Site icon Sanjana Kirodiwal

Manmarjiyan Season 4 – 9

Manmarjiyan Season 4 – 9

Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

गुप्ता जी का घर , कानपूर
अगली सुबह गुप्ता जी की नींद बाहर होता शोर शराबा सुनकर खुली। गुप्ता जी आँखे मसलते हुए उठे और कमरे से बाहर आँगन में आते हुए कहा,”जे सुबह सुबह काहे का रोना धोना लगा रखा है , आराम से सोने भी नाही देते,,,,,,,,,,!!”

उबासी लेते हुए गुप्ता जी जैसे ही बाहर सीढ़ियों पर आये मेन गेट के बाहर भीड़ देखकर उन्हें याद आया कि कल रात क्या हुआ था ? गुप्ता जी को गिरने की वजह से पैर में चोट लगी थी इसलिए डरते डरते गेट के पास आये। गोलू , पिंकी , गुप्ताइन और मंगल फूफा वही खड़े थे। मोहल्ले के लोग इक्क्ठा थे। गुप्ता जी गोलू को साइड कर आगे आये तो नीचे पड़े यादव जी को देखा।

यादव जी की का मुँह खुला हुआ था और ललाट पर एक मोटा सा गुमड़ निकल आया था। पास ही बैठी फुलवारी छाती पीटकर रो रही थी।
“का यादववा चल बसे का ?”,गुप्ता जी ने धीरे से गोलू से पूछा
“आपकी ईंट खाकर मरे है,,,,,,,हमहू तो पहिले ही कहे रहे कि ईंट मत फेंको लेकिन नाही तब तो खुद को चैम्पियन समझ रहे थे”,गोलू ने भी धीमे स्वर में गुप्ता जी को सुनाकर कहा

गुप्ता जी ने सुना तो उनकी सिट्टी पिट्टी गुम हो गयी , वे खुली आँखों से खुद को हवालात में चक्की पीसते देख रहे थे। उनके माथे पर पसीने की बुँदे झिलमिलाने लगी और उन्होंने गोलू से कहा,”ए यार गोलू ! हमका बचाय ल्यो हमहू जान बुझकर नाही मारे है यादव को उह्ह तो गलती से लग गवा , ए यार गोलू जे उम्र मा हमहू जेल जाना नाही चाहते यार हमका बचाय ल्यो”
गोलू ने सुना तो उसका दिल पिघल गया अब गुप्ता जी जैसे भी हो थे तो उसके बाप ही ना उसने कहा,”आप शांत रहो हमहू करते है कुछो”

गुप्ता जी ने हामी में गर्दन हिलायी तो गोलू रोने का नाटक करते हुए फुलवारी के पास आया और उसके बगल में बैठकर कोहनी अपने घुटने पर टिकाई और हाथ ललाट से लगाकर रोते हुए कहा,”अरे चाची ! जे कैसे हुई गवा ? हमरे यादव चचा को का हो गवा,,,,,,,,,,,अरे अभी तो इन्होने अपनी जिंदगी मा कुछो देखा ही नाही था इत्ती जल्दी संसार को अलविदा कैसे कह गए ? अब का होगा आपका , कौन सम्हालेगा आपको और बच्चो को ?”
“हम है ना हम सम्हाल लेंगे”,मंगल फूफा ने मुस्कुरा कर धीरे से कहा

गुप्ता जी मंगल के बगल में ही खड़े थे जब उन्होंने उसे मुस्कुराते देखा तो उसके सर पर एक चपत लगाकर कहा,”हिया किसी की मौत हो गयी है और तुमहू हंस रहे हो,,,,,,,,,,,लाज शर्म नाही है”
“अरे हम काहे करे लाज शर्म ? ईंट तो इनके सर पर आपने मारी थी ना”,मंगल फूफा ने थोड़ा तेज आवाज में कहा। आसपास के लोगो ने सुना तो सब गुप्ता जी को शक की नजरो से देखने लगे। फुलवारी का रोना बंद हो गया और वह अवाक सी गुप्ता जी को देखने लगी वही गोलू ने अपना सर पीट लिया

