Manmarjiyan Season 4 – 68
मिश्रा जी अपनी मण्डली के साथ सीधा शादी के मंडप में आ धमके और कहा,”जे सादी नहीं हो सकती”
घुंघट की आड़ से गुड्डू ने अपने पिताजी को देखा तो ख़ुश हो लेकिन अगले ही पल रोनी सूरत बना ली क्योकि मिश्रा जी को नहीं पता था गुड्डू और गोलू यहाँ है। मंडप में जमा लोग आपस में खुसर फुसर करने लगे ये देखकर मंगेश मिश्रा जी की तरफ आया और कहा,”ए मिश्रा ! हिया काहे आये हो ? काहे तमाशा बना रहे हो ?”
“तमाशा तो तुम बना रहे हो मंगेश , अपनी बिटिया ब्याहने के लिए तुमको जे ही घर मिला”,मिश्रा जी ने गुस्से से लल्लन की तरफ इशारा करके कहा
लल्लन ने सुना तो गुस्से में भरकर मिश्रा जी की तरफ आया और कहा,”ए मिश्रा ! अपनी जबान को थोड़ा लगाम दयो जे ही घर से का मतलब है बे तुम्हरा ? अच्छे खानदान से है और मंगेश्वा को पता है जे को अपनी बेटी कहा ब्याहनी है और कहा नहीं , तुमहू जियादा सरपंच नाही बनो”
गुड्डू ने लल्लन को मिश्रा जी के साथ बदतमीजी से बात करते देखा तो गुस्से से उसकी मुट्ठिया भिंच गयी लेकिन अभी वह किसी तरह का तमाशा नहीं चाहता था इसलिए मंडप में खड़ा रहा
लल्लन की बात सुनकर मिश्रा जी ने उस से दबे स्वर में कहा,”ब्याह का घर नहीं होता ना तो यही पटक कर पेल देते तुमको,,,,,,,,,,वैसे भी हम हिया तुमसे नाही मंगेश से बात करने आये है”
मिश्रा जी की बात सुनकर मंगेश ने कहा,”हमे तुम से कोई बात नाही करनी मिश्रा चले जाओ हिया से,,,,,,,,, हम नाही चाहते आज अपनी बिटिया की शादी मा हम किसी तरह का तमाशा करे”
“अबे तमाशा तो जे लल्लन कर रहा है , तुमको साला पता भी नाही पर तुम्हरी आस्तीन का साँप बनकर जे तुम्हे ही डस रहा है। अपने रिश्तेदार से बिंदिया की सादी करवाकर जे तुम पर कोनो बहुत बड़ा अहसान नाही कर रहा”,इस बार गुप्ता जी ने गुस्से से कहा
“अरे हमायी बिटिया है हमायी मर्जी हम जहा चाहे ओह्ह का ब्याह करे तुम लोग होते कौन हो ?”,मंगेश ने गुस्से से कहा
“ए मंगेश ! तुम भी जानते हो बिंदिया और लवली एक दूसरे से प्रेम करते है फिर काहे तुम बिंदिया की सादी ओह्ह्ह की मर्जी के बिना कर रहे हो। हमायी बात सादी रोक दयो , बच्चो की जिंदगी खराब हो जाही है हमहू तुम्हरे आगे हाथ,,,,,,,,,,,,,,,!!!!”,मिश्रा जी ने इतना ही कहा कि तभी लवली की कड़कदार आवाज सबके कानो में पड़ी,”रुक जाईये पिताजी”
लवली की आवाज सुनकर सबने आवाज वाली दिशा में देखा तो सबके मुँह खुले के खुले रह गए। कुछ ही दूर सामने लवली बिंदिया का हाथ थामे खड़ा था।
बिंदिया को लवली के साथ देखकर लल्लन के तो पैरो तले से जमीन ही खिसक गयी। वह सोच में पड़ गया अगर बिंदिया लवली के साथ है तो वहा मंडप में ऋतिक के साथ कौन है ? लवली बिंदिया का हाथ थामे मिश्रा जी और मंगेश की तरफ आया और मिश्रा जी से कहा,”आपको इस आदमी के सामने हाथ जोड़ने की कोई जरूरत नहीं है पिताजी ! हम बिंदिया से प्यार करते है और बिंदिया हम से और हम दोनों को एक दूसरे से कोई अलग नाही कर सकता , जे भी नाही”
