Manmarjiyan Season 4 – 63
मंगल फूफा ने गोलू को संडास वाला पानी पिला दिया इस बात पर नाराज होकर गोलू ने मंगल फूफा को ही पेल दिया। जैसे तैसे करके गुड्डू ने गोलू और मंगल फूफा को एक दूसरे से दूर किया और कहा,”अरे का कर रहे हो आप दोनों ? हिया साला पहिले से इत्ती टेंशन है और आप दोनों आपस मा लड़ रहे हो”
मंगल फूफा से दूर होकर गोलू गुस्से से उन्हें घूरने लगा। मंगल फूफा ने भी राहत की थोड़ी साँस ली और फिर गुड्डू से कहा,”गुड्डू ! उह्ह्ह लल्लन है ना उह्ह्ह उसी गाँव जाने वाला है जिस गाँव से आज शाम बिंदिया की बारात आएगी ! हमे लल्लन का पीछा करना चाहिए”
“गाँव का अरे जोन लड़के से बिंदिया भाभी की सादी होय रही है उह्ह्ह लल्लन का ही रिश्तेदार है , लल्लन ओह्ह्ह का फूफा है,,,,,,,,,,,का तो नाम है उह्ह्ह लड़के का ? अह्ह्ह्ह हाँ ऋतिक , ऋतिक नाम है ओह्ह्ह का”,मनोज ने कहा
गुड्डू को धीरे धीरे समझ आ रहा था कि ये जो कुछ भी हो रहा ही उसमे कही न कही लल्लन का हाथ जरूर है लेकिन गोलू ने जैसे ही सुना लल्लन भी यहाँ है तो उसे बीती बाते और मार याद आ गयी और लल्लन होने वाले दूल्हे का फूफा है ये सुनकर तो गोलू लाल पीला हो गया और गुड्डू के पास आकर उसके कंधे पर हाथ मारकर जोर से कहा,”गुड्डू भैया !”
गोलू का हाथ लगने से गुड्डू गिरते पड़ते बचा और पलटकर चिढ़े हुए स्वर में कहा,”चिल्ला काहे रहे हो बे ? बहरे नाही है हम”
गोलू ने गुड्डू , मंगल और मनोज को देखा और बहुत ही गंभीर स्वर में कहा,”जे साला फूफा जहा जहा होता है ना हुआ बत्ती लगती ही लगती है”
“तुम का हमे सुनाय रहे हो ?’,मंगल फूफा ने गोलू को घूरकर पूछा
“दुनिया में एक तुमहू ही फूफा नाही हो,,,,,,,,और नाही इत्ता पियार है हमे तुम्हाये से जो दिनभर तुम्हाये नाम की माला जपेंगे,,,,,,,,,गुडू भैया”,मंगल फूफा से कहते कहते गोलू फिर चिल्लाया
गोलू को फिर चिल्लाते देखकर गुड्डू ने खींचकर उसे एक थप्पड़ मारा और कहा,”खेत मा नाही खड़े है,,,,,,,,,,चिल्ला काहे रहे हो ?”
गोलू गाल से हाथ लगाए गुड्डू को घूरने लगा लेकिन अगले ही पल उसे याद आया कि उसे इन सब बातो में नहीं उलझना है बल्कि बिंदिया की शादी को रोकना है। वह गुड्डू के पास आया और कहा,”गुड्डू भैया ! हम का कह रहे है अगर लल्लन हिया है और उह्ह्ह अपने गांव जा रहा है तो हम उसके पीछे उसके गाँव जाते है और बारात निकलने से पहिले ही लड़के को गायब कर देंगे बताओ कैसा लगा हमारा आइडिआ ?”
