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Manmarjiyan Season 5 – 2

Manmarjiyan Season 5 – 2

Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

गुड्डू ने जो ईंट गोलू को फेंककर मारा वो जाकर लगी सीधा मंगल फूफा को और मंगल फूफा हाथ पैर पसारे धरती पर आ गिरे। गुड्डू ने देखा तो भागकर मंगल फूफा के पास आया। गोलू भी गुड्डू के बगल मे आ खड़ा हुआ और मुँह फाड़कर मंगल फूफा को देखने लगा।
आदर्श फूफा ने मंगल फूफा को नीचे गिरे देखा तो गाना गया ये सुनकर पास से गुजरते गुप्ता जी भड़क गए और आदर्श फूफा को साइड में धक्का देकर कहा,”हुआ साला कोई मर गवा है और तुमहू गाना गा रहे हो”

आदर्श फूफा झूमते हुए यादव के गले आ लगे। यादव जी पहले ही गुस्से से बौराए पिकअप वाले को ढूंढ रहे थे जैसे ही आदर्श फूफा उन से टकराये उन्होंने आदर्श फूफा को साइड में फेंककर कहा,”हट बे”
आदर्श फूफा नीचे मिटटी में गिर गए , उठकर खुद को झाड़ा और गुस्से से यादव के पीछे आये लेकिन बेचारे की बुरी किस्मत पैर खड़े में उलझा और आदर्श फूफा सीधा रूपा के गले जा लगे। रूपा ने देखा एक पराया आदमी उसके गले लगा है तो उसने आदर्श फूफा पर ताबड़तोड़ चाँटे बरसाने शुरू कर दिए।

उधर यादव जी को दिखा मनोज जो कि पिकअप चला रहा था तो यादव जी उसके पीछे भागने लगे।
मिश्रा जी और बिंदिया ने बेहोश पड़े लवली को जैसे तैसे करके साइड में बैठाया और इधर उधर पानी देखने लगे लेकिन वहा कहा पानी था। तभी उन्हें सामने एक नल नजर आया मिश्रा जी पानी लेने नल की तरफ भागे। बिंदिया लवली को होश में लाने के लिए उसके गाल को थपथपाने लगी लेकिन लवली होश में नहीं आया।

इन सब में अगर कोई सुरक्षित था तो वो थे बंद आँखों वाले शर्मा जी जो कि पिकअप को टटोलते टटोलते ढाबे के पास पहुंच गए और वाशबेसिन के सामने आकर मुँह धोने लगे।

गुड्डू और गोलू बुत बने मुँह फाड़े अभी भी नीचे गिरे मंगल फूफा को देख रहे थे।
“गुड्डू भैया ! हमे तो लगता है कुछो अमंगल हुई गवा”,गोलू ने बहुत ही सस्पेंस के साथ कहा
“का मतलब बे ?”,गुड्डू ने घबराकर कहा
“मल्लब इह के आपकी ईंट की मार से मंगल फूफा चल बसे,,,,,,,,,,!!”,गोलू ने उतने ही सस्पेंस से फिर कहा
“चल बसे मतलब ?”,गुड्डू ने घबराकर कहा

“अरे चल बसे मतलब फूफा नहीं रहे , जे का टिकट कट गवा , फुल एंड फाइनल , फूफा का पेकअप गुड्डू भैया”,गोलू ने कहा
गुड्डू ने सुना तो गोलू को एक थप्पड़ मारकर कहा,”का बकवास कर रहे हो बे ?”
गुड्डू से बिना बात के थप्पड़ खाकर गोलू ना बौराय ऐसा भला कैसे हो सकता है ? उसने पहले तो गुस्से से भरकर गुड्डू को घुरा और फिर सामने से आते मिश्रा जी को देखकर जोर से चिल्लाया,”आनंद चचा ! जे गुड्डू भैया ने ईंट मारके फूफा को मार दिया”

मिश्रा जी के हाथ से पानी का बोतल छूटकर नीचे जा गिरा ! अब गोलू ने बस फूफा कहा तो मिश्रा जी को लगा आदर्श फूफा वे किसी अनहोनी के डर से गुड्डू गोलू की तरफ भागे ये देखकर गुड्डू ने खीजकर गोलू से कहा,”अबे का बौराय गए हो ! पिताजी को काहे इन्वॉल्व किये ? हम सुलटा लेते ना आपस मा”
“जे थप्पड़ मारने से पहले काहे नाही सोचा आपने ?”,गोलू ने मुँह बनाकर कहा

