Manmarjiyan Seaspn 5 – 39
मिश्रा जी ने गुड्डू से उसकी फटफटिया के बारे में पूछा। गुड्डू को काटो तो खून नहीं , फटफटिया के नाम पर उसका तो गला ही सूख गया उस पर मिश्रा जी की जलती नजरो ने उसकी हालत और पतली कर दी ,, ऐसी सिचुएशन मे गोलू के दिमाग में तुरंत बात आ जाती है लेकिन हमारा गुड्डू ठहरा सीधा साधा उसके दिमाग में भला इतनी जल्दी जवाब कहा से आता वह खामोश खड़ा मिश्रा जी को देखता रहा तो मिश्रा जी ने कड़क स्वर में कहा,”जवाब काहे नाही देते , मुँह मा दही जमाय लिए हो ? हमहू पूछ रहे है तुम्हायी फटफटिया कहा है ? पिछले दो दिन से घर मा तो नाही देखे हम”
गुड्डू कुछ जवाब देता इस से पहले बाइक की आवाज उसके कानो में पड़ी , लड़को को कुछ याद रहे या न रहे लेकिन अपनी बाइक की आवाज हमेशा याद रहती है गुड्डू ने खुश होकर कहा,”अरे यही तो है पिताजी ! ट्यूब बिगड़ गयी थी तो बनवाने के लिए दिए थे दूकान पर लगता है लड़का लेकर आ गवा , हमहू लेकर आते है”
मिश्रा जी कुछ और पूछ पाते या कह पाते इस से पहले गुड्डू महाराज लपके दरवाजे की तरफ और बाहर गली में लेकिन अगले ही मिश्रा जी क्या देखते है कि गुड्डू दौड़ता हुआ उनकी तरफ आ रहा है वो भी ऐसा डरा हुआ जैसे दिन में ही कोई भूत देख लिया हो। भागते हुए आकर गुड्डू मिश्रा जी से टकराया तो मिश्रा जी ने उसे रोककर कहा,”का हुआ ! भाग काहे रहे हो , कोनो भूत प्रेत देख लिए का ?”
“पि पि पि पि पि”,गुड्डू हकलाने लगा वह बोल ही नहीं पाया कि बाहर उसने क्या देखा तभी बाइक की आवाज मिश्रा जी और गुड्डू दोनों में पड़ी। मिश्रा जी ने सामने देखा तो उनके चेहरे पर भी परेशानी के भाव उभर आये। सामने गुड्डू की बाइक पर बैठा मंगेश चला आ रहा था पीछे थी मिश्रा जी की गाडी जिसे मिश्रा जी भागमभाग के चलते चकिया में ही छोड़ आये थे।
“जे तो मंगेश है”,मिश्रा जी धीरे से बड़बड़ाये
“वही तो हम आपसे कह रहे थे”,गुड्डू ने भी घबराये हुए स्वर में धीरे से कहा
मिश्रा जी ने गर्दन घुमाकर गुड्डू को देखा और घूरकर कहा,”तुमहू मंगेश कहा कहे बे ? तुमहू तो पि पि पि पि बोलत रहे”
“अरे हमायी छोड़िये पिताजी इह हिया का कर रहा है ? कही बिंदिया भाभी को लेने तो नाही आया”,गुड्डू ने दबे स्वर में कहा
“एक काम करो तुम्ही जाकर पूछ ल्यो , जियादा चौधरी बन रहे हो,,,,,!!”,मिश्रा जी ने गुड्डू की बांह पकड़ उसे आगे धकियाकर कहा तो गुड्डू झेंपते हुए वापस पीछे चला आया।
“आज अगर इह हिया कोनो तमासा किया ना तो फिर हमहू भी सांत नाही बैठेंगे , ईंट का जवाब पत्थर से देंगे”,मिश्रा जी ने धीरे से कहा तो गुड्डू ने इधर उधर देखा , मिश्रा जी के तख्ते के पास ही गमले रखे थे वहा चटनी पीसने का गोल पत्थर रखा था। गुड्डू ने चुपके से उसे उठाया और मिश्रा जी के पीछे करके उनके
हाथ में थमा दिया तो मिश्रा जी ने गुड्डू की तरफ देखा और कहा,”साबास,,,,,,,,,,,!!!”
