Pasandida Aurat – 112
मैडम जी,,,,!!!”,अवनि के कानो में पृथ्वी की आवाज पड़ी उसने अपनी आँखे खोली तो देखा खिड़की के पास अपने हाथो को बांधे खड़ा पृथ्वी मुस्कुराते हुए उसे ही देख रहा है। अवनि का दिल धड़कने लगा और आँखों में नमी उभर आयी वह एकटक पृथ्वी को देखती रही और पृथ्वी मुस्कुराता रहा। मुस्कुराते हुए वह कितना प्यारा लग रहा था।
“तुम , तुम यहाँ , मुझे लगा तुम नहीं आओगे,,,,,,,,,,तुम तो मुझसे नाराज होंगे ना पृथ्वी , मैंने तुम्हारा दिल जो तोड़ दिया , तुम्हे इतनी तकलीफ दी,,,,,,पर मैं मजबूर थी पृथ्वी,,,,,,,!!”,अवनि ने रोआँसा होकर कहा
“किसने कहा मैं आपसे नाराज हूँ ? मैं आपसे कभी नाराज नहीं हो सकता मैडम जी,,,,,,,हाँ आपने मेरा दिल तोडा लेकिन आपकी ख़ुशी से बढ़कर मेरे लिए कुछ नहीं है,,,,,,,,,शादी के जोड़े में अच्छी लग रही है आप , और आज तो आपने मेरा पसंदीदा रंग पहना है,,,,,,,कही इस रंग के बहाने आप मुझे तो महसूस करना नहीं चाहती थी”,पृथ्वी ने मुस्कुराते हुए कहा
अवनि ने सुना तो दुःख से भरकर अपना सर झुका लिया , सच ही तो कह रहा था पृथ्वी वरना अपनी ही शादी में कोई लड़की हरे रंग का जोड़ा क्यों पहनेंगी ?
“पृथ्वी मैं तुमसे,,,,,,,,,,!!”,कहते हुए अवनि ने जैसे ही सर उठाकर सामने देखा पृथ्वी वहा नहीं था , अवनि ने गर्दन घुमाकर पुरे कमरे में देखा लेकिन पृथ्वी कही नहीं था , अवनि को एक बार फिर पृथ्वी के होने का भरम हुआ था और उसकी आँखे भर आयी।
उसने शीशे में खुद को देखा और कहने लगी,”जानती हूँ तुम अब कभी नहीं आओगे पृथ्वी , मैंने तुम्हे खुद से दूर कर दिया पर क्या मैं खुद को तुम्हारे उस अहसास से दूर कर पायी जो तुमने मुझे उन 12 घंटो की मुलाकात में दिए थे ,, काश तुम यहाँ होते तो मैं तुम्हे बताती इस वक्त मैं कैसा महसूस कर रही हूँ ?
सब खुश है , सब के होंठो पर मुस्कुराहट है और मुझे सबके सामने खुश होने का मुस्कुराने का दिखावा करना पड़ रहा है ,, हमारा मिलना किस्मत में नहीं लिखा पृथ्वी पर हमारे बीच जो भी था वो मैं कभी भूल नहीं पाऊँगी,,,,,,,,,,,,,,!!!”
कहते कहते अवनि की आँखों में आँसू भर आये जो किसी भी वक्त बह जाने के लिए आतुर थे।
दुखी होकर अवनि ने एक बार फिर अपना सर झुका लिया। उसका दिल भर आया और हाथ काँपने लगे। उसने जो फैसला किया वह कितना मुश्किल था इसका अहसास सिर्फ उसे था लेकिन उसने ये फैसला फिर भी लिया ताकि सब सही हो सके।
“मैडम जी,,,,,,,,,,,,!!”,एक बार फिर अवनि के कानो में पृथ्वी की आवाज पड़ी और इस बार भी अवनि ने अपने मन का वहम समझकर सर नहीं उठाया ना ही कोई जवाब दिया
“मैडम जी,,,,,,!!”,फिर से वही आवाज अवनि के कानों में पड़ी तो उसने सर उठाया और पलटकर देखा क्योकि इस बार आवाज कमरे के दरवाजे की तरफ से आ रही थी। अवनि ने जैसे ही गर्दन घुमाई देखा कमरे के दरवाजे पर पृथ्वी खड़ा था। पृथ्वी को देखते ही अवनि का दिल जोरो से धड़कने लगा। अवनि कुर्सी से उठी और पृथ्वी की तरफ पलटकर खड़ी हो गयी। उसके मुँह से कोई बोल नहीं फूटे वह बस सामने खड़े पृथ्वी को देखती रही। पृथ्वी अंदर आया और अवनि से कुछ कदम दूर खड़े होकर उसे देखने लगा।
अवनि ने महसूस किया कि इस बार पृथ्वी उसके सामने सच में खड़ा है , ये उसके दिल का वहम नहीं है और अगले ही पल पृथ्वी ने इस बात को पुख्ता कर दिया जब उसने बुझे स्वर में कहा,”शादी मुबारक हो , मैडम जी”
अवनि ने सुना तो महसूस किया जैसे किसी ने सेंकडो खंजर एक साथ अवनि के सीने में भौंक दिए हो , बावजूद इसके उसने अपने होंठो पर मुस्कान लाकर कहा,”कैसी लग रही हूँ ?”
