Manmarjiyan Season 4 – 10
गुड्डू सुबह सुबह सोनू की पार्टी के अरेंजमेंट के लिए अपनी दुकान के लिए निकल गया। लवली भी कुछ देर बाद तैयार होकर नीचे आया तब तक मिश्रा जी भी नहा चुके थे। लवली नाश्ता करने के लिए कुर्सी पर आ बैठा। वेदी को कोचिंग जाना था इसलिए वह भी तैयार होकर अपना बैग लिए चली आयी। शगुन कुछ और काम में व्यस्त थी इसलिए मिश्राइन ने सबके लिए नाश्ता परोस दिया।
“अच्छा लवली ! आज हमाये साथ शोरूम चलो वही मैनेजर साहब से तुम्हे मिलवा देते है , वो तुम्हे सारा काम भी समझा देंगे और हिसाब किताब भी,,,,,,,,!!”,निश्रा जी ने खाते हुए कहा
“जी पिताजी ! हम इसलिए आये है ताकि आपके साथ जा सके,,,,,,,!!”,लवली ने कहा बीती रात उसने मिश्रा जी से जो चकिया जाने की बात की थी उसका जिक्र लवली ने दोबारा नहीं किया और करता भी क्यों गुड्डू पहले ही उसकी परेशानी हल कर चुका था।
“बहुत बढ़िया लवली,,,,,,नाश्ता करके चलते है ,, दो हफ्ते से शोरूम गए ही नहीं है तो बहुते काम बाकी है”,मिश्रा जी ने कहा
नाश्ता करके मिश्रा जी और लवली आँगन से बाहर आये। बाइक तो गुड्डू लेकर जा चुका था अब लवली और मिश्रा जी कैसे जाए ? तभी वेदी आयी और स्कूटी की चाबी लवली को देकर कहा,”लवली भैया आप और पिताजी स्कूटी से चले जाईये”
“अरे तो फिर तुम कैसे जाओगी बिटिया ?”मिश्रा जी ने पूछा
“अरे पिताजी सुमन आ रही है ना हमायी सहेली हम उसके साथ रिक्शा से चले जायेंगे”,वेदी ने कहा और अंदर चली गयी
लवली ने वेदी की स्कूटी घर से निकाली और मिश्रा जी को साथ लेकर शोरूम के लिए चल पड़ा। मिश्रा जी लवली के पीछे बैठे थे और लवली बहुत ही अच्छे से स्कूटी चला रहा था। लवली गुड्डू से बिल्कुल अलग था गुड्डू जहा अपने बालों का स्टाइल खराब होने के चलते हेलमेट नहीं पहनता था वही लवली पुरे ट्रेफिक रूल फॉलो करता था।
लवली मिश्रा जी को लेकर जिन गलियों से गुजरा सब कोई उसे गुड्डू समझकर नमस्ते कह रहा था। लवली बस सबको देखकर मुस्कुरा देता वह हैरान था कि गुड्डू को कानपूर में इतने लोग जानते है और साथ ही खुश भी था कि उसके छोटे भाई को लोग इतना प्यार करते है
स्कूटी ट्रेफिक में आकर रुकी तो वहा तैनात ट्रेफिक हवलदार लवली के पास आया और कहा,”का बात है गुड्डू हमरी ड्यूटी के 8 सालों में आज पहली बार तुमको हेलमेट लगाए देखा है,,,,,,,,,अच्छा अच्छा पिताजी साथ मा है इहलीये,,,,बढ़िया है ,, वैसे आजकल दिखाई नाही देते जियादा बिजी हो का ? कभी मिलो शाम मा पंडित का हिया चाय पीने चलते है”
“जी,,,,,,,!!”,लवली ने झेंपकर कहा क्योकि वह तो इनसे पहली बार मिल रहा था
“अरे का जी ? साला जबसे शादी हुई है बाहिर निकलना ही छोड़ दिए हो,,,,,,,,एक दो दिन मा मिलो आकर”,ट्रेफिक हवलदार ने लवली के कान मे धीरे से कहा और वहा से चला गया
