Manmarjiyan Season 5 – 41
मंगेश खुद बिंदिया और लवली के रिश्ते के लिए मिश्रा जी के घर आया था ये बात जैसे ही मिश्राइन ने सुनी हैरानी से मिश्रा जी की तरफ देखा मिश्रा जी ने पलकें झपकाकर सहमति जताई। मिश्राइन की ख़ुशी का तो कोई ठिकाना ही नहीं रहा , उन्होंने ख़ुशी से भरकर मंगेश से कहा,”जे तो बहुते ख़ुशी की बात है भाईसाहब ! बिंदिया और लवली एक दूसरे को पसंद करते है , आप उनकी शादी के लिए तैयार है जे से बड़ी ख़ुशी की बात और का हो सकती है ? अरे आप खड़े काहे है बैठिये ना , हमहू अंदर जाकर आप सबके लिए जलपान का इंतजाम करते है”
मिश्राइन की बात सुनकर मंगेश के दिल को राहत महसूस हुई , चकिया से वह इस डर के साथ ही आया था कि कही मिश्रा जी बिंदिया को अपनाने से मना ना कर दे लेकिन मिश्रा जी के हाव भाव और मिश्राइन की बातो ने उसके इस डर को भी दूर कर दिया। मंगेश सोफे पर आ बैठा और मिश्रा जी से अपने किये की माफ़ी मांगने लगा।
मिश्रा जी ने भी पुरानी बीती बाते भूलकर मंगेश को माफ़ कर दिया और उसे गले लगाया। मिश्राइन ने सबके चाय नाश्ते का इंतजाम किया। बिंदिया वेदी के कमरे में परेशान सी यहाँ वहा घूम रही थी शगुन ने देखा तो उसके पास आयी और कहा,”क्या हुआ तुम इतनी परेशान क्यों हो ?”
“बाहर बापू आये है , उन्हें देखकर लवली के पिताजी ना जाने का प्रतिक्रिया देही है। हमे बहुते डर लग रहा है शगुन , अगर बापू हमे जबरदस्ती हिया से ले गए तो , तो हम सच बताय रहे है जहर खाकर या फिर कोनो नदी मा कूदकर अपनी जान दे देंगे”,बिंदिया ने कहा और रो पड़ी
“पागल हो गयी हो , कैसी बाते कर रही हो ? तुम्हारे पिताजी यहाँ क्यों आये है ये जाने बिना ही तुमने इतना सब सोच लिया ,, पहले पता तो चले वो यहाँ क्यों आये है ?”,शगुन ने बिंदिया को समझाते हुए कहा
“उह्ह्ह हिया बिंदिया को लेने आये है”,मिश्राइन ने कमरे में आते हुए कहा
बिंदिया ने जैसे ही सुना उसके चेहरे पर चिंता के भाव उभर आये और उसने परेशानी भरे स्वर में शगुन से कहा,”देखा शगुन ! हमने कहा ना वो यहाँ हमे लेने आये है , वो हमे यहाँ से ले जायेंगे और फिर उस लल्लन के रिश्तेदार से हमायी सादी करा देंगे,,,,,,,,हमे नाही करनी है उह्ह्ह ऋतिकवा से सादी,,,,,,,,,,!!!!”
मिश्राइन ने सुना तो मुस्कुराते हुए बिंदिया के पास आयी और बड़े ही प्यार से कहा,”हाँ तो मत करना ऋतिकवा से सादी , पर हमाये लवली से तो करोगी ना ?”
