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Pasandida Aurat – 75

Pasandida Aurat – 75

Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

सिरोही रेलवे स्टेशन पर पृथ्वी और अवनि एक दूसरे के सामने खड़े थे। अवनि का हाथ पृथ्वी के सीने पर था और पृथ्वी का दिल जोरो से धड़क रहा था। पृथ्वी एकटक अवनि को देखे जा रहा था। ऐसा ही तो होता है जब पसंदीदा इंसान हमारी आँखों के सामने हो , तब ना दिल कुछ समझ पाता है और ना ही दिमाग , शब्द गले में ही ठहर जाते है और पलकें झपकने से इंकार कर देती है। पृथ्वी को खामोश देखकर अवनि के चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये। ट्रेन वहा से गुजर चुकी थी और इसी के साथ पृथ्वी को होश आया और वह दो कदम पीछे हटकर बोला,”ह ह हाय”

पृथ्वी के पीछे हटने से अवनि का हाथ भी उसके सीने से हट गया और उसने अपना हाथ नीचे करके कहा,”तुम्हारी धड़कने इतनी तेज क्यों है ?”
“अह्ह्ह्ह वो मैं भागकर आया ना इसलिए,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने घबराहट भरे स्वर में कहा और झूठ कहा जबकि उसकी धड़कने अवनि को अपने सामने देखकर तेज थी।
“ओह्ह्ह ! मैंने सोचा नहीं था तुम ऐसे राजस्थान चले आओगे”,अवनि ने बात की शुरुआत करके कहा

“मैंने भी नहीं सोचा था,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने खोये हुए स्वर में कहा और जैसे ही उसकी नजरे अवनि से मिली पृथ्वी दूसरी तरफ देखने लगा। अवनि की नजर पृथ्वी की टीशर्ट पर पड़ी लेकिन कुछ कहकर वह पृथ्वी को असहज करना नहीं चाहती थी इसलिए कहा,”कैसे हो ?”
पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा और कहा,”अब ठीक हूँ”
अवनि धीरे से मुस्कुराई और कहा,”तो अब ?”
“अभी 7.20 हो रहे है तो अब से लेकर शाम 7.20 तक का आपका वक्त चाहिए,,,,,,,,,,,वैसे आप चाहे तो मुझे अपना शहर भी घुमा सकती है मैं मना नहीं करूंगा”,पृथ्वी ने शरमाकर अपना सर खुजाते हुए कहा

अवनि ने देखा ये कहते हुए पृथ्वी कुछ ज्याद ही प्यारा लग रहा था। वह मुस्कुराई और कहा,”आपने चाय पी ?”
“हाँ उदयपुर रेलवे स्टेशन पर मैंने और मेरी टीशर्ट दोनों ने पी थी”,पृथ्वी ने झेंपते हुए कहा तो अवनि मुस्कुरा उठी और हाथ से चलने का इशारा किया तो पृथ्वी अवनि के साथ साथ चल पड़ा। पृथ्वी अवनि से कुछ दूरी बनाकर चल रहा था जिस से वह अनजाने में भी अवनि को ना छूये। अवनि से हां मिलाने से हुई सिहरन वह अभी तक महसूस कर रहा था।    

अवनि पृथ्वी को लेकर स्टेशन के बाहर आयी। उसने सामने से गुजरते ऑटो को रोका और पृथ्वी से बैठने का इशारा किया। पृथ्वी ऑटो में आ बैठा और अवनि उसके बगल में आ बैठी। अवनि ने ऑटोवाले को किसी जगह का नाम बताया और ऑटोवाला दोनों को लेकर आगे बढ़ गया। सुबह सुबह शहर की सड़को पर बिल्कुल भीड़ नहीं थी पृथ्वी बाहर देख रहा था। वह अवनि की तरफ देखना चाहता था लेकिन हिम्मत नहीं कर पा रहा था। फोन पर पृथ्वी अवनि से ढेर सारी बाते कर चुका था लेकिन अब अवनि के सामने तो जैसे उसके शब्द ही खत्म हो चुके थे। ऑटो में भी वह काफी खिसककर बैठा था।

