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Manmarjiyan Season 5 – 1

Manmarjiyan Season 5 – 1

Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

शाम के 7:30 बज रहे थे , सूरज अपनी लालिमा लिए पश्चिम दिशा में ढल रहा था और चंदौली से कानपूर जाने वाली सड़क पर एक पिकअप दौड़ी चली जा रही थी। ये पिकअप पिछले डेढ़ घंटे से चल रही थी ना बीच में कही रुकी और ना ही रोकने की जरुरत पड़ी क्योकि इसका रुकना मुसीबत को गले लगाने जैसा था। पिकअप चंदौली से बाहर निकल चुकी थी और ड्राइवर सीट पर बैठे मनोज ने राहत की साँस ली। अब उसे और इस पिकअप में बैठे लोगो को कोई खतरा नहीं था। गाड़ी चलाते हुए वह ऊँघने लगा था।

भूख प्यास तो लगी ही थी साथ ही साथ एक जगह बैठे बैठे सीट भी गर्म हो चुकी थी। उसने अपने बगल में बैठी बिंदिया और रूपा को देखा जो कि एक दूसरे के कंधे पर सर लुढ़काये सो रही थी।
पीछे बैठे मिश्रा जी की आँखे थकान के मारे बार बार बंद होती और वे हड़बड़ाकर उठ जाते क्योकि वो जानते थे अगर वो सो गए तो उनके साथ बैठे बाकी सोये भूत जाग जायेंगे।

शर्मा जी की दोनों आँखों पर  मधुमक्खी ने काट लिया था इसलिए उनकी दोनों आँखे सूज गयी थी , उन्हें देखकर ये समझ पाना मुश्किल हो रहा था कि वो जाग रहे है या सो रहे है। आदर्श फूफा मुँह फाड़े पिकअप की दिवार से पीठ लगाकर बेसुध थे तो वही उनके कंधे पर सर टिकाये मंगल फूफा मिश्रा जी से इस सीजन में शादी का सांत्वना पाकर बेफिक्र सोये पड़े थे। गुड्डू शादी के लहंगे में था और एक कोने में बैठा ऊँघ रहा था तो वही उसके बगल में शेरवानी पहने बैठा गोलू नींद के मारे बार बार गुड्डू पर आ गिरता और गुड्डू झुंझलाकर उसे साइड में कर देता।

यादव जी लवली के पीछे बैठे थे सो रहे थे। लवली किनारे बैठा खाली आँखों से ढलते सूरज को देख रहा था क्योकि उसके आस पास बैठे लोग इतने बकैत थे कि लवली ने उनसे बात-चीत ना करना ही ठीक समझा। उसे अब तक लगता था कि सिर्फ गुड्डू और गोलू बकैत है लेकिन यहाँ तो पूरी फसल ही खराब थी। पिकअप में जगह ही इतनी थी कि सबको एक दूसरे से सटकर ही बैठना पड़ रहा था इसलिए लवली ने भी कुछ नहीं कहा वह तो बस जल्दी से जल्दी कानपूर पहुंचने की राह देख रहा था। 

अब बचे गुप्ता जी तो वो पिछले 10 मिनिट से एक आँख बंद किये अपने सामने भिनभिनाती मक्खी को ताली मारकर मारने की कोशिश कर रहे थे लेकिन मक्खी इतनी ढीठ और जिद्दी की गुप्ता जी के हाथ नहीं आ रही थी।  

सब अपनी अपनी जान बचाकर चकिया से तो निकल आये थे लेकिन उनके जाने के बाद चकिया का क्या हाल था ये किसी को नहीं पता था।

