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Manmarjiyan Season 4 – 25

Manmarjiyan Season 4

Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

Manmarjiyan Season 4 – 25

Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

गुड्डू जुगनू के साथ पुलिस स्टेशन जा पहुंचा। अंदर आकर गुड्डू ने देखा गोलू , गुप्ता जी , मंगल फूफा , एक हट्टा कट्टा आदमी और उसके साथ चार लड़के थाने में एक तरफ उकडू बैठे थे। पास ही एक हवलदार खड़ा था और इन्पेकटर अपनी कुर्सी पर बैठा था। गुड्डू को देखते ही गोलू की जान में जान आयी वह उठा और ख़ुशी भरे स्वर में कहा,”गुड्डू भैया आप आ गए”

गोलू जैसे ही गुड्डू की तरफ बढ़ने लगा हवलदार ने उसके पैरो पर डंडा मारा और कहा,”ए चुपचाप  बैठो वहा”
“अरे हमाये गुड्डू भैया है,,,,,,,,,!!”,गोलू ने मिमियाते हुए कहा
“गुड्डू भैया है सलमान खान नाही जो इत्ता खुश हो रहे हो,,,,,,,,,और जे हिया कर का रहा है ?”,गुप्ता जी ने गोलू को पकड़कर नीचे बैठाते हुए कहा
“अरे इसी को तो भाईचारा कहते है पिताजी , हिया हम मुसीबत मा पड़े और गुड्डू भैया आ गए हमे बचाने,,,,,,,,!!!”,गोलू ने खुश होकर कहा

गुड्डू ने एक नजर सबको देखा और सीधा इंस्पेक्टर के पास आकर कहा,”हमारा नाम गुड्डू है”
“तो हम का करे ?”,इंस्पेक्टर ने रूखे स्वर में कहा
“आपने ही हमे फोन करके हिया बुलाया था”,गुड्डू ने कहा
“ओह्ह्ह तो तुम हो इह सब आतंकवादियों के लीडर,,,,,,,!!!,इंस्पेक्टर ने सर उठाया और गुड्डू की तरफ देखकर कहा  

“अरे कैसी बाते कर रहे है आप ? हम कोई लीडर वीडर नाही है और ना ही उह्ह्ह लोग आतंकवादी है,,,,,,,हमाओ नाम है गुड्डू मिश्रा उर्फ़ अर्पित मिश्रा , कानपूर चौक मा हमायी मिश्रा वेडिंग प्लानर की दुकान है”,गुड्डू ने कहा
 इंस्पेक्टर ने सुना तो बड़े ध्यान से गुड्डू को देखा , गुड्डू की पर्सनालिटी और पहनावा देखकर इंस्पेक्टर को नहीं लगा कि गुड्डू कोई गैर क़ानूनी काम भी करता होगा। उसने सामने बैठे लोगो को देखा और फिर गुड्डू से कहा,”जमानत करवानी पड़ेगी”

“किस बात की जमानत ? एक तो बिना किसी जुर्म के आपने इनको यहाँ थाने में लाकर बैठा दिया ऊपर से जमानत की बात कर रहे है,,,,,,,,,देखिये इंस्पेक्टर साहब थोड़ा बहुत कानून हम भी जानते है,,,,,,,,नहीं बताईये हमे किस एंगल से जे आपको आतंकवादी लग रहे है,,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने भड़ककर कहा  
गुड्डू को ऊँची आवाज में बात करते देखकर इंस्पेक्टर को गुस्सा आ गया वह उठा और गुड्डू की गर्दन पर हाथ लगाकर उसे साइड में धकेलकर कहा,”जियादा चू चपड़ की ना तो इन सबके साथ तुमको भी बैठा देंगे समझे”
गुड्डू लड़खड़ा कर हवालात की सलाखों से टकराया गनीमत था वह नीचे नहीं गिरा और उसे कोई चोट नहीं लगी।

इंस्पेक्टर की इस हरकत पर गुड्डू का चेहरा गुस्से से लाल हो उठा उसने सामने देखा और जैसे ही पलटने को हुआ रुक गया और  हवालात के अंदर बैठे लवली पर उसकी नजर पड़ी। लवली को हवालात में देखकर गुड्डू के चेहरे पर हैरानी के भाव उभरे और उसने कहा,”लवली भैया आप हिया ?”
गुड्डू की आवाज लवली के कानो में पड़ी तो लवली ने सामने देखा , गुड्डू को वहा देखकर लवली हैरान भी हुआ और खुश भी ,,

