Pasandida Aurat – 52
अवनि ने सुरभि से वापस उदयपुर जाने को कह दिया। सुरभि सिद्धार्थ की असलियत जानती थी लेकिन अवनि अभी तक सिद्धार्थ का असली चेहरा नहीं देख पायी और देखती भी कैसे सिद्धार्थ हमेशा अवनि के साथ अच्छे से पेश आया है , उसे वो प्यार दिया जिसकी कमी अवनि की जिंदगी में थी , उसकी परवाह की , उसके साथ खड़ा रहा और इन्ही सब वजहों से अवनि को आज सुरभि की बात पर भी विश्वास नहीं हो रहा था। दोनों अच्छी दोस्त थी लेकिन सिद्धार्थ की वजह से दोनों में झगड़ा हो गया।
सुरभि का सर चकरा रहा था एक तरफ अनिकेत उसे गलत समझ रहा था और दूसरी तरफ अवनि उसकी बात नहीं समझ रही थी सुरभि को समझ नहीं आ रहा था कि अब वह क्या करे ? वह अपनी आँखों के सामने अवनि को बर्बादी की तरफ कदम बढ़ाते देख रही थी और उसके हाथ में कुछ नहीं था। इसी सोच विचार में सुरभि को नींद आ गयी।
हॉल के सोफे पर बैठी अवनि सुरभि के बारे में सोच रही थी। सब अच्छा चल रहा था फिर अचानक से सुरभि को क्या हो गया कि वह सिद्धार्थ के खिलाफ हो गयी। सिद्धार्थ ने भी अवनि को कोई फोन नहीं किया और ना ही अवनि ने इस वक्त उस से बात की। वह सिद्धार्थ को सुरभि के बारे में बताकर हर्ट करना नहीं चाहती थी। अवनि का मन उदास हो गया साथ ही उसे इस बात पर भी दुःख होने लगा कि उसने सुरभि से जाने को कहा लेकिन अवनि उलझ चुकी थी। उसके एक तरफ सिद्धार्थ था तो दूसरी तरफ सुरभि और दोनों ही उसे अजीज थे
वह किसी एक को जाने नहीं दे सकती थी। सुरभि उसकी दोस्त है और कुछ वक्त बाद शायद वह सिद्धार्थ को समझ जाएगी ये सोचकर अवनि ने सुरभि का यहाँ से चले जाना ही ठीक समझा लेकिन वह सिद्धार्थ को खोना नहीं चाहती थी। आज से पहले किसी ने उसके लिए इतना प्यार और परवाह नहीं दिखाई थी और अब तो सिद्धार्थ उसके लिए उसका “पसंदीदा मर्द” बन चुका था वह भला उसे कैसे चले जाने देती ? सोच विचार में डूबी अवनि देर रात हॉल में ही बैठी रही।
ठण्ड का अहसास हुआ तो वह उठी और कमरे में चली आयी देखा सुरभि सो रही थी और कंबल नीचे गिरा हुआ था। अवनि ने कंबल उठाया और सुरभि को ओढ़ा दिया।
अवनि ने अपना कम्बल लिया और सुरभि के बगल में ही लेट गयी।
सोई हुयी सुरभि किसी मासूम बच्चे सी लग रही थी अवनि ने उसके सर को सहलाया और मन ही मन खुद से कहा,”मुझे माफ़ कर देना सुरभि मैंने तुम्हे यहाँ से जाने को कहा लेकिन तुम्हे सिद्धार्थ को लेकर जरूर कोई ग़लतफ़हमी हुई है। वो बुरा लड़का नहीं है तुम , तुम बस उसे समझ नहीं पायी। मैं उसे बहुत पसंद करती हूँ सुरभि और अपनी आने वाली जिंदगी मैं उसी के साथ देखती हूँ,,,,,,,,आई हॉप कि तुम मेरी बात समझोगी एंड आई विश सिद्धार्थ से तुम्हे जो भी शिकायते है वो वक्त के साथ कम हो जाये”
