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Pasandida Aurat – 57

Pasandida Aurat – 57

Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

अवनि को महादेव ने एक नयी राह दिखा दी और वो थी सुरभि,,,,,,,कोई अवनि को समझे या न समझे पर उसकी दोस्त सुरभि उसे समझेगी ये सोचकर अवनि मंदिर से फ्लेट चली आयी। दिव्या ने जो फ्लेट बताया वो अवनि को होली के बाद देखना था इसलिए अवनि को फ़िलहाल घर की चिंता नहीं थी। आज कई दिनों बाद उसने मन से खाना बनाया और हॉल में चली आयी।

उसने खाना खाया , बर्तन साफ किये और फिर अपने कमरे में चली आयी। अवनि ने अपना सूटकेस निकाला और उसमे अपने कुछ कपडे और जरुरी सामान रखकर पैक करने लगी। अवनि का सुरभि से कितना भी झगड़ा हो जाए लेकिन सुरभि के पास लौटकर जाने में अवनि को कभी सोचना नहीं पड़ा , यही सुरभि के साथ था। सुरभि को तो पता भी नहीं था कि अवनि उस से मिलने उदयपुर आ रही है और अवनि ने भी नहीं बताया वह उसे सरप्राइज देना चाहती थी।


बैग पैक करने के बाद अवनि ने तत्काल में उदयपुर के लिए टिकट बुक कर दिया और अपना फोन रखा तो नजर टेबल पर रखे शो पीस पर चली गयी। अवनि को याद आया ये सिद्धार्थ ने उसे दिया था। अवनि कुछ देर उसे देखते रही और फिर एक एक करने उन सब चीजों को एक बॉक्स में डाला जो सिद्धार्थ ने उसे दी थी हालाँकि चीजे इतनी ज्यादा भी नहीं थी।

एक गर्म शॉल , कुछ जोड़ी झुमके , गले का वो चैन जो सिद्धार्थ ने अवनि को अपने हाथो से पहनाया था , हाथ का वो टुटा हुआ ब्रासलेट जिसे कई बार अवनि ने जोड़ा था , टेबल पर रखा शो पीस और एक खाली डायरी जो किसी रोज सिद्धार्थ ने उसे दी थी। अवनि ने सब बॉक्स में पैक किया और रख दिया।


सिद्धार्थ को लेकर अवनि के मन में भावनाये अब भी थी लेकिन अब अवनि उन भावनाओ को खुद पर हावी होने देना नहीं चाहती थी। वह सिद्धार्थ से जुडी हर चीज को खुद से इतना दूर कर देना चाहती थी कि उसे कभी सिद्धार्थ की याद ही ना आये। देर रात अवनि सोने चली गई।

सुबह जल्दी उठकर अवनि ने पुरे घर को साफ किया। जरुरी सामान को ढका और किचन का सामान कबर्ड में रख दिया। वह नहाकर तैयार हुयी और अपना बैग और बॉक्स लेकर फ्लेट से बाहर चली आयी। उसने फ्लेट लॉक किया और बॉक्स को गेट के पास रखकर , अपना सूटकेस लेकर लिफ्ट की तरफ बढ़ गयी। स्टेशन जाने के लिए अवनि ने पहले ही कैब बुक कर दी थी जो कि अपार्टमेंट के बाहर खड़ी थी।

अवनि ने अपना सामान रखा और कैब में आ बैठी। स्टेशन अपार्टमेंट से 15 मिनिट दूर था। अवनि ने अपना फोन निकाला और सिद्धार्थ को मैसेज कर दिया जिस से वह अपना बॉक्स वहा से ले जा सके। उदास नजरो से अवनि खिड़की के बाहर देखने लगी। इस शहर से कितनी ही खूबसूरत यादे जुडी थी जो अब उसे बदसूरत और बदत्तर नजर आ रही थी वो भी सिर्फ एक इंसान की वजह से

