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Manmarjiyan Season 4 – 54

Manmarjiyan Season 4 – 54

Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

चकिया से आया लिफाफा हाथ में पकडे आदर्श बाबू खुश होकर जैसे ही पलटे अपने पीछे खड़े मिश्रा जी से टकरा गए और जल्दी से लिफाफा पीछे छुपा लिया। मिश्रा जी ने देखा तो अपनी  बाँयी भंव चढ़ाई और आदर्श फूफा को देखकर कहा,”का छुपा रहे है ?”
“क क कुछो नाही बाहिर से कोई लेटर आया है हमारा”,आदर्श फूफा ने हकलाते हुए कहा
मिश्रा जी ने आदर्श फूफा के हाथ से लिफाफा छीना और उस पर लिखा नाम देखकर कहा,”आप कब से मिश्रा जी हो गए ? आप तो शर्मा नहीं ना थे या कानपूर आकर अपनो सरनेम बदल लिए ?”

मंगल फूफा ने देखा लिफाफा मिश्रा जी के हाथ में है तो झेंप गए और कहा,”अरे हम तो आपको ही देने आ रहे थे”
“दे दिया ना ,अब जाईये हमायी छाती पर काहे खड़े है ?”,मिश्रा जी ने लिफाफा खोलते हुए कहा
मंगल फूफा मिश्रा जी की बात को नजरअंदाज करके वही खड़े रहे और बगल में खड़े होकर झाँकने लगे कि आखिर लिफाफे में है क्या ? मिश्रा जी ने लिफाफा  खोला तो पाया अंदर एक छोटी शीशी और खत है। मिश्रा जी ने शीशी निकालकर देखी लेकिन उन्हें कुछ समझ नहीं आया।

“अरे शीशी का देख रहे है उह्ह्ह खत पढ़िए ना”,आदर्श फूफा ने बेचैनी भरे स्वर में कहा
मिश्रा जी ने गर्दन घुमाकर आदर्श फूफा को देखा और कहा,”अरे आप अभी तक गए नाही ?”
“हाँ हाँ बस जा ही रहे है”,आदर्श फूफा ने कहा लेकिन वही जमे रहे। मिश्रा जी भी समझ गए कि आदर्श फूफा नहीं जायेंगे इसलिए हाथ में पकड़ी शीशी आदर्श फूफा को दी और खुद वही खड़े होकर खत को खोलकर पढ़ने लगे।
“प्रिय लवली !

हमहू जानते है तुम अपनी नयी दुनिया मा खुस हो पर उह्ह दुनिया का का जोन हमहू तुम्हाये साथ बसाने के सपने देखे रहे। कानपूर जानकर तुमहू हमे भूल जाओगे जे हम कबो नाही सोचे थे। अरे बापू ने तुम्हरे साथ जो किया उह्ह्ह मा हमायी का गलती थी ? हमने तो तुम्हे पुरे सच्चे मन से प्रेम किया फिर भी तुम हमे हिया अकेली छोड़कर चले गए। कल हमायी शादी है ,बापू ने हमाओ ब्याह उह्ह्ह लल्लन के साले के लड़के से तय किया है।

हमे जे ब्याह नहीं करनो है लवली , तुम हिया आओ और हमे ले जाओ ,, आखरी फेरा तक हमहू तुमहाओ इंतजार करि है अगर ओह्ह्ह के बाद भी तुमहू ना आही हो तो जोन शीशी तुम्हे भेजे है वही शीशी हमाये पास भी है ओह्ह्ह का पीकर हमहू अपनी जान दे देंगे। तुम्हाये इन इन्तजार मा तुम्हायी बिंदिया”

मिश्रा जी ने जैसे ही खत पढ़ा चिंता के भाव उनके चेहरे पर झिलमिलाने लगे। आदर्श फूफा तब तक हाथ में पकड़ी शीशी का ढक्कन खोल चुके थे और जैसे ही उसे चखने के लिए मुँह की तरफ बढ़ाया मिश्रा जी ने जल्दी से हाथ मारकर उसे गिराया और कहा,”का भूखे नंगे खानदान से हो का आदर्श बाबू ?
शीशी नीचे जा गिरी और टूट गयी। आदर्श बाबू ने देखा तो कहा,”अरे हम तो बस चखकर देख रहे थे”

