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Manmarjiyan Season 5 – 38

Manmarjiyan Season 5 – 38

Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

गुड्डू को शगुन की भावनाये समझ आ रही थी और उसे अहसास हुआ कि दूसरी चीजों में वह इतना फंस गया कि उसके पास अपनी ही पत्नी के लिए वक्त नहीं था। गुड्डू मुस्कुराया और शगुन की तरफ देखकर कहा,”जाओ दिया,,,,,,,,,,,,तुम जो कहोगी वो करेंगे,,,,,,,,,तुम्हे हमारा वक्त चाहिए ना , हम आज ही पिताजी से कहकर तुम्हे कुछ दिनों के लिए बाहर घुमाने ले जाएंगे,,,,,,,,,वहा हमारा सारा वक्त तुम्हारे लिए ही होगा”
शगुन ने सुना तो ख़ुशी से उसका चेहरा खिल उठा और उसने कहा,”आप सच कह रहे है गुड्डू जी ?”

“हमहू झूठ काहे कहेंगे ? वैसे भी सादी के बाद हम तुमको कही लेकर नहीं गए , साला काम और दूसरी चीजों में इतना फंस गए ना कि तुम्हरे लिए बख्त ही नाही बचा पर अब हमे समझ आ गवा कि तुम्हरा ख्याल रखना भी तो हमायी जिम्मेदारी है हमाओ काम है,,,,,,,,,,इहलीये हमहू फैसला किये रहय हम तुमको लेकर किसी अच्छी जगह जायेंगे जहा सिर्फ तुम और हम हो,,,,,,,,,,!!१”,गुड्डू ने शगुन के कंधो पर बाँह रखकर उसे साइड से गले लगाकर कहा।

शगुन को भला गुड्डू से और क्या ही चाहिए था , गुड्डू के साथ वक्त बिताएगी तो उसे समझाने में आसानी होगी और वक्त भी मिल जाएगा। शगुन ने हामी गर्दन हिला दी तो गुड्डू ने कहा,”तुमहू डिसाइड कर ल्यो कहा जाना है तक हमहू पिताजी से मिलकर आते है”
“हम्म्म ठीक है”,शगुन ने कहा
गुड्डू ने चाय खत्म की और कमरे से बाहर चला आया।

नवरतन की दूकान , कानपूर
अपनी सिलाई की दूकान में नवरतन जमीन पर पैर पसारे उजड़े चमन की तरह बैठा रो रहा था। बाल बिखरे थे , चेहरे का रंग उड़ा हुआ , गर्दन जरा अकड़ गयी थी और मुँह पर चोट के निशान ,, रूपा के साथ देखे गए शादी के सपने इतनी जल्दी टूट जायेंगे नवरतन ने ये कभी सोचा नहीं था। वह तो बस रूपा की याद में   देवदास बना दिवार से पीठ लगाए बैठा रहा।

“नवरतन ! ओह्ह्ह भाई नवरतन,,,,,,,,,,अरे भाई अंदर हो क्या ?”,बाहर खड़े शर्मा जी ने नवरतन को आवाज दी तो नवरतन अंदर से ही रोआँसा होकर बोला,”आज दुकान बंद रही है चचा कल आना”
शर्मा जी और नवरतन की उम्र में मुश्किल से 5-6 साल का अंतर रहा होगा , वे नवरतन के मुँह से अपने लिए चचा सुनकर भड़क गए और अंदर आकर गुस्से से कहा,”हम का तुम्हाये चाचा लगते है ?’

नवरतन आज किसी से लड़ने तो क्या बल्कि बात करने की हालत में भी नहीं था , सुबह सुबह रूपा के आशिक़ से इतनी मार जो खाकर आया था बेचारा , उसने सर उठाकर सामने खड़े शर्मा जी को देखा तो शर्मा हैरान रह गए। नवरतन की ये हालत देखकर वे उसके पास आये और कहा,”अरे नवरतन ! इह सब का हुआ ? कौन किया तुम्हरी जे हालत और रूपा कहा है ? आज तो तुम्हरा और उह्ह्ह मंगलू का फैसला था न , का हुआ उसका ? का रूपा मंगलू को चुन ली का ?”