पृथ्वी एकटक अवनि को देखता रहा और फिर अपनी जींस की जेबे खगालने का नाटक करने लगा , उसने हवा में हथेली से कुछ उठाया और हवा में अवनि की माँग भरने का इशारा किया , हवा में दोनों हाथ उठाकर अवनि की गर्दन में कुछ बांधने का नाटक किया और अवनि को देखकर पलकें झपकाकर अपनी गर्दन झटक दी। ये देखकर अवनि की आँखों में आँसू भर आये और उसने कहा,”मुझे लगा नही था तुम आओगे”
पृथ्वी ने नम आँखों से अवनि को देखा और कहा,”मुझे भी कहा लगा था मैडम जी एक दिन ऐसे ऐसे आपके सामने आऊंगा , सोचा एक आखरी बार आपको देख लू,,,,,,,,,,देख लिया , वैसे अच्छी लग रही है आप इस हरे रंग के जोड़े में,,,,,!!
अवनि ने महसूस किया ये सब कहते हुए पृथ्वी को कितनी तकलीफ हो रही थी लेकिन फिर भी पृथ्वी अपने चेहरे पर कठोरता के भाव रखे था ताकि अवनि उसका दर्द ना देख सके। पृथ्वी खामोश हो गया तो अवनि ने कहा,”सबने मुझे तोहफा दिया , तुम मुझे कोई तोहफा नहीं दोगे पृथ्वी”
पृथ्वी ने सुना तो उसके दिल में एक टीस उठी वह अवनि के पास आया और उसे बैठने का इशारा किया , अवनि कुर्सी पर आ बैठी। पृथ्वी ने अपनी जेब से गुलाबी रंग का पाउच निकाला और अवनि के सामने अपना एक घुटना टीकाकार बैठ गया।
अवनि ख़ामोशी से पृथ्वी को देखते रही तो पृथ्वी ने अपने से उसका पैर अपने घुटने पर रखने को कहा। अवनि ने अपना खाली पैर पृथ्वी के घुटने पर रख दिया। पृथ्वी ने पाउच खोला उसमे रखी पायल निकाली और अवनि के सूने पैर में पहना दी। अवनि ने जब देखा ये उसकी खोयी हुई पायल है तो हैरानी से पृथ्वी को देखने लगी और अगले ही पल उसकी नजर पड़ी पृथ्वी की कलाई पर जिस पर विश्वास जी की घडी बंधी थी।
अवनि ने उसे देखा तो उसे वो पल याद आया जब इस घडी पर अवनि का नाम गुदवाते हुए विश्वास जी ने कहा था “जानती हो अवनि इस घडी पर मैंने तुम्हारा नाम क्यों गुदवाया है , ताकि इस घडी के साथ मैं तुम्हारी जिम्मेदारी मैं उस लड़के को सौंप सकू जो तुम्हारे काबिल हो और जिसे मैंने तुम्हारे लिए चुना हो”
विश्वास जी की बात याद आते ही अवनि की आँखों में भरे आँसू गालों पर लुढ़क आये , विश्वास जी ने अवनि के लिए जिसे चुना था वो सिद्धार्थ नहीं बल्कि पृथ्वी था
अवनि को पायल पहनाकर पृथ्वी ने कहा,”आज के दिन आपके लिए इस से अनमोल तोहफा और कुछ नहीं हो सकता मैडम जी,,,,,,,,,,,,अब तक इसे इसलिए सम्हालकर रखा था ताकि अपने हाथो से पहना सको , ये मुझे काशी विश्वनाथ मंदिर में मिली थी”