“चख लिए होते ना तो दुइ दिन बाद हुआ अम्मा की तस्वीर के साथ आपकी तस्वीर पर भी हार चढ़ा होता,,,,,,,,,,,,गुड़ और गोबर मा अंतर होता है का इत्ता भी नाही जानते,,,,,,,,,,,जो हाथ आया चखने लगे”,मिश्रा जी ने चिढ़े हुए स्वर में कहा
“उह्ह्ह सब छोडो इह बताओ जे लवली और बिंदिया का का चक्कर है ?”,आदर्श फूफा ने पूछा
मिश्रा जी सुबह आदर्श फूफा के साथ हुई अपनी बहस भूल गए और कहा,”चक्कर नाही है दोनों एक दूसरे से प्रेम करते है,,,,,,,,,,!!!”

“पर जे खत मा तो लिखा है कि ओह्ह्ह का ब्याह लल्लन के साले के लौंडे से हो रहा है,,,,,,,,,जे तो लवली के साथ अन्याय हुआ ना ?”,आदर्श फूफा ने कहा
“आप कब से न्याय अन्याय की बाते करने लगे आदर्श बाबू ? अपनी बारी भूल गए”,मिश्रा जी ने आदर्श फूफा को घूरकर कहा
 “अरे उह्ह्ह सब छोडो मिश्रा उह्ह्ह सब तो चलता रहता है , अभी लवली के बारे में सोचो आपको नाही लगता आपको लवली के लिए कुछो करना चाहिए”,आदर्श फूफा ने कहा

“हमहू का कर सकते है आदर्श बाबू ? बिंदिया मंगेश की बिटिया है उह्ह जहा चाहे वहा अपनी बिटिया का ब्याह करे हम और आप कौन होते है जे ब्याह रोकने वाले ?”,मिश्रा जी ने पल्ला झाड़ते हुए कहा
“वाह मिश्रा जी वाह ! आप से जे उम्मीद ना किये थे हम ,अरे जे खत मा साफ़ साफ़ लिखा तो है कि उह्ह्ह बिंदिया लवली से प्रेम करती है और अगर ओह्ह्ह की शादी लवली से नाही हुई तो उह्ह्ह अपनी जान दे देगी,,,,,,,,,,,,लिखा है न ?”,आदर्श फूफा ने कहा

“हाँ लिखा तो है,,,,,,,,,,!!!”,मिश्रा जी ने उलझनभरे स्वर में कहा
“अरे तो फिर ज़रा सोचो , उह्ह्ह जान किसके लिए देगी ? लवली के लिए और लवली कौन है ? लवली आपका बेटा है तो जब पुलिस को इह बात पता चली है तो पुलिस कहा आयी है ? हिया आपके घर मा ,, गिरफ्तार किसे करि है ? आपको मिश्रा जी आपको ,, इहलीये हमहू कह रहे है ,,,,,,,,,,!!!”,आदर्श फूफा ने कहा
“का कह रहे है आदर्श बाबू ?”,पहली बार मिश्रा जी ने आदर्श फूफा की बातो में आकर कहा

“जे खत को फाड़कर फेंको और चलो चकिया इह सादी रोकने वरना कही उह्ह्ह बिंदिया कही सच मा जहर खाकर अपनी जान ना दे दे”,आदर्श फूफा ने कहा
मिश्रा जी सोच में पड़ गये। आदर्श फूफा जो कह रहे थे वो एक हद तक सही भी था लेकिन चकिया जाकर बिंदिया की शादी रोकना मिश्रा जी को ठीक नहीं लग रहा था उस पर खत फाड़ने की बात सुनकर मिश्रा जी ने कहा,”खत काहे फाड़ दे ?”

