Pasandida Aurat – 58
अवनि होली से दो दिन पहले सुरभि के घर चली आयी। सबसे मिलकर उसे अच्छा लगा चाय नाश्ते के बाद सुरभि अवनि को लेकर अपने कमरे में चली आयी। सुरभि ने दरवाजा बंद किया और अवनि की तरफ पलटकर कहा,”बाहर तुमने जो मुझसे कहा क्या वो सच है अवनि ?”
अवनि ने उदासी से हामी में सर हिला दिया , सिद्धार्थ अवनि की जिंदगी से चला गया है ये जानकर सुरभि खुश थी लेकिन अवनि के सामने अपनी ख़ुशी जाहिर करके वह उसे हर्ट करना नहीं चाहती थी।
सिद्धार्थ पर उसे गुस्सा भी आ रहा था आखिर वह अवनि को धोखा कैसे दे सकता है ? सुरभि ने अवनि की तरफ देखा और गुस्से से कहा,”उस सिद्धार्थ को तो मैं छोडूंगी नहीं अवनि , उसकी हिम्मत कैसे हुई ये सब करने की ?”
“सब मेरी गलती है सुरभि मैंने उस पर आँख बंद करके भरोसा किया और उसने,,,,,,,,,,,मुझे समझ ही नहीं आ रहा वो एकदम क्यों बदल गया ?”,कहते हुए अवनि की आँखों में नमी तैर गयी
सुरभि ने देखा तो अवनि के पास आयी और कहा,”ओह्ह्ह अवनि ! ऐसा कुछ भी नहीं है तुमने कुछ गलत नहीं किया , तुमने तो उस धोखेबाज पर भरोसा किया था , उसने बस तुम्हारे दिमाग से खेलकर तुम्हारे दिल में अपने लिए जगह बना ली। तुम्हारी जगह कोई भी लड़की होती तो उसकी बातो में आ जाती वो बहुत ही चालाक किस्म का लड़का है,,,,,,,महादेव का शुक्र है कि उन्होंने तुम्हे सही वक्त पर सम्हाल लिया”
“अगर वो गलत था तो फिर महादेव ने उसे मेरी जिंदगी में भेजा ही क्यों सुरभि ?”,कहकर अवनि अपना चेहरा हाथो में छुपाकर रोने लगी। अवनि को रोते देखकर सुरभि को बहुत तकलीफ हो रही थी लेकिन सुरभि ने उसे रोने दिया ताकि अवनि अपने अंदर भरे इस दुःख को निकाल सके। कुछ देर बाद सुरभि ने पानी का गिलास अवनि की तरफ बढ़ाया और उसके सामने आ बैठी। अवनि ने अपने आँसू पोछे , पानी पिया और सिसकने लगी। सुरभि ने अवनि के हाथो को अपने हाथो में थामा और कहने लगी
,”देखो अवनि ! कुछ लोग हमारी जिंदगी में सबक बनकर आते है , सिद्धार्थ भी तुम्हारे लिए एक सबक ही था और वैसे भी सिद्धार्थ जैसे लड़के तुम्हे डिजर्व नहीं करते अवनि,,,,,,,,,नए शहर में तुम अकेली थी , अनजान लोगो के बीच जब सिद्धार्थ ने तुम्हे सहारा दिया तो तुमने उस पर भरोसा कर लिया।
उसने तुम्हारे अकेले होने का फायदा उठाया अवनि और तुम्हे प्यार के जाल में फंसा लिया पर तुमने सही समय पर अपने कदम पीछे ले लिए,,,,,,,,,जिंदगीभर उस झूठे रिश्ते में मरने से अच्छा है तुम उस से दूर होकर एक नयी शुरुआत करो,,,,,महादेव ने तुम्हारी किस्मत में जिसे लिखा है वो आज भी कही ना कही तुम्हारा इंतजार कर रहा है,,,,,,,एंड देखना वो तुम्हारी जिंदगी में जरूर आएगा। तुम्हारे इन जख्मो पर मरहम बनकर,,,,,,,,,,!!”