मिश्राइन के मुँह से लवली का नाम सुनकर बिंदिया चौंकी और उनकी तरफ देखा तो मिश्राइन ने मुस्कुरा कर कहा,”तुम्हाये पिताजी हिया तुम्हाये और लवली के रिश्ते की बात करने आये है , तुम्हे जबरदस्ती ले जाने नही”
बिंदिया ने सुना तो उसे अपने कानों पर यकीन ही नहीं हुआ , वह हैरानी से मिश्राइन को देखती रही तो मिश्राइन ने उसके गाल को छूकर कहा,”हाँ बिटिया हमहू सही कह रहे है , तुम्हाये पिताजी बाहिर है अभी उनसे ही मिलकर आ रहे है हम,,,,,,उनकी सारी गलतफहमी दूर हो गयी और उह्ह तुम्हरे और लवली के रिश्ते के लिए मान गए है,,,,,,,,,,हम बहुत खुश है बिटिया , बहुत खुश है”
बिंदिया की आँखों में आँसू भर आये वह मिश्राइन के गले आ लगी , शगुन ने सुना तो वह भी खुश हो गयी वह बिंदिया और मिश्राइन के पास चली आयी। मिश्राइन बिनिद्या को लेकर बाहर चली गयी और शगुन बिस्तर पर आ बैठी उसे तो आदर्श फूफा की चिंता हो रही थी। गुड्डू अभी तक घर नहीं आया था लवली भी आदर्श फूफा को लेकर हॉस्पिटल पहुंचा होगा कि नहीं यही बात शगुन को परेशान कर रही थी।
उसने गुड्डू को फोन लगाया लेकिन गुड्डू का फोन तो तब लगता जब वह उसके पास होता , गुड्डू ने तो अपने हाथो ही अपने फोन को तोड़ दिया था। परेशान होकर शगुन ने अपना फोन साइड में रखा और भगवान् से सब ठीक होने की प्रार्थना करने लगी।
कानपूर सरकारी अस्पताल
“आह्ह्ह्हह्ह , आईइइइइइइइ , हे माआआआआ , गुड्डूउउउउउउउ,,,,,,,,,,,,,,!!!”,इमरजेंसी वार्ड के बिस्तर पर बैठे आदर्श फूफा की आवाज पुरे अस्पताल में गूँज रही थी।
डॉक्टर के साथ खड़ी नर्स ने तो अपने दोनों हाथ अपने कानों पर ही रख लिए , पास ही खड़े लवली ने भी अपना सर पकड़ लिया। गुड्डू ने तो अपने कानों में उंगलिया डाल ली बस एक डॉक्टर था जो हाथ में इंजेक्शन लिए शांत खड़ा था क्योकि उसके कानो में स्टेथोस्कोप लगा था जिस से उसे कुछ सुनाई नहीं दिया।
आदर्श फूफा ने देखा डॉक्टर को कुछ फर्क ही नहीं पड़ा तो वे शांत हो गए , गुड्डू , लवली और नर्स ने धीरे से अपने हाथ हटाए और डॉक्टर ने अपना स्टेथोस्कोप कि आदर्श फूफा फिर जोर से चिल्लाये और इस बार तो डॉक्टर के कान के पर्दो में भी झुनझुनी सी होने लगी। उन्होंने एक हाथ से इंजेक्शन को थामा और दूसरे हाथ से खींचकर एक थप्पड़ आदर्श फूफा को लगाया और कहा,”चिल्लाय काहे रहे हो ! बहरे है का हम सब ?”
आदर्श फूफा गाल से हाथ लगाए डॉक्टर को घूरने लगे तो डॉक्टर ने लवली से कहा,”ए सुनो ! हिया आकर जे का हाथ पकड़ो इंजेक्शन लगा देते है,,,,,,चार टाँके आये सर मा तब नाही रोये और अब इंजेक्शन देखकर पगलाय रहे है,,,,,,,,हाथ सीधा करो”
डॉक्टर की फटकार सुनकर आदर्श फूफा ने चुपचाप हाथ पीछे कर दिया।
फूफा को डरते देखकर गुड्डू उनके पास आया और कहा,”अरे का फूफा ! का आप भी एक सुई से डर रहे है , अरे फट से अंदर जाही है और झट से दवा अंदर,,,,,,,,एक ठो काम करो उस तरफ देखो ही नाही हिया देखो हमायी तरफ”
