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Manmarjiyan Season 4 – 28

Manmarjiyan Season 4 – 28

Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

सुबह सुबह शर्मा जी के घर से चिल्लाने की आवाज आयी। अपने कमरे में सो रही शर्माईन ने जब शर्मा जी के चिल्लाने की आवाज सुनी तो भागकर बाहर आयी।  शर्मा जी जैसे ही शर्माईन की तरफ पलटे शर्माईन भी अपने गालों को हाथ लगाकर चिल्लाई। सामने खड़े शर्मा जी की बड़ी बड़ी मुछे गायब थी।
“जे का हुआ पिंकिया के पापा , आपकी मुछे कहा गयी ?”,शर्माईन ने शर्मा जी के पास आकर हैरानी से कहा
“जे ही तो हम नाही समझ पा रहे,,,,,,,!!!”,शर्मा जी ने भी उलझनभरे स्वर में कहा

“का पता नये लुक के चलते आप खुदही हटाय दिए हो ?”,शर्माईन ने कहा तो शर्मा जी उन्हें घूरने लगे
“हम का तुमको 25 साल के जवान लौंडे दिखते है जो नया नया लुक रखेंगे , अरे हमायी मुछे तो हमायी मर्दानगी की निशानी थी,,,,,,!!”,शर्मा जी ने चिढ़े हुए स्वर में कहा
गोलू बगल वाले कमरे में ही सो रहा था , चिल्लम-चिल्ली सुनकर बाहर आया और जैसे ही शर्मा जी के शब्द उसके कानों में पड़े उसने अंगडाई लेते हुए कहा,”मतलब अब आप मर्द नाही रहे , का है कि मुछे तो आपकी रही नहीं”

गोलू को वहा देखकर शर्माईन हैरान थी उन्होंने गोलू की तरफ देखकर पूछा,”अरे दामाद जी आप सुबह सुबह हिया का कर रहे है ?”
“सुबह सुबह ? रात को दारू पीकर भंड होकर आये थे हमारे घर के सामने ,  घर जाने की हालत में थे नहीं तो हम ही इनको अंदर लेकर आये रहय,,,,,,,!!!”,शर्मा जी ने अपना हाथ अपनी कटी हुयी मूछों पर रखकर कहा
“मुँह तो ऐसे छुपाय रहे है जैसे दारू पीकर हमने आपकी बिटिया छेड़ दी हो,,,,,,,,,अरे पार्टी से आ रहे थे तो थोड़ी जियादा पी लिए,,,,,ऐसे थोड़े ना रोज रोज पीते है हमहू,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने मुँह बनाकर कहा

“देखा शर्माईन ! सुन रही हो ? अपने दारू पीने की बात कित्ते शान से बता रहे है जे,,,,,,,,,,,इन्हे तो हम”,कहते हुए शर्मा जी जैसे ही गोलू की तरफ बढे शर्माईन बीच में आ गयी और कहा,”जाने दीजिये ना घर के इकलौते दामाद है,,,,,,,,हो जाती है गलती कभी कभी”
शर्मा जी ने सुना तो गोलू और शर्माईन दोनों को घूरने लगे एक तो किसी ने उनकी मुछ उड़ा दी ऊपर से गोलू ने उनकी नाक में अलग से दम कर रखा था।  

शर्माईन गोलू की तरफ पलटी और कहा,”और दामाद जी आप , अच्छा लगता है आधी रात मा ऐसे शराब पीकर घर आना। पिंकी को पता चला तो का बीतेगी उह्ह्ह बेचारी पर,,,,,,,गोलू जी आपकी जे बात बिल्कुल पसंद नाही आयी हमे”
“माफ़ी चाहते है आगे से हमहू ध्यान रखेंगे”,गोलू ने मासूमियत से कहा तो शर्माईन पिघल गयी और कहा,”चाय पिएंगे ?”

“पी लेंगे”,गोलू ने भी मुस्कुराकर कहा और सोफे पर आ बैठा। शर्माईन किचन में चली गयी और शर्मा जी एक बार फिर शीशे में अपना मुँह देखते हुए बड़बड़ाने लगे। सोफे पर बैठे गोलू ने देखा , उसे अभी भी याद नहीं आ रहा था कि बीती रात नशे की हालत में उसने ही शर्मा जी की मुछे उड़ाई है उसने शर्मा जी को बड़बड़ाते देखकर कहा,”अरे बस कीजिये ससुर जी और कितना कोसेंगे बेचारे को , का हो गवा ऐसा तो मुछे ही तो है फिर आ जाएगी इत्ता काहे परेशान हो रहे है आप,,,,,,,,,,!!!”