लवली की बातें सुनकर मंगेश का खून खौल उठा और वह बिंदिया को देखकर चिल्लाया,”अपने बाप की इज्जत को यू सबके सामने उछालते शर्म ना आयी तोहे बिंदिया ? हम कहते है छोडो जे लवली का हाथ और जाकर हुआ मंडप मा बइठो”
बिंदिया ने सुना तो उसकी आँखों से झर झर आँसू बहने लगे ये देखकर लवली ने उसका हाथ मजबूती से थाम लिया और थोड़ा नरम स्वर में मंगेश से कहा,”चचा ! हमहू जानते है कि आप हमे बिल्कुल पसंद नाही करते लेकिन जे कि सजा आप बिंदिया को काहे दे रहे है ? इह सब मा बिंदिया की कोनो गलती नाही है,,,,,,,,आपने हमाये और हमाये पिताजी के साथ जो कुछ भी किया हम उह्ह सब भूलने को तैयार है बस जे शादी रोक दीजिये,,,,,,,,,,,,हम जे से प्यार करते है जे के बिना नाही रह पाएंगे”
मंगेश कुछ जवाब देता इस से पहले लल्लन आगे आया और लवली को धक्का देकर पीछे किया और कहा,”ए ! बहुत हो गयी तुम्हायी बकवास अब निकलो हिया से और बिंदिया तुम जाकर मंडप मा ऋतिक के साथ बइठो , हम भी देखते है जे सादी कैसे नाही होती ?”
मंडप में खड़े गोलू ने बिंदिया को देखा तो राहत की साँस ली कि चलो कम से कम बिंदिया उसके बगल में नहीं है लेकिन अगले ही पल चौंका कि अगर बिंदिया
उसके बगल में नहीं है तो फिर कौन है ? लेकिन अभी गोलू ने चुप रहना ही ठीक समझा क्योकि माहौल पहले ही काफी गर्म हो चुका था।
गुप्ता जी , शर्मा जी , यादव जी और आदर्श फूफा चुपचाप खड़े थे। आदर्श फूफा गुप्ता जी के पास आये और धीरे से कहा,”अगर बिंदिया हिया है तो फिर हुआ मंडप मा कौन है ?”
गुप्ता जी ने घूरकर आदर्श फूफा को देखा और दबे स्वर में दाँत पीसकर कहा,”हिया इत्ती बड़ी टेंशन है और तुमको दुल्हिन का मुँह देखने की पड़ी है,,,,,,,,,,चुपचाप खड़े रहो वरना तुम्हरा इह साला चप्पल चप्पल मार मार के तुम्हरी मुँह दिखाई करवा देगा,,,,,,,,,,,!!!”
आदर्श फूफा ने सुना तो मुँह बनाया और साइड में जाकर खड़े हो गए लेकिन वो ज्यादा देर चुप रह नहीं सकते थे क्योकि उनको थी चुल इसलिए यादव जी के पास आये और कहा,”ए यादव ! तुमहू कहे रहे कि गोलुआ तुम्हे हिया बुलाय रहा पर उह्ह्ह तो कही नजर नाही आ रहा”
यादव जी ने सुना तो मन ही मन घबरा गए क्योकि उन्होंने गोलू के नाम का बहाना बनाया था , उन्हें तो खुद नहीं पता था गोलू यहाँ है भी या नहीं,,,,,,,!!! यादव जी को कुछ नहीं सुझा तो उन्होंने अपनी छोटी ऊँगली गुप्ता जी को दिखाकर कहा,”हमहू जरा हलके होकर आते है”
गुप्ता जी कुछ पूछ पाते इस से पहले यादव जी वहा से भाग गए। आदर्श फूफा उलझन में अपना गाल खुजाते हुए जैसे ही पलटे लल्लन चिल्लाया,”अगर बिंदिया हिया है तो फिर हुआ हमाये ऋतिक के साथ मंडप मा कौन खड़ी है ?”
लल्लन ने तो आदर्श फूफा के दिल की बात कह दी , आदर्श फूफा ख़ुशी से भरकर जैसे ही लल्लन की तरफ आये लल्लन ने उन्हें साइड में धक्का देकर कहा,”हट बे,,,,,,,,,!!!”
