Pasandida Aurat – 54
सिद्धार्थ ने अवनि से माउन्ट आबू चलने को कहा लेकिन अवनि ने मना कर दिया। वह सिद्धार्थ पर भरोसा करती थी लेकिन उसके साथ ऐसे बाहर रुकना अवनि को ठीक नहीं लगा। सिद्धार्थ को अवनि की ये बात पसंद नहीं आयी लेकिन फिर भी उसने जाहिर नहीं किया। दिन निकलने लगे , सिद्धार्थ और अवनि की अब पहले जितनी बाते नहीं हो रही थी। सिद्धार्थ अब कुछ ज्यादा ही बिजी रहने लगा था और जब फ्री होता तब अवनि से बात किया करता था। अवनि भी समझती थी इसलिए वह सिद्धार्थ को सामने से फोन और मैसेज कम किया करती थी।
जनवरी महीने का आखरी हफ्ता चल रहा था , अवनि ने माउन्ट आबू जाने से मना कर दिया लेकिन सिद्धार्थ ने उसे वही सिरोही से कुछ दूर एक मंदिर जाने के लिए मना लिया और अवनि मान भी गयी। सिद्धार्थ की गाड़ी सर्विस पर थी इसलिए उसने ट्रैन से जाना तय किया।
सुबह अवनि स्टेशन चली आयी। सिद्धार्थ वहा पहले से मौजूद था और दोनों ट्रेन के आने का इंतजार करने लगे। अवनि ने देखा सिद्धार्थ कही खोया हुआ है तो उसने कहा,”सिद्धार्थ ! आप मुझे अपने घरवालों से मिलवाने वाले थे”
“मंदिर से वापस आने के बाद मिलवा दूंगा , इन्फेक्ट अगले हफ्ते घर में पूजा है क्यों ना तुम भी आ जाओ , मम्मी पापा से भी मिल लेना और वे भी तुम से मिल लेंगे”,सिद्धार्थ ने कहा
अवनि ने सुना तो खुश हो गयी और हामी में गर्दन हिला दी। कुछ देर बाद ट्रेन आयी और दोनों अंदर चले आये। सिद्धार्थ और अवनि अपनी सीट पर आकर बैठे और सफर शुरू हुआ। अवनि पहली बार सिद्धार्थ के साथ ट्रेन से जा रही थी उसे बहुत अच्छा लग रहा था। 4 घंटे का सफर होने की वजह से अवनि के पास सिद्धार्थ से बात करने के लिए काफी सारा वक्त था लेकिन सिद्धार्थ ने अवनि से थोड़ी देर इधर उधर की बातें की और फिर अपने साथ लाये खाने का डिब्बा खोलकर अवनि के साथ खाने लगा।
खाना खाने के बाद सिद्धार्थ ने अपने फोन में कोई फिल्म चलाई और सीट पर लेटकर देखने लगा। अवनि उसके पैरों की तरफ बैठी थी। वह चाहती थी सिद्धार्थ उस से बात करे लेकिन सिद्धार्थ को अपने फोन के साथ देखकर अवनि ने भी अपना फोन निकाला और अपने नोटिफिकेशन चेक करने लगी। लेटे लेटे सिद्धार्थ को ध्यान नहीं रहा और उसका पैर अवनि के हाथ को छू गया ! अवनि ने देखा तो उसने सिद्धार्थ के पैर को अपनी गोद में रख लिया और पैर के तलवो को अपनी नाजुक उंगलियों से दबाने लगी।
“ये क्या कर रही हो अवनि ? छोडो तुम मेरे पैरों को छू रही हो मुझे अच्छा नहीं लग रहा”,सिद्धार्थ ने कहा लेकिन पैर अवनि की गोद में रखे रहा
