Manmarjiyan Season 5 – 32
गुलदस्ते की मार से आदर्श फूफा जमीन पर गिर पड़े , गोलू ने आदर्श फूफा के सीने पर कान लगाकर देखा तो उसे धड़कन सुनाई नहीं दी और उसने गुड्डू को अपना फैसला सुना दिया कि आदर्श फूफा हमारे बीच नहीं रहे।
“अबे पगला गए हो का , इह का बकवास करे रहे हो ?”,गुड्डू ने भड़ककर कहा
“हमायी बात पर बिस्वास नाही तो खुद ही सुनकर देख ल्यो , धड़कन तक नाही चल रही है फूफा की,,,,,,,,,,!!”,गोलू ने चिढ़े हुए स्वर में कहा
गुड्डू ने गोलू को साइड किया और खुद नीचे बैठकर फूफा की धड़कन सुनने लगा। गुड्डू के सर का वजन फूफा के सीने पर अचानक से पड़ा तो फूफा को अचानक से होश आया और उन्होंने दोनों हाथो से गुड्डू की गर्दन को दबोच लिया और चिल्लाने लगे,”नाही छोड़ेंगे , नाही छोड़ेंगे”
गुड्डू का दम घुटने लगा तो उसने मरे हुए स्वर में कहा,”अबे गोलू ! खड़े खड़े देख का रहे हो ? बचाओ हमे”
मुसीबत के समय गोलू का दिमाग काम नहीं करता था इसलिए उसने इधर उधर देखा तो वही गुलदस्ता नजर आया जो पहले भी आकर आदर्श फूफा को लगा था।
गोलू ने गुलदस्ता उठाया और फूफा के सर पर दे मारा तो फूफा ने गुड्डू को छोड़ा और फिर गिर पड़े। गुड्डू ने हैरानी से फूफा को देखा और गोलू की तरफ देखकर चिल्लाया,”अबे जे का किया ? लगता है इह बार जे सच मा मर गए है”
“हम हम हम का किये गुड्डू भैया ? आप ही तो हमसे कहे रहे बचाने को,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने घबराये हुए स्वर में कहा
“अबे बचाने को कहा था फूफा को मारने को नाही,,,,,,,,साला तुम्हरा और काण्ड का जीजा साले का रिश्ता है का जो एक खत्म नाही होता दूसरा कर देते हो ?”,गुड्डू ने गोलू की तरफ आकर गुस्से से कहा
“अरे हमे का पतो गुड्डू भैया , आपके फूफा इत्ते कमजोर है जो एक गुलदस्ते की मार से मर जायेंगे,,,,,,,,,,,,!!!!”,गोलू ने कहा
“लड़ना बंद करो और लास को ठिकाने लगाने का सोचो”,गुड्डू और गोलू के बीच आकर मंगल फूफा ने बड़े ही सस्पेंस में कहा
गुड्डू और गोलू ने सुना तो एक साथ मंगल फूफा की तरफ देखा और अगले ही पल गोलू ने मंगल फूफा को पकड़कर दो चार घुसे जमा दिए। गुड्डू ने मंगल फूफा को छुड़ाया और कहा,”अबे का कर रहे हो गोलू , मंगल फूफा को काहे मार रहे हो ?”