“एक थप्पड़ मा ही अकल आ गयी तुम्हे ? ठीक है तुम लल्लन के पीछे जाओ लेकिन सम्हलकर गोलू और याद रहे कोई कांड नाही करना है। उह्ह्ह लल्लन बहुते चालाक आदमी है इहलीये ध्यान रखना”,गुड्डू ने कहा
“अरे तुम चिंता नाही करो गुड्डू हमहू जा रहे है ना गोलू के साथ”,मंगल फूफा ने कहा
“तुम कहा जा रहे हो ?”,गुड्डू से पहले गोलू बोल पड़ा
“तुम्हाये साथ और कहा ?”,मंगल फुफा ने गोलू से कहा और गुड्डू की तरफ आते हुए कहा,”तुम बताओ गुड्डू हम गलत कह रहे है का ? इह अकेला वहा गया और लल्लन के आदमियों ने जे का पकड़ लिया तो , अरे हम साथ होंगे तो जे का कोनो काँड भी नाही करने देंगे समझो इह बात को,,,,,,,,,,!!!”
आखरी कुछ शब्द मंगल फूफा ने दबी आवाज में कहे और गुड्डू उनकी बात में आ गया।
“हाँ ठीक है , आप भी जाईये गोलू के साथ”,गुड्डू ने कहा
“का ठीक है ? अरे हम वहा बारात रोकने जा रहे है बारात लेकर नहीं जा रहे जो इनको भी हमाये साथ कर दे रहे है आप ? हम अकेले ही जायेंगे गुड्डू भैया वैसे भी जे हमाये साथ रहे है ना तो कुछो ना कुछो कांड जरूर होय है”,गोलू ने भड़ककर कहा
“जे हिया रहकर भी का करेंगे ? अगर उह्ह्ह मंगेश ने जे का हिया देख लिया तो हमाये पुरे पिलान का सत्यानाश हो जाना है,,,,,,,,,,,,फूफा को अपने साथ लेकर जाओ गोलू ,हम साला हिया अपना देखे कि जे का ख्याल रखे और जब से इह उह्ह्ह रूपा से टकराये है जे के लक्षण कुछो ठीक नाही लग रहे हमे,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने मंगल फूफा को देखकर कहा तो मंगल फूफा इधर उधर देखने लगे क्योकि रूपा से टकराने के बाद उनके दिल का माहौल जो बदला हुआ था।
गुड्डू के मुँह से रूपा का नाम सुनकर गोलू उसके थोड़ा करीब आया और हैरानी से कहा,”ओह्ह्ह का नाम रूपा है जे बात आपको कैसे पता ? कही आप भी तो ओह्ह्ह के चक्कर मा,,,,,,,,,,,ए गुड्डू भैया ए याद खुद को देखो और उह्ह्ह हिडिम्बा को देखो कोनो मैच ही नाही,,,,,,,,,,,!!!”
गुड्डू ने सुना तो गोलू को घूरने लगा और कहा,”बचपन मा सर के बल गिर गए थे का गोलू , बुद्धि काहे इस्तेमाल नाही करते ?”
“ए गोलू ! हमायी रूपा के बारे में कुछो ना बोलना”,मंगल फूफा ने भड़ककर कहा
मनोज को तो कुछ समझ नहीं आ रहा था वह बस मुँह फाड़े तीनो को देखता रहा और फिर कमरे से बाहर चला गया। गोलू मंगल फूफा की तरफ पलटा और कहा,”का हमायी रूपा बे ? बचपन मा का गोद मा खिलाये रहय ओह्ह का ?”