“कोई बात नहीं ! कभी मेरे पैर दर्द करे तो तुम दबा दिया करना”,अवनि ने कहा और सिद्धार्थ के पैर के तलवो को दबाना जारी रखा। आस पास के लोगो से अवनि को फर्क नहीं पड़ रहा था। सिद्धार्थ उसके लिए उसका पसंदीदा मर्द था और उसके लिए अवनि जितना करती थी उसे उतना ही कम लगता था। कुछ देर बाद सिद्धार्थ ने अपना पैर अवनि की गोद से हटा लिया। अवनि ने भी अपना फोन बैग में रखा और हाथो को बांधकर सर पीछे लगाकर आँखे मूँद ली।
4 घंटे बाद ट्रेन सिरोही से 150 किलोमीटर दूर एक बहुत ही खूबसूरत जगह पहुंची। स्टेशन से 5 किलोमीटर दूर एक बहुत ही सुन्दर शिव मंदिर था जहा लाखो लोग दर्शन के लिए आते थे। अवनि को जब पता चला कि सिद्धार्थ उसे यहाँ लेकर आया है तो वह खुश हो गयी और सिद्धार्थ की बाँह थामकर कहा,”थैंक्यू ! ये जगह तो मेरी विश लिस्ट में थी सिद्धार्थ”
“इसलिए तो मैं तुम्हे यहाँ लेकर आया हूँ , मेरा भी यहाँ दर्शन करने का बहुत मन था”,सिद्धार्थ ने कहा तो अवनि मुस्कुरा उठी और फिर दोनों स्टेशन से बाहर चले आये। बाहर आकर सिद्धार्थ ने एक ई-रिक्शा वाले को मंदिर छोड़ने को कहा और अवनि के साथ उसमे आ बैठा। सुबह के 9 बज रहे थे और ये शहर सुबह सुबह सर्दी की धुंध में और भी खूबसूरत नजर आ रहा था।
अवनि चमकती आँखों से सब देखे जा रही थी। रिक्शा वाले ने मंदिर से 1 किलोमीटर पहले ही उतार दिया क्योकि आगे गलियों और पहाड़ी रास्तों से होकर पैदल जाना था। सिद्धार्थ ने रिक्शा के पैसे दिए और अवनि को साथ लेकर चल पड़ा। दोनों बाते करते हुए चलने लगे। सिरोही के बजाय यहाँ ठण्ड काफी कम थी और इसलिए अवनि ने स्वेटर नहीं पहना वह बस सूट पहने हुई थी और साथ में उसने शॉल रखा था।
चलते चलते सिद्धार्थ चाय की दुकान पर रुका और दोनों के लिए दो कुल्हड़ चाय देने को कहा। अवनि ने चाय ली और पीने लगी। सिद्धार्थ ने जल्दी जल्दी अपनी चाय खत्म की और कलाई पर बंधी घडी में समय देखा , उसे दर्शन करके यहाँ से जल्दी निकलना था और फिर यहाँ से 70 किलोमीटर दूर एक दूसरे मंदिर में भी दर्शन करने थे। सिद्धार्थ ने अपना खाली कुल्हड़ डस्टबिन में फेंका और अवनि की तरफ देखा तो पाया कि अवनि अभी भी अपनी चाय पी रही है और उसका कप आधा भरा है उसने थोड़ा चिढ़े हुए स्वर में कहा,”क्या कर रही हो अवनि जल्दी खत्म करो ना , फिर भीड़ हो जाएगी तो निकलना मुश्किल हो जायेगा”
सिद्धार्थ को उखड़ा हुआ देखकर अवनि ने निराश होकर जल्दी जल्दी उसे पीना चाहा लेकिन चाय गर्म थी , सिद्धार्थ को जल्दी थी इसलिए उसने कुछ देर इंतजार किया और फिर अवनि के हाथ से कुल्हड़ लेकर डस्टबिन में डाल दिया और उसका हाथ पकड़कर आगे बढ़ते हुए कहा,”छोड़ो इसे बाद में और पी लेंगे अभी चलते है,,,,,,,,,!!!”
