Pasandida Aurat – 63
अवनि का जवाब देखकर पृथ्वी सोच में पड़ गया वह समझ गया कि अवनि का दिल टुटा है और वह अब अपनी जिंदगी में किसी को आने नहीं देगी। अवनि के साथ जो हुआ उस बारे में सोचकर पृथ्वी को उस लड़के पर गुस्सा आ रहा था और उसे बिना मिले , बिना देखे ही पृथ्वी उस से नफरत करने लगा इसलिए नहीं कि उसने अवनि का दिल तोडा बल्कि इसलिए कि अवनि जैसी लड़की दिल टूटना डिजर्व नहीं करती थी। पृथ्वी का मन उदास हो गया वह वह कैसे भी करके अवनि को इस तकलीफ इस दर्द से निकालना चाहता था लेकिन कैसे ?
वह अवनि से इतनी दूर था कि उस से मिलकर उसे समझा भी नहीं सकता था। पृथ्वी उठा और केंटीन की तरफ चला आया। उसने एक चाय ली और लेकर खिड़की के पास चला आया। हलकी सुहावनी धूप खिड़की से होकर रेस्ट एरिया में आ रही थी। पृथ्वी ने कप होंठो से लगाया और चाय का एक घूंठ भरा। उसके दिमाग में अभी भी अवनि का ख्याल था। चाय पीते हुए पृथ्वी मन ही मन खुद से कहने लगा,”तो आपको कितना मानती है महादेव , फिर उसके हिस्से में इतना दर्द इतनी तकलीफ क्यों ? जिस लड़के को उसने पसंद किया उसी ने उसका दिल तोड़ दिया , पर आप बताओ क्या सच में वो ये डिजर्व करती थी।
अकेले रहती है घरवालों से दूर कैसे सम्हाला होगा उसने खुद को ? उदास हुई होगी तो कोई हँसाने वाला नहीं होगा , रोई होगी तो चुप करवाने वाला भी कोई नहीं था , जब टूटी होगी तो पीठ सहलाने वाला कोई नहीं था,,,,,,,,,,उसे देखता हूँ तो लगता है वो इतनी भी मजबूत नहीं कि ये सब अकेले सम्हाल सके,,,,,,,,,,,आपने पहले मुझे उसकी जिंदगी में क्यों नहीं भेजा ? मैं उस से मिला भी तो ऐसे वक्त में जब उसका प्यार से भरोसा उठ चुका है , जब वो अकेले रहना चाहती है
खुद को दुसरा मौका तक देना नहीं चाहती,,,,,,,,,हाँ मानता हूँ उसे खुद पर यकीन दिलाने के लिए मुझे बहुत मेहनत करनी होगी और मैं कर लूंगा , पूरी जिंदगी करने के लिए तैयार हूँ पर जानता हूँ वो मुझे एक्सेप्ट नहीं करेगी,,,,,,,,,,!!!”
