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Manmarjiyan Season 4 – 6

Manmarjiyan Season 4 – 6

Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

गोलू आया था अपने ससुराल और आते ही सीधा गिरा मुँह के बल शर्मा जी के घर के सामने पड़े गोबर पर , पिंकी ने देखा तो जल्दी से गोलू के पास आयी लेकिन गोलू से आती गोबर की बदबू से पिंकी दूर हट गयी। गोलू का गिरना हुआ और शर्मा जी का घर का गेट खोलना हुआ , जैसे ही उन्होंने गोलू को औंधे मुँह गोबर पर गिरे देखा तो ताली बजाते हुए कहा,”हैप्पी बर्थडे टू यू , हैप्पी बर्थडे टू यू”
“पापा,,,,,,ये क्या कर रहे है आप ?”,पिंकी ने चिढ़े हुए स्वर में कहा

“हमारी छोडो और ये देखो ये क्या कर रहे है ?”,शर्मा जी ने मुँह बनाकर गोलू की तरफ इशारा किया
“का कर रहे है आधार कार्ड बनाय रहे है आओ आप भी अंगूठा लगाय दयो”,गोलू ने गोबर से अपना मुँह उठाकर कहा उसकी सिर्फ आँखे दिखाई दे रही थी बाकी पुरे मुँह था।
“देखा गोबर मा गिरे है पर बकैती नाही छूट रही इनकी,,,,,,,,,!!”,शर्मा जी ने पिंकी से कहा

गोलू जैसे तैसे उठा लेकिन गोबर से आती बदबू से बेचारे का खुद का मुँह बना हुआ था। अपने पापा की बात सुनकर पिंकी ने कहा,”बकैती नाही कर रहा पापा , हम और गोलू तो आपसे ही मिलने आ रहे थे कि किसी गधे ने रास्ते में केले का छिलका फेंका हुआ था। गोलू का पैर उस पर पड़ा और ये फिसलकर गिर पड़े”
“बहुते गिरे हुए इंसान है”,शर्मा जी ने कहा

“ए ससुर जी , हमरी भी कोनो इज्जत है कानपूर मा , बड़े बड़े लोगो के साथ उठना बैठना है हमरा”,गोलू ने अपने चेहरे से गोबर पोछते हुए कहा
“बाप-चाचा की उम्र के लोगो से दोस्ती काहे रखते हो ? और गोबर काहे हटा दिया लगा रहने दयो,,,,,,,,,अच्छा लग रहा आपके तबेले जइसन मुँह पे,,,,,,,!!!”,शर्मा जी ने कहा

“ल्यो सुन ल्यो पिंकिया जे सब सुनाने के वास्ते हमको हिया लेकर आयी थी,,,,,,,,,,!!”,गोलू ने पिंकी पर भड़ककर कहा
“पापा ! आप गोलू के लिए ऐसा कैसे कह सकते हो ?”,पिंकी ने शर्मा जी से गुस्सा होकर कहा
“हाँ कैसे कह सकते हो ? हमहू हिया अपनी छीछा लेदर करवाने नहीं आये है”,पिंकी का सपोर्ट पाकर गोलू ने कहा
“अच्छा तो फिर ख़ास तौर पर अपनी छीछा लीडर करवाने कहा जाते हो ?”,शर्मा जी आज जैसे ठान कर आये थे कि गोलू को बेइज्जत करके छोड़ेंगे

इसके बाद गोलू महाराज की खिसक गयी वह पिंकी के पास आया और कहा,”बस बहुते हो गया पिंकिया निकालो झोले से सोन पपड़ी का डिब्बा , फेंक के मारो अपने पिताजी के मुँह पे और यही से हैप्पी बड्डे कह के निकल ल्यो हमाये साथ”
“का हैप्पी बर्थडे ?”,शर्मा जी ने चौंककर कहा

“हाँ पापा ! भूल गए आज आपका बर्थडे है और वही विश करने हम और गोलू यहाँ आये थे लेकिन आपने तो इनको ही बेइज्जत कर दिया ,, हमे तो आपका बर्थडे याद तक नहीं था वो तो गोलू ने हमे याद दिलाया और यही हमे यहाँ लेकर आया,,,,,,,लेकिन आप,,,,,,,,,जा रहे है हम वापस”,पिंकी ने सोन पपड़ी का डिब्बा निकाला और शर्मा जी के हाथो में थमाकर कहा

