Manmarjiyan Season 4 – 69
मंडप में दूल्हे की जगह गोलू और दुल्हन की जगह गुड्डू को देखकर सभी हैरान थे वही गोलू और गुड्डू ने राहत की साँस ली , गुड्डू ने इसलिए कि वह ऋतिक के साथ फेरे लेने से बच गया और गोलू इसलिए कि वह अपने ही बड़े भाई की अमानत से ब्याह रचाने से बच गया। गुड्डू और गोलू ने एक दूसरे को देखा और एक दूसरे के गले आ लगे। गोलू गुड्डू से दूर हटा और कहा,”अह्ह्ह्ह बच गए गुडडू भैया , यहाँ यहाँ गले तक जान आ गयी थी हमायी जे सोचकर कि साला अपनी ही भाभी के साथ हमाओ ब्याह ना हो जाये”
“वही तो गोलू हमे भी लगा कही ऋतिक के साथ हमाये फेरे ना पड़ जाये,,,,,,,,,,सोचो गोलू एक मर्द होकर हमहू दूसरे मर्द से ब्याह कर लिए होते”,गुड्डू ने अफ़सोस भरे स्वर में कहा
“अरे गुड्डू भैया काहे का मर्द उह्ह्ह मर्द नाही है”,गोलू ने कहा
“मर्द नाही है मतलब ?”,गुड्डू ने असमझ की स्तिथि में कहा
“अरे मतलब ! उह्ह्ह वो नहीं है जो सब समझ रहे है उह्ह्ह वो है जो कोई नाही समझता”,गोलू ने कहा
“पहेलियाँ का बुझा रहे हो गोलू साफ़ साफ़ कहो ना का कहना चाहते हो तुम”,गुड्डू ने झुंझलाकर कहा
“अरे गुड्डू भैया उह्ह्ह,,,,,,,,,,,,!!!”,कहकर गोलू ने अपने खड़े हाथ को झुका दिया और गुड्डू को देखकर आँख मार दी।
गुड्डू को एक तो कुछ समझ नहीं आ रहा था ऊपर से गोलू उसे सबके सामने आँख मार रहा था ये देखकर गुड्डू ने उसके गाल पर एक थप्पड़ रसीद किया और कहा,”आँख का मार रहे हो बे , हम का तुम्हायी लुगाई है ?”
“अभी चार फेरे ले लिए होते ना हमाये साथ तो उह्ह्ह भी बन जाते”,गोलू ने मुँह बनाकर अपना गाल सहलाते हुए कहा
गुड्डू एक तो पहले से इतना परेशान था उस पर गोलू उसे और उलझा रहा था , गुड्डू को उलझन में देखकर गोलू उसके थोड़ा पास आया और कहा,”अरे गुड्डू भैया हम जे कह रहे कि जोन ऋतिक से लल्लन बिंदिया का ब्याह करवाय रहे है ना उह्ह्ह ऋतिक आदमी नाही है”
“आदमी नाही है तो का औरत है ? गोलू तुम्हरी ना बुद्धि सड़ गयी है”,गुड्डू ने चिढ़कर कहा
“अरे यार गुड्डू भैया , कैसे समझाए आपको ? अरे उह्ह्ह मीठा है मीठा”,गोलू ने झुंझलाकर दबे स्वर में कहा
गुड्डू ने सुना तो गोलू को घूरकर कहा,”गोलू ! तुमहू वहा रीतिकवा को उठाने गए थे के ओह्ह्ह का चखने गए थे,,,,,,,,,,,!!!”
“भाड़ मा जाओ आप हमको साला बताना ही नाही है”,गोलू ने चिढ़कर कहा और गुड्डू से दूर जा खड़ा हुआ।
गुप्ता जी ने खुद को सम्हाला और चिल्लाये,”अबे गोलू भूतनी के ! अबे हमरे खानदान का नाम डुबोने की कसम खा लिए हो का तुमहू ? साले आदमी होकर आदमी से ब्याह रचाय रहे हो , लाज शरम का बेच दिए हो ? साला बाप का नाम खराब करने के लिए तुमको जे चकिया ही मिला था ?”