पहली बार अवनि को सिद्धार्थ का ये बर्ताव खटका , आज से पहले सिद्धार्थ ने उसके साथ ऐसा कुछ नहीं किया था फिर अचानक ये सब , अवनि सिद्धार्थ के साथ चल पड़ी।
दोनों मंदिर के बाहर पहुंचे , प्रशाद लिया और लाइन में आ लगे। लम्बी लाइन लगी थी। अवनि और सिद्धार्थन ने दर्शन किये और आज पहली बार अवनि को सिद्धार्थ के साथ दर्शन करते हुए ना जाने क्यों बेचैनी का अहसास हुआ ? उसने सिद्धार्थ से कुछ नहीं कहा लेकिन अंदर ही अंदर वह काफी कुछ महसूस कर रही थी।
दोनों मंदिर से बाहर आये। बाहर आकर देखा बारिश हो रही है तो सिद्धार्थ अवनि के साथ एक रेस्त्रो में चला आया ताकि बारिश से भी बचा जा सके और दोनों यहाँ बैठकर कुछ खा भी ले। अवनि ने देखा वहा और भी कई लोग अपने अपने परिवार के साथ बैठे थे। सिद्धार्थ अवनि के सामने वाली कुर्सी पर आ बैठा। सिद्धार्थ ने एक प्लेट आलू पराठा और चाय आर्डर की , नाश्ता आया और दोनों खाने लगे। अवनि खाते हुए सिद्धार्थ के चेहरे पर आये भावो को पढ़ने की कोशिश कर रही थी , सिद्धार्थ का ध्यान खाने पर था वह बीच बीच में अवनि की तरफ देखता और फीका सा मुस्कुरा देता।
नाश्ता करने के बाद दोनों वही बैठे रहे बारिश हलकी हो चुकी थी पर रुकने का नाम नहीं ले रही थी ये देखकर सिद्धार्थ ने कहा,”एक काम करते है चलते है वरना हमे दूसरे मंदिर जाने में देर हो जाएगी”
“हम्म्म ठीक है,,,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा और दोनों रेस्त्रो से बाहर चले आये। हलकी बूंदाबांदी हो रही थी और सिद्धार्थ अवनि का हाथ थामे चल रहा था। बारिश की वजह से जहा सिद्धार्थ झुंझला रहा था वही अवनि के चेहरे पर ख़ुशी और सुकून के भाव थे। अवनि को बारिश बहुत पसंद थी और बारिश में भीगना उसे ख़ुशी का अहसास दिलाता था।
अवनि का एक हाथ सिद्धार्थ के हाथ में था और दूसरे हाथ को हवा में फैलाये बारिश का आनंद लेते हुए धीरे धीरे चल रही थी। सिद्धार्थ ने देखा तो कहा,”अवनि ये क्या कर रही हो तुम , जल्दी चलो न”
अवनि सिद्धर्थ के बगल में आयी और ख़ुशी भरे स्वर में कहा,”पता है सिद्धार्थ ! मेरा हमेशा से अपने पार्टनर के साथ ऐसे बारिश मे भीगने का सपना था और देखो आज वो पूरा हो गया”
सिद्धार्थ ने सुना तो अवनि की तरफ देखा और कहा,”अवनि ! तुम ना ऐसे बेकार सपने कम देखा करो , तुम्हारे ऐसे सपनो के चक्कर में मेरी हालत खराब हो गयी है,,,,,,,,,अब चलो वरना दोनों बीमार पड़ जायेंगे”
अवनि ने सुना तो उसकी ख़ुशी मायूसी में बदल गयी। सिद्धार्थ ने उसके इतने प्यारे सपने को एक पल में बेकार कह दिया। अवनि फीका सा मुस्कुराइ और आगे बढ़ गयी , पहली बार उसे बारिश तकलीफ दे रही थी या यू कहे बारिश में सिद्धार्थ का साथ ,, सिद्धार्थ अवनि के साथ बस स्टेण्ड आया वहा से अगले मंदिर जाने के लिए टिकट ले ली बस चलने में अभी आधा घंटा था।
भीगने की वजह से सिद्धार्थ ने अपने और अवनि के लिए दो कप चाय ले ली और टेबल की तरफ चला आया। अवनि अपनी चाय लेकर जैसे ही सिद्धार्थ के बगल में आकर बैठी सिद्धार्थ ने कहा,”क्या कर रही हो अवनि वहा सामने बैठो ना,,,,,,,सब देख रहे है”