अवनि कुछ बोल ही नहीं पायी वह अंदर ही अंदर टूटती जा रही थी।
पृथ्वी ने देखा अवनि के हाथ सूने है तो उसकी नजर सामने रखी काँच की चूडियो पर गयी।
पृथ्वी ने उन्हें उठाया और हाथ में लेकर देखते हुए कहा,”कुछ देर बाद आप हमेशा के लिए किसी और की हो जाएगी और मेरा आप पर कोई हक़ नहीं रहेगा , क्या एक आखरी हक़ आप मुझे दे सकती है मैडम जी ? आपके हाथ सूने है क्या मैं आपको ये चूडिया पहना दू”
अवनि ने अपने दोनों हाथो को पृथ्वी के सामने किया और नम आँखों के साथ हामी में सर हिला दिया। पृथ्वी ने एक एक करके सभी चूडिया अवनि के दोनों हाथो में पहना दी।
पृथ्वी ने अवनि से चूडिया पहनाने के लिये कह तो दिया लेकिन जैसे जैसे वह अवनि को चूड़ी पहना रहा था उसका दिल अंदर ही अंदर टूटकर बिखरता जा रहा था। वह उठा और दरवाजे की तरफ बढ़ गया। कमरे से बाहर जाते जाते पृथ्वी रुका और पलटकर कहा,”मैडम जी ! अपना ख्याल रखना और हो सके तो अपने महादेव से कहना अगले जन्म में मुझे आपकी जिंदगी में थोड़ा पहले लिख दे,,,,,,,,,चलता हूँ”
कहकर पृथ्वी वहा से चला गया और अवनि ने अपना चेहरा अपनी हथेलियों में छुपा लिया। वह पृथ्वी से कुछ कह ही नहीं पायी ना उसे रोक पायी,,,,,,,,,,!!
अवनि के कमरे से बाहर निकलकर पृथ्वी जैसे ही आगे बढ़ा सामने से आते सिद्धार्थ से टकरा गया। पृथ्वी को सामने देखकर आज सिद्धार्थ को गुस्सा नहीं आया बल्कि उसने बहुत ही सहजता से कहा,”तुम यहाँ ! शायद तुम्हे अवनि ने इन्वाइट किया है ,, खाना खाकर जाना हाँ एंड उस दिन के लिए आई ऍम रियली सॉरी यार वो बस एक मिसअंडरस्टेंडिंग की वजह से हुआ , मुझे लगा अवनि तुम से प्यार करती है और गुस्से में आकर मैंने तुम्हारे साथ,,,,,,,,,,,,आई ऍम सॉरी”
“वो आज भी मुझसे प्यार करती है”,पृथ्वी ने बिना किसी भाव के कहा
“मतलब ?”,सिद्धार्थ ने हैरानी से पूछा
पृथ्वी ने एक गहरी साँस ली और कहा,”औरत जब मोहब्बत में होती है न तो तोहफे में मिली काँच की चूड़ियों को भी बहुत सम्हालकर रखती है।
मेरी तरफ से उसे पहला तोहफा वो चंद हरी काँच की चूडिया ही तो थी जिन्हे उसने आज भी सम्हालकर रखा है , बस मलाल था तो सिर्फ इस बात का कि उस वक्त वो चूडिया मैं उसे अपने हाथो से ना पहना सका और ये मलाल भी तब मिटा जब वही हरी चूडिया मैंने उसके हाथो में पहनाई उसे किसी और की खातिर सजाने के लिए पर मुझे यकींन है उसे भी मुझसे मोहब्बत है वरना काँच की चूडिया कोई सम्हालकर रखता है क्या ?”