अवनि ने सुरभि को देखते हुए अपनी आँखे मूँद ली।
अगली सुबह अवनि देर तक सोती रही , सुरभि जल्दी उठ गयी थी उसने अपना सामान समेटा और अवनि के लेपटॉप के पास उसके लिए एक नोट छोड़कर चली गयी। वह जाने से पहले अवनि से नहीं मिली , इसलिए नहीं कि वह अवनि से नाराज थी बल्कि इसलिए कि जाने से पहले वह कमजोर पड़ना नहीं चाहती थी। बीती रात जो हुआ उसके बाद सुरभि में इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह अवनि को सफाई दे सके या उस से बात कर सके इसलिए भारी मन के साथ उसने अवनि के लिए एक नोट लिखा और चली गयी।
काफी देर बाद अवनि की आँख खुली उसने देखा सुरभि कमरे में नहीं है तो वह उठकर आँखे मसलते हुए बाहर आयी लेकिन सुरभि बाहर भी नहीं थी। अवनि ने बाथरूम में देखा , बालकनी में देख लेकिन सुरभि वहा भी नहीं थी। अवनि अपने कमरे में आयी देखा सुरभि का सामान भी वहा नहीं है , वह सुरभि को फोन करने के लिए जैसे ही अपना फ़ोन उठाने स्टडी टेबल की तरफ आयी उसकी नजर लेपटॉप के पास पड़े नोट पर गयी। अवनि ने उसे उठाया और पढ़ने लगी।
“Dear अवनि !
जानती हूँ कल रात मेरी वजह से तुम्हे बहुत ठेस पहुंची और उसके लिए मैं शर्मिन्दा हूँ। हो सकता है सिद्धार्थ को लेकर मुझे ग़लतफ़हमी हो लेकिन अगर तुम्हे लगता है कि वो सही इंसान है तो तुम उससे शादी जरूर करना। मैं तुम से बिल्कुल नाराज नहीं हूँ ना ही गुस्सा हूँ बस दोस्त हूँ न तो तुम्हारी परवाह के चलते थोड़ी ज्यादा ही पजेसिव हो गयी। मेरी एक बात याद रखना अवनि जिस रास्ते पर तुम हो वो रास्ता बेशक सही हो पर अगर कभी भी लगे कि कुछ ठीक नहीं है तो प्लीज वापस लौट आना ,
मैंने महसूस किया कि तुम अब पहले वाली अवनि नहीं रही , बदल गयी हो और ये शायद सिद्धार्थ के प्यार और साथ की वजह से है पर प्लीज अवनि कभी ये साथ तुम्हे तकलीफ दे तो लौट आना अपनी उसी पुरानी दुनिया में,,,,,,,,,,मैं तुम्हे वही मिलूंगी,,,,,,,,,,तुम्हारी सुरभि “
नोट पढ़कर अवनि की आँखों में नमी तैर गयी और चेहरा उदासी से घिर गया। सुरभि का यु चले जाना अवनि को अच्छा नहीं लगा उसने नोट टेबल की दराज में रखा और कमरे से बाहर चली आयी
अवनि ने अपने लिए चाय बनायीं और हॉल में आ बैठी। फोन सामने टेबल पर रखा था लेकिन अवनि में सुरभि को फोन करने की हिम्मत नहीं हो रही थी। अवनि उदास आँखों से बाहर देखते हुए चाय पीने लगी तभी उसका फ़ोन बजा। सुरभि का होगा सोचकर अवनि ने जल्दी से अपना फोन देखा लेकिन फ़ोन सिद्धार्थ का था अवनि ने फोन उठाकर कान से लगाया और कहा,”हेलो !”