“हम हम काहे खिलाएंगे गोद मा ?”,मंगल फूफा ने हड़बड़ाकर कहा
“जितना तुम्हायी और ओह्ह की उम्र मा फर्क है न उह्ह हिसाब से खिलाय भी सकते हो”,गोलू ने कहा
“सच्चा प्यार कबो उम्र नाही देखता गोलू”,मंगल फूफा ने कहा
“ए फूफा ! ए साला दिन मा कित्ती बार तुमको सच्चा पियार होता है बे ? पहिले उह्ह्ह यादववा की भैंसिया,,,,,,,,,,,,मेरा मतलब फुलवारी और अब हिया कन्या कुँवारी ,, अबे उम्र का तो लिहाज कर लो , सही बख्त पर ब्याह हो गओ होतो न तो आज रूपा जितने बड़े बच्चे घूम रहे होते तुम्हाये,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने कहा
मंगल फूफा ने सुना तो रोआँसा हो गए और कहा,”ए गोलू ! देखो हमायी उम्र का मजाक नाही बनाओ ,, अगर रूपा कंवारी है तो हमहू भी अभी तक ब्याह की हल्दी नाही लगवाए है हाथो मा,,,,,,,,,,हमहू भी कंवारे ही है”
गुड्डू ने गोलू को साइड किया और मंगल फूफा से कहा,”फूफा ! जे की बातो पर न ध्यान नाही दो और हमायी बात सुनो ! गोलू के साथ जाओ लड़के के घर और ओह्ह्ह का समझाओ कि उह्ह्ह जे शादी ना करे,,,,,,,!!!”
“और अगर उह्ह नाही समझा तो ?”,मंगल फूफा ने पूछा
“तो देंगे दुइ कान के नीचे और उठा लेंगे ससुरे को , अभी कानपूर वालो का भौकाल जानता नाही है उह्ह्ह,,,,,,,,,,,,,,गुड्डू भैया वैसे एक ठो बात नाही समझ आयी हमे भेजने के बजाय आप खुद ही काहे नाही चले जाते लड़के के घर,,,आप तो इत्ता अच्छा समझाते भी है और कोनो गड़बड़ भी नाही करेंगे”,गोलू ने कहा
“गोलू हम चले गए तो फिर हिया कौन देखेगा ? मान लो अगर हुआ कुछो गड़बड़ हुई और उह्ह्ह लड़का शादी से इंकार नाही किया तो हिया हमाये पास बिंदिया को लेकर भागने का ऑप्शन रहेगा ना,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने कहा
गोलू ने सुना तो गुड्डू के चेहरे को अपने दोनों हाथो में थामा और उसके ललाट पर एक जबरदस्त चुम्मा लेकर कहा,”वाह गुड्डू भैया ! का दिमाग चलता है आपका ? का सही पिलान है अगर हम लोग सफल नाही भी हुए तो हिया आप तो है ही बिंदिया भाभी को बचाने के लिए,,,,,,,,,,,,,,मान गए गुड्डू भैया मान गए”
गुड्डू ने बुरा सा मुँह बनाकर अपने ललाट पर लगे गोलू के थूक को पोछा और कहा,”हमाओ दिमाग शुरू से चले है उह्ह तो तुमहू जब साथ होते हो ना तब सब गुड़ गोबर हो जाता है”
“हाँ तो ठीक है ना हिया अकेले रहकर चलाइये अपना दिमाग , चलो फूफा”,गोलू ने लल्लन की तरफ आकर कहा और उसे साथ लेकर कमरे से बाहर निकल गया।
गोलू और मंगल फूफा के जाने के बाद गुड्डू बड़बड़ाया,”जे साला गोलू इत्ते कॉन्फिडेंस मा गवा तो है बस कोनो गड़बड़ ना करे,,,,,,,,,,,सम्हाल लेना महादेव”
कुछ देर बाद गुड्डू भी कमरे से बाहर निकल गया।
मिश्रा जी ने डांट डपटकर शर्मा जी , गुप्ता जी और आदर्श फूफा को तो चुप करवा दिया लेकिन उन्हें इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उनकी गाड़ी के पीछे का बोनट पकडे एक और मुसीबत उनके साथ चकिया जा रही है। गाडी अभी कुछ ही दूर चली होगी कि गुप्ता जी ने सामने ढाबे को देखकर कहा,”अरे मिश्रा जी ! सुनिए ना , हिया रुककर एक ठो कप चाय पी लेते है”