धक्का मुक्की का सिलसिला शुरू हो चुका था इसलिए आदर्श फूफा लल्लन के एक ही धक्के से गुप्ता जी के गले जा लगे। गुप्ता जी पहले से उनसे चिढ़े हुए थे इसलिए खींचकर एक थप्पड़ आदर्श फूफा को मारा और कहा,”गले का मिल रहे हो , अपनी बिटिया ब्याहे हो हमाये यहाँ,,,,,,,,,,,,!!!”
आदर्श फूफा को थप्पड़ पड़ा तो वे कहा पीछे रहने वाले थे उन्होंने गुस्से में यहाँ वहा देखा और नीचें पड़ा किसी का जूता उठाकर गुप्ता जी पर फेंका लेकिन गुप्ता जी गोलू के बाप है सही वक्त पर नीचे झुक गए और जूता हवा में उड़ता हुआ जाकर लगा मंगल फूफा के टकले पर जो कि सबसे छुपकर एक तरफ रूपा का हाथ थामकर उस से अपने प्यार का इजहार कर रहे थे।
जूता इतनी जोर से लगा कि मंगल फूफा बेहोश होकर गिर पड़े। रूपा ने देखा तो जूता उठाया और साइड में फेंका , जितना बुरा निशाना आदर्श फूफा का था उस से भी ज्यादा बुरा निशाना रूपा का , जूता जाकर लगा मंडप में बैठे उस आलसी पंडित को और वह नींद से हड़बड़ा कर उठा और कहा,”फेरे शुरू कीजिये”
“ए रुको पंडित,,,,,,,,,,कोई फेरे नाही होंगे”,लल्लन चिल्लाया तो पंडित ने एक नजर उसे देखा और फिर सर झुकाकर सो गया
मिश्रा जी मंगेश को समझा रहे थे कि तभी उनको धक्का लगा और वे मंगेश में जा गिरे। मिश्रा जी ने पलटकर देखा तो पाया आदर्श फूफा और गुप्ता जी आपस में उलझे है ये देखकर उन्होंने सर पकड़ लिया। मंगेश ने मिश्रा जी को सीधा खड़ा किया और गुस्से से कहा,”ए मिश्रा तुमहू का हिया हमायी छीछा लेदर करने आये हो ,, उठाओ अपनी जे मण्डली को और भाग जाओ हिया से,,,,,,,,,,!!!”
लवली ने मंगेश को मिश्रा जी से बदतमीजी करते देखा तो बिंदिया का हाथ छोड़ा और दोनों हाथो से मंगेश की कोलर पकड़कर गुस्से से कहा,”हमाये पिताजी से ऊँची आवाज मा बात करने की तुम्हायी हिम्मत कैसे हुई ? जान ले लेंगे हम तुम्हायी”
“लवली , लवली छोड़ो का कर रहे हो”,मिश्रा जी ने लवली को मंगेश से दूर किया और देखा गुप्ता जी और आदर्श फूफा की बहस अभी भी चालू है तो उन्होंने अपने पैर से दोनों सेंडल निकाली , एक खींचकर मारी गुप्ता जी को और दूसरी मंगेश को देकर कहा,”जरा इक ठो निशाना ओह्ह पे लगाना , का है कि हमाये जीजा है हम चप्पल फेंक के मारेंगे तो अच्छा नाही लगेगा”
मंगेश पहले से गुस्से में था उसी गुस्से के साथ उसने मिश्रा जी का सेंडल फेंका आदर्श फूफा की तरफ और गाल पर निशान छाप दिया। बहस के बीच में अचानक आयी चप्पल से गुप्ता जी और आदर्श फूफा दोनों ही चौंके और मिश्रा जी की तरफ देखा तो मिश्रा जी ने उन्हें खा जाने वाली नजरो से देखा दोनों चुपचाप उनकी तरफ चले आये।
“ए मंगेश बहुत हो गवा , तुम्हायी बिटिया जे लवली के साथ भागकर हमाये रीतिकवा को पहिले ही धोखा दे चुकी है और हुआ मंडप मा अपनी जगह किसी और को खड़ा कर देही ,, जे भी इह मिश्रा और जे के लौंडे के साथ मिली हुई है”,लल्लन ने गुस्से से कहा
मंगेश ने बिंदिया के लिए गलत सुना तो उस से बर्दास्त नहीं हुआ इसलिए उसने लल्लन से कहा,”ए लल्लन का अंट शंट बक रहे हो बे ? हमायी बिटिया के बारे में उलटा सीधा कहा ना तो हमसे बुरा कोई ना होगा”
“तुमसे बुरा हिया वैसे भी कोई नाही है,,,,,,,,,पहले पता होता तो तुम्हाये लिए गिफ्ट मा शीशा ले आते”,मिश्रा जी के बगल में खड़े गुप्ता जी बड़बड़ाये तो मिश्रा जी ने उन्हें घूरकर देखा। गुप्ता जी तो चुपचाप आदर्श फूफा के पास चले आये तो उन्होंने कहा,”का कह रहे है मिश्रा जी ?”
