Manmarjiyan Season 4 – 60
मंगेश को अपने सामने देखकर गोलू के चेहरे का रंग उड़ गया , वह पलट गया और जैसे ही वहा से भागने को हुआ मंगेश ने कहा,”ए सुनो ! तुमहू हो जे टेंट के मालिक ?”
बेचारा गोलू फंस गया फंस गया उसकी आवाज गले में अटक गयी , उसने मरे हुए स्वर में कहा,”जी जी जी हम हम हम ही है”
“तुम्ही हो तो मुँह घुमा के काहे खड़े हो ?”,मंगेश ने कहा
“मुँह नाही घुमाये है छुपा रहे है”,गोलू ने कहा
“छुपा रहे हो ,काहे छुपा रहे हो ?”,मंगेश ने कहा
मुसीबत के समय गोलू का दिमाग तो चलता था लेकिन उलटा उसने जल्दबाजी में कहा,”वो वो इहलीये छुपा रहे है क्योकि हम किसी को मुँह दिखाने लायक नहीं रहे”
मंगेश ने सुना तो उसे हैरानी हुई और उसने कहा,”काहे ! ऐसा तो का हुई गवा ?”
ऊपर खम्बे पर चढ़े मंगल फूफा ने नीचे खड़े मंगेश को देखा तो उसे रामनगर की पहाड़ी वाला सीन याद आ गया और वह घबरा गया।
मारे घबराहट के उसके पसीने छूटने लगे उसने ऊपर रहना ही ठीक समझा लेकिन गोलू के साथ रहते रहते अब तक मंगल फूफा भी बकैती करना सीख चुके थे इसलिए ऊपर चढ़े चढ़े कहा,”जे बेचारे की बहिन भाग गयी”
गोलू ने सुना तो गुस्से मंगल फूफा को देखा , मंगल फूफा का जवाब सुनकर मंगेश ने जैसे ही ऊपर देखा मंगल फूफा ने मुँह घुमा लिया।
मंगेश मंगल की शक्ल नहीं देख पाया इसलिए कहा,”अब तुमने काहे अपना मुँह छुपा लिया ?”
गोलू जो की मंगल के जवाब से पहले ही आग बबूला था उसने दाँत पीसकर कहा,”हमायी बहिन इसके साथ ही तो भागी रही”
“मतलब तुम दोनों जीजा साला हो ?”,मंगेश ने कहा तो गोलू उछल गया और मुँह घुमाये कहा,”अबे हमहू जीजा साले होये चाहे ससुर दामाद , तुमको का पंचायती है बे ? तुम्हरा टेंट लग रहा है ना फिर काहे बम्बू किये हो हमायी,,,,,,,,,,,,,,!!!!”गोलू ने कहा वह आगे कह पाता इस से पहले ऊपर चढ़े मंगल फूफा बोल पड़े,”अबे गोलू ! फॅमिली स्टोरी है का बक रहे हो तुमहू ?”
“गोलू,,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा के मुँह से गोलू का नाम सुनकर मंगेश बड़बड़ाया लेकिन वह कुछ समझ पाता इस से पहले गोलू वहा से भाग गया और मंगल फूफा भी लटकते हुए दूसरी तरफ चले गए। हैरान परेशान से मंगेश ने इधर उधर देखा लेकिन उसे कोई दिखाई नहीं दिया तो वह अपना सर खुजाते हुए वहा से चला गया। गोलू बिंदिया के घर के पीछे वाली गली में जो भागा तो बस भागता ही चला गया। लेकिन सीधे भागते हुए गोलू फिर पलट गया क्योकि सामने से घाघरा चुन्नी पहने गुड्डू भागता आ रहा था और हाथ में उसने ईंट का टुकड़ा उठाया हुआ था।
गुड्डू को एकदम से अपने सामने देखकर गोलू को लगा शायद गुड्डू को अपनी भाड़े की गाड़ी के बारे में पता चल गया है और वह उसे मारने आ रहा है। गोलू गुड्डू के आगे भागने लगा लेकिन गुड्डू गोलू से नहीं बल्कि अपने पीछे आते सांड़ से बचने के लिए भाग रहा था। आगे गोलू ,पीछे गुड्डू और उसके पीछे सांड ,, बेचारे मंगल फूफा मंगेश के जाने के बाद धीरे धीरे खम्बे से नीचे उतर ही रहे थे कि गुड्डू के पीछे भागते सांड़ ने उसके पिछवाड़े पर सर मारा और गुड्डू उछलकर गोलू पर गिरा और गोलू के हाथ में आया टेंट का वो खम्बा जिस पर मंगल फूफा चढ़े हुए थे।
जैसे ही टेंट गिरा मंगल फूफा भी खम्बे से हवा में उछले लेकिन नीचे गिरने के बजाय आ गिरे बिंदिया की सहेली रूपा की गोद में , हट्टी कट्टी रूपा साढ़े चार फुट के मंगल फुफा को गोद में उठाये घूरे जा रही थी और मंगल फूफा उसकी भूरी भूरी आँखों में डूबते चले गए। वही बगल में नीचे गिरे गोलू का मुँह मिटटी में दबा था और हट्टा कट्टा गुड्डू उसके ऊपर गिरा था जिस से गोलू उठ भी नहीं पाया लेकिन ऐसी सिचुएशन हो और गोलू का फोन ना बजे ऐसा भला कैसे हो सकता था ?