गुड्डू की वजह से गोलू पहले ही चिढ़ा हुआ था गुप्ता जी की बात सुनकर और चिढ गया और शेरवानी के बटन खोलते हुए गुप्ता जी की तरफ आकर कहा,”हम का आपका नाम खराब करेंगे उह्ह तो पहिले से इत्तो खराब है , अरे कानपुर मा किसी लौंडे के बाप का नाम गज्जू सुने है आप , ऐसा लगता है बाप का नाही किसी हाथी के बच्चे का नाम हो”
आदर्श फूफा ने सुना तो गुप्ता जी से कहा,”यादव के संस्कारो की बात कर रहे थे अब अपनी औलाद के संस्कार देख ल्यो,,,,कैसे बाप से जबान लड़ाय रहे है ?”
गुप्ता जी ने तो आदर्श फूफा से कुछ नहीं कहा लेकिन गोलू भड़क गया और शेरवानी खोलकर फेंकते हुए आदर्श फूफा की तरफ आते हुए कहा,”ए तुमको आग लगाने के अलावा और कोनो काम नाही है का फूफा ? जब दो मर्द आपस मा बात कर रहे है तो काहे औरतन के जैसे आग लगाने चले आये ?”
“रीतिकवा कहा है बे ?”,गोलू आदर्श फूफा तक पहुंच पाता इस से पहले लल्लन ने उसके सामने आकर कहा
“ए ढब्बन ! अबहि ना हमाओ दिमाग बहुते गरम है हमाये सर पर दुइ खून सवार है तुमहू तीसरा नाही बनो समझे , हमाये रस्ते से हट जाओ”,गोलू ने कहा
गोलू के मुँह से अपना नाम गलत सुनकर लल्लन चिल्लाया,”अबे हमाओ नाम लल्लन है लल्लन”
“हाँ तो चिल्ला काहे रहे हो ? आराम से बात करो ना , बहरे नाही है हम”,गोलू ने कहा
लल्लन ने सुना तो अपने बाल नोच लिए , गोलू ने उन्हें साइड किया और मिश्रा जी के सामने आकर कहा,”चचा ! आप लोग जो समझ रहे है वैसा कुछो नाही है। हम आपको सब समझाते है ना,,,,,,,,,,,,!!!!”
“समझाओगे तो तब जब तुमहू ज़िंदा बचोगे”,कहते हुए लल्लन ने एक घुसा गोलू को दे मारा और गोलू दूर जा गिरा ये देखकर मंडप में खड़ा गुड्डू चिल्लाया,”अबे लल्लन तेरी तो ! गोलू को हाथ लगाया तो जान ले लेंगे तुम्हरी,,,,,,,,,,,,!!!”
लवली को तो कुछ समझ नहीं आ रहा था यहाँ हो क्या रहा है ? तभी लल्लन का साला वहा आया और कहा,”ए जीजाजी ! अगर शेरवानी मा जे कबूतर है तो हमाये ऋतिक कहा है ? इह सब का हो रहा है , तुमहू हमसे रीतिकवा की शादी करवावे के बदले मा दुई लाख रुपया लिए रहय फिर जे सब तमाशा का है ? कौन है इह लोग और हिया का चल रहा है ? बताईयेगा नहीं न हमे”
ऋतिक के पिताजी के मुँह से दो लाख की बात सुनकर मंगेश का माथा ठनका और उसने लल्लन से कहा,”जे दुइ लाख का चक्कर है बे लल्लन ?”