अपने ही ख्यालो से पृथ्वी उदास हो गया और फिर एकदम से बड़बड़ाया,”लेकिन मैं हार नहीं मानूंगा , मैं उसे इस दर्द से निकालकर रहूंगा”
“आई लिखे योर स्पिरिट , मैं जानता ही था कि तुम सिर्फ जीतने के लिए बने हो,,,,,,,,,,,अहा ! अब ये मत कहना कि कोई लड़की नहीं है , ये कोई फिल्म नहीं चल रही है , मैं अपनी पर्सनल लाइफ आपसे शेयर क्यों करू बला बला बला ,, मैं तुम्हारी पर्सनल लाइफ के बारे में जानना चाहता भी नहीं मुझे बस ये जानना है कि ये “अवनि” कौन है ?”,जयदीप ने अपना कॉफी मग हाथ में पकडे पृथ्वी की तरफ आते हुए कहा
“अभी आपने मुझसे कहा कि आपको मेरी पर्सनल लाइफ में कोई इंट्रेस्ट नहीं है तो फिर आप क्यों पूछ रहे है ?”,पृथ्वी ने कहा
जयदीप पृथ्वी के पास आया और कहा,”बिल्कुल मुझे तुम्हारी पर्सनल लाइफ में कोई इंट्रेस्ट नहीं है बट अपने ऑफिस में तो है , ये नाम तुमने आज की मीटिंग फाइल में लिखा है और जो रिपोर्ट्स कुछ देर पहले तुमने मीटिंग रूम में बैठे क्लाइंट को भेजी है खुशकिस्मती से उसमे भी तुमने यही नाम मेंशन किया है।
अब या तो तुम्हे ये नाम इतना पसंद है कि मुझे अपनी कम्पनी का नाम बदलकर “अवनि Pvt. Ltd. कम्पनी” कर देना चाहिए या फिर तुम्हारी जिंदगी में कोई है जिसका नाम अवनि है और आजकल तुम उसके ख्यालो में कुछ ज्यादा ही खोये हो”
पृथ्वी ने सुना तो उसके चेहरे पर हवईया उड़ने लगी , उसने जल्दी से चाय का कप रखा और जैसे ही जाने लगा जयदीप ने उसे रोककर कहा,”अह्ह्ह्ह अहह आराम से वैसे भी टीम मेम्बर्स और क्लाइंट्स मीटिंग रूम में तुम्हे बधाई देने के लिए तुम्हारा इंतजार कर रहे है,,,,,,,,best of luck”
“आप मेरे बॉस है या मेरे दुशमन ?”,पृथ्वी ने जयदीप को घूरकर कहा क्योकि इतना तो वह समझ चुका था कि अवनि के नाम पर आज उसकी अच्छी खासी क्लास लगने वाली है और ऑफिस में भी सबको पता चल जाएगा कि उसकी जिंदगी में कोई लड़की है।
“अह्ह्ह दोस्त तो तुम मुझे मानते नहीं और बॉस होकर भी मैने तुम्हारे साथ बॉस जैसा बिहेव कभी किया नहीं अब बचा दुश्मन तो इतने प्यारे लड़के से दुश्मनी करना मुझे अच्छा नहीं लगेगा”,जयदीप ने अपनी कॉफी का घूंठ भरकर सधे हुए स्वर में कहा
“देख लूंगा आपको”,पृथ्वी ने चिढ़ते हुए कहा और वहा से चला गया। केबिन में ना जाकर पृथ्वी मीटिंग रूम की तरफ बढ़ गया क्योकि असली टॉर्चर तो वही था।
पृथ्वी मीटिंग रूम में आया जहा 3 क्लाइंट के साथ ऑफिस के कुछ सीनियर्स भी मौजूद थे। पृथ्वी को देखते ही एक सीनियर ने कहा,”पृथ्वी ! what is this ? तुमने आज की मीटिंग का फाइल “अवनि” नाम से मिशन क्यों किया है ? रिपोर्ट भी तुमने इसी नाम से भेजी है ,, तुम ठीक हो ना ? देखो अगर तुम्हे इस प्रोजेक्ट में कोई प्रॉब्लम आ रही है तो इसे दूसरी टीम को फॉरवर्ड कर देते है and i think you need some rest”
पृथ्वी सीनियर की बात का इशारा समझ गया , उसने महसूस किया कि उसकी गलती थी ,
पहली बार उसने पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को मिक्स कर दिया और इतनी बड़ी गलती कर दी। पृथ्वी ने जैसे ही कहने के लिए मुँह खोला जयदीप ने मीटिंग रूम में आते हुए कहा,”पृथ्वी की इसमे बस एक छोटी सी गलती है वो A के बाद स्पेस लगाना भूल गया एंड हिंदी के बजाय प्रोजेक्ट नेम इंग्लिश में लिख दिया”
पृथ्वी ने सुना तो हैरानी से जयदीप को देखा , उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि जयदीप क्या बोल रहा है और क्यों बोल रहा है ?
उसने कहना चाहा तो जयदीप ने उसे हाथ से रुकने का इशारा किया। सामने बैठे क्लाइंट में से एक ने कहा,”but जयदीप ये हमारे प्रोजेक्ट का टाइटल नहीं है , हमारा प्रोजेक्ट एक वौइस् प्रोजेक्ट है और हमने आज उसी की मीटिंग रखी थी रिमेम्बर ?”
