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Manmarjiyan Season 4 – 36

Manmarjiyan Season 4 – 36

Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

गोलू और गुड्डू मुँह लटकाये बेंच पर बैठे थे। गोलू बैठे बैठे थक गया था इसलिए बार बार उबासी लेते हुए अपना सर गुड्डू के कंधे पर टिका देता और गुड्डू खीजकर उसे झटक देता।  गुड्डू के तीन चार बार झटकने के बाद गोलू ने एक बार फिर अपना सर जैसे ही गुड्डू के कंधे पर टिकाया गुड्डू ने खीजकर कहा,” एक काम करो ना हमायी गोद मा ही लेट जाओ”
गोलू कुछ कहता उस से पहले गुप्ता जी और गुप्ताइन वहा पहुँच गए और गुप्ता जी ने गुड्डू से कहा,”जे सब कब से सुरु कर दिया तुम दोनों ने ?”

“का ?”,गोलू ने पूछा
“एक दूसरे की गोद मा लेटना”,गुप्ता जी ने कहा
गुड्डू उठा और कहा,”अरे का अश्लील बात कर रहे है आप चचा और हिया का कर रहे है आप दोनों ?”
“हिया की दही कचौड़ी बहुते जबरदस्त है वही खाने आये है , अबे अस्पताल मा काहे आते है लोग अपना इलाज करवाने या फिर जो इलाज करवा रहे है ओह्ह्ह से मिलने,,,,,,,,,,बहू कहा है ?”,गुप्ता जी ने पूछा
“हुआ अंदर है”,गोलू ने कहा

चलो गुप्ताइन”,गुप्ता जी ने कहा और एमर्जेन्सी की तरफ बढ़ गए
“अरे पिताजी अभी आप लोग पिंकिया से नाही मिल सकते”,गोलू ने पीछे से आवाज दी
“हमको किसी का बात भी नाही रोक सकता , तुमहू गाड़ी बुलवाओ बहू को घर लेकर जाना है”,गुप्ता जी ने कहा और चले गए
“इनको तो कही जाने से हमाये बाप भी नाही रोक सकते”,गोलू ने मुँह बनाकर कहा

“अबे तुम्हाये बाप ही है उह्ह्ह”,गुड्डू ने गोलू के सर पर चपत लगाकर कहा
“चलिए गुड्डू भैया बाहिर चलकर एक ठो गाड़ी का इंतजाम करते है”,गोलू ने कहा
“उसकी जरूरत नाही है हमहू शोरूम पर फोन कर देते है , लड़का पिताजी की गाड़ी लेकर आ जायेगा। लाओ जरा अपना फोन दो हमाओ फोन तो बंद है”,कहते हुए गुड्डू ने गोलू से फोन लिया और शोरूम पर फोन करने लगा  

गुप्ता जी का घर , कानपूर
पिंकी को लेकर घर आते आते शाम के 5 बज गए। गुप्ता जी और गुप्ताइन पिंकी को लेकर घर पहुंचे। गोलू मंगल फूफा को अपनी स्कूटी पर लादे घर आया और गुड्डू अपनी बाइक से पहुंचा। गोलू सहारा देकर पिंकी को अंदर लेकर आया और कमरे में लेटा दिया। गुप्ताइन भी पिंकी के पास आ बैठी। गुप्ता जी , गुड्डू और मंगल फूफा घर के आँगन में थे। गोलू आया तो उसे देखकर गुप्ता जी भड़क गए और कहा,”तुम्हरे अंदर अकल नाम की कोनो चीज है कि नाही , इत्ता बड़ा हादसा हुई गवा और तुमहू साले बहू को अकेले लेकर चले गए , एक ठो फोन नाही कर सकते थे का हमे ?”

“अकेले थोड़े गए थे , जे थे ना मंगल फूफा हमाये साथ”,गोलू ने धीमे स्वर में कहा
“जे ? जे लगे तुमको काम के आदमी ,, जनरल वार्ड की नर्स के बगल मा बैठकर बड़ी बड़ी फेंक रहे थे , वहा से उठाकर लाये है इनको”,गुप्ता जी ने कहा तो मंगल फूफा इधर उधर देखने लगे

गोलू ने खुन्नस वाले भाव से मंगल फूफा को देखा , गुप्ता जी को बिगड़ते देखकर गुड्डू ने कहा,”जाय दयो ना चचा , अच्छी बात जे है कि पिंकी अब ठीक है और घर मा है और फिर डाक्टर ने कहा था ना घबराने की कोनो बात नाही है बस कमजोरी की वजह से चक्कर आये रहा ओह्ह्ह का,,,,,,,,,,!!!”