रूपा का रूप देखकर मंगल फूफा की आँखों में दिल चमचमाने लगे और गोलू का फोन बजा
“देखा है पहली बार , साजन की आँखों में प्यार,,,,,,,,,,,,,,,अब जाके आया मेरे , बैचैन दिल को करार”
गाना सुनकर तो मंगल फूफा का दिल बाग़ बाग़ हो गया और रूपा भी मंगल फूफा को घूरना छोड़कर प्यार से मंगल फूफा को देखने लगी तभी उसके कानो में किसी की आवाज पड़ी,”ए रूपा ! वहा का कर रही हो ? बिंदिया बुलाय रही है जल्दी आवा”
रूपा की तन्द्रा टूटी उसने एकदम से हाथ नीचे किये और मंगल फूफा को गिरा दिया। मंगल फूफा तो पहले ही रूपा के प्यार में गिर चुके थे इसलिए ये गिरने आ उन्हें ज्यादा अफ़सोस नहीं था। रूपा ने एक नजर मंगल को देखा और वहा से चली गयी। मंगल फूफा उठे और पेंट की पिछली जेब से कंघी निकालकर खोपड़ी पर बचे चार बालो में से घुमाया और थोड़ा ऊँचे स्वर में कहा,”देखा है पहली बार ,साजन की आँखों में प्यार”
रूपा ने सुना तो पलटकर देखा और मंगल को देखकर मुस्कुरायी और खिलखिलाकर वहा से चली गयी
रूपा को मुस्कुराते देखकर मंगल फूफा का दिल तो बल्लिया उछलने लगा , उसने अपने सीने पर हाथ रखा खुश होकर जैसे ही पलटा देखा गुड्डू और गोलू नीचे धरती पर पड़े है। गुड्डू को सांड़ ने बहुत जोर से मारा था इसलिए बेचारा मारे दर्द के उठ ही नहीं पाया। मंगल फूफा ने आकर गुड्डू को उठाया तो नीचे मुँह के बल गिरे गोलू ने कहा,”अबे मंगलू ! हमे धरती मा गाड़कर रूपा के साथ का गुल खिलाय रहे हो बे ? अबे हमे भी उठाय ल्यो इह पहले दुनिया से उठ जाये”
मंगल फूफा ने आकर गोलू को उठाया और उसका मुँह झाड़कर कहा,”का यार गोलू मतलब बहुते गिरे हुए इंसान हो तुमहू साला जब देखो तब बस गिरते ही रहते हो”
गोलू ने सुना तो खाँसा और मुँह में भरी मिटटी मंगल फूफा के मुँह पर , मंगल फूफा ने गोलू को छोड़कर अपना मुँह झड़ते हुए कहा,”कसम से बहुते बद्तमीज भी हो तुमहू,,,,,,,,,,,!!!”