“गुड मॉर्निंग”,सिद्धार्थ ने बहुत ही प्यार से कहा
“गुड मॉर्निंग,,,,,,,,!!”,अवनि ने उदासीन स्वर में कहा
“क्या हुआ अवनि , आज तुम्हारी आवाज में इतनी उदासी क्यों है ? सब ठीक है ना और सुरभि कहा है ?”,सिद्धार्थ ने चिंतित स्वर में पूछा
“वो चली गयी”,अवनि ने उतनी ही उदासी से कहा
“चली गयी मतलब ? अवनि क्या तुम दोनों की बीच झगड़ा हुआ है और कही ये झगड़ा मुझे लेकर तो नहीं ?”,सिद्धार्थ ने पूछा
सिद्धार्थ का इतना कहना था कि अवनि फोन पर ही रोने लगी , वह इतनी उदास थी कि अपनी भावनाओ को नहीं रोक पायी और सुबकने लगी। सिद्धार्थ ने सूना तो सुना तो प्यार से कहा,”अवनि ! शांत हो जाओ और पहले रोना बंद करो”
अवनि ने अपने आँसू पोछे लेकिन उसका सुबकना अभी भी जारी था। सिद्धार्थ कुछ देर ख़ामोशी से अवनि की सिसकिया सुनता रहा और फिर कहा,”अवनि ! तुम जानती हो ना मुझे तुम्हारी आँखों में आँसू बिल्कुल नहीं पसंद फिर भी तुम रो रही हो , अच्छा बताओ क्या हुआ ? सुरभि क्यों चली गयी क्या तुमने उस से कुछ कहा ?”
अवनि ने सिद्धार्थ को बीती रात अपने और सुरभि के बीच हुए झगडे के बारे में बताया। सिद्धार्थ चुपचाप सब सुनता रहा और फिर अवनि को समझाते हुए कहा,”तुम्हे उसे चले जाने के लिए नहीं कहना चाहिए था अवनि ! वो जैसी भी है तुम्हारी दोस्त है। वो बस तुम्हारे लिए थोड़ी सी चिंतित है शायद इसलिए उसने ये सब कह दिया और वैसे भी वो मेरे बारे में कितना ही जानती है। मैंने अपनी तरफ से उसका दिल जीतने की पूरी कोशिश की है अवनि अब पता नहीं उसे मुझमे कमिया क्यों नजर आ रही है ?”
“उसे लगता है तुम मुझे धोखा देकर चले जाओगे सिद्धार्थ”,अवनि ने रोआँसा होकर कहा
“अरे लेकिन मैं तुम्हे धोखा क्यों दूंगा अवनि ? तुम मेरा लकी चार्म हो अवनि और अपने लक को भला कोई कैसे धोखा दे सकता है ? मैं तो चाहता हूँ तुम जिंदगीभर मेरे साथ रहो और खुश रहो , सुरभि को अगर ये लगता है तो मैं जल्दी ही उसकी ये ग़लतफ़हमी भी दूर कर दूंगा”,सिद्धार्थ ने कहा
“सुरभि अच्छी लड़की है सिद्धार्थ पर पता नहीं उसे क्या हो गया है ?”,अवनि ने फिर रोआँसा होकर कहा
“अवनि ! उसे कुछ नहीं हुआ है आगे जाकर जब वो तुम्हे मेरे साथ खुश देखेगी तो अपने आप समझ जाएगी कि वो गलत थी और तुम सही , चलो अब अपना मूड ठीक करो और कुछ खा लो ! मुझे मम्मी के साथ बाहर जाना है तो मैं तुम्हे वापस आकर फोन करता हूँ , बाय लव यू”,कहकर सिद्धार्थ ने फोन काट दिया
“बाय,,,,,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा और फोन काटकर साइड में रख दिया।
अवनि का कुछ करने का मन नहीं था। संडे था इस वजह से आज उसकी छुट्टी भी थी। उसने मुश्किल से अपनी चाय खत्म की और वही सोफे पर लेट गयी और कुछ देर बाद उसे फिर नींद आ गयी।
आनंद निलय अपार्टमेंट , मुंबई
सुबह के 6 बज रहे थे और पृथ्वी कोई सपना देख रहा था जिसमे सपना कम और बीती रात नकुल से हुई बातें चल रही थी। पृथ्वी के चेहरे पर बेचैनी के भाव साफ नजर आ रहे थे ठीक वैसे ही जैसे कोई अनचाही चीज हमारे सामने हो या कोई ना पसंद बात सुनकर हमारे चेहरे के भाव बदल जाए। पृथ्वी के कानो में नकुल की कही बात एकदम से गुंजी ” ये सोच अगर उसकी जिंदगी में पहले से कोई हुआ तब , तब क्या होगा ?”