कहते हुए शर्मा जी ने नवरतन के कंधे पर हाथ रख दिया नवरतन दर्द से कराह उठा और कहा,”हाय ! कुछ ना पूछो शरमा जी ! इह समझ ल्यो रूपा हमाये जीवन मा अँधेरा करके चली गयी और मंगल का अमंगल हुई गवा”
 नवरतन की बात शर्मा जी के सर के ऊपर से गयी , उन्होंने नवरतन को सहारा देकर उठाते हुए कहा,”आओ उठो और हिया आराम से बइठो,,,,,,अब बताओ  का हुआ और रूपा कहा है ?”

नवरतन ने सुबकते हुए शर्मा जी को सारी बात बता दी और इन सब बातो में एक नाम उभर कर आया और वो था गोलू गुप्ता , जिसने नवरतन की शादी करवाने के बदले में उस से पैसे लिए थे

गोलू का सुनते ही शर्मा जी का चेहरा गुस्से से लाल क्योकि गोलू ठहरा उनका दामाद और गोलू के कारनामो से वो अनजान नहीं थे उन्होंने गुस्से से कहा,”अरे हमहू तुमसे पहिले ही कहे थे नवरतन कि हमरे उह्ह्ह दामाद पर  भरोसा नहीं करो , नाही पड़ो ओह्ह्ह के चक्कर मा ,, उसका काम है हिया का माल हुआ करने का,,,,,,तुमहू इत्ते समझदार होकर उह्ह्ह बंडलबाज की बातों मा कैसे आ गए ?”

शर्मा जी के मुँह से गोलू के लिए प्यारे प्यारे शब्द सुनकर नवरतन ने कहा,”अरे उह्ह्ह आपका दामाद है,,,,,,!!!”
“अरे काहे का दामाद ? एक नंबर का कांडी आदमी है उह्ह्ह , अरे काण्ड तो ऐसे करता है जैसे कपडे बदल रहा हो,,,,,,,,,हमायी बुद्धि खराब होय गयी थी जो अपनी बिटिया ब्याह दिए ओह्ह्ह के साथ,,,,,,,जहा देखो वहा बस उनके ही चर्चे है,,,,,,,जे पुरे शहर मा हमायी छीछा लेदर करने में कोनो कसर नाही छोड़े है उह्ह्ह और अब तुमको देख ल्यो ,

एक तो तुमहाओ ब्याह पहिले से ना हो रहो ऊपर से जे रूपा नाम की मुसीबत और,,,,,,,,,,और तुम्हरी उह्ह्ह रूपा तो ना पहिले दिन से ही हमको बेवफा लग रही थी,,,,,,,,,,,!!”,शर्मा जी ने मुँह बनाकर कहा
रूपा की बुराई सुनकर नवरतन भड़क गया और कहा,”ए शर्मा जी ! हमायी रूपा के बारे मा कुछो नाही कहना , उह्ह्ह तो मासूम थी उह्ह्ह साला 6 फुटिया फसाकर ले गवा हमायी रूपा को,,,,,,,,,,!!!”

नवरतन की बात सुनकर शर्मा जी भी उछल पड़े और कहा,”ए तुम्हरा और उह्ह्ह मंगलवा का साला जे ही पिरोब्लम है ,, सुवर को कितना भी नहला धुला दो  जायेगा उह्ह्ह कीचड़ मा ही,,,,,,,,,,,,,अगर उह्ह्ह रूपा को तुमसे पियार होता तो उह्ह्ह अपने आशिक के साथ काहे जाती ? और तुम्हरे साथ साथ उह्ह्ह मंगलू का भी तो दिल तोड़ी ना उह्ह्ह जबकि मंगलू तो उसे चकिया से साथ लेकर आया था,,,,,,,,,,,,!!!”

शर्मा जी की बात धीरे धीरे नवरतन के दिमाग में घुसी और उसे समझ आया कि रूपा को उन दोनों से प्यार कभी था ही नहीं वह तो बस अपने जानू के आने तक दोनों के दिलो से खेल रही थी , लेकिन नवरतन का दिल मानने को तैयार नहीं तो उसने शर्मा जी से कहा,”अगर उसको हमसे पियार नहीं था तो फिर हमाये हाथ से समोसा काहे खाई ?”

