Manmarjiyan Season 5 – 21
मंगल फुफा ने गोलू से माल यानि “रूपा” को बाहर लेकर जाने को कहा और बैलबुद्धि गोलू महाराज समोसे इमरती से भरी प्लेट लेकर बाहर चला आया। गुड्डू ने देखा तो गोलू से कहा,”इह सब कहा से मिला बे ?”
“अंदर से लेकर आये है ल्यो खाओ”,गोलू ने एक समोसा उठाकर खुद खाते हुए कहा
“और उह्ह्ह मंगलू कहा है ?”,गुड्डू ने पूछा
“उह्ह्ह छुरा लेकर नवरतन के पीछे पड़ा है”,गोलू ने समोसे के साथ इमरती उठाकर मुँह में रखते हुए कहा
गड्डू ने सुना तो गोलू के सर पर एक चपत लगाई और कहा,”अबे तो हिया खड़े होकर समोसा जलेबी का खा रहे हो , अंदर चलकर रोको उन्हें कही उह्ह्ह दोनों मा कोनो एक मर गवा तो कौन खायेगा उनकी तेहरवी का भोज ?”
गोलू ने सुना तो समोसा मुँह में ही रह गया और उसे मंगल फूफा का गुस्सा याद आ गया जो वो घर पर गुड्डू के लिए दिखा
रहे थे। उसने हाथ में पकड़ा बचा हुआ समोसा इमरती फेंका और अंदर भागा , गुड्डू भी उसके पीछे अंदर भागा।कुछ देर पहले गोलू जिस घर को घर छोड़कर गया था वो अब कबाड़खाना बन चुका था। मंगल छुरा लेकर अब भी नवरतन के पीछे भाग रहा था और रूपा हैरान परेशान सी एक कोने में खड़ी दोनों को देख रही थी। गोलू और गुड्डू ने एक दूसरे को देखा और फिर गुड्डू ने पकड़ा नवरतन को और गोलू ने सम्हाला मंगल फूफा को,,,,,,,,,,,,,,,,दोनों को थामे गुड्डू और गोलू आमने सामने ही खड़े थे।
“ए गोलू ! छोड़ हमको , साला आज इस नवरतन का खेल ही खत्म कर देहि है हम,,,,,,,,,,हमायी रूपा को समोसा खिलाएंगे इह साला जे से पहिले इह के हाथ ना काट दे हम ! अरे छोड़ हमको”,गोलू की बाँहो में छटपटाते हुए मंगल फूफा ने सामने गुड्डू की बाँहो में दबोचे नवरतन को देखकर गुस्से से कहा
“अरे तुमहू का खेल खत्म करि हो हमाओ , तुमहाओ खेल तो पहिले से खत्म है और रूपा जी को हमहू अपने हाथ से समोसा खिलाये चाहे रसमलाई तुमहू इत्ता काहे बिलबिलाय रहे हो बे ? तुम्हायी औकात है रूपा जी को एक ठो चाय पिलाने की भी ?”,नवरतन ने भी मंगल फूफा को करारा जवाब दिया
मंगल फूफा ने सुना तो मायूसी से गर्दन घुमाकर गोलू की तरफ देखा तो गोलू ने दबे स्वर में कहा,”हमे का देख रहे हो ? सही कह रहा है उह्ह,,,,,,,,कभी अपने पैसो से एक ठो कप चाय भी पिए हो”
मंगल फूफा ने सुना तो भड़क गए और अपना सर गोलू की छाती पर मारकर कहा,”पईसा नहीं है तो का हुआ ? प्यार भरा दिल तो है ना हमाये पास”
गोलू ने सुना तो चिढ़कर कहा,”हाँ तो हमसे का कह रहे हो , उह्ह रूपा के नए आशिक से कहो ना”
गोलू को घूरते हुए मंगल फूफा ने सामने नवरतन को देखा और कहा,”ए नवरतन ! पइसे का गुरुर हमको नाही दिखाना , हमहू चाहे ना तो दुइ चार लाख से
रूपा जी की नजर उतार कर तुम जैसे भिखारियों में बटवा दे”