एक गहरी साँस के साथ पृथ्वी उठ बैठा , उसका दिल जोरो से धड़क रहा था और सर्दी में भी उसके माथे पर पसीने की बुँदे झिलमिला रही थी। पृथ्वी के कानों में अभी भी नकुल की बात गूंज रही थी और पृथ्वी सोच में डूब गया और मन ही मन खुद से कहने लगा,”ये ख्याल कभी मेरे जहन में क्यों नहीं आया ? मैं उसे पसंद करता हूँ ये सच है पर मैंने ये क्यों नहीं सोचा कि वो भी तो किसी को पसंद कर सकती है,,,,,,,,,शायद इसलिए वो मेरे मैसेज का ठीक से जवाब नहीं देती या फिर मुझे इग्नोर कर रही है,,,,,,,,,,,हाह ! ऐसा कैसे हो सकता है ?
अगर वो किसी के साथ रिश्ते में होती तो उसे अपने सोशल मीडिआ पर जरूर शेयर करती , कभी तो कोई तो ऐसी पोस्ट करती जिस से ये लगे कि उसकी जिंदगी में कोई है,,,,,,,,,,नहीं नहीं पृथ्वी तू खामखा ज्यादा सोच रहा है , ऐसा कुछ नहीं है Be Positive यार,,,,,,,,,,और अगर कोई हुआ तो , तो तो तो क्या मैं पीछे हट जाऊंगा , हाह ! क्या सच में ? ये इतना आसान भी नहीं है पृथ्वी,,,,,अब मैं क्या करू ?”
कहते हुए पृथ्वी ने अपना सर पकड़ लिया और फिर तकिये में मुँह छुपाकर सो गया क्योकि आज संडे था और पृथ्वी को अपने बोरिंग ऑफिस नहीं जाना था।
सुबह सोई अवनि की आँख दोपहर में जाकर खुली वो भी सिद्धार्थ के फोन से , अवनि ने फोन उठाया और सिद्धार्थ से बात की। आज अवनि का मूड अच्छा नहीं था वह बहुत उदास थी और ये देखते हुए सिद्धार्थ ने कहा,”अच्छा सुनो ! तैयार हो जाओ हम कुछ खाने बाहर चलते है”
“मेरा मन नहीं है”,अवनि ने कहा
“मन नहीं भी है तब भी चलो तुम्हे अच्छा लगेगा , मैं आता हूँ”,कहकर सिद्धार्थ ने फोन काट दिया और अवनि उठकर नहाने चली गयी। कुछ देर बाद अवनि तैयार होकर बाहर आयी। उसने जींस और उस पर कुर्ता पहना था , बालो को समेटकर कल्चर डाल लिया , आज ना उसकी आँखों में काजल था ना होंठो पर लिपस्टिक बस ललाट पर बिंदी लगा ली और अपना बैग लेकर फ्लेट से बाहर निकल गयी। वह नीचे आयी तो देखा गाड़ी के बाहर खड़ा सिद्धार्थ उसी का इंतजार कर रहा है।
अवनि उसके पास चली आयी तो सिद्धार्थ ने उसे बैठने के लिए कहा और खुद ड्राइवर सीट पर आ बैठा। सिद्धार्थ ने गाड़ी स्टार्ट की और आगे बढ़ा दी। अवनि खामोश थी सिद्धार्थ ने उसकी तरफ देखा आज पहली बार अवनि उसे आकर्षक नहीं लगी , वह उसे कुछ फीकी फीकी नजर आयी और सिद्धार्थ ने कहा,”ये क्या हाल बना रखा है तुमने अपना , आज तुम थोड़ी अलग लग रही हो अवनि”
“मैं इसीलिए आना नहीं चाहती थी”,अवनि ने बुझे स्वर में कहा
“अह्ह्ह मेरा वो मतलब नहीं था , आई सेड ये उदासी तुम्हारे चेहरे पर अच्छी नहीं लगती अवनि , तुम हंसती मुस्कुराती ही अच्छी लगती हो”,सिद्धार्थ ने अवनि के हाथ को अपने हाथ में थामकर कहा
“ऐसा क्यों हुआ सिद्धार्थ ? सुरभि आपको गलत कैसे समझ सकती है ?”,अवनि ने उदासी भरे स्वर में कहा
“अवनि ! तुम मुझे बताओ क्या मैं तुम्हे गलत इंसान लगता हूँ ?”,सिद्धार्थ ने अवनि की आँखों में देखकर पूछा
अवनि ने ना में गर्दन हिला दी तो सिद्धार्थ ने कहा,”तुम्हे मुझे पर भरोसा है ना अवनि ?”