मनोज गाडी चलाते चलाते थक चुका था इसलिए सामने एक ढाबे को देखकर उसने एकदम से ब्रेक मारा और सब एक दूसरे में आ गिरे। मंगल फूफा का मुँह आदर्श फूफा की गोद में जा गिरा और ऐसी जगह गिरा कि एक पल को तो मारे दर्द के आदर्श फूफा की आत्मा ही बाहर आ गयी। उन्होंने मंगल फूफा की गुद्दी के बाल पकडे और उठाकर साइड में पटका , अब साइड में बैठे थे सूजी हुई आँखे लिए शर्मा जी और मंगल का सर जा टकराया उनकी नाक से , क्या करे  फूफा की हाइट छोटी थी ना इसलिए,,,,,,,,,,,,शर्मा जी की आँखे पहले नहीं खुल रही थी ऊपर से नाक भी लाल हो चुकी थी।

शर्मा जी ने दर्द से बिलबिला उठे और अधखुली आँखों से सामने वाले को थप्पड़ मारने के लिए हवा में अपना हाथ घुमाया। अब मंगल फूफा की हाइट कम तो शर्मा जी का हाथ उनके सर से निकलकर सामने बैठे यादव जी के गाल पर लगा और सोये हुए यादव जी हड़बड़ा कर उठे। इसी हड़बड़ाहट में उन्होंने पीछे बैठे लवली को जोरदार धक्का दे मारा और लवली बाबू मुँह के बल नीचे जमीन पर , वो तो गनीमत था कि पिकअप सड़क से नीचे उतरकर रेतीली जगह पर रुकी थी वरना लवली का चौखटा बिगड़ने से तो खुद मिश्रा जी भी नहीं रोक पाते।

अचानक ब्रेक लगने से मिश्रा जी का सर जोर से टकराया पिकअप की दिवार से और वे अपना सर सहलाते हुए पिकअप से पहले ही उतरकर मनोज की तरफ जा चुके थे।
गोलू गुड्डू में आकर गिरा तो गुड्डू ने गोलू की साइड में धक्का दिया अब साइड में थे गुप्ता जी , जैसे ही ब्रेक लगा उन्होंने मक्खी को मारने के लिए हाथो को आपस में मारा और चमत्कार , इस बार मक्खी की लाश गुप्ता जी के हाथो में थी।

वे अपनी इस जीत की ख़ुशी मनाते इस से पहले गुड्डू के धक्के से गोलू आकर उनके अंदर गिरा और गोलू के होंठ गुप्ता जी के होंठो से मिलते इस से पहले गुप्ता जी ने गोलू की गर्दन पकड़कर उसे रोक लिया और साइड में फेंककर कहा,”अब का चुम्मा लेकर मानोगे ?”

गोलू जाकर गिरा यादव जी की बाँहो में तो उसे होश आया और उसने हड़बड़ाकर उठते हुए कहा,”का बे यादव ! हुआ फुलवारी को घर मा छोड़कर हिया हमे झूला काहे झूला रहे हो ?”
“अबे तुमको झूला झुलाये हमायी जुत्ती ! साले तुम हमायी छाती पर आ पड़े हो , पतो नाही कब पीछा छूटे है तुम सब दलिदर से हमाओ”,यादव जी चिढ़कर कहा

“अबे दलिदर किसको कह रहे हो बे यादव ? जानते नाही हमहू कोन खानदान से है ?”,गुप्ता जी एक आँख बंद किये यादव की तरफ लपके ये देखकर गोलू साइड हो गया।
“कौन नाही चोर , चोर खानदान से हो तुम , तुम्हाये जे सपूत और तुम्हाये जे फूफा,,,,,,,,,!!”,यादव जी ने उबलकर कहा

“का का का का चुराय लिए हमहू तुम्हरा बताना जरा , दुइ बाल्टी दूध और चार परात गोबर छोड़कर है का तुम्हाये पास जो हमहू चुरा लेंगे ? अरे भगवान् की पूजा के लिए एक दिन तुम्हाये घर से कुछो फूल का ले लिए मतलब हम चोर हो गए”,गुप्ता जी भी गर्म हो गए
“हमने भी बस बचपन मा तुम्हरे घर में लगे जामुन और आम के पेड़ से दुइ चार आम और जेब भर जामुन चुराए होंगे तो का हम चोर हो गए ?”,गुप्ता जी को देखकर गोलू भी भड़क गया