गुड्डू ने कहा तो आदर्श फूफा ने आँखे मीची और गर्दन गुड्डू की तरफ घुमा ली , साथ ही गुड्डू के शर्ट की जेब भी मजबूती से पकड़ ली। जैसे ही सुई आदर्श फूफा के हाथ में गयी , मारे घबराहट के आदर्श फूफा ने गुड्डू की जेब ही फाड़ दी।
गुड्डू ने गुस्से से आदर्श फूफा को देखा तो आदर्श फूफा ने खिंसियाकर कहा,”उह्ह्ह हमहू थोड़ा डर गए थे”
“आपके डर के चक्कर मा हमायी 1600 की बुशर्ट खराब होय गयी”,गुड्डू ने दाँत पीसकर कहा
“सिर्फ तुम्हायी बुशर्ट ही नाही हमायी 150 की बेडशीट भी,,,,,,,,,,,,!!!”,डॉक्टर ने मुँह बनाकर कहा
आदर्श फूफा ने सर झुकाकर देखा तो उन्हें बेडशीट पर कुछ गीला गीला महसूस हुआ और उन्होंने झेंपकर कहा,”और हमाओ पजामा भी”
लवली ने अफ़सोस में सर हिलाया और डॉक्टर की दी पर्ची लेकर वहा से चला गया।
डॉक्टर ने गुड्डू की तरफ देखा और कहा,”3 दिन बाद टाँके खुलवाने ले आना , दवा लिख दी है टाइम पर लेते रहना,,,,,,,वैसे जे चोट कैसे लगी ?”,डॉक्टर ने कहा
गुड्डू कुछ कहता इस से पहले आदर्श फूफा बोल पड़े,”का बताये डाक्टर साहब , हमाये जीजा जो है इह लौंडे के पिताजी उनको हमहू फूटी आँख नाही सुहाते , आज सुबह सुबह अपना सामान लेकर हमहू अपनी फूल सी राजकुमारी के साथ जौनपुर जाय रहे थे कि इह बड़ा सा पत्थर आकर लगा हमाये ललाट,,,,,,,,,,,,,,!!!!”
आदर्श फूफा अपनी राम कहानी सुनाते इस से पहले गुड्डू ने उनका मुँह बंद किया और कहा,”अरे फूफा ! काहे इतना बात कर रहे है ? सर मा टाँके लगे है दर्द होई है बाद मा,,,,,,,,,,,,,!!!”
“नहीं नहीं तुम का कह रहे थे पत्थर आकर लगा तुम्हाये ललाट,,,,,,,का आगे बताओ ?”,डॉक्टर ने आदर्श फूफा की बातो में दिलचस्पी दिखाते हुए पूछा
“हाँ पत्थर आकर लगा हमाये ललाट पर,,,,,,,,,,,,!!!”आदर्श फूफा ने कहा और वे अपनी बात पूरी कर पाते इस से पहले गुड्डू बीच में कूद पड़ा और डॉक्टर के कंधो पर हाथ रखकर उसे वहा से ले जाते हुए कहा,”अरे आप उनकी बात पर ध्यान नाही दयो , सर पर चोट लगने की वजह से थोड़ा बहक गए है उह्ह्ह,,,,,,,,,!!”
“अच्छा अच्छा ठीक है , दवा टाइम पर दे देना जख्म भरने में थोड़ा टाइम लगेगा”,डॉक्टर ने कहा और वहा से चला गया
गुड्डू आदर्श फूफा की तरफ जाने लगा तो नर्स ने गुड्डू के सामने हाथ करके कहा,”150 रुपया”
“काहे ?”,गुड्डू ने नर्स को घूरकर पूछा
नर्स भी कानपूर से थी उसने ऐंठकर कहा,”उह्ह्ह तुम्हाये फूफा बिना रंगो के बेडशीट पर जो पेंटिंग बनाये है ना उसके , चलो जल्दी निकालो हमे और भी काम है”
गुड्डू ने बुरा सा मुँह बनाकर आदर्श फूफा की तरफ देखा जो कि बिस्तर से नीचे उतर रहे थे।
गुड्डू ने अपनी जींस की जेब से 100 का एक नोट निकाला और नर्स की तरफ देखकर कहा,”हमाये पास तो बस जे ही है , 50 के छोले कुलचे खाये रहय हम”
नर्स ने 100 का नोट लिया और बड़बड़ाते हुए चली गयी। आदर्श फूफा गुड्डू के पास आये और कहा,”जाते जाते दलिदर कहकर गयी है उह्ह्ह तुमको,,,,,,,,,,,!!!”
