Pasandida Aurat – 109
सुख विलास भवन , उदयपुर
सुबह जब अवनि नीचे नहीं आयी तो सीमा चाची उसे बुलाने ऊपर चली आयी। सीमा चाची ने जब अवनि को फर्श पर बैठे सोते देखा तो उसके पास आयी और उसका गाल छूकर प्यार से कहा,”अवनि ! अवनि बेटा तुम यहाँ क्यों सो रही हो ?”
सीमा की आवाज से अवनि की नींद खुली उसने देखा रात में वह रोते रोते यही सो गयी थी। रोने की वजह से उसकी आँखे दर्द कर रही थी , उसकी सूजी हुई आँखे देखकर सीमा चाची ने कहा,”तुम रो रही थी क्या अवनि ? देखो बेटा अगर कोई बात है तो मुझसे कहो ऐसे अकेले परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है”
“नहीं चाचीजी ऐसी कोई बात नहीं है वो बस माँ-पापा की याद आ गयी थी”,अवनि ने उदास होकर कहा
सीमा ने सुना तो अवनि को अपने सीने से लगाते हुए कहा,”भाईसाहब और भाभी की जगह में हम में से कोई नहीं ले सकता अवनि लेकिन हम सब पूरी कोशिश करेंगे तुम्हारी शादी में किसी तरह की कोई कमी ना आये। चलो उठो और तैयार हो जाओ आज हमे शादी की खरीदारी करने जरा बाहर जाना है,,,,,,,,मैं नाश्ता लगवाती हूँ जल्दी आना”
“हम्म्म्म”,अवनि ने कहा और सीमा कमरे से बाहर चली गयी।
अवनि उठी और अपना फोन देखा पृथ्वी का कोई फोन या मैसेज नहीं था ये देखकर अवनि उदास हो गयी। पृथ्वी को अपनी शादी के बारे में बताकर अवनि ने सही किया या गलत ये तो वह नहीं जानती थी लेकिन ऐसा करके उसने पृथ्वी के दर्द को और बढ़ा जरूर दिया था। अवनि कबर्ड के सामने आयी और कपडे लेकर नहाने चली गयी। नहाकर अवनि ने बाल बनाये , ललाट पर छोटी सी काली बिंदी लगाई और दुपट्टा गले में डाल लिया तभी उसकी नजर अपने कानो पर पड़ी जो कि सुने थे। अवनि ने ड्रेसिंग का ड्रावर खोला तो नजर उसमे रखे झुमको पर पड़ी।
अवनि ने उन्हें उठाकर देखा तो आँखों में नमी तैर गयी ये वही झुमके थे जो सिरोही में पृथ्वी ने अवनि के लिए खरीदे थे और साथ ही अपने हाथो से उसे पहनाये भी थे। अवनि के मन में एक टीस उठी और उसने झुमके वापस ड्रॉवर में रखने के लिए हाथ बढ़ा दिया लेकिन रुक गयी और उसके मन से आवाज आयी “और कितना खुद से दूर करोगी उसे अवनि , कल रात तुम उसका दिल एक बार फिर तोड़ चुकी हो और इसके बाद शायद ही वो अब तुम्हारी जिंदगी में वापस आएगा पर क्या उसके साथ अब तुम उसकी यादों से भी दूरी बना लोगी ?
ये झुमके तुम सिर्फ इसलिए नहीं पहन रही क्योकि इन्हे पृथ्वी ने तुम्हारे लिए खरीदा था ,, तुम्हे इन्हे पहनना चाहिए , उसकी जो थोड़ी बहुत यादे तुम्हारे पास है उन्हें सम्हालकर रखना चाहिए ताकि तुम्हारे लिए आगे का सफर आसान हो सके। पृथ्वी तुम्हारे साथ नहीं है पर उसकी दी हुई यादो के साथ तुम उसके होने के अहसास को महसूस कर सकती हो,,,,,,,,,,,,,झुमके पहन लो अवनि , पृथ्वी के लिए ही सही”
अवनि ने अपने मन की बात सुनी और झुमको को अपने कानो में पहन लिया जिसने उसकी खूबसूरती को और बढ़ा दिया। अवनि ने अपना फोन उठाया और कमरे से बाहर चली आयी। नीचे आकर अवनि ने सबके साथ नाश्ता किया और इसके बाद वह सीमा चाची के साथ बाजार के लिए निकल गयी। अवनि का मन बहुत उदास था लेकिन घरवालों की ख़ुशी के लिए वह उनके सामने हसने मुस्कुराने का नाटक करती रही और ये नाटक उसे अब जिंदगीभर करना था।
पनवेल , मुंबई
देर रात सोया पृथ्वी सुबह देर तक नकुल के घर में सोता रहा। नकुल उठ चुका था लेकिन उसने जान बुझकर पृथ्वी को नहीं उठाया ताकि पृथ्वी को फिर से रात वाली बातें याद ना आये। नकुल अपने कमरे में था और कुछ काम कर रहा था तभी उसका फोन बजा। नकुल ने अपना फोन देखा तो स्क्रीन पर रवि जी का नाम देखकर परेशान हो गया। उसने फोन उठाया तो दूसरी तरफ से आवाज आयी,”हेलो नकुल ! पृथ्वी तुम्हारे साथ है क्या ?”