“घर में सब कैसे है ?”,अवनि ने ऑटो में फैली ख़ामोशी को तोड़ते हुए कहा
“हाँ ! हाँ अच्छे है , आई बाबा को नहीं पता मैं यहाँ आया हूँ,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा
“मतलब तुम उनसे झूठ बोलकर आये हो ?”,अवनि ने पृथ्वी की तरफ पलटकर हैरानी से कहा
“अह्ह्ह्ह झूठ नहीं बोला मैंने बस कहा कि मैं ऑफिस के काम से बाहर जा रहा हूँ”,पृथ्वी ने कहा
अवनि ने सुना तो ख़ामोशी से पृथ्वी को देखने लगी , पृथ्वी सिर्फ उस से मिलने के लिए इतनी दूर आया था जानकर ही अवनि को बुरा लग रहा था।

बुरा इसलिए क्योकि पृथ्वी उसके लिए इतने एफ्फोर्ट्स कर रहा था और अवनि अभी तक उसके लिए कुछ भी नहीं कर पायी थी। अवनि को उदास देखकर पृथ्वी ने कहा,”अरे आप परेशान मत होईये , आप कहेंगी तो मैं घर जाकर आई बाबा को सब सच बता दूंगा ,, ज्यादा से ज्यादा क्या होगा , बाबा मुँह के बजाय लात घूसों से बात करेंगे और आई खाने के साथ साथ थोड़े ताने देंगी,,,,,,,,,,बट इट्स ओके मैं खा लूंगा”

पृथ्वी की बात सुनकर अवनि हसने लगी और दूसरी तरफ देखने लगी। अवनि को हँसते देखकर पृथ्वी ने मन ही मन कहा,”आपकी ख़ुशी के लिए तो मैं कुछ भी कर सकता हूँ मैडम जी,,,,,,,,,!!”
“अंकल यही साइड में रोक दीजिये”,अवनि ने कहा तो पृथ्वी की तंद्रा टूटी। दोनों ऑटो से नीचे उतरे अवनि जैसे ही ऑटोवाले को पैसे देने लगी पृथ्वी ने रोक दिया और खुद पैसे देकर अवनि के पैसे उसकी तरफ बढाकर कहा,”ये आप रखो”
“अरे लेकिन मैं दे रही थी,,,,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा

“कोई बात नहीं आपके पास खर्च करने के लिए अभी पूरा दिन पड़ा है,,,,,,वैसे हम यहां क्यों आये है ?”,पृथ्वी ने कहा
“जब मुझे तुम्हे अपने 12 घण्टे देने ही है तो क्यों ना शुरुआत एक कप अच्छी चाय से करे , वैसे भी तुम्हे 12 घंटे झेलने के लिए एनर्जी भी तो चाहिए”,कहकर अवनि सामने बने सुंदर से रेस्त्रो की तरफ बढ़ गयी। पृथ्वी मुस्कुराया और अवनि के पीछे आते हुए कहा,”ओह्ह्ह हेलो ! मैं इतना बोरिंग भी नहीं हूँ”
अवनि मुस्कुराई और लड़के से दो चाय देने को कहकर पास ही खाली पड़ी बेंच की तरफ चली आयी।

अवनि बेंच के एक किनारे बैठी और दूसरे किनारे पृथ्वी आ बैठा। पृथ्वी का मन तो बहुत था अवनि के बगल में बैठने का लेकिन अवनि कही उसे गलत ना समझ ले सोचकर वह दूर बैठा था। दोनों ख़ामोशी से चाय का इन्तजार करने लगे तभी एक आदमी आया और पृथ्वी से साइड में खिसकने को कहा तो पृथ्वी अवनि की तरफ खिसक गया। उसे जो ख़ुशी महसूस हुई वह तो उसका दिल ही जानता था बस उसने उसे अपने चेहरे पर आने नहीं दिया। अवनि और उसके बीच की दूरिया थोड़ी कम हो चुकी थी। लड़का चाय लेकर आया।