शर्मा जी ने सुना तो गोलू के पास आये और भड़ककर कहा,”परेशान ! आज तक हमहू अपनी मुछे नाही हटाए है समझे और ना जाने कौन सूअर का पिल्ला हमाये साथ जे मजाक कर गवा , एक बार उह्ह्ह हमरे हाथ लग जाए बस मार मार के चटनी बना देंगे हम ओह्ह्ह की”
शर्मा जी को इतना गुस्से में देखकर बेचारा गोलू घबरा गया और उसका हाथ सीने से जा लगा। जैसे ही हाथ सीने से लगा गोलू को महसुस हुआ उसकी शर्ट की जेब में कुछ है , गोलू अपनी जेब टटोलने लगा।

शर्मा जी भी वही बगल में पड़े सोफे पर आ बैठे और कहा,”हो न हो जे जरूर हमरा कोनो दुश्मन है , एक बार हमरे हाथ लग,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
कहते हुए शर्मा जी ने जैसे ही गोलू की तरफ देखा आगे के शब्द उनके गले में ही अटक गए। बगल में बैठे गोलू के हाथ में जिलेट का रेजर था जिसे बीती रात गोलू ने अपनी जेब में रखा था। गोलू के हाथ में रेजर देखकर शर्मा जी को समझते देर नहीं लगी कि उनकी मुछे उड़ाने वाला कोई और नहीं बल्कि गोलू है।

वे गुस्से से उठे और गोलू को धर लिया। उन्होंने गोलू की कोल में मुक्के जमाते हुए कहा,”गोलू के बच्चे ! हमायी मुछे उड़ाने की तुम्हायी हिम्मत कैसे हुई ? खुद को दाढ़ी मुछ नहीं आती तो अब का दुसरो पर डाका डालोगे,,,,,,,,तुम्हे तो हम छोड़ेंगे नहीं”
“अरे आपने ही तो कहा था मुछ मुंडवा देंगे”,गोलू मार खाते हुए मिमियाया क्योकि अब तक दो चार घुसे उसे पड़ चुके थे।

शर्मा जी ने दो घुसे और लगाकर कहा,”हमने हमने कब कहा था हम अपनी मुछे मुंडवा देंगे ? वो तुमने कहा तो गोबरप्रशाद , इत्तो ही दिमाग है तुम्हाये पास काहे ओह्ह का उल-जुलूल चीजों मा लगाते हो ?”
गोलू ने देखा शर्मा जी बहुत गुस्से में है और उसे अच्छी खासी पड़ भी चुकी है तो उसने कहा,”टाइम प्लीज,,,,,,!!!”
शर्मा जी रुके और गुस्से से गोलू को घूरने लगे तो गोलू ने कहा,”वैसे बिना मूछों के इत्ते बुरे भी नहीं लग रहे है आप,,,,,,,,!!!”
कहकर गोलू वहा से भाग गया , शर्मा जी उसे पकड़ने उसके पीछे भागे लेकिन गोलू कौनसी गली में गायब हुआ पता ही नहीं चला।

हैरान परेशान शर्मा जी वापस लौट आये तो हॉल में खड़ी शर्माईन ने कहा,”अरे दामाद जी बिना चाय पिए कहा चले गए ?”
“नाम नाही लेना ओह्ह्ह का जे घर मा , पता नहीं कौनसी घडी मा हम ओह्ह के साथ अपनी बिटिया ब्याहे रहे”,शर्मा जी ने गुस्से से कहा और अंदर चले गए।  शर्माईन चाय का कप लेकर सोफे पर आ बैठी और अफ़सोस भरे भाव के साथ चाय पीने लगी।

शर्मा जी के घर से भागा गोलू सीधा पहुंचा अपने घर , गोलू अंदर आया तो देखा मंगल फूफा आँगन में लगे पोधो की कटाई छटाई कर रहे है लेकिन आज उनका ध्यान यादव जी के घर की तरफ नहीं था। गोलू को ये बात हजम नहीं हुई तो वह मंगल फूफा के पास आया और कहा,”का हो फूफा ! पार्टी बदल लिए का ?”
मंगल फूफा पौधे छाँटने वाली कैंची लेकर गोलु की तरफ पलटा तो गोलू छिटक कर पीछे हटा और कहा,”का कर रहे हो फूफा अभी तो हमाओ कनेक्शन काट देब,,,,,,,,,!!!”