मंगेश ने बाइक साइड में लगाई और बाइक से नीचे उतरकर मिश्रा जी की तरफ कदम बढ़ाये। मंगेश के साथ 4-5 आदमी और आये थे जिनमे एक था रूपा का बाप और मनोज को तो ये सब जबरदस्ती पकड़कर लाये थे। वे सब लोग भी मंगेश के पीछे आने लगे तो मंगेश ने हाथ से इशारा करके उन्हें वही रुकने को कह दिया और खुद मिश्रा जी की तरफ बढ़ा। मिश्रा जी हाथो को पीछे किये ख़ामोशी से सामने से आते मंगेश को देखते रहे जबकि पीछे मजबूती से पत्थर को थामे हुए थे कि अगर मंगेश ने कुछ किया तो वे आज इसी पत्थर से उसका सर फोड़ देंगे।
मंगेश मिश्रा जी के सामने आ खड़ा हुआ और उन्हें एकटक देखता रहा लेकिन अगले ही पल वो हुआ जिसकी कल्पना वहा मौजूद किसी शख्स ने नहीं की थी। मंगेश मिश्रा जी के पैर पकड़कर नीचे जमीन पर लेटा था और माफ़ी मांग रहा था। गुड्डू का तो हाथ ही अपने सीने पर चला गया। मिश्रा जी भी हैरान थे लेकिन
पत्थर अभी भी उनके हाथ में था !
“हमका माफ़ कर दो मिश्रा , हमसे गलती हुई गयी,,,,,,,गुस्से और नफरत मा हमहू इत्ते अंधे हो गए कि उह्ह्ह लल्लन की बात मानकर अपनी ही बिटिया की जिंदगी बर्बाद करने जा रहे थे। हमने सबके साथ बहुते गलत किया है मिश्रा हमने तुम्हरे साथ भी बहुते गलत किया,,,,,,,,,,तुमहू हमका जेल से छुड़ायत रहे और हम तुम्हे ही अपना दुश्मन मान बइठे,,,,,,,,,,हमे माफ़ कर दो मिश्रा हमे माफ़ कर दो हम तुम्हरे गुनहगार है,,,,,,,,,,,हमका माफ़ कर दयो”,मंगेश ने मिश्रा जी के पैरो में अपना सर पटकते हुए कहा
मिश्रा जी ने सुना तो उन्हें अहसास हुआ कि मंगेश यहाँ उनसे झगड़ा करने नहीं बल्कि अपनी गलती पर शर्मिन्दा होकर आया है तो उन्होंने हाथ में पकड़ा पत्थर चुपके से पीछे फेंक दिया ! अब देखो जैसी ये कहानी है इस कहानी में कुछ भी सीधा सीधा नहीं होता और जो चीजे फेंकी जाती है उनसे किसी ना किसी का कल्याण तो हो ही जाता है ! जैसे ही मिश्रा जी ने वो पत्थर फेंका पीछे अपना सामान उठाये आते आदर्श फूफा के सर पर लगा और आदर्श फूफा धड़ाम से जमीन पर आ गिरे।
भुआ ने देखा तो अपना बैग फेंककर आदर्श फूफा की तरफ आयी और उन्हें उठाया तो भुआ की आँखे हैरानी से फ़ैल गयी , भुआ को हैरान परेशान देखकर आदर्श फूफा ने हाथ से अपना सर सहलाया और कहा,”अरे कुछो नहीं हुआ है राजकुमारी”
लेकिन अगले ही पल आदर्श फूफा की नजर अपने हाथ पर पड़ी जिसपे खून लगा थे और ये देख उन्होंने मुँह फाड़कर रोते हुए कहा,”अरे राजकुमारी खूनअअअअअ”
आदर्श फूफा की चीख़ बाहर खड़े मिश्रा जी के कानो में पड़ी तो वे अंदर भागे , गुड्डू भी उनके पीछे जाने लगा तो देखा मंगेश नीचे पड़ा है तो उसकी तरफ आकर उसे उठाते हुए कहा,”अरे बस करो चचा अब का जमीन नाम करवाओगे अपने,,,,,,,,,,आप हुआ बइठो हमहू अंदर देखकर आते का मेटर है ?”
