Manmarjiyan Season 4 – 50
अचानक आये फोन ने गुड्डू के चेहरे का रंग उड़ गया उसने फोन जेब में रखा और उठकर जल्दी में वहा से चला गया। गोलू ने गुड्डू को परेशान देखा तो उसके पीछे जाते हुए कहा,”अरे गुड्डू भैया ! का हुआ , कहा जा रहे हो ?”
घर से बाहर आकर गुड्डू बाइक पर आ बैठा और जैसे ही बाइक स्टार्ट की गोलू उसके पीछे आ बैठा और कहा,”अरे का हुआ गुड्डू भैया , इत्ता घई मा कहा जा रहे है ?”
“बहुते बड़ा कांड हुई गवा गोलू”,गुड्डू ने बाइक आगे बढ़ाते हुए कहा
“कांड हुआ है ? अरे आप और हम तो हिया है”,पीछे बैठे गोलू ने कहा
गुड्डू ने सुना तो गर्दन घुमाकर गोलू को घुरा और कहा,”हम करने कर्म जाते है लेकिन उह्ह काण्ड मा बदल जाता है और कानपूर मा हमाये अलावा भी बहुते लोग है जोन हाथो मा चरस लेकर घूमते है,,,,,,,अब चुपचाप पीछे बैठो वरना यही उतार देंगे”
गुड्डू को चिढ़ा हुआ देखकर गोलू ने चुप रहना ही बेहतर समझा और चुपचाप पीछे बैठा रहा।
गुड्डू गोलू को साथ लेकर सोनू भैया के ऑफिस फंक्शन की लोकेशन पर पहुंचा। बाइक से उतरकर गुड्डू अंदर आया और अंदर का नजारा देखकर उसने अपना सर पकड़ा और वही जमीन पर बैठ गया।
गोलू ने देखा तो उसका मुँह खुला का खुला रह गया , उसने अपनी आँखों को दो चार बार मसला जैसे बेचारा कोई सपना देख रहा हो लेकिन सच वही था जो गुड्डू और गोलू ने देखा। बीती शाम सोनू भैया के ऑफिस पार्टी का जो अरेंजमेंट गुड्डू ने किया था वो सब बर्बाद हो चुका था। टेंट फट चुका था , डेकोरेशन का सामान मिट्टी में पड़ा था , रंगीन लाईटे यहाँ वहा झूल रही थी आधी जल रही थी आधी दम तोड़ चुकी थी।
गुड्डू का तो ये सब देखकर ही सर चकराने लगा था। दादी के गुजरने के बाद ये दो ही तो आर्डर मिले थे उसे और इनका भी सत्यानाश हो चुका था। गुड्डू अपना सर पकडे बैठा था कि गोलू ने उसके पास आकर कहा,”गुड्डू भैया जे सब कैसे हुआ और अब का होगा ?”
“होना का है , बत्ती बनेगी हमायी और तुम्हायी और हमाये सपने की,,,,,,,,अगले हफ्ते कानपूर मा जो आर्डर लिए है उह्ह कैसे पूरा करेंगे ?”,गुड्डू ने रोआँसा होकर कहा
“अरे भैया उसकी चिंता आप ना करो हम है ना हम कुछो जुगाड़ लगा लेंगे लेकिन आप भी कमाल करते है किसके भरोसे कल का फंक्शन छोड़कर घर आये,,,,,शराब हमने पी थी आपने तो नाही पी थी न फिर काहे लड़को के भरोसे सब छोड़कर चले गए ?”,गोलू ने पहले प्यार से और फिर गुड्डू पर गुस्सा करके कहा
“अरे लड़को के भरोसे कहा छोड़ा था गोलू ? सोनू भैया कहे रहय हम से कि तुम जाओ गुड्डू हम देख लेंगे”,गुड्डू ने लगभग रोते हुए कहा
“हाँ तो उह्ह्ह आपके देखने वाले कही दिखाई काहे नाही दे रहे ?”,गोलू ने खीजकर कहा
