Manmarjiyan Season 4 – 8
मंगल फूफा छत की दिवार पर औंधे लेटे फुलवारी को देख रहे थे और गोलू अमावस की काली रात में आसमान में चाँद देखने की कोशिश कर रहा था। मंगल फूफा जिस चाँद की बात कर रहे थे वो आसमान में नहीं बल्कि यादव के घर के आँगन में घूम रहा था। गुप्ता जी गोलू के पीछे पीछे ऊपर आये , अब अँधेरे में उन्हें गोलू तो दिखाई नहीं दिया उलटा दिवार पर औंधे लेटे मंगल फूफा उन्हें कोई चोर नजर आये। गुप्ता जी ने इधर उधर नजर दौड़ाई एक मोटा सा डंडा उन्हें नजर आया।
डंडा दोनों हाथो में सम्हाले गुप्ता जी दबे पाँव दिवार की तरफ बढे लेकिन रास्ते में गोलू से टकरा गए और घूमकर जैसे ही डंडा मंगल फूफा को मारा , मंगल फूफा उठकर साइड हो गए और गुप्ता जी डंडे समेत ही नीचे जा गिरे। धूम-धड़ाम की आवाज आने से गोलू भागकर दिवार के पास आया और नीचे झांककर देखा लेकिन अँधेरे में क्या ही दिखता ? बगल में खड़े मंगल फूफा ने भी झांककर देखा तो गोलू ने घबराकर कहा,”नीचे कौन गिरा ?”
“हमको तो लगता है कोई चोर है,,,,,,!!”,मंगल फूफा ने कहा
“अरे तो फिर हिया का कर रहे हो नीचे चलकर देखो कौन चोर है ?”,गोलू ने कहा और जाने लगा तो देखा मंगल फूफा अभी भी दिवार के पास खड़े सामने देख रहे है। गोलू ने पीछे से उनकी कोलर पकड़ी और और साथ ले जाते हुए कहा,”अरे ! चाँद को छोडो फूफा नीचे गिरे उह्ह ग्रहण को देखो कही पिताजी को पता चला तो हमे दिन मा तारे ना दिखा दे”
गोलू और मंगल फूफा नीचे आये देखा आँगन में कोई नहीं है , गुप्ता जी के कमरे का दरवाजा बंद देखकर गोलू को लगा अम्मा पिताजी सो गए होंगे।
“फूफा रस्सी लेकर आओ”,कहकर गोलू आँगन से बाहर चला आया। गुप्ता जी छत से सीधा घर के छोटे से बगीचे में आ गिरे जहा गमलो के साथ साथ बहुत से फूल लगे थे। गोलू भी गिरने वाले को चोर समझ कर उधर ही चला आया लेकिन अंधेरे में उसे गुप्ता जी ठीक से दिखाई नहीं दिए।
बेचारे गुप्ता जी नीचे गिरे तो क्या जबरदस्त लगी उन्हें साथ ही गमले के फूल उनके कान के ऊपर तो गमले की मिटटी उनके मुँह में जिस से वे चाहकर भी बोल नहीं पाए। गोलू वही खड़े होकर चोर को पकड़ने का प्लान बना रहा था कि किसी ने उसका कंधा थपथपाया। घबराकर गोलू पलटा तो देखा मंगल फूफा है उन्हें देखकर गोलू चिढ गया और कहा,”एक काम करो डायरेक्ट मार ही दो ना हमे जे रह रह कर हार्ट अटैक काहे देते हो ? रस्सी लाये ?”
मंगल फूफा को रस्सी तो मिली नहीं इसलिए वे अंदर तार पर सुख रहे गुप्ताइन के लहंगे का नाड़ा निकाल लाये और कहा,”ये मिला”
गोलू ने मंगल फूफा के हाथो में नाड़ा देखा तो और भड़क गया और कहा,”इसका का करे ? मंगलसूत्र बाँध दे तुम्हाये गले मा , अबे रस्सी लाने को बोला है,,,,,,रस्सी लेकर आओ”
गोलू मंगल फूफा को फटकार ही रहा था कि उधर गुप्ता जी को होश आया और उन्होंने मरे हुए स्वर में कहा,”अरे भैया कोई है का ?”
