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Kitni Mohabbat Hai – 53

Kitni Mohabbat Hai – 53

Kitni Mohabbat Hai by Sanjana Kirodiwal

जीजू जा चुके थे और उनके जाने से अक्षत थोड़ा अपसेट हो गया ! मीरा उसके साथ ही थी दोनों स्टेशन से बाहर चले आये , अक्षत और मीरा गाड़ी में आकर बैठे , अक्षत ने गाड़ी स्टार्ट की और सड़क की और बढ़ा दी ! सुबह सुबह का वक्त था और मौसम बहुत ही खुशनुमा था , सर्दी की वजह से हल्का कोहरा भी था , अक्षत ख़ामोशी से गाड़ी चलाये जा रहा था मीरा ने धीरे से कहा,”हमे पता नहीं था आप रोते भी है !”
अक्षत ने मीरा की और देखा और कहा,”क्यों लड़के रोते नहीं नहीं है ?”

“ऐसी बात नहीं है पर आपकी आँखों में पहली बार आंसू देखे है !”,मीरा ने कहा
अक्षत मुस्कुराया और सामने देखते हुए कहने लगा,”गलत कहते है लोग की लड़के रोते नहीं या फिर लड़को को रोना नहीं चाहिए !! लड़के भी रोते है जब वो अपनी माँ को दर्द में देखते है , लड़के तब भी रोकते है जब वो अपने पापा को मजबूर देखते है , लड़के तब भी रोते है जब उनका दिल टूटता है , उनके सपने टूटते है ! वो सबके सामने नहीं रो सकते इस डर से की लोग हसेंगे और बचपन से ही हम लड़को को ये कहा जाता है की तुम लड़के हो तुम्हे रोना नहीं चाहिए जबकि हकीकत ये है , लड़के भी रोते है !”

मीरा ख़ामोशी से सुनती रही ! उसे चुप देखकर अक्षत ने उसके हाथ को अपने हाथ में लिया और गाड़ी के गियर पर रख लिया ! मीरा बस प्यार से उसे देखती रही तो अक्षत कहने लगा,”पता है मीरा मैं हमेशा से अकेला रहा हु उसकी वजह है मेरा गुस्सा , मेरी जिद और मेरा स्वभाव ,, जिसकी वजह से घर में भी मैं सबसे बहुत कम बात किया करता था ! दादू से मैं अपनी हर बात शेयर करता हु , पापा और भाई से बहुत कम बात होती थी पर जबसे तुम आयी हो तबसे मैंने जाना है की वो सब कितने अच्छे है , भाई ने हमेशा मुझे सपोर्ट किया ,

पापा हमेशा मेरी केयर करते है बस दिखाते नहीं अपने चेहरे पर आने नहीं देते , माँ को हमेशा मेरी फ़िक्र रहती है , दादी माँ दादू सब बहुत प्यार करते है और जीजू वो तो कब जीजू से मेरे दोस्त बन गए पता ही नहीं चला !! और ये सब तुम्हारी वजह से हुआ तुम इस घर में , मेरी जिंदगी में ना आयी होती तो मैं जान ही नहीं पाता की फॅमिली इतनी अच्छी होती है !! मेरे इस बदलवाव की वजह सिर्फ तुम हो मीरा और मैं बहुत खुश हु , पहले से कई ज्यादा सोचने लगा हु , चीजों को समझने लगा हु , खुद से प्यार करने लगा हु !!”

“आप बहुत अच्छे है !”,मीरा ने एकदम से कहा
“मैं ? नहीं मीरा ऐसा नहीं है , मैंने सबका बहुत दिल दुखाया है उनसे दूर रहकर !”,अक्षत ने कहा
“फिर भी आप बहुत अच्छे है !”,मीरा ने कहा
“कैसे ?”,अक्षत ने कहा
“आप अपने अंदर की अच्छाईया कभी जान ही नहीं पाए , आप नहीं जानते की आपके गुस्से के पीछे हमेशा आपकी परवाह छुपी होती है

, आपकी जिद के पीछे किसी का भला छुपा होता है , आप कम बोलते है क्योकि आप नहीं चाहते सामने वाला अनजाने में भी आपकी किसी बात से हर्ट हो , आप अकेले रहना पसंद करते है क्योकि आप बहुत इमोशनल है आसानी से किसी से भी अटैच हो जाते है और सबसे बड़ी खूबी जो हर लड़की देखना चाहती है वो है आपकी सोच , आप औरत का सम्मान करना जानते है ,, ! ऐसी ही कई खुबिया है आप में पर आप कभी ध्यान नहीं देते ,, आप सबकी ख़ुशी चाहते है”