अवनि ने सुना तो उदास आँखों से सुरभि को देखने लगी और कहा,”नहीं सुरभि ! अब इस जिंदगी में किसी और से प्यार नहीं होगा”
“जिंदगी का किसे पता है अवनि , क्या पता तुम्हे अभी प्यार होना बाकि हो,,,,,,,,,,अच्छा छोडो ये सब बातें तुम यहाँ आयी मैं बहुत खुश हूँ,,,,,,,,,अब जल्दी से हाथ मुँह धो लो फिर हम बाहर घूमने चलते है। इतने दिनों बाद तुम उदयपुर आयी हो स्कूटी पर एक चक्कर मारना तो बनता है”,सुरभि ने कहा
“नहीं सुरभि मेरा मन नहीं है,,,,,,,,,!!”,अवनि ने उदासी भरे लहजे में कहा
“मन नहीं है तब भी चलो,,,,,,ये मेरा आर्डर है समझी , अच्छा तुम तैयार हो जाओ मैं अभी आयी”,कहकर सुरभि कमरे से बाहर निकल गयी। अवनि उदास सी वही बैठी रही। अपने शहर आकर भी उसे सुकून नहीं मिला तभी अवनि का फोन बजा उसने देखा फोन सिद्धार्थ का था। अवनि ने फोन नहीं उठाया वह बस खाली आँखों से स्क्रीन को देखते रही और कुछ देर बाद फोन खुद ब खुद कट गया। अवनि सिद्धार्थ से तो दूर आ चुकी थी पर उसकी यादें अवनि के साथ उदयपुर चली आयी।
सुरभि के जिद करने पर अवनि उसके साथ बाहर जाने को तैयार हो गयी। सुरभि अवनि को लेकर घर से निकल गयी। स्कूटी से पुरे शहर का चक्कर लगाया , दोपहर का खाना बाहर खाया और घूमते घूमते शाम हो गयी तो सुरभि अवनि को लेकर घाट चली आयी। अवनि की उदासी उसके चेहरे से जाने का नाम नहीं ले रही थी सुरभि को लगा घाट पर आने से शायद अवनि को थोड़ी सा अच्छा लगे। अवनि सीढ़ियों पर आकर बैठ गयी। सुरभि भी उसके बगल में आ बैठी , ठंडी ठंडी हवाएं चल रही थी और बाकि दिनों के बजाय आज घाट पर भीड़ भी कम थी।
सुरभि ने अनिकेत को अवनि के आने के बारे में बताया तो अनिकेत भी उस से मिलने घाट चला आया। अनिकेत से मिलकर अवनि को अच्छा लगा।
“तुम खाली क्यों चले आये ? कम से कम दो कप चाय ही ले आते”,सुरभि ने कमर पर हाथ रखे और अनिकेत को घूरकर कहा
“उसमे क्या बड़ी बात है अभी ले आता हूँ,,,,,,,!!”,अनिकेत ने कहा
अवनि ने सुरभि से साथ जाने का इशारा किया वह कुछ देर अकेले वहा बैठना चाहती थी। सुरभि भी अनिकेत के साथ चल पड़ी और दोनों वहा से चले गए। अवनि एक बार फिर सीढ़ियों पर आ बैठी। ये घाट उसे बनारस की याद दिला रहे थे और इसी के साथ उसकी आँखों के सामने वो सारे पल आने लगे जो उसने बनारस में सिद्धार्थ के साथ बिताये थे।
घाट पर उसकी जान बचाना , उसे फटकार लगाना , हनुमान मंदिर में उस से टकराना , उसके साथ चलते हुए उसके करीब आना , एक एक करके सब अवनि की आँखों के सामने चल रहा था और अवनि के चेहरे पर उदासी बढ़ते जा रही थी। ये सब याद आते ही उसे चुभन का अहसास हुआ और अवनि ने अपनी आँखे मूँद ली और सहसा ही उसकी आँखों के सामने आया वो अनजान चेहरा जिसे अवनि ने अस्सी घाट की गंगा आरती के बाद देखा था। अवनि ने उस रोज पृथ्वी को महज 10 सेकेण्ड के लिए देखा था पर वो चेहरा अवनि को आज भी याद था।