पृथ्वी की बात सुनकर सिद्धार्थ कुछ देर के लिए खामोश हो गया और फिर बुझे स्वर में कहा,”और फिर भी तुमने उसे जाने दिया , उसे रोका नहीं”
पृथ्वी मुस्कुराया लेकिन उसकी मुस्कुराहट में एक दर्द था जिसे सिद्धार्थ बखूबी समझ रहा था आखिर वो भी तो एक मर्द ही था। पृथ्वी ने सिद्धार्थ को देखा और कहा,”वो “मेरी पसंदीदा औरत” है और उसकी ख़ुशी के लिए मैं उसे भी छोड़ सकता हूँ”
सिद्धार्थ ने सुना तो उसे पहली बार पृथ्वी का दर्द महसूस हुआ और दिल में कुछ चुभा , वह हल्का सा मुस्कुराया और पृथ्वी के कंधे पर हाथ रखकर कहा,”चिंता मत करो मैं हमेशा उसका ख्याल रखूंगा”
“थैंक्स,,,,,,,,,,शादी मुबारक हो”,पृथ्वी ने कहा और सिद्धार्थ से हाथ मिलाकर वहा से चला गया
सिद्धार्थ उसे जाते हुए देखता रहा और फिर अवनि के कमरे में चला आया। किसी के आने की आहट सुनकर अवनि ने जल्दी से खुद को सही किया अपनी आँखों के किनारे साफ किये और सामने देखा। इस बार सामने सिद्धार्थ खड़ा था। अवनि अपनी जगह से उठ खड़ी हुई सिद्धार्थ उसके सामने आया और प्यार से उसे एकटक देखने लगा। सिद्धार्थ ने अवनि की आँख के किनारे से काजल लिया और अवनि के कान के पीछे लगाते हुए कहा,”बहुत सुंदर लग रही हो”
अवनि फीका सा मुस्कुरा दी लेकिन उसकी आँखे सब बया कर रही थी।
“पृथ्वी आया था तुम उस से मिली ?”,सिद्धार्थ ने सहजता से पूछा
सिद्धार्थ के मुँह से पृथ्वी का नाम सुनकर अवनि के चेहरे पर परेशानी और डर के भाव तैर गए कही सिद्धार्थ फिर से पृथ्वी को गलत ना समझ ले सोचकर अवनि ने कहा,”सिद्धार्थ वो,,,,,,,,,,,,,,!!”
“रिलेक्स अवनि ! मुझे अच्छा लगा वो यहाँ आया , उस दिन मैंने उसे गलत समझ लिया और उसके साथ,,,,,,,,,अभी बाहर वो मुझे मिला था मैंने उसे उस दिन के लिए सॉरी भी कहा,,,,,,,,,,,!!”,सिद्धार्थ ने बहुत ही सहजता से कहा ये सुनकर अवनि और ज्यादा हैरान हुई
अवनि को चुप देखकर सिद्धार्थ ने हँसते हुए कहा,”पर वो थोड़ा अजीब है , हाह ! कहता है अवनि मेरी ‘पसंदीदा औरत’ है उसकी ख़ुशी के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ,,,,,,,!!”
अवनि ने जैसे ही सुना हैरानी से सिद्धार्थ को देखा और कहा,”क्या कहा उसने ?”
“उसने कहा अवनि मेरी पसंदीदा औरत है”,सिद्धार्थ ने प्यार से कहा क्योकि उसे अब पृथ्वी के यहाँ होने और ऐसी बाते बोलने से कोई खास फर्क नहीं पड़ रहा था वह जानता था कुछ देर बाद अवनि हमेशा के लिए उसकी होने वाली है
अवनि ने जब अपने लिए “पसंदीदा औरत” शब्द सुना तो उसके दिल में एक चुभन का अहसास हुआ , उसे पृथ्वी की याद आयी। अवनि ने महसूस किया कि अनजाने में या यू कहे जान बूझकर उसने बहुत बड़ी गलती कर दी। जिस पृथ्वी को वह अब तक खुद से दूर कर रही थी वो पृथ्वी ही उसका असली जीवनसाथी था। पृथ्वी उसके सामने था और वह फिर भी उसे नहीं रोक पायी। अवनि की आँखों में आँसू भर आये जो किसी भी वक्त बाहर आने को बेताब थे।
सिद्धार्थ ने अपना हाथ अवनि की तरफ बढ़ाया और कहा,”चले अवनि ?”