“अरे कुछो नाही जे तो बस,,,,,,तुमहू चिंता काहे करते हो मंगेश तुम्हरी बिटिया की सादी आज ही होगी और हमाये ऋतिक के साथ ही होगी,,,,,,,,,,!!!”,लल्लन ने मंगेश को बातो में उलझा कर कहा
“तुमहू करके तो दिखाओ बिंदिया की सादी किसी और से साला खून की नदिया बहा देंगे हिया”,लवली ने गुस्से से कहा
“तुमहू कौन होते हो जे सादी रोकने वाले , बिंदिया हमायी बिटिया है हम जहा मर्जी वहा उसकी सादी करे”,मंगेश ने लवली को घूरकर कहा तो मिश्रा जी ने लवली से चुप रहने का इशारा किया और कहा,”ठीक है कर दो बिंदिया सादी लेकिन जिस से करनी है उह्ह्ह लड़का है कहा ?”
“हम हिया है”,एक महीन नजाकत भरी आवाज सबके कानो में पड़ी
गुड्डू भी अपना लहंगा दुपट्टा उतारकर सबके पास चला आया। सबकी गर्दन आवाज वाली दिशा में घूम गयी।
गुलाबी कुर्ता , पिली सलवार , तिरछी माँग के आधे से ज्यादा बाल ललाट पर बिखेरे , कमर मटकाते , नाखुनो पर फूंक मारते हुए ऋतिक सबके बीच आया और कहा,”हम है ऋतिक बिंदिया के होने वाले वो,,,,,,,,,,,,,!!!”
ऋतिक के लटके झटके देखकर एक बार फिर सबके मुँह खुले के खुले रह गए। गुड्डू ने देखा तो पास खड़े गोलू का कंधा थपथपा कर कहा,”गोलू जे,,,,,,,,,,,,!!!”
“अरे वही तो हम तब से आपको समझाने की कोशिश कर रहे थे गुड्डू भैया , मंगेश ने देखा कि बिंदिया की सादी इस ऋतिक से होने जा रही थी तो उसको एक धक्का सा लगा , लल्लन उसका दोस्त होकर उसके साथ इतना बड़ा धोखा कर रहा था।
आदर्श फूफा आगे आये और “एक पल का जीना” डांस स्टेप ऋतिक के सामने करके कहा,”तो तुम हो ऋतिक ?”
ऋतिक ने भी वैसा ही स्टेप किया लेकिन चार बार और पूरा हिल गया और कहा,”हाँ हाँ हाँ हम ही है ऋतिक,,,,,,,,,!!!”
आदर्श फुफा घबराकर मिश्रा जी के बगल में आये और कहा,”जे तो पूरा हिला हुआ है”
“ए बिंदिया ! कम हियर , तुम वहा क्यों खड़ी हो एक अजनबी लड़के के साथ,,,,,,,,,यहाँ आओ हमाये पास हमयी शादी है,,,,,,,,,!!!”,ऋतिक ने बिंदिया को लवली के साथ खड़े देखकर कहा
बिंदिया ने ऋतिक को देखा तो मुँह बनाया और कहा,”तुमसे ब्याह करने से अच्छो है हमहू जहर खाकर मर जाए”
ऋतिक ने सुना तो लल्लन की तरफ आया और उसके सीने से एक तरफ लगकर दूसरी तरफ उसके सीने पर मारकर कुनमुनाकर कहा,”फूफा ! उह्ह्ह जहर खाने की बात कर रही है”
मंगेश का तो जे सब देखकर सर ही घूम गया और उसने कहा,”इह सब का है रे लल्लन ? तुमहू हमायी बिंदिया का ब्याह जे के साथ करवाना चाहते थे , तुमने हमे धोखे मा रखा ? हमाये बिस्वास का फायदा उठाया , काहे लल्लन काहे ?”
“अरे फायदा जे कहो दुइ लाख का फायदा बिंदिया भाभी का ब्याह जे हाफ फ़्राय से करवाने के लिए इसने अपने ही साले से दो लाख रूपये लिए है,,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने आग में घी डालकर कहा
“अबे गोलू के बच्चे सबसे पहिले तुमहाओ जनाजा निकालेंगे हम,,,,,,,,!!”,कहते हुए लल्लन जैसे ही गोलू की तरफ बढ़ा मंगेश ने उसे रोक लिया और कहा,”लल्लन ! हमे इह बताओ तुमने बिंदिया का ब्याह ऋतिक से करवाने के बदले मा अपने साले से दुइ लाख रूपये लिए की नाही ?”