“अह्ह्ह्हह हाँ अंकल पृथ्वी मेरे घर पर ही है , वो कल रात हम बाहर गए थे लेट हो गए तो मैंने इसे अपने घर पर ही रोक लिया”,नकुल ने झूठ कह दिया
“ओह्ह्ह अच्छा , वैसे पृथ्वी का फोन कहा है सुबह से आउट ऑफ़ रीच आ रहा है”,रवि जी ने पूछा
नकुल ने सुना तो उसे याद आया पृथ्वी का फोन तो कल रात ही गिरकर बंद हो गया था और पृथ्वी ने उसे सोसायटी के फुटपाथ पर ही छोड़ दिया था उसने कहा,”जी अंकल वो उसका फोन गिर गया था वही दुकान पर देने तो बाहर गए थे ,, अभी वो सो रहा है जैसे ही उठेगा मैं उसे आपसे बात करने को कह दूंगा”
“बात नहीं उसे कहना सीधा घर आये उसकी आई परेशान हो रही है”,रवि जी ने कहा
“जी अंकल मैं कह दूंगा”,नकुल ने कहा
रवि जी ने फोन काट दिया तो नकुल ने राहत की साँस ली और खुद में ही बड़बड़ाया,”हाह ! अंकल को तो मैंने झूठ कह दिया लेकिन अब पृथ्वी को कैसे समझाऊंगा ? आँखे खुलते ही उसे फिर उसी सच्चाई का सामना करना होगा जिसने बीती रात उसका दिल तोड़ दिया था”
नकुल ये सब सोच ही रहा था कि तभी पृथ्वी की आँख खुली उसने जब खुद को अनजान जगह पर पाया तो हड़बड़ाकर उठा और देखा कि वह नकुल के घर में उसके कमरे में है।
पृथ्वी को जगा देखकर नकुल उसके पास आया और कहा,”तुम ठीक हो ?”
“मैं यहाँ कैसे आया ?”,पृथ्वी ने हैरानी से कहा क्योकि उसे अभी ठीक से कुछ याद नहीं आया वह अभी भी नींद में था।
“क्या तुम्हे सच में कुछ याद नहीं है ?”,नकुल ने परेशानी भरे स्वर में पूछा और ये सुनते ही पृथ्वी के चेहरे पर उदासी के भाव तैरने लगे और उसने कहा,”बस भूलने की कोशिश कर रहा हु”
पृथ्वी की बात सुनकर नकुल ने उसकी तरफ देखा तो पाया कि ये कहते हुए पृथ्वी की आँखों में नमी उभर आयी है। उसने पृथ्वी के कंधे पर अपना हाथ रखा और कहा,”जो कुछ हुआ उसे भूल जाने में ही भलाई है पृथ्वी,,,,,,तुम्हारी किस्मत में उसका साथ नहीं लिखा”
पृथ्वी ने सुना तो उसे अपने सीने में चुभन का अहसास हुआ लेकिन उसने कुछ कहा नहीं। नकुल की मम्मी दोनों के लिए चाय ले आयी और पृथ्वी से मिलकर वापस चली गयी। चाय पीते हुए नकुल ने पृथ्वी को रवि जी के फोन के बारे में बताया।
नकुल के घर से निकलकर पृथ्वी सीधा सोसायटी में उसी जगह आया जहा बीती रात वह नकुल के साथ था और उसकी अवनि से बात हुई थी। पृथ्वी ने देखा उसका फोन फुटपाथ के पास पड़ी बेंच के पास पड़ा है तो उसने उसे उठाया और देखा फोन का स्क्रीन टूट चुका था और फोन बंद था। फ़ोन देखते ही पृथ्वी को अवनि के कहे आखरी शब्द याद आये “मैंने तुम्हे ये बताने के लिए फोन किया है कि अगले महीने मेरी शादी है , तुम मेरी शादी में आओगे ना पृथ्वी ?”