“i know मिस्टर मित्तल ! मैंने ही पृथ्वी से रिपोर्ट बनाने और टाइटल के साथ सेंड करने को कहा था but आप तो मेरे काम करने का तरिका जानते ही है i like different things so मैंने ही पृथ्वी से कुछ अलग बनाने को कहा। अब आपका प्रोजेक्ट एक वौइस् प्रोजेक्ट है और वौइस् को हिंदी में कहते है “वाणी” so मैंने पृथ्वी से कहा टाइटल A वाणी रखे एंड गलती ये हुई कि ये A के बाद कोमा लगाना भूल गया और वाणी हिंदी के बजाय इंग्लिश में कर दिया तो वो हम सबको “Avani” शो हो रहा है,,,,,,,,,,
but trust me मिस्टर मित्तल A वाणी become next brand in mumbai”,जयदीप ने अपनी तरफ से इस मामले पर सफाई दी और हैरानी की बात ये थी कि पृथ्वी को छोड़कर सभी क्लाइंट और बाकि सबको ये काफी पसंद आया।
“ohh great मिस्टर मौर्या ! रिपोर्ट और प्रोजेक्ट टाइटल काफी इंट्रेस्टिंग है , i like it”,मिस्टर मित्तल ने खुश होकर कहा
“Thankyou मिस्टर मित्तल ये सब मेरे नए मैनेजर पृथ्वी उपाध्याय का कमाल है , ये पूरा आइडिआ इनका ही था”,जयदीप ने पृथ्वी की तरफ देखकर कहा और हल्का सा मुस्कुराये
“ओह्ह्ह thankyou मिस्टर उपाध्याय ! अगर आप इसे सही करके रेसेंड कर दे तो i’ll be thankful”,मिस्टर मित्तल ने कहा
“sure sir and i am so sorry for my mistake”,पृथ्वी ने बहुत ही शालीनता से कहा
“ओह्ह्ह इट्स ओके आप ये गलती नहीं करते तो जयदीप से हमे इतना अच्छा एक्सप्लेनेशन सुनने को कैसे मिलता , आप जाईये और करेक्शन करके रिपोर्ट रिसेंड कीजिये”,कम्पनी के सीनियर ने कहा तो पृथ्वी ने दोनों हाथो को बांधा अपना सर झुकाया और मीटिंग रूम से बाहर निकल गया।
जयदीप बाकि सबके साथ आ बैठा और बाते करने लगा। ऑफिस बॉय सबके लिए चाय कॉफी रखकर चला गया। आज जयदीप की समझदारी ने पृथ्वी को बचा लिया।
पृथ्वी की बातों से अवनि थोड़ी थोड़ी उलझन में पड़ गयी। अवनि इतना तो जान चूकी थी कि पृथ्वी उसे पसंद करता है लेकिन वह पृथ्वी के साथ आगे बढ़ना नहीं चाहती थी। वह फिर से अपनी जिंदगी में उन दुखो को न्यौता देना नहीं चाहती थी जो सिद्धार्थ की वजह से पहले ही उसकी जिंदगी में शामिल थे। मुकुल से शादी तोड़कर अवनि को पहले ही एक बड़ा दर्द मिल चुका था , उसके बाद प्यार के नाम पर सिद्धार्थ ने उसका दिल तोड़ दिया। अवनि में अब इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह किसी लड़के को अपनी जिंदगी में आने दे।
अवनि ने मन ही मन फैसला किया कि वह अब पृथ्वी से कम से कम बात करेगी जिस से पृथ्वी उस से कोई उम्मीद ना रखे। शाम में बैंक से निकलकर अवनि पैदल ही घर के लिए चल पड़ी। घर आकर अवनि ने कपडे बदले , अपने लिए चाय बनायीं और लेकर सोफे पर आ बैठी। ना चाहते हुए भी पृथ्वी के ख्याल उसे घेर रहे थे। सिद्धार्थ के साथ 6 महीनो में वह इतना सहज नहीं हो पायी जितना पृथ्वी से 6 दिन बात करके महसूस कर रही थी। अवनि को याद आया कि उसकी नयी किताब जो कल रात ही पूरी हुई है वो छपने के लिए जाने वाली है।