लवली ने गर्दन घुमाकर मिश्रा जी को देखा और हैरानी भरे स्वर में कहा,”जे गुड्डू ने का सबसे दोस्ती कर रखी है ? मतलब ट्रेफिक पुलिसवाले तक उसको जानते है और तो और साथ मा चाय भी पीते है”
“अरे जे गुड्डू और गोलू एक नंबर के रंगबाज है , कानपूर का ऐसा कोनो कोना नाही जहा इनकी पहिचान ना हो,,,,,,,,,दिनभर बकैती करते घूमते है तो बना ली होगी जान पहिचान , तुम परेशान ना हो लवली तुमको कोनो गुड्डू समझकर बात करे तो तुमहू बेझिझक अपना परिचय दिया करो,,,,,,,,,आखिर तुमहू भी हमाये बेटे हो,,,,,,,,तुमको गुड्डू नाही लवली के नाम से अपनी पहिचान बनानी है”,पीछे बैठे मिश्रा जी ने कहा तो लवली ने हामी में सर हिला दिया और स्कूटी आगे बढ़ा दी क्योकि ग्रीन सिग्नल हो चुका था।
लवली मिश्रा जी के साथ शोरूम पहुंचा , शोरूम में सब लवली को गुड्डू समझे इस से पहले ही मिश्रा जी ने सबके सामने लवली का परिचय खुद ही दे दिया वो भी उसके नाम के साथ। गुड्डू जैसे दिखने वाले लवली को देखकर सब हैरान थे और खुश भी,,,,,,,,,,,,,!!! लवली को मैनेजर के साथ छोड़कर मिश्रा जी अपने केबिन में चले गए और बीते दिनों का हिसाब किताब देखने लगे।
लवली मैनेजर से मिला उन्होंने लवली को पहले पूरा शोरूम अच्छे से घुमाया , पूरे स्टाफ से मिलवाया और फिर मिश्रा जी का किस किस के साथ कहा कहा लेंन देंन है बताया। लवली अकाउंट्स में बहुत अच्छा था और इन सब कामो में उसकी दिलचस्पी भी थी इसलिए वह ख़ुशी ख़ुशी और पुरे दिन से सब काम समझने लगा आखिर मिश्रा जी के बाद ये सब उसे ही तो सम्हालना था।
गुड्डू दूकान पहुंचा और अंदर आकर देखा गोलू अभी तक नहीं आया था। उसने सामान जमाते लड़के रवि से कहा,”ए रवि ! उह्ह गोलू नाही आया ?”
“गोलू साहब तो नाही आये”,रवि ने अपना काम करते हुए कहा
गुड्डू ने रवि के मुँह से गोलू के लिए “साहब” सुना तो हैरानी से उसका मुँह खुला का खुला रह गया उसने रवि को देखा और कहा,”रवि ! हिया आना बेटा”
“जी गुड्डू भैया”,रवि ने गुड्डू के सामने आकर मुस्कुराते हुए कहा
गुड्डू ने रवि की गुद्दी पकड़ी और उसे आगे पीछे करके दाँत पीसते हुए धीमे स्वर में कहा,”जे गोलुआ साहब कब से हो गवा बे ? हमको गुड्डू भैया ओह्ह का गोलू साहब,,,,,,,,,का सुबह सुबह भांग खाये हो ?”
“अरे नहीं नहीं गुड्डू भैया हम तो उनको गोलू भैया ही बुलाते आये है उह्ह्ह कल हमसे कहे रहे कि हम अब से उनको “साहब” कहकर बुलाये तो हमने,,,,,,,,,!!!”,रवि ने मिमियाते हुए कहा तो गुड्डू ने उसे छोड़ दिया और बड़बड़ाया,”जे साला गोलू को काम कुछो करना नाही होता जब देखो तब बकैती करवा लो इनसे,,,,,,दुकान भी नाही पहुंचे है अभी तक , सुबह ही मैसेज किये रहय कि सोनू भैया के हिया अरेंजमेंट देखना है लेकिन नाही सो रहे होंगे घोड़े बेचकर,,,,,,,,,,अब हम उसके घर जाकर उसको उठाये या हिया काम देखे”
गुड्डू को गुस्से में देखकर रवि ने कहा,”गुड्डू भैया ! ठंडा बोल दे आपके लिए ?”