“हमहू कोनो पार्टी नाही बदले है घर के मालिक की तरफ हमरी जिम्मेदारी जियादा बनती है समझे , अभी जाओ हिया से हमको डिस्टर्ब नाही करो”,मंगल फूफा ने रूखे स्वर में कहा और अपना काम करने लगा।
गोलू ने सुना तो हैरानी से मंगल फूफा को देखते हुए घर के अंदर चला गया लेकिन अंदर आकर तो उसे और बड़ा झटका लगा। सामने आँगन में गुप्ता जी सोफे पर बैठे सुबह का चाय नाश्ता कर रहे है और गुप्ताइन हंसती मुस्कुराती भाग भाग कर उन्हें परोस रही है। कल तक जो गुप्ताइन गुप्ता जी के प्राणो के पीछे पड़ी थी आज वही गुप्ता जी की सेवा में लगी है।

“अरे हमको चक्कर आ रहा है भाई.,,,,,,,,!!!”,गोलू ने अंदर आकर सर पकड़ते हुए कहा
“चक्कर का अभी तुमको नाक कान मुँह से खून भी आएगा,,,,,,,हमको इह बताओ कल रात कहा थे तुम ?”,गुप्ता जी ने गोलू की तरफ देखकर पूछा
“कहा थे से का मतलब , हमहू का रंगबाजी कर रहे थे ? अरे गुड्डू भैया के साथ मिलकर काम कर रहे थे सोनू भैया के हिया और का कर रहे थे ?”,गोलू ने उखड़े स्वर में कहा

तभी पिंकी अपने कमरे से निकलकर बाहर आयी और गोलू से कहा,”और दारू पीकर पापा के घर में जोन उत्पात मचाये हो ओह्ह्ह,,,,,,,,,,!!!”
गोलू ने सुना तो उछलकर पिंकी के पास आया और कहा,”का उत्पात मचा दिए हमहू , का तुम्हाये पिताजी कोनो लड़की है जो उनको छेड़ कर आये है हम ?

गुप्ता जी ने सुना तो गोलू की तरफ देखा और कहा,”ए , ए बेटा कोनो लाज शर्म बची है तुम मा के ओह्ह्ह का भी खूंटी पर टाँग देइ हो ? बकैती करते थे , रंगबाजी करते थे तक ठीक था अब तुमहू दारू भी पीने लगे,,,,,,,,,,,हमाई जुत्ती कहा है जे का भूत हम उतारते है”
कहते हुए गुप्ता जी झुककर जैसे ही अपनी चप्पल उठाने लगे गोलू सर पर पाँव रखकर वहा से भाग गया  

लेकिन भागते भागते गुप्ता जी की एक चप्पल तो तो आखिरकार उसने अपनी पीठ पर खा ही ली। सुबह से गोलू को ना चाय मिली न नाश्ता उलटा शर्मा जी से घुसे और गुप्ता जी से चप्पल मिली सो अलग , घर से बाहर आकर गोलू सुस्ताने लगा उसी वक्त फुलवारी किसी काम से अपने घर से बाहर आयी और मंगल फूफा भी कटे छँटे पोधो का कचरा उठाये घर से बाहर आये पर मजाल है एक बार फिर फुलवारी की तरफ देख ले।

वे सीधा आये कचरा डिब्बे में डाला और घर के अंदर , फुलवारी ने देखा आज मंगल फूफा ने उनकी तरफ नहीं देखा तो वही गोलू हैरान था कि ये चमत्कार कैसे हुआ ?
फुलवारी की नजरे गोलू से मिली तो वह झेंपकर अंदर चली गयी और गोलू भी अपना सर खुजाते हुए वहा से आगे बढ़ गया।