अवनि ने काँपते हाथ से सिद्धार्थ का हाथ थामा और सिद्धार्थ उसे लेकर कमरे से बाहर निकल गया। अवनि का हाथ थामे सिद्धार्थ सीढ़ियों से नीचे चला आया , हॉल से होते हुए घर से बाहर आया और लॉन में बने मंडप की तरफ बढ़ने लगा। उसके साथ चलती अवनि की आँखों के सामने आ रहा था बस पृथ्वी का चेहरा और कानो में गूंज रहे थे पृथ्वी के कहे शब्द ,, चलते चलते अवनि रुकी और अपनी आँखे मूँद ली , उसे पृथ्वी का हँसता मुस्कुराता चेहरा नजर आया। अवनि के अचानक रुक जाने से सिद्धार्थ भी रुका और उसकी तरफ देखा।
अवनि ने अपनी आँखे खोली और ख़ामोशी से सामने बने मंडप को देखती रही। सभी उन दोनों के आने का इंतजार कर रहे थे और वो दोनों मंडप से कुछ दूर खड़े थे। सिद्धार्थ ने अवनि को देखा और जैसे ही अवनि ने नम आँखों से सिद्धार्थ को देखा सिद्धार्थ ने अवनि का हाथ छोड़ दिया। अवनि कुछ समझ नहीं पायी वह बस एकटक सिद्धार्थ को देखती रही अगले ही पल सिद्धार्थ ने अवनि का हाथ फिर थामा और उसे लेकर घर की तरफ चला गया। सब हैरानी से उन दोनों को जाते हुए देखते रहे।
सिद्धार्थ अवनि को लेकर नीचे गेस्ट रूम में लेकर आया और कमरे का दरवाजा बंद कर दिया। अवनि ने सिद्धार्थ को देखा तो सिद्धार्थ ने अवनि से सोफे पर बैठने को कहा और खुद हाथ बांधकर साइड में खड़े होकर अवनि को देखने लगा। अवनि अब भी खामोश थी। सिद्धार्थ ने टेबल पर रखा पानी का गिलास उठाया और अवनि की तरफ बढा दिया। अवनि ने पानी पीया और गिलास वापस रख दिया तो सिद्धार्थ ने कहा,”ये तुम क्या करने जा रही थी अवनि ? मैं जानता हूँ तुम मुझसे प्यार नहीं करती न कभी तुम्हे मुझसे कभी प्यार होगा फिर भी तुम मुझसे शादी करने जा रही थी।
मैं नहीं जानता अवनि वो क्या वजह है जिसके लिए तुमने मुझसे शादी करने के लिए हाँ कहा लेकिन जरा सोचो अवनि क्या ये करके तुम खुश हो ? मैं पिछले एक महीने से देख रहा हूँ अवनि तुम खुश नहीं हो बस सबके सामने खुश रहने का नाटक कर रही हो। कुछ देर बाद हमारी शादी है उसके बाद तुम हमेशा के लिए मेरे साथ मेरे घर में रहोगी , इस झूठी मुस्कान और दिखावे की ख़ुशी के साथ और मैं ये नहीं चाहता अवनि,,,,,,,,,
मुझसे शादी करके मेरे साथ तुम सिर्फ ज़िंदा लाश बनकर रहोगी पर पर उस से शादी करोगी तो मुझे यकीन है खुश रहोगी , वो तुम्हारी आँखो में कभी आँसू नहीं आने देगा और तुम्हे सम्हालकर रखेगा,,,,,,,,,,,!!!”
सिद्धार्थ इतना कहकर चुप हो गया तो अवनि नम आँखों से उसे देखने लगी। सिद्धार्थ ने अवनि की आँखों में आँसू देखे तो उसके सामने घुटनो पर आ बैठा और कहने लगा,”हाँ अवनि तुम पृथ्वी से शादी कर लो , तुम्हारी बेस्ट चॉइस मैं नहीं पृथ्वी है,,,,,,,,,,
मैंने हमेशा तुम्हे अपनी जिंदगी में चाहा क्योकि तुम मेरा लकी चार्म थी और उसी चाहत को मैंने प्यार का नाम दे दिया लेकिन पृथ्वी , उसने तो तुम्हारी ख़ुशी के लिए अपना ही दिल तोड़ दिया,,,,,,,,,,सही कहा था उसने तुम उसकी “पसंदीदा औरत” हो और ये उसकी आँखों में दिखता है अवनि,,,,,,,,,देर हो उस से पहले जाओ रोक लो उसे,,,,,,,,तुम दोनों सिर्फ एक दूसरे के लिए बने हो , तुम्हारे बीच किसी भी सिद्धार्थ को आने की इजाजत नहीं है”