अवनि को ये बहुत अजीब लगा और इस बार उसे सिद्धार्थ पर गुस्सा भी आया इसलिए वह दूसरी टेबल पर जा बैठी और अपनी चाय पीने लगी।
चाय पीकर दोनों बस में आ बैठे लेकिन अब अवनि सिद्धार्थ से कोई बात नहीं कर रही थी। सिद्धार्थ ने अवनि को मनाने की कोशिश की और बताया कि वह ऑफिस के काम को लेकर थोड़ा सा परेशान है बस इसलिए,,,,,,,,,,,हालाँकि अवनि उदास थी पर सिद्धार्थ के साथ इस सफर को खराब करना नहीं चाहती थी इसलिए मान गयी और दोनों फिर एक मंदिर पहुंचे। ये मंदिर पहले वाले मंदिर से भी ज्यादा पुराना था और पहाड़ी पर था , नीचे नदी बह रही थी और आस पास बहुत ही खूबसूरत नजारा था ये देखकर अवनि सिद्धार्थ पर जो गुस्सा था उसे भूल गयी और मंदिर की तरफ बढ़ गयी।
मंदिर से 500 मीटर पहले ही लाइन लगी थी और भीड़ ऐसी की इंसान से इंसान सट जाए। सिद्धार्थ अवनि को साथ लेकर भीड़ में शामिल हो गया। घुमावदार लाइनो में चलते हुए सभी भक्त मंदिर की तरफ जा रहे थे। अवनि सिद्धार्थ के पीछे थी और सिद्धार्थ से आगे 5-6 आदमी जो कि सिद्धार्थ के पिता की उम्र के थे और देहात साइड से होने की वजह से उनके कपडे भी मैले-कुचले ही थे लेकिन भक्ति और श्रद्धा इतनी की इस भीड़ में भी वे लोग महादेव के दर्शन करने आये थे। अवनि ख़ामोशी से सिद्धार्थ के साथ चल रही थी।
आगे चलने वालो की वजह से धक्का लगा और एक बुजुर्ग सिद्धार्थ से टकराया तो सिद्धार्थ ने गुस्से से कहा,”अरे आराम से देखकर चलो न”
“अरे बेटा वो आगे से धक्का आया , माफ़ करना”,आदमी ने कहा अवनि ने देखा तो उदास हो गयी। आदमी बहुत ही लाचार और बेबस नजर आया , उसकी आँखों में जो उदासी थी उसे अवनि ने पलभर में पढ़ लिया।
भीड़ आगे बढ़ी और लगभग एक घंटे तक चलने के बाद भी मंदिर कुछ ही दूर पहुंचे थे और इस बीच वह बुजुर्ग दो तीन बार सिद्धार्थ से फिर टकरा गया और इस बार सिद्धार्थ से कहा,”अबे देख ले थोड़ा , इस बार गिरा ना तो फिर देखना”
आदमी ने कुछ नहीं कहा और मायूसी से थोड़ा आगे खिसक गया जिस से सिद्धार्थ को छुए ना , वह समझ रहा था कि सिद्धार्थ के चिढ की वजह भीड़ नहीं बल्कि उसका पहनावा या फिर उसकी औकात है।
अवनि ने देखा तो उसने सिद्धार्थ को अपने पीछे आने को कहा और खुद आगे होने लगी , अपनी आँखों के सामने वह किसी बुजुर्ग का अपमान होते तो नहीं देख सकती थी लेकिन सिद्धार्थ ने मना कर दिया ये देखकर अवनि ने कहा,”सिद्धार्थ ! आप देख रहे है हम सबकी तरह वे लोग भी लाइन में लगे है , अगर आपको इतनी ही परेशानी है तो फिर आपको VIP दर्शन करना चाहिए”
सिद्धार्थ ने सुना तो अवनि की बात से गुस्सा होकर कहा,”अगर ऐसा है तो आज के बाद मेरे साथ यहाँ मत आना”
सिद्धार्थ की बात सुनकर अवनि के मन को ठेस पहुंची , जिस इंसान से वह पहली बार मंदिर में मिली , जिस इंसान के साथ उसने हर बार मंदिर में दर्शन किये , जिस इंसान के साथ उसने हर बार शिवलिंग पर जल अर्पित किया , जिस इंसान को उसने इन्ही सब मंदिरो में माँगा , आज वही इंसान उस से इतनी बड़ी बात कह रहा था हालाँकि सिद्धार्थ ने ये बात गुस्से में कही लेकिन अवनि के दिल को जा लगी।