वह गुड्डू के पास आया और कहा,”अच्छा हुआ गुड्डू तुम हिया आ गए,,,,,,,,,गुड्डू उह्ह्ह मंगेश्वा , पुलिस ने ओह्ह का छोड़ दिया,,,,,,,,,,!!”
“लेकिन इन लोगो ने आपको जेल मा बंद काहे किया है ?”,गुड्डू ने हैरानी से पूछा
“थाने में खड़े होकर पुलिसवाले की कोलर पकड़ेगा तो क्या आरती उतरेंगे इसकी ?”,पास ही खड़े कॉन्स्टेबल ने कहा

गोलू ने सुना तो झुककर हवालात की तरफ देखा और जैसे ही नजर लवली पर पड़ी उसने हैरानी से कहा,”अरे गुड्डू भैया , लवली भैया भी यही है,,,,,,,,!!!”
“गोलू तुम चुप रहोगे थोड़ी देर,,,,,,,,,,,एक तो ऐसे ही हमाओ दिमाग काम ना कर रहो”,गुड्डू ने गोलू की तरफ देखकर थोड़ा गुस्से से कहा तो गोलू चुपचाप बैठ गया।  

गुड्डू लवली की तरफ पलटा और बेचैनी भरे स्वर में कहा,”लवली भैया आपको हिया नाही होना चाहिए था , पिताजी को पता चला तो उन्हें बहुते बुरा लगेगा। पहिले ही उह्ह्ह हमायी वजह से कित्ती बार परेशान हो चुके है,,,,आपने पुलिसवाले का कोलर काहे पकड़ा और उह्ह्ह छोड़िये हमे जे बताईये कि आप हिया का कर रहे है ?”
“गुड्डू हम तुमको सब बताएँगे फ़िलहाल के लिए हमे यहाँ से निकालो”,लवली ने मायूसी भरे स्वर में कहा

गुड्डू ने हामी में गर्दन हिलायी और इंस्पेक्टर के पास चला आया। उसने इंस्पेक्टर को समझाया और अपने जान पहचान के कुछ लोगो से बात भी करवाई। थोड़े पैसे लेकर इंस्पेक्टर ने लवली को सलाखों से बाहर निकाल दिया ये देखकर गोलू ने मिमियाकर कहा,”गुड्डू भैया ! हमे भी,,,,,,,,!!!”
गुड्डू ने देखा गोलू , गुप्ता जी और मंगल फूफा भी यहाँ फंसे है तो उसने उन्हें भी वहा से छुड़वाया। शनि भैया और उनके लड़को को पुलिस पिछले कुछ महीनो से ढूंढ ही रही थी इसलिए उन्हें सलाखों के पीछे डाल दिया।

गुड्डू ने इंस्पेक्टर को धन्यवाद कहा और सबको लेकर बाहर आया। थाने से बाहर आकर गुड्डू गुप्ता जी की तरफ पलटा और थोड़ा गुस्से से कहा,”गोलू का हमको समझ आता है चाचा लेकिन आप , आप इतने बड़े होकर इन छछुदंरो के साथ हो लिए,,,,,,,,,,अरे आप बड़े है इन्हे समझाने के बजाय इनके साथ मिलकर बकैती कर रहे है ,, अगर हम वक्त पर नहीं न आते तो जानते है ना का होता ?”
“का होता गुड्डू भैया ?”,गोलू ने पूछा

गुड्डू गोलू की तरफ पलटा और कहा,”तो बेटा उलटा लटका के नीम की संटी से सुताई होती और का होता ?”
गुड्डू को गुस्से में देखकर गोलू तो चुपचाप पीछे खिसक गया , गुड्डू ने एक बार फिर गुप्ता जी की तरफ देखा और हाथ जोड़कर कहा,”हमहू हाथ जोड़कर बिनती करते है चचा थोड़ी शांति रखो और ये गोलू तिकड़मबाज की बातो में आवे की कोनो जरूरत नाही,,,,,,,,,घर जाईये और चाची को मनाईये और उनसे कहिये कि अपने घर मा जे ब्रह्माण्ड के ग्रह इकट्ठा करना बंद करे कबो मंगल तो साला कबो सनी”

गुड्डू की बातें सुनकर गुप्ता जी ने तो जैसे अपना मुँह ही सिल लिया उन्होंने हामी में गर्दन हिला दी। गुड्डू थोड़ा शांत हुआ और मंगल फूफा के सामने आकर कहा,”शांति से जीवन जीने मा कोनो दिक्कत है आपको ? रहने को चचा ने अच्छा घर दिया है , हमहू अच्छा काम दिए रहय लेकिन नाही इनको तो रंगबाजी करनी है , आपकी जे रंगबाजी ने आज हम सबको थाने पहुंचा दिया अभी भी मौका है सुधर जाईये वरना उह्ह दिन दूर नाही जब कानपूर से सीधा बनारस जायेंगे उह्ह्ह भी लोटा मा”