“अरे हम यहाँ है गोलू”,सोनू भैया की लड़खड़ाती आवाज गोलू के कानो में पड़ी , गोलू ने इधर उधर देखा लेकिन सोनू भैया उसे कही दिखाई नहीं दिए।
वह जैसे ही गुड्डू की तरफ पलटा कुछ दूर कचरे के ढेर में उसे हलचल दिखी। गोलू गुड्डू को वही छोड़कर कचरे के पास आया और उसे साइड करके देखा तो मुँह के बल गिरे सोनू भैया पर उसकी नजर पड़ी
“अरे सोनू भैया ! आप हिया का कर रहे है ?”,गोलू ने हैरानी से कहा
“गुड्डू हमने पूरा ध्यान रखा तुम्हरे टेंट का लेकिन उह्ह्ह साला गेस्ट हॉउस का मालिक उह्ह्ह,,,,,,,,,,,,,!!!”,सोनू भैया नशे में बड़बड़ाये ,
उन्हें इतना भी होश नहीं था कि उनके सामने गुड्डू खड़ा है या गोलू ,, गोलू ने सुना तो अपनी नाक पर हाथ रखा क्योकि कचरे से बहुत ही गन्दी बदबू आ रही थी और उस से भी ज्यादा गन्दी बदबू आ रही थी सोनू भैया के अंदर से , उसने दूसरे हाथ से सोनू भैया की कोलर पकड़कर उन्हें उठाया और साइड में लाते हुए कहा,”जब बर्दास्त नाही होती तो इत्ती पीते काहे हो ?”
“अरे कौन कम्बख्त बर्दास्त करने को पीता है , हम तो पीते है ताकि घर ना जाना पड़े , ताकि उनको ना झेलना पड़े,,,,,,,,बहुत ताने मारती है यार”,कहते हुए सोनू भैया लगभग रो पड़े
“अरे कौन ?”,गोलू ने कहा
“अरे तुम्हायी भाभी गोलू , दिन रात हमको ताने मारती है , करेला टिंडे लौकी खाकर जबान करेले जैसी हो गयी है। हम कह रहे है गोलू भाई रंडवे मर जाना पर कबो सादी नाही करना,,,,,,,,आदमी के जीवन की सबसे बड़ी समस्या ही साला जे सादी है,,,,,,,,,,!!”,सोनू भैया ने लड़खड़ाते हुए कहा
“हाँ तो जे ज्ञान अब दे रहे हो , 6 महीना पहिले दिए होते तो विचार करते आपकी बात पर,,,,,,,,अब तो कल्याण हुई गओ हमाओ”,गोलू ने खीजकर कहा और सोनू भैया को गुड्डू के सामने ले आया
“सोनू भैया ! इह सब का है ? अरे हमहू आपको हिया ध्यान रखने को कहे रहे और आप खुद ही पीकर भंड हुए पड़े है,,,,,,,,,और हमाओ टेंट , हमाओ टेंट सब बर्बाद कर देओ”,गुड्डू ने रोआँसा होकर सोनू भैया से कहा
सोनू भैया का नशा जैसे जैसे उतर रहा था वैसे वैसे उन्हें याद आया कि कल गुड्डू के घर जाने के बाद कैसे उन्होंने नशे की हालत में रिसोर्ट के मालिक के साथ मिलकर तमाशा किया था।
सोनू भैया ने शराब के नशे में तेश में आकर रिसोर्ट का सामान तोडा तो रिसोर्ट के मालिक ने बदले में गुड्डू के टेंट को बर्बाद कर दिया। सोनू भैया ने सारी बात गुड्डू को बताई तो गुड्डू अपना सर पकड़कर बैठ गया और रोने लगा। गोलू ने सुना तो सोनू भैया को देखकर घूरने लगा
गोलू गुड्डू के पास आया और कहा,”भैया ! गुड्डू भैया , हौंसला रखिये”
गुड्डू ने गोलू को साइड में धक्का दिया और झुंझलाकर कहा,”हमहू रख रहे है तुमहू निकलो हिया से,,,,,,!!!”