गोलू ने जैसे ही मंगल फूफा के मुँह से दो चार लाख रूपये का नाम सुना और सपने में खो गया जहा मंगल फूफा 500-500 के नोट गोलू पर उड़ा रहे थे और गोलू लहंगा चोली पहने , दुपट्टे का पल्लू मुँह में दबाये मंगल फूफा के इर्द गिर्द नाच रहा था। गोलू मंगल फूफा को छोड़कर उसके सामने आया और हाथ जोड़कर कहा,”जहापनाह ! कहा आप उह्ह बॉडीबिल्डर रूपा के चक्कर मा अपनी जवानी खराब कर रहे है , हिया देखिये इह पिंकेश का रूपा से कम है”
गुड्डू ने सुना तो इधर उधर देखा और उसकी नजर पास ही सिलाई मशीन पर पड़े प्लास्टिक के बोतल पर पड़ी तो उसने उसे उठाया और गोलू को मारकर कहा,”अबे पगलाय गए हो गोलू , बाहिर से कित्ता भी अनारकली बन जाओ अंदर से तुमहू सलीम ही रहोगे”
बोतल की मार और गुड्डू की फटकार से गोलू को होश आया और उसने जल्दी से मंगल फूफा को फिर पकड़ लिया और कहा,”ए फूफा ! काहे उह्ह बेचारे नवरतन के पीछे पड़े हो ? अरे छोड़ दयो ना”
गोलू की बात सुनकर गुड्डू ने कहा,”ए नवरतन भैया ! अरे इह सब का है काहे दोनों एक दूसरे की जान के दुश्मन बने हुए हो , जान दयो ना”
“अच्छा तो तुमहू चाहते हो हम जान दे दे”,नवरतन ने भड़ककर गुड्डू से कहा और फिर रूपा की तरफ देखकर बड़े प्यार से बोला,”लेकिन इह अप्सरा के लिए तो हमहू अपनी जान भी दे देंगे गुड्डू”
नवरतन के मुँह से अप्सरा सुनकर रूपा शर्माने लगी ये देखकर मंगल फूफा चिल्लाये,”ए रूपा जी ! इह ससुरे की मीठी मीठी बातो मा ना आना,,,,,,,,,,,,!!!!”
रूपा का शर्माना तुरंत बंद हो गया तो गुड्डू ने नवरत्न को छोड़कर कहा,”अबे हमहू जान देने की नहीं बात को जान दयो कह रहे है,,,,,,,,,,,!!!”
गोलू ने भी मंगल फूफा के हाथ से छुरा लेकर साइड में फेंका और मंगल फूफा से कहा,”ए फूफा ! शांति से बात करेंगे , पहिले जान ल्यो मामला का है ?”
“हाँ ठीक है”,मंगल फूफा ने कहा
गुड्डू भी नवरतन को समझा बुझाकर गोलू और मंगल फूफा के पास ले आया अब कमी थी तो बस रूपा जी की जिसके लिए इतना तमाशा हो रहा था। गोलू ने कुछ दूर खड़ी रूपा को देखा तो थोड़ा गुस्से में कहा,”रूपा,,,,,,,,,,!!!”
“थोड़ा पियार से बुलाओ”,मंगल फूफा ने कहा
“काहे ! बहिन लगती है तुम्हायी ?”,गोलू ने चिढ़कर कहा
मंगल फूफा ने सुना तो बुरा सा मुँह बना लिया लेकिन जैसे नजर सामने हँसते हुए नवरतन पर पड़ी तो खीजकर कहा,”बहिन लगती है ओह्ह्ह की हमायी तो घरवाली लगेगी”
“तो ओह्ह्ह्ह के चक्कर मा आप काहे मवाली बने हुए है ? खड़े रहिये चुपचाप”,गोलू ने कहा तो मंगल फूफा खामोश खड़े हो गए
गोलू ने पलटकर फिर रूपा को देखा और कहा,”ज़रा हिया आएँगी आप ?”
रूपा ने अपनी आगे आयी चोटी को पीछे किया और मटकते हुए गोलू की तरफ चली आयी और खड़ी हो गयी। पाँचो एक दूसरे को देख रहे और इन्तजार कर रहे किसी के बोलने का और आखिरकार गोलू बोल पड़ा,”ए गुड्डू भैया ! सबसे पहिले तो आप बताईये कि आप रूपा के साथ हिया का कर रहे है ?”