“बात उह्ह्ह नाही है गुड्डू ! बात है जे कि लापरवाही की , अरे बहू को 8 वा महीना चल रहा है ऐसे मा हम और गुप्ताइन तो बस ओह्ह्ह का हाल चाल ले सकते है ,  ओह्ह्ह के खावे पीवे का ख्याल रख सकते है पर पति का जोन फर्ज है उह्ह तो जे ही निभाएंगे ना,,,,,,,,,,,,अरे अपनी मेहरारू के पास बैठे , बतियाये ओह्ह्ह से सुख दुःख की पूछे लेकिन नहीं इनको तो रंगबाजी से फुर्सत नाही है”,गुप्ता जी ने कहा

गुड्डू ने सुना तो उसे समझ आया कि गुप्ता जी की एक एक बात सही है , गोलू इन दिनों पिंकी को वक्त देना जैसे भूल ही चुका था। आधा वक्त वह गुड्डू के साथ काम में व्यस्त रहता बाकि आधे वक्त में वह किसी न किसी कांड में फसा रहता।

“अब से देगा चचा ! जे सब मा अकेले गोलू की ही नाही हम सबकी भी गलती है। कभी आप तो कभी पिताजी जे बेचारे को गरियाते-लतियाते रहते है ,, आप दोनों से बचे तो हमाये हत्थे चढ़ गए , फिर दूकान का काम भी देखता है बेचारा,,,,,,,,,,,उह्ह्ह का है ना चचा गोलू जान बूझकर कोनो कांड नाही करता है , जे बेचारा तो कर्म करता है लेकिन वो कांड में बदल जाता है और जे बेचारे की बत्ती बन जाती है।

कल एक ठो बड़ा आर्डर लिए रहय हमहू बस दुइ दिन मा उह्ह पूरा हो जाए ओह्ह्ह के बाद हमहू खुद गोलू को दो महीने की छुट्टी दे देंगे ,, जब तक पिंकी की डिलीवरी नहीं होती तब तक जे पिंकी के साथ ही रहेगा और ओह्ह्ह का ख्याल रखेगा,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने गोलू की साइड लेकर कहा

अब यही बात अगर गोलू गुप्ता जी से कहता तो गुप्ता जी शायद ही उसकी बातो पर विश्वास करते लेकिन गुड्डू की बात पर विश्वास करके गुप्ता जी ने कहा,”ठीक है गुड्डू तुमहू कह रहे हो तो जाओ दुइ दिन की छूट और दी जे का , ओह्ह्ह के बाद चुपचाप घर आये और अपनी पत्नी का ख्याल रखे,,,,,,,,,,,बाप बनने वाले है लेकिन अक्कल ढेले भर की नाही है”

“अरे काहे चिन्तियाय रहे है चचा , अभी नहीं तो बाप बनने के बाद आ जाएगी अक्कल पर आएगी जरूर”,गुड्डू ने कहा तो गोलू झेंपते हुए मुस्कुरा दिया
गुप्ता जी का सर दुखने लगा था इसलिए सोफे पर आ बैठे और गुप्ताइन को आवाज लगाई। गुप्ताइन ने पिंकी को आराम करने को कहा और बाहर चली आयी।
“ए यार गुप्ताइन ! ज़रा एक ठो कप चाय पिलाय दयो सर बहुते दुःख रहा है”,गुप्ता जी ने अपना ललाट मसलते हुए कहा

“हाँ अभी बना देते है , गुड्डू खड़े काहे हो बइठो चाय बनाय रहे है पीकर जाना”,गुप्ताइन ने कहा और रसोईघर की तरफ चली गयी।
गुड्डू ने घडी में वक्त देखा , आज रात ही शगुन के घरवाले बनारस के लिए निकलने वाले थे इसलिए उनसे मिलना भी जरुरी थी। गुड्डू को घड़ी देखते देखकर गोलू ने कहा,”गुड्डू भैया रुक जाईये ना , चाय पीकर निकल जाईयेगा”

“हम्म्म ! ज़रा हमरा जे फोन चार्जिंग पर लगाय दयो हमहू बाहिर है”,गुड्डू ने कहा और आँगन से निकलकर बाहर सीढ़ियों पर चला आया।

शाम का वक्त और उस पर ठंडी ठंडी सुहावनी हवाई गुड्डू के मन को शांति और सुकून दोनों पहुंचा रही थी। गोलू ने गुड्डू का फोन चार्जिंग पर लगाया और पिंकी के पास चला आया। गोलू को देखकर पिंकी मुस्कुराई और जैसे उठने लगी गोलू ने उसे वापस लेटाते हुए कहा,”अरे लेटी रहो”