शर्मा जी ने सुना तो उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने शर्मिंदा होकर कहा,”अरे गोलू जी हमे नहीं पता था आप हमसे इतना प्यार,,,,,,,,,,,,,,,,एक मिनिट पर हमाये बड्डे पर जे सोन पपड़ी का डिब्बा काहे लाये और कोनो मिठाई नाही मिली ?”
गोलू से माफ़ी माँगते माँगते शर्मा जी की नजर हाथ में पकडे सोन पपड़ी के डिब्बे पर पड़ी और माफ़ी भूलकर वे गोलू पर फिर भड़क गए।

पिंकी ने देखा मिठाई के डिब्बे की जगह सोन पपड़ी का डिब्बा है तो वह भी हैरान रह गयी और गोलू की तरफ आकर कहा,”गोलू तुम सोन पपड़ी का डिब्बा क्यों लेकर आये हो ?”
“तो का चाहती हो कचौरी जैसे मुँह वाले आदमी के लिए हमहू राजभोग लेकर आये,,,,,,,,,देखी नाही कित्ता बढ़िया से स्वागत किये रहय जे घर के इकलौते दामाद का”,गोलू ने गुस्से से भुनभुनाते हुए कहा

शर्मा जी कुछ कहते इस से पहले शर्माईन दरवाजे पर चली आयी और जब उन्होंने पिंकी को देखा तो ख़ुशी से शर्मा जी को साइड कर उसकी तरफ चली आयी। शर्मा जी के पैर लड़खड़ाए और वे फिसलकर मुँह के बल जा गिरे उसी गोबर पर जिस पर कुछ देर गोलू गिरा था। जैसे ही शर्मा जी गिरे गोलू के कलेजे को जो ठंडक मिली है मत पूछो वह ख़ुशी से उछलते हुए शर्मा जी की तरफ आया और ताली बजाकर गाने लगा,”हैप्पी बर्थडे टू यू , हैप्पी बर्थडे टू यू,,,,,,,!!”

शर्मा जी उठे और हाथ में गोबर उठाकर गोलू के मुँह पर फेंककर कहा,”अब जब केक कट ही गया है तो थोड़ा चख भी ल्यो”
गोलू ने अभी अभी अपना मुँह साफ़ किया और शर्मा जी ने फिर से उसके मुँह पर गोबर मल दिया बस फिर क्या था दोनों ससुर और दामाद आपस में गोबर होली खेलने लगे। मोहल्ले वाले इक्क्ठा होने लगे , आस पास के लोग घरो से बाहर निकल आये ये देखकर शर्माईन और पिंकी जल्दी से दोनों की तरफ आयी  

शर्माईन ने गोलू को सम्हाला और पिंकी ने अपने पापा को , पिंकी अपने पापा को साइड में ले गयी और शर्माईन ने गोलू को अंदर लाते हुए कहा,”अरे का कर रहे है दामाद जी , काहे ससुराल मा अपनी बेइज्जती करवाय रहे हैं,,,,,,,,अरे पिंकिया के पापा को जानते है ना आप उह्ह तो आपकी और पिंकिया की शादी से पहिले से नापसंद करते है आपको फिर बार बार काहे उनसे भीड़ जाते है आप ?”

“अरे हमहू कहा भिड़े रहय सासुमा,,,,,,,,, आपके पतिदेव ही जब देखो तब हमाये पीछे पड़े रहते है,,,,,,अच्छे भले नहा धो के उनका हैप्पी बर्थडे मनाने आये थे  और देखो हमाये मुँह पर गोबर मल दिए उह्ह्ह , जे कोनो इज्जत है साला दामाद की,,,,,,,बताय रहे है पिंकिया से पिरेम नाही होता ना तो पुरे कानपूर मा दौड़ाय देते इनको,,,,,,,,,अभी जानते नाही है जे हमे,,,,,गज्जू गुप्ता के इकलौते लौंडे है हम,,,,,,,!!”,गोलू ने मुँह पे लगा गोबर पोछते हुए कहा