पृथ्वी का चेहरा नजर आते ही अवनि की बेचैनी और चुभन कम होने लगी और जब अवनि ने अपनी आँखे खोली तो खुद को बहुत शांत पाया। पृथ्वी का ख्याल ठीक वैसे ही था जैसे जख्मो पर मरहम , अवनि कुछ समझ पाती इस से पहले अनिकेत और सुरभि वहा चले आये और दोनों अवनि के पास आ बैठे। अनिकेत के हाथ में चाय थी और सुरभि के हाथ में सेंडविच,,,,,,,,,तीनो ने वहा बैठकर चाय पी , सेंडविच खायी और फिर घर के लिए निकल गए।
घाट से बाहर आकर अनिकेत अपनी बाइक से घर चला गया और सुरभि अवनि को लेकर घर के लिए निकल गयी।
“अच्छा अवनि तुम विश्वास अंकल से मिली ?”,सुरभि ने स्कूटी चलाते हुए पूछा
“नहीं लेकिन आज सुबह मैंने दूर से उन्हें देखा था , वो पहले से काफी कमजोर हो गए है। चेहरा मुरझा गया है और आँखे भी उदास दिखाई पड़ रही थी”,अवनि ने कहा
“तुमने उनसे बात क्यों नहीं की ? क्या पता इतने दिनों बाद तुम्हे यहाँ देखकर वो अपनी नाराजगी भूल जाते और तुम्हे माफ़ कर देते,,,,,,,,!!”,सुरभि ने कहा
“वो मुझे माफ़ नहीं करेंगे सुरभि मैं जानती हूँ। मैंने उनका बहुत दिल दुखाया है , उन्हें सबके सामने शर्मिन्दा किया है , उनके दिल को ठेस पहुंचाई है ,, पिछले 6 महीनो में उन्होंने कभी मुझसे बात करने या मिलने की कोशिश नहीं की , अब अचानक उनके सामने जाकर मैं उनके भर चुके जख्मो को फिर से कुरेदना नहीं चाहती,,,,,,,मैंने उन्हें देख लिया बस काफी है”,अवनि ने कहा
सुरभि ने सुना तो उसे बहुत दुःख हुआ , सिर्फ सिद्धार्थ ही नहीं और भी कई लोग थे जो अवनि के दुःख का कारण थे। सुरभि ने मन ही मन खुद से कहा,”ऐसे वक्त में अवनि को कौशल चाचा के बारे में बताया तो उसका दिल टूट जाएगा , नहीं नहीं मैं अवनि को अब और तकलीफ में नहीं देख सकती। मैं इसे कौशल चाचा के बारे में नहीं बताउंगी इन सब का हिसाब एक दिन महादेव खुद करेंगे। मुझे तो बस कैसे भी करके अवनि को इस दुःख से बाहर निकालना है। उस सिद्धार्थ नाम की तकलीफ को अवनि की जिंदगी में वापस नहीं आने देना है”
“क्या हुआ किस सोच में पड़ गयी तुम ?”,अवनि ने सुरभि को खामोश देखकर कहा
सुरभि की तन्द्रा टूटी और उसने कहा,”अह्ह्ह कही नहीं ! अगर तुम अंकल से मिलना नहीं चाहती तो मैं तुम्हे फ़ोर्स नहीं करुँगी। वो घर ना सही तुम जब तक चाहो तब तक मेरे पापा के घर में रह सकती हो , वो घर भी तुम्हारा अपना घर है अवनि,,,,,,,,,,!!”