अवनि ने मिटटी का एक कुल्हड़ पृथ्वी की तरफ बढ़ाया और दूसरा खुद लेकर कहा,”इस शहर में मुझे सबसे ज्यादा यहाँ की चाय पसंद है , मैं अक्सर यहाँ आती रहती हूँ , तुम्हे भी पसंद आयेगी”
“अच्छी है”,पृथ्वी ने पीने से पहले ही बोल उठा
“तुमने पी भी नहीं और अच्छी है”,अवनि ने कहा
“चाय अच्छी है या बुरी ये मेटर नहीं करता , आप किसके साथ बैठकर पी रहे है ये ज्यादा मेटर करता है और इस वक्त मैं एक बहुत ही बेहतरीन इंसान के साथ बैठकर ये चाय पी रहा हूँ”,पृथ्वी ने चाय का घूंठ भरकर कहा

अवनि ने सुना तो पृथ्वी की तरफ देखने लगी। आज से पहले सिद्धार्थ के साथ कई बार वह बाहर गयी है , उसके साथ बैठकर चाय भी पी है लेकिन उसके साथ रहकर सिद्धार्थ ने कभी ऐसा कुछ महसूस नहीं किया होगा जैसा पृथ्वी कर रहा था। पृथ्वी ने देखा अवनि अपनी चाय का कुल्हड़ पकडे बस उसे ही देख रही है तो पृथ्वी ने कहा,”क्या हुआ ? पीओ ना !”
“गर्म है”,अवनि ने कहा तो पृथ्वी ने अवनि से उसका कुल्हड़ देने का इशारा किया और फिर उसे अपने होंठो के सामने करके फूंक मारते हुए ठंडा करने लगा। पृथ्वी ने दो चार बार फूँक मारी और अवनि की तरफ बढ़ाकर कहा,”हम्म्म,,,,,,,,!”

अवनि ने कुल्हड़ ले लिया , पृथ्वी के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे वह आराम से सामने देखते हुए अपनी चाय पी रहा था। पृथ्वी ने अभी जो किया वो देखकर अवनि को अपने बचपन की याद आ गयी जब माँ के गुजर जाने के बाद रोज सुबह स्कूल जाने से पहले वह विश्वास जी के साथ बैठकर चाय नाश्ता किया करती थी और रोज जान बूझकर झूठ मुठ का नाराज होकर विश्वास जी से कहती थी “पापा ! ये गर्म है”
और विश्वास जी ये सुनकर उसका कप लेते और उसे दो चार फूँक मारकर अवनि को देकर पीने को कहते और अवनि ख़ुशी ख़ुशी उसे पी लेती।

अवनि को एकदम से वो पल याद आया और उस की आँखों में आँसू भर आये। पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा और अपनी भँवे उचकाई तो अवनि ने मुस्कुराते हुए ना में गर्दन हिला दी और चाय का कुल्हड़ होंठो से लगा लिया। पृथ्वी अपनी चाय खत्म कर चुका था लेकिन अवनि धीरे धीरे उसे पी रही थी। उसने जब देखा पृथ्वी उसे ही देख रहा है तो उसने कहा,”मैं जल्दी जल्दी नहीं पी सकती”
“कोई बात नहीं आप आराम से पीओ मैं इंतजार कर लूंगा,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने अपने हाथो को बांधकर अवनि की तरफ देखा और बहुत ही प्यार से प्यार से कहा।