“अबे तो का ऐसे बदला लोगे हमसे ?”,गुड्डू ने कहा तब तक मिश्रा जी वहा पहुंच चुके थे उन्होंने दोनों को साइड किया और नीचे गिरे फूफा को देखा तो उनकी जान में जान आयी। नीचे मंगल फूफा गिरे थे ये देखकर मिश्रा जी पलटे और गोलू को एक थप्पड़ जड़कर कहा,”किसी दिन हमका हार्ट अटैक देकर मानोगे तुमहू”
गोलू को थप्पड़ पड़ा तो गुड्डू की हंसी निकल गयी ये देखकर मिश्रा जी ने गुड्डू को भी एक थप्पड़ जड़ दिया और कहा,”हुआ लवली बेहोश पड़ा है और हिया तुम दोनों जे हाफ टिकट के साथ मिलकर दाँत दिखाय रहे हो,,,,,,,,,,,बतीसी तोड़ देंगे तुम्हायी समझे”

गुड्डू और गोलू को मिश्रा जी से परसादी मिल चुकी थी इसलिए दोनों अपना अपना हाथ अपने गाल से लगाए एक तरफ खड़े हो गए। मिश्रा जी ने देखा सबने यहाँ फिर तमाशा बना दिया है तो उन्होंने अपना सर पकड़ लिया। अभी वे किसी को कुछ भी समझाने की हालत में नहीं थे क्योकि उन्हें लवली को सम्हालना था इसलिए गुड्डू गोलू की तरफ पलटे और कहा,”ए गोलुआ ! जे मंगलू को होश मा लाओ और गुड्डू तुम हमाये साथ आओ”

मिश्रा जी गुड्डू को लेकर लवली और बिंदिया की तरफ चले गए। गोलू ने नीचे बैठकर मंगल फूफा को थपथपाया लेकिन मंगल फूफा हिले ना , एक दो बार उनका गाल थपथपाया लेकिन मंगल फूफा टस से मस नहीं हुए। गोलू उठा इधर उधर देखा और एक लात फूफा की छाती पर मारकर कहा,”फूफा,,,,,,,,,,!!!”
गोलू की लात क्या पड़ी मंगल फूफा एक साँस में उठ बैठे और छाती पकडे इधर उधर देखा लेकिन गोलू तब तक भाग चुका था।

गुप्ता जी ने देखा सब रायता फैलाये हुए है तो चुपचाप ढाबे की तरफ बनी चाय की दुकान पर चले आये और एक कप चाय देने को कहा। आदमी ने गुप्ता जी को चाय का गिलास दिया और कहा,”कौन गाँव से आये हो भैया ? देखन मा तो तुम सब कोनो नाटक के कलाकार लग रहे हो”
गुप्ता जी ने चाय का गिलास मुँह को लगाया और जैसे ही एक घूंठ भरा उनका मुँह बन गया उन्होंने गिलास जोर से टेबल पर रखा और चाय बनाने वाले आदमी से कहा,”का घासलेट मिलाये हो जे मा ?”

“अरे नाही नाही भैया ! दूध , चायपत्ती , चीनी और इलायची डालकर अपने जे हाथो से बनाये है”,आदमी ने अपने मैले कुचैले हाथ आगे करके कहा
चाय पीकर तो गुप्ता जी का सिर्फ मुँह ही बना था लेकिन आदमी के हाथो को देखकर उन्हें उबकाई आयी और वे वहा से चले गए। गुप्ता जी ने देखा सब भगदड़ मचाये हुए है तो उन्होंने अब समझदारी दिखाते हुए सबको शांत करने का सोचा !  

सबसे पहले आये रूपा के पास और उसे समझा बुझाकर आदर्श फूफा को उस से छुड़वाया और साइड में खड़े होने को कहा।
रूपा ने देखा मंगल फूफा नीचे बैठे खांस रहे है तो वह दौड़कर उनके पास गयी और उन्हें सम्हालकर ले आयी और आदर्श फूफा के बगल में आ खड़ी हुई .

आदर्श फूफा ने रूपा को देखा तो रूपा ने गुस्से से आदर्श फूफा को घुरा , आदर्श फूफा को कुछ देर पहले खाये ताबड़तोड़ थप्पड़ याद आ गए उन्होंने अपने दोनों गालो पर दोनों हाथ रखे और रूपा से थोड़ा हटकर खड़े हो गए। रूपा पलटकर मंगल फूफा को देखने लगी।
गुप्ता जी ने यादव को मनोज से उलझते देखा तो उनके पास आये और यादव को मनोज से दूर करके कहा,”का कर रहे हो तुमहू ? जे का तुम्हायी भैंस है जो दुहने चले हो जे का,,,,,,,चुपचाप चलकर हुआ खड़े हो वरना पैदल आ जाना कानपूर,,,,,,,,!!!”