मंगल फूफा को भेजकर गोलू गुप्ता जी तरफ पलटा और कहा,”का बात है बेटा पकडे गए तो अब भैया बना रहे हो , रिश्ता जोड़ रहे हो ,, ए कान खोलकर सुन ल्यो हमहू तुम्हरे कोनो भैया वैया नाही है समझे,,,,,,,,यही रुको पुलिस बुलाते है”
गोलू ने पलटकर देखा लेकिन मंगल फूफा का कोई अता पता नहीं था। गुप्ता जी गोलू की बात सुनकर झल्ला उठे , एक तो बेचारे छत से गिर गए और गोलू उनकी मदद करने के बजाय बकवास कर रहा था।
उन्होंने इधर उधर देखा और पास ही पड़ा डिब्बा गोलू को फेंककर मारा। अँधेरे में भी गुप्ता जी का निशाना परफेक्ट था , डिब्बा सीधा जाकर लगा गोलू के सर पर जिस से गोलू गुस्सा हो उठा और सीधा कुद पड़ा गुप्ता जी पर , चोर समझकर उसने गुप्ता जी की धुलाई कर दी , कुर्ता फाड़ दिया , बाल खींच दिए और हाल बेहाल कर दिया।
मंगल फूफा रस्सी ढूंढते हुए बाहर आये , उन्हें रस्सी तो नहीं मिली लेकिन कपडे सुखाने वाली रस्सी दिखी तो वे उसकी तरफ लपके लेकिन अँधेरे में खोले कैसे सोचकर उन्होंने बाहर की लाइट जला दी। जैसे ही लाइट जली गोलू की नजर पड़ी गुप्ता जी पर और वह चिल्लाया,”अरे पिताजी आप”
गोलू ने गुप्ता जी को छोड़ दिया तो गुप्ता जी उठे और आड़े टेढ़े चलते हुए बगीचे से निकलकर साइड में चले आये।
गोलू ने देखा तो उसे समझ आया कि अब तक वह जिसे मार रहा था असल में वह कोई और नहीं बल्कि उसके अपने पिताजी ही थी। मंगल फूफा ने गुप्ता जी को देखा तो भागकर गोलू के पास आया।
“यार फूफा ! पिताजी तो टुंडे हो गए”,गुप्ता जी को फटेहाल देखकर गोलू ने मंगल फूफा से कहा
“लेकिन जे हिया का कर रहे है ?”,मंगल फूफा ने हैरानी भरे स्वर में कहा
“जे तो पिताजी ही बताएँगे,,,,,,,,,पिताजी , ए पिताजी,,,,,,,,,,,!!”,कहते हुए गोलू गुप्ता जी की तरफ बढ़ गया
गोलू जैसे ही गुप्ता जी के सामने आया गुप्ता जी ने गुस्से से कहा,”अबे असुर कही के , अबे भगवान् ने तुमको देखने के लिए दो आँखे दी है , सुनने के लिए दो कान दिए है लेकिन तुमको इस्तेमाल करना है अपना मुँह,,,,,,,,,अपने ही बाप को कित्ती तबियत से मारे हो बे तुमहू , हम का साला तुमको चोर दिखाई देते है ?”