“तुमहू का अपने लौंडे की बारात मा आये हो ? चुपचाप बैठे रहो , चाय पीनी है जे का सुबह से हमाओ खून पी रहे हो ओह्ह काफी नाही है ?”,मिश्रा जी ने गुस्से से कहा
“लगता है मिश्रा जी अभी भी गुस्से में है”,शर्मा जी ने दबे स्वर में आदर्श फुफा से कहा तो फूफा ने इतराकर कहा,”नाराज तुम लोगन से है हमहू तो मिश्रा खानदान के इकलौते दामाद है,,,,,,हमे थोड़े ना मना करेंगे”
कहते हुए आदर्श फूफा ने शर्मा जी को एक स्माइल दी और मिश्रा जी की तरफ झुककर बोले
“मिश्रा जी ! ठीक तो कह रहा है जे चाय के साथ कुछो खाने को भी मिल जाता तो सफर आसान हो जाता”
मिश्रा जी का दिमाग एक तो पहले से गरम था आदर्श फूफा की बात ने आग में घी डालने का काम किया उन्होंने गुस्से से कहा,”जब से गाडी मा बैठे है गाड़ी को संडास बना दिए है अब और खाकर का जे को ब्लास्ट करने का मन है आपका ?”
बेचारे आदर्श फूफा अपना सा मुँह लेकर वापस पीछे आ बैठे तो शर्मा जी उन्हें देखकर मुस्कुराये।
“अरे रोक लीजिये ना मिश्रा जी , हमको हल्का होने भी जाना है”,गुप्ता जी ने कहा
मिश्रा जी समझ गए कि बिना गाड़ी रुकवाए ये लोग मानेंगे नहीं इसलिए गाड़ी ढाबे के सामने लेकर रोक दी और कहा,”10 मिनिट है तुम लोगो के पास जो करना है करो और अगर 10 मिनिट से एक भी मिनिट देर हुयी तो हम यही छोड़कर चले जायेंगे”
“अरे आप नाही आ रहे का ?”,गुप्ता जी ने गाडी का दरवाजा खोलते हुए कहा
“हमको शांति की जरूरत है तुम लोग जाओ”,मिश्रा जी ने अपनी आँखे मूँदकर सर सीट से लगाकर कहा
“देखा हम नहीं ना कहते थे मिश्रा जी का कोई न कोई तो मेटर है , जे उम्र भी किसी शांति को याद कर रहे है”,पीछे बैठे आदर्श फूफा ने गाड़ी का दरवाजा खोलकर कहा
मिश्रा जी ने सुना तो घूरकर आदर्श फूफा को देखा और कहा,”कबो स्कूल गए हो ? अबे हमहू पीस की बात कर रहे है जिसका मतलब है शांति , सुकून , अकेले रहने की चाह,,,,,,,,,,जे से पहिले कि हमहू भूल जाए आप हमायी बहिन के सुहाग है , भाग जाईये हिया से वरना इह बार राजकुमारी को चुडिया तोड़ने से कोई ना रोक पाए है”
मिश्रा जी की बात सुनकर आदर्श फूफा जल्दी से उतरे और ढाबे की तरफ चले गए। शर्मा जी भी नीचे उतरे और चले गए। गुप्ता जी पहले ही उतरकर बाथरूम की तरफ जा चुके थे।
मिश्रा जी को अब समझ आ रहा था कि इन तीनो को साथ लाकर उन्होंने सच में बहुत बड़ी गलती कर दी है लेकिन अब क्या हो सकता था। सब इतना आगे निकल आये थे कि वापस जाना मुश्किल था और इनके साथ चकिया जाना नामुमकिन ! मिश्रा जी ने आँखे मुंदी और सर सीट से लगा लिया।
गाड़ी के पीछे घसीटते हए यादव जी की हालत ख़राब हो चुकी थी। रास्ते पर घसीटने की वजह से सामने से कुरता पजामा फट चूका था , मुँह बाल सब मिटटी में हो चुके थे , घुटन छिल चुके थे। मिश्रा जी ने जैसे ही गाड़ी ढाबे के सामने रोकी यादब की गाड़ी से पकड़ छूटी और वे मुँह के बल नीचे आ गिरे , उनमे इतनी हिम्मत नहीं थी कि उठकर जा सके इसलिए वही पड़े रहे।