शर्मा जी ने सुना तो नवरतन को घूरकर देखा और दाँत पीसकर कहा,”तो का तुम्हरे हाथ से समोसा खाने का मतलब उसको तुम से पियार हुई गवा ? ऐसे तो हमहू साला 10 साल से तुम्हाये हाथ के सिले कपडे पहिन रहे है तो का हमको भी तुमसे पियार है,,,,,,,,,,,,,,जे प्यार के चक्कर मा ना बोराओ और हमाये कपडे दयो , एक महीने कह रहे हो कल दे देंगे कल दे देंगे”

“हिया हमाओ दिल टूट गओ और तुमको कपडे की पड़ी है”,नवरतन ने सुबकते हुए कहा  
“दिल टुटो है हाथ नाही , आज या तो तुम हमाये कपडे सिल के दोगे या फिर अपनी जे दूकान बंद कर देओ”,शर्मा जी ने बिगड़कर कहा

“रूपा हमायी धड़कन तो बंद कर ही गयी अब जे दूकान बची है इह बंद हो जाहि रूपा”,कहकर नवरतन रोने लगा
शर्मा जी को गुस्सा तो बहुत आ रहा था लेकिन क्या करे नवरतन को मार भी तो नहीं सकते थे , कपडे जो सिलवाने थे उनसे,,,,,,,,,,,,उन्होंने जबरदस्ती अपने शब्दों में मीठास घोलकर कहा,”नवरतन हमायी बात सुनो ! काहे उह्ह्ह धोखेबाज रूपा के पीछे अपने जे कीमती आँसू बर्बाद कर रहे हो ? अरे बल्कि तुमको तो बदला लेना चाहिए”
“किस से ?”,नवरतन ने मासूमियत भरे स्वर में पूछा

“अरे उह्ह्ह हमाये बंडलबाज दामाद से , तुम से पईसा लेकर तुमको रूपा के जाल मा कौन फंसाया ? उह्ह्ह गोलू ना तो जाकर ओह्ह्ह का ही धरो,,,,,,!!!”,शर्मा जी ने आग लगाकर कहा और इस बार ये आग लग भी गयी
नवरतन गुस्से में उठा और कहा,”इह सब उह्ह्ह गोलुआ की वजह से हुआ है , हमहू साला हिया सुकून से अपना सलवार कमीज काट रहे थे कि उह्ह्ह आदमी आकर हमे शादी का सपना दिखाया और हमारा ही चू#या काट दिया,,,,,,, हम उसको छोड़ेंगे नाही,,,,,,,,,,,,जे कैंची लेकर जायेंगे और घुसा देंगे ससुरे के पेट में,,,,,,,,!!”

नवरतन को गुस्से में देखकर शर्मा जी ने उसे रोका और कहा,”अरे अरे का कर रहे हो नवरतन ? अभी जाकर काहे तमाशा करना कल सुबह जाओ आराम से , पैसा लेने तो वैसे भी जा ही रहे हो और इह कैंची न गोलूआ के पेट से पहिले हमायी पेंट पर चलाओ और ओह्ह्ह का सिल दयो”
नवरतन वापस कुर्सी पर बैठा और कहा,”ठीक है कल आकर अपनी पेंट कमीज ले जाना”
“पक्का ना ?”,शर्मा जी ने कहा  

“हाँ पक्का”,नवरतन ने कठोर स्वर में कहा और घूमकर मशीन की तरफ मुँह कर लिया। उसने मशीन के बगल में रखे रेडिओ का बटन दबाया और उसमे गाना बजने लगा “जा बेवफा जा , हमे प्यार नहीं करना,,,,,,,,तन्हा ही जी लेंगे हम जब है तन्हा मरना”

“लगता है इह तो पूरा देवदास बन गवा,,,,,,,,,,,,,जे दामाद जी को नरक मा भी जगह नाही मिलेगी , बेचारे दो अधेड़ कँवारो का दिल तोडा है उन्होंने , अरे काहे के दामाद  , दामाद के नाम पर बस अवसाद है यह इह आदमी , हमायी बिटिया का भाग फूटा था जो हमहू जे दलिद्रर को अपनी बिटिया दिए रहे ऊपर से उह्ह्ह माँ बनने वाली है , आवे वाली औलाद का तो भगवान् ही मालिक है