गुप्ता जी को गुस्से में देखकर यादव जी चुपचाप आदर्श फूफा के बगल में जा खड़े हुए ! यादव जी ने जब आदर्श फूफा को गालों पर हाथ लगाए देखा तो कहा,”का हुआ ! गाल से हाथ काहे लगाए हो ?”
“दाँत मा दर्द है,,,,,,,,,,!!!”,आदर्श फूफा ने दूसरी तरफ देखकर कहा लेकिन रूपा और आदर्श फूफा का ड्रामा तो यादव जी खुद अपनी आँखों से देखे थे इसलिए फूफा का मजाक उड़ाकर कहा,”भककक ! झूठ काहे बोलते हो , साफ़ काहे नाही कहते उह्ह्ह रूपा तुमको परसादी दी है”

यादव जी की बात सुनकर आदर्श फूफा भड़क गए और खीजकर कहा,”हाँ दी है परसादी तो तुमको का ? तुमहू भी लेइ ल्यो”
आदर्श फूफा को चिल्लाते देखकर रूपा ने फिर उनको घुरा तो आदर्श फूफा शांत हो गए और जल्दी से अपने दोनों हाथो को रख लिया अपने गालो पर

गोलू कुछ सोचते हुए यहाँ से वहा चक्कर काट रहा था। गुप्ता जी उसके सामने आये और उसके कंधे पर हाथ रखकर उसे रोककर कहा,”अबे ओह्ह हमाये खानदान की आखरी पैदाइश,,,,,,,,,अब का आज आज मा पूरी धरती नाप लोगे ?”
गुप्ता जी को सामने देखकर गोलू सब भूल गया और अपना सर खुजाने लगा लगा तो गुप्ता जी ने उसकी गुद्दी पकड़कर उसे मंगल की तरफ फेंका

गुप्ता जी मिश्रा जी की तरफ आये , लवली को होश आ चुका था। गुड्डू की नजर ढाबे के बाहर पड़ी खटिया पर पड़ी तो वह बिंदिया की मदद से लवली को लेकर खटिया की तरफ बढ़ गया। मिश्रा जी और गुप्ता जी वही खड़े थे। गुप्ता जी ने जाते हुए लवली को देखा और मिश्रा जी से कहा,”चिंता नाही करो मिश्रा ! अब सब ठीक है”
“अबे का ख़ाक ठीक है,,,,,,,,,,साला सब मिल के गंध मचाये हुए कहा हिया”,मिश्रा जी ने भड़ककर कहा  

गुप्ता जी ने इधर उधर देखा और फिर हिम्मत करके धीरे से कहा,”हम का कह रहे थे मिश्रा जी कि हम सब चंदौली से बहुते दूर निकल आये है। मंगेश , लल्लन और ओह्ह्ह के आदमी भी कही दिखाई नाही दे रहे , उस पर सूरज भी ढलने लगा है थोड़ी देर मा रात हो जाही है”
“तो ?”,मिश्रा जी ने चिढ़कर कहा

“तो हमहू जे कह रहे थे कि अब जब पिकअप हिया रुक ही गयी है तो क्यों ना सामने ढाबे पर चलकर थोड़ा खाना खा लिया जाए , का है कि सुबह से मार के अलावा किसी ने कुछो खाया भी नाही है,,,,,,,,,!!!”,गुप्ता जी ने गिड़गिड़ाकर कहा
“मतलब हमहू अब जे दलिदरो को खाना भी खिलाये ?”,मिश्रा जी ने फिर खीजकर कहा
गुप्ता जी ने गर्दन घुमाकर पीछे खड़े सब लोगो को देखा थे तो सब उनके अपने और जान पहचान के ही लोग लेकिन इस वक्त लग सब दलिदर ही रहे थे।

गुप्ता जी ने गर्दन वापस मिश्रा जी की तरफ घुमाई और कहा,”आपका गुस्सा जायज है और अभी कानपूर कहा पहुंचे है सब , कानपूर पहुंचकर सबकी बढ़िया से खबर लीजियेगा,,,,,,,,,,,,,और हम तो कहते है सबको थोड़ा थोड़ा खाना खिला देते है क्योकि खाली पेट शैतान का घर होता है मिश्रा”
“खाली पेट नहीं बे खाली दिमाग , मिसाल तो ठीक से दिया करो गुप्ता”,मिश्रा जी ने कहा

