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Manmarjiyan Season 4 – 1

Manmarjiyan Season 4 – 1

Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

कानपूर के चौक का नजारा देखने लायक था। केशव पंडित घबराये हड़बड़ाए से मैनपुरी की बस के पीछे भागे जा रहे थे और उनके पीछे गुस्से से बौखलायी यादव जी की भैंस भाग रही थी। यादव की भैस से केशव पंडित का कोई खास रिश्ता नहीं था लेकिन गोलू गुप्ता की वजह से यादव जी की भैस अब केशव पंडित की जान की दुश्मन भी बन चुकी थी। भागते भागते केशव पंडित ने बस के पीछे लगे डंडे को पकड़ लिया लेकिन वे बस पर चढ़ पाते इस से पहले भैस ने आकर उनके पीछे जोर से सर मारा और केशव पंडित हवा में उछल गए।

बस आगे बढ़ गयी और बेचारे केशव पंडित हवा में लहराते हुए सीधा आकर गिरे भैस की पीठ पर ,बस फिर क्या था भैंस उन्हें लेकर भाग खड़ी हुई और डरे सहमे केशव पंडित चिल्लाते हुए भैंस से चिपके रहे। कानपूर की सड़को पर भागती यादव जी की भैंस ने सुबह सुबह बाजार में हड़कंप मचा रखा था। किसी की दुकान के बाहर रखा सामान बिखेरा , किसी के ठेले पर सर दे मारा , किसी राह चलते को अपने आगे भागने पर  मजबूर किया तो किसी सुबह सुबह किसी की सब्जी भाजी पर गोबर कर दिया।

मोहन हलवाई सुबह सुबह अपनी दुकान पर जलेबी का घोल बना रहा था कि यादव जी की भैस ने रूककर एक दुलत्ती उनके हाथ पर मारी और हाथ में पकड़ा घोल का डिब्बा हवा में उछला जिस से जलेबी का घोल दूकान के साथ साथ मोहन हलवाई के सर पर गिरकर चुने लगा। मोहन ने गुस्से से भैंस को देखा तो नजर भैंस पर बैठे केशव पंडित पर पड़ी और मोहन चिल्लाया,”अबे ओह्ह्ह केशव पंडित ! सुबह सुबह हमायी दूकान मिली थी तुमको बर्बाद करने के लिए,,,,,,,जे सब का पैसा न साले तुमहू भरोगे”

“अरे हम का किया मोहन जे ससुरी यादव जी की भैसिया ने तांडव मचा रखा है भैया हमहू तो खुद अपनी जान बचाय के बैठे है”,केशव पंडित मिमियाया
अब देखो कोई और भैंस होती तो केशव पंडित की बात का शायद ही बुरा मानती लेकिन ये थी यादव जी की भैंसिया , जैसे ही अपने लिए ससुरी शब्द सुना गुस्से से गोल गोल घूमने लगी और इसी के साथ ऊपर बैठे केशव पंडित भी और बेचारे चक्कर खाकर ऐसे गिरे की दिन में तारे नजर आ गए।

आस पास के लोगो ने भैंस को काबू में करने का सोचा तो भैंस अपनी जान बचाकर वहा से भागी और भागते हुए पूछ केशव पंडित के हाथो में आ गयी।
आगे भैंस और पीछे उसकी पूछ पकडे केशव पंडित , भैस भागी जा रही थी और केशव पंडित घसीटते हुए उनके साथ ,, पहले धोती खुली फिर कुर्ता फटा और कानपूर की सड़क पर थूका गया ऐसा कोई गुटखा ना होगा जिस से केशव पंडित का मुँह ना रंगा हो।

कहा बेचारे केशव पंडित मिश्रा जी की अम्मा की तेहरवी का भोज खाने वाले थे और कहा कानपूर की गलियों की धूल खा रहे थे। यादव जी की भैंस ने भी आज जैसे कसम खा ली थी कि केशव पंडित और गोलू से बदला लेकर रहेगी इसलिए अपने घर ना जाकर सीधा जा पहुंची मिश्रा जी के घर के सामने
शर्मा जी , गुप्ता जी , यादव जी और मिश्रा जी का पूरा परिवार वही मौजूद था और सभी खाना खाकर उठे ही थे।