“अरे गलती से अगर जे खत लवली के हाथ लग गया और उह्ह चकिया पहुंच गया तो हुआ तमाशा होना पक्का है ,पर साला हमे जे ना समझ आ रहो कि उह्ह्ह मंगेशवा जो हवालात से निकाला कौन ?”,आदर्श फूफा ने कहा
“हम निकाले”,मिश्रा जी ने शांत स्वर में कहा
आदर्श फूफा ने सुना तो गिरते गिरते बचे और हैरानी से मिश्रा जी को देखने लगे।

मनोज का घर , चकिया  
खाना खाकर गुड्डू को थोड़ा आराम मिला मनोज ने उसे घर से बाहर निकलने को कहा था इसलिए गुड्डू बिस्तर पर आ लेटा और मस्त अपने फोन में रील्स देखने लगा। कुछ देर बाद उसका फोन बजा स्क्रीन पर लवली का नाम देखकर गुड्डू ने फोन उठाया और कान से लगाकर खुशीभरे स्वर में कहा,”हाँ लवली भैया”
“गुड्डू चकिया पहुंचे तुमहू ?”,लवली ने बेचैनी भरे स्वर में पूछा
“हाँ पहुंच भी गए और चाय नाश्ता भी कर लिया ,अभी बस थोड़ा लेटकर फोन चलाय रहे है”,गुड्डू ने कहा

लवली ने सुना तो उसके चेहरे पर खिज के भाव झिलमिलाने लगे और उसने चिढ़कर कहा,”तुमहू का अपने ससुराल मा गए हो जो चाय नाश्ता करके आराम फरमा रहे हो,,,,,,,,,,,,अबे बिंदिया से मिले कि नाही ?”
लवली की एक फटकार से गुड्डू उठ बैठा और मासूमियत से कहा,”बिंदिया भाभी से तो नाही मिले”

लवली का मन हुआ गुड्डू सामने हो तो उसको दो तीन मुक्के जड़ दे लेकिन बेचारा मजबूर था इसलिए अपने गुस्से को निगल कर कहा,”हमहू तुमको वहा इह वास्ते ही तो भेजे रहे ना गुड्डू , मनोज के घर से दुइ घर छोड़ के बिंदिया का घर है जाओ जाकर मिलो ओह्ह्ह से और पता करो हुआ का चल रहा है ,हमे बहुते टेंशन हो रही है गुड्डू”

“अरे लवली भैया ! टेंशन नाही ल्यो हमहू है ना ,हम अभी जाते है और बिंदिया भाभी से आपकी बात करवाते है,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने कहा और फोन काट दिया। उधर कानपूर में लवली फोन कट जाने के बाद खुद में ही बड़बड़ाया,”साला तुम हो जे ही बात की तो टेंशन है , बस महादेव जे गुड्डू गोलू की जोड़ी हुआ कोनो काण्ड ना करे ,बस इह बार सम्हाल लेना”

लवली से बात करने के बाद गुड्डू उठा और कमरे से बाहर आकर देखा मनोज कही नजर नहीं आ रहा और अगर नजर आ भी जाता तो वह गुड्डू को बाहर जाने नहीं देता इसलिए गुड्डू दबे पॉंव पीछे के दरवाजे से निकल गया। अब जैसा कि लवली ने कहा था मनोज के घर से दुइ घर आगे बिंदिया का घर है लेकिन किस दिशा में ये लवली ने बताया नहीं था इसलिए गुड्डू उलटी दिशा में चला गया और दो घर छोड़कर तीसरे घर की दिवार पर जैसे ही चढ़ा उसका पैर फिसला और वो घर के आँगन में जा गिरा। गनीमत था कि घर में कोई नहीं था

वह मारे दर्द के अपनी कमर पकड़कर उठा और देखा घर पूरा सुनसान। घर खाली देखकर लवली खुद में ही बड़बड़ाया,”जे घर के सब लोग कहा गए ? कही बिंदिया भाभी का ब्याह हुई तो नाही गवा ?”
गुड्डू ने एक बार फिर इधर उधर देखा और कहा,”अरे नाही नहीं ब्याह हुआ होता तो घर में एक दो मेहमान तो दिखाई पडते और फिर टेंट और रौशनी लड़िया भी तो नजर नाही आ रही। लगता है हमहू गलत घर मा आ गए है,,,,,,,,,,,,,,,!!