“अरे गुस्सा थूक दीजिये ना दामाद जी,,,,,,,जाईये बाथरूम में जाकर मुँह साफ कर लीजिये”,शर्माईन ने कहा
गोलू अधखुली आँखों से देखते हुए आगे बढ़ गया और शर्माईन शर्मा जी को सम्हालने बाहर चली गयी।

“पुरे कानपूर मा जे ही एक नमूना मिला रहा तुमको इश्क़ लड़ाने के लिए पिंकिया,,,,,,,,,,,नहीं ऐसो का देख लेही जे गोलुआ मा कि ओह्ह्ह के पियार मा अंधी , बहरी , सब हुई गयी,,,!!”,शर्मा जी ने पिंकी को फटकार लगाकर कहा
“का कमी है गोलू में पापा ? अच्छा दिखता है , अच्छा कमाता है , हमका खुश रखता है इह से जियादा और का चाहिए एक लड़की को,,,,,,,आप हमरे गोलू के बारे में उलटा सीधा ना बोलिये”,पिंकी ने भी भड़ककर कहा

“का कमी है ? अरे हरकते नाही देखती हो ओह्ह की,,,,,,,,तुमको तो कुछो कहना ही बेकार है उह्ह ससुरा भंड आदमी तुमको भी अपने जैसा बना लिया है”,शर्मा जी ने कहा

“पापा आप भी कुछ कम नहीं है , जब देखो तब बेचारे गोलू के पीछे ऐसे पड़े रहते है,,,,,,,अब हम एक शब्द नहीं सुनेंगे उसके खिलाफ आपको बर्थडे की शुभकामनाये देने आये थे दे दिए अब जा रहे है,,,,,,,,!!”,कहकर पिंकी जाने लगी तो सामने से आती शर्माईन ने उसे रोक लिया और कहा,”अरे का कर रही हो पिंकिया तुम्हाये पापा तो है ही चिड़चिड़े तुम काहे इनकी बात का इत्ता बुरा मान रही हो,,,,,,,,,,!!”

“बुरा ना माने तो और का करे मम्मी ? जे घर का इकलौता दामाद है गोलू फिर भी ओह्ह की कोनो इज्जत नाही है जे घर मा , अरे लब मैरिज की है तो का जिंदगीभर बेइज्जत करोगे ओह्ह का आप लोग,,,,,,,,आज के बाद ना हमहू हिया नहीं आएंगे मम्मी”,पिंकी ने कहा

शर्मा जी को अपनी गलती का अहसास हुआ , वे पिंकी के पास आये और कहा,”अच्छा ठीक है गुस्सा थूक दयो हमहू भी थोड़ा ज्यादा ही बुरा पेश आ गए गोलू के साथ , हमहू माफ़ी चाहते है तुमसे आज के बाद ऐसा नाही होगा”
“हमसे नहीं पापा माफ़ी मांगनी ही है तो गोलू से मांगिये”,पिंकी ने कहा
“ठीक है अंदर चलो उनसे भी मांग लेंगे”,शर्मा ने पिंकी के साथ घर के अंदर जाते हुए कहा

गुप्ता जी मंगल फूफा के साथ घर चले आये। जैसे ही घर के दरवाजे पर पहुंचे मंगल फूफा की गर्दन यादव जी के घर की तरफ घूम गयी। गुप्ता जी ने देखा तो कहा,”का बे मंगलू ? लगता है तुम्हारा इश्क़ का बुखार ठीक से उतरा नाही है,,,,,,,,का देख रहे हो उधर ?”
“अरे नहीं नहीं हमहू तो उह्ह यादववा की भैंसिया को देख रहे थे,,,,,,,,,,!!”,मंगल फूफा ने जल्दी से गर्दन सीधी करके कहा

“काहे ? अब का यादववा की भैंसिया को फ़साने का इरादा है ?”,गुप्ता जी ने कहा
“भैंसिया काहे फसाएँगे हम ? इंसान है हम जिनावर नाही”,मंगल फूफा ने बिदककर कहा
“इंसानो की भाषा कहा समझ आती है तोह का,,,,,,,,,अबे जोन चिड़िया को तुमहू दाना डाल रहे हो आ उह्ह्ह पहिले से एक थो कबूतर के साथ सात फेरे ले चूकी है,,,,,,,पराई औरत पर नजर डालोगे नरक मा जाओगे”,गुप्ता जी ने मंगल फूफा को अंदर धकियाकर कहा

