Manmarjiyan Season 5 – 3
मंगल फूफा की चाशनी से भी ज्यादा मीठी बातें सुनकर गुप्ता जी ने अपनी प्लेट उठायी और जाकर आदर्श फूफा के बगल में बैठ गए। आदर्श फूफा को गुप्ता जी और गोलू फूटी आँख नहीं सुहाते थे इसलिए मुँह बनाकर कहा,”हिया काहे चले आये ?”
“हमायी अब्सेंस मा मटर पनीर तो आर्डर नाही कर दिए जे देखने आये है,,,,,,,,,,,,,,अरे दिखाई नहीं देता खाना खाने आये है। तुमहू भी खाय ल्यो”,गुप्ता जी ने रोटी को तोड़कर दाल में मिलाते हुए कहा
आदर्श फूफा ने पानी से भी पतली दाल और चमड़े से बाद थोड़ी कम मजबूत रोटी देखी और घमंड भरे स्वर में कहा,”सेर कबो घास नाही खाता”
गुप्ता जी ने सुना तो मुँह बनाकर गर्दन झटकाई और अपनी सानी हुई दाल रोटी खाने लगे लेकिन कुछ ही दूर बैठे मिश्रा जी ने जब आदर्श फूफा की बात सुनी तो चिढ गए क्योकि जिन हालत में ये लोग थे उन हालातों में दाल रोटी मिलना भी बहुत बड़ी बात थी उन्होंने ऊँचे स्वर में कहा,”हाँ तो गुप्ता जे सेर बाबू से कहो जाकर पिकअप मा तशरीफ़ रखे हिया बैठकर कुर्सी ना तोड़े”
“जे का कहेगा ? हमहू बहरे नाही है सब सुन रहे है”,कहते हुए आदर्श फूफा उठे और पिकअप की तरफ जाने लगे लेकिन सही सलामत पिकअप तक पहुंच जाए उनकी इतनी अच्छी किस्मत कहा। आदर्श फूफा गुस्से में आकर जैसे ही जाने लगे गोलू अपनी प्लेट लेकर उठा और आदर्श फूफा उस से एकदम से टकरा गए। चाहते तो आदर्श फूफा नीचे गिर सकते थे लेकिन नहीं उन्हें गिरने के लिए मिला वो टेबल जहा रूपा , मंगल फूफा , यादव जी और शर्मा जी बैठे थे और गिरे भी तो जाकर सीधा रूपा के सामने,,,,,,,,,,,,आदर्श फूफा का शरीर टेबल पर और मुँह दाल के कटोरे में
“ल्यो सेर घास नाही खाते पर दाल मा मुँह मार लेते है,,,,,,,,,लगता है बेजेटेरियन सेर है”,गुप्ता जी ने चटखारे लेकर अपनी दाल रोटी खाते हुए कहा
आदर्श फूफा का पूरा मुँह दाल में भर गया था और आँखों में मिर्च जाने से आँखे बंद। उन्होंने आपने सर उठाया दाल आँख नाक के साथ साथ मुँह में भी चली गयी जिस से आदर्श फूफा खाँसे और मुँह में भरा दाल रूपा पर उछल गया लेकिन सामने बैठी रूपा उनको नजर नहीं आयी। रूपा ने देखा तो खींचकर एक थप्पड़ आदर्श फूफा को मारा और वहा से उठकर चली गयी।
रूपा के हाथ से पड़े भारी भरकम थप्पड़ से आदर्श फूफा टेबल पर घूम गए और मुँह यादव जी की तरफ हो गया। आदर्श फूफा के टेबल पर गिरते समय सब खाना तो पहले ही बर्बाद हो चुका था बस यादव जी के हाथ में आधी रोटी रह गयी थी खाये तो खाये कैसे ?
उनकी नजर आदर्श फूफा के मुँह पर लगी दाल पर पड़ी तो उन्होंने रोटी को आदर्श फूफा के मुँह पर घुमाया और खाकर पास खड़े गोलू से बोले,”दाल मा नमक थोड़ा जियादा नाही हो गया गोलू ?”