“अरे हम अपनी मर्जी से थोड़े आये है उह्ह्ह तो पिताजी हमे हिया भेजे रहे रूपा के कपड़ो का नाम दिलवाने के लिए”,गुड्डू ने कहा
गोलू ने सुना तो मंगल फूफा को देखा और गुस्से से कहा,”सुना ! नाप दिलवाने लाये है गुड्डू भैया रूपा को हिया,,,,,,,,,!!!”
मंगल फूफा ने सुना तो दूसरी तरफ देखने लगे क्योकि अभी कुछ देर पहले गुप्ता जी के घर में मंगल फूफा गुड्डू के टुकड़े करने की बात कर रहे थे। मंगल से निपट के गोलू पलटा रूपा की तरफ और कहा,”और का रूपा जी ? नाप देने आयी थी ना हिया तो नाप देना था हिया बैठकर समोसा खाने की का जरूरत थी ?”
“इन्होने कहा तो हम मना नहीं कर पाए”,रूपा ने कहा
“कल को इह कहेगा कुए मा कूद जाओ तो का कूद जाओगी ?”,गोलू ने चिढ़कर कहा
“ए गोलू ! आराम से बात करो यार होनेवाली भुआ है तुम्हायी”,मंगल फूफा ने दबे स्वर में कहा
“हुयी नहीं ना अभी , भुआ बनने से पहिले ही आग लगाने वाले काम कर रही है भुआ बन गयी तो ना जाने कहा कहा आग लगायी है और धुँआ निकरी है तुम्हाये हमाये पिछवाड़े से”,गोलू ने कहा
“ए गोलू ! का कुछ भी बक रहे हो देख नाही रहे लेडीज खड़ी है”,गुड्डू ने कहा
गुड्डू की बात सुनकर गुड्डू ने नवरतन को देखा और कहा,”और तुमहू नवरतन चचा ! उम्र तुम्हायी पेंशन लेने से दुइ साल पीछे है और तुमहू सादी का सपना देख रहे हो , समोसा इमरती खिलाय रहे हो उह्ह्ह भी अपने हाथ से,,,,,,,,,,,,,अरे पहिले इह तो देख ल्यो कि उह किसी और की अमानत भी हो सकती है लेकिन नाही खाली कुर्सी देखी नाही कि लपक के बैठ गए,,,,,,,,,,,!!!”
“अमानत अभी हुई नाही है गोलुआ ! आखरी क्षण मा भी पासा पलट जात है”,नवरतन ने मंगल फूफा की तरफ इशारा करके कहा
मंगल फूफा ने सुना तो चिढ़कर कहा,”हमायी रूपा पर गन्दी नजर डाली ना तो तुम्हाये पासे हम पलट देंगे समझे”
“काहे तुमहाओ नाम लिखो है ओह्ह्ह के राशन कार्ड मा ?”,नवरतन ने कहा
“हमाओ नाम ओह्ह्ह के दिल पे लिखो है नवरतन इहलीये बीच मा नाही आओ वरना अब तक लोगो के सादी के सूट सिलते थे अब अपने लिए कफ़न सिलोगे”,मंगल फूफा ने कहा
मंगल फूफा और नवरतन को फिर से आपस में उलझते देखकर रूपा उन दोनों के बीच आयी और चिल्लाकर कहा,”बस ! बहुत हो चुका ! बंद करो इह चिल्लम चिल्ली,,,,,,,,,,,,हम का मेले मा मिलने वाली मिठाई है जो जिसने पहिले देखा उसकी , जिसने पहिले माँगा उसकी हो गए,,,,,,,,,,,,,,अरे हमको किस से सादी करनी है किसके साथ रहना है जे का फैसला हम करि है”
“हाँ तो कर ल्यो फैसला रूपा जी और कह दयो इह कैंची चलाने वाले से कि आप हमायी दुल्हिन बनेंगी”,मंगल फूफा ने कहा
रूपा मंगल की तरफ पलटी और उसके गाल को अपनी उंगलियों से छूकर कहा,”मंगल जी ! आप काहे हमेशा इत्ती जल्दी मा रहते है , हमरे दिल की बात तो आप जानते ही है ना , उह्ह हमहू सबके सामने कहेंगे ऐसे चोरी छुपे नाही”
रूपा की छुअन से ही मंगल फूफा के बदन में एक झुरझुरी सी उठी , अगर मंगल फूफा बर्फ होते तो बेचारे अभी पिघलकर यही बह जाते। रूपा मंगल फूफा को छुए और नवरतन के कलेजे पर सांप बिच्छू ना लोटे ऐसा भला कैसे हो सकता था ? उसने रूपा को अपनी तरफ करके कहा,”रूपा जी ! समोसा खायी हमाये हाथ से और दिल की बात जाने उह्ह्ह , हमाये साथ इह नाइंसाफी काहे ?