मिश्रा जी ने जब घर के बाहर खड़ी भैंस को देखा तो गुड्डू से कहा,”ए गुड्डू ! देखो जरा बाहर खड़ी उह्ह भैंसिया को एक ठो रोटी देइ दयो”
वही बगल में गोलू हाथ धो रहा था उसने सुना तो मिश्रा जी के पास आकर कहा,”अरे चाचा ! भोज के बाद गाय को रोटी , चारा खिलाते है जे भैंसिया को काहे इत्ता इम्पोर्टेंस दे रहे है आप”
“गाय हो भैस घर के दरवाजे पर आये तो का ऐसे ही जाने दे ? तुमहू हिया आये रहय तो तुमको भी तो खिलाये रहय ना”,मिश्रा जी ने कहा

“आप का हमरी गिनती गाय भैंस मा कर रहे है ?”,गोलू ने अपनी भंव चढ़ाकर मिश्रा को देखते हुए कहा
“हमने तो ऐसा कहा नहीं”,मिश्रा जी ने भंव चढ़ाकर कहा  
“तो फिर ऐसा काहे कहे ?”,गोलू ने थोड़ा पास आकर उतने ही रहस्य्मयी तरीके से कहा
“का कैसा कहे रहे ?”,मिश्रा जी ने भी उतने ही रहस्य्मयी तरीके से कहा
“अरे वैसा,,,,,,,,!!”,गोलु ने झुंझलाकर कहा

“अबे कैसा ?”,मिश्रा जी ने भी झुंझलाकर कहा
“पिताजी जे रोटी,,,,,,,,,!!”,गुड्डू ने आकर कहा
मिश्रा जी गोलू की बातो पर पहले ही चिढ़े हुए थे गुड्डू की बात से और चिढ गए और कहा,”ठूस दयो हमाये मुँह मा , अरे हुआ सामने खड़ी है जाकर ओह्ह का खिलाओ”
मिश्रा जी की झिड़की सुनकर गुड्डे चुपचाप आगे बढ़ गया और उधर गोलू और मिश्रा जी आपस में उलझ गए वो भी ऐसी बात को लेकर जिसका ना कोई सर था ना कोई पैर।

गुड्डू ने आकर रोटी भैस के मुँह के आगे की और बड़बड़ाया,”जे पिताजी भी ना बात बात पर बिगड़ जाते है,,,,,,,,,,ल्यो तुमहू खाओ तुम्हायी किस्मत अच्छी है कम से कम हमायी तरह सुनने को तो नाही मिलता,,,,,,,,,,,,अब जे टुकुर टुकुर हमे का देख रही हो खाओ,,,,,,!!”
गुड्डू की आवाज सुनकर भैंस के पिछले पैरो में पड़े केशव पंडित ने मरे हुए स्वर में कहा,”अरे कुछो मत कहो गुड्डू जे हम इंसानो से भी ज्यादा समझदार है”

“जे केशव पंडित की आवाज है पर आ कहा से रही है ?”,गुड्डू इधर उधर देखते हुए बड़बड़ाया
केशव पंडित रेंगते हुए गुड्डू के पैरो के पास आया और जैसे ही गुड्डू ने फ़टेहाल केशव पंडित को अपने पैरों में देखा तो उछला और चिल्लाया जिस से यादव जी की भैंस फिर बिगड़ गयी और अपना सर जोर से दे मारा गुड्डू के पिछवाड़े पर ,, गुड्डू उछलकर दूर जा गिरा।

भैंस ने जैसे ही घूरकर केशव पंडित को देखा ना जाने कहा से उनमे इतनी जान आयी कि वे उठे और गुड्डू की तरफ भागे और तभी भैंस ने उन्हें भी एक सींग मारा और केशव पंडित उछलकर गुड्डू की गोद में ,, गुस्से से पागल भैंस गुड्डू की तरफ लपकी और गुड्डू केशव पंडित को अपनी गोद में उठाये यहाँ वहा भागने लगे।

शोर शराबा सुनकर मिश्रा जी और बाकि सब बाहर चले आये। बाहर का नजारा देखकर सभी हैरान थे और मिश्रा जी के चेहरे पर चिंता के भाव उभर आये।
“पिताजी ! बचाइए हमे जे भैंसिया हमको मार डालेगी”,गुड्डू ने भैस के आगे भागते हुए कहा

“अरे गुड्डू भैया ! आपसे किसने कहा भैंसिया को छेड़ने के लिए अब पड़ गयी न पीछे,,,,,,,,,कानपूर की लड़किया का कम थी जो अब गाय भैंस को भी अपनी ब्यूटी का दीवाना बना लिए हो,,,,,,,,,,,,और हमको जे बताओ जे किस मनहूस को अपनी छाती से लगाए घूम रहे हो आप ?”,गोलू चिल्लाया
गोलू के पीछे खड़े गुप्ता जी ने सुना तो एक चपत गोलू के सर पर लगाकर कहा,”अबे का भांग खाये हो ? दिखाई नहीं न दे रहा है तुम्हरा दोस्त मुसीबत मा है तुमहू हिया बकलोली कर रहे हो जाकर बचाओ उसको,,,,,,,,,और जे भैंसिया आयी कहा से ?”