गुड्डू एक तो पहले ही गोलू से गुस्सा था और रवि की बात सुनकर और चिढ गया उसने अपना जुत्ता निकाला और रवि के पीछे फेंककर कहा,”पहिले से हमाओ दिमाग गरम है काम पे ध्यान दो , सुबह जो सामान वाह्टसप किये है ओह्ह्ह का लोड करवाओ और ध्यान रहे कोनो मिस्टेक हुई ना तुम्हायी बत्ती बना देंगे हम समझे,,,,,,,,,,!!”
रवि को गुड्डू का जूता लगता इस से पहले ही वह हँसते हुए वहा से भाग गया। दुकान के बाहर खड़ा गुड्डू एक पैर में जूता पहने गोलू को फोन लगाने लगा लेकिन गोलू ने फोन नहीं उठाया , उठाता भी कैसे उसका फोन तो अंदर था और गोलू घर के बाहर,,,,,,,,,,,!!”
गुड्डू फोन कान से लगाये गोलू के फोन उठाने का इंतजार कर रहा था तभी एक आदमी गुड्डू के सामने से गुजरा उसने जब गुड्डू के एक पैर में जूता देखा तो कहा,”अरे गुड्डू भैया ! तुमहू एक पैर मा जूता पहिनना भूल गए शायद,,,,,,,,,,!!”
गोलू के फोन ना उठाने से गुड्डू पहले ही चिढ़ा हुआ था अब आदमी के टोकने से और चिढ गया और कहा,”हमहू जूता चाहे पैर मा पहिने चाहे गले मा तुमहू जूते खाने वाली बात काहे कर रहे हो बे ?”
आदमी ने सुना तो मुँह फाड़कर गुड्डू को देखने लगा। गुड्डू ने उसे आगे धकियाते हुए कहा,”अबे निकलो , दिनभर अब का तुम्हायी शक्ल देखते रहेंगे”
आदमी गुड्डू को देखते हुए वहा से चला गया
गुड्डू दुकान के बगल में बनी चाय की टपरी के बाहर पड़ी बेंच पर आ बैठा और हताश होकर कहा,”चचा ! एक ठो चाय पिलाओ यार”
“हाँ हाँ बइठो बनाते है”,आदमी ने कहा और भगोने में करछी घुमाने लगा। गुड्डू ने अभी भी पैर में एक ही जूता पहना था और दिमाग में चल रहा था बस गोलू कि एक बार गोलू उसके हाथ लग जाए तो फिर गुड्डू तबियत से उसकी धुलाई करे और उसको धंधे का कायदा कानून समझाए क्योकि गोलू लातों का भूत था बातों से कहा मानने वाला था।
गुप्ता जी का घर , कानपूर
यादव का मामला शांत करके , सबको अपने अपने घर भेजकर गोलू मंगल फूफा को लेकर जैसे ही अंदर आया सीढ़ियों पर खड़े गुप्ता जी ने मंगल फूफा के सामान को घर से बाहर फेंका और कहा,”अपना बोरिया बिस्तर उठाओ और भाग जाओ हिया से , साला ये एक मुसीबत कम है हमाये जीवन मा जो अब तुमहू भी हमायी छाती पर चढ़कर मूंग दल रहे हो ,, ससुरा नाक मा दम कर रखे है,,,,,,,,,,,,,अभी के अभी उठाओ अपना जे चड्डी बनियान और निकलो हमाये घर से”
“तुमको मुसीबत कह रहे है गुप्ता जी”,मंगल फूफा ने गोलू को भड़काते हुए धीमे स्वर में कहा