“गुड्डू भैया ! जब से जे आदमी कानपूर मा पैरों धरो है तबसे हमायी किस्मत खराब चल रही है , अरे खराब का इह कहो सड़ गयी है। जे आदमी जहा भी होता है वहा कांड होता ही होता है,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने मंगल फूफा को घूरकर गुस्से से कहा
“जे सब मा मंगल फूफा की का गलती ? साला गलती करो तुम और इल्जाम लगाते फिरो दुसरो पर,,,,,,,,,,,,,किसने कहा था तुमको फूफा को गुलदस्ते से मारने के लिए ? साला जब भी कुछो सही करने जाते है तुम और तुम्हायी जे गोबरबुद्धि बीच मा आ जाती है”,गुड्डू ने भड़ककर कहा
“अच्छा तो हमहू गोबरबुद्धि है ?”,गोलू ने आदर्श फूफा के बांयी तरफ खड़े होकर का क्योकि सामने दांयी तरफ गुड्डू खड़ा था और बीच में पड़े थे आदर्श फूफा।
“हाँ हो तुमहू गोबरबुद्धि ! तबही ना जब देखो तब गंध फैलाते रहते हो”,गुड्डू से गुस्से से अपना पैर आदर्श फूफा की कमर पर मारकर कहा ! उसने ध्यान भी नहीं दिया नीचे आदर्श फूफा पड़े है , उसके हिसाब से तो वह जमीन पर पैर मार रहा था।
“हमहू गोबरबुद्धि है ना गुड्डू भैया तो आप भी बैलबुद्धि से कम नाही है समझे”,गोलू ने भी गुड्डू की तरह अपने पैर से आदर्श फूफा की कमर में मारकर कहा
“बैलबुद्धि है तो का ? तुम्हायी तरह अपने दोस्त की गर्लफ्रेंड से तो सादी नाही किये ?”,गुड्डू ने गुस्से से कहा और फिर अपना पैर आदर्श फूफा की कमर में दे मारा
“देखा देखा देखा दिखा दिए ना अपनो असली रंग गुड्डू भैया ! साला हमको तो सुरु से मालूम था आपको हमायी और पिंकिया की सादी से कित्ती तकलीफ है ?”,गोलू ने भी बिफरकर कहा और इस बार एक नहीं बल्कि दो लात आदर्श फूफा की कमर में मारी क्योकि उसका गुस्सा ज्यादा था
“हमहू का असली रंग दिखाए बे ? और हमे काहे तकलीफ होगी तुम्हायी सादी से ? वैसे भी हमायी जिंदगी से मुसीबत दूर हुई , एक नंबर की सेल्फिश और नकचढ़ी लड़की थी उह्ह्ह”,गुड्डू ने मुँह बनाकर कहा और इस बार थोड़ा धीरे से लात मारी
“मतलब आप हमायी घरवाली को मुसीबत कह रहे है ? ओह्ह्ह गुड्डू भैया हमको जो कहना है कहो , घरवाली के बारे मा कुछो गलत नाही सुनेंगे समझे”,गोलू ने कहा और इस बार गोलू ने भी आदर्श फूफा को धीरे से ही लात मारी
गुड्डू कुछ कहता इस से पहले मंगल फूफा ने खिंसियाकर कहा,”देखो गोलू बुरा ना मानना पर थोड़ी नकचढ़ी तो है तुम्हायी घरवाली”
गोलू ने सुना तो उसकी भँवे तन गयी लेकिन उस से पहले ही गुड्डू ने मंगल फूफा को एक थप्पड़ मारा और कहा,”तुमको बीच मा बोलने को किसने कहा बे और नकचढ़ी से का मतलब है तुम्हरा ? तुमहू ओह्ह्ह के चाचा लगे हो जो जज कर रहे हो हिया खड़े होकर”
मंगल फूफा ने गाल से हाथ लगाकर गोलू को देखा और जैसे ही कुछ कहने को हुआ दूसरे गाल पर गोलू ने परसादी दे दी और कहा,”का बे मंगलू ? हमहू साला हिया रूपा के साथ तुम्हायी सेटिंग बैठाय रहे और तुमहू हमायी पिंकिया को नकचढ़ी कह रहे हो,,,,,,,,,,,,,जबान काट देंगे तुम्हायी बाद मा रूपा को लुपा लुपा कहते फिरना,,,,,,,,,,,,,!!!!”
“अरे लेकिन हम तो,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,गोलू से डांट खाकर मंगल फूफा ने गुड्डू की तरफ पलटकर कहा तो गुड्डू ने फिर एक थप्पड़ मारा और कहा,”तुम तो का बे ? गोलुआ तुम्हरी तरफ हाथ बढ़ाये रहा तो का ओह्ह्ह की गोद मा बैठ जाओगे ?”
मंगल फूफा ने गोलू की तरफ देखा और झुंझलाकर कहा,”अरे लेकिन हमायी बात तो सुनो,,,,,,,,,,,,,,!!!”