गुप्ता जी , शर्मा जी और आदर्श फूफा फ्रेश होकर आये ! हाथ मुँह धोया और तीनो ने आकर अपने लिए चाय आर्डर कर दी , तीनो साथ साथ एक ही गाड़ी में आये थे लेकिन तीनों की आपस में नहीं बनती इसलिए तीनो एक दूसरे से दुरी बनाकर खड़े हो गए और चाय का इंतजार करने लगे। शर्मा जी और आदर्श फूफा में सब्र था लेकिन गुप्ता जी में सब्र नहीं था इसलिए जब तक चाय तैयार हुई गुप्ता जी अपने लिए बिस्कुट का एक डिब्बा ले आये और खोलकर खाने लगे।
गुप्ता जी और गोलू में कुछ बातें एक जैसी थी जैसे कि वो दोनों ही बेपरवाह किस्म के थे वो नहीं कहते “आग लगे चाहे बस्ती में , बाबा तो अपनी मस्ती में” ये वाली कहावत इन्ही बाप बेटे के लिए लिखी गयी थी शायद,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
यादव जी पर पानी के छींटे पड़े तो वो होश में आये और मुँह पर गिरे पानी को पोछकर हाथ को नाक के पास लाकर सुंघा तो बहुत ही गन्दी बदबू उनके नाक को छूकर गुजरी और उनका मुँह बन गया।
उन्होंने सर उठाकर देखा तो पाया एक भूरे रंग का मरियल सा कुत्ता टाँग उठाकर उन पर पेशाब कर रहा है। यादव जी ने पूरी ताक़त के साथ कुत्ते को साइड में धकेला और उठकर लड़खड़ाते हुए ढाबे की तरफ चल पड़े।
गुड्डू ने गोलू और मंगल फूफा को लल्लन के पीछे भेज तो दिया लेकिन साथ ही उसे चिंता भी हो रही थी। गुड्डू मुँह पर गमछा बांधे टेंट वाली तरफ आया और जैसे ही बिंदिया के कमरे की खिड़की की तरफ जाने लगा बिरजू ने उसे रोका और कहा,”ए भाई ! जे टेंट का काम बीच मा छोड़कर तुम्हरे लड़के कहा भाग गए ? साला खुद को कानपूर का बड़ा बेडिंग प्लानर बताते हो और काम एक भी ढंग का नाही ! अरे हमहू तुमसे कह रहे है बारात आने से पहिले टेंट लगेगा के नाही ?”
गुड्डू पलटा और कहा,”आप चिंता नाही कीजिये लग जाएगा”
“लग जाएगा नाही लग जाना चाहिए वरना तुम और तुम्हाये लड़के अपने पैरो पर वापस कानपूर ना जा पाहे हो ! मंगेश का नाम सुने हो ना ?”,बिरजू ने कहा
“हाँ हाँ सुने है , हम अभी टेंट लगवाते है”,कहकर गुड्डू जल्दी जल्दी वहा से लड़को की तरफ चला गया और बिरजू भी अपने काम में लग गया।
मंगेश या उसके आदमियों को शक ना हो इसलिए गुड्डू लड़को के साथ मिलकर टेंट और डेकोरेशन का काम करने लगा। इन सब में वह बिंदिया से मिलना भूल ही गया और वह बिंदिया हर गुजरते पल के साथ घबराये जा रही थी।
लल्लन मंगेश के घर से पिकअप लेकर निकला जिसमे कुछ दरी और सामान था। गोलू और मंगल फूफा भी उन्ही सामान में छुपकर लल्लन के साथ निकल गए। घंटेभर में गाडी शादी वाले घर में आकर रुकी। मौका देखकर गोलू और मंगल फूफा पिकअप से बाहर आये और छुपते छुपाते अंदर चले गए। अंदर आयकर गोलू और मंगल फूफा दूल्हे को ढूंढने लगे अब उन्हें किसी का डर नहीं था क्योकि इस घर में लल्लन के अलावा उन्हें कोई नहीं जानता था। दूल्हे को ढूंढते ढूंढते दोनों छत पर एक खाली कमरे में चले आये जो कि शायद दूल्हे का ही कमरा था लेकिन दूल्हा उन्हें नहीं मिला।
मंगल फूफा थककर पलंग पर आ बैठे और हाँफते हुए कहा,”उह्ह ससुरा तो हिया भी नाही है गोलू अब ओह्ह्ह का कहा ढूंढे ?”