मंगल फूफा सीढ़ियों में जा गिरा और सीढ़ी पर पड़ी धूल मिटटी को हाथ की उंगलियों पर लगाया और खुद से कहा,”इश्क़ की आग मा जलने वाले पेट्रोल से नाही डरते गुप्ता जी,,,,,,अब तो जे चिड़िया को हमरा दाना भी चुगेगी और हमरे पिंजरा मा भी आएगी और उह्ह कबूतर , उह्ह्ह अपनी भैंसिया पर बैठकर कानपूर के चक्कर लगाये हमायी बला से,,,,,,,,,,!!!”

कहकर मंगल ने अपनी उंगलियों पर लगी मिटटी को ललाट पर ऐसे लगाया जैसे चन्दन हो,,,,,,,,गुप्ता जी ने देखा तो हैरानी से कहा,”अबे जे का कर रहे हो पगला गए हो का ? माथा काहे सन लिए धूल मा ?”

मंगल फूफा मुस्कुराते हुए उठे और गुप्ता जी की तरफ देखकर बोले,”आप नाही समझोगे गुप्ता जी का है कि आपने कबो इश्क़ नाही किया ना,,,,,इजाजत हो दुइ लाइन सुनाये ?”
“का इजाजत नाही देंगे तो नाही सुनाओगे ?”,गुप्ता जी चिढ़कर ने कहा
“अच्छा तो सुनो ‘जिस्म मिले न मिले मिलना जरुरी है मन प्रिये , उसे धूल ना समझना , फुलवारी है हमरे माथे का चंदन प्रिये’ कैसी लगी हमरी शायरी ?”,मंगल फूफा ने इतराकर कहा

गुप्ता जी ने आगे बढ़कर उसका मुँह बंद किया और कहा,”अबे धीरे बोलो कही उह्ह्ह यादववा सुन लिया ना तो तुम्हरी सायरी का जनाजा निकाल देगा,,,,,,,,,,साला कहा नैन लड़ाये हो मरवाओगे हम सबका भी,,,,,,,जे जित्ता जल्दी हो सके इह फुलवारी के मेटर को निपटाओ वरना भाग जाओ हिया से”
“प्यार किया तो डरना का गुप्ता जी ? अच्छा छोडो जे बताओ हमरी सायरी कैसी लगी ?”,मंगल फूफा ने कहा
“सायरी तो ठीक ठाक बोल लेते हो”,गुप्ता जी ने कहा

“अरे तो फिर एक ठो आप भी सुनाओ ना,,,,,,,,!!”,मंगल फूफा ने कहा
“अरे हट हमका जे सायरी वायरी नाही आती,,,,,!!”,गुप्ता जी ने कहा
“ए गुप्ता जी , सुनाओ न सुनाओ न सुनाओ”,मंगल फूफा तो जैसे बच्चो की तरफ गुप्ता जी के पीछे ही पड़ गए।  गुप्ता जी ने मंगल फूफा के दोनों कानों को पकड़ा और उसे आगे पीछे करके झुंझलाकर कहा,”अबे सुनाते है”

मंगल फूफा इंतजार करने लगा तो गुप्ता ने कुछ देर सोचने विचार का नाटक किया और फिर कहा,”जे इश्क़ पिरेम के चक्कर मा बदलो ना अपना ढंग प्रिये , चन्दन का तो पतो नाही तुमहू हो हमरे माथे का कलंक प्रिये”
गुप्ता जी अपनी शायरी खत्म कर अंदर चले गए और गुप्ता जी की भयंकर शायरी सुनकर मंगल फूफा का मुँह खुला का खुला रह गया।  

 शाम मा लवली सबसे ऊपर वाली छत की दिवार पर मायूस बैठा था। उसका कही मन नहीं लग रहा था और रह रह कर बिंदिया का ख्याल आ रहा था। बिंदिया से एक बार बात हो जाती तो लवली को तसल्ली मिल जाती लेकिन बिंदिया उसका फोन भी तो नहीं उठा रही थी। गुड्डू घूमते घामते ऊपर छत पर चला आया और जब लवली को दिवार पर बैठे देखा तो खुश होकर उसके पास आया और कहा,”अरे वाह लवली भैया ! हम दोनों की शक्ल और हाव भाव ही नाही आदतें भी मिलती जुलती है”