रूपा ने वही चार उंगलिया नवरतन के गाल से लगाई और बड़े प्यार से कहा,”नवरतन जी ! आप ना बड़े भोले है बात को समझते नहीं , जिन हाथो से समोसा इतना चटपटा और इमरती गुड़ से भी मीठी लगे उन हाथो को ना थामने वाली कोई बेवकूफ ही होगी”
नवरतन ने सुना तो रूपा की बात को हरी झंडी समझकर मन ही मन ख़ुशी से झूम उठा।
रूपा ने ऐसा तीर चलाया कि नवरतन और मंगल फूफा दोनों ही ख़ुशी से फूले नहीं समा रहे थे वही गुड्डू और गोलू हक्के बक्के से एक दूसरे को देखने लगे।
रूपा का रूप कुछ और ही था जो कोई नहीं समझ पा रहा था ! रूपा ने गुड्डू को हक्का बक्का देखा तो उसके पास आयी जैसे ही अपना हाथ गुड्डू के गाल की तरफ बढ़ाया गुड्डू ने पीछे हटकर कहा,”ए जे होशियारी हमाये साथ नाही ! नाप दे दी ना चलो अब”
रूपा ने सुना तो अपनी चोटी को घुमाते हुए वहा से निकल गयी। गोलू गुड्डू के पास आया और कहा,”गुड्डू भैया ! जे रूपा मा हमको कोनो बड़का वाला पिरोब्लम लग रहा है”
“पिरोब्लम रूपा मा नाही गोलू रूपा खुदहि एक ठो पिरोब्लम है , हमहू ओह्ह्ह का लेकर घर जाते है हिया रही तो ना जाने और का का बखेड़ा हो , तुमहू भी मंगलू को उठाओ और घर निकल ल्यो”,गुड्डू ने कहा और वहा से निकल गया
गोलू ने देखा मंगल फूफा मुस्कुराते हुए रूपा के ख्यालो में खोये है तो वह उनके पास आया उनकी गुद्दी पकड़ी और उन्हें बाहर ले जाते हुए कहा,”का हिया खड़े खड़े 7 फेरे ले लोगे रूपा के साथ,,,,,,,,,!!!”
नवरतन को होश आया तो अपनी दुकान की हालत देखकर उसे चक्कर आया और बेचारा वही बेहोश होकर गिर पड़ा।
गुड्डू बाइक की टंकी पर बैठकर बाइक स्टार्ट कर रहा था और पीछे मुँह बनाये बैठी थी रूपा। गोलू मंगल फूफा के साथ बाहर आया। उसने गुड्डू को बाइक के साथ देखा तो कहा,”ए गुड्डू भैया ! उह्ह्ह नुक्कड़ तक हमे और मंगल फूफा को लिफ्ट दे देंगे का ?”
गुड्डू एक तो रूपा की वजह से खुद बाइक की टंकी पर बैठा था उस पर गोलू उस से लिफ्ट मांग रहा था सुनकर गुड्डू ने झुंझलाकर कहा,”दिखाई नाही देता हमहू खुद टंकी पर बैठे है,,,,,,,,,,,!!!”