स्टेशन पहुंचकर अवनि ने ट्रेन का पता किया जो कि अभी आयी नहीं थी। वह अपने सामान के साथ बेंच पर आ बैठी और ट्रेन का इंतजार करने लगी। पास ही की दूकान से उसने अपने लिए सेंडविच और एक कप चाय ले ली। अवनि ने सुबह से कुछ खाया नहीं था इसलिए भूख लगना जायज था और वैसे भी इंसान की जिंदगी में कितनी उदासी हो पेट की भूख ये बात नहीं समझती।

ट्रेन आयी और अवनि अपना बैग लेकर अपनी सीट पर आ बैठी। उसे साइड लोअर सीट मिली थी और ठीक सामने एक शादीशुदा लड़की बैठी थी। अवनि ने उसे देखा तो वह मुस्कुराई और जवाब में अवनि भी मुस्कुरा दी। ट्रेन चल पड़ी , अवनि ने अपने बैग से किताब निकाली और खोलकर पढ़ने लगी। सफर में किताबे पढ़ना अवनि की पहली पसंद रही है। ट्रेन अपनी रफ़्तार से चल रही थी। सामने बैठी लड़की भी उदयपुर ही जा रही थी। जब ट्रेन उदयपुर पहुँचने वाली थी तो सामने बैठी लड़की तैयार होने लगी उसने अपने खुले बालों को समेटकर जुड़ा बनाया

पर्स में रखी बिंदी निकालकर ललाट पर लगा ली , गले में मंगलसूत्रा डाल लिया। हाथो में पहले एक एक पतली चूड़ी थी अब उसने दर्जनों चुडिया और चढ़ा ली। अवनि बड़े ही प्यार से उसे ये सब करते देख रही थी लड़की ने देखा तो झेंपते हुए कहा,”वो ससुराल जा रही हूँ ना तो थोड़ा करना पड़ता है वरना सासु माँ नाराज हो जाएँगी”
अवनि ने सुना तो मुस्कुरा उठी। उसने अपनी किताब बंद की और बैग में रख ली।

अगले ही पल अवनि की नजर लड़की के पैरों पर पड़ी जिनमे वह चाँदी की बहुत ही सुन्दर पायल पहन रही थी। सहसा ही अवनि को सिद्धार्थ की कही बात याद आ गई “हाँ ! तुम्हारे लिए , मुझे तुम्हारे सूने पैर अच्छे नहीं लगते। सही वक्त आने पर ये पायल मैं खुद तुम्हे अपने हाथो से पहनाउंगा”


 अवनि को याद आया कि आज तक सिद्धार्थ ने कभी उसे वो पायल दी ही नहीं और इसी के साथ अवनि उदास हो गयी इसलिए नहीं कि वो पायल उसे नहीं मिली बल्कि इसलिए कि सिद्धार्थ कितनी आसानी से उसकी भावनाओ से खेलता रहा और अवनि कुछ समझ ही नहीं पायी।

ट्रेन उदयपुर स्टेशन पर आकर रुकी। अवनि ट्रेन से नीचे उतरी और स्टेशन से बाहर चली आयी। बाहर आकर उसने ऑटो किया और सुरभि के घर का पता बताकर उसमे आ बैठी। ऑटो वाला अवनि को लेकर चल पड़ा। पुरे 6 महीने बाद अवनि अपने शहर लौटी थी , कुछ नहीं बदला था सब वही था। ऑटो चौराहे से जैसे ही आगे बढ़ा अवनि ने कहा,”भैया ! हिरन मगरी सेक्टर 14 की तरफ चलेंगे क्या प्लीज ? आप थोड़े ज्यादा पैसे ले लेना”


“ठीक है मैडम 20 रुपया एक्स्ट्रा लगेगा”,कहते हुए ऑटो वाले ने ऑटो घुमा लिया। अवनि की आँखों में एक इंतजार और चेहरे पर बेचैनी के भाव थे। हिरन मगरी सेक्टर 14 मे उसका घर था , वही घर जहा जाने की इजाजत अवनि को नहीं थी लेकिन अवनि उस घर के सामने से गुजरने का मोह छोड़ नहीं पायी और इस ख्याल से ऑटो वाले को उस तरफ से चलने को कहा कि शायद विश्वास जी उसे दिख जाए।