“ऐसा तो कुछो नाही कहा उसने ?”,गुड्डू ने चिढ़कर कहा
“हम सुने न तुमहू सुने नाही ठीक से”,आदर्श फूफा ने गुड्डू से चिपककर कहा तो गुड्डू ने उन्हें दूर किया और कहा,”हमाये से नाही चिपको फूफा , जोन कलाकारी आप बिस्तर पर करके आये है ना पहिले घर जाकर चार बाल्टी पानी से नहाइये ओह्ह्ह के बाद हमसे बात कीजियेगा”
“अरे गुड्डू तुमहू जो समझ रहे हमहू उह्ह्ह नाही किये”,आदर्श फूफा ने गुड्डू के पीछे आते हुए कहा और एमर्जेन्सी से बाहर चले आये।
लवली दवा ले आया और गुड्डू को थमाकर कहा,”तुम फूफा को लेकर घर चलो हमहू तुम्हरी बाइक से आते है”
“हम ऊपर फूफा साथ काहे नाही चल सकते ?”,गुड्डू ने पूछा
“हमको सही सलामत घर पहुंचना है , चलते है”,कहकर लवली वहा से चला गया और गुड्डू उसे देखता ही रह गया। वो बेचारा लवली से किराये के पैसे भी नहीं मांग पाया। आदर्श फूफा गुड्डू के पास आये और कहा,”यार गुड्डू ! एक ठो कप चाय पिला देते तो,,,,,,,,,,,,!!!”
गुड्डू ने झुंझलाकर अपनी जींस की दोनों जेबो को बाहर निकाला जो कि खाली थी और फूफा को दिखाकर कहा,”पईसा दिख रहा है आपको हमरे पास ? साला हम तो जे सोच के परेशान है बिना पैसो के हिया से घर कैसे जायेंगे ?”
“घर जाने मा कौनसा पैसा लगता है ? अरे रिक्शा मा बइठो घर के सामने उतरो अंदर जाकर पैसा लाकर रिक्शा वाले को देइ दयो , हुई गयी परोब्लम सोल्व”,आदर्श फूफा ने कहा
गुड्डू ने सुना तो उसे समझ आया कि आदर्श फूफा की बात में दम तो है। वह उन्हें साथ लेकर अस्पताल से बाहर चला आया और सामने से गुजरते रिक्शा को रोककर उसमे आ बैठा। रास्तेभर गुड्डू ने अपना मुँह अपने शर्ट में छुपाये रखा क्योकि आदर्श फूफा सुलभ शौचालय की तरह बदबू जो मार रहे थे।
गुप्ता जी का घर , कानपूर
गोलू गुस्सा होकर अपने कमरे में चला गया और मंगल फूफा नहाने चले गए तो वही गुप्ता जी एक बार फिर नाश्ता करने के लिए सोफे पर आ बैठे और इंतजार करने लगे। कुछ देर बाद गुप्ताइन हाथ में थाली उठाये गुप्ता जी की तरफ आयी और थाली टेबल पर रखकर कहा,”इहह्ह हमहू स्पेशल आपके लिए बनाये है गोलू के पिताजी,,,,,,,,,पूरा खाइयेगा”
थाली में रखी थी आलू बैंगन की सब्जी , पूड़ी और साथ में हलवा , ये सब देखते ही गुप्ता जी के मुँह में पानी आ गया और उन्होंने प्लेट अपनी तरफ खिसकाकर कहा,”अरे पूरा खाएंगे गुप्ताइन ! तुम्हरे हाथ से बना खाना कबो जूठा छोड़े है का हम ?”