गुप्ता जी गुड्डू की बातो पर खामोश थे तो ऐसे में मंगल फूफा में भला इतनी हिम्मत कहा कि वे गुड्डू को जवाब दे उन्होंने भी अपने होंठो को सिल लिया और चुपचाप सब सुनते रहे। गुड्डू ने दोनों को खामोश देखा तो कहा,”जाईये घर जाईये”
गुप्ता जी और मंगल फूफा चुपचाप वहा से आगे बढ़ गए , उनके पीछे पीछे गोलू भी जाने लगा तो गुड्डू ने उसकी कोलर पकड़कर उसे पीछे खींचा और कहा,”तुम कहा जा रहे हो ? तुमसे तो हमको बात करनी है”
“अह्ह्ह्ह हहहहह कही नहीं गुड्डू भैया हम तो बस ऐसे ही”,गोलू ने झेंपते हुए कहा

गुड्डू अपनी बाइक पर आकर बैठा , गोलू और लवली से अपने पीछे बैठने को कहा और जुगनू से सोनू भैया के ऑफिस जाने को कहा जहा आज शाम पार्टी थी। गुड्डू ने बाइक स्टार्ट की और गोलू लवली को लेकर वहा से निकल गया। आधे घंटे बाद गुड्डू ने एक चाय की टपरी पर आकर बाइक रोकी और तीनो बाइक से नीचे उतर गए। गुड्डू को देखते ही दुकानवाले ने हवा में हाथ उठाया और मुस्कुराकर कहा,”कैसे हो गुड्डू ?”
“बस बढ़िया चचा तीन ठो चाय लगवा दीजिये”,गुड्डू ने कुर्सी खिसकाकर कहा

लवली ने देखा कानपूर में अधिकांश लोग गुड्डू को जानते थे और सब उस से बहुत ही प्यार से बात करते थे। लवली ने कुर्सी खिसकाई और बैठते हुए कहा,”का बात है गुड्डू कानपूर मा काफी पहिचान है तुम्हायी”
“पहिचान तो बहुत है लवली भैया पर जे की रंगबाजी के चक्कर मा सब मिटटी मा मिलती जा रही है”,गुड्डू ने अपनी बगल में बैठे गोलू के सर पर एक चपत लगाकर कहा
“अब हम का किये ?”,गोलू ने भड़ककर कहा

गुड्डू गोलू की तरफ पलटा और कहा,”जब हम तुमको कल शाम मा कहे रहय कि आज सोनू भैया के ऑफिस की पार्टी है सुबह हमको वहा मिलना तो घर पर गुप्ता जी के साथ का आँख मिचौली खेल रहे थे तुम ?”
“अरे गुड्डू भैया बहुते बड़ा मेटर हुई गवा था आप नाही समझेंगे”,गोलू ने कहा
“हाँ तुम और तुम्हाये मेटर , साले किसी दिन तुम्हाये जे सब मेटर के चक्कर में ना हमही किसी दिन सुलट जायेंगे,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने चिढ़कर कहा

“ए गुड्डू भैया ! हमको चार गाली देना है देइ ल्यो , मारना है मार ल्यो पर जे सुलटने की बात नाही करो समझे,,,,,,,,!!!”,गोलू ने नाराज होकर कहा

सामने बैठा लवली मुस्कुराते हुए दोनों की बाते सुन रहा था। आज से पहले उसने ऐसी दोस्ती नहीं देखी थी। गोलू चाहे 100 गड़बड़ करे गुड्डू हर बार उसे बचाने आ जाता था तो वही गुड्डू गोलू को चाहे जितना गरियाये मारे गोलू हर बार थप्पड़ खाने आ जाता था लेकिन दोनों में कभी दूरिया नहीं आयी। गोलू को चिढ़ा हुआ देखकर गुड्डू ने कहा,”हाँ जाओ भाग के चाय लेकर आओ हमाये और लवली भैया के लिए,,,,,,!!!”
गोलू उठा और अपना सर खुजाते हुए कहा,”सुबह से कुछो खाये नाही है एक ठो बिस्कुट भी ले ले का ?”
गुड्डू ने सुना तो पहले गोलू को घुरा और फिर कहा,”जाओ लेइ ल्यो”

गोलू मुस्कुराया और बच्चो की तरह खुश होकर टपरी की तरफ चला गया। गोलू के जाने के बाद गुड्डू ने लवली से कहा,”हाँ लवली भैया अब बताईये का बात है
, आप थाने मा काहे चले गए ?”
लवली कुछ देर खामोश रहा और फिर गुड्डू को सब बता दिया। लवली की बात सुनकर गुड्डू के चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये और उसने कहा,”भैया ! जे का मतलब बिंदिया भाभी कोनो बड़ी मुसीबत मा है और अब तो ओह्ह के पिताजी मंगेश भी जेल से बाहर है,,,,,,,,,,,,!!!”