गोलू ने एक थप्पड़ मारा और कहा,”काहे ! इलेक्शन मा खड़े हुए हो तुमहू ?”
मंगल फूफा चार थप्पड़ खा चुके थे और दोनों हाथो को दोनों गालों से लगाकर दो कदम पीछे हटे और कहा,”भाड़ मा जाओ तुम दोनों , आज तुम्हे हमाओ रिश्ता खत्म,,,,,,,,,,कल सुबह अपनी रूपा को लेकर निकल जायेंगे ओह्ह के बाद जिंदगी मा दोबारा कबो कानपूर नाही आएंगे”
गुड्डू और गोलू ने मंगल फूफा को देखा , फिर एक दूसरे को देखा और गोलू बोला,”का गुड्डू भैया ! जियादा जोर से मार दिए का ?”
“तुमहू भी तो हमायी भड़ास ओह्ह्ह पर निकाले”,गुड्डू ने खीजकर कहा
दोनों मंगल फूफा से माफ़ी मांगते या कुछ कहते उस से पहले मंगल फूफा वहा से चले गए।
गुड्डू और गोलू ने मायूसी से एक दूसरे को देखा और फिर गुड्डू ने कहा,”उह्ह्ह तो चला गवा अब लास का का करे ?”
“जे का भी कुछो,,,,,,,,,,,,,,,,,ए गुड्डू भैया फूफा कहा गया ?”,गोलू ने पहले शांत स्वर में गुड्डू से कहा और जैसे नीचे देखा आदर्श फूफा गायब थे और ये देखकर वह चिल्लाया
“चिल्ला काहे रहे हो ? अभी तुम्हाये सामने ही तो गया है उह्ह्ह नाटका”,गुड्डू ने खीजकर कहा
“अरे उह्ह्ह नाही हमहू आदर्श फूफा की बात कर रहे है,,,,,,,,,,,,,आदर्श फूफा कहा है ?”,गोलू ने गुड्डू का सर नीचे करके कहा तो गुड्डू ने देखा आदर्श फूफा की लाश गायब है
गुड्डू ने गोलू को देखा और घबराये हुए स्वर में कहा,”अबे गोलू ! आदर्श फूफा कहा गए ?”
“गुड्डू भैया ! आदर्श फूफा मरकर कही भूत तो नाही बन गए ?”,गोलू ने गुड्डू से चिपककर रोते हुए कहा तभी किसी ने गुड्डू के कंधे पर हाथ रखा और गुड्डू जोर से चिल्लाया , गुड्डू के साथ गोलू भी चिल्लाया और जैसे दिवार पर छिपकली चिपकती है वैसे ही गोलू गुड्डू से जा चिपका।
गुड्डू और गोलू इतनी जोर से चिल्लाये कि कमरे में बैठा लवली भागकर बाहर आया देखा गुड्डू-गोलू मारे डर के एक दूसरे से चिपके है और थर थर काँप रहे है तो लवली ने उनके पास आकर कहा,”का हुआ ! चिल्ला काहे रहे हो तुम दोनों ?”
“भू भू भू भूत लवली भैया , भूत , हमाये पीछे भूत है”,गुड्डू ने काँपती आवाज में कहा
लवली ने गुड्डू और गोलू दोनों को पीछे पलटा और सामने खड़ी राजकुमारी भुआ की तरफ इशारा करके कहा,”जे भूत दिख रही है तुम दोनों को ?”
गोलू ने देखा गुड्डू का कंधा थपथपाने वाली राजकुमारी भुआ है तो उसने झेंपते हुए गुड्डू से धीरे से कहा,”हीहीहीही भूत नाही गुड्डू भैया इह तो चुड़ैल है,,,,,,,,,,,,,,!!!”