मिश्रा जी का घर , कानपूर  
शगुन के घरवालों के ठहरने और सोने का इंतजाम मिश्रा जी ने ऊपर करवाया था। ऊपर लवली के कमरे के अलावा तीन कमरे और थे उन्ही में सबके रहने का इंतजाम था। गुप्ता जी , विनोद और चाची सुबह जल्दी उठ गए बाकि प्रीति , रोहन और अमन सो रहे थे। लवली भी ऊपर अपने कमरे में सोया था लेकिन सुबह जल्दी उठकर नीचे चला आया। नीचे घर में तैयारियां चल रही थी सब व्यस्त थे बस गुड्डू महाराज अभी भी घोड़े बेचकर सो रहे थे। मिश्रा जी ने देखा गुड्डू कही नजर नहीं आ रहा तो उन्होंने शगुन से कहा,”बिटिया ! गुड्डू जगे कि नाही ?”
“जी वो सो रहे है”,शगुन ने धीरे से कहा

“बताओ ! हिया छोटी बहिन का रिश्ता तय होने जा रहा है और जे महामूर्ति अभी तक सो रहे है,,,,,,,,जाकर जगाओ उनको और कहो हमने बुलाया है”,मिश्रा जी ने कहा और अपने फोन से किसी का नंबर डॉयल करने लगे। कुछ देर बाद सामने वाले ने फोन उठाया तो मिश्रा जी ने कहा,”हेलो ! हाँ पंडित जी प्रणाम ,, आप 9:30 तक तैयार रहिएगा हमहू आपको लेने के लिए गुड्डू को भेज देंगे,,,,,,,,,!!!”
“हाँ ठीक है”,केशव पंडित ने कहा और फोन काट दिया

फ़ोन रखकर मिश्रा जी जैसे ही पलटे गुड्डू ने उनके पास आकर कहा,”जी पिताजी”
“का बेटा ! घर मा इत्तो काम रही और तुमहूँ सो रहे हो , केशव पंडित जी से बात हुयी है हमायी 9:30 तक उनके घर पहुंच जाना और उनको साथ लेकर आना है। ओह्ह्ह से पाहिले जाओ मोहन की दुकान पर मिठाई और सामान का जो जो आर्डर कल शाम मा दिए थे उह्ह तैयार है तो उह्ह्ह लेकर आना है,,,,,,,,,कर लोगे ?”,मिश्रा जी ने गुड्डू को सारी बात समझाई और फिर जब उसे उबासी लेते देखा तो थोड़ा शकभरे स्वर में पूछा

“हाँ हाँ कर लेंगे,,,,,,,,,,,,मोहन के पास हम चले जाते है केशव पंडित को लाने हम नाही जायेंगे”,गुड्डू ने बच्चो की तरह कुनमुना कर कहा      
“काहे नही जाओगे , ओह्ह्ह मा कांटे लगे है ? तुम ही जाओगे समझे अभी लवली इत्ता कुछो जानता नाही है वरना ओह्ह्ह का भेज देते। जाओ अंदर जाकर हाथ मुँह धो लो और चाय पीकर मोहन के हिया निकल जाओ”,मिश्रा जी ने गुड्डू का गाल थपथपाकर कहा और अंदर चले गए

गुड्डू उदास सा सीढ़ियों पर आ बैठा और बड़बड़ाया,”साला कित्ते भी छोटे हो जाये हमहू रहेंगे जे घर मा सबसे छोटे ही”
“का हुआ ! सुबह सुबह काहे उखड़े हो ? ल्यो चाय पीओ”,मिश्राइन ने चाय का कप गुड्डू की तरफ बढाकर कहा
“चाची ! एक ठो कप हमाये लिए भी,,,,,,,,!!”,सामने से आते हुए गोलू ने कहा और सीढ़ियों पर गुड्डू से एक सीढ़ी नीचे आ बैठा। मिश्राइन वहा से चली गयी तो गुड्डू ने गोलू को ताना मारकर कहा,”चाय से थोड़े उतरी है निम्बू पानी पीओ”

“अच्छा आपको भी पता चल गवा”,गोलू ने कहा
गुड्डू ने गोलू की गर्दन दबोची और उसके सर पर मारकर कहा,”साले हमाओ नाम खराब करे की कसम खा लेइ हो , सोनू भैया के हिया दारू पीकर भंड होने की का जरूरत थी बे तुमको,,,,,,,,,,ऊपर से हमसे बकैती करे सो अलग,,,,,,,,,,कसम से गोलू नाम मा दम कर रखे हो तुमहू हमायी”
“अरे गुड्डू भैया सॉरी ना,,,,,,,,आज के बाद नाही पिएंगे”, गुड्डू की बाँह में दबे गोलू ने कहा
“अरे गुड्डू जीजू ये क्या ? सुबह सुबह बेचारे गोलू जी के पीछे क्यों पड़े है आप ?”,प्रीति ने गुड्डू के पास आकर कहा