“अबे गोबरप्रसाद ! उह्ह्ह दाल नाही आदर्श फूफा के नाक का माल है , साला कुछ भी खा ले रहे हो,,,,,,,,,,,,ए पिताजी ! हमको साला जे सब देख के उलटी आ रहा है,,,,,,,,,,,,,उह्ह्ह्हह्हववववववव”,गोलू उबकाई लेते हुए गुप्ता जी की तरफ आया
गोलू की बात सुनकर गुप्ता जी नजर पड़ी अपनी थाली पर जिसमे उन्होंने कुछ देर पहले ही दाल रोटी साना था लेकिन अब वह उन्हें कुछ और ही लग रहा था !
गुप्ता जी ने अपनी थाली को टेबल पर पटका और उठकर गोलू से कहा,”हमको तो लगता है गोलू इह ससुरा यादववा अपने तबेले मा गोबर खाता है , साला तबही ना इसको दाल में और माल में कोनो फर्क नाही समझ आ रहा”
आदर्श फूफा ने अपने कुर्ते के बाजु से अपनी आँखे पोछी , थोड़ा थोड़ा सब नजर आया तो टेबल से उतरे और गोलू की तरफ आते हुए कहा,”साले गोलू ! भंड आदमी , कानपूर जाकर सबसे पहले तुम्हायी आँखों का इलाज करवाए है हमहू ,, साले टकराने के लिए हर बार तुमको हम ही मिलते है”
“तो आप का माधुरी दीक्षित बनके हमाये सामने से गुजर रहे थे ?”,गोलू ने तुनककर कहा
इधर इन लोगो का बहस चालू था उधर मंगल फूफा वाशबेसिन के सामने रूपा के साथ खड़े उसका मुँह धुलवा रहे थे। यादव जी गुप्ता जी से उलझ गए क्योकि गुप्ता जी ने उन्हें तबेले का गोबर खाने वाला कहा। बिंदिया और लवली मायूसी से एक दूसरे को देख रहे थे तो वही गुड्डू और मनोज उठकर चुपचाप पिकअप की तरफ चले गए क्योकि उन्हें पता था थोड़ी देर में मिश्रा जी फटने वाले है।
अब आप सोच रहे होंगे मिश्रा जी कहा है ? तो मिश्रा जी बेचारे अपना सर पकडे बैठे थे क्योकि इन सबको यहाँ लेकर आने का फैसला तो उनका ही था ना।
ढाबे वाले ने देखा चार जन लड़ रहे है तो वे उन्हें समझाने आये लेकिन यहाँ कौन समझने वाला था उलटा गुस्से में आकर आदर्श फूफा ने ढाबे वाले की ही धुलाई कर दी। ढाबे वाला भी मजबूत इंसान था मार खाकर अंदर गया लेकिन जब बाहर आया तो उसके साथ में 8-10 मुस्टंडे थे। ये देखकर आदर्श फूफा , गुप्ता जी , गोलू और यादव जी के हाथ पैर फूल गए। गोलू ने मदद के लिए गुड्डू की तरफ देखा लेकिन गुड्डू , मिश्रा जी , लवली , बिंदिया और शर्मा जी वहा नहीं थे। गोलू ने पिकअप की तरफ गर्दन घुमाई तो देखा वे सब तो उधर जा रहे थे।
मुसीबत के समय गोलू का दिमाग ट्रेन से भी तेज दौड़ता है लेकिन उलटा , जैसे ही ढाबे का मालिक मुस्टंडो के साथ आया गोलू ने वाशबेसिन के पास खड़े एक हट्टे कट्टे आदमी की तरफ इशारा करके कहा,”हमे मारने से पहिले हमाये बॉस से बात करो,,,,,,!!”