ये बात याद आते ही पृथ्वी को अपने सीने में हल्का सा दर्द और गले में चुभन का अहसास हुआ , उसने एक गहरी साँस ली और आगे बढ़ गया। चलते चलते उसने अपना फोन सोसायटी में रखे डस्टबिन में फेंक दिया
पृथ्वी घर आया उसे उदास देखकर लता उसके पास आयी और कहा,”क्या हुआ तुम्हे , तुम्हारा चेहरे इतना बुझा बुझा क्यों है ?”
“कुछ नहीं आई बस थोड़ी थकान है”,पृथ्वी ने झूठ कह दिया
लता ने पृथ्वी का ललाट और गाल छूकर देखा तो पाया कि पृथ्वी को तेज बुखार है उन्होंने उसकी कलाई पकड़ी और उसे सोफे की तरफ लाते हुए कहा,”तुम्हे तो बुखार है , पक्का तुम ठंड में बाहर घूमे होंगे इसलिए ठंड लग गयी। बैठो यहाँ मैं तुम्हारे लिए अदरक तुलसी वाली चाय लेकर आती हूँ और फिर दवा देती हूँ”
पृथ्वी सोफे पर आ बैठा। लक्षित ने देखा तो पृथ्वी के पास आया और कहा,”दादा अगले महीने मेरे कॉलेज में क्रिकेट टूनामेंट है और उसमे बाहर के लोग भी पार्टिसिपेट कर सकते है तो क्या मैं उसमे आपका भी नाम दे दू ? आप मेरी टीम से खेलना”
लक्षित के मुँह से अगले महीने का सुनकर पृथ्वी को एक बार फिर अवनि की कही बात याद आ गयी “मैंने तुम्हे ये बताने के लिए फोन किया है कि अगले महीने मेरी शादी है , तुम मेरी शादी में आओगे ना पृथ्वी ?”
पृथ्वी को खोया हुआ देखकर लक्षित ने कहा,”दादा , आप सुन रहे है ना”
“हाँ , हा मैं सुन रहा हूँ,,,,,जो तुम्हे ठीक लगे”,पृथ्वी की तंद्रा टूटी और उसने कहा
“थैंक्यू दादा ! मैं अभी अपने दोस्तों को बोलकर आया”,कहकर लक्षित वहा से चला गया। सामने बैठे रवि जी ने पृथ्वी को देखा तो आज पृथ्वी उन्हें काफी निराश और हताश नजर आया।
“कल रात तुम कहा थे पृथ्वी ? अपने फ्लेट पर भी नहीं थे और तुम्हारा फोन भी बंद आ रहा था”,रवि जी ने पूछा
पृथ्वी कुछ कहता इस से पहले लता दोनों के लिए चाय ले आयी और टेबल पर रखते हुए कहा,”बस बहुत हो गया , बहुत रह लिए तुम अकेले अब से तुम यही रहोगे इसी घर में हम सबके साथ,,,,,,,तुम्हे फ्लेट में सिर्फ सोने जाने की कोई जरूरत नहीं है। हालत देखो अपनी कितने कमजोर लग रहे हो”
“नहीं मैं ठीक हूँ”,पृथ्वी ने कहा
“तुम्हारी आई सही कह रही है , ये घर भी तुम्हारा अपना है पृथ्वी तुम यहाँ सबके साथ रह सकते हो वैसे भी वो घर शादी के बाद इस्तेमाल करने के लिए है”,रवि जी ने लता की बात पर सहमति जताते हुए कहा
पृथ्वी ने सुना लेकिन कहा कुछ नहीं उसके दिमाग में तो बस अवनि और उसका हमेशा के लिए चले जाना चल रहा था। लता ने चाय का कप पृथ्वी की तरफ बढ़ाया तो पृथ्वी ने कप लेकर कहा,”आई ! अगर मैं आपसे कुछ माँगू तो क्या आप मुझे देंगी ?”