पिंकी वापस लेट गयी। गोलू आकर पिंकी के बगल में बैठा और उसके हाथ को अपने हाथो में लेकर कहा,”हमका माफ कर दयो पिंकिया , हमहू तुम्हरा ख्याल नाही रख पाये। हम न सच मा बौड़म है बताय रहे है। दिनभर बकैती करेंगे , उलटे सीधे काम करेंगे , सबसे बहस करेंगे लेकिन तुम्हरे लिए हमरे पास बख्त ही नाही,,,,,,,,सच मा पिंकिया हमहू बहुत शर्मिन्दा है , हमका माफ़ी देइ दयो बाबू”
“एक शर्त पर माफ़ करेंगे”,पिंकी ने कहा

“अरे तुमहू बोलो तो हमको तुम्हरी सारी शर्ते स्वीकार है”,गोलू ने कहा
“हमको ना गोलगप्पे खाने का बहुते मन कर रहा है गोलू,,,,,,,,,उसका खट्टा तीखा पानी और साथ मा इमली की मीठी चटनी,,,,,,,,हमे उह्ह खाना है”,पिंकी ने बच्चो की तरह मचलकर कहा जिसे सुनकर गोलू के मुँह में भी पानी आ गया लेकिन उसने मुँह में आये पानी को गटकते हुए कहा,”हाँ हाँ खिला देंगे लेकिन दो चार दिन बाद , अभी का है ना आज तुमहू अस्पताल से आयी हो तो कुछो दिन रुक जाओ फिर लेकर चलते है तुमको बाबू के पास”
“पक्का लेकर चलोगे ?”,पिंकी ने पूछा

“अरे हाँ हाँ पक्का , तुम्हरे सर की कसम”,गोलू ने कहा
“थैंक्यू गोलू तुमहू बहुते अच्छे हो”,पिंकी ने खुश होकर कहा। पिंकी को खुश देखकर गोलू भी मुस्कुरा उठा और अपने हाथो में पकडे पिंकी के हाथ को चूमा और कहा,”अच्छा बाबू ! तुमहू आराम करो हमहू बाहिर है”
“हम्म्म ठीक है जाओ”,पिंकी ने कहा तब तक गुप्ताइन भी पिंकी के लिए चाय और बिस्किट लेकर आयी और कहा,”पिंकी ! उठो बिटिया जे चाय बिस्कुट खाय ल्यो ओह्ह्ह के बाद दवा लेइ ल्यो”
गोलू उठा और कमरे से बाहर चला आया।

गुड्डू सीढ़ियों पर बैठा था और चकिया जाने के बारे में सोच रहा था। कल उसे गोलू को लोकेशन पर भेजना था और खुद बिंदिया की खबर लेने चकिया जाना था। मंगल फूफा गुड्डू के लिए चाय लेकर बाहर आये और उसके बगल में बैठकर चाय का कप गुड्डू की तरफ बढाकर कहा,”एक बात कहे गुड्डू”
“हाँ कहो”,गुड्डू ने चाय का कप लेकर कहा

“जे तुम और गोलू जब ऐसे चुपचाप बैठते हो ना पता नाही काहे ऐसा लगने लगता है जैसे तूफ़ान के पहिले की शांति है , कोनो बड़ा कांड होने वाला है”,मंगल फूफा ने चाय का घूंठ भरकर कहा
गुड्डू ने सुना तो उसने मंगल फूफा को घुरा और कहा,”जे से अच्छी बात नाही मिली बोलने को ? मतलब जब भी मुँह खोलोगे कुछो मनहूस ही बोलोगे,,,,,,,,,जे गोलू के साथ रह रह के ना आपके दिमाग मा भी गोबर भर गवा है,,,,,,,,,,,!!!”