“ज्यादा दिन नहीं सुरभि मुझे होली के दो दिन बाद ही सिरोही वापस जाना होगा”,अवनि ने कहा
“दो दिन बाद ही क्यों ? मुझे लगा तुम एक हफ्ता रुकोगी”,सुरभि ने मायूसी से कहा
अवनि ने उसे अपनी परेशानी बताई तो सुरभि भी परेशान हो गयी साथ ही उसे सिद्धार्थ पर अब और गुस्सा आ रहा था। सुरभि ने अवनि की बात मान ली और उसे हिम्मत रखने को कहा। रात होने से पहले दोनों घर चली आयी। सुरभि की मम्मी ने आज अवनि की पसंद का खाना बनाया था। सबने खाना खाया और देर रात बातें करते रहे। अवनि भी सबके साथ हंस मुस्कुरा रही थी
दो दिन अवनि सुरभि के घर ही रही , सबने होली का त्यौहार धूम धाम से मनाया। होली के अगले दिन अवनि सबसे विदा लेकर सिरोही के लिए वापस निकल गयी आखिर उसे वापस जाकर अपने लिए घर भी तो देखना था। इस बीच सिद्धार्थ से बात करने की कोशिश की , सिरोही आकर अवनि ने सिद्धार्थ से बात की तो और हर बार की तरह नतीजा वही निकला एक बहस के बाद सिद्धार्थ ने सब वक्त पर छोड़ दिया , ना उसे अपनी गलती का अहसास था ना ही अपने किये का पछतावा,,,,,,,,,,,,!!
अवनि ने भी अपने कदम पीछे लेना ही बेहतर समझा और सिद्धार्थ से पूरी तरह से बात बंद कर खुद पर ध्यान देना शुरू किया। दिव्या जिस बिल्डिंग में रहती थी वही उसे एक 1BHK फ्लेट मिल गया और साथ ही दिव्या का साथ भी जिस से अवनि अब अकेली भी नहीं थी।
देखते ही देखते 2 महीने गुजर गए और अवनि अब सिद्धार्थ को पूरी तरह से खुद से दूर कर चुकी थी , 10-15 दिन में सिद्धार्थ अवनि को मैसेज करता , उस से बात करने की कोशिश करता और उलटा सीधा सुनाकर फिर गायब हो जाता दरअसल सिद्धार्थ अवनि पर नजर रख रहा था कि वह कही किसी और से बात तो नहीं कर रही , किसी और के साथ रिश्ते में तो नहीं है जबकि अवनि बस खुद को हील कर रही थी।
अवनि हफ्ता दो हफ्ता खुश रहती और सिद्धार्थ फिर उसे मैसेज फोन करके परेशान करता , सिद्धार्थ बस अवनि को अपनी बातो में उलझाने की कोशिश कर रहा था जिस से अवनि जो कुछ भी हुआ उसे अपने ऊपर लेकर वापस सिद्धार्थ की जिंदगी में आ जाये। वह अवनि को गिल्ट में डालने की कोशिश करने लगा लेकिन अवनि अब उसकी किसी भी बात में नहीं आने वाली थी उसने सिद्धार्थ की हर चाल को नाकाम कर दिया।
अवनि अब सिद्धार्थ को अपनी तकलीफ समझाना बंद कर चुकी थी , वह उस से वक्त की भीख मांगना बंद कर चुकी थी , वह उसके सामने रोना गिड़गिड़ाना बंद कर चुकी थी और अब वह सिद्धार्थ को खोने से डरना बंद कर चुकी थी और सिद्धार्थ ने महसूस किया कि धीरे धीरे अवनि उसके हाथो से छूटते जा रही थी।
बीते कुछ दिनों से अवनि के दिन बहुत ही शांति से गुजर रहे थे। कुछ दिन बाद उसका जन्मदिन आने वाला था और अवनि खुश थी कि इस बार वह अपना जन्मदिन अकेले मनायेगी , अपने पसंदीदा कपडे पहनेगी , मंदिर जाएगी , अपनी पसंद का खाना खायेगी और एक दिन के लिए खुलकर अपनी जिंदगी जियेगी पर अवनि नहीं जानती थी कि यही से उसकी जिंदगी एक दिलचस्प मोड़ लेने वाली थी। एक शाम खाना खाने के बाद अवनि अपना फोन लेकर बैठी। देखा कई चाहने वालो के मैसेज और कमेंट्स थे।