अवनि धीरे धीरे अपनी चाय खत्म करने लगी , चाय पीते हुए अवनि को वो पल याद आया जब सिद्धार्थ ने जल्दी के चक्कर में उसके हाथ से चाय का कप लेकर ही फेंक दिया था लेकिन अब अवनि के लिए पृथ्वी पर यकीन करना मुश्किल हो रहा था। सिद्धार्थ ने उसके साथ इतना गलत तरीके से पेश आ चुका था कि अब अवनि को ये सब अपने जैसा लग रहा था जबकि पृथ्वी में ये गुण हमेशा से था और अवनि के सामने तो वह चाहकर भी दिखावा नहीं कर सकता था। पृथ्वी सब के सामने कठोर , गुस्से वाला और बोरिंग बन सकता था लेकिन अवनि के सामने वह हमेशा वैसा ही होता जैसा असल में है।  

अवनि ने अपनी चाय खत्म की और फिर दोनों वहा से वापस सड़क किनारे चले आये। पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा और कहा,”अब ?”
“मंदिर,,,,,,,,,,,,लेकिन उस से पहले कही और जाना है”,अवनि ने कहा
“जहा आप कहे मैडम”,पृथ्वी ने कहा
“सबसे पहले तो तुम मुझे ये मैडम कहना बंद करो प्लीज अजीब लगता है”,अवनि ने कहा
“अह्ह्ह्ह अच्छा ठीक है , वैसे मंदिर से पहले हम जा कहा रहे है ?”,पृथ्वी ने कहा

अवनि ने कुछ नहीं कहा और पृथ्वी के साथ ऑटो में आ बैठी। सुबह के 9 बज रहे थे। अवनि पृथ्वी को साथ लेकर मार्किट आ पहुंची , हालाँकि इतनी सुबह मार्किट खुलने के चांस कम ही थे लेकिन फिर भी अवनि चली आयी और उसकी किस्मत अच्छी थी उसे अपनी बैंक से कुछ पहले ही एक दुकान दिखाई दी जिसे लड़के ने अभी अभी खोला था। अवनि ने ऑटो रुकवाया और पृथ्वी के साथ दुकान में चली आयी। पृथ्वी को कुछ समझ नहीं आया कि अवनि यहाँ क्यों आयी है ? अवनि ने दुकानवाले से पृथ्वी की साइज का एक सफ़ेद टीशर्ट देने को कहा।

“इसकी क्या जरूरत है ये धूल जाएगा”,पृथ्वी ने कहा
“कोई बात नहीं तोहफा समझकर रख लो,,,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा तो पृथ्वी को याद आया कि वह तो जल्दी जल्दी में अवनि के लिए कुछ लेकर ही नहीं आया है उसने अपना निचला होंठ दांतों के नीचे दबा लिया , उसे तो अवनि के लिए फूल खरीदना भी याद नहीं रहा था। अब तो पृथ्वी को मन ही मन खुद पर गुस्सा भी आ रहा था कि वह इतना पागल कैसे हो सकता है ?”

“मैडम ! ये लीजिये , ये इन पर अच्छा लगेगा”,दुकानवाले ने टीशर्ट अवनि की तरफ बढाकर कहा
अवनि ने टीशर्ट हाथो में पकड़ा और पृथ्वी की तरफ पलटकर कहा,”अपना जैकेट निकालो”
“आपके सामने ?”,पृथ्वी ने हैरानी से कहा
“पृथ्वी ! तुमने अंदर आलरेडी टीशर्ट पहना है , जल्दी उतारो”,अवनि ने पृथ्वी को मीठी सी डांट लगाकर कहा ये देखकर दुकानवाला मंद मंद मुस्कुराते हुए बाकी कपडे और बॉक्स साइड में रखने लगा।

पृथ्वी ने अपना जैकेट निकाला , हाफ स्लीव्स सफेद टीशर्ट में उसके बायसेप्स और चेस्ट दिख रहा था। दुकानवाला भी उसकी पर्सनालिटी देखकर उसे देखता ही रह गया। अवनि ने पृथ्वी को एक नजर देखा और हाथ में पकड़ी टीशर्ट उसकी तरफ बढाकर कहा,”इसे बदल लो”
“चेंजिंग रूम ?”,
पृथ्वी ने पूछा
“चेंजिग रूम तो नहीं है भैया,,,,,,,,आप ऐसे ही पहन लीजिये ना”,दुकानवाले ने कहा

