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Love You जिंदगी – 68

Love You Zindagi – 68

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अवि को थैंक्यू बोलकर नैना निचे चली आयी और खाना खाकर सोने चली गयी। सुबह नैना उठी और देखा रुचिका और शीतल दोनों ही वहा नहीं है वह कमरे से बाहर आयी रुचिका किचन एरिया में खड़ी चाय बना रही थी और शीतल बालकनी में उदास सी खड़ी नीचे देख रही थी। नैना ने बालो को समेटकर क्लेचर लगाया और मुंह धोकर शीतल के पास चली आयी। नैना ने देखा कल रात हुए हादसे के बाद से जैसे शीतल के चेहरे की रौनक ही चली गयी हो। शीतल की आँखों में आयी नमी नैना साफ़ देख पा रही थी उसने शीतल का मूड ठीक करने के लिए अंगड़ाई लेते हुए कहा,”आज मौसम अच्छा है ना , नवरात्री के आठ दिन निकल गए और पता भी नहीं चला।”
“हम्म्म !”,शीतल ने कहा
“अच्छा , दिवाली पर तुम और रुचिका घर जा रही हो ना ,, दशहरे के बाद से ही शायद ऑफिस में छुट्टियां हो। तुम चाहो तो लखनऊ चल सकती हो इस बार दिवाली वहा मनाएंगे”,नैना ने कहा
“नहीं नैना भैया-भाभी का फोन आया था दिल्ली आने के बाद से ही मैं उनसे मिली नहीं हूँ ,, इसलिए घर ही जाउंगी।”,शीतल ने कहा
“इंदौर में तो वो कमीना राज भी है कही फिर से शीतल को अपने जाल में फंसा लिया तो प्रॉब्लम हो जाएगी , पर उस से परमानेंट छुटकारा पाने के लिए नैना को उसे फेस करना ही होगा।”,नैना ने मन ही मन खुद से कहा
“नैना ये लो तुम्हारी चाय और शीतल ये लो तुम्हारी कॉफी”,रुचिका ने आकर कहा
नैना ने चाय ली और पीने लगी शीतल ने मना करते हुए कहा,”मेरा मन नहीं है।”
“अरे ! ऐसे कैसे मन नहीं है ? देखो अब दारू तुम्हे पीला नहीं सकते तो कॉफी पीकर ही अपना दुःख भुला दो और जिंदगी की नयी शुरुआत करो। अपनी पांडा को देखो इसने भी तो लौंडे को लात मारी थी ,, आज खुश है।”,नैना ने कहा
“तू सिम्पेथी जता रही है या मेरा मजाक उड़ा रही है ?”,रुचिका ने नैना को घूरते हुए कहा
“जस्ट चिल ना पांडा तेरे लिए लल्लन टॉप लौंडा ढूंढ दूंगी मैं , और शीतल तू चिंता मत कर जिंदगी में कुछ दुःख इसलिए आते है ताकि आगे परेशानी ना हो। कॉफी पीओ और अपना मूड फ्रेश रखो।”,नैना ने रुचिका के हाथ से कॉफी लेकर शीतल को दे दी। शीतल ने भी चुपचाप कॉफी ली और पीने लगी उसकी नजर निचे बेंच पर बैठे सार्थक पर गयी। सार्थक काफी उदास लग रहा था। बीती रात की सारी बातें शीतल की आँखों के आगे घूम गयी , जिस तरह सार्थक ने सबके सामने कहा की वह शीतल से प्यार करता है एक अलग ही फीलिंग थी शीतल के मन में। कॉफी खत्म कर उसने कहा,”नैना मैं नहाकर आती हूँ।”
“हां ठीक है तब तक मैं नाश्ता बनाती हूँ”,नैना ने भी अपनी चाय खत्म करके कहा
“तुम बनाओगी ?”,रुचिका ने पूछा
“बिल्कुल , कोई शक”,नैना ने कहा
“मेग्गी और चीले के अलावा आता क्या है तुम्हे ?”,रुचिका ने कहा
“ओह्ह हेलो मैडम सब आता है मुझे बस मैं बनाती नहीं हूँ , खामखा नजर वजर लग गयी तो”,नैना ने मुंह बनाकर कहा
“हां हां बातें बनाना तो कोई तुमसे सीखे , इतना ही है ना तो आज आलू के पराठे बनाओ तो मानू तुमको मिस नैना”,रुचिका ने नैना को उसकी ही बात में फंसाते हुए कहा। नैना बेचारी फंस गयी तो उसने अपना फोन निकालते हुए कहा,,”हुंह आलू के पराठे वो तो मेरे बांये हाथ का खेल है।” लेकिन रुचिका ने उसके हाथ से फोन लिया और कहा,”ना न न फ़ोन के बिना !”
“क्या सच में ?”,नैना ने कहा
“जी हां , अब मैं जा रही हूँ अपने कपडे प्रेस करने तब तक तुम नाश्ता बनाओ !”,कहते हुए रुचिका वहा से चली गयी


