जोड़ी अपने कानों से लगाकर पृथ्वी की तरफ देखा तो पृथ्वी ने नाक चढ़ाकर मुँह बनाया और ना में गर्दन हिला दी। अवनि ने उसे साइड में रख दिया , फिर उसने एक मल्टीकलर में उठाया और वो पृथ्वी को दिखाया तो पृथ्वी ने उस पर भी बुरा सा मुँह बनाया तो अवनि ने उसे भी साइड में रख दिया। पृथ्वी ने सामने रखे झुमको में से एक जोड़ी उठाया और सामने देखते हुए हाथ अवनि की तरफ बढ़ा दिया।

अवनि ने पृथ्वी की हथेली में रखे झुमके देखे और देखकर उसे यकीन नहीं हुआ कि पृथ्वी की पसंद इतनी अच्छी भी हो सकती है। वे झुमके अवनि को बहुत पसंद आये , इतने की उसने तुरंत अपने पहने हुए झुमके उतारे और नए झुमके पहनने लगी , एक तो अवनि ने आसानी से पहन लिया लेकिन दूसरा पहनने में उसे दिक्कत हो रही थी। वह उसे ठीक से कान में लगा नहीं पा रही थी और ये देखकर पृथ्वी ने धीरे से कहा,”May i ?”

अवनि ने बिना कुछ कहे झुमका पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिया। पृथ्वी अवनि के थोड़ा करीब आया और अपने हाथो से उसके कान में पहनाने लगा। बेचारा पृथ्वी अपनी साँसे रोक कर खड़ा था लेकिन दिल तेजी से धड़क रहा था वही पृथ्वी की उंगलियों की छुअन अवनि को अपनेपन का अहसास दिला रही थी। पृथ्वी का ध्यान अवनि के कान और झुमके पर था वही दुकानवाला बड़े प्यार से दोनों को देख रहा था क्योकि बीच बाजार ऐसा कुछ देखने को कभी कभार ही मिलता था

दुकानवाले के अलावा कोई और भी था जो पृथ्वी और अवनि को देख रहा था लेकिन प्यार से नहीं बल्कि गुस्से से भरकर और वो कोई और नहीं बल्कि सिद्धार्थ था। उसी बाजार में कुछ ही दूर अपनी गाड़ी में बैठे सिद्धार्थ की नजर एकदम से दुकान के पास खड़ी अवनि पर पड़ी और जब उसने देखा कि कोई लड़का अवनि को झुमके पहना रहा है तो उसका खून खौल गया। कहा सिद्धार्थ अवनि को वापस अपनी जिंदगी में लाने के ख्वाब देख रहा था और कहा अवनि किसी और के साथ अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुकी थी।

सिद्धार्थ पृथ्वी का चेहरा नहीं देख पाया क्योकि वह सिद्धार्थ की तरफ पीठ किये खड़ा था। गुस्से से बहरे सिद्धार्थ ने गाड़ी का दरवाजा खोला और उतरकर जैसे ही जाने लगा गिरिजा जी हाथ में सामान से भरा थैला उठाये सिद्धार्थ की तरफ आयी और कहा,”कहा जा रहे हो ? मैंने सब सामान ले लिया है चलो चलते है पापा का फोन आ रहा है , चाय के लिए इंतजार कर रहे है वो”
गिरिजा के सामने सिद्धार्थ अवनि को कुछ बोल नहीं सकता था इसलिए मन मारकर चुपचाप गाडी में आ बैठा और अवनि को घूरते हुए वहा से चला गया।

पृथ्वी ने अवनि को झुमका पहनाया और दूर हट गया तो दुकानवाले ने अवनि से कहा,”भैया की पसंद बहुत अच्छी है”
“थैंक्यू दादा ! बस मैडम जी ही नहीं मानती कि मेरी पसंद अच्छी है”,पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखकर शरारत से कहा तो अवनि दूसरी तरफ देखने लगी। उसने शीशे में खुद को देखा तो पाया कि झुमके सच में बहुत प्यारे थे और उसके चेहरे पर खिल रहे थे। अवनि को भी मानना पड़ा कि पृथ्वी की पसंद सच में काफी अच्छी थी।

अवनि खुद को शीशे में निहार ही रही थी कि तभी पृथ्वी उसके पीछे आ खड़ा हुआ , अब अवनि को अपने साथ साथ पृथ्वी का अक्स भी नजर आ रहा था। अवनि को लगा वह बस कोई ख्वाब देख रही है इसलिए प्यार से शीशे में नजर आते पृथ्वी के अक्स को देखने लगी। पृथ्वी ने अपने बालों में से हाथ घुमाया और कहा,”वैसे साथ में अच्छे लग रहे है हम दोनों,,,,,,,,,!!”