पृथ्वी अवनि के सामने अपनी टीशर्ट उतार दे इतनी हिम्मत तो उसमे नहीं थी और अवनि ये बात समझ गयी और कहा,”मैं बाहर इंतजार करती हूँ तुम ये बदलकर आओ”
पृथ्वी ने हाँ में गर्दन हिला दी तो अवनि वहा से चली गयी पृथ्वी ने जल्दी से टीशर्ट बदला और शीशे में खुद को देखते हुए अपने बालों में हाथ घुमाने लगा ये देखकर दुकानवाले ने कहा,”मैडम की चॉइस बहुत अच्छी है भैया”

पृथ्वी ने सुना तो उसका हाथ बालों में ही रुक गया और उसने बहुत ध्यान से अपनी आँखों को देखा जिनमे उसे अवनि के लिए असीम प्यार नजर आ रहा था। वह मुस्कुराते हुए दुकानवाले की तरफ आया अपना जैकेट उठाकर पहनते हुए कहा,”हाँ उनकी चॉइस बहुत अच्छी है,,,,,!!”
पृथ्वी ने टीशर्ट का पेमेंट करना चाहा तो दुकानवाले ने कहा,”मैडम ने मना किया है , आप जाईये ना मैं उनसे बाद में ले लूंगा”

“हम्म्म , थैंक्यू”,पृथ्वी ने कहा और अपनी वाली टीशर्ट को बैग में डालकर बाहर चला आया। अवनि ने देखा सफेद टीशर्ट पर वो सी ग्रीन रंग का जैकेट काफी जच रहा था।
पृथ्वी अवनि के बगल में चला आया तो अवनि ने सामने से गुजरते ऑटो को रोका और पृथ्वी के साथ उसमे आ बैठी। ऑटो में बैठे पृथ्वी के बगल वाले शीशे में उसे अवनि दिखाई दे रही थी और अवनि के बगल वाले शीशे में पृथ्वी , दोनों एक दूसरे के बगल में बैठकर एक दूसरे से अनजान , एक दूसरे को ही देख रहे थे।

अवनि पृथ्वी को लेकर सिरोही के सबसे बड़े शिव मंदिर लेकर आयी। ऑटो मंदिर के बाहर आकर रुका। इस पुरे शहर में ये एक इकलौता ऐसा मंदिर था जहा अवनि कभी सिद्धार्थ के साथ नहीं आ पायी। ऐसा नहीं था सिद्धार्थ ने प्लान नहीं बनाया बल्कि हर बार कोई न कोई काम आता और दोनों यहाँ आने से रह जाते जबकि अवनि अकेले यहाँ बहुत बार आ चुकी थी और आज इत्तेफाक से अवनि पृथ्वी के साथ इस मंदिर में आयी थी।

मंदिर के बाहर खड़े पृथ्वी ने मंदिर को देखा और मन ही मन कहा,”हम्म्म बहुत बढ़िया ! मैं आपके पास नहीं आना चाहता था इसलिए अवनि को जरिया बनाकर मुझे यहाँ बुला लिया,,,,,,,,,,!!”
“क्या सोचने लगे ?”,अवनि ने पृथ्वी को बाहर रुके देखकर कहा
“अह्ह्ह्ह कुछ नहीं,,,,,,,!!”,पृथ्वी की तन्द्रा टूटी और उसने कहा
“पृथ्वी ! मैं जानती हूँ तुम इन सब में विश्वास नहीं करते लेकिन एक बार उन पर विश्वास जताकर तो देखो वो तुम्हारी जिंदगी में सब सही कर देंगे”,अवनि ने प्यार से पृथ्वी को समझाते हुए कहा  