नैना किचन एरिया में आयी क्या करना है कुछ पता नहीं ? फोन होता तो उसमे देखकर बना लेती लेकिन यहाँ तो रुचिका ने उसे ही संकट में डाल दिया लेकिन नैना हार मानने वालो में से नहीं थी उसने आलू उबलने के लिए रखे और एक बर्तन में आटा निकाला , निकाला कम बिखेरा ज्यादा ,, आटे में थोड़ा नमक डाला और फिर एकदम से पानी डाल दिया और दोनों हाथो से आटा गूंथने की नाकाम कोशिश करने लगी। पानी ज्यादा गिरने की वजह से आटा उसके हाथो से चिपकने लगा तो नैना ने और आटा डाला , फिर पानी , फिर आटा ,, जैसे तैसे करके नैना ने उसे सही किया लेकिन हाथो के साथ साथ उसके गालो पर , गर्दन पर भी आटा लग गया। नैना ने आटा साइड रखा तब तक आलू भी उबल चुके थे नैना ने उन्हें निकाला ठंडा किया और छीलकर साइड रख दिया अब आगे क्या करना था नैना को नहीं पता था लेकिन वह हेल्प किसकी ले ? रुचिका तो उसे चेलेंज देकर जा चुकी थी और शीतल उसे तो नहाने में भी एक घंटा लग जाता है। होंठो को चबाते हुए नैना सोच ही रही थी की उसे अवि की याद आयी और उसने खुश होकर कहा,”अरे पडोसी है ना !”
नैना ने हाथ धोये और अवि के दरवाजे के सामने आकर बेल बजा दी। अवि कुछ देर पहले ही सोकर उठा था और सिर्फ निक्कर में था , वह आँखे मसलते हुए आया और दरवाजा खोला नैना को देखते ही उसने दरवाजा वापस बंद कर दिया पहले अपनी टीशर्ट ढूंढी और फिर उसे पहनकर फिर से दरवाजा खोला अवि कुछ पूछता इस से पहले ही नैना बोल,”दरवाजा बंद क्यों किया ?”
“अरे वो सोकर उठा था , कुछ पहना नहीं था तुम्हारे सामने आता तो तुम्हे अच्छा नहीं लगता इसलिए,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,बोलो क्या हुआ ?”,अवि ने उबासी लेकर कहा !
“मुझे आलू के पराठे बनाने है क्या करना होगा ?”,नैना ने कहा
“व्हाट ? मतलब क्या ,, क्या बना रही हो तुम ?”,अवि ने कहा
“आअह्ह्ह्ह मैं भी किस से हेल्प मांग रही हूँ , द बेस्ट कुक ऑफ़ अपार्टमेंट,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,एक मिनिट मैं आती हु !”,कहते हुए नैना वापस अपने फ्लैट की और भागी और जब वापस आयी तो उसके दोनों हाथो में दो बर्तन थे एक में आलू थे दूसरे में आटा जो उसने गुंथा था। नैना ने दोनों बर्तन अवि को देकर कहा,”चलो फटाफट इसके आलू के पराठे बना दो , और हां टेस्टी होने चाहिए मैं थोड़ी देर में आती हूँ।”