ऑटो जैसे ही सेक्टर 14 पहुंचा अवनि का दिल धड़कने लगा , चेहरे बेचैनी आँखों में भी दिखाई देने लगी और जैसे ही ऑटो घर के सामने से गुजरा अवनि की आँखों में नमी तैर गयी। उसे कोई दिखाई नहीं दिया और ये देखकर अवनि का मन भारी हो गया जैसे ही ऑटो आगे बढ़ा दरवाजे से निकलकर विश्वास जी बाहर आये और लॉन की तरफ बढ़ गए। अवनि पुरे 6 महीने बाद उन्हें देख रही थी। उन्हें देखते ही उसकी आँखों में भरे आँसू बहने लगे। उसने अपना हाथ अपने मुँह पर रख लिया और जैसे ही विश्वास जी ने ऑटो की तरफ देखा अवनि ने अपनी गर्दन घुमा ली और ऑटोवाले से जल्दी चलने को कहा।

लॉन में खड़े विश्वास जी की नजर घर के बाहर से गुजरते रिक्शा पर पड़ी , उनका मन बेचैनी से घिर गया और वे बड़बड़ाये,”मुझे ऐसा क्यों लगा जैसे अवनि यही आस पास थी , नहीं नहीं अवनि यहाँ क्यों आएगी ?”
विश्वास जी अवनि के बारे में सोचते हुए बड़बड़ा ही रहे थे कि तभी कौशल वहा आया और कहा,”भाईसाहब ! वो विनय के घरवालों से मेरी बात हो चुकी है , आज शाम वे लोग दीपिका को देखने घर आ रहे है। एक बार लड़के और घरवालों से मिल लेते है उसके बाद शादी में साल दो साल का वक्त ले लेंगे तब तक दीपिका की डिग्री भी पूरी हो जाएगी”


“हाँ सही है ! मैं नंदेश को फोन कर देता हूँ वह मिठाईया और नाश्ता घर भिजवा देगा , बाकी सब काम तुम लोग अपने हिसाब से देख लो”,विश्वास जी ने कहा
“हाँ भाईसाहब मैं देख लूंगा”,कहकर कौशल जाने के लिए मुड़ा , एकदम से उसे कुछ याद आया और उसने पलटकर कहा,”अच्छा भाईसाहब ! मैं ये कह रहा था कि अगर ये रिश्ता पक्का हो जाता है तो क्यों न दीपिका और विनय की सगाई में अवनि को भी,,,,,,,,,,मेरा मतलब इस घर से दूर हुए उसे 6 महीनो से ज्यादा हो चुके है वो अगर आएगी तो सबको अच्छा लगेगा ,, अगर आप अवनि से बात,,,,,,,,,!!”


“कौशल ! अवनि नहीं आएगी तब भी दीपिका की सगाई होगी,,,,,,,,मैं जरा बाहर होकर आता हूँ”,विश्वास जी ने कहा और वहा से चले गए। वे अवनि को लेकर घरवालों से कोई बात करना नहीं चाहते थे। कौशल ने सुना तो ख़ामोशी से अंदर चला आये लेकिन हॉल में बैठे मयंक , मीनाक्षी और सीमा को देखकर ठिठके


“मुझे एक बात बताईये भाईसाहब ! इतनी मुश्किल से वो अवनि इस घर से गयी है और आप उसे वापस बुलाने की बाते कर रहे थे ,, एक तो पिछले 4 महीनो से भाईसाहब की जी हुजूरी करते करते कमर टूट चुकी है हम सबकी और अब आप उस अवनि को भी वापस लाने की बाते कर रहे है”,मीनाक्षी ने कहा
“तुम्हारी ये कान लगाकर सुनने की आदत नहीं जाएगी ना मीनाक्षी”,कौशल ने मीनाक्षी को फटकार लगाते हुए कहा तो मीनाक्षी इधर उधर बगले झाँकने लगी