“अच्छा ! ठीक है साला पहिले उसी से निपटते है”,ढाबे के मालिक ने कहा और वाशबेसिन की तरफ बढ़ गया साथ ही उसके साथ आदमी भी उसी तरफ चले गए।
गोलू ने तुरंत सबको भागने को कहा और सब भाग गए। ड्राइवर सीट पर इस बार गुड्डू बैठा था उसके बगल में थे लवली और बिंदिया। मनोज थक गया था इसलिए पीछे चला आया। मिश्रा जी भी पीछे ही बैठे थे कि शर्मा जी , आदर्श फूफा , गुप्ता जी , यादव जी और गोलू भागते हुए आये और सब पिकअप में चढ़ गए बस शर्मा जी नहीं चढ़ पाए। उनकी आँखे अभी भी पूरी नहीं खुली थी इसलिए पिकअप में चढ़ने के बजाय वे हवा में ही अपना पैर उठाकर रख रहे थे। गोलू ने देखा तो पिकअप से नीचे उतर गया और शर्मा जी के पीछे जाकर खड़ा हो गया।
गुप्ता जी ने देखा हमेशा अपने ससुर से चिढ़ने वाला गोलू आज पहली बार उनकी मदद करने गया है तो उन्होंने खुश होकर मिश्रा जी से कहा,”देखा मिश्रा जी ! जे गोलुआ साला चाहे कितनी भी बकैती करे लेकिन मुसीबत मा सबसे आगे रहता है,,,,,,,,,,जोन ससुर ओह्ह्ह का पागलखाने भिजवाय रहे ओह्ह की मदद करने कैसे पिकअप से कूद गवा,,,,,,,,,,,,जुग जुग जिए हमाओ गोलूआ,,,,,,,,,,,,,,,,अबे गोलू”
गुप्ता जी ने प्यार से कहा लेकिन आखिर शब्द गुस्से और हैरानी में कहे क्योकि शर्मा जी के पीछे खड़ा गोलू उनको एक लात मार चुका था और बेचारे शर्मा जी नीचे जा गिरे , अच्छा लात खुद गोलू ने मारी और उन्हें उठाते हुए खुद ही चिल्लाया,”अबे साला हमाये ससुर जी को काहे मार रहे हो बे ?”
शर्मा जी को कुछ समझ नहीं आया वे तो बेचारे मारे दर्द के मुँह फाडे हुए थे।
गोलू ने उनका मुँह बंद किया और उनको पिकअप में चढ़ाते हुए कहा,”अरे बंद करो जे मक्खी घुस जाही है अंदर”
मिश्रा जी ने गुप्ता जी की तरफ देखा और दाँत पीसकर कहा,”का कह रहे थे अभी मुसीबत मा सबसे आगे रहते है तुम्हाये गोलू , जे कहो मुसीबत की सारी जड़ ही तुम्हाये जे गोलू महाराज है,,,,,,,,,!!”
गुप्ता जी ने सुना तो चुपचाप साइड में जाकर बैठ गए क्योकि गलत आदमी के सामने , गलत टाइम पर गोलू की तारीफ जो किये रहे। गोलू भी उछलकर पिकअप में चढ़ गया तो मिश्रा जी ने कहा,”ए बेटा ! हिया आवा जरा”
मिश्रा जी के मुँह से “बेटा” सुनकर गोलू का मन गदगद हो गया ! वह ख़ुशी ख़ुशी उनकी तरफ आया तो मिश्रा जी ने उसकी गर्दन दबोची और कहा,”अबे उह्ह तुम्हाये ससुर रहे और तुमहू ओह्ह का लात मार दिए,,,,,,,,,,,का लाज शर्म नाही बची तुम्हरे अंदर ?”
शर्मा जी ने सुना तो कहा,”कौन मारा हमको लात ?”,
आदर्श फूफा शर्मा जी के बगल में ही बैठे थे इसलिए दबे स्वर में आग में घी डालते हुए कहा,”तुम्हरे महान दामाद ने , ओहि दामाद जिनको तुमहू अपनी बिटिया दिए रहय,,,,,,,तुमको गिरा हुआ देखकर तो ऐसा लग रहा था जैसे इह लात बहुते दिल से मारी हो,,,,,,,,,!!!”
आदर्श फूफा की बात सुनकर गोलू मिश्रा जी के चंगुल से निकला और आदर्श फूफा की तरफ आकर कहा,”हाँ हाँ लगाय दयो आग , कानपूर की भुआ हो न तुमहू जो माचिस और घासलेट साथ लेकर आये हो,,,,,,,,,,,,!!”
“हम का आगे लगाए हमहू तो सच्चाई बताय रहे है”,आदर्श फूफा ने मुँह बनाकर कहा
गोलू ने देखा वह आदर्श फूफा की तरफ आया तो सही लेकिन उन तक पहुंच नहीं पा रहा , पहुँचता भी कैसे पीछे से मिश्रा जी ने उसकी गुद्दी जो पकड़ी हुई थी।
गोलू को आदर्श फूफा से बदतमीजी करते देखकर मिश्रा जी ने उसे पीछे ला पटका और कहा,”आग तो हम लगाएंगे गोलू उह्ह्ह भी तुम्हायी जबान पर का है कि बहुते बद्तमीज हो गए हो आजकल,,,,,,,,,,ना ससुर देख रहे न फूफा सबको अपने बराबर समझ लिए,,,,,,,,,,,,चुपचाप हिया बइठो वरना मुँह खोंच देंगे तुम्हरा,,,,,,,,,,!!!”