“गोबर से याद आया , हम अब उह्ह्ह यादववा की घरवाली को नाही देखते”,मंगल फूफा ने दूसरा घूंठ भरकर कहा
“तो हम का करे नाचे ?”,गुड्डू ने चिढ़कर कहा
“अरे मतलब हम जे कह रहे है कि हमहू अब सुधर गए है तो हमको भी तुम्हरे और गोलू के साथ बिजनेस मा शामिल कर लेओ”,मंगल फूफा ने खिंसियाकर कहा
गुड्डू ने सुना और ख़ामोशी से मंगल फूफा को देखने लगे तो वही गुड्डू की तरफ आते गोलू के कानों में बस आखिरी कुछ शब्द पड़े “साथ बिजनेस मा शामिल कर लेओ”

गोलू को लगा मंगल फूफा उसके गुड्डू भाई से नजदीकियां बढाकर उसकी जगह लेना चाहते है। वह एकदम से मंगल के सामने आ धमका और कहा,”साले मंगल फूफा , दिखा दी ना अपनी औकात , दिखा दिया फूफा वाला रंग,,,,,,,,,,,हमको साला पहिले से सक था तुमहू एक दिन हमको डसोगे ही डसोगे , साले सांप , सकुनी , जोन थाली मा खाया ओह्ह थाली मा छेड़ किया,,,,,,,,,,,अब हमको समझ आया पिताजी के साथ इत्ता घुस काहे रहे हो ? घर मा और गुड्डू भैया के बिजनेस मा हमरी जगह लेना चाहते हो,,,,,,,,,छोड़ेंगे नाही तुमको”

“का बक रहे हो गोलू ?”,गुड्डू ने कहा
“हाँ गोलू जे का कुछ भी कहे जा रहे हो , अरे हम तुम्हरी जगह काहे लेंगे भाई हम तो बस गुड्डू से कह रहे थे कि,,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा ने इतना ही कहा कि गोलू बीच में बोल पड़ा,”तुमहू कुछो ना ही कहो तो अच्छा है फूफा,,,,,,,,,मिश्रा वेडिंग प्लानर मा दो ही पार्टनर रहेंगे गुड्डू भैया और हम बाकि कोनो तीसरा आया ना तो  टेंट के साथ साथ ओह्ह का भी गाड़ देंगे,,,,,,,,,,,,का गुड्डू भैया जे वास्ते हमको दुइ महीने की छुट्टी दे रहे थे ? और हमरी जगह रखा भी तो किनको इनको अरे इनके जैसे दो मिलाओगे ना तब एक ठो गोलू बनेगा और उह्ह्ह भी किसी काम का नाही होगा”

गुड्डू ने सुना तो अपना सर पकड़ लिया और फिर कहा,”अबे गोलू ! साले तुमहू बचपन मा सर के बल गिर गए थे का ? अबे पूरी बात तो सुनो पहिले बेचारे मंगल फूफा का कह रहे है इह तो जान लयो पर नाही चाय नाश्ता लेकर चढ़ गए जे पर,,,,,,,,,,,,!!!”
गुड्डू की बात सुनकर गोलू थोड़ा शांत हुआ

वह गुड्डू के बगल में आ बैठा और कहा,”तो का आप मंगल फूफा को अपने बिजनेस मा शामिल नाही कर रहे ?”
“नाही ! हमाये माथे पर चू#या नाही लिखा है , जे तो हमसे काम मांग रहे है,,,,,,,वैसे भी कल वाले आर्डर मा हमहू तुम्हाये साथ होंगे नाही और लड़के भी कम है अपने पास तो तुमहू अपने साथ इनको रख लो , छोटे मोटे काम तो देख ही लेंगे”,गुड्डू ने कहा

गोलू ने झुककर मंगल फूफा को देखा और कहा,”केवल छोटे काम ही देख पाएंगे”
“ए गोलू ! तुमहू हमाये कद का जियादा मजाक नाही उड़ाओ समझे ,, जब डाकू थे ना तब बहुते बड़े बड़े काम किये है हमने”,मंगल फूफा ने चिढ़कर कहा
“चार फुट से जियादा का ही बड़ा काम कर लिया होगा ? और तुमहू सच मा डाकू ही थे ना ? का है ना कि हरकते तो तुम्हायी कानपूर के नुक्कड़ पर घूमने वाले आशिक़ो जैसी है,,,,,!!!”,गोलू ने मंगल फूफा का मजाक उड़ाते हुए कहा

“आशिक़ थे अब हमहू सिर्फ मंगल फूफा है , हमायी भी सेल्फ रेस्पेक्ट है का जिंदगीभर एक ही औरत के पीछे भागते रहेंगे ?”,मंगल फूफा ने कहा
“मतलब अब तुमहू भी “ठुकरा के मेरा प्यार मेरा इंतकाम देखेगी” करने वाले हो फुलवारी के सामने ?”,गोलू ने पूछा
मंगल फूफा उठकर गोलू के सामने आये और चिढ़कर कहा,”देखो गोलू हमाये सब्र का इम्तिहान नाही लयो तुम”
“तो का ले ? दुइ चड्डी-बनियान और जे खद्दर का कुर्ता छोड़कर कुछो है तुम्हरे पास,,,,,,,,,,,,,,पार्टनर बनेंगे”,गोलू ने कहा

