Manmarjiyan Season 4 – 67
गुड्डू ने बिंदिया को कपडे उतारने को कहा और बिंदिया ने उसे थप्पड़ दे मारा
“अरे तो थप्पड़ काहे मारा ? पहिले हमायी पूरी बात तो सुन ल्यो,,,,,,,,,,हम हिया से साथ साथ नाही भाग सकते भागेंगे तो पकडे जायेंगे इहलीये हमाये पास एक ही रास्ता है”,गुड्डू ने अपना हाथ गाल से लगाकर कहा
“का रास्ता है ?”,बिंदिया ने कहा
“हमहू आपके कपडे पहिन के बाहिर मंडप मा जाकर बैठ जायेंगे जिस से सबको लगेगा कि आप हिया है और आपके पिताजी और ओह्ह्ह के आदमी भी शांत रहेंगे , वही आप पीछे के रास्ते से रूपा के घर की तरफ जाईये वहा रूपा आपका इंतजार कर रही है वह आपको सही सलामत गाँव के नुक्कड़ पर पहुंचेगी तब तक हम भी हिया से मौका देखकर निकल जायेंगे,,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने बिंदिया को अपना प्लान बताया
बिंदिया ने अपने गहने उतारते हुए कहा,”गुड्डू ! बैठकर बात नहीं हो सकती , हमारा मतलब जे भागना जरुरी है ?”
“जे बात इतनी जल्दी काहे कह रही है आप फेरो के समय कह देती,,,,,,,,,,,,,अरे अब कुछो नाही हो सकता अब दो ही रस्ते है या तो ऋतिक से ब्याह करो या फिर उह्ह्ह खिड़की खुली है”,गुड्डू ने कहा
बिंदिया ने सुना तो उलझन में पड़ गयी ये देखकर गुड्डू ने उसकी बाँहो को अपने दोनों हाथो में थामा और उसकी आँखों में देखकर कहने लगा,”देखो भाभी ! किस्मत ना एक मौका सबको देती है ताकि बाद मा अपने फैसले पर पछताना ना पड़े , आपका उह्ह एक मौका है हिया से भाग जाना , अरे हम जानते है हमाए लवली भैया बहुते अच्छे इंसान है हमायी तरह बैल बुद्धि नाही है बहुते समझदार है उह्ह्ह आपको बहुते खुश रखेंगे,,,,,,,,,,,,जियादा नाही सोचिये , एक बार आप दोनों की सादी हो जाये ओह्ह्ह के बाद सब ठीक हो जाएगा,,,,,,,,,,,!!!”
बिंदिया ने सुना तो नम आँखों से हामी भरी और फिर परदे के पीछे जाकर शादी का जोड़ा उतारा और दूसरे कपडे पहन लिए। उसने शादी का जोड़ा गुड्डू को दिया और खिड़की की तरफ जाने लगी। वह रुकी और गुड्डू के पास आकर कहा,”गुड्डू,,,,,,,,,!!!”
“हाँ,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने लहंगे का नाडा बांधते हुए कहा
“तुम बहुत अच्छे हो,,,,,,,,,,उह्ह्ह हम तुमको थप्पड़ मारे ओह्ह्ह के लिए हमका माफ़ कर देना”,बिंदिया ने कहा
“अरे का भाभी ! आपका पूरा हक़ आप मार सकती है , अब जल्दी जाईये रूपा आपका इंतजार कर रही है”,गुड्डू ने कहा तो बिंदिया खिड़की से कूदकर वहा से चली गयी।
जैस ही बिंदिया खिड़की से कुड़ी किसी ने दरवाजा खटखटाया , गुड्डू घबरा गया लेकिन हिम्मत से काम लिया और जल्दी से दुप्पटे से लंबा सा घूँघट करके दरवाजा खोला और मुँह घुमाकर खड़ा हो गया क्योकि दरवाजे पर खुद मंगेश खड़ा था।
उसने बाहर से ही कहा,”ए बिंदिया ! तुमहू अभी तक तैयार नाही हुई , हुआ बारात डेरे मा पहुंच चुकी है जल्दी तैयार होकर मंडप मा आओ,,,,,,,,,!!!”