“अरे तो हमे का पतो बगीचा मा आप हो , और आप हिया का कर रहे थे ? हमको लगा चोर है तो हमहू धर लेइ आपका”,गोलू ने चिढ़कर कहा
एक तो गोलू ने गुप्ता जी को मारा और ऊपर से उनसे बहस भी कर रहा था ये देखकर गुप्ता जी ने उसे मारने के लिए इधर उधर देखा। मंगल फूफा ने पास ही पड़ा ईंट का टुकड़ा उठाकर गुप्ता जी को थमा दिया और मारने का इशारा किया ये देखकर गोलू चिल्लाया,”अबे फूफा ! पार्टी बदल लिए,,,,,,,हमको मरवा रहे हो साले तुम्हायी करतूत बताये पिताजी को , जे ना छत की दिवार पर चढ़कर फुलवारी के घर मा झाँक रहा था पिताजी,,,,,,,,सच कह रहे है”
गुप्ता जी ने मंगल फूफा की तरफ देखा तो मंगल फूफा ने मासूमियत से कहा,”मैं तो 8 बजे के बाद हल्का होने नहीं जाता इत्ती रात मा छत पर काहे जाऊंगा , जे साला गोलुआ बचने के लिए हमको फंसा रहा है,,,,,,,,,,,अरे हम तो कहते है फेंक के मारो ईंटा गोलुआ को और फोर देओ ओह्ह का कपार”
फूफा की बात सुनकर गुप्ता जी ने गोलू को मारने के लिए ईंट हवा में उठा ली ये देखकर गोलू ने घबराकर कहा,”ए ए पिताजी , जे का कर रहे हो अरे लग जाएगी हमका,,,,,,,,,अरे कहा जे चांडाल फूफा की बातो मा आ रहे हो यार हमायी बात सुनो,,,,,,,,,हमने आपका नमक खाया है”
“अब तुमहू हमाये हाथ का ईंटा खाओ”,कहकर गुप्ता जी ने ईंट का टुकड़ा फेंका गोलू पर और हमेशा की तरह गोलू नीचे झुक गया और ईंट जाकर लगा मेन गेट पर चढ़े यादव के ललाट पर और वह नीचे जा गिरा।
गोलू ने पलटकर देखा लेकिन दरवाजा बंद था तो बाहर किसको लगी गोलू को कोई अंदाजा नहीं। गुप्ता जी और मंगल फूफा दरवाजे की तरफ आये और खोलकर देखा तो बाहर आँखे और मुँह फाडे जमीन पर यादव जी गिरे थे।
ये देखकर गुप्ता जी ने अपना सर पीट लिया और मंगल फूफा को जो ख़ुशी हुई है पूछो मत वह उछल कर गुप्ता जी से चिपक गया और उनका गाल चूमकर कहा,”अरे का निशाना लगाया है आपने तो एक ही ईंट में हमरा रास्ता साफ़ कर दिया”
“अ अ अरे हमने कुछ नहीं किया है,,,,,,,,,हमहू न किये”,गुप्ता जी ने घबरा कर कहा
“अरे आपने ही किया है , आपने ही किया है , थैंक्यू थैंक्यू थैंक्यू,,,,,,,,,,!!”,मंगल फूफा ने ख़ुशी के मारे गुप्ता जी से चिपककर कहा तो गुप्ता जी ने उसे खुद से दूर करके कहा,”अबे हम का तुम्हायी मेहरारू है जो इत्ता चिपक रहे हो,,,,,,,!!”
मंगल फूफा साइड में खड़े हो गए लेकिन ख़ुशी अभी भी उनके चेहरे और आँखों से झलक रही थी। गुप्ता जी परेशान से इधर उधर देखने लगे , गोलू वही बगल में खड़े होकर आँखे फाड़े यादव को देख रहा था।
“गोलू , ए गोलू , अबे कुछो करो,,,,,,,,,जे मर गवा तो हम सब फिर से फंस जायेंगे”,गुप्ता जी ने घबराहट भरे स्वर में कहा
गोलू पलटा हैरानी से पहले मंगल फूफा को देखा , फिर गुप्ता जी को देखा और फिर अंदर भाग गया ये देखकर मंगल फूफा ने भी पहले नीचे गिरे यादव जी को देखा , फिर गुप्ता जी को देखा और वह भी अंदर भाग गया। गुप्ता जी ने देखा दोनों भाग गए है और सिर्फ वही मौजूद है तो उन्होंने दरवाजा बंद किया और गिरते पड़ते अंदर भागते हुए बड़बड़ाये,”साला हमको नाही पता था आस्तीन मा सांप और नेवला पाल रहे है हमहू,,,,,,,,!!!
मिश्रा जी का घर , कानपूर
शगुन की बातो से लवली को थोड़ी हिम्मत मिली और वह मिश्रा जी के पास चला आया। मिश्रा जी अपने काम में व्यस्त थे जब उन्होंने लवली को सामने खड़े देखा तो कहा,”अरे लवली ! तुमहू अभी तक सोये नाही बेटा ?”