“अरे अब हम का किये ?”,गोलू ने खीजकर कहा
“का किये ? तुमहू कल रात दारू पीकर भंड नहीं ना हुए होते तो ना तो सोनू भैया के भरोसे अपना काम छोडते ना जे सब होता , हमयी कुंडली मा शनि , राहू , केतु सब तुम्ही बन कर बैठे हो,,,,,,,,तुम साले रायता फेलाओ और हमहू ओह्ह्ह का समेटते रहे,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने गुस्से से लगभग गोलू पर चढ़ते हुए कहा
“अरे तो ठीक है ना भैया , हो गयी गलती और आप काहे इत्ता चिन्तिया रहे है हम है ना हम करते है कुछो”,गोलू ने गुड्डू से बचकर साइड होते हुए कहा
“का कर लोगे तुम , नहीं का कर लोगे तुम ! सुई धागा लेकर खुद सिलने बैठोगे जे टेंट को ?”,गुड्डू ने गुस्से से उबलकर कहा
“अरे गुड्डू भैया काहे अपना बीपी बढ़ा रहे है हम है ना हम कर लेंगे आप शांत हो जाईये,,,,,,,,,,,,और साले तुम सोनू,,,,,,,भैया”,गोलू ने गुड्डू से कहा और गुस्से से सोनू का नाम लेकर उसकी तरफ पलटा मारे घबराहट के उसके मुँह से भैया भी निकल गया क्योकि सोनू भैया हाथ में पत्थर लेकर खड़े थे और गुस्से से गोलू को ही देख रहे थे।
गोलू का गुस्सा पलभर में गायब हो गया और उसने सोनू भैया के हाथ से पत्थर लेकर साइड में फेंकते हुए कहा,”अरे अरे सोनू भैया जे का कर रहे हो ? जे सब हम कर लेंगे आप एक ठो काम करो सीधा निकलो घर”
“घर , लेकिन हम घर कैसे जायेंगे गोलू ?”,सोनू भैया ने रोआँसा होकर कहा
गुड्डू गुस्से में खड़ा अपना फटा हुआ टेंट देख ही रहा था कि उसका फोन बजा। गुड्डू ने फोन निकाला और उठाकर कान से लगाकर झुंझलाहट भरे स्वर में कहा,”कौन बोल रहा है बे ?”
“तुम्हाये बाप बोल रहे है,,,,,,,रंगबाजी करने के लिए तुमको आज ही का दिन मिला था ? हिया शगुन के सब घरवाले तुम्हरे बारे मा पूछ रहे है तुमहू कहा हमायी छीछा लेदर करवाय रहो,,,!!!”,फोन के दूसरी तरफ से मिश्रा जी की कड़कदार आवाज गुड्डू के कानो में पड़ी
“पिताजी हम,,,,,,,!!”,गुड्डू ने मिमियाकर कहा लेकिन मिश्रा जी ने उसकी बात सुनी भी नहीं और कहा,”जहा भी हो तुरंत घर पहुंचो वरना वेदिया की शादी के साथ साथ तुम्हरी कुटाई का मुहूर्त भी निकलवा लेंगे केशव पंडित से,,,,,,,,!!!”
“आते है पिताजी,,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने कहा और फोन काटकर जेब में रख लिया।
गुड्डू फोन जेब में रखकर गोलू की तरफ पलटा और कहा,”हिया तुम दोनों ने चरस बो रखी है हुआ पिताजी हमायी बत्ती बनाने पर तुले है। हमहू जा रहे है घर तुम जे सब समेटो और जे टेंट का कपडा लेकर जाओ नवरत्न के पास,,,,,,,,!!!”