गुड्डू ने हामी में गर्दन हिला दी तो मंगेश वहा से चला गया। गुड्डू ने जल्दी जल्दी गले में हार लटकाये और कंधे पर दुपट्टा लगाकर बड़ा सा घूँघट निकाल लिया जिस से कोई उसे देख ना पाए।
बिंदिया रूपा के पास पहुंची और रूपा उसे लेकर गांव से बाहर जाने वाले रास्ते की तरफ निकल गयी। इधर मंगेश ने देखा बिंदिया शादी के लिए ख़ुशी ख़ुशी मान गयी है तो उसने अपने सभी आदमियों को बुलाया और उन्हें बारात के स्वागत के लिए डेरे में भेज दिया। शाम के 5 बज रहे थे बारात डेरे से मंगेश के घर के लिए रवाना हो गयी। गोलू मस्त खा पीकर घोड़ी पर बैठा था।
मंगल फूफा बारात में शामिल ना होकर वहा से सीधा मनोज के घर की तरफ निकल गए ताकि गुड्डू को सब बता सके लेकिन मनोज के घर में ना मनोज मिला ना ही गुड्डू अब तो मंगल फूफा भी परेशान , ये बात बताने वह मंगेश के घर पहुंचा तो देखा
गोलू मंडप में बैठा है और सामने से दुल्हन के कपड़ो में बिंदिया लम्बा सा घूंघट किये मंडप में चली आ रही है।
हालाँकि घूँघट के पीछे बिंदिया नहीं बल्कि गुड्डू था। मंगल फूफा ने देखा तो अपना सर पकड़ लिया और खुद में ही बड़बड़ाया,”इह का मतलब गुड्डू बिंदिया को भगाने मा कामयाब नाही हुआ , अगर बिंदिया हिया है तो फिर गुड्डू कहा है ? कही मंगेश के आदमियों ने ओह्ह्ह का पकड़ तो नाही लिया,,,,,,,,,,,,,!!!”
ये सब ख्याल आते ही मंगल फूफा बेहोश होकर नीचे गिर पड़े और किसी ने उन पर ध्यान ही नहीं दिया क्योकि सबका ध्यान तो दूल्हा और दुल्हन की वरमाला मे था।
लवली गुड्डू की बाइक लिए जैसे ही गाँव के नुक्कड़ पर पहुँचा बाइक बंद हो गयी। लवली ने उसे स्टार्ट करने की कोशिश की लेकिन नहीं हुई। लवली बाइक से नीचे उतरा और बाइक को देखने लगा तभी गली में से निकलकर रूपा बिंदिया का हाथ थामे वहा आयी और जब रूपा ने लवली को देखा तो ख़ुशी से चहककर कहा,”अरे वाह लवली ! तुम तो हमाये से भी पहिले हिया पहुंच गए और जे बाइक तो बड़ी सुन्दर है के की चुराए”
लवली को सामने देखकर बिंदिया हक्की बक्की रह गयी उसे तो उम्मीद भी नहीं थी की लवली यहाँ आएगा। लवलीने जब रूपा और बिंदिया को वहा देखा तो उसकी हैरानी का कोई ठिकाना ना रहा। वह बिंदिया के सामने आया और कहा,”बिंदिया हमे माफ़,,,,,,,,,!!!”
लवली ने इतना ही कहा कि बिंदिया लवली के सीने से आ लगी और फफक कर रो पड़ी। ये देखकर रूपा मुस्कुराई और लवली की बांह छूकर कहा,”अच्छा लवली हमहू जाते है किसी ने हमे यहाँ देख लिया तो गजब हो जाएगा,,,,,,,,,,,!!!”