गुप्ता जी ने ख़ुशी ख़ुशी एक निवाला तोड़कर जैसे ही मुँह में रखा उनके कान से धुँआ निकला और आँखों में आँसू , जीभ जल रही थी और दिमाग सुन्न पड़ चुका था , उन्होंने गुप्ताइन की तरफ देखा और कहा,”सब्जी मा मिर्च का पूरा डिब्बा उड़ेल दी हो का गुप्ताइन ? इत्तो कड़वो”
“खाइये चुपचाप,,,,,,,,,,हमायी जबान को लम्बी बोल रहे थे ना अब हमाये हाथो का तीखा स्वाद भी चखिए , खाइये और अगर जूठा छोड़े ना तो जे से डबल खाना हमहू अपने हाथ से खिलाई है आपको”,गुप्ताइन ने कहा और वहा से चली गयी।
गुप्ता जी धर्मसंकट में पड़ गए , अगर खाना खाते है तो हालत खराब और नहीं खाते तो गुप्ताइन का प्रकोप झेलना पडेगा। गुप्ता जी सोच में पड़ गए और अपनी गर्दन दाँयी तरफ घुमाई तभी उनकी नजर नहाकर अंदर आते मंगल फूफा पर पड़ी तो गुप्ता जी मुस्कुरा उठे। मंगल फूफा के रूप में उन्हें बलि का बकरा जो मिल गया था।
“मंगलू ! ज़रा हिया आवा”,गुप्ता जी ने अपनी पूरी ताकत लगाकर शब्दों में मिठास घोलकर कहा
मंगल फूफा रुके और हैरानी से गुप्ता जी की तरफ देखा तो गुप्ता जी ने कहा,”अरे आवा ज़रा,,,,,,,,,,,!!!”
मंगल फूफा ने सुबह ही गुप्ता जी से मार खायी थी और अब तक सबसे मार खाकर काफी थक भी चुके थे इसलिए गुप्ता जी की तरफ आकर चिढ़े हुए स्वर में कहा,”का है ? काहे बुलाय रहे है हमे ?”
“अरे हिया बइठो यार”,कहते हुए गुप्ता जी ने मंगल फूफा का हाथ पकड़ा और उन्हें नीचे बैठाकर कहा,”अरे काहे इत्ता चिड़चिड़ाय रहे हो ? रूपा चली गयी है तो का अब ओह्ह्ह का गुस्सा खुद पर उतरोगे ? कल से लात घुसो के अलावा तुमहू कुछो खाये नाही हो तो सोचा तुमको थोड़ा खाना खिलाय दे पर तुम तो हमहि पर चढ़े जा रहे हो”
“एक नंबर का कमीना,,,,,,,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा ने एकदम से भड़ककर कहा , एक पल को तो गुप्ता जी भी उलझन में पड़ गए और फिर मंगल फूफा को घूरकर कहा,”तो तुमहू हमको कमीना कह रहे हो ?”
“अरे आप नाही ! उह्ह्ह गोलुआ , उह्ह कमीना हमसे कहत रहा कि उसके बाप यानि आप बहुते पत्थर दिल इंसान है आपके सीने मा दिल ही नाही है,,,,,,,,,,,,,पर आप तो कित्ते भले आदमी है , हमको खाना खाने के लिए पूछ रहे है। सच बताये गुप्ता जी जे पुरे शहर मा एक आप ही है जिसने हमको खाने को पूछा वरना कल से किसी ने एक ठो गिलास पानी तक नाही पूछा हमे”,मंगल फूफा कहते कहते रो पड़े
“अरे अरे रोते काहे हो मंगलू ? इह लो ना इह खाओ सब तुम्हरे लिए ही है”,गुप्ता जी ने जल्दी से अपनी थाली मंगल फूफा की तरफ खिसकाकर कहा
मंगल फूफा ने ख़ुशी ख़ुशी एक निवाला तोड़ा और जैसे ही मुँह में रखकर चबाया उनके कानों से धुँआ निकला , आँखे जल उठी और मुँह से सी सी की आवाजे आने लगी उन्होंने गुप्ता जी की तरफ देखा तो पाया कि गुप्ता जी अपने होंठो पर बड़ी सी मुस्कान सजाये बैठे है।
“गोलू सही कहता था”,मंगल फूफा ने कहा और फुट फूट कर रो पड़े
( क्या लवली करेगा विश्वास मंगेश की बातो पर और जाने देगा बिंदिया को वापस अपने गाँव ? क्या चोट के बहाने आदर्श फूफा को मिल गया है मिश्रा जी के घर में कुछ दिन और रुकने का मौका ? क्या मंगल फूफा बच पाएंगे गुप्ता जी के कठोरपन से ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