खुद से ही बातें करके लवली ने इधर उधर देखा और धीरे धीरे घर के दरवाजे के पास चला आया। उसने दरवाजा खोला और बाहर निकल गया। बाहर आकर गुड्डू की नजर पड़ी कुछ ही दूर बने घर पर जहा काफी चहल पहल थी और गाने बज रहे थे।
“ल्यो ! लवली भैया का ससुराल तो हुआ रहे और हम हिया चले आये,,,,,,,,,चलकर देखते है का हो रहा है ? वैसे भी कोई का ही बिगाड़ लेगा हमारा कौनसा हम लवली है,,,,,,,,,!!!”,कहते हुए गुड्डू आगे बढ़ गया

बिंदिया का घर मिल जाने की ख़ुशी में गुड्डू ये भुल गया कि वह लवली नहीं है लेकिन दिखता तो उसके जैसा ही है। गुड्डू ख़ुशी ख़ुशी बिंदिया के घर की तरफ बढ़ गया। मंगेश ने लवली के लिए आदमी पहले से बैठा रखे थे और उन्होंने जब गुड्डू को देखा तो लवली समझकर एक ने कहा,”भैया ! उह्ह रहा लवली”
“अबे तो देख का रहो है जाकर बोरा लेकर आ तब तक हमहू रोकते है ओह्ह्ह का”,आदमी ने कहा और साथ वाले को बोरा लेने भेजकर खुद गुड्डू की तरफ चला आया और उसके बगल में चलने लगा।

अपने बगल में एक अनजान आदमी को देखकर गुड्डू थोड़ा सा चौंका और फिर आदमी की तरफ देखा तो आदमी गुड्डू को देखकर धीरे से मुस्कुराया। जवाब में गुड्डू भी धीरे से मुस्कुरा दिया। गुड्डू को मुस्कुराते देखकर आदमी फिर मुस्कुराया तो गुड्डू की मुस्कान गायब हो गयी और वह सामने देखते हुए चलने लगा।
“मेहमान हो ?”,आदमी ने गुड्डू से पूछा
“हाँ ! उह्ह्ह सामने वाले घर मा आये है,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने कहा

“जे साला लवली ऐसे काहे बर्ताव कर रहा है जैसे हमको पहिले कबो देखा नाही हो”,आदमी मन ही मन बड़बड़ाया और फिर गुड्डू से कहा,”अच्छा अच्छा ! हमहू भी वही जा रहे है”
“हाँ तो चले जाओ,,,,,,,,,,हम का तुम्हायी लुगाई है जो हमाओ पल्लू पकड़ के जाओगे ?”,गुड्डू ने एकदम से उखड़े स्वर में कहा
“हहहहहह अरे का भैया आप तो बहुते मजाकिया किस्म के आदमी है , बहुते अच्छा मजाक करते है आप”,आदमी ने गुड्डू से चिपककर कहा

“हमहू मारते भी बहुते अच्छा है,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने आदमी को घूरकर कहा तो आदमी दूर होकर फिर गुड्डू के साथ चलने लगा
दोनों इतना धीरे चल रहे थे कि बिंदिया का घर अभी भी दो घर आगे था। गुड्डू इसलिए धीरे चल रहा था कि कोई उसे देख ना ले और आदमी इसलिए धीरे चल रहा था ताकि गुड्डू को धर सके।
“भैया जे ल्यो बोरा”,आदमी के साथ वाले आदमी ने एक छोटा बोरा लाकर आदमी को दिया  

गुड्डू ने हैरानी से आदमी को देखा ,गुड्डू सच ना जान जाये सोचकर आदमी ने गुड्डू की तरफ देखा और झेंपते हुए कहा,”बोरा नाही कटोरा कटोरा लाने को कहे रहे ,,,,,,,,!!!”
इत्तो बड़ो आदमी कटोरा मा कैसे आवेगो ?”,आदमी के साथ ने दबे स्वर में कहा
आदमी ने साथ को एक चपत मारी और दबे स्वर में कहा,”अबे हमहू तुमको बड़ा बोरा लाने को कहे थे जे छोटा वाले मा का डाले जे का कच्छी बनियान ,जाकर बड़ा बोरा लेकर आओ तब तक हम इसे बातो मा लगाते है”

आदमी का साथी वहा से चला गया। आदमी फिर गुड्डू के साथ साथ चलने लगा और कहा,”वैसे का लगते हो आप मंगेश भैया के ?”
“रिश्तेदार लगते है,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने कहा
“अरे उह्ह्ह तो हम भी लगते है पर कौनसे रिश्तेदार ?”,आदमी तो जैसे गुड्डू के पीछे ही पड़ गया था
“दूर के रिश्तेदार”,गुड्डू ने भी पीछा छुड़ाने के लिए कहा
“कित्ता दूर के ?”,आदमी ने कहा

