Manmarjiyan Season 4 – 49
बिंदिया ने जब सुना कि उसके बापू ने लवली को मारने के लिए गुंडे बुलाये है तो वह घबरा गयी। उसने रूपा को लिखकर एक चिट्ठी दी थी जिसे उसने लवली तक पहुंचाने को कहा था। बिंदिया कमरे से बाहर निकलकर घर के पीछे आयी। बगल मे रहने वाली पूनम से कहा,”जरा रूपा को बुलाय दयो”
“अभी बुलाते है दिदिया”,कहकर लड़की वहा से चली गयी। बिंदिया घबराई हुई सी अपने आँचल से बार बार अपना चेहरा पोछ रही थी तभी उसके कानों में मंगेश की आवाज पड़ी,”ए बिंदिया ! हुआ का कर रही हो ?”
बिंदिया ने सुना तो जान हलक में अटक गयी वह जल्दी से वहा से हटी और मंगेश की तरफ आकर घबराये हुए स्वर में कहा,”वो बापू ! हम तो रूपा को बुलाने गए थे उह्ह्ह मेहँदी लगाने वाली थी हमाये,,,,,,,!!!”
मंगेश ने सुना और बिंदिया की तरफ देखा उसके चेहरे पर कठोर भाव थे ये देखकर बिंदिया अंदर ही अंदर और घबरा गयी लेकिन अगले ही पल मंगेश मुस्कुराया और कहा,”अरे वाह बिंदिया इतनी जल्दी अकल आ गयी तुमको , चलो अच्छा है अब ख़ुशी ख़ुशी अपना ब्याह देखो,,,,,,,,,,,जाओ जाओ रूपा को बुलाय ल्यो और मेहँदी लगवाय ल्यो हमहू ज़रा बंदोबस्त देखकर आते है”
कहकर मंगेश वहा से चला गया। बिंदिया ने अपने सीने पर हाथ रखा और राहत की साँस ली अगर वह झूठ नहीं बोलती तो शायद मंगेश को शक हो जाता। मंगेश के जाते ही रूपा वहा चली आयी और बिंदिया के कंधे पर हाथ रखकर कहा,”का बात है काहे बुलाया हमे ?”
बिंदिया ने रूपा को वहा देखा तो उसका हाथ पकड़कर उसे जल्दी से कमरे में लेकर गयी और दरवाजा बंद कर उसके सामने आकर कहा,”रूपा हमने तुम्हे जो कागद दिया था उह्ह्ह कहा है ?”
“उह्ह तो हमने सुबह ही कानपूर वाली बस मा लगवा दिया था”,रूपा ने कहा
बिंदिया ने सुना तो उसके चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये और उसने बेचैनी भरे स्वर में कहा,”रूपा तुम्हाये पास उह्ह्ह बस वाले का नंबर है का ? ओह्ह्ह का फोन करके बोल दयो उह्ह कागद मिश्रा जी के घर मा ना दे”
“काहे , का हुई गवा ? सबेरे तो तुमहू जिद कर रही थी उसे कानपूर भेजने की अब मना कर रही हो”,रूपा ने हैरानी भरे स्वर में कहा
“हम तुम्हे का बताये रूपा अगर उह्ह्ह कागद लवली तक पहुंचा तो बहुते बड़ा अनर्थ हो जाएगा”,बिंदिया ने कहा
रूपा ने बिंदिया को अपनी तरफ किया और उसकी बाँहो को थामकर कहा,”बिंदिया बात का है उह्ह्ह बताओ , काहे इत्ती परेशान हो तुमहू ?”
बिंदिया ने रूपा को लल्लन और अपने बापू की बात बताई तो रूपा भी टेंशन में आ गयी और कहा,”जे तो बहुते गलत हुआ बिंदिया अब अगर तुम्हरा खत पढ़कर लवली हिया आया और तुम्हरे बापू के आदमियों ने ओह्ह्ह का कुछो नुकसान पंहुचा दिया तो जे सब की जिम्मेदार तुमहू रहोगी,,,,,,,,,,,जे तुमने सही नाही किया बिंदिया , लवली की जान को खतरे मा डालने से अच्छा था तुमहू यहाँ से भाग जाती,,,,,,,,,,,!!!”