“हाँ कहो ना”,लता ने प्यार से कहा
पृथ्वी की आँखों में नमी उभर आयी और उसने बुझे स्वर में कहा,”क्या आप मेरे लिए आप अवनि को स्वीकार कर सकती है ? मैंने महसूस किया है कि मैं उसके बिना नहीं रह सकता , सिर्फ मेरे लिए क्या आप उसे अपना सकती है प्लीज”
लता ने सुना तो उसके चेहरे के भाव बदल गए और उन्होंने कठोरता से कहा,”तुम अभी भी उस लड़की के चक्कर में हो पृथ्वी , मैं पहले भी कह चुकी हूँ कि वो लड़की इस घर में नहीं आएगी फिर तुम क्यों ये सब कह रहे हो ? तुम्हारी ख़ुशी के लिए मैं तुम्हे उस लड़की से शादी करके की इजाजत दे भी दू लेकिन मैं उसे कभी अपनी बहु के रूप स्वीकार नहीं करुँगी,,,,,,,,,,ना ही वो कभी इस घर में आएगी”
लता की बात सुनकर पृथ्वी का दिल टूट गया। अवनि को लेकर लता के मन में नफरत अभी भी कायम थी और उनकी मंजूरी के बिना अवनि कभी इस घर में आएगी नहीं ये बात पृथ्वी जानता था। वह ख़ामोशी से नम आँखे लिए लता को देखता रहा तो लता उठी और कहा,”तुम्हारी चाय ठंडी हो रही है”
लता वहा से चली गयी और रवि जी ख़ामोशी से पृथ्वी को देखते रहे , आँसू पृथ्वी की आँखों से बाहर आने को बेताब थे लेकिन पृथ्वी ने उन्हें आँखों में ही रोक लिया और मन मारकर चाय पीने लगा।
रवि जी पृथ्वी का सच पहले ही जानते थे इसलिए पृथ्वी ने उनसे कुछ नहीं कहा और चुपचाप उठकर अपने कमरे में चला आया। पृथ्वी को बुखार था , लता ने उसे नाश्ता करवाया और दवा देकर आराम करने को कहा। दवा के असर से पृथ्वी को नींद आ गयी और वह दोपहर तक सोता रहा।
अवनि अपनी शादी की तैयारियों में बिजी हो गयी या यू कहो उसने जान बुझकर खुद को बिजी कर लिया और इधर पृथ्वी हफ्तेभर बीमार रहा और फिर धीरे धीरे ठीक हुआ और ऑफिस जाने लगा। अवनि का दोबारा उसे कोई फोन नहीं आया ना उसने अवनि को फोन करने की कोशिश की ,, वह अब अवनि को और तकलीफ देना नहीं चाहता था जो हो रहा था उसे पृथ्वी ने अपनी किस्मत समझ लिया और सबसे किनारा कर लिया। उसने फ्लेट में जाना बंद कर दिया और रवि जी लता के साथ उनके घर पर ही रहने लगा। उसे अब कुछ अच्छा नहीं लग रहा था वह बस जी रहा था।
देखते ही देखते तीन हफ्ते गुजर गए सुरभि अवनि से ऐसा नाराज हुई कि एक बार भी उस से आकर नहीं मिली और ना ही उस से बात की , उसने पृथ्वी को कई मैसेज किये कॉल किया लेकिन पृथ्वी का कॉल कभी लगा ही नहीं ना ही कभी उसका कोई जवाब आया। अवनि के इस फैसले से हर कोई दुखी था , खुद अवनि भी बस कोई खुश था तो वह था सिद्धार्थ , सिद्धार्थ की जिंदगी में अवनि हमेशा के लिए आने वाली थी और पहले से कई ज्यादा बदलाव सिद्धार्थ में देखने लो मिले जिन्हे अवनि ने भी महसूस किया और हर गुजरने वाले दिन के साथ सिद्धार्थ खुद को अवनि के लायक बना रहा था।
एक रात पृथ्वी खाना खाने के बाद सोसायटी के फुटपाथ पर टहलने चला आया। ऐसा कोई दिन नहीं गया जब उसने अवनि के बारे में ना सोचा हो , उसे याद करके रोया न हो और उसके साथ बिताये पलों को महसूस ना किया हो। चलते चलते पृथ्वी बेंच पर आ बैठा। कुछ देर बाद नकुल भी वहा चला आया और बेंच के दूसरे किनारे पर आ बैठा। पृथ्वी ख़ामोशी से सामने देख रहा था। उसके चेहरे पर उदासी थी और आँखों में खालीपन था जिसे नकुल साफ देख पा रहा था।
“सो ?”,नकुल ने अपने और पृथ्वी के बीच की ख़ामोशी तोड़ते हुए कहा
“क्या ?”,पृथ्वी ने कहा