“हाँ गुड्डू यही बात तो हमे भी परेशान कर रही है ,, हमे बिंदिया को वापस चकिया भेजना ही नाही चाहिए था,,,,,,पता नहीं वहा किस हाल मा होगी उह्ह्ह,,,,,!!”,लवली ने परेशानी भरे स्वर में कहा
“आप चिंता मत कीजिये कोई न कोई हल निकल आएगा”,गुड्डू ने लवली को तसल्ली देते हुए कहा

“हमारा बिंदिया से मिलना बहुते जरुरी है और पिताजी हमे वहा जाने नहीं देंगे हमे तो समझ नहीं आ रहा हम का करे ?”,लवली ने हताश होकर कहा
“आप नहीं जा सकते तो का हुआ हम और गुड्डू भैया है ना ?”,गोलू ने चाय से भरे गिलास गुड्डू और लवली के सामने रखते हुए कहा
“हम और तुम का कर लेंगे बे ?”.गुड्डू ने अपनी चाय उठाकर कहा

गोलू ने कुर्सी खिसकाई और उस पर आ बैठा उसने चाय का गिलास सामने टेबल पर रखा और हाथ में पकड़ा बिस्कुट का डिब्बा फाड़कर कहा,”बहुत कुछ , अब देखो मिश्रा जी लवली भैया को चकिया इहलीये नाही जाने दे रहे क्योकि जे है गुस्से वाले , खामखा वहा पे मंगेश मिल गवा और गुस्से मा इन्होने उनको पेल दिया तो परोब्लम हो जाएगी ना गुड्डू भैया,,,,,,,,,रही आपकी बात तो आप इनसे बिल्कुल अलग शांत , समझदार और दिल से सोचने वाले ,, हमको पूरा विश्वास है आप शांति से सब मामला सुलटा लेंगे,,,,,,,,बस लवली भैया को हिया गुड्डू और लवली दोनों बनकर रहना होगा”

लवली को गोलू की बाते धीरे धीरे समझ आ रही थी लेकिन गुड्डू के सर के ऊपर से गयी उसने गोलू के हाथ से बिस्कुट छीना और कहा,”तुम कहना का चाहते हो गोलू साफ साफ कहो ना ?”
“गुड्डू भैया हम जे कह रहे कि अभी दुइ दिन बाद चंदौली मा एक ठो आर्डर है और उसी चंदौली के गाँव में है बिंदिया,,,,!!!”,गोलू ने बहुत ही सस्पेंस के साथ कहा
लवली ने सुना तो उसके हाथ में पकडे बिस्कुट के डिब्बे से एक बिस्किट निकालकर कहा,”बिंदिया भाभी”

गोलू अपनी बात कहने में इतना सीरियस था कि उसने बाकि बिस्किट भी लवली के हाथ में थमा दिए और कहा,”हाँ भाभी,,,,,,,!!!”
गोलू ने गुड्डू की तरफ देखा और कहा,”चंदौली का अरेंजमेंट हम और लड़का लोग देख लेंगे आप भाभी के घर निकल जाना , वैसे भी आपकी और लवली भैया की शक्लें मिलती है तो किसी को आप पर शक भी नहीं होगा”
“हम्म्म बात तो तुम्हारी ठीक है गोलू लेकिन,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने कहा

“लेकिन का गुड्डू भैया ? अरे जैसे आप हमाये जिगरी है वैसे इह भी तो हमाये बड़े भाई है और हमने तय कर लिया है आज से सब बकैती , रंगबाजी बंद और काम पर फोकस करेंगे”,गोलू ने अपनी चाय खत्म करके कहा
“जे इत्तो जल्दी तुम्हे ह्रदय परिवर्तन कैसे हुई गओ ?”,गुड्डू ने हैरानी से कहा
“बस यार गुड्डू भैया आपकी उह्ह पहिचान वाली बात ना साला दिल पर लग गयी,,,,,,,,,तो बस हमने डिसाइड कर लिया अब से रंगबाजी नहीं करेंगे”,गोलू ने कहा