“ए ए का का कानाफूसी कर रहे गोलुआ के कान मा,,,,,,हिया हमसे बात करो मेन टू मेन”,गुप्ता जी ने मंगल फूफा को डपटकर कहा
“तो का हम मेन नाही है ?”,गोलू ने चिढ़कर गुप्ता जी के सामने आकर कहा
“मेन नाही तुमहू साले उह्ह फेन हो जिसका कोनो स्विच नाही है,,,,,,,बाहर हमायी छीछा लेदर करवाने में कोनो कमी नाही छोड़ी है तुमने,,,,,,,,,,,,,!!”,कहकर गुप्ता जी मंगल फूफा की तरफ पलटे और चुटकी बजाकर कहा,”और तुम छोटा रिचार्ज ! तुम का साले कसम खा लिए हो मोहल्ला में हमायी धोती उतारकर मानोगे ? कित्ती बार कहे उह्ह्ह फुलवारी से दूर रहो लेकिन नाही अमावस की रात मा भी इनको चाँद देखना है,,,,,,,,,,,,,,आशिक़ की औलाद”
“आपको कैसे पता मंगल फूफा चाँद देखने गए रहय ?”,गोलू ने हैरानी से पूछा
गुप्ता जी मंगल पर पहले ही गुस्सा थे ऊपर से गोलू उन्हें और गुस्सा दिला रहा था उन्होंने गोलू की गुद्दी पकड़ी और उसे आगे पीछे करके कहा,”जे बाल ना बेटा धुप मा सफ़ेद नाही किये है हमहू समझे,,,,,,,,,,,,,!!”
“समझ गए,,,,,,!!”,गोलू ने घबराकर कहा
गुप्ता जी ने गोलू को छोड़ा और कहा,”का समझे ?”
“कि जे बाल धुप मा नाही पुष्प हिना से सफ़ेद हुए है,,,,,,,इहलिये हमहू नाही लगाते पुष्प हिना हमहू गार्नियर लगाते है”,गोलू ने कहा
गुप्ता जी ने आसमान की तरफ देखा और कहा,”काश कि धरती फ़टे और हमहू ओह्ह मा समा जाये , कैसा नमूना हमायी झोली मा डाल दिए हो भगवान,,,,,,,,,!!!”
गोलू ने जैसे ही कुछ बोलना चाहा गुप्ता जी ने एक थप्पड़ उसके गाल पर जड़ा और कहा,”चुपचाप साइड मा खड़े रहो वरना जे मंगलू के साथ तुमहू भी अपना बस्ता बांध ल्यो समझे”
गोलू तो एक थप्पड़ में ही शांत हो गया और साइड में खड़ा हो गया। गुप्ता जी ने देखा मंगल फूफा का सामान अभी भी नीचे पड़ा है और वे चुपचाप सामने खड़े है तो उन्होंने गुस्से से भड़ककर कहा,”अब तुम्हे का भोंपू बजाकर बोले , उठाओ अपना सामान और निकलो हमाये घर से,,,,,,,,,,हमाओ घर कोनो धर्मशाला नाही है कि मुँह उठाकर हिया चले आये,,,,,मंगल डाकू होंगे तुमहू अपने घर के अपने घर के हमहू भी सरदार खान है समझे,,,भाग जाओ हिया से”
कहकर गुप्ता जी पलटे और जैसे ही जाने लगे मंगल फूफा ने रोते हुए कहा,”का जे ही दिन देखने के लिए हमहू अपनी डाकूगिरि छोड़े थे ? का जे ही सब सुनने के लिए हमहू गलत रास्ता छोड़कर अच्छे रास्ते पर चले थे ? अरे कानपूर मा का हमको घर की कमी थी लेकिन तुम्हरे हिया रुके क्योकि तुमको अपना आदर्श माने,,,,,,,,,,!!”