अवनि ने सुना तो एकदम से पृथ्वी की तरफ पलटी और उस से टकरा गयी। अवनि गिरती इस पहले पृथ्वी ने उसे सम्हाल लिया और उसका हाथ अवनि की कमर से जा लगा। दोनों एक दूसरे के आमने सामने थे , एक दूसरे के करीब , एक दूसरे की आँखों में झाँक रहे थे और इस वक्त दोनों के दिल एक ही लय में धड़क रहे थे। पृथ्वी एकटक अवनि की आँखों में देखे जा रहा था तो वही अवनि की निगाहें उसकी आँखों में ना जाने क्या ढूंढ रही थी ? बाइक के हॉर्न से पृथ्वी को होश आया और वह जल्दी से अवनि से दूर हटा।

अवनि ने भी खुद को सम्हाला और पलटकर कहा,”स्टेशन यहाँ से 40 मिनट की दूरी पर है और तुम्हारी ट्रेन का भी वक्त हो चुका है हमे अब चलना चाहिए”
पृथ्वी ने जैसे ही सुना उसका मन उदास हो गया , इतने खूबसूरत दिन के बाद उसे अब अवनि को छोड़कर वापस मुंबई जाना होगा।

आज कितनी ही बार उसने    अवनि के सामने अपने दिल की बात एक बार फिर कहने की कोशिश की लेकिन नहीं कह पाया और अब कुछ देर में वह वापस मुंबई चला जाएगा सोचकर ही उसके मन में एक चुभन का अहसास हो रहा था। उसने अपने होंठो पर झूठी मुस्कान चिपकाई और दुकानवाले को पैसे देकर अवनि के साथ वहा से आगे बढ़ गया।

अवनि ने सामने से गुजरते ऑटो को रुकवाया और दोनों उसमे आ बैठे। अवनि ने ऑटोवाले से रेलवे स्टेशन चलने को कहा। दोनों एक बार फिर खामोश थे। अवनि को छोड़कर जाने की उदासी जो पृथ्वी के चेहरे पर थी कही न कही वह उदासी अवनि के मन में भी थी। अवनि पहली बार एक ऐसे इंसान से मिल रही थी जिसने उसे सच में समझा था , जिसने उसे ये अहसास दिलाया कि वह चाहे तो खुश रह सकती है , जिसने अवनि के दिल में फिर से जीने कि , खुश रहने की , किसी से प्यार करने की उम्मीद जगाई,,,,,,,,,,,,

पृथ्वी को कहने के लिए अवनि के पास बहुत कुछ था लेकिन वह नहीं कह पायी। खामोश बैठे दोनों पीछे छूटते रास्तो को देख रहे थे। दोनों के चेहरे विपरीत दिशाओ में लेकिन दिल एक ही दिशा में , सहसा ही पृथ्वी का हाथ अवनि के हाथ पर जा लगा तो उसने अवनि की तरफ देखा और जल्दी से अपना हाथ हटा लिया लेकिन अवनि ने अपना हाथ हिलाया भी नहीं , उसका हाथ अभी भी वही था और वह उदास आँखों से पृथ्वी को देखे जा रही थी।
ना जाने कहा से पृथ्वी में इतनी हिम्मत आयी कि उसने एक बार फिर अपना हाथ अवनि के हाथ पर रख लिया और दूसरी तरफ देखने लगा।

अवनि की आँखों में जो उदासी थी उसकी जगह अब आँसुओ ने ले ली। वह भी दूसरी तरफ देखने लगी , रास्तेभर पृथ्वी का हाथ अवनि के हाथ पर रहा। ना अवनि ने इस पर कोई आपत्ति जताई ना ही पृथ्वी ने अपना हाथ हटाया। उसके हाथ की गर्माहट अवनि को किसी अपने के साथ होने का अहसास दिला रही थी और इस रिश्ते की सबसे खूबसूरत बात ये थी कि इस छुअन में हवस का अहसास नहीं था। पृथ्वी का मन भारी हो रहा था

 अवनि की तरह वह भी बहुत कुछ अपने मन में दबाये बैठा था लेकिन कह नहीं पा रहा था। ऑटो रेलवे स्टेशन के बाहर पहुंचा। पृथ्वी और अवनि स्टेशन से नीचे उतरे और अंदर चले आये। अंदर जाते हुए पृथ्वी की नजर स्टेशन के बाहर फूलों की दूकान पर पड़ी तो सहसा ही उसे जयदीप की कही बात याद आयी “उसके लिये फूल ले जाना मत भूलना”