गुड्डू रुका और आदमी की तरफ देखकर कहा,”अबे का बौड़म हो का ? कित्ता दूर का होता है दूर का रिश्तेदार दूर का रिश्तेदार होता है बस,,,,,,,,,,अब का इंचटेप लेकर नापने बैठे”
“अरे अरे भैया आप तो गुस्सा हो गए थे हम तो बस ऐसे ही,,,,,,,,!!!”,कहते हुए आदमी ने दूसरी तरफ देखा तो पाया उसका साथ खाली हाथ खड़ा है।

“बोरा लाये ?”,आदमी ने दबे स्वर मे साथी से पूछा
“बड़ा बोरा नही मिला,,,,,,,,!!!”,साथी ने मायूसी भरे स्वर मे कहा
“तो अब का जे का जेब मा डालकर ले जाए ?”,आदमी झल्लाया
“लेकिन किसे ? हिया तो सिर्फ मैं और आप है”,साथी ने कहा

आदमी ने अपने बगल में देखा तो पाया कि गुड्डू वहा नहीं है गायब हो चुका है ये देखकर आदमी ने गुस्से से अपने साथी की कॉलर पकड़ी और कहा,”तुम्हरी वजह से उह्ह्ह भाग गवा,,,,,,,,,,,अब उह्ह्ह मंगेश भैया को पता चला कि लवली हिया है और हम उसे पकड़ नाही पाए तो उह्ह्ह हमे नाही छोड़ेगा”

“अरे भैया लेकिन मंगेश भैया को बयाना क्यों है ? पहिले हम उह्ह्ह लवली को ढूंढते है जैसे ही मिला धर लेंगे ससुरे को और फिर सीधा मंगेश के सामने लाकर पटक देंगे,,,,,,,,,,,सही है न”,साथी ने कहा
“बात ठीक कहे तुम ,चलो ओह्ह्ह का ढूंढते है उह्ह यही कही आसपास होगा”,आदमी ने कहा और अपने साथी को लेकर आगे बढ़ गया।

गुड्डू गायब नहीं हुआ था बल्कि पास वाले घर के बगल में बनी नल के नीचे अपना पैर साफ कर रहा था जो चलते चलते गोबर में भर गया था।  

मंगल फूफा और गोलू को पीछे बैठाकर रवि ने लोकेशन देखकर गलत दिशा में जो गाड़ी भगाई तो भगाते ही चला गया। वे तीनो चंदौली से भी 20 किलोमीटर आगे  निकल गए और गाड़ी जाकर रुकी नदी किनारे , गाडी नदी में भी उतर जाती अगर रवि ने समय पर ब्रेक नहीं मारा होता। अचानक ब्रेक लगने से पीछे बैठे मंगल फूफा के हाथ से दरवाजा छूटकर ना जाने कहा गिरा और मंगल फूफा गोलू के साथ आगे गाड़ी के डेशबोर्ड पर
गोलू ने उलटा गिरे गिरे रवि को देखा और कहा,”का बे रविवा ! पहिले का हवाई जहाज चलाते थे ?”

रवि ने गोलू और मंगल फूफा को पीछे किया और कहा,”गोलू भैया ! लगता है हम लोग गलत जगह आ गए है”
“अबे बाटसप्प पर आयी लोकेशन गलत होय नाही सकती,,,,,,,,,,,,!!!”,कहते हुए गोलू गाडी से नीचे उतरा और जैसे ही अंगड़ाई ली जोर से चिल्लाया,”अबे रविवा ! गलत जगह नाही बे इह तो श्मशान है”
मंगल फूफा ने सुना तो बेहोश होकर पिछली सीट पर आ गिरे क्योकि उन्हें भूतो के नाम से भी डर लगता था।

( मिश्रा जी ने मंगेश को जेल से बाहर क्यों निकाला ? क्या गुड्डू को लवली समझकर पकड़ पाएंगे मंगेश के आदमी ? क्या गोलू मंगल फूफा और रवि पहुंच पाएंगे चकिया या फंस जायेंगे आज की रात इसी श्मशान में ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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