“तुम्हे बुलाय रहे है खुद ही जाकर पूछ ल्यो”,गुप्ता जी ने कहा
आदर्श फूफा मिश्रा जी की बगल में आकर खड़े हुए और कहा,”कुछो कह रहे थे का ?”
मिश्रा जी ने दाँत भींचकर आदर्श फूफा की तरफ देखा और कहा,”भग जा यहाँ से,,,,,,,,,,,,,!!!”
आदर्श फूफा उलटे पाँव गुप्ता जी के पास चले आये तो गुप्ता जी उन्हें देखकर दबी सी हंसी हसने लगे और आदर्श फूफा गुस्से में उन्हें घूरने लगे।
उधर रूपा पानी लेकर आयी और मंगल फूफा पर छिड़कर उन्हें होश में लाने की कोशिश करने लगी। थोड़ी देर बाद मंगल फूफा को होश आया तो उन्होंने उठते हुए कहा,”चलो रूपा हिया से दूर कही और चलते है जे सब हमाये पियार के दुश्मन है जे हमे साथ नाही देख पाएंगे”
मंगल फूफा ने इतना ही कहा कि तभी एक नारियल आकर उनके सर पर लगा जो गोलू ने फेंका था जिसे पिछले आधे घंटे से हाथ में पकडे पकडे गोलू थक गया था इसलिए साइड में फेंक दिया लेकिन फेंकने से पहले ये नहीं देखा कि उसी साइड मंगल फूफा खड़े है और मंगल फूफा एक बार फिर बेहोश,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
“ए तुमहू खुद अपना घूँघट हटाती हो कि हम आकर हटाए ?”.लल्लन गुड्डू को देखकर चिल्लाया , घूंघट निकाले खड़ा गुड्डू घबरा गया करे तो करे क्या जाये तो जाये कहा।
“छि छि छि ए देखो कित्ते बेशर्म आदमी है दुल्हिन का घूंघट उठाने की बात कर रहे है , ए तुम्हाये घर मा-बहिन नहीं है का ?”,गुप्ता जी ने लल्लन से कहा
“मा भी है और बहिन भी लेकिन का है न कि इह बख्त उह्ह्ह अलग अलग है , किसी कारण अब बहिन घर नाही आती,,,,,,,,,,,,!!!”,लल्लन ने कहा क्योकि उनकी बहन अपने मायके नहीं आती थी।
गुप्ता जी ने सुना तो अफ़सोस जताया तभी आदर्श फूफा ने कहा,”अरे हमे बताओ कहा है हम अभी आपकी माँ-बहन एक कर देंगे”
मिश्रा जी ने सुना तो आदर्श फूफा की गुद्दी पकड़कर उन्हें पीछे किया और कहा,”बुद्धि बंट रही थी तब का सो रहे थे ? समझ नाही है कब कहा का बोलना है और अगर समझ नाही है ना तो अपना मुँह बंद रखो”
“अरे इत्ती ही समझ होती तो आपकी पूछ बनकर हिया आते का ?”,गुप्ता जी ने कहा
मिश्रा जी ने गुप्ता जी की तरफ देखा और कहा,”ए यार गुप्ता तुमहू तो ना बात ही ना करो कसम से थोड़ी देर के लिए मुँह सिल ल्यो अपनों ! हिया साला हमहू सब ठीक करे का कोशिश कर रहे है और तुम्हरी बकैती नाही खत्म होय रही,,,,,,,,,,,!!!”