“कैसे भाग जाए रूपा ? बापू ने हर तरफ हमायी देखभाल के लिए लड़के बैठा रखे है , उह्ह्ह दिन मनोज आय रहा हमाये पास लवली की खबर लेकर तब बापू ने कित्ता मारा था ओह्ह्ह का , ओह्ह्ह के बाद उह्ह्ह भी दोबारा हिया नाही आया। अगर हमहू भाग भी गए तो जे गाँव से बाहिर नाही जा पाएंगे और बापू हमरा गुस्सा अम्मा पर निकालेंगे,,,,,,,,,,,हमहू बुरी तरह से फंस गए है रूपा , हम का करे हमे कुछो समझ नाही आ रहा है ?”,कहते कहते बिंदिया रोने लगी
बिंदिया को रोते देख रूपा उदास हो गयी और उसके बगल में बैठकर उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा,”रो नाही बिंदिया ! तुम्हरे पास लवली भैया का कोनो नंबर है तो बताओ हम फोन करके ओह्ह्ह का खबर कर देते है”
“मेरे पास उसका नंबर नहीं है रूपा मनोज के पास था लेकिन बापू ने उह्ह्ह दिन ओह्ह्ह का फोन भी तोड़ दिया ,अब का होगा रूपा अब का होगा हमे उह्ह्ह लल्लन के रिश्तेदार से सादी नाही करनी है , ऐसा हुआ तो हम अपनी जान दे देंगे”,कहकर बिंदिया फिर रोने लगी
“धत पगली ! जान का इत्ती सस्ती होती है जो दे दोगी और कोनसा तुम्हरा ब्याह ओह्ह के साथ हुई गवा ? हमे तो लगता है उह्ह्ह चिट्टी भेजकर हमने सही किया अब जीतता जल्दी लवली भैया हिया आ जाए उत्ता अच्छा है,,,,,,,,,!!!”,रूपा ने कहा
“और अगर लवली नहीं आया तो ?”,बिंदिया ने आँसुओ से भरी आँखों से रूपा को देखकर कहा
“तो हमरे पास एक ठो तरकीब है ,कल कुछ भी हो जाए तुम्हरा ब्याह उह्ह्ह रीतिकवा के साथ तो नाही होने देंगे हम”,रूपा ने कहा तो बिंदिया उसके गले आ लगी और सिसकने लगी।
“अरे काहे चिंता करती हो बिंदिया ? जोन नसीब मा लिखा है ओह्ह्ह के साथ ही घर संसार बसे है , अब हमे ही देख लो 35 के होने को आये पर आज तक हमरे ब्याह का कुछो अतो पतो नाही ,, न जाने कौन हेगो हमाये नसीब मा,,,,,,,,,,,,,,,,,पर तुमहू चिंता नहीं करो महादेव सब ठीक करि है”,रूपा ने बिंदिया के दुःख की आड़ में अपना दुख भी बया कर दिया।
रूपा बिंदिया की सहेली लेकिन बिंदिया से 8 साल बड़ी ,मांगलिक होने की वजह से अभी तक शादी नही हुई और फिर रूपा ने भी इसी को अपनी किस्मत मान लिया और यही माँ-बाप के घर में रहने लगी। बिंदिया से उसकी खूब अच्छी बनती थी इसलिए दोनों साथ ही घूमती फिरती नजर आती थी।
ड्राइवर सीट पर बैठा गोलू पिछले 2 घंटे से गाड़ी चला रहा था। बगल में मंगल फूफा बैठे ऊंघ रहे थे और पिछली सीट पर बैठा गुड्डू आराम से सो रहा था। इन दो घंटो में गोलू ने न कोई गड़बड़ की ना ही कोई गलती वह बहुत ही सावधानी से गाड़ी चला रहा था।
बोरियत ना हो इसलिए धीमी आवाज में गाने भी चला रखे थे। मंगल फूफा बगल में बैठे थे कभी खिड़की से बाहर देखते ,कभी उबासी लेते तो कभी सो जाते। चाय नाश्ता किये काफी समय हो गया था था। मंगल फूफा को भूख लगने लगी उन्हें याद आया उन्होंने अपनी जेब में बिस्किट रखे थे। उन्होंने एक बिस्किट निकाला और खाने लगे। गोलू की नजर पड़ी तो उसने रोआँसा होकर कहा,”अकेले अकेले का खा रहे हो फूफा ? इह नाही कि एक निवाला हमे भी दे दे”
“बिस्कुट खाय रहे है ल्यो तुमहू भी खाओ”,मंगल फूफा ने जेब से दूसरा बिस्कुट निकालकर गोलू की तरफ बढ़ा दिया। गोलू ने बिस्कुट मुँह में रखा और खाकर कहा,”जे कहा से आये तुम्हाये पास ?”