“मंगेश हम तुमको समझाते है,,,,,,,,,,,!!!”,लल्लन ने गिडगिडाकर कहा
“तुमने पैसा लिया के नाही ?”,मंगेश चिल्लाया
“हाँ लिया था लेकिंन,,,,,,,,,,,,,!!!”,लल्लन ने इतना ही कहा कि मंगेश का दिल टूट गया , वह किसी कटे हुए पेड़ की भांति वही कुर्सी पर आ बैठा। मिश्रा जी ने देखा तो मंगेश के कंधे पर हाथ रखा और कहा,”हिम्मत रखो मंगेश ! अच्छा हुआ सही समय पर तुम्हे सच पता चल गया वरना बिटिया की जिंदगी ख़राब हो जाती,,,,,,,,,,,तुमहू चाहे लवली से बिंदिया की सादी नाही करो , तुम्ही बिटिया है तुम्हरा ज़रा मन करे वहा जे का रिश्ता करो पर जे लल्लन जैसे इंसान के घर मा अपनी बिटिया ब्याहने से अच्छा है तुमहू खुद अपने हाथो से ओह्ह्ह का गला घोंठ दो”
बिंदिया ने जब सुना तो फूट फूट कर रोने लगी ये देखकर मंगेश का दिल भर आया और उसने कहा,”अब जे शादी नहीं होगी”
इतना सुनते ही लल्लन का जीजा लल्लन पर भड़क गया और इसके बाद लल्लन ने दिखाया अपना असली रंग जिसके बारे में मंगेश ने कभी सोचा भी नहीं था।
उसने अपने कोट की पेंट में छुपाया कट्टा निकाला और मंगेश की ही कनपटी से लगाकर कहा,”जे शादी होकर रहेगी,,,,,,,,,,,,,,,,ए बाहर आओ रे सब”
मिश्रा जी , गुप्ता जी , आदर्श फूफा , यादव जी , लवली , बिंदिया , गुड्डू और गोलू समझ ही नहीं पाए कि ये अचानक क्या हुआ ? कही से 10-15 लोग हाथो में हथियार लिए आये सब पर तान दिया। शादी मा जमा लोग भागने लगे और कुछ ही देर में पूरा आँगन खाली हो गया बस कानपूर वाले , लल्लन की तरफ के लोग और मंगेश की तरफ के लोग बचे थे पर आप सोच रहे होंगे मैंने शर्मा जी का जिक्र क्यों नहीं किया ? वो बेचारे तो गुड्डू और गोलू का ये कांड देखकर तब से बेहोश ही पड़े थे और किसी ने उन्हें होश में लाने की कोशिश भी नहीं की,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!
“लल्लन ! तुम जे ठीक नाही कर रहे”,मंगेश ने कहा
“अबे चुप ! आज तक हमहू तुम्हरे इशारे पर चलते आये है , तुम्हरे कहे करते आये है पर अब नाही मंगेश , अब हमहू अपनी मर्जी के मालिक है,,,,,,,जे सादी होगी और आज ही होगी,,,,,,,,,,,,,,ए रीतिकवा लेकर जा अपनी होने वाली दुल्हिन को मंडप मा”,लल्लन ने कहा तो ऋतिक ख़ुशी ख़ुशी बिंदिया की तरफ बढ़ा लेकिन लवली सामने आ गया ये देखकर लल्लन ने कहा,”ए लवली ! तू चाहता है तुम्हरी जे हरकत पर मिश्रा की खोपडिया उड़ा दे हमहू,,,,,,,,,,,नहीं ना तो हट सामने से”
लवली ने देखा लल्लन का एक आदमी मिश्रा जी पर बन्दुक ताने खड़ा है तो मजबूरन उसे साइड हटना पड़ा।
ऋतिक ने बिंदिया का हाथ पकड़ा और उसे लेकर मंडप की तरफ बढ़ गया क्योकि लल्लन ने बन्दुक मंगेश पर तान रखी थी। ऋतिक बिंदिया को लेकर मंडप में आ बैठा तो लल्लन चिल्लाया,”ए पंडित ! मंत्र शुरू करो और याद रखना शादी पूरी होने से पहिले मंत्र रुके ना तो हम साला तुम्हायी सांसे रोक देंगे,,,,,,,,,!!!”