मिश्रा जी की एक फटकार से ही गोलू शांत हो गया और चुपचाप पिकअप के कोने में जा बैठा। मिश्रा जी ने गुड्डू को आवाज दी,”ए गुड्डू ! गाडी आगे बढ़ाओ , हिया रुके तो पतो नाही जे सब के चक्कर मा कल को सूरज देख पाए है कि नाही,,,,,,,,,,,,!!!”
मिश्रा जी की आवाज सुनकर गुड्डू ने पिकअप स्टार्ट की। सब आ चुके थे लेकिन मंगल फूफा गायब थे ये देखकर गुप्ता जी चिल्लाये,”अबे ए गुड्डू गुड्डू गुड्डू अबे गाडी रोको,,,,,,,,,,,,!!!”
गुड्डू ने एकदम से ब्रेक लगाया तो सभी एक बार फिर एक दूसरे में आ गिरे लेकिन इस बार कोई भसड़ नहीं हुई क्योकि मिश्रा जी की जलती निगाहे सब पर थी। उन्होंने गुप्ता जी की तरफ देखा और कहा,”अब तुम्हे का चाहि , पिकअप काहे रुकवा दिए ?”
“अरे मिश्रा जी मंगलू , मंगल फूफा और रूपा कहा है ?”,गुप्ता जी ने कहा तो मिश्रा जी के चेहरे पर चिंता की लकीरे उभर आयी क्योकि अगर मंगल फूफा अकेले होते तो शायद वे उन्हें यहाँ छोड़ भी जाते लेकिन रूपा भी उनके साथ थी सोचकर मिश्रा जी सोच में पड़ गए।
गोलू ने बॉस का नाम लेकर जिस आदमी की तरफ इशारा किया था वह वहा से चला गया अब बचे मंगल फूफा और रूपा तो रूपा अपना मुँह साफ करके जैसे ही पलटी मंगल फूफा ने ऋतिक के कमरे से चुराए रुमाल को बाहर निकाला और शरमाते हुए रूपा की तरफ बढ़ा दिया। रूपा मुस्कुराई और रुमाल लेकर अपना मुँह पोछने लगी। मुँह पोछकर रूपा ने रुमाल मंगल की तरफ बढ़ाया तो मंगल फूफा ने गीले
रूमाल को समेटते हुए कहा,”एक बात बताये रूपा जी ! आप ना बिना मेकअप के भी बहुते सुन्दर दिखती है।”
“सच ?”,रूपा ने शरमाते हुए कहा
“हमाये सर पर बचे चार बालों की कसम , खाली मुँह धोकर भी आप माधुरी जैसी हसीन लग रही है”,मंगल फूफा ने रूपा की तारीफ के पुल बांधकर कहा
“धत ! जाईये ना मंगल जी आप भी कैसी बाते कर रहे है ? अब इत्ते भी खबसूरत नहीं है हम,,,,,,,,,!!”,रूपा ने कहा
“अरे आपको का पता रूपा जी हमायी नजर से देखिये”,मंगल फूफा ने प्यार से रूपा का हाथ अपने छोटे छोटे हाथो में लेकर कहा
“अच्छा मंगल जी ! आप उह्ह्ह बख्त हमसे कुछो कह रहे थे”,रूपा ने अपनी छोटी घुमाते हुए कहा
मंगल फूफा को याद आया कि वह रूपा से अपने प्यार का इजहार कर रहे थे तो उन्होंने रूपा का हाथ पकड़ा और अपने घुटने पर आ बैठे और कहा,”हम आपसे कुछो कहना चाहते थे रूपा जी”
“ऐसे घुटनो पर बैठकर,,,,,,,,,,,,!!!”,रूपा ने कहा
“हाँ हिंदी फिल्मो मा हीरो ऐसे ही अपने दिल की बात कहता है”,मंगल फूफा ने कहा जबकि रूपा के सामने घुटने पर बैठे हुए ऐसे लग रहे थे जैसे कोई बच्चा चिज्जी दिलाने के लिए अपनी मम्मी को तंग करता है। रूपा ने देखा तो कहा,”मंगल जी उठ जाईये ! वैसे भी हमाये सामने खड़े होकर आप ऐसे ही लगेंगे जैसे घुटनो पर बैठे है,,,,,,,,,,,बात का है उह्ह्ह बताईये ?”