“हमे आपसे कुछो बात करनी है पिताजी”,लवली ने गंभीरता से लेकिन धीमे स्वर में कहा
मिश्रा जी ने सुना तो उन्होंने अपनी आँखों से चश्मा हटाकर साइड रखा , रजिस्टर बंद करके एक तरफ खिसका दिया और लवली की तरफ देखकर कहा,”हाँ कहो का बात करनी है”
लवली कुछ देर शांत रहा , अंदर ही अंदर खुद को हिम्मत दी और कहा,”पिताजी हमहू बिंदिया के बारे में आपसे कुछो बात करना चाहते है”
मिश्रा जी ने सुना तो लवली की तरफ देखने लगे और लवली ने आगे कहा,”बिंदिया हमे बहुते पसंद करती है पिताजी और हम,,,,,,,हम भी ओह्ह का बहुत चाहते है। हम जानते है बिंदिया के पिताजी ने हमरे पिताजी के साथ बहुते गलत किया पर जे बात की सजा हम बिंदिया को नाही देना चाहते।
हिया से जाने के बाद हमको बिंदिया की कोई खबर नाही है पिताजी , वो कैसी है किस हाल में है हम कुछ नहीं जानते इहलिये हम चकिया जाना चाहते है,,,,,,,,,,हमको बिंदिया से मिलना है पिताजी हम उसे अपने साथ यहाँ लेकर आना चाहते है”
लवली ने हिम्मत करके एक साँस में सारी बात कह दी। मिश्रा जी ख़ामोशी से सब सुनते रहे और फिर गंभीर स्वर में कहा,”मंगेश तुम्हरे बाप की मौत का जिम्मेदार है जे बात तुमहू भूल गए लवली , जिसने तुम्हरे पिता को मरने पर मजबूर किया तुम उसी घर की लड़की से प्रेम करने की बात कर रहे हो,,,,,,,हम तुमको चकिया जाने से नाही रोकेंगे लवली इह तुम्हरा फैसला है पर का तुम्हारा इह फैसला तुम्हरे बाप की मौत से ऊपर हो गवा,,,,,,,,,का तुम मंगेश को माफ़ कर दोगे,,,,,,,,,,ओह्ह्ह का अपने ससुर के रूप में अपनाय लोगे,,,,,,,,,
माना बिंदिया का इह सब मा कोनो कसूर नाही पर का उह्ह तुम्हरे लिए अपना घर छोड़कर आएगी और मंगेश ओह्ह का आने देगा ?”
मिश्रा जी की बात सुनकर लवली उलझन में पड़ गया। एक तरफ उसके पिता का कातिल था तो दूसरी तरफ उसका प्यार , लवली को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे ? बिंदिया को वह बहुत चाहता था लेकिन मंगेश से नफरत भी करता था।
लवली को खामोश देखकर मिश्रा जी उसके पास आये और उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा,”ठन्डे दिमाग से सोचो लवली तुमहू जो चाहते हो उह्ह इत्ता आसान भी नाही , हमको तुम्हरे और बिंदिया के रिश्ते से कोनो दिक्कत नाही पर का ओह्ह्ह के घरवाले जे रिश्ते के लिए मानेंगे,,,,,,,,हमको नाही लगता मंगेश इह होने देगा , अभी तुम्हरा चकिया जाना सही नहीं है बेटा आगे तुम्हायी मर्जी,,,,,,,,,,हम तुमको नाही रोकेंगे”
कहकर मिश्रा जी ने लवली का कंधा थपथपाया और वहा से चले गए। लवली का चेहरा उदासी से घिर गया और वही खड़ा रहा। सोनू भैया से फंक्शन की सभी जानकारी लेकर गुड्डू घर में आया और लवली को मिश्रा जी के तख्ते के पास खड़ा देखकर सीधा उसके पास चला आया और कहा,”का लवली भैया ! पिताजी से बात की ?”