वह खामोश हो गयी और सिद्धार्थ उसकी ख़ामोशी को समझ नहीं पाया या यू कहे सिद्धार्थ को अवनि की ख़ामोशी से फर्क नहीं पड़ा।
भीड़ के साथ दोनों आगे बढे दर्शन किये और मंदिर से बाहर चले आये। अवनि उदास थी लेकिन सिद्धार्थ ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया वह अवनि का हाथ थामे बगल में दूसरा मंदिर था उसमे ले आया और यहाँ भी लाइन लगी थी। सिद्धार्थ एक बार फिर अवनि के साथ लाइन में लग गया। सिद्धार्थ का गुस्सा कम हो चुका था इसलिए वह अब अवनि से इधर उधर की बाते कर रहा था। लाइन में लगे दोनों गर्भगृह के बाहर पहुंचे अवनि ने देखा बाहर की दिवार पर एक छोटा झरोंखा बना था और वहा महादेव् की मूर्ति रखी थी जहा सभी भक्त फूल चढ़ा रहे थे।
सिद्धार्थ ने प्रशाद में से एक फूल निकाला और अवनि को हाथ लगाने का इशारा किया और वहा चढ़ा दिया। सिद्धार्थ ने अपने मन में क्या मांगा अवनि नहीं जानती लेकिन अवनि ने अपने हाथ जोड़े और मूर्ति को देखते हुए मन ही मन कहा,”महादेव ! आज पहली बार मैंने सिद्धार्थ का एक नया ही रूप देखा है , मैंने तो इसे आपका आशीर्वाद मानकर स्वीकार किया पर आज पहली बार मेरा विश्वास डगमगा रहा है , क्या मैंने गलत इंसान चुन लिया है महादेव ?”
अवनि ने पुरे दिल से अपने महादेव से ये सवाल किया और जिस फूल को उसने सिद्धार्थ के साथ महादेव की मूर्ति पर चढ़ाया था वह एकदम से नीचे आ गिरा। अवनि का दिल धड़क उठा और आँखों में नमी तैर गयी। सिद्धार्थ ने देखा तो खुश होकर अवनि का हाथ थामा और कहा,”लो अब तो महादेव ने भी फूल गिराकर ये कन्फर्म कर दिया कि हम हमेशा साथ रहेंगे”
अवनि अवाक् थी क्या सच था और क्या भरम ? वह हैरान खामोश सी सिद्धार्थ के पीछे चल पड़ी और दर्शन कर मंदिर से बाहर चली आयी। महादेव के हर मंदिर में अवनि को सुकून मिला लेकिन आज पहली बार उसे उन्ही मंदिरो में घुटन , बेचैनी और अनचाही तकलीफ का अहसास हो रहा था। अवनि की आँखों में नमी थी और बार बार उसकी आँखो के सामने सिद्धार्थ के साथ बिताये पल आ रहे थे।
शाम में सिद्धार्थ अवनि को लेकर रेलवे स्टेशन चला आया। ट्रेन 3 घंटे बाद थी इसलिए सिद्धार्थ अवनि के साथ वही स्टेशन पर पड़ी बेंच पर आ बैठा। सिद्धार्थ के ऐसे बर्ताव के बाद अवनि उदास हो गयी और शांत भी लेकिन सिद्धार्थ ने जानने की कोशिश नहीं की वह अवनि के साथ ही बैठा था लेकिन अपने फ़ोन में इंस्टाग्राम पर रील्स देखने में व्यस्त , अवनि का मन भारी होने लगा आँखों में भरे आँसू किसी भी वक्त बाहर आने को बेताब , सिद्धार्थ अवनि को स्टेशन पर ही छोड़कर बाहर गया और खाना पैक करवाकर ले आया।
रात 9 बजे ट्रेन आयी और सिद्धार्थ अवनि के साथ ट्रेन में आ बैठा। ट्रेन का डिब्बा अभी खाली था इसलिए सिद्धार्थ अवनि के सामने वाली सीट पर आकर बैठा और उसके हाथो को पकड़कर कहा,”क्या हुआ है अवनि ? ये सब क्या नाटक है ? ना तुम बात कर रही हो , अजीब सा मूड बना रखा है,,,,,,,,,,,,!!”