सिद्धार्थ के मुँह से ऐसी बातें सुनकर अवनि ने अपना चेहरा अपने हाथो में छुपाया और फूट फूट कर रोने लगी सिद्धार्थ ने अवनि के हाथो को थामा और कहा,”इसके बाद शायद तुम और पृथ्वी मुझे माफ़ कर दो”
आज पहली बार अवनि को सिद्धार्थ में इंसानियत नजर आ रही थी। सिद्धार्थ सच में बदल चुका था और इसका सबूत था ये फैसला कि उसने अवनि से शादी ना करके उसे पृथ्वी के पास जाने को कहा। अवनि उठी और सिद्धार्थ के गले लगकर कहा,”थैंक्यू,,,,,,,,,,थैंक्यू सो मच”
सिद्धार्थ ने अवनि का सर सहलाया और नम आँखों के साथ कहा,”थैंक्स टू यू अवनि मुझे प्यार का सही मतलब समझाने के लिए,,,,,,,,अब चलो”
सिद्धार्थ अवनि को लेकर कमरे से बाहर आया और फिर गाड़ी में बैठाकर वहा से निकल गया।
एक बार फिर अवनि अपने मंडप में आने से पहले ही जा चुकी थी और उसकी शादी नहीं हो पायी। कौशल चाचा और मयंक चाचा ने देखा तो अपना सर पकड़कर बैठ गए लेकिन दीपिका मंद मंद मुस्कुरा रही थी।
उदयपुर एयरपोर्ट पर लाइन के सबसे आखिर में खड़ा पृथ्वी अपना बोर्डिंग पास लिए खड़ा था। वह उदास था और उसके पैरों में जान नहीं थी। सिद्धार्थ ने अवनि को एयरपोर्ट के बाहर छोड़ा और वापस चला गया आखिर उसे अवनि के घर जाकर सब सम्हालना भी तो था और फिर कोई बेवकूफ ही होगा जो अपनी दुल्हन को किसी और के पास जाते देखना चाहेगा।
पृथ्वी वापस मुंबई जा रहा था हमेशा हमेशा के लिए तभी उसके कानों में अवनि की आवाज पड़ी,”पृथ्वी”
पृथ्वी ने पलटकर देखा तो उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ , सामने से अवनि हरे रंग के शादी के जोड़े में दौड़ते हुए उसकी तरफ आ रही थी। पृथ्वी वही खड़े होकर हैरानी से अवनि को देखने लगा। अवनि उसके सामने आकर रुकी।
अवनि हांफ रही थी उसने अपनी सांसो को सामान्य किया तो पृथ्वी ने कहा,”मैडम जी,,,,,,,,!!!”
अवनि ने पृथ्वी को देखा और कहा,”पृथ्वी ! मुझसे शादी करोगे ?”
पृथ्वी ने सुना तो ख़ुशी से उसका मुँह खुला का खुला रह गया उसने अपना हाथ अपने मुँह पर रखा और हामी में गर्दन हिला दी। अवनि पृथ्वी के गले आ लगी और एक बार फिर हमारे पृथ्वी बाबू की धड़कनो ने उनका साथ छोड़ दिया। उसने काँपते हाथो से अवनि को अपनी बाँहो में समेट लिया और कसकर उसे गले लगा लिया। दोनों की आँखों में आँसू थे लेकिन ख़ुशी के आँसू,,,,,,,,,,,!!
एयरपोर्ट पर खड़े सभी लोग पृथ्वी और अवनि को देख रहे थे लेकिन उन्हें न किसी का डर था ना किसी की परवाह वे बस एक दूसरे को गले लगाए खड़े रहे। पृथ्वी जिस फ्लाइट से जाने वाला था वो जा चुकी थी लेकिन पृथ्वी को फर्क नहीं पड़ा उसे अवनि जो मिल चुकी थी।
अवनि पृथ्वी से दूर हटी और आँखों में आँसू भरकर कहा,”और अगर मैं नहीं आती तो ?”
पृथ्वी मुस्कुराया और कहा,थे थे “थे राजस्थान रा धोरा सा , आणि मी मुंबईचा पाहुस आहे” हमे तो एक दिन मिलना ही था मैडम जी क्योकि हमारी कहानी खुद “महादेव” जो लिख रहे थे”
अवनि ने सुना तो एक बार फिर पृथ्वी के गले आ लगी और पृथ्वी ने मुस्कुरा कर अवनि के माथे को अपने होंठो से छू लिया क्योकि उसके गले लगे अवनि बस उसके सीने तक आ रही थी।
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!! समाप्त !!
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संजना किरोड़ीवाल