“तो अब आगे क्या सोचा है तुमने ? क्योकि मैं तो तुम्हे पूरी जिंदगी ऐसे नहीं देख पाउँगा और मैं तो क्या वो भी नहीं देख पायेगी”,नकुल ने पृथ्वी की तरफ देखकर कहा तो पृथ्वी सामने देखने लगा और कहा,”मैं ठीक हूँ”
“सिर्फ बाहर से तुम्हारे अंदर जो तूफ़ान है उसे सिर्फ मैं देख पा रहा हूँ,,,,,,,तुम खुद को किस बात की सजा दे रहे हो पृथ्वी ? जब वो सब भूलकर आगे बढ़ सकती है तो तुम्हे भी बढ़ जाना चाहिए और इसी में तुम्हारी भलाई है”,नकुल ने इस बार थोड़ा कठोर होकर कहा
पृथ्वी ने नकुल की तरफ देखा और कहा,”वो आगे बढ़ गयी क्योकि वो अपनी जगह सही है यार , उसे कभी मुझसे प्यार हुआ ही नहीं मैं ही अब तक अपना प्यार जबरदस्ती उस पर थोपता रहा , प्यार तो उसने सिद्धार्थ से किया और आज वो उसके साथ भी है , बहुत जल्द उस से शादी भी कर लेगी।
मैंने अपनी जिद को प्यार का नाम दे दिया और उसके पीछे भागता रहा लेकिन सिर्फ मैं जानता हूँ कि ये जिद नहीं है , मैं जिंदगीभर उसका इंतजार करते हुए उस से प्यार कर सकता हूँ”
“तो क्या तुम एक आखरी कोशिश भी नहीं करोगे ?”,नकुल ने कहा
“मैं कितनी भी कोशिश करू मेरे हिस्से में सिर्फ हार आएगी”,पृथ्वी ने उदास होकर कहा
“तुम कब से हार मानने लगे पृथ्वी उपाध्याय ?”,नकुल ने कहा
पृथ्वी ने एक ठंडी आह भरी और कहा,”मैंने अपनी अब तक की जिंदगी में सिर्फ़ जीत देखी है , हारना नहीं सीखा। उसके लिए मैं घरवालों से लड़ रहा था , बाहरवालों से लड़ रहा था , रिश्तेदारों से लड़ रहा था , समाज से , दोस्तों से , महादेव से , यहाँ तक कि किस्मत से भी लड़ रहा था और इन सबसे लड़ते हुए मैंने देखा कि वो खुद मेरे खिलाफ खड़ी थी ‘और मुझे हारना पड़ा’ ”
पृथ्वी की बात सुनकर नकुल उदास हो गया। सही तो कह रहा था पृथ्वी पिछले डेढ़ साल से वह अवनि के लिए सबसे लड़ ही तो रहा था लेकिन बदले में उसे क्या मिला , जिंदगीभर का दर्द। नकुल कुछ देर खामोश रहा और फिर कहा,”आई ऍम सॉरी यार मैं तेरा दिल दुखाना नहीं चाहता था लेकिन मैं तुझे ऐसे भी नहीं देखना चाहता”
पृथ्वी धीरे से मुस्कुराया और कहा,”मैं ठीक हूँ यार और खुश हु कि अवनि अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गयी है।
उसके प्यार से बढ़कर मेरे लिए उसकी ख़ुशी है और अगर उसकी ख़ुशी सिद्धार्थ में है तो मैं उसे कभी नहीं रोकूंगा , बल्कि ख़ुशी ख़ुशी उसे जाने दूंगा,,,,,,,,,हाँ थोड़ी तकलीफ होगी उसे किसी और का होता देखकर पर धीरे धीरे आदत हो जाएगी इन सबकी , बस मैं कभी उसे भूल नहीं पाऊंगा यार”
कहते कहते पृथ्वी की आँखों में फिर नमी तैर गयी।
( क्या सिद्धार्थ से शादी करके अवनि कर रही है कोई भूल ? क्या लता कभी समझ पायेगी अवनि के लिए पृथ्वी का प्यार ? क्या पृथ्वी भूल पायेगा अवनि को या रह जाएगी अवनि जिंदगीभर के लिए उसकी “पसंदीदा औरत” बनकर ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
Pasandida Aurat – 109 Pasandida Aurat – 109 Pasandida Aurat – 109 Pasandida Aurat – 109 Pasandida Aurat – 109 Pasandida Aurat – 109 Pasandida Aurat – 109 Pasandida Aurat – 109 Pasandida Aurat – 109 Pasandida Aurat – 109 Pasandida Aurat – 109 Pasandida Aurat – 109 Pasandida Aurat – 109 Pasandida Aurat – 109 Pasandida Aurat – 109 Pasandida Aurat – 109 Pasandida Aurat – 109 Pasandida Aurat – 109 Pasandida Aurat – 109 Pasandida Aurat – 109 Pasandida Aurat – 109
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संजना किरोड़ीवाल