गुड्डू ने देखा बेचारे शर्मा जी को कुछ दिख नहीं रहा तो उसने उन्हें पीछे खींच लिया ताकि इन लोगो की बहस के चक्कर में शर्मा जी खामखा ना पिट जाए।  
आदर्श फूफा तो अभी भी दर्द से त्राहि त्राहि कर रहे थे क्योकि मंगल फूफा का निशाना बहुत गलत जगह जो लगा था। उन्होंने मंगल को देखा जो कि गोलू गुप्ता जी और यादव जी की बातों को चटखारे लेकर सुन रहे थे उन्होंने खींचकर एक लात दे मारी मंगल फूफा को और पिकअप से नीचे उतरे।  

मंगल फूफा गोलू और गुप्ता जी बीच में जा गिरे और बहस में शामिल होकर कहा,”और हमने ज़रा सा फूल का दिल चुरा लिया तो का तुम चोर हो गए ?”
यादव जी ने सुना तो गुस्से से मंगल फूफा को देखा और कहा,”नहीं बे चोर नाही तुमहू हुए साले डकैत जो दुसरो की पिरोपर्टी पर डाका डालने का सोचे,,,,,,,,!!!”

मंगल फूफा की बात सुनकर गुप्ता जी भी झल्लाए और कहा,”तुमहू चोर नाही तुमहू हो हबसी , दरिंदे , ठरकी”
गोलू कहा पीछे रहने वाला था उसने भी मंगल फूफा को चपत लगाकर कहा,”हुआ आगे चंदन रखा है लेकिन नाही इनको तो अभी भी गोबर मा ही मुँह मारना है”
गोलू की बात सुनकर मंगल फूफा को याद आया कि आगे उनकी रूपा बैठी है तो वे उठे और पिकअप से कूदकर कहा,”अरे हमाई रूपा”

गुड्डू की नजर नीचे गिरे लवली पर पड़ी तो वह उठा लेकिन नीचे जाए कैसे गुप्ता जी , यादव जी और गोलू फ़ैल के बैठे थे गुड्डू ने भी बजरंगबली का नाम लिया और जैसे ही पिकअप से बाहर कूदने के लिए उछला गुप्ता जी यादव की किसी बात पर गुस्से में आकर उठ खड़े हुए गुड्डू के सामने आ गए। अब गुड्डू तो ना कूद सका लेकिन धक्का लगने से गुप्ता जी मुँह के बल जा गिरे सीधा लवली के ऊपर और बेचारा लवली एक बार फिर नीचे जा धसा उस पर गुप्ता जी का वजन इतना कि वह चाहकर भी ना उठ सका।  

 अब गुड्डू कोई हिंदी फिल्म का हीरो तक है नहीं कि किसी से टकराये और सही सलामत खड़ा रह जाए। गुप्ता जी से टकराकर वह भी जा गिरा गोलू के ऊपर , अब गुड्डू और गोलू दोनों एक दूसरे की बाँहो में। ये नजारा देखकर यादव जी खड़े होकर जैसे ही पिकअप से उतरने को हुए ड्राइवर सीट पर बैठे मनोहर ने गाड़ी को हल्का सा आगे किया और यादव जी मुँह के बल गुप्ता जी पर ,, नीचे लवली , फिर गुप्ता जी और फिर यादव जी यू समझ लीजिये लवली की जान उसके गले तक आ चुकी थी।