“और जे सोनू भैया का करे ?”,गोलू ने अपना सर खुजाते हुए कहा
“इनकी घरवाली को बताते है इनकी हरकत खुद ही लेकर जायेगी घर,,,,,!!”,गुड्डू ने कहा
“अरे गुड्डू भैया आप काहे परेशान होते है , हमाये पास है ना भाभी का नंबर,,,,हमहू फोन करके बुला लेंगे”,गोलू ने अपना फोन जेब से निकालकर कहा
गुड्डू ने सुना तो उसकी बाँयी भंव चढ़ गयी और उसने गोलू को घूरकर देखते हुए कहा,”मोहल्ले की भाभियो के नंबर तुम काहे रखे हो बे ? लक्षण कुछो ठीक नाही लग रहे तुम्हाये गोलू गुप्ता”
गोलू ने सुना तो खिंसियकर कहा,”अरे का गुड्डू भैया ! भाभी माँ समान होती है का कुछ भी कह रहे है आप , आप जाईये हिया हम सम्हालते है”,गोलू ने कहा
गुड्डू ने बाइक स्टार्ट की और जैसे ही जाने लगा सोने भैया उसके पीछे आ बैठे और गुड्डू की कमर को अपनी बाँहो में लपेटा और अपना गाल गुड्डू की पीठ से लगाकर कहा,”गुड्डू ! हमको भी घर छोड़ दयो ना बऊआ”
“गुड्डू भैया ले जाईये हिया रहेंगे तो हमाओ काम और फैला देहि है”,गोलू ने कहा
गुड्डू सोनू भैया को अपने साथ लेकर वहा से निकल गया
मिश्रा जी का घर , कानपूर
वेदी का रिश्ता अमन से तय हो चुका था और पंडित जी ने शादी की तारीख भी निकाल दी जो कि 3 महीने बाद की थी। सभी घरवाले बहुत खुश थे। अमन , रोहन और लवली खाने के लिए साथ बैठे थे और गुड्डू के आने का इंतजार कर रहे थे। आँगन की सीढ़ियों पर खड़े मिश्रा जी गुड्डू का इंतजार कर रहे थे साथ ही उन्हें गुड्डू पर गुस्सा भी आ रहा था कि बिना बताये वह एकदम से कहा चला जाता है ?
सोनू भैया को उनके घर के सामने छोड़कर गुड्डू जल्दी जल्दी अपने घर आया लेकिन जैसे ही सीढ़ियों पर मिश्रा जी को देखा तो उसके कदम ठिठके। मिश्रा जी को गुस्से में देखकर गुड्डू की जान हलक में अटक गयी वह धीरे धीरे चलकर मिश्रा जी के सामने आया और कहा,”पिताजी ! हम वो,,,,,,,,,!!!”
“आज के दिन भी बाहिर जाना जरुरी था गुड्डू ? अंदर सब तुम्हरा इंतजार कर रहे है चलो चलकर खाना खाओ”,मिश्रा जी ने दबी आवाज में गुस्से से कहा
गुड्डू सर झुकाकर चुपचाप अंदर जाने लगा तो मिश्रा जी ने उसके पीछे आते हुए कहा,”और उह्ह्ह एक और नमूना कहा है ?”
“उह्ह्ह टेंट सिलवाने गया है”,गुड्डू ने कहा
“सिलवाने गया है , तो पहिले फाड़ा काहे ?”,मिश्रा जी ने गुड्डू के पीछे आते हुए कहा
गुड्डू चलते चलते रुका और अपने टेंट की हालत के बारे में सोचकर मन ही मन कहा,”इह सीजन मा सिर्फ टेंट ही नाही पिताजी बहुते कुछ फटने वाला है”
गुड्डू की तरफ से कोई जवाब ना पाकर मिश्रा जी गुप्ता जी की तरफ चले गए और गुड्डू अपने होने वाले जीजा के साथ खाना खाने के लिए आ बैठा।
गोलू ने रवि और दूकान पर काम करने वाले लड़को को फोन करके वहा बुलाया और सब सामान इकट्ठा किया। जो टूट चुका था या जिसे मरम्मत की जरूरत थी उसे एक गाड़ी में डाला और बाकि सही सलामत बचे हुए सामान को दूसरी गाड़ी में , अब बच रहा था टेंट जो की फट चुका था और उसका सिलना जरुरी था। गुड्डू ने रवि की मदद से उसे समेटा और रवि से कहा,”तुमहू किस से आये हो ?”
“हमहू तो हिया अपनी लूना से आये है”,रवि ने कहा
“बहुत अच्छे ! तो अपनी लूना को हिया लेकर आओ और जे टेंट लेकर हमरे साथ नवरत्न के पास चलो”,गोलू ने फ़टे टेंट के कपडे को अपनी बाँहो में उठाकर कहा
“अब जे नवरत्न कौन है ?”,रवि ने कहा
“जे समझ ल्यो जे कहानी का बहुते बड़ा कैरेक्टर है , अरे उह्ह नहीं होता तो ना गुड्डू भैया की सादी का सूट सिलता ना ही हमायी सादी की शेरवानी,,,,,,,,चलो रास्ता मा बताते है ओह्ह्ह की कहानी”,गोलू ने कहा
रवि अपनी लूना ले आया और गोलू को साथ लेकर निकल पड़ा
रास्तेभर गोलू रवि को नवरत्न से जुड़े अपने और गुड्डू के किस्से सुनाता रहा जिन्हे सुनकर रवि को तो बड़ा मजा आ रहा था उसने लूना चलाते हुए कहा,”एक ठो बात बताये गोलू भैया,,,,,,,,,,!!!”