कहते हुए नैना बिना अवि का जवाब सुने भाग गयी अवि हैरानी से नैना के फ्लैट की और देखकर सोचने लगा,”क्या लड़की है ये ?”
अवि अंदर चला आया और दोनों बर्तन किचन में रखे लेकिन अगले ही पल याद आया की नैना ने उसे पराठे बनाने को कहा है और अगर उसने नहीं बनाये तो वो फिर कोई ना कोई बखेड़ा कर देगी। अवि वापस किचन एरिया में आया और पराठे बनाने की तैयारी करने लगा। उधर नैना अंदर आयी और झांककर देखा रुचिका अभी तक प्रेस करने में बिजी थी और शीतल दिखाई नहीं दी नैना ने चैन की साँस ली और कहा,”आह्ह वेल डन नैना , यू आर सच अ डार्लिंग ,,, खैर पराठे तो बन ही जायेंगे लेकिन तब तक थोड़ा आटा यहाँ वहा बिखेर देती हूँ ताकि पांडा को शक ना हो !”
नैना ने जान बूझकर किचन के प्लेटफॉर्म और आस पास में आटा छिड़क दिया थोड़ा खुद पर भी जिस से ये लगे की उसने बहुत मेहनत की है। कुछ देर बाद रुचिका रूम से बाहर आयी तो नैना ने ऐसे एक्टिंग की जैसे वह कुछ बना रही है। रुचिका ने उधर आने की कोशिश की तो नैना पहले ही किचन एरिया से बाहर आयी और रुचिका से कहा,”बस पांडा कुछ देर में टेस्टी पराठे तैयार है”
“अरे वाह नैना तुम्हारी हालत देखकर तो लग रहा है जैसे बहुत मेहनत करनी पड़ रही है तुम्हे , लेकिन अच्छा लग रहा है देखकर ,, पराठे तैयार हो तब तक मैं भी नहा लेती हूँ फिर तीनो साथ में खाएंगे”,रुचिका ने वापस जाते हुए कहा
रुचिका के जाते ही नैना मुस्कुराने लगी उसने तो कोई मेहनत नहीं की थी उधर उस आटे की वजह से अवि का हाल बुरा था जैसे तैसे करके उसने 5 पराठे बनाये और उन्हें लेकर नैना को देने आया , अवि ने बेल बजाई दरवाजा भी नैना ने ही खोला और अवि को सामने देखकर कहा,”थेंक्स यार बचा लिया तुमने तो” अवि ने प्लेट नैना को थमा दी उसकी नजर नैना पर गयी उसके गालो ओर गर्दन पर आटा लगा देखकर अवि ने कहा,”ये क्या हालत बना रखी है तुमने”
अवि ने जैसे ही उसकी और हाथ बढ़ाया नैना ने पीछे होकर कहा,”अरे नहीं नहीं ये प्रूफ है ये दिखाने के लिए की पराठे बनाने में मैंने कितनी मेहनत की है !”
अवि ने सूना तो मुस्कुराने लगा और कहा,”तुम दुनिया का आठवां अजूबा हो”
“हां मालूम है !”,कहकर नैना जाने लगी तो अवि ने कहा,”मैं भी आ सकता हूँ नाश्ता करने ?”
“जी नहीं ! तुम्हे आटा और आलू दिए है ना बनाकर खाओ अपने घर में”,कहते हुए नैना ने पैर से दरवाजा बंद कर दिया। अवि वापस चला आया वापस आकर उसमे दोबारा पराठे बनाने की हिम्मत नहीं थी ,