पंडित भी मारे डर के जल्दी जल्दी मंत्र पढ़ने लगा। ऋतिक खुश होकर बिंदिया को देखता और बिंदिया चिढ़कर मुँह बनाती और साइड में देखने लगती
लवली ये सब नहीं देख पा रहा था लेकिन इस वक्त मजबूर था। गुड्डू और गोलू पास ही खड़े थे तो गोलू ने दबे स्वर में कहा,”गुड्डू भैया कुछ कीजिये ऐसे तो उह्ह्ह रीतिकवा का ब्याह बिंदिया भाभी से हो जाएगा और फिर लवली भैया किसी को नाही छोड़ेंगे”
“का करे गोलू ? हमे तो इह नाही समझ आ रहा कि तुम्हाये हमाये पिताजी और जे तीन चांडाल हिया का कर रहे है ?”,गुड्डू ने भी दबे स्वर में कहा
“अरे भूल गए गुड्डू भैया जहा भसड़ वहा इन सबकी जड़,,,,,,,,,,,,साला मिश्रा जी कांड के नाम पर दिनभर हमे औरआपको पेलते रहते है जबकि खुद हमसे दो कदम आगे है कांड करने में”,गोलू ने कहा
कुछ देर पहले जहा शोर शराबा था , शादी की शहनाईया थी अब वहा मातम छाया हुआ था। मंगेश के दिल में लल्लन को लेकर नफरत बढ़ती जा रही थी।
इन सबके अलावा कुछ दूर दिवार के पीछे छुपे मंगल फूफा और रूपा सब देख रहे थे।
“मंगल जी अब का होगा ? इह सब तो फंस गए”,रूपा ने कहा
मंगल ने अपने सीने पर हाथ रखा और मुस्कुरा कर कहा,”अरे रूपा डार्लिंग ! मंगल हियर तो फिर काहे को फियर,,,,,,,,,,!!!”
रूपा ने सुना तो मुस्कुरा उठी।
“सुनो ! हम तो तुमको अपने कंधो पर उठा नाही पाएंगे एक काम करो तुम्ही हमे अपने कंधो पर उठा लो फिर देखो हमारा कमाल”,मंगल फूफा ने प्यार से कहा तो हट्टी कट्टी रूपा ने मंगल फूफा को अपने कंधो पर बैठा लिया। मंगल फूफा ने दिवार पर रखा पत्थर उठाया और दे मारा सामने आम के पेड़ पर बने मधुमक्खी के छाते पर , इत्तेफाक से मंगल और उसके आदमी उसी पेड़ के नीचे खड़े थे। जैसे ही पत्थर छते पर लगा मधुमक्खियां चारो और फ़ैल गयी और लगी सबको काटने।
मंगल के आदमी बंदूके फेंककर लगे मक्खियों से खुद को बचाने। अब मक्खियों को क्या पता कौन हीरो है कौन विलीन उन्होंने मंगल के साथ साथ गुड्डू गोलू मिश्रा जी और बाकि सबको भी काटना शुरू कर दिया। लवली ने देखा सब मक्खियों से लड़ रहे है तो वह भी बचता बचाता मंडप में पहुंचा और बिंदिया को वहा से लेकर आगे बढ़ गया। मक्खिया इतनी ज्यादा हो गयी थी कि लवली को रास्ता नहीं सूझ रहा था तभी रूपा ने आवाज दी,”लवली बिंदिया हिया आओ”
लवली बिंदिया को लेकर दिवार के पीछे छुपे मंगल फूफा और रूपा के पास आया और चारो पीछे के रस्ते से वहा से निकल गए।
लल्लन को मक्खियों ने काट डाला तो वह गुस्से में बन्दुक चलाने लगा ये देखकर सब नीचे जमीन पर लेट गए और अकेला लल्लन उनसे लड़ता रहा। गोली खत्म हो गयी तो एक मोटी सी मक्खी ने आकर लल्लन के होंठ पर जोर से काटा और लल्लन मारे दर्द के नीचे गिर पड़ा।