लवली ने सुना तो गोलू के सर पर एक चपत लगाई और उसे घुरा।
“का भुआ ! तुमहू हिया का कर रही हो ? डरा दी हमका”,गुड्डू ने चिढ़कर कहा
“अरे हमहू तो तुम्हाये फूफा को ढूंढ रहे है , साम सा कुछो खाये नाही है सोचा खाना खिलाय दे , तुमहू देखे ओह्ह्ह का कही ?”,राजकुमारी भुआ ने पूछा
“फूफा तो लास,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने परेशानी भरे स्वर में कहा तो भुआ हैरानी से बोली,”का लास,,,,,,,,,,,,,,,!!”
गोलू ने तुरंत बात सम्हाली और कहा,”अरे जे कह रहा है भुआ लास्ट टाइम हमहू फूफा को नीचे संडास की तरफ जाते देखे थे”
“का संडास की तरफ , लेकिन हुआ काहे गए है ?”,भुआ ने सोचते हुए कहा
“कपडे खरीदने गए है , अरे भुआ आदमी संडास काहे जाता है ?”,गोलू ने कहा
“जब ओह्ह्ह का पेट खराब होता है और पेट मा गुड़गुड़ होने लगती है,,,,,,,,,,,,,!!!”,भुआ ने मासूमियत से कहा
“हाँ तो बस फूफा का भी पेट खराब है इहलीये गए है”,गोलू ने कहा
“ल्यो पेट खराब है और हमे नाही बताये”,भुआ ने मुँह बनाकर कहा
“अरे तो आप का ओह्ह्ह टट्टी रोक देती ?”,भुआ की बातो से झल्लाकर गोलू ने कहा
“छी छी हम ऐसो काम काहे करेंगे ? और तुमहू घर काहे नाही गए हिया का कर रहे हो इत्ती रात मा ?”,भुआ ने कहा
“गुड्डू भैया से सादी कर लिए है , अब जे ही हमाये पति परमेश्वर है तो हमको जे के साथ ही रहना है,,,,,,,,,,,,,!!”,भुआ की बातो से परेशान होकर गोलू ने कहा
“का कुछ भी बोल रहे हो ?”,गुड्डू ने गोलू से कहा और फिर भुआ की तरफ पलटकर बोला,”भुआ ! तुमहू नीचे जाओ फूफा नीचे ही होंगे”
“लगता है मार खाकर पगलाय गए हो”,भुआ ने गोलू से कहा और वहा से चली गयी
मार का नाम सुनकर गोलू के अंग अंग में दर्द होने लगा और वहा चिल्लाया,”हाँ हाँ पगला गए है , पगला गए है तभी तो दिनभर हिया पड़े रहते है और जो आता है हमाये पर हाथ साफ़ करके चला जाता है”
“शांत हो जाओ गोलू”,गुड्डू ने गोलू को रोककर कहा लेकिन गोलू तो कुछ ज्यादा ही गुस्से में था गुड्डू को धक्का देकर पीछे किया और कहा,”अरे घंटा सांत हो जाए , हमायी अशांति की वजह आप ही है गुड्डू भैया”
एक तो पिरोगराम के नाम पर एक ठो गिलास पानी तक नाही पिलाये हमे ऊपर से उह्ह्ह तुम्हाये बाप कुत्तो की तरह मारे है हमे और आप कह रहे है शांति रखिये,,,,,,,,,,,,,अरे सांति तो हमाये स्कूल मा थी , बहुत प्रेम करती थी हमसे लेकिन ओह्ह्ह की नाक बहती रहती थी इहलीये रिजेक्ट कर दिए हमहू,,,,,,,,,,,!!!!”