“ए गुप्ता ! भैंसिया नाही कहना ओह्ह्ह का”,बगल में खड़े यादव जी ने कठोर स्वर में कहा
यादव जी जिनसे गुप्ता जी का हमेशा से 36 का आकड़ा रहा था वो कुछ कहे और गुप्ता जी ना चिढ़े ऐसा भला कैसे हो सकता है। गुप्ता जी यादव जी की तरफ पलटे और कहा,”तो भैंसिया को भैंसिया ना कहे तो का कहे ?”
“बिंदु नाम है ओह्ह का,,,,,,,,,!!”,यादव जी ने भी सीना तानकर कहा

“बिन,,,,,,,,दू , जैसा कैसा नाम है ? और यादववा तुमहू का पगलेट हो , अबे जिनावर का भी कोनो नाम रखा जाता है का ?”,गुप्ता जी ने कहा
“हां रखा जाता है , हम रखते है , कोनो दिक्कत है तुमका ?”,यादव ने चिढ़कर कहा
गुप्ता जी हसने लगे और कहा,”नाही हमे का दिक्कत होगी , नाम रखो चाहे तो स्कूल मा नाम लिखवाय दयो अपनी बिन,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,दू का”

यादव जी समझ गए गुप्ता जी उनका मजाक उड़ा रहे है तो मुँह बनाकर दूसरी तरफ देखने लगे। उधर भैस के आगे भागता गुड्डू मदद के लिए चिल्ला रहा था। लवली उस वक्त अंदर था , मिश्रा जी ने देखा कोई भी गुड्डू की मदद करने आगे नहीं जा रहा तो वे आगे जाने लगे और ये देखकर गोलू ने अपना हाथ आगे  करके उन्हें रोक लिया और कहा,”when pinkesh here , why you fear,,,,,,,,,,हम है ना हम जाते है,,,,,,,!!

गोलू भैस के सामने आया और सीना तानकर उसके सामने खड़ा हो गया। गोलू को देखकर भैंस भी रुक गयी और गुड्डू को सम्हलने का मौका मिल गया। वह भागते भागते इतना थक गया था कि केशव पंडित को साथ लेकर वही जमीन पर गिर गया।

भैंस के सामने खड़ा गोलू गुस्से से उसे देख रहा था और फिर अपनी ऊँगली दिखाकर गुस्से से कहा,”ए you black dirty buffalo , तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई हमाये गुड्डू भैया के पीछे भागने की , तुम का कही की हीरोइन हो,,,,,,,,,,,लिस्टन दफा हो जायिंग , दोबारा इधर नजर आईन्ग तो तुम्हरी टेल उठाकर गोल गोलू घुआंईंग एंड यू फ्लाईंग आउट ऑफ़ कानपूर,,,,,,,इंग्लिश इंग्लिश , यू नॉट इंग्लिश,,,,,,,तो गेट लॉस्ट,,,,,,,,,,,,,हट्ट”

मिश्रा जी के साथ खड़े लोग समझ ही नहीं पाए गोलू यादव जी की भैंस से क्या कह रहा है ? वह इतनी बुरी अंग्रेजी बोल रहा था कि सभी हैरान थे और अपने सामने शांत खड़ी भैंस को देखकर गोलू मन ही मन खुश हो रहा था। वह इतराते हुए मिश्रा जी की तरफ पलटा और कहा,देखा चाचा ! ऐसे कंट्रोल किया जाता है जानवरो को,,,,,,,,,,,!!”
“हम तो तुमको आज तक कंट्रोल नाही कर पाए”,गुप्ता जी बड़बड़ाये

“हाँ हाँ सब सुन रहे है हम,,,,,,,,,,,आपको ना साला कदर नाही है हमायी,,,,,,,,,,,!!”,गोलू ने गुप्ता जी की तरफ देखकर इतना ही कहा कि पीछे खड़ी भैंस ने खींचकर सर मारा गोलू को और गोलू महाराज हवा में उड़ते हुए गुप्ता जी के पैरो में आ गिरा। मुँह पूरा धूल मिटटी में और गोलू वही पस्त। भैंस बेकाबू हो चुकी थी , उसने गुस्से से दो तीन बार अपना सर झटका और इधर उधर देखा और सामने दौड़ पड़ी। सामने शगुन खड़ी थी और सभी ये देखकर घबरा गए। भैंस जैसे ही शगुन के करीब पहुंची एकदम से लवली शगुन और भैंस के बीच में आ गया