अभी कुछ बच्चे भागते हुए उस कमरे में आये गोलू ने एक बच्चे को पकड़कर कहा,”ए सुनो ! ऋतिक कहा है जे कि आज शादी है ?”
“ऋतिक भैया तो नीचे है रुको हम बुलाकर लाते है , तुम लोग उनके दोस्त हो का ?”,लड़के ने पूछा
“हाँ हाँ हम ओह्ह के दोस्त है जाओ जल्दी बुलाकर लाओ उन्हें”,गोलू ने कहा तो लड़का हामी में गर्दन हिलाकर वहा से भाग गया।
गोलू वही कमरे में चक्कर काटने लगा कुछ देर बाद एक दुबला पतला सा लड़का अपने हाथो को नजाकत से यहाँ वहा करते हुए कमरे में आया। गोलू उसे देखकर रुक गया और मंगल फूफा भी अपनी जगह से उठ खड़े हुए
लड़के ने गुलाबी कुर्ते के साथ पिली सलवार पहनी थी जिसका न कोई मैच था और न कोई कॉम्बिनेशन उलटा सलवार उसके पैरो से बाहर जा रही थी। चेहरा क्लीन शेव से चमक रहा था , तिरछी माँग निकालकर बाल बनाये थे और एक तरफ के बाल उसके आधे से ज्यादा ललाट को ढके हुए थे जिन्हे वह बड़ी अदा के साथ साइड करता और वे फिर आ जाते , उसकी चाल में लड़कियों वाली नजाकत थी और देखने में वह काफी नाजुक लग रहा था। गोलू और मंगल फूफा ने हैरानी से एक दूसरे को देखा और फिर सामने खड़े ऋतिक को
गोलू और मंगल फूफा को हैरान देखकर लड़का उनके पास आया और अपने हाथो को यहाँ वहा घुमाते हुए बहुत ही बारीक़ आवाज में कहा,”तुम में से कौन है हमरा दोस्त और हिया का कर रहा है ? देखो आज हमायी शादी है और अभी हमे बहुते काम है,,,,पार्लर जाना है , शेरवानी पहनना है ,घोड़ी पर चढ़ना है , जल्दी बोलो हिय काहे आये हो ?”
“तुम हो ऋतिक ?”,गोलू ने हैरानी भरे स्वर में पूछा
लड़के ने ऋतिक रोशन के गाने “एक पल का जीना” वाला डांस स्टेप करके कहा,”हाँ हाँ मैं ही हूँ ऋतिक”
और इतने से स्टेप में वह पूरा हिल गया।
गोलू ने मुँह फाड़कर उसे देखा और उसकी तरफ स्टेप करके कहा,”तुम हो ऋतिक ?”
( क्या गुड्डू भगा पायेगा बिंदिया को या उलझ जाएगा अपने काम में ? क्या मिश्रा जी की तिकड़ी में शामिल होने वाले है यादव जी ? ये बिंदिया के होने वाले दूल्हे ऋतिक में सच में कोई प्रॉब्लम है या गोलू के मन का है वहम ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ” सीजन 4 मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