मंगेश सीढ़ियों पर साइड आ बैठा और गुड्डू भी मिश्रा जी के पीछे अंदर चला आया। गुड्डू ने खून से लथपथ आदर्श फूफा को देखा और पास ही पड़ा देखा वो पत्थर जो कुछ देर पहले मिश्रा जी के हाथ में था तो वहा खड़े मिश्रा जी से कहा,”पिताजी ! जे का किये
मिश्रा जी ने गुड्डू को ही एक थप्पड़ रसीद कर दिया और कहा,”हमाये हाथ मा पत्थर देने की का जरूरत थी ?”
“देखा राजकुमारी ! सुना तुमने , तुम्हरे इह भैया जे पत्थर मारत रहे हमे”,आदर्श फूफा ने रोते हुए कहा
“अरे नहीं नहीं आदर्श बाबू ! हम आपको पत्थर काहे मारेंगे ? उह्ह्ह तो गलती से हमने पत्थर इधर फेंक दिया अब आप बीच मा आ गए तो जे मा पत्थर की का गलती ?”,मिश्रा जी ने झेंपते हुए कहा
आदर्श फूफा के सर पर चोट लगी थी , खून बह रहा था इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा था उलटा गुड्डू और मिश्रा जी आदर्श फूफा को सफाई दे रहे थे।
शोर सुनकर मिश्राइन बाहर आयी , उन्होंने आदर्श फूफा के सर पर खून देखा तो जल्दी से रेंक में टंगा तौलिया उठायी और उसे चोट वाली जगह पर रखकर खून रोकते हुए गुड्डू और मिश्रा जी को फटकारा,”अरे आप दोनों हिया खड़े होकर का पंचायती कर रहे है , दिखाई नाही देता खून बह रहा है इनका,,,,,,,,,,ए गुडडुआ जाकर डाक्टरवा को लेकर आओ फटाफट और आप मिश्रा जी आप इनको उठाने मा मदद कीजिये”
राजकुमारी भुआ तो मुँह में साडी का पल्लू खोंस के बस रोये जाए रोये जाने।
मिश्रा जी ने सहारा देकर आदर्श फूफा को उठाया और कुर्सी पर बैठाया। मिश्राइन अभी भी तौलिये से उनकी चोट को दबाये उनके पास खड़ी थी। फूफा ने देखा भुआ रोये जा रही है तो कहा,”अरे राजकुमारी ! अरे रो काहे रही हो ? ज़िंदा है हमहू”
राजकुमारी भुआ उठकर फूफा के पास आयी और सुबकते हुए कहा,”अरे हमहू इहलीये नाही रोय रहे कोमलिया के पिताजी कि हमरे भैया ने आपको पत्थर मारा , अरे हमहू तो इहलीये रो रहे है कि जे पत्थर से हमहू धनिया पुदीना की चटनी पीसते थे अब कैसे पीसी है ?”
आदर्श फूफा ने सुना तो हैरानी मुँह खुला का खुला रह गया , मिश्राइन ने जब सुना पत्थर मिश्रा जी ने फेंका है तो उन्होंने मिश्रा जी से कहा,”गुड्डू के पिताजी ! इह का सुन रहे है हम ? आदर्श बाबू को पत्थर आप मारे ?”
“जे गुड्डूआ डाक्टर को लेने गया के नाही हमहू ज़रा देखकर आते है”,मिश्रा जी ने मिश्राइन की बात को नजरअंदाज करके कहा और वहा से चले गए।
मिश्राइन ने अफ़सोस में अपना सर हिलाया क्योकि इतना तो वे अपने पति को जानती ही थी।
लवली किसी काम से नीचे आया जब उसने मिश्राइन भुआ और आदर्श फूफा को साथ देखा तो उनकी तरफ आया और फूफा के सर से खून आते देखकर कहा,”इनको का हुआ अम्मा ? जे चोट कैसे लगी ?”