“अच्छा और काण्ड ?”,गुड्डू ने कहा जो कि गोलू की रग रग से वाकिफ था
“अब काण्ड का और हमरा तो जन्मो जन्मो का रिश्ता है , हमहू करने तो कर्म ही जाते है पर का करे उह्ह खुद ब खुद कांड में बदल जाता है”,गोलू ने मासूमियत से कहा
“इह सब तो ठीक है गुड्डू लेकिन अगर पिताजी को जे सब के बारे में पता चला तो”,लवली ने चिंतित स्वर में कहा

“अरे लवली भैया गुड्डू गोलू की टीम मा आकर पिताजी से डर रहे है आप , किसी से नहीं डरने का न मिश्रा जी से , न गुप्ता जी से , ना पुलिस से , न गुंडों से , न केशव पंडित से , न मोहल्ले वालो से , ना कानपूर वालो से,,,,,,,,,,मस्त जीने का”,कहते हुए गोलू कुछ ज्यादा ही खुश हो गया और अपना हाथ लवली के कंधो पर रख दिया जैसे लवली गुड्डू का बड़ा भाई ना होकर गोलू का कोई दोस्त हो।

लवली ने गोलू को घुरा तो गोलू ने खिंसियाकर अपना हाथ नीचे कर लिया और कहा,”Welcome इन योर फर्स्ट कांड लवली भैया”
लवली ने कुछ नहीं बस ख़ामोशी से सामने बैठे गुड्डू को देखा और गुड्डू ने अपनी पलके झपका दी  

( गुड्डू की फटकार के बाद क्या सच में शांत होने वाले है गुप्ता जी और मंगल फूफा ? क्या गोलू सच में छोड़ देगा रंगबाजी या है ये उसकी नयी चाल ? गोलू की बातो में आकर क्या लवली करने जा रहा है अपनी जिंदगी का पहला काण्ड ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

किस बात की जमानत ? एक तो बिना किसी जुर्म के आपने इनको यहाँ थाने में लाकर बैठा दिया ऊपर से जमानत की बात कर रहे है,,,,,,,,,देखिये इंस्पेक्टर साहब थोड़ा बहुत कानून हम भी जानते है,,,,,,,,नहीं बताईये हमे किस एंगल से जे आपको आतंकवादी लग रहे है,,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने भड़ककर कहा  
गुड्डू को ऊँची आवाज में बात करते देखकर इंस्पेक्टर को गुस्सा आ गया वह उठा और गुड्डू की गर्दन पर हाथ लगाकर उसे साइड में धकेलकर कहा,”जियादा चू चपड़ की ना तो इन सबके साथ तुमको भी बैठा देंगे समझे”
गुड्डू लड़खड़ा कर हवालात की सलाखों से टकराया गनीमत था वह नीचे नहीं गिरा और उसे कोई चोट नहीं लगी।

किस बात की जमानत ? एक तो बिना किसी जुर्म के आपने इनको यहाँ थाने में लाकर बैठा दिया ऊपर से जमानत की बात कर रहे है,,,,,,,,,देखिये इंस्पेक्टर साहब थोड़ा बहुत कानून हम भी जानते है,,,,,,,,नहीं बताईये हमे किस एंगल से जे आपको आतंकवादी लग रहे है,,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने भड़ककर कहा  
गुड्डू को ऊँची आवाज में बात करते देखकर इंस्पेक्टर को गुस्सा आ गया वह उठा और गुड्डू की गर्दन पर हाथ लगाकर उसे साइड में धकेलकर कहा,”जियादा चू चपड़ की ना तो इन सबके साथ तुमको भी बैठा देंगे समझे”
गुड्डू लड़खड़ा कर हवालात की सलाखों से टकराया गनीमत था वह नीचे नहीं गिरा और उसे कोई चोट नहीं लगी।

किस बात की जमानत ? एक तो बिना किसी जुर्म के आपने इनको यहाँ थाने में लाकर बैठा दिया ऊपर से जमानत की बात कर रहे है,,,,,,,,,देखिये इंस्पेक्टर साहब थोड़ा बहुत कानून हम भी जानते है,,,,,,,,नहीं बताईये हमे किस एंगल से जे आपको आतंकवादी लग रहे है,,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने भड़ककर कहा  
गुड्डू को ऊँची आवाज में बात करते देखकर इंस्पेक्टर को गुस्सा आ गया वह उठा और गुड्डू की गर्दन पर हाथ लगाकर उसे साइड में धकेलकर कहा,”जियादा चू चपड़ की ना तो इन सबके साथ तुमको भी बैठा देंगे समझे”
गुड्डू लड़खड़ा कर हवालात की सलाखों से टकराया गनीमत था वह नीचे नहीं गिरा और उसे कोई चोट नहीं लगी।

Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal
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