अवनि ने इस बार धीरे से हाँ में गर्दन हिला दी तो सिद्धार्थ ने कहा,”बस फिर इसी हफ्ते तुम्हे अपने मम्मी पापा से मिलवाता हूँ”
“मम्मी पापा से क्यों ?”,अवनि ने पूछा
“हमारी शादी की बात करने”,सिद्धार्थ ने अवनि की तरफ देखकर कहा
अवनि ने सुना तो उसका दिल धड़क उठा और उसने कहा,”इतनी जल्दी शादी,,,,,,,,,,मुझे अभी शादी नहीं करनी है सिद्धार्थ”
“लेकिन मुझे करनी है अवनि , मैं रोज रोज तुम्हे इस डर के साथ जीते नहीं देख सकता कि मैं तुम्हे छोड़कर चला जाऊंगा। तो डन इस वीकेंड तुम मम्मी पापा से मिल रही हो और अगले वीकेंड हम शादी कर रहे है,,,,,,,!!”,सिद्धार्थ ने गंभीर स्वर में कहा
“सिद्धार्थ ये बहुत जल्दी हो जाएगा , इतनी शादी जल्दी शादी नहीं”,अवनि ने घबराकर कहा
“जल्दी कहा है अवनि वैसे भी हमे एक दूसरे के बारे में जितना जानना था हम जान चुके है , अब हमे शादी कर लेनी चाहिए और मुझे तुम से शादी करनी है अवनि”,सिद्धार्थ ने जिद करते हुए कहा
अवनि सुरभि को लेकर पहले ही परेशान थी और सिद्धार्थ की बातो ने उसे और परेशान कर दिया। सिद्धार्थ के मुंह से शादी का नाम सुनते ही अवनि को एकदम से बीते हादसे की याद आ गयी। सिद्धार्थ वैसी ही जिद कर रहा था जैसी विश्वास जी ने मुकुल से रिश्ता करते वक्त की थी और ये याद आते ही वह रो पड़ी। उसने रोआँसा होकर सिद्धार्थ से कहा,”लेकिन मुझे अभी शादी नहीं करनी है प्लीज”
सिद्धार्थ ने देखा अवनि शादी का नाम सुनकर रोने लगी है तो वह एकदम से हंस पड़ा और कहा,”अरे बाबा ! मैं तो मजाक कर रहा था तुम तो सच में रोने लगी , अवनि चुप हो जाओ यार मैं बस मजाक कर रहा था , अभी नहीं करनी शादी नहीं करेंगे मैं तो बस तुम्हारा मूड चेंज करने के लिए ये सब कह रहा था। अच्छा अब चुप हो जाओ,,,,,,,प्लीज्ज”
अवनि ने सुना तो खुद को जैसे तैसे शांत किया और सुबकते हुए कहा,”लेकिन मुझे अभी शादी नहीं करनी”
“ठीक है 6 महीने बाद कर लेंगे , ठीक है अब चुप हो जाओ और ये छोटी छोटी बात पर आँसू मत बहाया करो,,,,,,,,,पागल लड़की”,कहते हुए सिद्धार्थ ने अवनि के हाथ को अपने होंठो से लगा लिया
सिद्धार्थ अवनि को लेकर एक रेस्त्रो पहुंचा। दोनों अंदर आ बैठे सिद्धार्थ ने अपने लिए कॉफी और अवनि के लिए कॉफी और सेंडविच आर्डर कर दिया क्योकि वह जानता था अवनि ने सुबह से कुछ नहीं खाया है।