मिश्राइन कुछ कहती इस से पहले भुआ ने फिर राग अलाप दिया,”का बताये लवली बिटवा ! हम और तुम्हरे फुफा अपना अपना झोला उठाये चले जा रहे थे कि हमरे भैया ने एक ठो पत्थर फेंका और उह आकर लगा इनके माथे पर और माथा फूट गवा,,,,,,,,,,,,!!!”
“का पिताजी ने पत्थर मारा ? उह्ह छोड़िये इनको हिया काहे बैठा रखा डाक्टर के पास लेकर काहे नाही गए ?”,लवली ने कहा
“गुड्डू गवा है डाक्टर को लेने”,मिश्राइन ने कहा
“अरे यार अम्मा ! आप लोग भी हद करते है , गुड्डू जाएगा डाक्टर को लेकर आएगा इत्ते मा तो इनका इलाज हुई जाता ,, डाक्टर के इंतजार मा हिया बैठे रहे तो इंफेक्शन फैलने का खतरा बढ़ जाएगा,,,,,,,,,,,,!!!”,लवली ने कहा
“जे घर मा पहली बार कोनो ढंग की बात कही है किसी ने”,आदर्श फूफा ने दर्द से कराहते हुए कहा
“फूफा उठिये ! आईये हमाये साथ”,कहकर लवली ने मिश्राइन के हाथ से तौलिया लिया और फूफा की चोट को दबाते हुए वहा से चला गया।
लवली मंगेश या उसके आदमियों को देखता इस से पहले मिश्रा जी उन्हें दूसरी तरफ से हॉल में ले गए ताकि बैठकर बात कर सके।
गुप्ता जी का घर , कानपूर
गोलू और मंगल फूफा घर के आंगन में पैर पसारे बैठे थे और दोनों एक ही सुर में रोते हुए राग अलाप रहे थे। गुप्ता नाश्ता करने के बाद टहलने के लिए थोड़ा बाहर चले गए थे वापस आये तो देखा दोनों नमूने आँगन में पसरे पड़े है। गुप्ता जी चुपचाप उन दोनों के पीछे आ खड़े हुए। रोते रोते मंगल फूफा रुके और कहा,”ए गोलू ! ए हमको एक ठो बात बताओ , गुप्ता जी हमको घर से जाने को कहे सो कहे लेकिन तुमको काहे अंदर नाही जाने दे रहे ?”
गोलू भी रोते रोते रुका और कहा,”अरे हमको अंदर तब जाने देंगे ना जब खुद जा पाएंगे,,,,,,,,!!”
“मतलब ? हमहू समझे नाही,,,,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा ने मासूमियत भरे स्वर में कहा
“अरे फूफा ! देखो हर घर मा एक बाप होता है , और उह्ह्ह बाप भी एक बाप होता है,,,,,,,!”,गोलू ने मंगल फूफा को समझाते हुए कहा
“हाँ और उसको हम दादा कहते है,,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा ने बीच में कूदकर कहा
गोलू ने खा जाने वाली नजरो से मंगल फूफा को देखा और कहा,”हमहू पूछे तुमसे,,,,,,,,,,!!”