लवली ने देखा गोलू कुछ भी उटपटांग बातें कर रहा है तो उसने अफसोस में गोलू का कंधा थपथपाया और वापस अपने कमरे में जाकर गुड्डू और गोलू दोनों के मुँह पर दरवाजा बंद कर दिया।
गुड्डू गोलू ने एक दूसरे को देखा और फिर दोनों वही हॉल के दो अलग अलग कोनो में जाकर बैठ गए। गोलू नीचे जा नहीं सकता था और गुड्डू नीचे जाना नहीं चाहता था।
अब आप सब सोच रहे होंगे कि आदर्श फूफा कहा गए ? तो वो कही नहीं गए थे वही हॉल में खम्बे से अपनी पीठ लगाकर बैठे थे। जब गुड्डू और गोलू ने झगडे के टाइम उन्हें लाते मारी थी तो सहसा ही उन्हें होश आ गया और वे चुपचाप वहा से निकलकर खम्बे के पीछे जा छुपे और फिर वही बैठे बैठे उन्हें नींद आ गयी।
गोलू इतनी मार खा चुका था कि खाना खाने की उसमे हिम्मत नहीं थी इसलिए बैठे बैठे वह भी खम्बे की तरफ लुढ़क गया बस गनीमत था कि उसकी नजर वहा सोये आदर्श फूफा पर नहीं पड़ी वरना उसके प्राण वही निकल जाते। गुड्डू भी थक चुका था इसलिए बालकनी में पड़े झूले पर आकर लेट गया और उसे नींद आ गयी।
देर रात लवली बाथरूम जाने के लिए उठा और बाहर आया तो देखा आदर्श फूफा और गोलू एक दूसरे के पास सो रहे है और गोलू ने ठंड के मारे अपना सर घुटनो से लगा रखा है। वही जब गुड्डू पर नजर पड़ी तो देखा वह भी ठण्ड की वजह से सिकुड़कर सो रहा है। लवली बाथरूम से वापस आया और कमरे से
दो चद्दर ले आया। एक आदर्श फूफा और गोलू को ओढ़ा दी दूसरी गुड्डू को ओढ़ाकर अपने कमरे में चला गया।
सुबह सुबह मिश्रा जी के घर के आँगन का नजारा देखने लायक था। मिश्रा जी नहा धोकर तख्ते पर बैठे थे। मिश्राइन , शगुन , बिंदिया , वेदी , राजकुमारी भुआ एक तरफ खड़ी तरफ खड़ी थी। रूपा उन से अलग सीढ़ी पर खड़ी थी। आज भी उसने गुड्डू के कपडे पहने थे और आज तो वह कुछ ज्यादा ही खुश नजर आ रही थी। गुड्डू और गोलू एक साथ खड़े थे और उन्होंने मंगल फूफा के साथ मिलकर सुबह सुबह ही ये फैसला कर लिया कि वे घरवालों को आदर्श फूफा के मरने की बात बाद में बताएँगे पहले रूपा का फैसला हो जाये।
जबकि आदर्श फूफा के बगल में सोये गोलू को ये भनक तक नहीं लगी कि आदर्श फूफा ज़िंदा है।
मंगल फूफा रूपा के ठीक सामने खड़े थे , कभी शर्ट से झाँकते अपने पेट को अंदर करते , कभी तेल से चुपड़े अपने बालो को सही करते तो कभी रूपा को देखकर मुस्कुराते। लवली सीढ़ियों पर एक तरफ बैठा ऊंघ रहा था और मिश्राइन की त्यौरियां चढ़ी हुई थी कि सुबह सुबह मिश्रा जी ने फिर क्यों ये नया तमाशा लगा रखा है ?
आँगन में मौजूद लोगो में से किसी ने ध्यान ही नहीं दिया कि आदर्श फूफा वहा नहीं है। मिश्रा जी ने देखा मंगल फूफा तो मौजूद है लेकिन नवरतन अभी तक नही आया उन्होंने घर के दरवाजे की तरफ देखा तभी सबके कानो में बेंड बाजे की आवाज बजी। नवरतन हाथ में वरमाला पकडे , शेरवानी पहने , कुछ बाजे वालो के साथ मिश्रा जी के घर के अंदर आ रहा था और गाना बज रहा था
“बहारों फूल बरसाओ , मेरा महबूब आया है , मेरा महबूब आया है”
ये सब देखकर फूफा ने गुस्से से अपनी रोकी हुई साँस को छोड़ा और शर्ट के दो बटन टूटकर नीचे जा गिरे।
( क्या आदर्श फूफा लेंगे गुड्डू और गोलू से अपनी मार का बदला ? कब होंगे गुड्डू और गोलू अपनी जिंदगी को लेकर गंभीर ? नवरतन के इस अंदाज पर क्या रूपा हो जायेगी फ़िदा ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