अवनि ने अपना फोन उठाया और अपने प्रोफाइल पर एक कोट लिखकर पोस्ट कर दिया जो एक बार फिर नए सपने देखने को लेकर था। चाय पीकर अवनि अपने काम में बिजी हो गयी और इसी के साथ पृथ्वी का ख्याल भी उसके जहन से निकल गया।
पृथ्वी ने अपनी गलती सुधारी , सभी रिपोर्ट्स और प्रोजेक्ट डिटेल्स दोबारा क्लाइंट्स और टीम को भेजी और अपना लेपटॉप बंद करके जयदीप के केबिन के बाहर आकर दरवाजा खटखटा दिया।
“yes come in”,अंदर से जयदीप की आवाज आयी
पृथ्वी दरवाजा खोलकर अंदर चला आया , जयदीप ने पृथ्वी को देखा और उसे बैठने का इशारा किया। पृथ्वी ने कुर्सी खिसकाई और उस पर आ बैठा। जयदीप पृथ्वी का चेहरा पढ़ चुका था और वह जानता था कि पृथ्वी यहाँ क्यों आया है लेकिन वह बस पृथ्वी के बोलने का इंतजार कर रहा था।
“आपने मीटिंग रूम में ऐसी अजीबोगरीब कहानी क्यों सुनाई ? आपने जो उन लोगो को बताया वैसा कुछ भी नहीं था,,,,,,,मैंने गलती की थी और मैं उसके लिए सजा भुगतने को तैयार था”,पृथ्वी ने कहा
जयदीप मुस्कुराया और कहा ,”पृथ्वी ! i know तुम अपने काम को लेकर कितना अलर्ट और कोंफिड्नेट हो लेकिन आज पहली बार तुम से गलती हुई , वो भी इतनी प्यारी गलती कि किसी लड़की का नाम तुम ऑफिस प्रोजेक्ट की फाइल में मेंशन कर रहे हो लेकिन पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ दोनो अलग चीजे है
मैं नहीं चाहता था एक गलती के लिए क्लाइंट तुम से ये प्रोजेक्ट छीन ले बस इसलिए मैंने तुम्हे सही दिखाने के लिए एक छोटा सा झूठ कहा,,,,,,!!”
“But आपने ऐसा क्यों किया ?”,पृथ्वी ने बेचैनी भरे स्वर में कहा
जयदीप पृथ्वी को देखकर मुस्कुराया और बहुत ही सधे हुए स्वर में कहा,”अगर तुम मेरे लिए जोसेफ का इतना बड़ा ऑफर ठुकरा सकते हो तो मैं तुम्हारी छोटी सी गलती तो सुधार ही सकता हूँ ना पृथ्वी,,,,,,,!!!”
पृथ्वी ने सुना तो हैरानी से जयदीप को देखने लगा क्योकि आज तक उसने कभी जयदीप को ये बात नहीं बताई थी। वह जयदीप और जोसेफ के बीच रिश्ता खराब करना नहीं चाहता था लेकिन आज जयदीप के मुंह से ये सुनकर पृथ्वी हैरान था।
पृथ्वी को हैरान देखकर जयदीप ने कहा,”अब तुम बताओ इतने अच्छे एम्प्लॉय के साथ गलत होते भला मैं कैसे देख सकता हूँ ? इसलिए मैंने बस छोटा सा झूठ कहा एंड देखो वो झूठ आज की मीटिंग और प्रोजेक्ट का सबसे स्ट्रांग पॉइंट बन गया”
“Thankyou Sir ! मैं आगे से पूरा ध्यान रखूंगा कि ऐसी गलती दोबारा ना हो,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने उठते हुए कहा
“Come on पृथ्वी दोस्तों को thankyou नहीं कहते”,जयदीप ने कहा
“लेकिन आप मेरे दोस्त नहीं मेरे बॉस है और बॉस ही रहेंगे,,,,,,,,,!!”,कहकर पृथ्वी जाने लगा
“वैसे तुम्हारी अवनि ने तुम्हे बचा लिया”,जयदीप ने कहा तो पृथ्वी पलटा और ना चाहते हुए भी उसके होंठो पर मुस्कान तैर गयी तो जयदीप ने कहा,”वैसे नाम अच्छा है “अवनि”
जयदीप के मुँह से अवनि का नाम सुनकर पृथ्वी को जलन हुई और मुस्कान उसके होंठो से गायब हो गयी उसने जयदीप को घूरकर देखा और वहा से चला गया लेकिन जयदीप हंस पड़ा और कहा,”उफ़ ये लड़का ! उसके नाम से इतना मुस्कुरा रहा है वो हमेशा के लिए इसकी जिंदगी में आ गयी तो इसका क्या होगा ?”