शर्मा जी को खुद में ही बड़बड़ाते देखकर नवरतन ने रेडिओ का आवाज कम किया और कहा,”अब का पेंट कमीज लेकर ही जायेंगे ? कहा ना कल सुबह आईये”
शर्मा जी की तंद्रा टूटी और वे वहा से चले गए तो नवरतन ने रेडिओ का आवाज फिर बढ़ा दिया रूपा को याद करते हुए आँसू बहाने लगा।

मिश्रा जी के कहने पर आदर्श फूफा और राजकुमारी भुआ ने अपना अपना सामान बांध लिया लेकिन यहाँ से जाने का मन दोनों का नहीं था। आदर्श फूफा को अब भी लग रहा था कि मिश्रा जी उनसे बीती बातो का बदला ले रहे है इसलिए कानपूर से भेज रहे है ताकि बाद में वेदी की शादी में बुलाये ही ना और राजकुमारी भुआ को लग रहा था कि अम्मा की मौत के बाद उनका जैसे इस घर से रिश्ता ही खत्म हो गया है ! जबकि मिश्रा जी उन्हें इसलिए भेज रहे थे ताकि यहाँ बिगड़ चुकी स्तिथि को सम्हाल सके क्योकि वे बहुत अच्छे से जानते थे इन सबके रहते कोई न कोई कांड होना तो तय है।

आदर्श फूफा और राजकुमारी भुआ मुँह बनाकर अपना अपना बैग उठाकर कमरे से बाहर चले आये। मिश्राइन डायनिंग टेबल पर नाश्ता लाकर रख रही थी उन्होंने आदर्श फूफा और राजकुमारी भुआ को देखा लेकिन नजरअंदाज करके अपने काम में लगी रही।
“देखा तुम्हरी भाभी हमको देख के भी नजरअंदाज कर दी”,आदर्श फूफा ने दबे स्वर में कहा
“आप का शाहरुख खान है जो आपको देखे,,,,,,,!!!”,राजकुमारी भुआ ने कहा

“तुम्हरा ऊपर का माला खाली है का राजकुमारी ? अरे देख के नजरअंदाज की मतलब उह्ह्ह भी चाहती है कि हम और तुम हिया से चले जाए,,,,,,,!!!”,आदर्श फूफा ने अपने दाँत पीसकर कहा
“हाँ तो चले जायेंगे हिया रूककर भी का ही करेंगे,,,,,,!!!”,राजकुमारी भुआ ने ऊँचे स्वर में मिश्राइन को सुनाकर कहा और आदर्श फूफा के साथ आगे बढ़ गयी

“रुकिए,,,,,,,,,,,,!!!”,मिश्राइन की आवाज दोनों के कानो में पड़ी तो दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुराये और पलटे तो मिश्राइन ने उनकी तरफ आते हुए कहा,”अब जा ही रहे है तो नाश्ता करके जाईये”
आदर्श फूफा और भुआ और होंठो की मुस्कान अगले ही पल गायब हो गयी। आदर्श फूफा ने गुस्से से मिश्राइन को देखा और कहा,”हम का हिया आपके नाश्ते के  लिए रुके है ?”

मिश्राइन ने कुछ नहीं कहा बस राजकुमारी भुआ की तरफ इशारा कर दिया जो डायनिंग टेबल पर बैठकर आलू पूड़ी ठूस रही थी। आदर्श फूफा ने झेंपते हुए मिश्राइन की तरफ देखा तो मिश्राइन हल्का सा मुस्कुराई और वहा से चली गयी।  

मिश्राइन के जाने के बाद आदर्श फूफा राजकुमारी भुआ की तरफ आये और कहा,”हमायी छीछा लेदर करने मा एक ठो मौका नाही छोड़ना तुमहू राजकुमारी , तुम्हरी भाभी ने कहा और तुमहू इह आलू पूड़ी खाने बैठ गयी ,, अरे भूल गयी का तुम्हरे भैया हमको हिया से जाने के लिए बोले है,,,,,,,,,,!!!”
“अरे तो का हुआ खाकर चलते है वैसे भी ट्रेन का खाना हमको हजम नाही होता है”,भुआ ने हॉट पॉट से चार पूड़ी निकालकर अपनी प्लेट में रखकर कहा