वह इस रायते को सम्हालने की कोशिश कर रहा था और मंगल फूफा ने इसे और फैला दिया। गुप्ता जी ने देखा सब उन्हें ही देख रहे है तो उन्होंने मंगल से कहा,”का बकवास कर रहे हो ? हमने कब ईंटा मारी इनके सर पर ?”
“आपने मारी थी , याद करो कल रात मा गोलू ने आपको चोर समझकर धुलाई की थी उसके बाद गोलू से बदला लेने के लिए आपने ईंट फेंकी और जब गोलू बचने के लिए झुका तो वो ईंट यादव को लगी और उह्ह मर गया”,मंगल फूफा ने सबके सामने गुप्ता जी की ही पोल खोल दी।

गुप्ता जी हकबका गए और घबराकर कहा,”हम हमहू ऐसा कब किये ?”
“किये थे किये थे आपने ही मारा था लगता है आप भूल गए है,,,,,,,,,!!”,मंगल फूफा ने कहा
गुप्ता जी ने आगे बढ़कर उसका मुँह बंद किया और दबे स्वर में कहा,”अबे चुप हो जाओ का हमको मरवाने की ठान लिए हो,,,,,,,,,,!!!”

गोलू ने देखा सब गुप्ता जी को शक की नजरो से देख रहे है तो उसने मंगल फूफा से गुस्से में कहा,”ए मंगल फूफा जे का बकवास कर रहे हो , हमाये पिताजी तो यादव जी के दोस्त है जे इनको काहे मारेंगे ?”
मंगल फूफा ने सुना तो उछलकर गोलू के सामने आ बैठा। गोलू और मंगल फूफा के बीच पड़े थे यादव जी , मंगल फूफा ने अपना हाथ जोर से यादव के सीने पर मारा और कहा,”भूल गए उन्होंने तुमको ईंट फेंक के मारा था”

गोलू ने सुना तो दोनों हाथो की मुट्ठी बनाकर तड़ तड़ तड़ यादव जी की छाती पर मारकर कहा,”कब कब कब ?”
मंगल फूफा ने सुना तो उन्होंने भी चिढ़कर गोलू की तरह दोनों हाथो से मुक्के यादव की छाती पर मारा और कहा,”अरे रात मा”
“रात मा कब ?”,गोलू ने फिर मुक्के मारे
“अरे जब गुप्ता जी छत से नीचे गिरे थे और तुमने उनको चोर समझ के पीट दिया था”,मंगल फूफा ने फिर यादव की छाती पर मारा

“तुमहूँ छत पर का कर रहे थे ?”,गोलू ने यादव जी की छाती पर हाथ मारकर पूछा
“अरे हमहू चाँद देखने गए थे”,मंगल फूफा ने कहा
“पर कल तो अमावस थी,,,,,!!”,गोलू ने कहा
“अरे तो फुलवारी तो थी ना,,,,,,,,!”,मंगल फूफा के मुँह से सच निकल गया। फुलवारी ने सुना तो हैरानी से मंगल को देखने लगी। यादव जी की छाती पर अब तक इतने मुक्के पड़ चुके थे कि उनको होश आ गया , हाँ हाँ वो मरे नहीं थे बस पिछली बार की तरह बेहोश हुए थे।

मंगल फूफा के मुँह से सच निकलवा कर गोलू उठा और अपनी छाती पर जोर से हाथ मारते हुए कहा,”देट्स आल माय लार्ड , मंगल फूफा अमावस की रात में चाँद देखने गए थे इसका मतलब चाँद उन्होंने फुलवारी को कहा है और बीच मा जब यादव जी अमावस बनकर आये तो मंगल ने उनको रास्ते से हटा दिया,,,,,,,,,,,देट्स आल माय लार्ड”

कहते हुए गोलू गुप्ता जी के सामने आया और शाबाशी लेने के लिए सीना तानकर उनके सामने खड़ा हो गया। गुप्ता जी ने खींचकर एक थप्पड़ गोलू को मारा और कहा,”तुम्हाये बाप दादा ने हिया अदालत बैठी रखी है जो माय लार्ड माय लार्ड कर रहे हो”