“जहा चाय पी थी ना हुआ टेबल से उठाये थे”,मंगल फूफा ने कहा
गोलू ने जैसे ही सुना उसे याद आया टेबल पर बिस्कुट उसने तो कुत्ते से छीनकर रखे थे। ये याद आते ही गोलू ने गाड़ी को साइड में लेकर अचानक ब्रेक लगाया जिस से सोया हुआ गुड्डू आगे आ गिरा। गोलू ने गुड्डू को नहीं सम्हाला बल्कि जल्दी से दरवाजा खोलकर नीचे उतरा और लगा उबकाइयां करने , मंगल फूफा ने देखा तो वे भी उतरकर गोलू के पास आये और कहा,”अरे का हुआ गोलू ?
गोलू को उलटी तो नहीं हुई लेकिन बेचारे का जी जरूर खराब हो गया वह मंगल फूफा की तरफ पलटा और कहा,”का रे फूफा ! तुम्हरे अंदर बुद्धि है कि नाही साला टेबल पर बिस्कुट हमहू कुत्ता से छीनकर रखे रहे और तुम हमको वही खिला दिए,,,,,,,,,,,,,,और हमको खिलाया सो खिलाया खुद भी इत्ते आराम से खाय रहे है,,,,,,,,!!”
“का कुत्ता का बिस्कुट ? अह्ह्ह्हह थू,,,,,,!!”,मंगल फूफा ने हाथ में पकड़ा आधा बिस्कुट फेंककर थूकते हुए कहा
“अब थूकने से का फायदा कुत्तो वाली हरकत तो पहिले ही कर दिए तुम,,,,,,,,,साला पूरा मूड खराब कर दिए”,गोलू ने बुरा सा मुँह बनाकर कहा
अचानक ब्रेक लगने की वजह से गुड्डू की नींद खुल गयी। साथ ही गिरने की वजह से उसका सर आकर लगा गाड़ी के डेशबोर्ड पर वह अपना सर सहलाते हुए उठा देखा
ना ड्राइवर सीट पर कोई है ना बगल वाली सीट पर कोई है तो वह गाड़ी से नीचे उतरा और अंगड़ाई लेते हुए देखा तो नजर कुछ ही दूर खड़े मंगल फूफा और गोलू पर पड़ी जो कि दोनों पेप्सी पी रहे थे। गुड्डू उनके पास आया गोलू को एक चपत लगाकर कहा,”गाडी को वहा खुला छोड़ के तुम दोनों हिया पेप्सी पी रहे हो,,,,,,,,,,,!!!”