लवली को वहा देखकर मिश्रा जी की जान में जान आयी। लवली ने भैंस के दोनों सींगो को अपने हाथो में पकड़ा और उसकी आँखों में देखते हुए उसे पीछे धकेलने लगा। गोलू जल्दी से उठा और गुड्डू के पास चला आया। मिश्राइन ने देखा तो घबराकर कहा,”लवली,,,,,,,,,,!!!”

लवली ने सुना लेकिन इस वक्त उसका पूरा ध्यान भैंस को काबू में करने पर था और कुछ देर में ही भैंस लवली के सामने नतमस्तक हो गयी और नीचे बैठ गयी। लवली की बहादुरी देखकर सब हैरान थे और मिश्रा जी ख़ुशी से मुस्कुरा रहे थे आखिर उनके दो बेटो में से कम से काम एक तो इतना ताकतवर था। लवली शगुन की तरफ आया और कहा,”तुम ठीक हो ना शगुन ?”

“हाँ,,,,,,!!”,शगुन ने कहा उसकी आवाज में घबराहट थी
लवली मिश्राइन की तरफ आया और कहा,”लेकिन ये भैंस यहाँ आयी कैसे ?”
“अरे के केशव पंडित लेकर आये रहय अपने साथ”,गोलू ने केशव पंडित को देख बुरा सा मुँह बनाकर कहा 

 “हमायी का जे भुआ लगती है जो हम साथ लेकर घूमेंगे,,,,,,,,!!”,केशव पंडित ने चिढ़कर कहा
गोलू ने सुना तो भुआ की तरफ गर्दन घुमाई और थोड़ा ऊँची आवाज में कहा,”ए भुआ ! ए जे केशव पंडित तुमको भैंसिया कह रहे है”
“हमरी राजकुमारी के बारे में एक ठो शब्द कहा तो जबान खींच लेंगे हम आपकी समझे”,फूफा ने आगे आकर कहा

“अरे काहे इतना गुस्सा रहे है आदर्श बाबू , अब राजकुमारी थोड़ी भारी तो है ही,,,,,,,,,,,!!”,यादव जी ने कहा
“ए तुम्हरा न मुँह तोड़ देंगे हम समझे,,,,,,,,,एक तो अपनी भैंसिया को हिया बुलाय लिये ऊपर से हमायी राजकुमारी के साथ इह का कम्पेयर कर रहे हो”,फूफा ने पलटकर गुस्से में यादव जी से कहा
“भैंसिया नाही,,,बिन,,,,,,,,,,,,,,दू , बिंदु नाम है ओह्ह का,,,,,,,,!!”,यादव जी से पहले गुप्ता जी बोल पड़े और यादव जी चिढ गयी।

दो ही मिनिट में मिश्रा जी के घर के घर के बाहर मच्छी मार्किट बन गयी और सब एक दूसरे को उल्टा सीधा बोलने लगे ये देखकर मिश्रा जी चिल्लाये,”चूऊउउउप,,,,,,,,,,,सब के सब चुप हो जाओ”
मिश्रा जी की आवाज सुनकर सब चुप हो गए। मिश्रा जी ने सबको घूरकर देखा और कहा,”खबरदार जो किसी ने हमरे घर को रामनगर की पहाड़ी बनाने का सोचा भी,,,,,,,,,अम्मा की तेहरवी का भोज खा लिया ना सबने , अब दफा हो जाओ सब के सब हिया से,,,,,,,,,,!!!”

मिश्रा जी को गुस्से में देखकर सब शांत हो गए और कुछ तो इधर उधर देखने लगे।  रामनगर की पहाड़ी पर जो तमाशा हुआ था उस से कोई अनजान नहीं था। सबसे पहले शर्मा जी शर्माईन को लेकर मिश्रा जी के सामने आये और हाथ जोड़कर नमस्ते कर वहा से आगे बढ़ गए। जाते जाते शर्मा जी ने मिट्टी से भरे गोलू को देखा और दबी आवाज में कहा,”जे कबो ना सुधरे है”
गोलू ने सुना तो शर्मा जी को घूरने लगा और शर्मा जी शर्माईन को साथ लेकर वहा से चले गए।