“अरे राजकुमारी ! कैसे समझाए हम तुमको ? अरे इह आलू पूड़ी खाना बंद करो और चलकर अपने भैया से पूछो कि का तुम्हरा जे घर पर कोनो हक़ नाही जो जाने को कह दिए उह्ह्ह ?”,आदर्श फूफा ने भुआ के बगल वाली कुर्सी पर बैठते हुए कहा। खाना खाते हुए भुआ को कोई डिस्टर्ब करे तो ये भुआ को अच्छा नहीं लगता था उन्होंने एक बड़ा सा निवाला आदर्श फूफा के मुँह में ठूस दिया।

आदर्श फूफा कुछ बोलने जा रहे थे लेकिन जैसे ही आलू पूड़ी के स्वाद ने उनकी जीभ को छुआ फूफा ने निवाला खाते हुए कहा,”इह तो बढ़िया बना है ,  लगता है हींग का छौंक लगाया है,,,,,,,,,,जरा दुइ पूड़ी हमको भी दयो”
राजकुमारी ने चार पूड़ी और आलू भाजी आदर्श फूफा की प्लेट में भी रख दिया और रसोई के दरवाजे पर खड़ी शगुन और मिश्राइन एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा दी।

मिश्रा जी आँगन में पड़े अपने तख्ते पर बैठे थे शायद गुड्डू का ही इन्तजार कर रहे थे क्योकि उनके चेहरे के भाव बता रहे थे गुड्डू की फिर कोई नयी गलती उनके सामने आयी है। गुड्डू मिश्रा जी के पास आया और कहा,”पिताजी ! आपने कहा था आपको हमसे कुछो बात करनी है,,,,,,,,,!!!”
मिश्रा जी ने सर से लेकर पाँव तक गुड्डू को ध्यान से देखा और कहा,”नवा कपड़ा पहिने हो ?”

“जी पिताजी,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने कहा
“बाल भी जमाये हो”,मिश्रा जी ने कहा
“जी , जी पिताजी”,गुड्डू ने धड़कते दिल के साथ कहा क्योकि मिश्रा जी का कब कौनसा ताना उस पर आये कौन जानता था ?
“सेंट भी लगाए हो ?”,मिश्रा जी ने पूछा
“जी पिताजी,,,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने झेंपते हुए कहा
“गुड्डू ! एक ठो बात बताओ हमे , का तुम कबो खाना खाना भूले हो ?”,मिश्रा जी ने कहा

गुड्डू ने मिश्रा जी की तरफ देखा और मासूमियत से कहा,”नहीं पिताजी ! खाना भी कोई भूलने की चीज है का , उह्ह्ह तो भूख लगती है तब सब खा ही लेते है”
मिश्रा जी उठे और गुड्डू को देखकर गुस्से से कहा,”तो जब तुमहू नवा कपडा पहिनना नाही भूले , बाल सवारना नाही भूले , सेंट से नहाना नाही भूले , खाना खाना नाही भूले तो इह कैसे भूल गए ?”
“का का पिताजी ?”,गुड्डू ने घबराकर कहा

मिश्रा जी ने भँवे चढ़ाकर गुड्डू को देखा और कहा,”फटफटिया कहा है तुम्हायी ?”
गुड्डू ने सुना तो उसे याद आया उसकी बाइक तो चकिया में है जिसे लवली लेकर गया था। गुड्डू को काटो तो खून नहीं , ना जाने क्यों उसे मिश्रा जी के एक हाथ में बाटा की चप्पल और दूसरे हाथ में नीम की संटी नजर आ रही थी।

 ( क्या गुड्डू दे पायेगा शगुन को वक्त या फंस जायेगा फिर से किसी कांड में ? क्या शर्मा जी की लगाईं आग में नवरतन जलाएगा गोलू को ? अपनी फटफटिया के लिए मिश्रा जी के सामने क्या बहाना बनाएगा गुड्डू ? जानने के लिए पढ़ते रहिये मनमर्जियाँ सीजन 5 मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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