“कैसे ?”,लवली ने मायूसी भरे स्वर में कहा
“अब देखिये ना हमहू जब भी उदास निराश हताश होते थे तो हिया आकर बैठ जाते थे और आज आप भी यही आकर बैठे है”,गुड्डू ने कहा
लवली ने सुना तो बुझी आँखों से गुड्डू को देखने लगा। लवली को अपनी ओर देखते पाकर गुड्डू ने कहा,”काहे परेशान है ?”
“हमहू ठीक है गुड्डू”,लवली ने सामने देखते हुए कहा

“काहे झूठ बोल रहे है लवली भैया , हमहू सुबह से देख रहे है कुछ तो बात है जोन अंदर ही अंदर आपको परेशान कर रही है,,,,,,,,कही आप बिंदिया को लेकर तो परेशान नाही हो रहे ?”,गुड्डू ने लवली के बगल में बैठते हुए बहुत ही प्यार से कहा
लवली ने सुना तो गुड्डू की तरफ देखने लगा। गुड्डू ने लवली की उदास आँखों को देखा और कहा,”देखा हमहू कहे थे ना कि कोई बात है जोन आपको परेशान कर रही है,,,,,,,,,आप पिताजी से कहते काहे नाही ?”
“का ?”,लवली ने कहा

“यही के आप बिंदिया को चाहते है”,गुड्डू ने बहुत ही आसानी से वो बात कह दी जो आज तक लवली बिंदिया से भी नहीं कह पाया था। लवली को खामोश देखकर गुड्डू ने उसके कंधे पर हाथ रखा और कहा,”लवली भैया ! इत्ता सोचोगे तो कही बिंदिया हमेशा के लिए आपसे दूर ना हो जाये,,,,,,,,आपको पिताजी से कह देना चाहिए ओह्ह के बाद अगर पिताजी नहीं माने तो हम है न हम देख लेंगे”
“तुम्हरे बख्त मा तुम्हरी सुने थे पिताजी ?”,लवली ने कहा

“अरे हमरी तो चॉइस ही गलत थी अच्छा हुआ नाही सुने पिताजी सुन लेते तो आज हमरी मास्टरनी कही और लेक्चर दे रही होती , पर आपकी तो चॉइस भी सही है और आपका पियार भी आपको पिताजी ना नाही कहेंगे”,गुड्डू ने प्यार से कहा
“अच्छा और नहीं माने तो ?”,लवली ने मुस्कुरा कर कहा
गुड्डू ने सामने देखा और कहा,”नहीं माने तो उठवा लेंगे बिंदिया भाभी को”

लवली ने हवा में थप्पड़ दिखाया और फिर गुड्डू को गले लगाकर कहा,”कसम से पुरे कानपूर मा एक ही पीस हो,,,,,,,बकैत कही के”
गुड्डू ने सुना तो हसने लगा। कुछ देर पहले मिश्रा जी के घर की जो छत मायूस और उदास थी अब वह हंसी के ठहाको से गूंज रही थी.

( क्या शर्मा जी मांगेंगे गोलू से माफ़ी और गोलू करेगा उन्हें माफ़ ? क्या मंगल फूफा का प्रेम होगा सफल या गुप्ता जी बन जायेंगे उनकी प्रेम कहानी में विलीन ? क्या लवली के लिए गुड्डू मनाएगा मिश्रा जी को या आएगी बिंदिया को घर से उठाने की नौबत ? जानने के लिए पढ़ते रहे “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

यही के आप बिंदिया को चाहते है”,गुड्डू ने बहुत ही आसानी से वो बात कह दी जो आज तक लवली बिंदिया से भी नहीं कह पाया था। लवली को खामोश देखकर गुड्डू ने उसके कंधे पर हाथ रखा और कहा,”लवली भैया ! इत्ता सोचोगे तो कही बिंदिया हमेशा के लिए आपसे दूर ना हो जाये,,,,,,,,आपको पिताजी से कह देना चाहिए ओह्ह के बाद अगर पिताजी नहीं माने तो हम है न हम देख लेंगे”
“तुम्हरे बख्त मा तुम्हरी सुने थे पिताजी ?”,लवली ने कहा

Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal
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