अवनि ने अपने लिए खाना बनाया और हाथ मुँह धोने वाशबेसिन के सामने चली आयी। तौलिये से हाथ मुँह पोछते हुए अवनि हॉल में चली आयी और वहा रखा अपना फोन उठाकर देखा तो अवनि का दिल धड़क उठा। स्क्रीन पर सिद्धार्थ का मैसेज था , अवनि के चेहरे पर परेशानी और उलझन के भाव झिलमिलाने लगे।
उसने मैसेज खोलकर देखा
“अब कौनसे सपने देखने जा रही हो तुम ? देखो अवनि अगर तुम्हे लगता है कि मैं तुम्हे अपनी जिंदगी से इतनी आसानी से चले जाने दूंगा तो इस ग़लतफ़हमी में मत रहना”
सिद्धार्थ का मैसेज पढ़कर अवनि को अजीब सी घुटन और डर का अहसास होने लगा उसने लिखकर भेजा “ग़लतफ़हमी में तो मैं अब तक थी सिद्धार्थ , अब होश में आ चुकी हूँ”
“मुझे तुमसे मिलना है अवनि” सिद्धार्थ ने लिखकर भेजा
“मुझे नहीं मिलना और ना ही मैं तुम से मिलना चाहती हूँ” आज पहली बार अवनि ने सिद्धार्थ को तुम कहकर बुलाया
“कभी न कभी तो मिलोगी अवनि , दुनिया बहुत छोटी है कही न कही तो हम जरूर टकराएंगे” सिद्धार्थ ने लिखकर भेजा
अवनि ने पढ़ा तो उसे चुभन और तकलीफ का अहसास हुआ , उसका दिल जोरो से धड़क रहा था और वह घुटन महसूस कर रही थी। उसकी आँखों के सामने एक बार फिर सिद्धार्थ के साथ बिताये पल आने लगे। अवनि ने हाथ में पकड़ा फ़ोन सोफे पर फेंक दिया और कमरे में चली गयी।
अवनि कमरे में एक कोने में आ बैठी और घुटने मोड़कर अपना सर उस पर झुका लिया वह अभी भी खुद को बंधा हुआ महसूस कर रही थी। इस वक्त जिस तकलीफ से वह गुजर रही थी उसे कोई नहीं समझ सकता था। किसी का जिंदगी से चले जाना उतना तकलीफ नहीं देता जितना बार बार आना और भरे हुए जख्मो को कुरेद कर चले जाना देता है। सिद्धार्थ भी अवनि के साथ वही कर रहा था था। वह हफ्तों गायब रहता और फिर एक दिन अचानक उसे मैसेज या फोन करता और अवनि फिर से अपने अतीत की बुरी यादो में उलझकर रह जाती
( इस घटना के बाद क्या बदलेगा जयदीप और पृथ्वी का रिश्ता ? क्या पृथ्वी कह पायेगा अवनि से अपने दिल की बात ? क्या अवनि को डरा-धमकाकर सिद्धार्थ फिर से ले आएगा उसे अपनी जिंदगी में ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