“अरे का बताये गुड्डू भैया कौन मज़बूरी मा हमहू जे पी रहे है”,गोलू ने बुरा सा मुँह बनाकर कहा उसे एक बार फिर वो मरियल कुत्त्ता और उसके सामने से उठाये हुए बिस्कुट याद आ गए।
“कौनसी मज़बूरी बे ? और इहह्ह सब छोडो भूख वुख लगा है कि नाही तुम दोनों को ,लगा है तो फिर हुआ सामने चलकर खाना खा लेते है वैसे भी बस अभी दो-ढाई घंटे का रास्ता और बचा है चंदौली का ओह्ह्ह के बाद तुमहू अपने साइड निकल जाना हमहू चकिया निकल जायेंगे”,गुड्डू ने अपना सर खुजाते हुए कहा
गोलू ने जल्दी जल्दी पेप्सी खत्म की और खाली बोतल साइड में फेंककर कहा,”अरे गुड्डू भैया आप तो हमाये पेट की बात कह दिए , चलिए चलिए खाना खाते है बहुते भूख लगी है”
गुड्डू गोलू और मंगल फूफा सामने बने ढाबे पर चले आये और गुड्डू ने तीनो के लिए खाना आर्डर कर दिया। खाना आने में अभी 15-20 मिनिट लगने थे इसलिए गुड्डू गोलू से चंदौली वाले काम की जानकारी लेने लगा।
“चंदौली के बाद कहा जाओगे तुम लोग ?”,गुड्डू ने गोलू से पूछा
“अरे भैया उह्ह दिन उह्ह्ह आदमी का नाम था उसका,,,,,,,,,,,,,,,,हां,,,,,,,,,,,,बिरजू , उह्ह्ह एड्रेस लिखवा कर गया था हमाये पास , गाँव का नाम था कचिया , हाँ कचिया चंदौली ,, कह रहा था चंदौली मा 10-12 किलोमीटर अंदर चलकर है,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने कहा
“कचिया ? जे नाम तो पहली बार सुन रहे है हमहू ,गोलू एक ठो काम करो तुम्हाये उह्ह्ह बिरजू जो भी है एक बार ओह्ह्ह का फोन करके पूछ ल्यो , ऐसा ना हो जे कचिया के चक्कर मा रातभर चंदौली मा ही घूमते रहो”,गुड्डू ने कहा
“अरे गुड्डू भैया ! काहे टेंशन लेते हो हम है ना”,गोलू ने बेपरवाही से कहा
“साले तुम हो तबहि तो टेंशन है”,गुड्डू ने गोलू को घूरकर कहा
“अरे गुड्डू भैया इह बार गोलू अकेला नाही है हम भी है जे के साथ,,,,,,,,,,,सब सम्हाल लेंगे”,इस बार मंगल फूफा ने कहा
गुड्डू ने सुना तो मंगल फूफा को देखा और कहा,”फिर तो हमायी दूकान बंद करवा के मानोगे दोनों”
मंगल फूफा ने सुना तो झेंपकर दूसरी तरफ देखने लगे क्योकि पहले गोलू अकेला गलतिया करता था अब तो मंगल फूफा भी उसके साथ शामिल हो गए जिसका मतलब था दुगुनी भसड़,,,,,,,,,,,,,,,!!!
“गोलू एक बार रमेश को फोन करके पूछ ल्यो चंदौली पहुंचे के नाही ?”,गुड्डू ने फिर कहा तो गोलू ने कहा
“रमेश का मैसेज हमको मिल चुका है भैया उह्ह्ह लोग एक घंटे मा पहुंचने वाले है , हमने उन सबको वही रुकने को कहा है वहा से सबको साथ ले लेंगे”,गोलू ने कहा
“उनको काहे रोक रहे हो ? अरे उसको एड्रेस और फोन नंबर भेजो कम से कम उह्ह्ह सामान लेकर अगले के घर पहुंचे थोड़ा बहुत काम तो शुरू हो। बाद मा तुम और मंगल पहुंच जाना वहा”,गुड्डू ने गोलू को फटकार लगाकर कहा
“हाँ हाँ कर देंगे पहिले कुछो खा ले , का है कि जब तक पेट मा कुछो नाही जाएगा तब तक दिमाग नाही चलेगा हमरा”,गोलू ने झुंझलाकर कहा
“हैं ठीक है खाय ल्यो , हमहू ज़रा शगुन को फोन करके आते है”,कहकर गुड्डू उठा और साइड में चला गया।