मंगल की बातें सुनकर गुप्ता जी पलटे मंगल अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाया कि गुप्ता जी उसके पास आया और कहा,”सुनो बे मंगलिया ! इह घर मा उह्ह्ह चांडाल आदर्श्वा नाम तो तुमहू लेना नहीं,,,,,,,,साला ओह्ह की वजह से बहुते मार खाये है हम,,,,,,,हमको ओह्ह से कम्पेयर किये ना तो टाँगे काट के सिंगल सोफा बना देंगे तुम्हरा समझे”
“अरे हमहु आदर्श फूफा की बात नाही कर रहे हमहू तो आदर्श,,,,,,,,अरे उह्ह्ह का कहते है अंग्रेजी मा , ए गोलू ए यार समझाओ इनको,,,,,,,,,,,,!!”,मंगल फूफा ने उलझनभरे स्वर में कहा
“अरे पिताजी आइडियल बोल रहे है जे आपको अपना,,,,,,,!!”,दूर खड़े गोलू ने हाथ गाल से लगाए कहा
गुप्ता जी मंगल फूफा की तरफ पलटे और मंगल फूफा की कोलर पकड़ कर कहा,”साले तुम्हायी जे हिम्मत हमको अड़ियल कहो उह्ह्ह भी अंग्रेजी मा”
“अरे गोलू यार छुड़ाओ हमे इनसे”,मंगला फूफा चिल्लाये तब तक गुप्ताइन और पिंकी भी शोर सुनकर बाहर चली आयी। गुप्ताइन ने जब देखा कि मंगल फूफा और गुप्ता जी आपस में उलझे हुए है तो घबरा गयी।
गुप्ताइन की नजर बगल में गाल से हाथ लगाए गोलू पर पड़ी तो उन्होंने गोलू के दूसरे गाल पर मारा और गुस्से,”हुआ बेचारे हमाये मंगल फूफा और तुम्हाये पिताजी आपस मा उलझे पड़े है और तुमहू गाल से हाथ लगाए तमाशा देख रहे हो,,,,,,,!!”
सुबह सुबह गोलू को ये तीसरा थप्पड़ पड़ चुका था और अब उसका बौखलाना जायज था।
वह गुस्से में उछलकर गुप्ताइन के सामने आया और कहा,”ए अम्मा ! हमको इक ठो बात बताओ हमहू साला आपकी और पिताजी की ही औलाद है न ? नहीं मतलब जोन हिसाब से आप लोग हमको मारते हो लगता नाही हमाये पैदा होने के लिए भगवान से कोनो मन्नत मांगी होगी , मन्नत का पता नाही सुपारी जरूर लिए हो दोनों मिलके कानपुर मा किसी से,,,,,,,,,,,,का जब देखो तब अपने हाथ की मोहर हमाये गालों पर चिपकाते रहते हो दोनों,,,,,,,!!!”
“बकैती नाही करो जाकर छुड़वाओ उनका,,,,,,,,,,,ए गोलू के पिताजी का कर रहे हो छोड़ दयो ओह्ह्ह का”,गुप्ताइन ने पहले गोलू को झिड़का और फिर गुप्ता जी ने कहा
गुप्ता जी ने मंगल को छोड़ा तो बेचारा मंगल नीचे जा गिरा। गुप्ता जी गुप्ताइन के पास आये और गुस्से से कहा”,तुमहू बीच मा नाही पड़ो गुप्ताइन , तुम्हरे कहने पर हमने इनको हिया रहने दिया पर कुत्ते की दुम और जे तुम्हाये मंगल फूफा कबो सीधे नाही हो सकते,,,,,,,,,
अरे उह्ह्ह फुलवारी के प्रेम का भूत उतरा नाही है जे के सर से,,,,,,,,,,,ससुरे खुद तो मरेंगे ही मरेंगे हमायी भी छीछा लेदर करवा के मानेंगे,,,,,,,बस गुप्ताइन हमहू फैसला कर लिए है अब जे हमाये घर मा नाही रहेगा,,,,,,,,,इह से कही दयो हिया से चला जाये,,,,,,,,,,!!!”