गोलू ने मंगल फूफा की बात पर ध्यान नहीं दिया और गुड्डू के सामने आकर कहा,”गुड्डू भैया आप हिया का कर रहे है ? आप तो बिंदिया भाभी को लेने जाने वाले थे ना फिर हिया काहे चले आये ? आपको का भरोसा नही है हम पर कि हमहू टेंट का काम ठीक से करेंगे कि नाही ? वाह गुड्डू भैया वाह मतलब हमहू हिया अपनी पूरी जिंदगी आपके नाम कर दिए रहय और आपको हम पर भरोसा तक नाही है,,,,,,,,,,बिंदिया भाभी को लाना छोड़ आप टेंट देखने हमाये पीछे पीछे चले आये और वो भी जे घाघरा चोली पहिन के , का सोचे रहे कि गोलू पहिचानेगा नाही अरे बाज की नजर हमायी बाज की”
गोलू की बातें गुड्डू के सर के ऊपर से गयी उसने झुंझलाकर कहा,”हमायी छोडो जे बताओ तुम और मंगल फूफा हिया का कर रहे हो ?”
“का कर रहे है ? महीना भर पहिले जॉन शादी का आर्डर लिए रहय ओह्ह्ह मा टेंट लगाने आये है और का,,,,,,,,,मतलब अब आपके चक्कर मा काम धंधा भी ना करे”,गोलू ने मुँह बनाकर कहा
गुड्डू ने सुना तो उसे माथा ठनका और उसने कहा,”हिया किसकी शादी का टेंट लगाने आये हो तुम लोग ?”
“अरे बिरजू की भतीजी की शादी का और किसका ?”,गोलू ने कहा
“लेकिन तुमहू तो कह रहे थे शादी कचिया मा है”,गुड्डू ने उलझनभरे स्वर में पूछा
“हाँ तो जे कचिया ही तो है”,गोलू ने बहुत ही कॉन्फिडेंस में कहा
गुड्डू ने सुना तो अपना सर झटका और कहा,”अबे गोलू जे कचिया नाही चकिया है और जॉन लड़की की शादी का तुमहू आर्डर लिए हो उह्ह्ह बिंदिया भाभी ही है बिरजू की भतीजी और मंगेश की बिटिया,,,,,,,,,!!!”
गोलू ने सुना तो हक्का बक्का रह गया अब उसे समझ आया कि कुछ देर पहले मंगेश उसके सामने क्यों खड़ा था ? गोलू घबराहट के मारे काँपने लगा और कहा,”गुड्डू भैया इह का हो गवा ?”
गुड्डू ने गुस्से से गोलू को देखा और कहा,”इह हुआ जे सीजन का सबसे बड़ा काण्ड , साले गोलू तुमहू आदमी हो की पैजामा बे ,, शादी आ आर्डर भी लिया तो किसका अपनी ही होने वाली भाभी का,,,,,,,,,,लवली भैया को गलती से भी भनक लगी ना तो पहिले तुमको तोड़ेंगे बाद मा हमको ,,, साले कांड करने के लिए तुमको जे ही घर मिला था,,,,,,,गोलू गोलू”
कहते हुए गुड्डू ने सामने हक्के बक्के खड़े गोलू को हाथ लगाकर देखा तो गोलू धड़ाम से नीचे जा गिरा।
मिश्रा जी का घर , कानपूर
“आदर्श बाबू ! हमने मिश्राइन से कह दिया है कि हम और आप किसी जरुरी काम से जौनपुर जा रहे है कल शाम तक वापस आ जायेंगे। अब आप अपना मुँह खोलकर कोनो रायता नहीं फैलाय देना समझे”,मिश्रा जी ने आदर्श फूफा के साथ चलते हुए दबे स्वर में कहा
“हाँ हाँ आप चिंता नाही करो इत्ता सेपरेट तो रख सकते है हमहू बात को”,आदर्श फूफा ने सीक्रेट को सेपरेट कहा
मिश्रा जी ने आदर्श फूफा को देखा और कहा,”सेपरेट नाही सीक्रेट”
“हाँ हाँ वही,,,,,,,,,,अच्छा हम जे कह रहे थे रास्ते के लिए थोड़ा खाना पैक करवाय ले ?”,आदर्श फूफा ने कहा