“कुछ भी नहीं,,,,,,,,!!”,अवनि ने मुश्किल से कहा
“तो फिर ऐसी शक्ल क्यों बना रखी है ? मैं देख रहा हूँ तुम बहुत अजीब बिहेव कर रही हो”,सिद्धार्थ ने कहा
“अजीब बिहेव तो आप कर रहे है सिद्धार्थ , सच क्या है जो आपने मुझे दिखाया वो या आज मैंने जो देखा वो,,,,,,,!!”,अवनि ने मन ही मन खुद से कहा सिद्धार्थ अवनि से आगे कुछ पूछ पाता इस से पहले पैसेंजर आ गए और सिद्धार्थ को उठकर अपनी सीट पर आना पड़ा। सिद्धार्थ की सीट नीचे थी और अवनि की ऊपर उसने सिद्धार्थ से कहा,”सिद्धार्थ आप मेरी सीट पर चले जाईये मुझे ऊंचाई से डर लगता है”
“अवनि मैं उस सीट पर कम्फर्टेबल नहीं रह पाऊंगा तुम प्लीज थोड़ा एडजस्ट कर लो”,सिद्धार्थ ने कहा
“प्लीज सिद्धार्थ”,अवनि ने रिक्वेस्ट की तो सिद्धार्थ ने बेरुखी से कहा,”नहीं मैं नहीं जाऊंगा तुम वहा जाओ”
अवनि ने सुना तो उसे फिर दुःख हुआ वह जैसे तैसे करके सीट पर आयी , उसे घुटन का अहसास हो रहा था। सिद्धार्थ ने उस से खाने का पूछा लेकिन ने मना कर दिया वह समझ ही नहीं पा रही थी कि उसके साथ हो क्या रहा है ? सिद्धार्थ ने दोबारा नहीं पूछा और अकेले ही खाना खाकर अपनी सीट पर लेट गया। 4-5 घंटे का सफर था। अवनि ने देखा सिद्धार्थ को कोई फर्क नहीं पड़ रहा तो उसकी आँखों में भरे आँसू बह गए।
अवनि खुद को नहीं रोक पायी और मुँह छुपाकर रो पड़ी। बगल की सीट पर लेटी पैसेंजर ने जब अवनि को रोते देखा तो उसने सिद्धार्थ को बताया। सिद्धार्थ अवनि को चुप करवाने के बजाय कुछ देर उसे देखता रहा और फिर अपने फोन से अवनि को मैसेज भेजा “क्या कर रही हो अवनि ? रोना बंद करो , सब देख रहे है क्यों मेरा तमाशा बनवा रही हो ?”
अवनि ने मैसेज पढ़ा तो उसे और ज्यादा तकलीफ हुई जो सिद्धार्थ उसके एक आँसू गिरने पर तड़प उठता था वह आज उसे तमाशा बता रहा था। अवनि ने अपने आँसू पोछ लिए उसका रोना सिसकियों में बदल गया। सिद्धार्थ जानता था अवनि को ठंड में साँस की प्रॉब्लम है इसके बावजूद उसने अवनि पर दया ना दिखाकर उसे ऊपर वाली बर्थ पर जाने को कहा। अवनि के चुप होने के बाद सिद्धार्थ ने एक और मैसेज अवनि को भेजा जिसे देखकर अवनि का दिल टूट गया और उसकी आँखों में आँसू फिर भर आये
“Thankyou अवनि ये सब करके आज तुमने मुझे एक बार फिर मेरे पास्ट की याद दिला दी”
( क्या महादेव के इशारे को समझ पायेगी अवनि या सिद्धार्थ फिर कर देगा उसे गुमराह ? क्या अवनि के लिए प्यार और परवाह सिद्धार्थ का दिखावा था ? इस घटना के बाद क्या अवनि चली जाएगी सिद्धार्थ से दूर या अभी बाकि है सिद्धार्थ की साजिशे ? जानने के लिए पढ़े “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