“अरे दिमाग मा तो भूसा भरा है जे सब के इहलीये पेट कहा हमने,,,,,,,,,,अब अगर आप चाहते है कि सब सही सलामत कानपूर पहुंच जाए तो हमहू हाथ जोड़कर बिनती करते है थोड़ी देर हिया रुकते है फिर निकलते है तब तक जे सब भी शांत हो जाही है”,गुप्ता जी ने लगभग हाथ जोड़कर कहा
मिश्रा जी सोच में पड़ गए और फिर झुंझलाकर कहा,”ठीक है ! लेकर आओ सबको”
गुप्ता जी बाकि सबकी तरफ बढ़ गए और मिश्रा जी लवली को सम्हालने उसकी तरफ चले गए।

गुप्ता जी मिश्रा मण्डली के पास आये और उंगलियों में पकड़ी तीली से अपना दाँत खुजाते हुए कहा,”तुम सबकी दाल रोटी का इंतजाम करके आये है , चुपचाप जाकर सब बैठ जाओ ओह्ह्ह के बाद कानपूर निकलेंगे और अब अगर किसी ने भी चरस बोई तो उह्ह्ह फिर अपने पैरों पर चलकर कानपूर पहुंचे है”

खाने का नाम सुनकर सबकी भूख जाग गयी। रूपा , मंगल फूफा और मनोज एक साथ आगे बढ़ गए। आदर्श फूफा भी मार खाकर थक गए थे इसलिए चले गए और फ्री का खाना भला यादव जी कैसे छोड़ देते इसलिए वे भी आदर्श फूफा के पीछे चल पड़े। शर्मा जी पहले से ढाबे के बाहर रखी कुर्सी पर बैठे थे। अब बचे और गोलू तो गोलू ने सबके चले जाने के बाद गुप्ता जी के पास आकर कहा,”पिताजी ! जब खाना खाने रुके ही है तो फिर दाल रोटी काहे ? मटर पनीर भी तो खा सकते है ना ?”

“तुम्हरी जेब मा पैसा है ?”,गुप्ता जी ने गोलू को घूरकर पूछा
“नहीं पैसा तो नाही है पिताजी”,गोलू ने मासूमियत से कहा
गुप्ता जी ने गोलू की गुद्दी पकड़ी और उसे ढाबे की तरफ ले जाते हुए कहा,”तो बेटा जब जेब मा पैसा नाही है तो काहे पनीर खाने के सपने देख रहे हो। जो दाल रोटी मिल रहा है चुपचाप उह्ह्ह खाओ और निकलो हिया से”
कहते हुए गुप्ता जी ने गोलू को सामने पड़ी खटिया की तरफ धकेल दिया।

गोलू लड़खड़ाया और खटिया पर आ बैठा ! गुप्ता जी भी उसके सामने आ बैठे।  बगल में ही टेबल के इर्द गिर्द पड़ी कुर्सियों पर मंगल फूफा , मनोज , रूपा बैठे थे और सामने यादव जी आ बैठे। उस टेबल के इर्द गिर्द तीन कुर्सियां अभी भी खाली थी    
लेकिन फिर भी आदर्श फूफा उनके बगल में पड़ी टेबल पर अकेले बैठे थे। मंगल फूफा ने उन्हें अकेले बैठे देखा तो कहा,”अरे आदर्श बाबू ! आप हुआ अकेले काहे बैठे है ? हिया आ जाईये”

आदर्श फूफा अभी तक रूपा से खायी मार को भूले नहीं थे इसलिए कहा,”नहीं नहीं हम यही ठीक है तुम सब खाओ”
“लगता है उह्ह्ह ससुरा कुछो और आर्डर करने का सोच रहा है”,गुप्ता जी ने अपने एक हाथ को उठाकर दूसरा हाथ कोहनी से लगाकर इशारा करके गोलू से कहा
गोलू को ऐसे इशारे भला कहा समझ आते थे उसने कहा,”का साँप ?”

गुप्ता जी ने सुना तो मुँह बनाया और कहा,”ए तुमहू साला खाना आर्डर करो बे,,,,,,,,,,,,साँप खाएंगे इह साँप दिख रहा है तुमको”
गुप्ता जी को खीजते देखकर गोलू ने कहा,”आर्डर करो तो ऐसे बोल रहे है जैसे अभी शाही पनीर लाकर हमाये सामने रख देगा उह्ह , अरे जब दाल रोटी ही खाना है तो हमहू काहे आर्डर देकर देकर अपना इज्जत खराब करे खुद ही दे दीजिये”