वह आकर सीधा सोफे पर पसर गया दूसरी और शीतल और रुचिका तैयार होकर आयी उन्होंने देखा नाश्ते के लिए पराठे तैयार है तो रुचिका को बड़ी हैरानी हुई।
“गाईज मैं बस दो मिनिट में नहाकर आयी”,कहते हुए नैना वाशरूम की और चली गयी , रुचिका और शीतल आकर सोफे पर बैठी और रुचिका ने जैसे ही प्लेट से ढक्कन हटाया पूरा घर पराठो की खुशबू से महकने लगा। रुचिका की तो देखते ही लार टपकने लगी उसने सूंघते हुए कहा,”इश्श्श्श्श क्या अच्छी खुशबू है यार मुझसे तो अब और रुका नहीं जा रहा। नैना ने क्या पराठे बनाये है यार ! इनके साथ अचार हो तो मजा आ जाये मैं लेकर आती हु किचन से”
रुचिका ने किचन में आकर आचार का डिब्बा देखा तो खाली डिब्बे को देखकर कहा,”ये लो अचार तो ख़त्म हो गया , कोई ना सॉस से काम चला लेंगे (बॉटल देखती है जो की लगभग खाली हो चुकी है) और ये भी खत्म ,, अब क्या करू ?,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,ऐसे तो पराठे अच्छे नहीं लगेंगे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,अरे अवि है ना उस से ले आती हूँ !”
कहते हुए रुचिका अवि के दरवाजे के सामने आयी और दरवाजा खटखटा दिया अवि ने दरवाजा खोला तो रुचिका ने अंदर आते हुए कहा,”अवि थोड़ा सा अचार मिलेगा वो नैना ने,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,(गहरी साँस लेती है ,पराठो की महक वहा से भी आ रही थी),,,,,,,,,,,,,,,पराठे !!”
अवि अंदर आता है और कहता है,”मैं अचार नहीं खाता , सॉस रखा है वो ले जाओ।”
“वेट,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,नैना ने जो पराठे बनाये उनकी खुशबू यहाँ भी आ रही है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,अच्छा तो मैडम ने हमे बुद्धू बनाया”,रुचिका ने नैना का झूठ पकड़ते हुए कहा और बिना सॉस अचार लिए वापस चली गयी। अवि को कुछ समझ नहीं आया वह नहाने चला गया। रुचिका अपने फ्लैट में आयी तब तक नैना नहाकर आ चुकी थी रुचिका को देखते ही उसने कहा,”अरे पांडा आजा देख गर्मागर्म पराठे तुम्हारे लिये है”
“पराठे किसने बनाये ?”,रुचिका ने अपनी कमर पर हाथ रखकर लगभग नैना को घूरते हुए पूछा
“किसने बनाये क्या ? मैंने बनाये है !”,नैना ने पुरे कॉन्फिडेंस के साथ झूठ कहा
रुचिका ने सोफे पर रखा कुशन उठाकर नैना की और फेंका और कहा,”झूठ बोलते हुए शर्म नहीं आती तुम्हे , पराठे बेचारे उस अवि ने बनाये और क्रेडिट तुमने लिया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,क्या होगा तुम्हारा नैना ?,,,,,,,,,,,,,,,,,,,कब सुधरेगी तुम ?”
“अभी तो मैं ठीक से बिगड़ी भी नहीं हूँ,,,,,,,,,,,,,,!”,नैना ने पराठे खाते हुए कहा रुचिका ने सूना तो सर पीट लिया और फिर बैठकर सबके साथ नाश्ता करने लगी ! नैना ने जल्दी जल्दी नाश्ता किया और आ धमकी अवि के सामने और कहा,”उसे क्यों बताया की पराठे तुमने बनाये है ?”
” मैंने किसी को कुछ नहीं बताया है”,अवि शायद नहाकर आया ही था और अपने गीले बालो को सूखा रहा था। नैना ने सूना तो घूरते हुए उसकी और बढ़ी और कहा,”वाह वाह वाह वाह इतने भोले मत बनो , मिस्टर पडोसी मैं अच्छे से जान गयी हूँ तुम्हे क्रेडिट तुम लेना चाहते हो।”
“तुम पागल हो क्या ? मुझे क्यों क्रेडिट चाहिए एक तो पराठे बने और मुझे मिले भी नहीं ऊपर से तुम”,अवि ने नैना को साइड करके कहा
“वो तो तो हम लोग खा गए”,नैना आने मासूम सा चेहरा बनाकर कहा
“अच्छा छोडो ये सब शीतल ठीक है अब ?”,अवि ने सवाल किया
“कहा ठीक है ? कल रात से उसे ही याद करके आंसू बहा रही है ,, पूअर गर्ल,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,अगर मैंने सही टाइम पर राज को यहाँ नहीं बुलाया होता तो उसका सच कभी सामने आता ही नहीं”,नैना ने कहा तभी अवि की नजर दरवाजे पर खड़ी शीतल पर गयी। शीतल की आँखों में आंसू देखकर अवि ने नैना को इशारा किया नैना ने देखा पीछे शीतल खड़ी है नैना कुछ कहती इस से पहले ही शीतल ने नैना को खींचकर एक थप्पड़ मारा और अवि ने ये देखकर अपनी आँखे मीच ली !

क्रमश – love-you-zindagi-69

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संजना किरोड़ीवाल !

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