उसका मुँह मिटटी में धंसा था इसलिए बेचारा ठीक से कुछ बोल भी नहीं पा रहा था।
गुड्डू और गोलू एक दूसरे की बाँहो में नीचे गोलू ऊपर गुड्डू उस पर दोनों के कपडे भी ऐसे कि क्या ही कहे ? गोलू को बाँहो में भरे गुड्डू ने कहा,”अबे गोलू ! अबे तुम्हायी अम्मा ने तुमको का खाकर पैदा किया था बे ? मल्लब इत्ती भसड़ ,, साला हुआ चकिया मा इत्ती भसड़ फैलाये अब हिया फिर वही कर रहे हो। अबे चाहते का हो तुम ?”
गोलू ने सुना तो उसने गुड्डू को पलट दिया , अब गुड्डू नीचे गोलू ऊपर और दोनों एक दूसरे की बांहो में ,,

अब गुड्डू ने कुछ पूछा है तो गोलु जवाब भी देगा इसलिए कहा,”गुड्डू भैया हमायी अम्मा ने का खाया था उह्ह्ह तो उन्ही से पूछना पडेगा , पर हिया साला हमहू दोपहर से कुछो नाही खाये है ,, एक ठो मिठाई खाई थी रीतिकवा के घर मा पर आप ही बताओ दुइ इमरती चार लड्डू से का होता है भला”
गुड्डू ने सुना तो गोलू को फिर पलट दिया और कहा,”साला तबही हमहू सोचे कि तुम्हाये अंदर जे मीठे लक्षण काहे आय रहे है ?”

गोलू ने गुड्डू को पलटा और फिर उसके ऊपर होकर गुस्से से कहा,”गुड्डू भैया ! आप का हमायी मर्दानगी पर सक कर रहे है ?”
गुड्डू ने फिर गोलू को पलटा और कहा,”सक नहीं बे शक शक होता है उह्ह्ह और हम काहे करेंगे तुम्हायी मर्दानगी पर शक ? साले शादी से पहिले पिंकिया को पेट से कर दिए और का बाकी रह गया”
गोलू ने गुड्डू को पलटा और कहा,”ए गुड्डू भैया ! देखो पर्सनल चीजे बीच मा नाही लाना,,,,,,,,,,,,साला आज तक खुद पर शर्म आती है जे सोच के,,,,,,,,,,,,!!”

गोलू अपनी बात पूरी करता इस से पहले गुड्डू ने उसे पलट दिया और कहा,”कि तुमने पिंकिया से सादी काहे की ?”
गोलू ने सुना तो चिढ गया और गुड्डू को पलटकर कहा,”अरे नाही ! जे सोच के कि शादी से पहिले जे सब काहे किया ?”
गुड्डू ने फिर गोलू को पलट दिया और कहा,”तो इत्ती पुरानी बात पर अब काहे अफ़सोस जताय रहे हो ?”

गोलू चिढ़ा हुआ था ऊपर से गुड्डू उसको और कीलसा रहा था उसने गुड्डू को पलटा और गुस्से से कहा,”अफ़सोस तो हमे इस बात का है गुड्डू भैया के आप जैसे बैल हमाये दोस्त है,,,,,,,,,,,,,!!!”
इतना कहकर गोलू रुका गुड्डू को देखा और खीजकर कहा,”लहंगा चोली पहिनने वाले बैल”
गोलू के मुँह से खुद के लिए बैल सुनकर गुड्डू भी भड़क गया और गोलु को पलटकर कहा,”हम बैल है तो तुम का हो बे ?”

गोलू ने गुड्डू को पलटा और कहा,”बुद्धि मा तेज , बाज सी नजर , शेर सी ताकत और खूबसूरती मा सलमान शाहरुख का मिक्सअप हमहू ,, उह्ह्ह तो पिताजी के DNA की वजह से थोड़ा रंग दब गओ हमाओ वरना कानपूर की लड़किया आपके नाही हमाये पीछे भागती”

गुड्डू गोलू का एक दूसरे को पलटना और बहस करना जारी था तो वही पिकअप में उन दोनों के अलावा बचे थे शर्मा जी , शर्मा जी ने जैसे तैसे करके अपनी सूजी हुई आँखो को खोला और जब गुड्डू गोलू को एक दूसरे की बाँहो में देखा तो उन्हें फिर धक्का लगा और उनका हाथ अपने सीने पर चला गया। पीछे क्या हो रहा था आगे वालो को कुछ नहीं पता था क्योकि मिश्रा जी मनोज को अचानक गाड़ी रोकने के लिये डांट रहे थे और बिंदिया उन्हें समझा रही थी।