प्रीति को वहा देखकर गोलू ने दबे स्वर में गुड्डू से कहा,”ए गुड्डू भैया ! ए आपको हमायी कसम है हाँ प्रीति जी के सामने कुछो नाही बोलना इज्जत का सवाल है खामखा जे के सामने हमायी छीछा लेदर हो जाएगी,,,,,,,,!!!”
गुड्डू ने गोलू को छोड़ दिया तो गोलू उठा और प्रीति के सामने आकर कहा,”अरे आप ! आप कब,,,,,,,,,,,,!!”
बेचारा गोलू इतना ही कह पाया कि मिश्रा जी की बाटा की चप्पल आकर लगी सीधा गोलू की बाँह पर और आगे के शब्द उसके मुँह में ही रह गए।

गोलू कुछ समझ पाता इस से पहले ही मिश्रा जी की कड़कदार आवाज उसके कानो में पड़ी,”होश मा आ गए कि निम्बू पानी  मंगवाए तुम्हाये लिए ?”
गोलू ने मिश्रा जी को देखा और फिर गुड्डू को देखा तो गुड्डू मुस्कुरा दिया लेकिन गोलू समझ गया कि इस मुस्कराहट में कुछ तो झोल था।  

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संजना किरोड़ीवाल 

अच्छा आपको भी पता चल गवा”,गोलू ने कहा
गुड्डू ने गोलू की गर्दन दबोची और उसके सर पर मारकर कहा,”साले हमाओ नाम खराब करे की कसम खा लेइ हो , सोनू भैया के हिया दारू पीकर भंड होने की का जरूरत थी बे तुमको,,,,,,,,,,ऊपर से हमसे बकैती करे सो अलग,,,,,,,,,,कसम से गोलू नाम मा दम कर रखे हो तुमहू हमायी”
“अरे गुड्डू भैया सॉरी ना,,,,,,,,आज के बाद नाही पिएंगे”, गुड्डू की बाँह में दबे गोलू ने कहा
“अरे गुड्डू जीजू ये क्या ? सुबह सुबह बेचारे गोलू जी के पीछे क्यों पड़े है आप ?”,प्रीति ने गुड्डू के पास आकर कहा

अच्छा आपको भी पता चल गवा”,गोलू ने कहा
गुड्डू ने गोलू की गर्दन दबोची और उसके सर पर मारकर कहा,”साले हमाओ नाम खराब करे की कसम खा लेइ हो , सोनू भैया के हिया दारू पीकर भंड होने की का जरूरत थी बे तुमको,,,,,,,,,,ऊपर से हमसे बकैती करे सो अलग,,,,,,,,,,कसम से गोलू नाम मा दम कर रखे हो तुमहू हमायी”
“अरे गुड्डू भैया सॉरी ना,,,,,,,,आज के बाद नाही पिएंगे”, गुड्डू की बाँह में दबे गोलू ने कहा
“अरे गुड्डू जीजू ये क्या ? सुबह सुबह बेचारे गोलू जी के पीछे क्यों पड़े है आप ?”,प्रीति ने गुड्डू के पास आकर कहा

अच्छा आपको भी पता चल गवा”,गोलू ने कहा
गुड्डू ने गोलू की गर्दन दबोची और उसके सर पर मारकर कहा,”साले हमाओ नाम खराब करे की कसम खा लेइ हो , सोनू भैया के हिया दारू पीकर भंड होने की का जरूरत थी बे तुमको,,,,,,,,,,ऊपर से हमसे बकैती करे सो अलग,,,,,,,,,,कसम से गोलू नाम मा दम कर रखे हो तुमहू हमायी”
“अरे गुड्डू भैया सॉरी ना,,,,,,,,आज के बाद नाही पिएंगे”, गुड्डू की बाँह में दबे गोलू ने कहा
“अरे गुड्डू जीजू ये क्या ? सुबह सुबह बेचारे गोलू जी के पीछे क्यों पड़े है आप ?”,प्रीति ने गुड्डू के पास आकर कहा

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