मिश्रा जी को भी मक्खियों ने काट लिया लेकिन उन्होंने दिमाग लगाया और नीचे रेंगते हुए घर से बाहर निकल गए। यादव और आदर्श फूफा एक दूसरे के सामने खड़े मक्खिया मार रहे थे कि दोनों का हाथ लगा एक दूसरे के गाल से और फिर क्या था दोनों मक्खिया छोड़कर एक दूसरे को मारने लगे। शर्मा जी बेहोश पड़े थे लेकिन जैसे ही मक्खी ने उनके गाल पर काटा वे होश में आये।
उठकर बैठे तो वहा का नजारा देखकर हैरान परेशान तभी एक मक्खी ने आकर उन्हें फिर काट लिया और शर्मा जी दर्द से बोखला उठे , वे सम्हल पाते इस से पहले दो मक्खियों ने आकर उनकी आँख के ऊपर काट लिया और मारे दर्द के उन्होंने आंखे बंद कर ली।
अब ना उन्हें कुछ दिखाई दे रहा था ना ही मदद के लिए कोई उनकी आवाज सुन पा रहा था। वे रेंगते हुए आगे बढे कि किसी ने भागते हुए उनके हाथ पर पैर रख दिया और वे चिल्ला उठे। वे उठे और बंद आँखों से ही आगे बढ़ने लगे , चलते चलते पानी के पास पहुंच गए उन्होंने मुँह धोया आँखों में पानी डाला जैसे तैसे करके आँखे थोड़ी खुली और उन्हें धुंधला धुंधला दिखा तो उन्होंने देखा सब आपसे में इधर उधर भाग रहे है।
शर्मा जी के हाथ एक मोटा सा डंडा लगा उन्होंने उसे लिया और सबके बीच आकर चिल्लाते हुए जोर से गोलू घूमे , मक्खिया तो उनके पास नहीं आयी लेकिन उनके नेकदिल , शरीफ , जान से प्यारे , राजदुलारे दामाद श्री श्री श्री गोलू महाराज उस डंडे की चपेट में आ गए और डंडा लगा सीधा गोलू की पीठ पर,,,,,,,,,,गोलू आइआइआइआइ करते हुए चिल्लाया और पलटकर देखा तो शर्मा जी के हाथ में डंडा देखकर गुस्से से उबल पड़ा और चिल्लाया,”अबे शर्मा,,,,,,,,,,,!!!”
“अरे यार गोलू ससुर है तुम्हाये जाने दो”,गुड्डू ने कहा
गोलू को डंडा जोर से लगा था इसलिए उसने गुस्से से कहा,”अबे काहे के ससुर ? जे ससुर नाही गुड्डू भैया जे असुर है ,, साला पहले सीजन से हमायी जान के पीछे पड़े है,,,,,,,,,,,,,आज हमहू जे का काम तमाम करके रहेंगे,,,,,,,,,,,पिंकिया से घर जाकर कह देंगे कि मिश्रा जी के लिए लड़ते लड़ते ओह्ह के पिताजी चकिया मा सहीद हो गए,,,,,,,,,,,,!!!”
गुड्डू गोलू को रोक पाता इस से पहले गोलू ने शर्मा जी के हाथ से डंडा छीना और उनके पीछे भागा , आगे शर्मा जी पीछे गोलू और नजारा देखने लायक था,,,,,,,,,,,!!!
( क्या सच में गोलू आज कर देगा अपने ही ससुर का काम तमाम ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ” सीजन 4 मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