“लेकिन हम जायेंगे कहा ?”,मंगल फूफा ने उठकर अपने कपडे झाड़ते हुए कहा
“हमायी तरफ से जहन्नुम मा जाओ हमको कोनो मतलब नाही हमको बस जे मोहल्ला मा दिखे ना तो यादववा के साथ मिल के ओह्ह की भैंसिया को तुम्हरे पीछे छोड़ देंगे समझे,,,,,,,,!!!”,गुप्ता जी ने गुस्से से कहा
उन्हें गुस्से में देखकर गुप्ताइन समझ गयी कि जरूर इस बार मंगल फूफा ने बड़ी गड़बड़ की है फिर भी उन्होंने जैसे ही कुछ कहने की कोशिश की गुप्ता जी ने कहा,”और किसी को इन से जियादा हमदर्दी है ना तो उह्ह भी जे के साथ जा सकता है,,,,,,,,,,,!!!”
गुप्ता जी अंदर चले गए और गुप्ताइन भी पिंकी को साथ लेकर उनके पीछे चली गयी।
मंगल फूफा रोनी सी सूरत बनाकर खड़े थे और सीढ़ियों के पास खड़ा गोलू गुस्से से उन्हें देख रहा था। गुप्ता जी के जाने के बाद गोलू मंगल फूफा के पास आया और कहा,”कित्ती बार कहे थे हम आपसे कि उह्ह फुलवारी का चक्कर छोड़ दयो पर नाही तब तो मुगले आजम के सलीम बने हुए थे “प्यार किया तो डरना का ?”
अभी लगा ना डर , फटी ना छाती,,,,,,,,,,,!!!”
“छाती नाही गोलू कुछो,,,,,,,,,,,,,,!!”,मंगल फूफा ने सुबकते हुए कहा
“हाँ तो तुम्हायी कहावत के चक्कर मा फॅमिली स्टोरी को वल्गर बना दे,,,,,,,,,हमहू छाती कहेंगे तुमको जो समझना है तुमहू समझ ल्यो,,,,,,,,वैसे भी पिताजी ने तो घर से निकाल ही दिया है आपको”,गोलू ने अफ़सोस भरे स्वर में कहा
“ए गोलू कुछो करो न , कुछो करो न , कुछो करो न ए ए मेरे भाई कुछो करो ना”,मंगल फूफा गिड़गिड़ाने लगे तो गोलू ने चिल्लाया,”अरे रुको ! सोचने तो दो का जोंक की तरह चिपक गए हमसे कुछो करो न कुछो करो न , तुम्हरी कैसेट का अटक गयी है,,,,,,,,,,खड़े रहो शांति से सोचने दो , एक तो साला सुबह से ना चाय मिली ना नाश्ता,,,,,,ऊपर से तुमहू हमाये खून के प्यासे बने हो,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने कहा
“सोचो , तुमहू सोचो , हमाये हिस्से का भी तुम्ही सोचो गोलू हमाओ तो दिमाग अब काम ना कर रहो”,कहते हुए मंगल फूफा ने अपनी कनपटी से हाथ लगाया और वही नीचे गोलू के कदमो में बैठ गए।
गोलू जिसकी जिंदगी में इतनी मुश्किल से शांति आयी थी अब फिर से तूफान आ चुका था। गोलू ने सोचा , बहुत सोचा , कभी सीढ़ियों पर बैठकर , कभी झूले पर लेटकर , कभी इधर उधर चलकर तो कभी कपडे सुखाने के तार पर झूलकर और लगभग 10 मिनिट बाद गोलू मंगल फूफा के सामने आया और कहा,”सोच लिया”
मंगल फूफा ख़ुशी से भरकर उठे और कहा,”का सोचा ? जल्दी बताओ का सोचा तुमने ?”
गोलू ने मंगल फूफा को देखा और उनके चेहरे को अपने हाथो में लेकर बड़ी गंभीरता से कहा,”हम तो कहते है अपना बोरिया बिस्तर उठाओ और भाग जाओ हिया से,,,,,,,,,,,,,!!!”
मंगल फूफा ने सुना तो हक्का बक्का सा गोलू को देखने लगा।
( क्या लवली अकेले सम्हाल पायेगा मिश्रा जी की जिम्मेदारियां ? क्या गुड्डू करने वाला है गोलू को धुलाई और याद दिलाने वाला है उसे उसकी जिम्मेदारी ? गुप्ता जी के घर से निकाले जाने के बाद कहा जायेंगे मंगल फूफा ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल
