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Pasandida Aurat – 68

Pasandida Aurat – 68

Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी का आखरी मैसेज अवनि की आँखों में नमी ले आया। वह नम आँखों से एकटक उसे देखते रही और अपना दिल कठोर करके एक बार फिर पृथ्वी को ब्लॉक कर दिया। अवनि ने अपना फोन साइड में रखा , अपने बिखरे बालों को समेटा और कमरे से बाहर चली आयी। अवनि का मन उदास था इसलिए अपना बैग उठाया और फ्लेट से बाहर निकल गयी। ना कोई मेकअप , ना ही बढ़िया कपडे , वह घर के कपड़ो में ही बाहर चली आयी और पैदल ही निकल पड़ी।

शाम का समय था और सूरज आसमन में अपनी लालिमा बिखेरे हुए था पर आज अवनि को ना ये आसमान अच्छा लग रहा था ना ही ये शहर , इंसान हो या ख़ुशी अवनि की जिंदगी में बस कुछ वक्त के लिए आती और फिर चली जाती और अब तक तो अवनि को खोने की एक आदत सी पड़ चुकी थी। पैदल चलते हुए अवनि शिव मंदिर चली आयी। उसने हाथ पैर धोये और अंदर आयी। सामने ही महादेव की बड़ी सी मूर्ति ही और उसके ठीक सामने बड़ा सा शिवलिंग ,

अवनि चौकड़ी के पास आ बैठी और उसे साफ़ करते हुए कहने लगी,”मैं नहीं जानती महादेव आपने मेरी किस्मत में क्या लिखा है पर हर बार कुछ देकर वापस छीन लेना जरुरी है क्या ? लोग कुछ पल के लिए मेरी जिंदगी में आते है और फिर चले जाते है , ऐसे लोगो का मेरी जिंदगी में आना जरुरी है क्या ? आप चाहे तो मैं अपनी पूरी जिंदगी आपको समर्पित करने के लिए तैयार हूँ फिर ये कैसी परीक्षाएं है महादेव,,,,,,,,

पृथ्वी के लिए दिल में कोई भावना नहीं है फिर भी आज जब उसने कहा कि वह रुषाली को एक और मौका देना चाहता है तो ना जाने क्यों दिल में कुछ चुभा , मैं उसके लिए खुश हूँ , मुझे मेरे हिस्से का प्यार नहीं मिला लेकिन चाहती हूँ उसे उसका प्यार मिल जाये और वो दोनों खुश रहे , पर जब नियति में यही लिखा था तो आपने उसे मेरी जिंदगी में भेजा ही क्यों ? हाह ! जानती हूँ आप मेरी हर बात सुनते है इस बार भी मैं आपसे कुछ कहना चाहती हूँ , आप सुनेंगे ना ?

मुझे इस दर्द से आजाद कर दीजिये महादेव , जिस अहसास को लोग प्यार कहते है वो अहसास मेरे अंदर से मिटा दीजिये। मुझमे अब और दर्द सहने की हिम्मत नहीं है,,,,,,,,,,,,,!!!”
कहते हुए अवनि की आँखों में भरे आँसू शिवलिंग पर जा गिरे। उसका मन भारी हो रहा था और इस वक्त महादेव के अलावा उसे सम्हालने वाला कोई नहीं था। अवनि खम्बे से पीठ लगाए वही बैठी उदास और खाली आँखों से महादेव की मूर्ति को देखती रही।  

रात होने पर मंदिर के पुजारी जी अवनि के पास आये और उसे घर जाने को कहा तो अवनि की तंद्रा टूटी ! वह उठी और मंदिर से बाहर चली आयी। सड़क के दूसरी तरफ आकर उसने ऑटो रोका और उसमे बैठकर घर के लिए निकल गयी।

देखते ही देखते 4 दिन गुजर गए। अवनि ने पृथ्वी को ब्लॉक कर दिया ताकि पृथ्वी को भूलकर अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाए लेकिन हर रोज वह दिन में 4 बार अपना मेल चेक करती इस उम्मीद में कि पृथ्वी का मेल आया होगा और हर बार निराशा ही हाथ लगती। अवनि ने खुद को बैंक और घर के कामो में व्यस्त कर लिया। तीन दिन बाद सुरभि आने वाली थी इसलिए अवनि थोड़ा खुश थी। रविवार की दोपहर अवनि ने बालकनी के पोधो में पानी दिया , किचन की सफाई की और आज घर भी थोड़ा चमका दिया।

सभी कामो से फ्री होकर अवनि ने आज कोई अच्छी फिल्म देखने का मन बनाया और लेपटॉप चालू किया और सहसा ही उसकी नजर मेल पर चली गयी। अवनि ने बुझे मन से एक बार फिर उसे खोलकर देखा और इस बार अवनि हैरान थी। इनबॉक्स में पृथ्वी का एक मेल था। अवनि ने देखा तो उसका दिल धड़कने लगा उसने उसे खोलकर देखा तो लिखा था

“क्या मैडम जी ! आपने फिर मुझे ब्लॉक कर दिया , पता है दो दिन बहुत बिजी था मैं उसके बाद जैसे ही आपको मैसेज करना चाहा तो देखा ब्लॉक हूँ , थोड़ा गुस्सा भी आया और बुरा भी लगा फिर सोचा गुस्सा तो आपको भी आ रहा होगा मेरे ऊपर , ऐसे बीच रास्ते में छोड़कर भाग गया मैं आपको लेकिन मैं भागा नहीं था मैडम जी मैं बस सब ठीक करने गया था”
अवनि ने पढ़ा और लिखकर भेजा “तुम्हे रुषाली के साथ होना चाहिए”

अवनि का जवाब  पढ़कर पृथ्वी ने अपना फ़ोन अपने ललाट पर मारा और बड़बड़ाया ,”हाँ मुझे सबके साथ होना चाहिए बस इनके साथ ही नहीं होना चाहिए , पता नहीं कब समझेगी” कहते हुए पृथ्वी ने अवनि को जवाब में लिखा
“नहीं मैडम जी ! मेरी मंजिल रुषाली नहीं है आप हो , मैंने जान बूझकर उस दिन आपसे कहा कि मैं उसे एक मौका देना चाहता था ताकि देख सकू आप मुझे रोकती है या नहीं लेकिन आप तो इतनी कठोर है कि कह दिया चले जाओ उसके पास ,,

उस दिन जब रुषाली अचानक घर आ गयी तो मैं कुछ समझ नहीं पाया इसलिए मैंने एक मौका देने की बात कही ताकि उसे अच्छे से समझा सकू और इसलिए मैंने आपको भी खुद से दूर कर दिया क्योकि मैं अपनी वजह से आपको परेशान नहीं देख सकता था पर मुझे क्या पता था आप मुझे फिर से ब्लॉक कर देंगी। मैंने रुषाली को आपके बारे में बताया और ये भी बताया कि मैं अब आपके साथ अपनी पूरी जिंदगी देखता हूँ। थोड़ा टाइम लगा पर वो समझ गयी,,,,,,,,,मुझे माफ़ कर देना मैडम जी मैंने आपको हर्ट किया पर इन चार दिनों में मैंने आपको बहुत मिस किया है,,,,,,,,,,,!!”

अवनि ने पृथ्वी का जवाब पढ़ा और लिखकर भेजा “तुम्हारी सुई अभी तक वही अटकी है , मैंने कितनी बार समझाया पृथ्वी तुम जो चाहते हो वो नहीं हो सकता”

“क्यों नहीं हो सकता ?” पृथ्वी ने भी लिखकर भेजा
“क्योकि मैं एक बर्बाद शख्स हूँ और मुझे अपनी जिंदगी में शामिल कर तुम भी बर्बाद हो जाओगे। मैंने अपनी जिंदगी में आजतक कोई ख़ुशी नहीं देखी है , मेरे हिस्से में बस दर्द आया है तुम क्यों उस दर्द को अपनी जिंदगी में शामिल करना चाहते हो ?” अवनि ने लिखकर भेजा उसके शब्दों से उसका दर्द साफ झलक रहा था जिसे पृथ्वी बखूबी समझ रहा था और वह इसी दर्द से अवनि को आजाद करना चाहता था इसलिए लिखकर भेजा

“ऐसा आपको लगता है , क्या पता आपको अपनी जिंदगी में शामिल कर मैं दुनिया का सबसे खुशनसीब इंसान बन जाऊ , क्या पता आपके साथ से मेरी जिंदगी बदल जाये , आपने अब तक कोई ख़ुशी नहीं देखी क्योकि आप गलत लोगो के साथ थी , आप एक बार अपनी जिंदगी में सही चुनकर तो देखिये मैडम जी”
अवनि ने मेल देखा और लिखकर भेजा “मैं तुम्हारे लायक नहीं हूँ और मुझे कोई हक़ नहीं है तुम्हारी जिंदगी बर्बाद करने का”

पृथ्वी ने देखा तो मुस्कुराया और लिखकर भेजा “शाहरुख़ ने एक मूवी में कहा था “तुम , जो चाहोगी वो मिलेगा , तुम्हे तो इस दुनिया की हर ख़ुशी का हक़ है , एक बार हक़ जताकर तो देखो” मैं शाहरुख़ खान तो नहीं हूँ पर हाँ उसने जो कहा वो आप पर बिल्कुल सही लगता है”
“फिल्मे कम देखा करो , ये सब बातें सिर्फ फिल्मो और किस्से कहानियो में अच्छी लगती है। असल जिंदगी में नहीं इन बातो के कोई मायने नहीं है” अवनि ने लिखकर भेजा

“एक दिन मैं आपका ये ख्याल बदल दूंगा” पृथ्वी ने लिखकर भेजा
पृथ्वी की जिद अब भी वैसी ही थी , उसमे कुछ नहीं बदला था वह अब भी अवनि के सामने अपनी भावनाये जाहिर कर रहा था और अवनि उन्हें नजरअंदाज कर रही थी क्योकि अवनि उस दर्द से फिर गुजरना नहीं चाहती थी। उसने लिखकर भेजा “तुमने मेरी वजह से अपना 8 साल का रिश्ता छोड़ दिया पृथ्वी , रुषाली तुम्हारी जिंदगी में वापस आयी थी तुम्हे उसे अपनाना चाहिए था”

“आपकी वजह से नहीं आपके लिए , कई बार किसी रिश्ते में सालों होते हुए भी हमे वो महसूस नहीं हो पाता जो किसी के साथ 8 सेकेण्ड में हो जाता है। आप प्रेम कहानिया लिखती है ना मैडम जी फिर आप इतनी छोटी सी बात क्यों नहीं समझ पा रही है ?” पृथ्वी ने लिखा
“मैं नहीं जानती पृथ्वी महादेव ने मेरी किस्मत में क्या लिखा है पर मैं नहीं चाहती तुम मेरे लिए ये सब भावनाये रखो ,, मेरा अतीत मेरे साथ हमेशा रहेगा , उसे अपने कंधो पर ढोने की जिम्मेदारी तुम्हारी नहीं है” अवनि ने लिखा

“और क्या आपके महादेव ने मुझे ही आपकी किस्मत में लिखा हो , मैडम जी ! इतना मत सोचिये अगर उन्होंने मुझे आपसे मिलाया है तो कुछ तो उन्होंने भी सोचा होगा वरना हमारी बात क्यों होती ?” पृथ्वी ने लिखा
“ये बस एक इत्तेफाक है पृथ्वी और तुम भी इसे इत्तेफाक ही समझो,,,,,,,,,,,!!” अवनि ने लिखा और लेपटॉप बंद कर दिया। वह अब पृथ्वी से और बहस करना नहीं चाहती थी। अवनि जितना उसे खुद से दूर धकेलने की कोशिश करती पृथ्वी उतना ही उसके करीब आ रहा था।

अवनि के लिए उसने लता की पंसद की लड़की को ना कह दिया , अवनि के लिए उसने रुषाली के साथ अपने 8 साल के रिश्ते को खत्म कर दिया , अवनि के लिए वह कुछ भी करने को तैयार था और ऐसा इंसान सिर्फ तब करता है जब वह पूरी तरह किसी के प्यार में होता है। पृथ्वी अपनी भावनाओ को लेकर क्लियर था बस अवनि अपने आप में उलझती जा रही थी।  उसने वर्तमान और अतीत में खुद को उलझा रखा था और इसी वजह से वह हर बार पृथ्वी को खुद से दूर धकेल रही थी लेकिन पृथ्वी घूम फिरकर फिर उसके सामने आ जाता।

पृथ्वी से बहस करने के बाद अवनि बिस्तर पर आकर लेट गयी , बीती रात ठीक से ना सो पाने की वजह से उसे नींद आ गयी। उधर पृथ्वी परेशान , उसे समझ  नहीं आ रहा था वह अवनि को खुद पर कैसे यकीन दिलाये ? अवनि उसकी कोई बात सुनने समझने को तैयार ही नहीं थी। पृथ्वी लेट गया तभी उसका फोन बजा उसने देखा फोन नकुल का है तो पृथ्वी ने फोन उठाकर कान से लगाया और दूसरी तरफ से नकुल ने कहा,”आज के मैच में तू आ रहा है ना ?”

“नहीं , मेरा मूड नहीं है”,पृथ्वी ने कहा
“क्या हुआ तेरे मूड को ? वैसे भी उस एक लड़की के चक्कर में तू हफ्तेभर गायब रहता है और संडे को मिलता है अब तुझे संडे को भी नहीं आना”,नकुल ने चिढ़े हुए स्वर में कहा
पृथ्वी का मूड पहले ही खराब था नकुल की बात सुनकर और खराब हो गया तो उसने थोड़ा गुस्से से कहा,”वो कोई एक लड़की नहीं है समझा और नहीं आ रहा मैं मेरी मर्जी,,,,,,,,,,,,!!”

“भाड़ में जा,,,,,,!!”,कहकर नकुल ने फोन काट दिया
पृथ्वी ने पलटकर अपना मुँह तकिये में छुपा लिया। आज पहली बार उसने अवनि के लिए नकुल पर गुस्सा किया था।

पृथ्वी क्रिकेट खेलने नहीं गया फ्लेट में पड़ा रहा। भूख लगी तो खाना खाने घर चला आया , खाना भी बेमन से खाया और वापस फ्लेट पर चला आया। एक तो अवनि ने उसे ब्लॉक कर रखा था ऊपर से उसे मैसेज देखने के लिए बार बार मेल चेक करना पड़ता था। थककर उसने अवनि को मेल लिखा
“आई ऍम सो सॉरी शायद मैं आज कुछ ज्यादा ही बोल गया , मुझे अपनी भावनाये तुम पर नहीं थोपनी चाहिए प्लीज मुझे माफ़ कर दो और प्लीज अनब्लॉक कर दो मेल करने के लिए बार बार मेल ओपन करना पड़ता है”

अवनि लेपटॉप के सामने ही बैठी थी और अपना काम कर रही थी , वह खुश थी क्योकि अगली सुबह सुरभि आने वाली थी। उसने जब पृथ्वी का मेल देखा तो दोपहर वाला गुस्सा भूल गयी और उसे अनब्लॉक करके मैसेज किया
“its ok , आइंदा ऐसी बाते मत करना”
पृथ्वी ने इंस्टाग्राम पर अवनि का मैसेज देखा तो ख़ुशी से उसका चेहरा खिल उठा और उसने हाथ जोड़ने वाले इमोजी के साथ लिखकर भेजा
“जी मैडम जी ! एंड थैंक्यू”

अवनि ने पढ़ा और मुस्कुरा उठी कुछ देर इधर उधर की बाते ही और पृथ्वी ने कहा,”क्या आप मुझे विडिओ कॉल करेंगी प्लीज”
 “वो किसलिए ?” अवनि ने लिखकर भेजा
“बस ऐसे ही मेरा आपको देखने का मन है , अगर आप चाहो तो वरना कोई बात नहीं” पृथ्वी ने लिखकर भेजा
अवनि पृथ्वी को अच्छा दोस्त मानती थी और अब तक वह उस पर थोड़ा भरोसा भी करने लगी थी इसलिए उसने पृथ्वी को विडिओ कॉल लगा दिया।

कुछ सेकेण्ड बाद ही पृथ्वी ने कॉल अटेंड किया और जैसे ही अवनि को देखा उसका दिल जोरो से धड़कने लगा। ये सच था कि पृथ्वी अब भी अवनि के सामने कुछ बोलने में घबराता था वह बस मैसेज में उटपटांग बातें लिख देता था लेकिन अवनि के सामने उसकी बोलती बंद , आँखों में मासूमियत और होंठो पर बड़ी सी मुस्कान आ जाती थी।
– कहो क्या बात करनी है ?
“अरे रुको ! अब ऐसे एकदम से तो क्या बात करूंगा मैं”

पृथ्वी को घबराया देखकर अवनि मुस्कुरा उठी और कहा – सच में दुनिया के आठवे अजूबे हो तुम , मैसेज में इतनी बड़ी बड़ी बाते करते हो लेकिन मेरे सामने तुम्हारी आवाज नहीं निकलती”
“अह्ह्ह्हह ! ऐसा कुछ नहीं है , मुझे बस आपको देखना अच्छा लगता है”
“तुम्हारे अंदर का आशिक़ फिर जाग गया ना ?”,अवनि ने झूठ मुठ की नाराजगी दिखाकर कहा  
“मैं कोशिश करता हूँ पर मैं नहीं छुपा पाता ना”,पृथ्वी ने मासूमियत से कहा

“अच्छा छोडो ये सब चलो अपना घर दिखाओ”,अवनि ने पृथ्वी को मुद्दे से भटकाकर कहा
“हाँ क्यों नहीं , एक मिनिट मैं बैक केमेरा ऑन करता हूँ”,कहकर पृथ्वी ने अपने फोन का बैक कैमरा ऑन किया और अवनि को अपना फ्लेट दिखाने लगा। वो बेचारा ये भूल गया कि उसके फ्लेट में और तबेले में बस 19-20 का ही फर्क था। अवनि मुस्कुराते हुए देख रही थी पृथ्वी ने बताना शुरू किया

“अह्ह्ह ये मेरा कमरा है , ये सिंगल बेड है फिर जब मेरी शादी हो जाएगी तब मैं बड़ा बेड ले लूंगा। ये दिवार पर जो तस्वीरें लगी है ये खानदान के लोग है। ये मेरा कबर्ड है इसमें मेरे कुछ कपडे और जरुरी सामान है। एक मिनिट ये स्टोर रूम है यहा भी काफी सामान रखा है लेकिन ये मैं शादी के बाद यूज़ करूंगा , अभी तो मैं यहाँ बस सोने के लिए आता हु,,,,,,,,,,!!”,कहते हुए पृथ्वी कमरे से बाहर निकल गया।

वह किचन की तरफ आया और किचन के साथ साथ अवनि को अपने गंदे पड़े घर का पूरा टूर करवा दिया और बालकनी की तरफ आकर कहा,”ये इस घर में मेरा सबसे पसंदीदा कोना है”
अवनि ने देखा कमरे और किचन के साथ साथ बालकनी में काफी कचरा था और ये देखकर उसने पृथ्वी को ताना मारकर कहा,”हाँ कुछ ज्यादा साफ़ है”
“अह्ह्ह्ह वो टाइम नहीं मिला ना सफाई करने का,,,,,,,,,अगले संडे करूंगा”,पृथ्वी ने झेंपते हुए कहा