“पिताजी को हमरे और बिंदिया के रिश्ते से कोनो इंकार नाही है,,,,,,,,,,!!”,लवली ने उदासी भरे स्वर में कहा
“ल्यो हमहू तो पहिले ही कहे रहे कि पिताजी का दिल मक्खन है मक्खन , एक सही प्रेम कहानी के लिए उह्ह कबो मना नाही करेंगे,,,,,,,,,,तो कब जा रहे हो बिंदिया भाभी को लेने ?”,गुड्डू ने खुश होकर कहा
“लेकिन उन्होंने हमे चकिया जाने से मना किया है”,लवली ने फिर उदासी भरे स्वर में कहा जिसे सुनकर गुड्डू के चेहरे से ख़ुशी गायब हो गयी और उसने कहा,”लेकिन काहे ? जब पिताजी को जे रिश्ते से कोनो दिक्कत नाही है तो फिर उन्होंने आपको चकिया जाने से काहे मना किया ?”
लवली ने गुड्डू को पूरी बात बताई , गुड्डू के चेहरे पर परेशानी के भाव झिलमिलाने लगे और उसने कहा,”जे तो समस्या हो गयी लवली भैया , जिन्होंने हमाये असली पिताजी को मरने के लिए मजबुर किया बिंदिया उन्ही की बिटिया है,,,,,,,,,,पिताजी सही कह रहे है आपको वहा नहीं जाना चाहिए”
लवली ने सुना तो उसे दुःख हुआ गुड्डू भी मिश्रा जी की तरह बात कर रहा था इसलिए उसने दुखी स्वर में कहा,”हम जानते ही थे गुड्डू , पिताजी की तरह तुम भी हम से यही कहोगे,,,,,,,,,अरे बिंदिया मंगेश की बिटिया है इह मा ओह्ह की का गलती है यार,,,,,,,,हमने का उस से पिरेम जे सोचकर किया था कि आगे जाकर उह्ह्ह हमाये दुश्मन की बिटिया निकलेगी”
गुड्डू ने सुना तो मुस्कुराया और लवली की तरफ देखकर प्यार से कहा,”लवली भैया हमने कहा आपको वहा नहीं जाना चाहिए लेकिन हम तो जा सकते है ना,,,,,,,,,,,,!!!”
“मतलब ?”,लवली ने पूछा
“मतलब इह की जइसन हनुमान जी राम जी का सन्देश लेकर लंका गए थे बस वैसे ही हमहू भी आपका मैसेज लेकर बिंदिया भाभी के पास जायेंगे और पूछेंगे ओह्ह के दिल मा का है ,, अगर उनकी भी हाँ हुई तो फिर चाहे हमाये सामने मंगेश आये चाहे मिश्रा जी देख लेंगे”,गुड्डू ने कहा
लवली ने सुना तो मुस्कुराया , गुड्डू की बातो से उसकी उलझन थोड़ी कम हुई उसने आगे बढ़कर गुड्डू को गले लगाया और कहा,”थैंक्यू गुड्डू”
“”थैंक्यू से काम नाही चलेगा सोनू भैया की दुकान पर पिज्जा पार्टी लेंगे आपसे”,गुड्डू ने बच्चो की तरह कहा
“बाप बनने वाले हो तुमहू , कब बड़े होंगे ?”,लवली ने मुस्कुरा कर कहा
“तो बाप बनने के बाद का लोग पिज्जा खाना छोड़ देते है ?”,गुड्डू ने कहा तो लवली हसने लगा और कहा,”ठीक है खिला देंगे,,,,,,,,,,,लेकिन पहले बिंदिया से मिलो तो सही,,,,,,,,,!!!”
“उह्ह आप हम पर छोड़ दो , दो दिन बाद सोनू भैया के हिया फंक्शन का एक ठो आर्डर लिए है वो पूरा कर दे ओह्ह के अगले दिन ही निकल जायेंगे चकिया के लिए,,,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने कहा
लवली ने सुना तो हामी में गर्दन हिलायी और फिर दोनों सोने चले गए।
( गुप्ता जी की मार से यादव जी बचे है या सच में हो गया है मंगल फूफा का रास्ता साफ ? लवली की जगह गुड्डू चकिया जाकर क्या मिल पायेगा बिंदिया से या फंस जाएगा किसी मुसीबत में ? सोनू भैया के फंक्शन की जिम्मेदारी निभा पाएंगे गुड्डू और गोलू या यहाँ भी होगा कोई कांड ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