कौशल जी सोफे पर आ बैठे तो मयंक ने कहा,”पर भाईसाहब ! अवनि को बुलाने की क्या जरूरत है ?”
“तुम सब के दिमाग में ना भुसा भरा है मयंक ! अरे दीपिका की सगाई में अगर अवनि आएगी और हम सबको विश्वास जी का ख्याल रखते देखेगी तो उसे लगेगा यहाँ सब ठीक है और भूलो मत ये घर और भाईसाहब की जायदाद अभी भी अवनि के नाम है ,, सिर्फ भाईसाहब को खुश रखने से कुछ नहीं होगा हम सबको अवनि का विश्वास भी जीतना होगा,,,,,,,!!”,कौशल ने कहा


“बात तो आपकी ठीक है लेकिन क्या भाईसाहब अवनि को इस घर में वापस आने देंगे , अवनि को लेकर उनका गुस्सा अभी भी कम नहीं हुआ है”,सीमा ने कहा
“हाँ सीमा ! मैंने भी भाईसाहब से अवनि को घर बुलाने की बात कही तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और चले गए,,,,,,,,,!!”,कौशल ने कहा और फिर चारो विनय के घरवालों के आने को लेकर बाते करने लगे।  

अवनि सुरभि के घर के सामने पहुंची। उसने ऑटोवाले को किराया दिया और अपना बैग लेकर अंदर चली आयी। अवनि ने घर की डोरबेल बजायी। कुछ दे बाद दरवाजा सुरभि के पापा ने खोला और जब अवनि को देखा तो उनका चेहरा ख़ुशी से खिल उठा। अवनि ने उनके पैर छुए तो सुरभि के पापा ने कहा,”अरे अवनि बेटा तुम और यहाँ , आओ आओ अंदर आओ”
“कैसे है आप ?”,अवनि ने अंदर आते हुए पूछा


“मैं ठीक हूँ बेटा तुम कैसी हो और उदयपुर आने में इतना वक्त क्यों लगाया ? सुरभि ने बताया मुझे सब तो क्या हुआ ये भी तुम्हारा ही घर है”,शर्मा जी ने कहा  
“अरे अवनि दीदी आप , प्रणाम”,कहकर सुरभि के छोटा भाई अंकित ने अवनि के पैरो छू लिया
“खुश रहो”,अवनि ने अंकित से कहा
“अरे मुझे दीजिये ना ये मैं रख देता हूँ”,कहकर अंकित अवनि का बैग लेकर अंदर चला गया


अवनि हॉल में आ बैठी , सुरभि की मम्मी ने अवनि को देखा तो ख़ुशी से फूली नहीं समाई और अवनि के पास आकर उसे गले लगाकर कहा,”कैसी हो अवनि ? कितने दिनों बाद तुम्हे हम सब की याद आयी,,,,,,,,,,कितनी दुबली हो गयी हो , जरूर वह उलटा सीधा खाती होगी”
“अरे अरे अरे ये क्या आते ही बच्ची को डांटना शुरू कर दिया , इसे बैठने तो दो”,शर्मा जी ने कहा तो अवनि मुस्कुरा उठी।


“तुम बैठो मैं तुम्हारे लिए गर्मागर्म चाय लेकर आती हूँ,,,,,,,,आप खड़े खड़े क्या कर रहे है , गोपाल के यहाँ से समोसे ले आईये ना”,सुरभि की मम्मी ने किचन में जाते हुए कहा
अवनि मुस्कुराते हुए सब देख रही थी इस घर के लोग उसके आने से कितना खुश थे तभी दरवाजे से अंदर आते हुए सुरभि ने कहा,”समोसे मैं ले आयी हूँ पापा आप बस प्लेट ले आईये”


अवनि ने सुरभि को देखा तो उसे वो रात याद आ गयी जब उसने सुरभि से जाने को कहा था। अवनि को लगा सुरभि उसे देखकर गुस्सा होगी या उस से अभी तक नाराज होगी लेकिन सुरभि के चेहरे पर तो ख़ुशी के भाव थे।
“अरे वाह ! तुम्हे कैसे पता अवनि आने वाली है ?”,शर्मा जी ने सुरभि के हाथो से समोसे लेकर कहा
“वो क्या है ना पापा , आज सुबह सुबह छत पर कौआ बोल रहा था तो मैंने अंदाजा लगा लिया कि घर में जरूर कोई आने वाला है”,सुरभि ने कहा