मंगल फूफा रूपा को अपना प्यार जाहिर कर रहे थे कि आदर्श फूफा की नजर उस पर पड़ी और वे मंगल से उलझ गए। रूपा ने भसड़ देखी तो वापस सो गयी।
बिंदिया के समझाने से मिश्रा जी ने मनोज को छोड़ा और देखा मंगल और आदर्श फूफा आपस में उलझे है तो वे उनके पास आये और दोनों को अलग करके कहा,”अबे का है इह सब,,,,,,,,,,,सूरज ढल गवा अब तो जे चिलम चिल्ली बंद कर देओ,,,,,,,,,,,साला साम के बाद तो भगवान भी युद्ध रोक देते थे ससुरा तुम लोगन का अकल कब आयी है ?”

मिश्रा जी की फटकार सुनकर दोनों दूर हो गए। मिश्रा जी ने देखा बाकि सब कही नजर नहीं आ रहे तो झुंझलाकर कहा,”बाकी सब कहा है ?”
“पीछे है”,मंगल फूफा ने कहा
मिश्रा जी मंगल फूफा और आदर्श फूफा को घूरते हुए पीछे चले गए उसी पल शर्मा जी ने सीने पर हाथ रखा हुआ था। गोलू को बकवास करते देखकर गुड्डू ने उसे पलटा और कहा,”गोलू तुमको का हम चू#या लगते है”
“लगते नाही बेटा तुमहू हो”,मिश्रा जी ने गुड्डू और गोलू को इस हालत में देखकर दाँत पीसते हुए कहा

शर्मा जी की आँखे अब थोड़ी थोड़ी खुल चुकी थी इसलिए वे सीने पर हाथ रखे उठे और मिश्रा जी की तरफ बढ़कर कहा,”देखा मिश्रा जी , हमहू कहे थे ना जे गुड्डू और गोलू के बीच,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
शर्मा जी इतना ही बोल पाए , उनकी आँखे इतनी खुली कि वे गुड्डू गोलू को एक दूसरे की बाँहो में और सामने खड़े मिश्रा जी को देख पाए लेकिन इतनी भी नहीं खुली थी कि नीचे गिरे गोलू गुड्डू को देख पाए ,, वे अपनी बात पूरी करते इस से पहले ही गुड्डू और गोलू में उलझ के पिकअप से बाहर आ गिरे,,,,वही जहा आप सोच रहे है , यादव जी के ऊपर

मिश्रा जी को वहा देखकर गुड्डू गोलू एक दूसरे से दूर हुए और मासूम बनकर , सर झुकाकर नीचे उतर आये। मिश्रा जी ने दोनों की गुद्दी पकड़ी और दोनों के सर एक दूसरे से भिड़ाकर गुड्डू से कहा,”का बेटा ! लहंगा पहने हो तो खुद को लैला समझ लिए हो,,,,,,,,,,,!!!”
गुड्डू को जोर की पड़ चुकी थी इसलिये उसने ना में गर्दन हिलायी। मिश्रा जी ने एक बार और दोनों के सर भिड़ाये और गोलू से कहा,”और तुम का खुद मजनू हो जो गुड्डू भैया के पियार मा बौराय गए हो ?”

मिश्रा जी दोनों को अच्छे से सबक सीखा पाते इस से पहले आदर्श फूफा ने आकर कहा,”अरे मिश्रा ! इनको छोडो लवली को सम्हालो”
लवली का नाम सुनकर मिश्रा जी ने गुड्डू और गोलू को छोड़ दिया और आदर्श फूफा की तरफ पलटे। गोलू गुड्डू को देखकर मुस्कुराया , वही इसलिए मुस्कुराया कि मिश्रा जी ने उन्हें छोड़ दिया और दोनों मार खाने से बच गए लेकिन गुड्डू को लगा गोलू उसे चिढ़ा रहा है इसलिए उसने इधर उधर देखा और फिर नीचे पड़ी एक ईंट उठाकर गोलू के पीछे भागा !