शगुन से बात करके गुड्डू वापस आया तब तक खाना भी आ चुका था। तीनो ने मिलकर खाना खाया। गुड्डू और गोलू ने बातो बातो मे इतना ज्यादा खा लिया कि वही पसर गए। गोलू ने गाड़ी बीच मे खड़ी की थी इसलिए उनकी गाडी के पीछे खड़ा गाड़ी वाला बार बार हॉर्न मार रहा था। गुड्डू समझ गया इसलिए जेब से गाड़ी की चाबी निकालकर गोलू की तरफ बढ़ाकर कहा,”गाडी साइड मा लेइ ल्यो ज़रा”
अब गोलू ठहरा गुड्डू से बड़ा आलसी उसने भी बैठे बैठे चाबी मंगल फूफा की तरफ बढ़ा दी और कुछ कहने की जहमत भी नहीं की बस इशारे से ही मंगल फूफा को गाड़ी साइड में लगाने को कहा। मंगल फूफा ख़ुशी ख़ुशी चाबी ऊँगली में घुमाते हुए गाडी के तरफ चले गए और गुड्डू को इस बात की जरा भी खबर नहीं थी क्यों वह बेचारा आराम फरमाने के लिए आँखे मूँदे , कुर्सी पर पीछे अपना सर झुकाये बैठा था।
मंगल फूफा गाडी में आ बैठे ,चाबी लगाई और गाडी आगे बढ़ा दी और अगले ही पल गुड्डू और गोलू के कानों में पड़ी धड़ाम की आवाज,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
( क्या रूपा कर पायेगी बिंदिया की मदद और रोक पायेगी इस शादी को ? क्या बिंदिया का खत पहुंचेगा लवली तक और वो आ पायेगा चकिया ? मंगल फूफा से गाड़ी पार्क करवा कर क्या गोलू ने फिर की है कोई गड़बड़ ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ” सीजन 4 मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
“अरे का बताये गुड्डू भैया कौन मज़बूरी मा हमहू जे पी रहे है”,गोलू ने बुरा सा मुँह बनाकर कहा उसे एक बार फिर वो मरियल कुत्त्ता और उसके सामने से उठाये हुए बिस्कुट याद आ गए।
“कौनसी मज़बूरी बे ? और इहह्ह सब छोडो भूख वुख लगा है कि नाही तुम दोनों को ,लगा है तो फिर हुआ सामने चलकर खाना खा लेते है वैसे भी बस अभी दो-ढाई घंटे का रास्ता और बचा है चंदौली का ओह्ह्ह के बाद तुमहू अपने साइड निकल जाना हमहू चकिया निकल जायेंगे”,गुड्डू ने अपना सर खुजाते हुए कहा
“अरे का बताये गुड्डू भैया कौन मज़बूरी मा हमहू जे पी रहे है”,गोलू ने बुरा सा मुँह बनाकर कहा उसे एक बार फिर वो मरियल कुत्त्ता और उसके सामने से उठाये हुए बिस्कुट याद आ गए।
“कौनसी मज़बूरी बे ? और इहह्ह सब छोडो भूख वुख लगा है कि नाही तुम दोनों को ,लगा है तो फिर हुआ सामने चलकर खाना खा लेते है वैसे भी बस अभी दो-ढाई घंटे का रास्ता और बचा है चंदौली का ओह्ह्ह के बाद तुमहू अपने साइड निकल जाना हमहू चकिया निकल जायेंगे”,गुड्डू ने अपना सर खुजाते हुए कहा
“अरे का बताये गुड्डू भैया कौन मज़बूरी मा हमहू जे पी रहे है”,गोलू ने बुरा सा मुँह बनाकर कहा उसे एक बार फिर वो मरियल कुत्त्ता और उसके सामने से उठाये हुए बिस्कुट याद आ गए।
“कौनसी मज़बूरी बे ? और इहह्ह सब छोडो भूख वुख लगा है कि नाही तुम दोनों को ,लगा है तो फिर हुआ सामने चलकर खाना खा लेते है वैसे भी बस अभी दो-ढाई घंटे का रास्ता और बचा है चंदौली का ओह्ह्ह के बाद तुमहू अपने साइड निकल जाना हमहू चकिया निकल जायेंगे”,गुड्डू ने अपना सर खुजाते हुए कहा