“अरे संस्कार ही ऐसे मिले है”,यादव जी ने कहा जो कि घूम फिरकर वापस वही आ गए थे
“हाँ तुमको बड़े अच्छे संस्कार मिले है,,,,,,,,लोग दूध मा पानी मिलाते है इह ससुरा पानी मा दूध मिलाकर बेचता है,,,,,,,,,,,और तुम्हरी उह्ह फुलवारी उह्ह्ह तो चलता फिरता ग्रहण है हमायी जिंदगी पर”,गुप्ता जी ने गुस्से से कहा
“ए यार गुप्ता ! फूल को काहे बीच मा ला रहे हो,,,,,,,,,उह्ह्ह कहा कुछो करती है”,आदर्श फूफा ने आहे भरकर कहा
यादव जी ने सुना तो आदर्श फूफा को अपनी तरफ करके कहा,”उह्ह्ह कुछ भी कहे हम आपस मा सुलट लेंगे , तुमहू काहे फूल पर भँवरे बनकर मँडराय रहे हो बे ?”
“अरे यादव हमहू तो बस जे कह रहे हमायी तुम्हायी फूल के बारे में गुप्ता ऐसा कैसे कह सकता है ?”,आदर्श फूफा ने झेंपकर कहा
“हमायी तुम्हायी नाही सिर्फ हमायी समझे,,!!!”,यादव ने घूरकर कहा तो आदर्श फूफा को फिर वो गोलू के यहाँ होने की बात याद आयी और उन्होंने कहा,”ए इहह्ह सब छोडो हमका जे बताओ उह्ह्ह तिकड़मबाज गोलू है कहा ?”
“हम जरा पानी पीकर आते है,,,,,,,,,,,,,!!!”,यादव जी ने कहा और फिर वहा से चले गए
आदर्श फूफा हैरानी से खुद में ही बड़बड़ाये,”ल्यो पहिले हलके होने जाओ , फिर पानी पी ल्यो , अबे पानी पिओगे तो फिर से हलके होने नहीं ना जाना पडेगा”
“ए मंगेश ! उह्ह्ह लोंड़िया से कहो अपना घूंघट हटाये”,लल्लन ने गुस्से से कहा
गुड्डू अब बुरी तरफ फंस चुका था , सबके सामने घूंघट उठाना मतलब मौत को बुलावा देना था। लल्लन ने देखा मंगेश के कहने पर भी घूंघट नहीं हटा तो उसने अपने लड़के से इशारा किया और लड़के ने जाकर घूंघट खींच दिया। बिंदिया की जगह गुड्डू को देखकर सबके मुँह खुले के खुले रह गए , खुद लवली भी हैरान था।
गुप्ता जी और शर्मा जी साथ साथ खड़े थे उन्होंने भी हैरानी से देखा और पास खड़े मिश्रा जी ने कहा,”गुड्डू,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
गोलू ने जैसे ही गुड्डू का नाम सुना हैरान हो गया उसने गर्दन घुमाकर देखा उसकी बगल में गुड्डू खड़ा था वह ख़ुशी से उछला और अपना सेहरा उतारकर फेंका और कहा,”अरे गुड्डू भैया आप”
गुड्डू को देखकर सबको जहा हैरानी हुई , गोलू को देखकर सबको हार्ट अटेक आते आते बचा बल्कि गुड्डू खुद थोड़ी देर के लिए सदमे में चला गया और मिश्रा जी के मुँह से निकला,”गोलू”
शर्मा जी ने दूल्हा दुल्हन की जगह गुड्डू और गोलू को देखा तो चक्कर खाकर वही जमीन पर गिर पड़े और गुप्ता जी मिश्रा जी के पास आकर चिल्लाये,”देखा हमहू कहे थे ना जे गुड्डू और गोलू के बीच कुछो चल रहा है ,, हुआ अपनी गर्भवती पत्नियों को छोड़कर जे दोनों हिया ब्याह रचाय रहे है”
मिश्रा जी ने सुना तो अपना सर पकड़ लिया और गिरने को हुए तो मंगेश ने उन्हें सम्हाल लिया और लल्लन मुँह फाडे दोनों को देखता रहा।
( क्या मंगेश समझेगा मिश्रा जी की बात और रोक देगा ये शादी ? क्या मंगल फूफा कर पाएंगे रूपा से अपने प्यार का इजहार या यू खाते रहेंगे किसी ना किसी से मार , गुड्डू और गोलू को इस हालत में देखकर क्या होगा आगे ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ” सीजन 4 मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