अवनि को याद आया कि आखरी बार QNA पोस्ट तब किया था जब सुरभि उस से मिलने यहाँ आयी थी। आज अवनि का मन खुश था इसलिए उसने QNA के साथ प्यारी सी लाइन लिखी और पोस्ट कर दी। वो लाइन थी
“लोग दीवाने है हुस्न के , हम कहा जाए अपनी सादगी लेकर”
पोस्ट करने के बाद अवनि अपना इंस्टाग्राम स्क्रॉल करने लगी।
आनंद निलय अपार्टमेंट , मुंबई
“हाह ! अब मैं और क्या पढू ? मैं तुम्हारी लिखी हर कहानी दो बार पढ़ चुका हूँ और तुम्हारे लिखे कोटस तो मुझे मुँह जबानी याद हो चुके है लेकिन तुम हो कि पता नहीं कहा गायब हो ? डायरेक्ट मैसेज करके भी तो नहीं पूछ सकता पता चले गुस्से में आकर कही तुम मुझे ब्लॉक ही कर दो,,,,,,,,,नहीं नहीं ऐसी गलती मैं नहीं करूंगा,,,,,
लेकिन अब तुम ही बताओ मैं क्या करू , कैसे आगे बढू तुम्हारे साथ ? मैं यहाँ दिन रात तुम्हारे बारे में सोचता रहता हूँ और तुम , तुम्हे तो पता भी नहीं होगा कि कोई है जो तुम से बात करने के लिए मरे जा रहा है,,,,,,,!!!”,बिस्तर पर बैठे पृथ्वी ने बगल में पड़े फोन को देखकर कहा
पृथ्वी ने फोन उठाया और इंस्टाग्राम खोलकर देखा तो नजर अवनि की प्रोफाइल पर घूमते गोले पर पड़ी। फिर एक स्टोरी पृथ्वी ने उसे खोलकर देखा , आज QNA के साथ बहुत ही प्यारी सी लाइन भी लिखी हुई थी। पृथ्वी ने पढ़ा तो मुस्कुरा उठा। अभी पृथ्वी अवनि से बात करने के बहाने ढूंढ रहा था और अवनि की स्टोरी उसके सामने थी। पृथ्वी की उंगलियों में हलचल हुई और उसके दिमाग ने कहा – तुम फिर उस से सवाल करने वाले हो , दो बार हुई बेइज्जती भूल गए
दिल ने कहा – तुम इसकी मत सुनो ये हमेशा नेगेटिव बाते ही करता है
दिमाग ने कहा – हाँ इसकी सुनो और याद रखना इस बार उलटे जवाब के साथ साथ ब्लैकलिस्ट में भी जा सकते हो
दिल ने कहा – क्या पता इस बार उसके दिल में तुम्हारा नाम छप जाए
दिमाग ने कहा – मत करो
दिल ने कहा – आगे बढ़ो
दिमाग ने कहा – पछताओगे
दिल ने कहा – बाद में ज्यादा पछताओगे
पृथ्वी एक बार फिर अपने ही दिल और दिमाग की बातो में उलझ गया और आख़िरकार जीत हुई दिल की जो कि हमेशा होती है। पृथ्वी ने सवाल लिखा लेकिन अगले ही पल उसे मिटा दिया और सिर्फ दो शब्द लिखकर भेज दिए। हैरानी की बात ये थी कि आज पृथ्वी ने अवनि से कोई सवाल नहीं किया बल्कि कुछ ऐसा लिखकर भेजा जिसे पढ़ने के बाद अवनि उसे जवाब तो जरूर देने वाली थी।
( क्या अवनि जान पायेगी अपने ही घरवालों का सच ? क्या अवनि देगी सिद्धार्थ को दुसरा मौका और अपनाएगी उसे ? आखिर वो शब्द क्या है जो पृथ्वी ने लिखकर भेजे ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