गुप्ता जी ने ढाबे पर काम करने वाले लड़के को बुलाया और उसे दाल रोटी का आर्डर दिया। लड़का अपना डायरी पेन लेकर बगल में बैठे मंगल फूफा की तरफ पलटा और कहा,”आप सब का लेंगे ?”
मंगल फूफा रूपा को देखकर मुस्कुराये और लड़के की तरफ पलटकर कहा,”एक ठो पिलेट मटर पनीर और चार चपाती देशी घी मा”

गुप्ता जी ने आर्डर लेने वाले लड़के को साइड किया और मंगल फूफा से कहा,”तुम्हाये बाप दादा भी कबो मटर पनीर खाये है ? ए सुनो बे ! सबके लिए दाल और रोटी लेकर आओ समझे,,,,,,,,,,,मटर पनीर खाएंगे”
गुप्ता जी की बात सुनकर लड़का चुपचाप वहा से चला गया। सभी खाने का इंतजार करने लगे। दूसरी तरफ लवली और बिंदिया साथ बैठे थे और गुड्डू मिश्रा जी के सामने , बेचारे की हालत गोलू जैसी ही थी क्योकि दोनों तिकड़मबाज अपने आपने बाप के सामने बैठे थे इसलिए ज्यादा चू चपड़ नहीं कर सकते थे।

कुछ ही दूर बैठे गुड्डू ने गोलू की तरफ देखा और गोलू ने भी बेचारगी से गुड्डू की तरफ देखा। गुड्डू उठने लगा तो मिश्रा जी ने कहा,”अब तुम कहा चले ?”
“वो हम सोच रहे है गोलू के साथ बैठकर खा ले”,गुड्डू ने मिमियाते हुए कहा

“एक काम करो बेटा घर बसाय ल्यो गोलू के साथ,,,,,,,,,,,,भर दयो ओह्ह्ह की माँग मा सिंदूर बन जाओ ओह्ह्ह के खसम,,,,,,,,,,,साला गोलू के बिना इनका खाना गले से नीचे नाही उतरता है”,मिश्रा जी ने गुड्डू को फटकार लगाकर कहा तो गुड्डू चुपचाप वापस अपनी जगह पर आ बैठा।
घूमते घामते शर्मा जी भी आकर यादव जी की बगल में बैठ गए क्योकि भूख उन्हें भी लगी थी।

लड़का खाना ले आया और सबके सामने रखकर चला गया। गोलू ने खाने के लिए जैसे ही हाथ बढ़ाया हाथ में पानी का लोटा थामे गुप्ता जी ने कहा,”खाने से पहिले हाथ तो धो लयो”
गोलू दाल रोटी देखकर एक तो पहले ही चिढ़ा हुआ था ऊपर से गुप्ता जी हाथ धोने को कहकर उसे और चिढ़ा रहे थे। उसने हाथ में पकड़ी रोटी थाली में पटककर अपने हाथो को सामने करके कहा,”हाथ धोये ! उह्ह्ह भी जे खाने के लिए,,,,,,,,,,!!!!”

गुप्ता जी ने सुना तो साइड में अपने हाथ धोते हुए कहा,”हहहह सुगले कही के,,,,,,,,,,,!!”
मिश्रा जी कुछ ही दूर बैठे थे उन्होंने जब सुना तो गुप्ता जी से कहा,”ए गुप्ता ! जे से कहो नहीं खाना तो जाकर अपने पैसो से मटर पनीर खा ले,,,,,,,,,,,!!!”
गोलू ने देखा एक तो जेब में पैसे नहीं ऊपर से सामने रखा दाल रोटी भी उसके हाथ से जाने वाला है तो उसने जल्दी से रोटी उठायी और तोड़कर जल्दी जल्दी खाने लगा।

गुप्ता जी ने भी अपनी प्लेट में रखी रोटी उठाई और जैसे ही एक निवाला खाया उनके कानो में बगल में बैठे मंगल फूफा की आवाज पड़ी,”रूपा जी ! आपके हाथ से तो जे दाल भी हमको मटर पनीर ही लग रहा है,,,,,,,,!!!”
गुप्ता जी ने गर्दन घुमाकर देखा तो पाया रूपा अपने हाथ से मंगल फूफा को खाना खिला रही थी ये देखकर गुप्ता जी का मुँह बन गया। वे उठे साथ में अपनी प्लेट उठायी और आदर्श फूफा के पास जा बैठे,,,,,,,,,,,,,,,,हाँ हाँ वही आदर्श फूफा जो गुप्ता जी को फूटी आँख नहीं सुहाते थे,,,,,,,,,,,,!!”

( क्या मिश्रा जी भर पाएंगे इन सबकी दाल रोटी का बिल या ये बिल पड़ने वाला है उनकी जेब पर भारी ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal
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