“हाँ बताओ रवि”,पीछे बैठे गोलू ने कहा
“बचपन में ना हमे भी उह्ह्ह सादी वाला सूट पहिनने का बहुते शोक था , जब भी कोनो सादी होती थी ना हमहू पिताजी की सादी वाला सूट चुपके से पहिनकर चले जाते थे,,,,,,,,,!!!”,रवि ने अपना किस्सा सुनाया
“सादी से याद आया तुमहू अब तक सादी काहे नाही किये बे ?”,गोलू ने एकदम से कहा
“आपको और गुड्डू भैया को देख लिए ना भैया बस हमको समझ आ गवा जिंदगी का असली मजा अकेले रहने मा है,,,,,,,,,!!!”,रवि ने कहा
“एक ठो काम करो ना धोबा भरकर नमक हमाये जख्मो पर सीधा ही मार दयो,,,,,,,,जे बातो बातो मा ताना मारने की का जरूरत है ?”,गोलू ने चिढ़कर कहा
“अरे सॉरी भैया हमहू तो बस एग्जाम्पल दे रहे थे”,रवि ने कहा
शादी के नाम से ही गोलू का अच्छा खासा मूड खराब हो गया और उसने कहा,”जे लूना को बेचकर एक ठो साइकिल लेइ ल्यो कम से कम टाइम से पहुंचा देहि है कही”
रवि ने सुना स्पीड थोड़ी बढ़ा दी और गोलू को लेकर आगे बढ़ गया।
नवरत्न घर के बाहर बनी अपनी दुकान में बैठकर किसी की शादी का कोई बढ़िया सूट सिल रहा था। रवि की लूना दुकान के बाहर आकर रुकी। गोलू नीचे उतरा और टेंट नवरत्न की सिलाई मशीन के फट्टे पर डालकर कहा,”ल्यो पहिले जे सिलो”
नवरत्न ने देखा कि गोलू टेंट का कोई कपड़ा लेकर आया है तो उसने कहा,”अरे का रे गोलू ! अबे हमहू सादी का कपड़ा सिलते है भैया जे सब नाही,,,,,,,,!!!”
“हाँ तो जे भी तो सादी मा ही लगता है और सिल दो का पता अगली बार तुम्हरी शादी मा ही लगाने के काम आ जाये”,गोलू ने कहा
“अरे लेकिन हमहू टेंट का कपड़ा नाही सिलते हमायी मशीन मानेगी ही नाही , तुम कहो तो कुछो और सिल दे ?”,नवरत्न ने कहा
गोलू ने सुना तो मायूस होकर कहा,”फ़िलहाल के लिए जो फटा है उह्ह्ह कुछो और तुमहू नाही सिल पाओगे”
नवरत्न को गोलू की बात समझ नहीं आयी उसने टेंट के कपडे को साइड किया और अपना ध्यान कोट सिलने पर लगा लिया।
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संजना किरोड़ीवाल
अचानक आये फोन ने गुड्डू के चेहरे का रंग उड़ गया उसने फोन जेब में रखा और उठकर जल्दी में वहा से चला गया। गोलू ने गुड्डू को परेशान देखा तो उसके पीछे जाते हुए कहा,”अरे गुड्डू भैया ! का हुआ , कहा जा रहे हो ?”
घर से बाहर आकर गुड्डू बाइक पर आ बैठा और जैसे ही बाइक स्टार्ट की गोलू उसके पीछे आ बैठा और कहा,”अरे का हुआ गुड्डू भैया , इत्ता घई मा कहा जा रहे है ?”
“बहुते बड़ा कांड हुई गवा गोलू”,गुड्डू ने बाइक आगे बढ़ाते हुए कहा
“कांड हुआ है ? अरे आप और हम तो हिया है”,पीछे बैठे गोलू ने कहा