रूपा की बात सुनकर मंगल फूफा का दिल ही टूट गया। जब से कानपूर आये थे हर कोई उन्हें छोटा रिचार्ज , सिलेंडर , बुटका , हाल्फ टिकट बोल रहे थे और रही सही कसर रूपा ने पूरी कर दी। मंगल फूफा उठे और रूपा का हाथ थामकर कहा,”रूपा जी हम आपसे जे कहना चाहते है कि हमे आपसे मो,,,,,,,,,,,,,,,मो,,,,,,,,,,,,,,,मो,,,,,,,,,,,,,,अबे का है बे काहे डिस्टर्ब कर रहे हो ?”
रूपा से अपने प्यार का इजहार करते हुए मंगल फूफा तीन बाद मो पर अटके क्योकि तीनो ही बार किसी ने उनका कंधा थपथपाया और तीसरी बार जैसे ही किसी ने कन्धा थपथपया मंगल फूफा पलटकर भड़के
मंगल फूफा के सामने ढाबे का मालिक और 8-10 मुस्टंडे खड़े थे। ढाबे के मालिक ने मंगल फूफा से कहा,”तुम्ही हो बॉस ?”
बॉस सुनकर मंगल फूफा को अपने पुराने दिन याद आ गए जब उनके लिए काम करने वाले लड़के उन्हें बॉस बुलाते थे। मंगल फूफा मुस्कुराये , अपने दोनों हाथो की हथेलियों में थू थू किया
और बड़े ही स्टाइल से अपने दोनों हाथो को कनपटी के लगाकर पीछे करके स्टाइल में कहा,”हाँ ! हमहि है बॉस , साला हमे नाही पता था हमाओ चर्चा हिया तक है”
ढाबे के मालिक ने सुना तो रूपा से साइड में खड़े होने को कहा और फिर पलटकर अपने लड़को से कहा,”ए मारो रे इसको,,,,,,,,,,,!!”
मंगल फूफा कुछ समझ पाते इस से पहले आदमी मंगल फूफा पर टूट पड़े रूपा ने देखा तो मदद के लिए पिकअप की तरफ भागी लेकिन पिकअप तो वहा से गायब थी। रूपा वापस आयी तब तक मंगल फूफा का अमंगल हो चुका था। ढाबे के मालिक ने देखा की मंगल फूफा को अच्छी खासी मार पड़ चुकी है तो अपने आदमियों से वहा से चलने को कहा
मंगल फूफा जैसे तैसे करके उठे और मरे हुए स्वर में कहा,”ए भैया ! ए हमको मारे उह्ह्ह ठीक है पर काहे मारे जे तो बताए दयो”
ढाबे वाला मंगल फूफा के सामने आया और कहा,”अभी जोन 10-12 लोग हिया बैठकर दाल रोटी खाये है उनमे जो सबसे अतरंगी लौंडा था ना उह्ह्ह हमको बोला कि हमको मारने से पहिले हमाये बॉस से बात करो”
“तो तुमहू बात कहा किये ?”,मंगल फूफा ने मुश्किल से साँस लेकर कहा
“हमहू बात नाही करते सीधा पेल देते है,,,,,,,,,!!!”,कहकर ढाबे का मालिक वहा से चला गया
मंगल फूफा ने सुना तो उन्हें समझ आया कि पिकअप से उतरा अतरंगी लौंडा कोई और नहीं बल्कि गोलू है तो नीचे आ गिरे और बड़बड़ाये,”अबे साले गोलू ! कौन जन्म का बदला लिए बे तुमहू हमसे ? एक बार तुमहू हमाये हाथ लग जाओ साला तुमको गोलू मार के जेल चले जायेंगे”
गोलू मंगल फूफा को बचाने ही आया था लेकिन जैसे ही मंगल फूफा की हालत देखी उलटे पैर वापस भाग गया।
( क्या ढाबे वाला लेगा मिश्रा जी से दाल रोटी का पैसा या मंगलू की पिटाई से हो चुकी भरपाई ? क्या रूपा मांगेगी मिश्रा जी और बाकि सब से मंगल फूफा के लिए मदद ? क्या कानपूर मिश्रा जी के हाथो बनने वाली है गोलू की बत्ती ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