एक ही थप्पड़ में गोलू घूमते हुए दूर जा गिरा ,गोलू मंगल फूफा के मुक्को का ये असर हुआ कि यादव जी को होश आ गया और जैसे ही उन्होंने सुना मंगल फूफा कल छत से चाँद की जगह फुलवारी को देख रहे थे तो उन्होंने दोनों हाथो से मंगल की कोलर पकड़ी और कहा,”साले कमीने ! हमरी फुलवारी को छत से देखने की तुम्हरी हिम्मत कैसे हुई ? तुमको तो हम ज़िंदा नाही छोड़ेंगे”

यादव जी ने मंगल फूफा की धुलाई की और उनके ऊपर आ बैठे। गोलू थप्पड़ खाकर साइड में पड़ा था। फुलवारी रोना भूलकर सब मामले को समझने की कोशिश कर रही थी और मोहल्ले वाले हैरान की आखिर यहाँ हो क्या रहा है ?
फुलवारी ने जब देखा यादव जी मंगल फूफा पर बैठकर उन्हें थप्पड़ पर थप्पड़ मार रहे है तो वह भागकर गुप्ता जी के पास आयी और कहा,”अरे आप खड़े खड़े का देख रहे है रोकिये उन्हें वो मंगल भैया को मार देंगे”

मार खाते मंगल ने जब फुलवारी के मुँह से भैया सुना तो यादव को रुकने का इशारा किया और फिर फुलवारी की तरफ देखकर कहा,”का कहा आपने ?”
“हमने कहा मंगल भैया को बचाइए”,फुलवारी ने मासूमियत भरे स्वर में कहा
मंगल फूफा ने भैया सुना तो उनका मुँह बन गया और उन्होंने यादव जी से कहा,”यादव एक ठो काम करो मार ही दयो हमका”

“अबे तो का सईया कहकर बुलाये तुमको,,,,,,,,हमहू साला कहे रहे हमरी फुलवारी से दूर रहो नहीं तो तुम्हाये पत्ते बिखेर देंगे लेकिन तुम नाही माने”,कहते हुए यादव जी ने मंगल फूफा को मारना शुरू कर दिया
फुलवारी ने देखा गुप्ता जी कुछ नहीं कर रहे तो उसने गुप्ताइन से कहा,”अरे कहिये ना इनसे,,,,,,,,!!!”
“ए गोलू के पिताजी खड़े खड़े का देख रहे हो , हमाये मंगल फूफा का अमंगल हो जायेगा तब जायेंगे उन्हें बचाने,,,,,,,,,,,अरे जाईये ना”,गुप्ताइन ने कहा

गुप्ता जी सबकी बात टाल सकते है लेकिन अपनी गुप्ताइन की नहीं लेकिन बेचारे जैसे ही आगे बढे धड़ाम से यादव जी के सामने जा गिरे। बीती रात छत से गिरने की वजह से उनके पैर में मोच आ गयी थी और ये उसी मोच का असर था कि गुप्ता जी चल नहीं पाए।
यादव जी ने सामने गिरे गुप्ता जी को देखा तो गुप्ता जी ने कहा,”अबे ए यादव अबे छोड़ दो इनको पहिले से छोटे है अब का जमीन मा दबा दोगे जे का,,,,,,,,अरे छोड़ दो भाई,,,,,,,!!!”

गोलू ने देखा यादव मंगल फूफा को कुछ ज्यादा ही पीट चुका है तो उठकर आया और पीछे से उनकी गर्दन को अपनी बांहो में दबोचा और कहा,”अबे का मार डालोगे हमरे फुफा को,,,,,,,,!!”
गोलू में इतनी जान तो थी कि वह यादव जी को फूफा से अलग कर सके और गोलू ने किया भी और यादव को साइड में फेंक दिया। मंगल फूफा ने खाँसते हुए साँस ली और गोलू की तरफ देखकर कहा,”तुमहू इंसान नाही देवता हो गोलू तुम्हरा जे अहसान कबो ना भूलेंगे हम”