सिद्धार्थ के सामने बैठी अवनि सुरभि के बारे में सिद्धार्थ को बता रही थी लेकिन सिद्धार्थ को सुरभि के बारे में सुनने में कोई इंट्रेस्ट नहीं था इसलिए वह अवनि की बात सुनते सुनते बीच में अपना फोन देखने लगता। आज पहली बार ऐसा हुआ जब सिद्धार्थ का ध्यान अवनि की बातो से ज्यादा अपने फोन में था।
“सिद्धार्थ ! आप सुन रहे है ना ?”,अवनि ने कहा
सिद्धार्थ ने अपना फोन साइड में रखा और कहा,”हाँ ! हाँ मैं सुन रहा हूँ , वो बस एक जरुरी मेल आया था तो उसे ही देख रहा था। हाँ तो तुम क्या कह रही थी ?”
“सिद्धार्थ क्या मै सुरभि के साथ कुछ ज्यादा ही कठोर पेश आ गयी थी ?”,अवनि ने कहा
“देखो अवनि तुम जितना सोच रही हो बात उतनी भी सीरियस नहीं है। तुम्हारी लाइफ के डिसीजन लेने का हक़ तुम्हे है मुझे और सुरभि को नहीं और तुम अपना भला बुरा अच्छे से जानती हो इसलिए तुमने सुरभि के साथ कुछ गलत नहीं किया ,
इन्फेक्ट सुरभि अगर सुरभि सच में तुम्हारी दोस्त है तो उसे तो तुम्हारे लिए खुश होना चाहिए था खैर तुम कुछ दिन इस बारे में बात मत करो जब उसे अपनी गलती का अहसास हो जाएगा तो वो खुद तुम से बात करेगी,,,,,,,,हम्म्म अब इस बारे में सोचना और खुद को हर्ट करना बंद करो”,सिद्धार्थ ने अवनि को समझाते हुए कहा
सिद्धार्थ की बात सुनकर अवनि खामोश हो गयी। खाना आया सिद्धार्थ अपनी कॉफी पीते हुए एक बार फिर अपने फोन को देखने लगा और अवनि ख़ामोशी से सेंडविच खाने लगी।
खा पीकर दोनों रेस्त्रो से बाहर निकले और सिद्धार्थ अवनि को छोड़ने अपार्टमेंट चला आया। गाडी अपार्टमेंट के बाहर आकर रुकी तो अवनि ने सिद्धार्थ की तरफ देखा और कहा,”अच्छा सिद्धार्थ ! मैंने आपको जो किताब दी थी आपने उसे पढ़ा ?”
“अह्ह्ह्ह अच्छा वो , वो मैंने अभी तक नहीं पढ़ी ,, मैं उसे फुर्सत से बैठकर पढ़ना चाहता हूँ अवनि , ऐसे भागते दौड़ते नहीं,,,,,,,एंड हाँ उसे पढ़ने के बाद मैं तुम्हे उसका रिव्यू जरूर दूंगा”,सिद्धार्थ ने मुस्कुरा कर कहा
अवनि ने सुना तो फीका सा मुस्कुरा दी और गाडी से उतरकर सिद्धार्थ को बाय कहा और वहा से चली गयी। सिद्धार्थ ने भी अपनी गाड़ी घुमाई और वहा से चला गया।
( क्या अवनि और सुरभि के बीच की ये दूरिया कम हो पाएगी ? क्या पृथ्वी को मिलेगा उसके सवाल का जवाब ? क्या शुरू हो चुका है सिद्धार्थ का असली खेल ? जानने के लिए पढ़ते रहे “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