“अरे तो इत्ती बड़ी सीट होने के बावजूद आप टंकी पर काहे बैठे है ?”,गोलू ने कहा
गुड्डू बेचारा मंगल फूफा के सामने सच बात तो बता नहीं सकता था क्योकि बताता तो फिर एक नयी बहस शुरू हो जाती इसलिए चिढ़कर कहा,”हमायी मर्जी हमहू टंकी पर बैठे चाहे हेंडल पर,,,,,,,,,,,तुमहू निकलो हिया से”
“हाँ हाँ जा रहे है इत्ता भड़क काहे रहे है ? आओ फूफा|”,गोलू ने गुड्डू से कहा और फिर मंगल फूफा को साथ लेकर वहा से आगे बढ़ गया। उधर गुड्डू ने भी बाइक स्टार्ट की और रूपा को लेकर निकल गया
मिश्रा जी का घर , कानपूर
“इह साला गुड्डू रूपा को लेकर नाप दिलाने गया है कि कपड़ा सिलने गया है अभी तक नहीं आया”, आदर्श फूफा घर की सीढ़ियों पर खड़े बाहर झांकते हुए बड़बड़ाये लेकिन ना उन्हें गुड्डू आता दिखाई दिया ना ही रूपा
“आप हिया किसका इन्तजार कर रहे है ?”,राजकुमारी भुआ ने आकर फूफा से पूछा
“रूपा का,,,,,,,,,,,,!!”,आदर्श फूफा ने पलटकर कहा लेकिन राजकुमारी भुआ को देखते ही उनकी सिट्टी पिट्टी गुम हो गयी।
“का कहा रूपा ? उह्ह्ह करमजली रूपा का इंतजार काहे कर रहे है आप ?”,राजकुमारी भुआ ने गुस्से से तिलमिला कर कहा “रूपा,,,,,,,,,,,,,!!!”,आदर्श फूफा एकदम से हँसे और आगे कहा,”अरे हमने रूपा कब कहा ? हम तो इह कह रहे थे कि “रूप तेरा मस्ताना , प्यार मेरा दीवाना , भूल कोई हमसे ना हो जाए,,,,,,,,,,,,,,,!!!!”
राजकुमारी भुआ ने सुना तो शरमा कर अपनी साड़ी का पल्लू मुँह में खोंस लिया तो ये देखकर आदर्श फूफा भुआ के करीब आये और कहा,”आज तो बहुते बूटीफुल लग रही हो का लगाई हो ?”
“कुछो नाही लगाए है , मुँह धोकर आय रहे है बस”,भुआ ने कहा और ये कहते हुए अपनी साडी के आधे पल्लू को चबा डाला ये देखकर आदर्श फूफा चुपचाप वहा से खिसक गए।
राजकुमारी भुआ अपनी ब्यूटी के बारे में सोचते हुए वही खड़ी रही तभी गुड्डू रूपा को लेकर वहा पहुंचा और रूपा से अंदर जाने को कहकर खुद बाइक देने चला गया। रूपा अपनी चोटी घुमाते हुए अंदर आयी और सीढ़ियों से होकर अंदर जाने लगी राजकुमारी भुआ ने कहा,”कहा से आ रही हो महारानी ?”
रूपा भुआ की तरफ पलटी और कहा,”काहे ! तुमको का पंचायती है हमहू कही से भी आये ?”
“का है कि हमहू है जे घर की बिटिया और तुमहू हो मेहमान इहलीये इह घर मा का हो रहा है उह्ह जानने का हक़ हमरा है समझी , जे घर के मर्दो को लेकर तुम्हरी नियत अच्छी तरह से भांप गए है हमहू”,राजकुमारी भुआ ने कहा
रूपा ने देखा गुड्डू बाइक वापस करके पैदल घर की तरफ आ रहा है तो उसने शरमाकर भुआ से कहा,”उह्ह्ह का है ना हमहू जरा गुड्डू जी के साथ बाइक पर बाहिर की हवा खाने गए थे”
भुआ ने सुना तो उनका मुँह खुला का खुला रह गया और गुड्डू को अंदर आते देखकर रूपा वहा से चली गयी। गुड्डू बेचारा हैरान परेशान सा अंदर आया तो भुआ ने गुस्से से कहा,”हमको तुमसे इह उम्मीद नाही थी गुडडुआ”
“कैसी उम्मीद ?”,गुड्डू ने पूछा
अब भुआ तो भुआ है जब तक मुँह में साड़ी का पल्लू खोंस के रो ना दे तब तक भला कैसी भुआ ? भुआ ने शगुन के नाम का राग अलापा और अंदर भाग गयी।
“लगता है पूरा खानदान पागल है”,गुड्डू ने कहा और सर पकड़कर वही सीढ़ी पर आ बैठा
( मंगल और नवरतन में से रुपए किसका हाथ थामेगी और किसको कहेगी टाटा बाय बाय ? आदर्श फूफा क्यों करने लगे रूपा का इंतजार , क्या उन्हें है रूपा पर शक या उन्हें भी हो गया है रूपा से प्यार ? रूपा की बात का गलत मतलब निकालकर क्या भुआ करने वाली है शगुन को परेशान ? जानने के लिए पढ़ते रहिये मनमर्जियाँ सीजन 5 मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