 पृथ्वी ने सुना तो अवनि के चेहरे की तरफ देखने लगा , दुनिया में इस वक्त अगर कुछ मासूम था तो वो थी अवनि की आँखे जिनमे महादेव को लेकर विश्वास भरा था और अवनि के सामने पृथ्वी ने हार मानकर कहा,”ठीक है चलते है इसलिए नहीं कि वो सब ठीक कर देंगे बस इसलिए कि तुमने कहा है,,,,,,,,,और मेरे लिए तुम्हारा कहना काफी है”
अवनि ने सुना तो फिर ख़ामोशी से पृथ्वी को देखने लगी और सोचने लगी कि ये कैसा इंसान है जो ईश्वर के घर में खड़े होकर ईश्वर से ज्यादा एक इंसान को अहमियत दे रहा है।

अवनि पृथ्वी के साथ अंदर चली आयी। पृथ्वी ने अपने जूते उतारे और अवनि ने अपने सैंडिल्स उतारकर साइड में रख दिए। दोनों नल के पास चले आये अपने हाथ और पैरो को धोया और साथ साथ मंदिर की तरफ बढ़ गए। एंट्री गेट से मंदिर के बीच की दूरी 100 मीटर थी इसलिए दोनों धीरे धीरे साथ साथ आगे बढ़ रहे थे। इत्तेफाक से दोनों ने एक ही रंग के कपडे पहने थे बस पृथ्वी की हाइट अवनि से थोड़ी ज्यादा थी लेकिन दोनों साथ साथ चलते हुए अच्छे लग रहे थे। अवनि प्रशाद और पूजा का सामान लेने बगल में बनी दुकान पर चली आयी।

उसने पूजा का सामान देने को कहा लड़के ने जल्दबाजी में अवनि को बड़ा प्रशाद दे दिया जिसमे पूजा के सामान के साथ माँ गौरी के श्रृंगार का सामान भी था। अवनि ने देखा तो कहा,”भैया ये नहीं,,,,,,,,,,,,!!”
“कोई बात नहीं रख लो,,,,,,,!!”,कहकर पृथ्वी ने पैसे दुकानवाले की तरफ बढ़ा दिए और अवनि के साथ आगे बढ़ गया। अब अवनि के दोनों हाथो में पूजा और श्रृंगार की बड़ी टोकरी थी। ये देखकर अवनि ने कहा,”हमे सिर्फ पूजा का सामान लेना चाहिए था”
“कोई बात नहीं तुम ये सब चढ़ा देना,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा

“श्रृंगार का सामान माँ गौरी को चढ़ता है कंवारी लड़किया अच्छे वर के लिए चढाती है और शादीशुदा औरते अपनी शादी में सुख शांति बनाये रखने के लिए”,अवनि ने अपने मन की उलझन पृथ्वी के सामने जाहिर की
“ओह्ह्ह इंट्रेस्टिंग , वैसे ये बिना चढ़ाये भी आपको अच्छा वर मिल सकता है बस आपके हाँ करने की देर है,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा और आगे बढ़ गया

अवनि पृथ्वी को देखते ही रह गयी , दरअसल वह आगे बढ़ा एक बुजुर्ग को उठाने के लिए जो चलते चलते लड़खड़ा कर गिर गए थे और जैसे ही अवनि पृथ्वी के पास आयी उसने प्रशाद की टोकरी में रखी पानी की बोतल उठायी और कुर्सी पर बैठे बुजुर्ग को पिला दिया। अवनि ने देखा ये वो जल था जो उसे पृथ्वी से शिवलिंग पर अर्पित करवाना था लेकिन पृथ्वी ने तो उसे पहले ही कही और अर्पित कर दिया।

( क्या पृथ्वी जीत पायेगा इन 12 घंटो में अवनि का विश्वास और दिला पायेगा उसे फिर से मोहब्बत में यकीन ? क्या पृथ्वी भी कर रहा है सिद्धार्थ की तरह अवनि के सामने अच्छा बनने का दिखावा ? क्या महादेव स्वीकार करेंगे पृथ्वी के हाथो बुजुर्ग को पिलाया गया जल ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal
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