“कहा है लवली ?”,मिश्रा जी ने आदर्श फूफा से पूछा
“उह्ह चाण्डालों के नीचे दबा है”,आदर्श फूफा ने सामने इशारा करके कहा
मिश्रा जी ने देखा चार जन एक दूसरे के ऊपर गिरे है ये चार जन कोई और नहीं शर्मा जी , यादव जी , गुप्ता जी और सबसे नीचे जिंदगी और मौत से लड़ता बेचारा लवली था।
“आदर्श बाबू हमायी मदद कीजिये”,मिश्रा जी ने चारो की तरफ आकर कहा
“हम नाही कर पाएंगे मिश्रा जी,,,,,,,,,,,,!!!!”,कहकर आदर्श फूफा वहा से चले गए क्योकि बेचारे खड़े रहने की स्तिथि में नहीं थे।

मिश्रा जी अकेले ही सबको हटाने लगे। उन्होंने शर्मा जी को उठाकर साइड किया तो शर्मा जी बंद आँखों के साथ पिकअप को टटोलते हुए साइड में चले गए। यादव जी को उठाया तो यादव जी गुस्से से पिकअप की तरफ जाते हुए चिल्लाये,”साला पिकअप को आगे कौन किया रे ?”
मिश्रा जी ने अपना सर झटका और लवली पर गिरे गुप्ता जी को उठाया तो गुप्ता जी ने मिश्रा जी से हाथ मिलाकर कहा,”अरे ! थन्कु थन्कु मिश्रा जी,,,,,,,,,,,!!!”

“थन्कु का बोल रहे है , इलेक्शन मा खड़े हुए हो का ?”,मिश्रा जी ने गुप्ता जी को साइड में करके कहा
तीनो चाण्डालों को उठाने के बाद मिश्रा जी को मिटटी में धसा लवली नजर आया , उन्होंने जल्दी से लवली को पलटा तो लवली ने गहरी साँस ली और बेहोश हो गया।

भागमभाग देखकर बिंदिया ने रूपा को उठाया और दोनों पिकअप से बाहर चली आयी। बिंदिया की नजर लवली और मिश्रा जी पर पड़ी तो वह उनकी तरफ चली गयी। उधर मंगल फूफा ने देखा आस पास कोई नहीं है तो अपनी हथेलियों में थू थू किया और बचे हुए चार बालों को सेट करके रूपा से कहा,”रूपा जी,,,,,,,!!!
“का मंगल जी ?”,रूपा ने कहा

“हम जे कह रहे थे कि हम आपसे बहुते प्रेम,,,,,,,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा इतना ही कह पाए क्योकि गोलू के पीछे ईंट लेकर भागते गुड्डू का निशाना चूक गया और आकर लगा मंगल फूफा के ललाट पर और मंगल फूफा हाथ पैर फैलाकर नीचे जमीन पर जा गिरे।
आदर्श फूफा ने मंगल फूफा को नीचे गिरे देखा तो उन्हें एक सुखद अनुभूति हुई और उन्होंने गाना शुरू कर दिया
“हे जी ! मंगल भवन अमंगल हारी,,,,,,,,,,,,!!!”

( मिश्रा जी की मण्डली चंदौली से तो निकल चुकी लेकिन क्या सही सलामत चकिया पहुंच पायेगी ? क्या लवली को आएगा होश या फिर ले चुका वो अपनी आखरी साँस ? क्या मंगल फूफा बिना किसी भसड़ के कर पाएंगे रूपा से अपने प्यार का इजहार ? जानने के लिए पढ़ते रहिये मनमर्जियाँ सीजन 5 , अजी ! मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal
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