मंगल फूफा का चेहरा गुस्से से लाल हो गया लेकिन साथ ही रोआँसा भी हो गए बेचारे , आखिर गोलू उन्हें इतना सब सुना जो रहा था। गुड्डू ने देखा तो कहा,”अरे मंगल फूफा ! आप जे की बातो पर ध्यान नाही दो जे परेशान है बेचारा , आप कल सुबह गोलू के साथ दूकान आ जाना वही से सब साथ मा चंदौली निकल जायेंगे। हमहू चकिया मा उतर जायेंगे आप और बाकि लोग लोकेशन पर निकल जाना”
“तुमहू चकिया काहे उतरोगे ?”,मंगल फूफा ने पूछा

“देखा , जे वास्ते हमहू इनको साथ नाही ले जा रहे , सब जानना है इनको अरे फूफा कम थे जो अब घर की भुआ भी बनना है इनको ,, चकिया काहे उतरोगे ? अरे उतरेंगे जे का मन है चकिया उतरे चाहे उतरे यमराज की छाती पर तुमको का ?”,गोलू मुश्किल से शांत हुआ था और फिर भड़क गया

“अरे हमहू तो बस ऐसे ही पूछ रहे थे , ठीक है नाही पूछेंगे,,,,,,,,,,गुड्डू फिर कल आ जाये ना हमहू गोलू के साथ ?”,मंगल फूफा ने पूछा
“हाँ आ जाना और हमायी हाथ जोड़ के रिक्वेस्ट है पिलीज इह बार कोनो चरस नाही बोना हमायी जिंदगी मा , भैया हमहू नाही काट पाएंगे,,,,,,,,,,ठीक है”,गुड्डू ने अपने हाथ जोड़कर कहा

“अरे चिंता नाही करो गुड्डू इह बार पूरा दिल से काम करेंगे हमहू”,कहकर मंगल फूफा ख़ुशी ख़ुशी अंदर चले गए
“गुड्डू भैया ! जे का किये आप ? आपको पता है न पिछली बार का किये थे मंगल फूफा ?”,गोलू ने शिकायती लहजे में कहा
“पिछली बार मंगल फूफा पिरेम मा थे अब नाही है और वैसे भी है तो उह्ह्ह तुम्हरी अम्मा के फूफा ना और अब तो जे घर मा सदस्य भी हो गए है थोड़ा नरमी से पेश आओ यार ओह्ह्ह के साथ , कल साथ ले आना उनको अभी हमहू निकलते है , आज रात शगुन के घरवाले बनारस वापस जा रहे है तो ओह्ह का छोड़ने स्टेशन जाना है”,कहते हुए गुड्डू उठा

“हाँ तो हम भी चलते है”,गोलू ने भी उठते हुए कहा
गुड्डू पलटा और गोलू को घूरकर कहा,”तुमहू का हमायी लुगाई हो जो हर जगह हमाये साथ जाओगे ?”
गोलू मुस्कुराया और कहा,”गुड्डू भैया ! कित्ता सही होता ना अगर हमहू आपकी लुगाई होते ?”
गुड्डू ने गोलू को पीछे धकियाया और चिढ़कर कहा,”भक्क साला ! तुम्हरे जैसी लुगाई रखने से अच्छा हमहू रंडवे मर जाते”

गोलू ने सुना तो हसने लगा और फिर अपने हाथ की उंगलियों को होंठो से लगाकर हवा में एक जबरदस्त चुम्मा गुड्डू की तरफ उछालकर कहा,”काहे मर जाते ? हमायी भी उम्र लग जाए आपको ,, घर पहुंचो हमहू सीधा स्टेशन ही मिलेंगे आपसे”
“काहे ! हुआ का परसादी बट रही है ?”,गुड्डू ने पूछा
“अरे प्रीति जी को बाय बोलने आएंगे ना”,गोलू ने शरमाकर कहा
  गुड्डू ने गोलू को देखकर अफ़सोस में अपना सर हिलाया और वहा से चला गया

( क्या पिंकी की डिलीवरी तक गोलू रख पायेगा पिंकी का ख्याल या कर देगा उसे और परेशान ? मंगल फूफा को चंदौली ले जाना क्या पड़ने वाला है गुड्डू को भारी ? क्या गोलू आएगा स्टेशन शगुन के घरवालों को अलविदा कहने ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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