शर्मा जी को जाते देखकर गुप्ता जी ने भी गुप्ताइन और पिंकी से चलने का इशारा किया। गुप्ताइन और पिंकी गुप्ता जी के साथ जाने लगी तो मिश्रा जी ने कहा,”ए गुप्ता उह्ह अपना छोटे रिचार्ज को भी लेकर जाओ”
गुप्ता जी ने सुना तो हैरानी से मिश्रा जी को देखा और कहा,”यार मिश्रा गोलू कब से छोटा हो गवा उह्ह तो ताड़ जीतता लंबा है”

“हम उह्ह आशिक़ की बात कर रहे है”,मिश्रा जी ने पीछे सीढ़ियों पर खड़े मंगल फूफा की तरफ इशारा करके कहा जो फुलवारी का हाथ अपने हाथो में थामे मुस्कुराते हुए उसे कुछ बता रहा था।
गुप्ता जी कुछ कहते उस से पहले यादव मंगल के पास पहुँच गया और फुलवारी का हाथ उसके हाथ से खींच लिया तो फुलवारी ने कहा,”अरे का कर रहे है आप ? मंगल भैया हमाये हाथ की लकीरे देख के हमरा भविष्य बताय रहे थे”

फुलवारी के मुंह से अपने लिए मंगल भैया सुनकर मंगल फूफा ने दर्द भरा चेहरा बनाया और हाथ सीने पर रख वहा से आगे बढ़ गया। उसे जाते देखकर यादव जी ने कहा,”तुम्हरे भविष्य के चक्कर मा हमहू अपना वर्तमान खराब नाही करेंगे फुलवारी , आओ घर चलो”

यादव जी फुलवारी का हाथ थामे जाने लगे तो मिश्रा जी ने कहा,”अपनी भैंसिया को भी लेकर जाओ,,,,,,,,!!”
यादव जी अपनी फुलवारी और बिंदु दोनों को लेकर वहा से चले गए। गुप्ता जी गुप्ताइन और पिंकी के साथ गोलू की तरफ आये और कहा,”घर चलोगे कि यही रहना है”
“आप लोग चलिए हमहू आते है थोड़ी देर मा , गुड्डू भैया से थोड़ा काम है हमे”,गोलू ने उठकर खुद को झाड़ते हुए कहा

“पिंकिया के गले मा काहे बांधे रहय मंगलसूत्र गुडडुआ के गले मा बांध देते”,गुप्ता जी ने चिढ़कर कहा  
“ए यार पिताजी आप ना सुबह सुबह हमको गुड्डू मंत्र नाही सुनाओ यार,,,,,,,,,आते है हमहू मुँह धोकर आप लोग चलिए”,गोलू ने अपने हाथ जोड़कर कहा
गुप्ता जी गुप्ताइन , मंगल फूफा और पिंकी के साथ वहा से चले गए और बाकी सबको मिश्रा जी ने अंदर जाने को कहा।

सभी अंदर चले गए तो मिश्रा जी ने निराशा से आसमान की तरफ देखा जैसे मन ही मन भगवान से कह रहे हो कि ये इतनी सारी भसड़ फ़ैलाने वालो लोगो को भगवान ने उनकी किस्मत में ही क्यों भेजा ? मिश्रा जी ने दो चार गहरी साँस ली और अंदर जाने लगे तो नजर नीचे फ़टेहाल बैठे केशव पंडित पर चली गयी।
“अरे पंडित जी आप हिया का कर रहे है आप भी अंदर चलिए आपसे कुछो काम है”,मिश्रा जी उन्हें उठाते हुए कहा
“मिश्रा जी आपका हर काम करेंगे बस हमको इस बार किसी की कुंडली देखने को ना कहना,,,,,,,,!!”,केशव पंडित ने हाथ जोड़कर कहा

मिश्रा जी ने सुना तो मन ही मन परेशान होकर खुद से कहा,”कुंडली ही तो दिखानी है पंडित जी , आखिर हम भी तो जाने शनि की उह्ह कौनसी साढ़ेसाती है जो हमरे सर से उतरने का नाम नाही ले रही है”

( क्या इस सीजन में कम होंगे गुड्डू और गोलू के कांड ? क्या मंगल फूफा फुलवारी के दिल में जगा पाएंगे अपने लिए प्यार या बंधवाएंगे अपनी कलाई पर राखी ? आखिर उह्ह्ह कौनसी साढ़ेसाती है जो मिश्रा जी के सर से उतरने का नहीं ले रही नाम ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal
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