“आप का हुआ पिकनिक मनाने जा रहे है ? अभी गले तक ठूसकर खाये है न और रास्ते मा जरूरत पड़ी तो और खिला देंगे,,,,,,,,,,,अब चलो हिया से जे से पहिले की कोनो हमे देखे”,कहकर मिश्रा जी दरवाजे की तरफ बढ़ गए
आदर्श फूफा भी जैसे ही मिश्रा जी के पीछे जाने लगे आँगन की सीढ़ियों पर आकर राजकुमारी भुआ ने कहा,”ए जी सुनिए ! कोमलिया के पिताजी , ध्यान से जाईयेगा और अपना ख्याल रखियेगा,,,,,,,,,,,,,जल्दी आना आपके बिना हमे जे घर सुना सुना लगे है”
कहते हुए भुआ ने रोना शुरू किया और अपनी साड़ी का पल्लू मुँह में खोंस लिया। मिश्रा जी ने सुना तो अपना सर पीट लिया लेकिन वे कुछ कहते इस से पहले आदर्श फूफा राजकुमारी की तरफ आये और बड़े प्यार से कहा,”अरे काहे चिंता करती हो राजकुमारी , हमहू चकिया थोड़ी जा रहे है जो लौटने में 4-5 दिन लगे है , यही जौनपुर तक जाकर आ रहे है हम भी तुमको बहुत याद करेंगे”
कहते हुए जैसे ही आदर्श फूफा ने रोने के लिए अपनी आँखों को हाथ लगाया मिश्रा जी ने आकर उनकी कोलर पकड़ी और उन्हें बाहर ले जाते हुए कहा,”जे लैला मजनू बाद वापस आकर खेल लेना अभी चलो देर हो रही है”
“अच्छा राजकुमारी अपना ख्याल रखना”,मिश्रा जी के साथ जाते हुए आदर्श फूफा ने पलटकर कहा
“उह्ह्ह अपना ध्यान रख लेगी , अपना का घर का , मोहल्ले का पुरे कानपूर आ ध्यान रख लेगी तुमहू चलो भी यार,,,,,,,,,,,,,!!”,मिश्रा जी ने खीजकर कहा और आदर्श फूफा को लेकर गाड़ी के पास चले आये।
ड्राइवर सुबह सुबह शोरूम की गाड़ी छोड़ गया है। मिश्रा जी खुद ड्राइवर सीट पर आ बैठे और आदर्श फूफा उनकी बगल में और दोनों निकल पड़े।
कानपूर चौक पर मोहन हलवाई की दुकान के बाहर खड़े होकर गुप्ता जी और मिश्रा जी जलेबी समोसा खा रहे थे
यादव जी किसी काम से चौक आये थे उन्होंने जब शर्मा जी और गुप्ता जी को साथ खड़े होकर समोसे जलेबी खाते देखा तो हैरानी से उनकी आँखे बड़ी हो गयी उस से भी ज्यादा धक्का उन्हें तब लगा जब उन्होंने देखा शर्मा जी गुप्ता जी की प्लेट से जलेबी लेकर खा रहे है और गुप्ता जी शर्मा जी की प्लेट से चटनी ,
ये नजारा देखकर तो यादव ने अपने सीने पर ही हाथ रख लिया क्योकि शर्मा जी और गुप्ता जी का 36 का आंकड़ा है ये बात कानपूर का बच्चा बच्चा जानता था। यादव जी छुपते छुपाते दोनों के करीब आये और एक प्लेट कचौरी लेकर दोनों की तरफ पीठ करके खड़े हो गए ताकि दोनों उन्हें देखे भी ना और वे उनकी बात भी सुन सके।
“तुम्हे का लगता है गुप्ता , मिश्रा चकिया जायेगा ?”,शर्मा जी ने समोसा खाते हुए कहा
“अरे बिल्कुल जाएगा ,अगर इह मामला बृजेशवा के बेटे लवली का नाही होता न तो मिश्रा कबो चकिया मा झांकता भी नाही”,गुप्ता जी ने जलेबी खाते हुए कहा
“अबे धीरे बोलो ! लवली अब मिश्रा जी का लड़का है और जे ही सच है”,शर्मा जी ने दबे स्वर में कहा