“तुम यही रुको मैं अभी आया”,पृथ्वी ने कहा और अवनि को प्लेटफॉर्म पर छोड़कर वहा से चला गया। अवनि ने अपनी कलाई पर बंधी घडी में समय देखा शाम के 6 बज रहे थे और पृथ्वी की ट्रेन आने में अभी 1 घंटा बाकि था। अवनि वही खाली पड़ी बेंच पर आ बैठी और पृथ्वी के बारे में सोचने लगी। पृथ्वी से हुई पहली बातचीत से लेकर अब तक का जो समय बीता था। अवनि ने महसूस किया कि इस पुरे वक्त में पृथ्वी ने कभी कोई ऐसी बात नहीं कि जो अवनि का दिल दुखाये या उसके मन को ठेस पहुंचाए

अवनि ने महसूस किया कि पृथ्वी ने हमेशा उसके दर्द को कम करने की कोशिश की , उसकी बातें अवनि के जख्मो पर मरहम की तरह थी और अक्सर वह अपनी बातो से अवनि को हसाया करता था या उसे हैरानी में डाल देता था , अवनि ने महसूस किया कि कितनी ही बार पृथ्वी ने उसके सामने अपनी भावनाये जाहिर की और अवनि ने उसे हर बार ना बोल दिया लेकिन पृथ्वी अवनि की ना सुनकर ना कभी दुखी हुआ ना ही उदास वह बस मुस्कुराता और अवनि की ना का सम्मान करते हुए अपने कदम पीछे ले लेता

अवनि ने महसूस किया कि पृथ्वी ने हमेशा अवनि के काम की , उसकी किताबो की , उसके व्यवहार की तारीफ की कभी उसकी खूबूसरती या शरीर की नहीं कि वह कैसी दिखती है ? ,  अवनि ने महसूस किया कि पृथ्वी ने कभी उसे कुछ भी बदलने के लिए नहीं कहा सिवाय अपने पास्ट को भूलकर आगे बढ़ने के , अवनि ने महसूस किया पृथ्वी जैसे मर्द अब तक बस उसकी कहानियो तक सिमित थे लेकिन आज वह उन्ही किरदारों को एक इंसान में देख रही थी और वो इंसान था पृथ्वी ,

अवनि ने महसूस किया पृथ्वी उसके साथ गर्व महसूस कर रहा था और खुश था,,,,,,,,,,,,,और आखिर में अवनि को महसूस हुआ कि अगर वह यू ही पृथ्वी के बारे में सोचती रही तो उसे पृथ्वी से मोहब्बत हो जाएगी,,,,,,,,,,,,ऐसी मोहब्बत जिसे रोक पाना शायद अवनि के हाथ में भी न हो,,,,,,,!!”

“ये तुम्हारे लिए,,,,,,,,!!”,पृथ्वी की आवाज अवनि के कानो में पड़ी तो वह अपने ख्यालों से बाहर आयी और पृथ्वी की तरफ देखा। सामने खड़ा पृथ्वी इस वक्त अवनि को मासूम और पाकसाफ नजर आ रहा था। पृथ्वी के हाथ में सफ़ेद , हलके गुलाबी और लाल फूलों का एक बुके था जिसे वह अवनि के लिए लेकर आया था।  

अवनि को याद आया कि वह हमेशा चाहती थी सिद्धार्थ अपनी तरफ से उसे एक फूल दे लेकिन ऐसा कभी हुआ ही नहीं और आज पृथ्वी उसके सामने फूलों का पूरा गुलदस्ता लेकर खड़ा था जिनमे से बहुत ही प्यारी और भीनी भीनी महक आ रही थी।

पृथ्वी अवनि के लिए फूल लेकर आया था और अवनि एकटक उन फूलों को देखे जा रही थी। अवनि को खोया हुआ देखकर पृथ्वी ने कहा,”मुझे लगा आपको फूल पसंद होंगे बस इसलिए,,,,,,,,,,!!”
अवनि धीरे से मुस्कुराई और बुके हाथो में लेकर कहा,”थैंक्यू,,,ये बहुत खूबसूरत है”
“आपसे थोड़े कम,,,,,,,,,,अह्ह्ह्हह बहुत ज्यादा कम”,पृथ्वी ने अवनि के बगल में बैठते हुए कहा
अवनि ने फूलों को छूकर देखा वे ताजा थे और उन पर पानी की कुछ बुँदे अभी भी ठहरी थी।