रूपा वहा से चली गयी तभी मिश्रा जी भी अपनी गाडी लेकर उसी नुक्कड़ पर पहुंचे और दूसरे किनारे पर रोक दी। लवली ने जैसे ही मिश्रा जी की गाडी देखी बिंदिया को अपनी बाँहो में छुपाया और अपना मुँह उसके कंधे पर गड़ाकर धीरे से कहा,”ऐसे ही रहना”
हालंकि मिश्रा को नहीं पता चला वो दोनों बिंदिया और लवली है , उन्होंने गाड़ी का शीशा नीचे किया और लवली से ऊँचे स्वर में कहा,”ए बऊआ ! जे गाँव मा जाने का रास्ता जे ही है का ?”
लवली ने हाथ हिलाकर इशारा किया कि उसे नहीं पता। ये देखकर मिश्रा जी ने कहा,”आजकल के नोजवानो को ना लाज है ना शरम खुले मा ही सब,,,,,,,,,,,,एक ठो पता पूछे तो उह्ह्ह बताने मा मौत आय रही है जे का”
मिश्रा जी के बगल में बैठे आदर्श फूफा ने देखा एक लड़का और लड़की एक दूसरे को गले लगाए खड़े है तो उन्होंने मिश्रा जी से कहा,”अरे काहे डिस्टर्ब कर रहे है उन दोनों को लगे रहने दीजिये,,,,,,,,,,,,,उह्ह्ह देखिये हुआ बोर्ड लगा तो है”
मिश्रा जी ने बोर्ड देखा और गाडी उस तरफ घुमा दी। मिश्रा जी की गाडी जाने के बाद लवली ने राहत की साँस ली और बिंदिया से दूर हुआ लेकिन अगले ही पल उसे अहसास हुआ कि मिश्रा जी मंगेश के घर जा रहे है और वहा उन सबको खतरा है तो उसके चेहरे पर चिंता के भाव उभर आये।
गुड्डू और गोलू शादी के मंडप में एक दूसरे के साथ बैठे थे। घर का आंगन लोगो से खचाखच भरा हुआ था। मंगेश और लल्लन दोनों दोस्त साथ साथ बैठे थे और खूब हंस मुस्कुरा रहे थे। मंगेश के सभी आदमी भी वही जमा थे। बिरजू ना जाने पंडित को कहा से पकड़कर लाया था। एक नंबर का आलसी और बहुत ही धीरे धीरे काम करने वाला
घूंघट में बैठा गुड्डू मन ही मन खुद से कहने लगा,”हमने जे दुल्हन बन के हिया बैठने की गलती तो नाही कर दी।
अगर हिया से उठकर भागे तो जो भीड़ सामने बैठी है उह्ह्ह हमायी हड्डी पसली एक कर देगी और उह्ह्ह दानव मंगेश उह्ह्ह तो हमे कच्चा चबा जाएगा। बिंदिया को गायब करने का इल्जाम भी हम पर लगेगा और हम जेल चले जायेंगे,,,,,,,,,और अगर हिया बैठे रहे तो जे ऋतिक के साथ हमाओ ब्याह पक्को , जे ससुरो भी इतो भरो पड़ो ब्याह के नाम पर इह नाही के एक बार घूंघट उठा के देख ले,,,,,,,,,बचाय ल्यो महादेव महादेव हमहू पहिले से शादीसुदा है”
वही गुड्डू के बगल में बैठे गोलू के भी हाथ पाँव फूलने लगे। वह जोश जोश में दूल्हा बनकर आ तो गया लेकिन अब भीड़ देखकर उसका भी दिल घबरा रहा था कि अगर गलती से भी उसका सच सामने आ गया तो कानपूर वो नहीं बल्कि उसकी लाश जाएगी और अगर चुपचाप यहाँ बैठा रहा तो बिंदिया भाभी से उसका ब्याह हो जाएगा। घबराकर वह मन ही मन बड़बड़ाने लगा,”साला पिताजी सही कहते थे , गोलू तुम मौत से नाही तुमहू अपनी जबान से मरोगे ,,
अरे का जरूरत थी हमको हिया ऋतिक बनकर आने के की , साला गुड्डू भैया को कहे थे हमाये आने से पहिले बिंदिया भाभी को भगा लेना लेकिन हिया तो भाभी हमाये बगल मा है और गुड्डू भैया गुड्डू भैया तो दूर दूर तक कही नजर नाही आ रहे,,,,,,,,,,,,,अच्छा फसाया हमको गुड्डू भैया , अब अगर हम हिया से भागने का सोचे तो उह्ह्ह चाण्डाल मंगेश हमे नाही छोड़ेगा और सच जानने के बाद हम नाही हमायी लाश कानपूर पहुंची है और अगर हिया बैठे रहे तो बिंदिया भाभी के साथ हमाओ ब्याह हो जानो है
ओह्ह्ह के बाद उह्ह्ह लकड़बग्घा लवली उह्ह्ह हमे ना छोड़े है ,, मतलब इधर गिरे तो कुआ उधर गिरे तो खाई ,, बीच में साला जे शर्मा का जमाई,,,,,,,,,,हो ना हो हमको ओह्ह्ह की ही नजर लगी है तीसरे सीजन से हाथ धोकर हमाये पीछे पड़े है लगता है हमे मारकर ही छोड़ेंगे,,,,,,,,,,,,,पता
नहीं साला आज क्यों हमे हमायी अम्मा की बहुते याद आय रही है,,,,,,,,,,,,,!!!”