वह एक बार फिर अपने कमरे में चला आया और बिस्तर पर आ बैठा , उसने फ्रंट कैमेरा ऑन किया और कहा,”कैसा लगा मेरा घर ?”
“अच्छा है,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा
“थैंक्यू ! आप कभी मुंबई आएँगी तो मैं आपको अपने घर लेकर जरूर आऊंगा , आप आएँगी ना ?”,पृथ्वी ने कहा
“हम्म्म जरूर,,,,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा और उसके बाद दोनों बाते करने लगे। पृथ्वी ने आज अवनि से कोई फ्लर्ट नहीं किया , ना ही उसे परेशान किया बल्कि वह अवनि को अपने स्कूल से लेकर कॉलेज , घर परिवार और अपनी दादी की डेयरिंग के किस्से सुना रहा था जिन्हे सुनकर अवनि हंस मुस्कुरा रही थी।

बातें करते हुए कब 1 घंटा बीत गया दोनों को पता ही नहीं चला। अवनि के अपने पैरों को ऊपर किया और आलथी पालथी मारकर बैठने लगी तो पृथ्वी की नजर उसके पैरों पर चली गयी और उसने कहा,”आप बुरा ना माने तो आपसे एक बात पुछु ?”
“हाँ पूछो”,अवनि ने कहा
“आपने एक पैर में पायल पहनी है , दूसरे में नहीं ऐसा क्यों ?”,पृथ्वी ने पूछा

अवनि ने सुना तो हैरान थी पृथ्वी की नजर तेज थी या फिर उसका ध्यान सिर्फ अवनि पर था। उसने कहा,”ये पायल मुझे मेरे पापा से मिली है , टाइम जब मैं बनारस गयी थी तब दोनों पायल पहनी थी लेकिन “काशी विश्वनाथ मंदिर” से लौटते वक्त मेरी एक पायल कही गिर गयी तब से मैं बस एक ही पायल पहनती हूँ , पापा की बस यही निशानी है मेरे पास इसलिए मैं इसे हमेशा अपने साथ रखना चाहती हूँ,,,,,,,,,,,,,,!!”
पृथ्वी ने सुना तो सहसा ही उसकी आँखों के सामने बनारस का वो पल आया जब वह “काशी विश्वनाथ मंदिर” के आँगन में खड़ा था।

उसे बस अवनि की आधी बात सुनाई दी “”काशी विश्वनाथ मंदिर” से लौटते वक्त मेरी एक पायल कही गिर गयी”  बाकी अवनि ने क्या कहा पृथ्वी को नहीं पता। पृथ्वी को खोया देखकर अवनि ने कहा,”क्या हुआ ? क्या सोचने लगे तुम ?”
“मैं , मैं आपसे बाद में बात करता हूँ”,कहकर पृथ्वी ने कॉल कट किया और फोन साइड में रखकर अपनी अलमीरा के सामने आया।

उसका दिल धड़क रहा था उसने अलमीरा खोली , उसके दराज को खोला और कोने रखे गुलाबी रंग के कागज़ के पैकेट को उठाया। पृथ्वी के हाथ काँप रहे थे उसने उसे खोला और उसमे रखी पायल को उठाकर देखा तो उसका दिल और जोरो से धड़कने लगा। ये अवनि की ही पायल थी जो उस रोज उसे “काशी विश्वनाथ मंदिर” में मिली थी।

( क्या अवनि और पृथ्वी की बहस कभी खत्म होगी ? क्या अवनि जान बूझकर कर रही है पृथ्वी को खुद से दूर ? अवनि की पायल को देखकर क्या होगा पृथ्वी का अगला रिएक्शन ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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