“अहसान तो तुम करो हम पर फूफा जे फुलवारी का चक्कर छोड़ दयो वरना साला तुम्हरे चक्कर मा हम सबके फूल पत्ते बिखर जाही है,,,,,,,,,!!”,गोलू ने हाथ जोड़कर मंगल फूफा से कहा और फिर गुप्ता जी को उठाया। गुप्ता जी के पैर में मोच आ चुकी थी और अब वे ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे। गोलू ने पिंकी और गुप्ताइन से कहा,:”पिंकिया ए अम्मा जे पिताजी को अंदर लेकर जाओ”

गुप्ता जी को अंदर भेजकर गोलू ने मोहल्ले के लोगो को भी उनके घर जाने को कहा। यादव जी गोलू के पास आये और कहा,”ए गोलू ! समझाय ल्यो अपने जे हवसी फूफा को,,,,,,,,,,आज के बाद जे को हमाये घर के आस पास भी दिखा ना तो टाँगे काट देंगे इसकी,,,,,,,,,!!”
“काट देना पर तुम्हाये घर के आस पास दिखे तब,,,,,,,अब अपना फूल पत्ती उठाओ और अपने घर जाओ सुबह सुबह मोहल्ला मा तमाशा बना रखा है”,गोलू ने यादव जी को डपटकर कहा

“का कहे ?”,यादव ने गोलू को घूरकर देखा
“अरे हमहु कह रहे है अपनी फुलवारी को सम्हालो और घर जाओ,,,,,,,,हम भी अपना जे कूड़ा लेकर घर जाते है”,कहते हुए गोलू ने मंगल फूफा की गुद्दी पकड़ी और उन्हें लेकर घर के अंदर चला गया।

मिश्रा जी का घर , कानपूर
गुड्डू सुबह जल्दी उठकर तैयार हो गया और कलाई पर घडी बांधते हुए आँगन में आकर शगुन को आवाज दी,”शगुन हमायी मोटरसाइकिल की चाबी देखी हो का हमका मिल नाही रही”
“ये रही तुम्हायी मोटरसाइकिल की चाबी ! आज सबेरे सबेरे तैयार होकर कहा चली सवारी ?”,शगुन की जगह मिश्राइन ने चाबी लाकर गुड्डू को थमाते हुए कहा

“अरे अम्मा दुकान जा रहे है , वो कल सोनू भैया से एक ठो अरेंजमेंट का काम मिला है न उसी के लिए,,,,,,,,,हम गोलू को फोन किये रहय उह्ह आया क्या ?”,गुड्डू ने कहा
“काहे गोलू के बिना तुम्हायी दाल नाही गलती का गुड्डू ?”,मिश्रा जी ने लोटे से पानी लेकर अपना मुँह धोते हुए कहा

“सुबह सुबह पिताजी से बहस नहीं करेंगे वरना पता चले पूरा दिन ही बहस मा निकल जाये,,,,,,,,,,!!”,गुड्डू धीरे से बड़बड़ाया तो मिश्रा जी ने उसकी तरफ आकर कहा,”सोनू के हिया से काम तो मिला है पर ध्यान रहे कोनो गड़बड़ ना हो का है कि मोहल्ले का काम है अगर थोड़ी सी भी ऊंच नीच हुई न तो जिंदगीभर सुनने को मिलेगा तुम्हे भी और हमे भी,,,,,,,,,जाओ मन लगाकर काम करो”

गुड्डू ने सुना तो हैरानी से मिश्रा जी को देखने लगा क्योकि सुबह सुबह उनसे इस बात की उम्मीद तो गुड्डू को नहीं थी। गुड्डू को याद आया वह अपना फोन और पर्स लेना तो भूल ही गया है इसलिए वापस अपने कमरे की तरफ जाने लगा सामने से आती शगुन ने पर्स और फोन गुड्डू के सामने किया और कहा,”आपका पर्स और फोन,,,,,,,!!”