“देखो शर्मा ! हम है जबान के साफ जो मुँह मा आता है बोल देते है,,,,,,,,,,,सबको पता है लवली गुड्डू किसके लड़के है पर जाने दो अब मिश्रा जी ने उन्हें अपनी औलाद मान ही लिया है तो फिर ओह्ह के लिए चकिया का लन्दन भी चले जायेंगे,,,,,,,,,तुम जल्दी जे समोसा लपेटो तब तक हमहू पैसा देकर आते है”, गुप्ता जी ने कहा और मोहन की तरफ चले गए
यादव ने सुना तो उसे आधी बात समझ आयी और आधी उसके सर के ऊपर से गयी लेकिन एक बात उसके दिमाग ने पकड़ ली और वो थी चकिया जाने वाली बात , उसने कचोरी का एक टुकड़ा खाया और खुद में ही बड़बड़ाया,”जे साला चकिया का का मेटर है , अभी जे चांडाल लोगो से पूछेंगे तो इह सब तो बताएँगे नाही लगता है हमे खुद ही पता लगाना पडेगा”
गुप्ता जी मोहन को पैसे चुकाकर आये इतने में मिश्रा जी की गाड़ी आकर रुकी। मिश्रा जी और आदर्श फूफा शर्मा जी और गुप्ता जी के पास आये और उनसे बात करने लगे। चारो को साथ देखकर तो यादव का शक और पक्का हो गया कि जरूर चकिया में कुछ गड़बड़ है। उसने प्लेट रखी और जा पंहुचा मिश्रा जी की गाडी के पीछे , अब मिश्रा जी और बाकि मण्डली उसे अपने साथ ख़ुशी ख़ुशी तो ले जाने से रही इसलिए उसने गाड़ी की डिक्की खोली और उसमे छुप गया। मिश्रा जी आदर्श फूफा , शर्मा जी और गुप्ता जी के साथ गाड़ी के पास चले आये।
शर्मा जी आगे मिश्रा जी के बगल में आ बैठे और गुप्ता जी को मन मारकर पीछे आदर्श फूफा के साथ बैठना पड़ा। अब गोलू की आदर्श फूफा से बने तो गुप्ता जी की बने। आदर्श फूफा और गुप्ता जी ने एक दूसरे को देखा और मुँह बनाकर दोनों खिड़की से बाहर देखने लगे। मिश्रा जी ने गाडी स्टार्ट की और पाँचो लोग चकिया के लिए निकल गए।
आप लोग सोच रहे होंगे गाड़ी में तो 4 लोग ही बैठे है फिर पांचवा कौन ? अरे भाई अपने यादव जी वो भी तो इन चारो के साथ पीछे डिग्गी में बैठकर चकिया जा रहे है।
( क्या चकिया में शुरू होने वाली है मंगल फूफा और रूपा की प्रेम कहानी ? होश में आने के बाद क्या गोलू रुकेगा चकिया में या भाग जायेगा वापस कानपूर ? क्या होगा मिश्रा जी का रिएक्शन जब वो देखेंगे गाड़ी की डिग्गी में यादव को ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )
Manmarjiyan Season 4 – 60Manmarjiyan Season 4 – 60Manmarjiyan Season 4 – 60Manmarjiyan Season 4 – 60Manmarjiyan Season 4 – 60Manmarjiyan Season 4 – 60Manmarjiyan Season 4 – 60Manmarjiyan Season 4 – 60Manmarjiyan Season 4 – 60Manmarjiyan Season 4 – 60Manmarjiyan Season 4 – 60Manmarjiyan Season 4 – 60Manmarjiyan Season 4 – 60Manmarjiyan Season 4 – 60Manmarjiyan Season 4 – 60Manmarjiyan Season 4 – 60Manmarjiyan Season 4 – 60Manmarjiyan Season 4 – 60Manmarjiyan Season 4 – 60Manmarjiyan Season 4 – 60Manmarjiyan Season 4 – 60Manmarjiyan Season 4 – 60Manmarjiyan Season 4 – 60Manmarjiyan Season 4 – 60Manmarjiyan Season 4 – 60Manmarjiyan Season 4 – 60
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Read Manmarjiyan Season 4
संजना किरोड़ीवाल