“कौआ ? लेकिन सुबह तो मैं छत पर गाना गा रहा था”,अंकित ने मासूमियत से कहा
“हाँ तो तुम कौनसा कौए से कम हो जाओ जाकर मेरे लिए एक गिलास पानी लेकर आओ”,सुरभि ने अंकित के सर पर चपत लगाकर कहा और अंकित वहा से चला गया। शर्मा जी भी समोसे लेकर किचन में चले गए।
सुरभि अवनि के पास चली आयी तो अवनि उठी और उसे गले लगाकर कहा,”मुझे माफ़ कर दो सुरभि मैंने,,,,,,,,,,,,!”


“जो हुआ उसे भूल जाओ वो बस एक बुरा वक्त था और हमारी दोस्ती इतनी कमजोर भी नहीं जो एक झगडे से टूट जाये”,सुरभि ने अवनि से दूर होकर कहा
अवनि मुस्कुरा दी तो सुरभि ने इधर उधर देखा और कहा,”वैसे तुम अचानक उदयपुर , कही वो सिद्धार्थ तो तुम्हे यहाँ लेकर,,,,,,,,,,,,!!”
सिद्धार्थ का नाम सुनते ही अवनि उदास हो गयी और कहा,”अब हम साथ नहीं है सुरभि,,,!!”
सुरभि ने जैसे ही सुना हैरान रह गयी। उसने अवनि की तरफ देखा और कहा,”अह्ह्ह्ह मैं एक मिनिट में आयी हाँ”
हम्म्म ,,,,,,,,,,,!”,अवनि ने कहा


सुरभि धीरे धीरे चलकर अपने कमरे में गयी दरवाजा बंद किया और इसके बाद वह ख़ुशी के मारे जो नाची है देखने वाला सीन था ,, कमरे का कोई कोना नहीं छोड़ा , कभी बिस्तर , कभी कुर्सी , यहाँ तक के टेबल पर चढ़कर भी उसने नाचते हुए अपनी ख़ुशी जाहिर की जब उसने अवनि के मुंह से ये सुना कि अब वह सिद्धार्थ के साथ नहीं है।
सुरभि टेबल से नीचे उतरी , उसने लम्बी लम्बी गहरी सांसे ली और फिर कमरे का दरवाजा खोलकर वैसे ही धीरे धीरे चलकर अवनि के पास आकर उदासी भरे स्वर में कहा,”सुनकर बहुत दुःख हुआ अवनि,,,,,,,,,,,!!”


अवनि सोफे पर आ बैठी और सुरभि उसके बगल में वह ऐसी शक्ल बनाकर बैठी थी जैसे अंदर कुछ हुआ ही ना हो,,,,,,,,,,,,लेकिन उसका दिल तो अभी भी डांस कर रहा था।

( आखिर विश्वास जी क्यों नहीं चाहते अवनि इस घर में वापस आये ? दीपिका की सगाई में अवनि को लाने के लिए कौशल और उनकी चौकड़ी क्या तरकीब लगाएगी ? क्या सुरभि निकाल पायेगी अवनि को झूठे प्यार के दर्द से ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

सुरभि धीरे धीरे चलकर अपने कमरे में गयी दरवाजा बंद किया और इसके बाद वह ख़ुशी के मारे जो नाची है देखने वाला सीन था ,, कमरे का कोई कोना नहीं छोड़ा , कभी बिस्तर , कभी कुर्सी , यहाँ तक के टेबल पर चढ़कर भी उसने नाचते हुए अपनी ख़ुशी जाहिर की जब उसने अवनि के मुंह से ये सुना कि अब वह सिद्धार्थ के साथ नहीं है।
सुरभि टेबल से नीचे उतरी , उसने लम्बी लम्बी गहरी सांसे ली और फिर कमरे का दरवाजा खोलकर वैसे ही धीरे धीरे चलकर अवनि के पास आकर उदासी भरे स्वर में कहा,”सुनकर बहुत दुःख हुआ अवनि,,,,,,,,,,,!!”

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