बिरजू पंडित के बगल में ही बैठा था उसने कहा,”पंडित जी ! शादी की रस्म शुरू कीजिये”
“हाँ हाँ करते है करते है,,,,,,,वधु अपना हाथ वर के हाथ में दीजिये”,पंडित ने कहा
गुड्डू और गोलू को अभी तक नहीं पता था कि दोनों भेस बदलकर एक दूसरे के साथ बैठे है लेकिन ऐसे कैसे गुड्डू अपना हाथ ऋतिक के हाथ में दे दे। उसने अपना हाथ आगे नहीं किया तो बगल में बैठी बिंदिया की अम्मा ने गुड्डू का हाथ जबरदस्ती आगे कर दिया।
अब वधु का हाथ आगे आया है तो वर का हाथ भी आगे आना जरुरी था इसलिए गोलू ने अपना हाथ गुड्डू के हाथ के नीचे लगाया और मन ही मन कहा,”जे बिंदिया भाभी का हाथ थोड़ा थोड़ा मर्दाना लग रहा है , लवली भैया भी का हट्टी कट्टी लड़की पसंद किये है , पर उह्ह्ह साला लकड़बग्घा जे ही डिजर्व करता है ,, हमको और गुड्डू भैया को हिया फसा के खुद वहा कानपूर मा आराम कर रहे है”
पंडित जी ने कुछ मंत्र पढ़े कुछ देर बाद रूपा भी तैयार होकर मंगेश के घर की तरफ चली आयी।
दरवाजे के बाहर उसने दिवार के सहारे बेहोश पड़े मंगल फूफा को देखा तो उनके पास आयी और पानी के छींटे मारकर उन्हें होश में लायी। मंगल फूफा को होश आया उसने जैसे ही रूपा को अपने सामने देखा तो भूल गया कि वह क्यों बेहोश हुआ था उसने रूपा की तरफ देखकर प्यार से कहा,”रूपा जी ! आप यहाँ”
“आप बेहोश कैसे हो गए ?”,रूपा ने चिंतित स्वर में पूछा
मंगल फूफा तो रूपा के प्यार में पूरे पागल हो चुके थे इसलिए शरमाकर कहा,”वो सुबह से आपको नहीं देखा ना तो बीपी लो हो गया , अब आपको देख लिया अब दिल को आराम है”
रूपा ने सुना तो अपनी चोटी घुमाकर मंगल फूफा के मुँह पर मारी और कहा,”हटो जी एंवे ही”
रूपा हँसते हुए वहा से चली गयी और मंगल फूफा उसके पीछे आते हुए बोले,”ओह्ह्ह ना जी सच कह रहा हूँ , यहा आपसे ज्यादा सुन्दर कोई नहीं है”
रूपा ने सुना तो पलटकर हंसी और फिर सबके बीच चली गयी लेकिन मंगल फूफा अंदर जाते जाते वापस बाहर आगे क्योकि सामने ही मंगेश और लल्लन बैठे थे।
“दूल्हा दुल्हन फेरो के लिए खड़े हो जाईये”,पंडित ने कहा
फेरो का नाम सुनकर ही गोलू और गुड्डू के हाथ पाँव फूल गए। दोनों उठे लेकिन मन ही मन घबरा रहे थे। गुड्डू ने देखा रूपा आ चुकी है इसका मतलब बिंदिया सही सलामत गाँव के नुक्कड़ पर पहुँच चुकी है अब गुड्डू को जैसे तैसे कोई बहाना बनाकर यहाँ से निकलना था। वह बिंदिया की अम्मा की तरफ झुका और इशारो इशारो में समझाया कि उसे बाथरूम जाना है।