अवनि ने उन्हें सहलाते हुए कहा,”कितनी अजीब बात है न पृथ्वी , कल तक मैं अपने पसंदीदा मर्द से एक फूल पाने को तरसती थी और आज मेरे हाथो में इतने फूल एक साथ है,,,,,,,,!!”
“बिल्कुल अजीब नहीं है मैडम जी बस आप कभी अपनी अहमियत समझ ही नहीं पायी,,,,,,,,,,!”,पृथ्वी ने कहा और फिर मन ही मन बड़बड़ाया “अजीब बात तो ये है कि आपको दुःख है कि आपके पसंदीदा मर्द से आपको एक फूल नहीं मिला और किसी के लिए अपनी पसंदीदा औरत को देने के लिए पूरी दुनिया के फूल भी कम पड़ते है , काश आप इन दोनों बातो के बीच का फर्क समझ पाती मैडम जी,,,,,,,,,,!!”

पृथ्वी की बात सुनकर अवनि को समझ आया कि पृथ्वी ने जो कहा वो सच ही तो था , सिद्धार्थ के साथ रहते हुए अवनि कभी अपनी अहमियत समझ ही नहीं पायी। उसने खुद को पूरी तरह सिद्धार्थ के लिए खर्च कर दिया और हमेशा खुद को अपनी ही नजरो में गिराती रही। अवनि को खामोश देखकर पृथ्वी ने कहा,”आप मेरे साथ मुंबई क्यों नहीं चलती ?”
“मैं मुंबई जाकर क्या करुँगी ?”,अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखकर कहा

“बहुत कुछ है , आप अपनी बुक्स लिखना मैं अपने ऑफिस जाऊंगा , शाम में साथ में क्रिकेट खेलेंगे , संडे जुहू घूमने जायेंगे , आप जब अपनी बुक्स लिखोगी तो मैं आधी रात में आपके लिए चाय भी बना दिया करूंगा , मैं आपको बिल्कुल डिस्टर्ब नहीं करूँगा बस दूर बैठकर आपको लिखते देखूंगा , आपको पूरा मुंबई घुमाऊंगा और वहा की सबसे बेस्ट पाव भाजी भी खिलाऊंगा , वैसे मैं खुद भी अच्छी बना लेता हूँ आप कहोगी तो मैं अपने हाथ से बनाकर खिला दूंगा , मेरे स्कूल फ्रेंड्स है साल में 6 बार हम लोग मिलते है तो आपको उन से मिलवाऊंगा ,

जब भी आपका मन उदास होगा या मूड ऑफ होगा तो मैं आपको टपरी लेकर चलूँगा जहा मैं और नकुल जहा चाय पीते है , कभी कभी जब आपका बहुत बात करने का मन होगा और मेरा सुनने का तब समंदर किनारे भी चलेंगे वहा बैठकर मैं इत्मीनान से आपको सुनूंगा , कभी छत की दिवार पर बैठकर आसमान में चाँद देखते हुए बहस करेंगे कि कौनसा सितारा उसके सबसे पास है , और और,,,,,,,,,,,!!”

“बस पृथ्वी और बोलोगे तो मैं ना नहीं बोल पाऊँगी,,,,,,,,,!!”,अवनि ने आँखों में आँसू भरकर कहा। अवनि का दिल दर्द और तकलीफ से भरा जा रहा था कि एक इंसान उस से इतनी मोहब्बत कैसे कर सकता है कि वह अपने हर पल में उसे महसूस करता है। अवनि की आँखों में आँसू देखकर पृथ्वी आगे बोल नहीं पाया जबकि वह भी इस वक्त वही दर्द महसूस कर रहा था जो अवनि कर रही थी और उसने मन ही मन खुद से कहा,”तुम एक बार हाँ बोलकर तो देखो अवनि मैं पूरी दुनिया की खुशियाँ तुम्हारे कदमो में लाकर रख दूंगा,,,,,,,,,,,,,पर जानता हूँ तुम इतनी जल्दी हाँ नहीं कहोगी मोहब्बत की आग में अभी मेरा तड़पना बाकि है”  

( क्या अवनि को होने लगा है पृथ्वी से प्यार ? अवनि के साथ किसी और को देखकर क्या सिद्धार्थ रह पायेगा शांत ? क्या पृथ्वी के फूलों ने एक बार फिर अवनि को दिला दी उसके अतीत की याद ? जानने के लिए पढ़ते रहे “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal
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