“अरे थैंक्यू शगुन,,,,,,,अच्छा हमहू जाते है आज बहुते काम देखना है हमे”,गुड्डू ने कहा और जाने के लिए जैसे ही पलटा शगुन ने कहा,”गुड्डू जी ! आप नाश्ता नहीं करेंगे ?”
गुड्डू पलटा और कहा,”अरे यार शगुन ! हमे ना बहुते देर हो रही है नाश्ता हमहू बाहर कर लेंगे,,,,,,,अभी के लिए मीठा खा लेते है”

शगुन गुड्डू की बात समझती इस से पहले गुड्डू ने अपने होंठो से शगुन के गाल को छुआ और वहा से चला गया। शर्म से शगुन के गाल लाल हो गए और उसका हाथ गाल पर चला गया। वहा से गुजरती मिश्राइन ने देखा तो कहा,”अरे शगुन ! का हुआ गाल से हाथ लगा के काहे खड़ी हो ?”
“अह्ह्ह्ह कुछ नहीं माजी”,शगुन ने जल्दी से अपना हाथ गाल से हटाकर कहा
“नाश्ता हम बना लेंगे तुमहू मंदिर मा पूजा कर देओ”,कहकर मिश्राइन वहा से चली गयी और शगुन मुस्कुराते हुए वहा से चली गयी  

( क्या यादव जी से इतनी मार खाने के बाद मंगल भूल जाएगा फुलवारी को या अभी मंगल का पिटना बाकी है ? सुबह सुबह हुए इस तमाशे के बाद किस पर बरसेगा गुप्ता जी का कहर ? क्या गोलू के बिना गुड्डू सम्हाल पायेगा आज का दिन ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ” सीजन 4 मेरे साथ )

Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9

Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9Manmarjiyan Season 4 – 9

संजना किरोड़ीवाल 

Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

गुप्ता जी मंगल के बगल में ही खड़े थे जब उन्होंने उसे मुस्कुराते देखा तो उसके सर पर एक चपत लगाकर कहा,”हिया किसी की मौत हो गयी है और तुमहू हंस रहे हो,,,,,,,,,,,लाज शर्म नाही है”
“अरे हम काहे करे लाज शर्म ? ईंट तो इनके सर पर आपने मारी थी ना”,मंगल फूफा ने थोड़ा तेज आवाज में कहा। आसपास के लोगो ने सुना तो सब गुप्ता जी को शक की नजरो से देखने लगे। फुलवारी का रोना बंद हो गया और वह अवाक सी गुप्ता जी को देखने लगी वही गोलू ने अपना सर पीट लिया

गुप्ता जी मंगल के बगल में ही खड़े थे जब उन्होंने उसे मुस्कुराते देखा तो उसके सर पर एक चपत लगाकर कहा,”हिया किसी की मौत हो गयी है और तुमहू हंस रहे हो,,,,,,,,,,,लाज शर्म नाही है”
“अरे हम काहे करे लाज शर्म ? ईंट तो इनके सर पर आपने मारी थी ना”,मंगल फूफा ने थोड़ा तेज आवाज में कहा। आसपास के लोगो ने सुना तो सब गुप्ता जी को शक की नजरो से देखने लगे। फुलवारी का रोना बंद हो गया और वह अवाक सी गुप्ता जी को देखने लगी वही गोलू ने अपना सर पीट लिया

गुप्ता जी मंगल के बगल में ही खड़े थे जब उन्होंने उसे मुस्कुराते देखा तो उसके सर पर एक चपत लगाकर कहा,”हिया किसी की मौत हो गयी है और तुमहू हंस रहे हो,,,,,,,,,,,लाज शर्म नाही है”
“अरे हम काहे करे लाज शर्म ? ईंट तो इनके सर पर आपने मारी थी ना”,मंगल फूफा ने थोड़ा तेज आवाज में कहा। आसपास के लोगो ने सुना तो सब गुप्ता जी को शक की नजरो से देखने लगे। फुलवारी का रोना बंद हो गया और वह अवाक सी गुप्ता जी को देखने लगी वही गोलू ने अपना सर पीट लिया

Exit mobile version