“अरे पहिले फेरे तो हो जान दो ओह्ह्ह के बाद चली जाना”,बिंदिया की अम्मा ने गुड्डू को झिड़ककर कहा तो गुड्डू वापस सीधा खड़ा हो गया। भागने का मौका अब उसके हाथ से निकल चुका था।
बगल में खड़ा गोलू मन ही मन खुद में बड़बड़ाया,”जे बिंदिया भाभी भी कम नाही है जे नाही कि रुक जाए या कोई बहाना बना ले , पंडित ने बोला और उठ खड़ी हुई हमाये साथ मतलब उह्ह्ह रीतिकवा के साथ फेरे लेने के लिए,,,,,,,,,,!!”
“आप दोनों एक दूसरे का हाथ थामकर फेरे सुरु कीजिये”,पंडित ने कहा और यहाँ भी गुड्डू और गोलू के हाथो को जबरदस्ती जोड़ा गया। गुड्डू ये सब अपनी आँखों से होते नहीं देख सकता था इसलिए सर उठाकर आसमान की तरफ देखा और महादेव् को याद किया तभी उसके कानो में मिश्रा जी की आवाज पड़ी
“ठहरो ! जे सादी नहीं हो सकती”
घूंघट के अंदर से गुड्डू ने सामने खड़े मिश्रा जी को देखा तो उसके होंठो पर मुस्कान तैर गयी लेकीन अगले ही पल वह मुस्कान गम में भी बदल गयी क्यों ? ये आपको अगले भाग में पता चलेगा।
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संजना किरोड़ीवाल
बिंदिया ने सुना तो उलझन में पड़ गयी ये देखकर गुड्डू ने उसकी बाँहो को अपने दोनों हाथो में थामा और उसकी आँखों में देखकर कहने लगा,”देखो भाभी ! किस्मत ना एक मौका सबको देती है ताकि बाद मा अपने फैसले पर पछताना ना पड़े , आपका उह्ह एक मौका है हिया से भाग जाना , अरे हम जानते है हमाए लवली भैया बहुते अच्छे इंसान है हमायी तरह बैल बुद्धि नाही है बहुते समझदार है उह्ह्ह आपको बहुते खुश रखेंगे,,,,,,,,,,,,जियादा नाही सोचिये , एक बार आप दोनों की सादी हो जाये ओह्ह्ह के बाद सब ठीक हो जाएगा,,,,,,,,,,,!!!”
बिंदिया ने सुना तो उलझन में पड़ गयी ये देखकर गुड्डू ने उसकी बाँहो को अपने दोनों हाथो में थामा और उसकी आँखों में देखकर कहने लगा,”देखो भाभी ! किस्मत ना एक मौका सबको देती है ताकि बाद मा अपने फैसले पर पछताना ना पड़े , आपका उह्ह एक मौका है हिया से भाग जाना , अरे हम जानते है हमाए लवली भैया बहुते अच्छे इंसान है हमायी तरह बैल बुद्धि नाही है बहुते समझदार है उह्ह्ह आपको बहुते खुश रखेंगे,,,,,,,,,,,,जियादा नाही सोचिये , एक बार आप दोनों की सादी हो जाये ओह्ह्ह के बाद सब ठीक हो जाएगा,,,,,,,,,,,!!!”