“अच्छा ठीक है ठीक है बताओ”,मंगल फूफा कहा
“हर घर मा एक बाप होता है जैसे हमाये पिताजी गज्जू गुप्ता ! अब उह्ह का करते है कि जब मन किया हमे पेल देते है , जब मन किया हमे गरिया दिया और जब मन किया उठा के घर से बाहर फेंक दिया ,, काहे कि अब उह्ह ठहरे जे घर के बाप साला उनको किसका डर लेकिन हमहू कहे ना कि हर बाप का एक बाप होता है , तो हमाये पिताजी को डराने वाली है हमायी अम्मा याने गुप्ताइन,,,,,,,,!!!”,गोलू ने बहुत ही सस्पेंस में कहा
मंगल फूफा ने सुना तो चिढ गए और कहा,”ए गोलू ! इह का बात हुई ? तुम्हरी अम्मा तो लेडिस है ना तो फिर उह्ह्ह बाप की बाप कैसे हुई ? उह्ह्ह बाप की अम्मा होगी , साला मेल फीमेल का कोंस्टेट नाही पता तुमको”
गोलू ने बहुत ही गन्दी गाली देने के लिए मंगल फूफा की तरफ देखा लेकिन बेचारा दे नहीं पाया।
मंगल फूफा ने गोलू की तरफ देखा तो गोलू ने कहा,”बुद्धि रूपा को दहेज़ मा दे दिए हो का ? अरे हमायी अम्मा हमाये पिताजी की अम्मा काहे लगी है ? उह्ह्ह उनकी मेहरारू है,,,,,,और कोंस्टेट नाही कॉन्सेप्ट होता है , कबो स्कूल की सकल भी देखे हो ?,,,,,,,,,,,,सुनना है सुनो हमायी बात वरना भाग जाओ हिया से”
“अच्छा सुन रहे है ! बोलो”,मंगल फूफा ने मुँह बनाकर कहा
“हम जे कह रहे जैसे हम अपने पिताजी से डरते है वैसे पिताजी डरते है हमायी अम्मा से,,,,,,,,,,तबही ना सुबह से घर के बाहिर है और देखा नाही आलू पूड़ी भी बाहिर से खाये रहे,,,,,,,,,,,!!!!”,गोलू ने इस बार सीधा सीधा समझाया
“यार गोलू ! कुछ भी कहो यार तुम्हाये पिताजी इत्ते बुरे आदमी भी नाही है , इह तुम्हरी अम्मा ही कुछो जियादा टिकिट है उनके साथ”,फूफा ने गुप्ता जी के लिए अफसोस जताते हुए कहा
“ए यार फूफा ! तुमहू काहे अंग्रेजी का सत्यानाश करने पर तुले हो , अरे टिकिट नाही स्ट्रिक्ट होता है उह्ह्ह,,,,,,,,,,,और हमाये पिताजी के जियादा हिमायती नाही बनो तुमहू समझे , अभी थोड़ी देर पहिले परसादी दिए थे तुमको भूल गए”,गोलू ने कहा
मंगल फूफा कुछ कहते इस से पहले ही दोनों के कानो में किसी के सिसकने की आवाज पड़ी ! गोलू और मंगल फूफा ने दाँयी तरफ देखा तो पाया गुप्ता जी उनके बगल में उकडू बैठे आँसू बहा रहे है। ये देखकर मंगल और गोलू ने हैरानी से पहले एक दूसरे को देखा और फिर गुप्ता जी को,,,,,,,,,,,,,,,,!!!!
( क्या मंगेश सच में मांगने आया है मिश्रा जी से माफ़ी या ये है उसकी कोई नयी चाल ? सर की चोट का बहाना करके क्या आदर्श फूफा फिर से जमाने वाले है मिश्रा जी के घर में डेरा ? मंगल फूफा और गोलू के बगल में बैठकर आखिर क्यों रो पड़े गुप्ता जी ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
मिश्रा जी ने गुड्डू से उसकी फटफटिया के बारे में पूछा। गुड्डू को काटो तो खून नहीं , फटफटिया के नाम पर उसका तो गला ही सूख गया उस पर मिश्रा जी की जलती नजरो ने उसकी हालत और पतली कर दी ,, ऐसी सिचुएशन मे गोलू के दिमाग में तुरंत बात आ जाती है लेकिन हमारा गुड्डू ठहरा सीधा साधा उसके दिमाग में भला इतनी जल्दी जवाब कहा से आता वह खामोश खड़ा मिश्रा जी को देखता रहा तो मिश्रा जी ने कड़क स्वर में कहा,”जवाब काहे नाही देते , मुँह मा दही जमाय लिए हो ? हमहू पूछ रहे है तुम्हायी फटफटिया कहा है ? पिछले दो दिन से घर मा तो नाही देखे हम”