मीरा की बात सुनकर अक्षत हैरान था आज से पहले उस से ये सब बाते किसी ने भी नहीं कही थी ना ही कोई उसे इतना करीब से जानता था ! अक्षत ने सिग्नल पर गाड़ी रोकते हुए कहा,”बचके रहना पडेगा तुमसे !”
“क्यों ?”,मीरा ने हैरानी से कहा
“इतना तो मैं भी नहीं जानता अपने बारे में जितना तुम जानने लगी हो , क्यों ?”,अक्षत ने कहा
“क्योकि आप एक समंदर की तरह है आप में कोई जितना गहरे तक उतरेगा उतना आपके बारे में कुछ नया जानने को मिलेगा , बहुत कुछ है जो आपके सीने में दफन है !”,मीरा ने कहा

अक्षत बस उसे देखता ही रह गया , कितना अच्छा बोलती थी मीरा और उसपे भी बड़ी बात ये की सच बोलती थी ! अभी दोनों एक दूसरे को देखे जा ही रहे थे की तभी मीरा की साइड वाला शीशा किसी ने खटखटाया ! मीरा ने देखा एक छोटी बच्ची थी हाथ में फूलो का गुच्छा लिए हुए थी ! मीरा ने शीशा निचे किया तो वह कहने लगी,”दीदी फूल ले लो न दीदी , बहुत सस्ते है ताजा भी है , देखो कितने सुन्दर है ले लो दीदी !!”
मीरा के पास उस वक्त पैसे नहीं थे तो उसने प्यार से लड़की का गाल छूकर कहा,”हमारे पास पैसे नहीं है !”

“कल रात से कुछ नहीं खाया है दीदी , ज्यादा नहीं तो एक फूल ले लो ,, मैं आपसे कम पैसे ले लुंगी दीदी”, मीरा की आँखों में आंसू भर आये उसने अक्षत की और देखा तो अक्षत समझ गया वह गाड़ी से निचे उतरा लड़की की तरफ आया और उस से सारे फूल लेकर कहा,”सबका कितना है ?”
“200 रूपये है भैया पर आप कम दे दो !”,उसने आसभरी नजरो से अक्षत को देखते हुए कहा !
अक्षत ने जेब से पर्स निकाला उसमे से 500 का नोट निकाला और लड़की को थमा दिया , उसने 500 का नोट देखा तो कहा,”मेरे पास छुट्टे नहीं है !”

“कोई बात नहीं तुम ये सारे रख लो !”,अक्षत ने मुस्कुरा कर कहा
“सच में !”,उसने हैरानी से ख़ुशी भरे शब्दों में कहा
“हां सच में रख लो !!”,अक्षत ने कहते हुए उसके सर पर हाथ रख दिया ! बच्ची ख़ुशी ख़ुशी वहा से चली गयी ! अक्षत फूलो को लेकर वापस गाड़ी में आया और पीछे सीट पर रख दिए ! मीरा को चुप देखकर उसने कहा,”क्या हुआ मीरा ?”
“ऐसा क्यों होता है ? इतनी ठण्ड में भी इतने छोटे छोटे बच्चो को काम करना पड़ता है !”,मीरा ने उदास होकर कहा

“मीरा तुम बहुत ज्यादा सोचती हो , शहर के हर कोने में तुम्हे ये देखने को मिलेगा तुम सबकी मदद नहीं कर सकती !”,अक्षत ने उसे समझाया !
“पर हमे बहुत दुःख होता है जब हम इन्हे देखते है ! भगवान ने हम इंसानो के साथ ये भेदभाव क्यों किया ?”,मीरा ने कहा
सिग्नल ग्रीन हो चुका था अक्षत ने गाड़ी आगे बढ़ा दी और कहा,”दुनिया बनाने वाले ने कोई भेदभाव नहीं किया है ये हम लोगो ने बनाया है , प्रेक्टिकल दुनिया है मीरा यहाँ हर कोई सबसे पहले अपने बारे में सोचता है फिर दुसरो के बारे में !”

मीरा को अक्षत की बात समझ आ रही थी उसने महसूस किया की वो खुद अभी किसी और पर निर्भर थी वह दुसरो की मदद कहा से करती !
अक्षत ने मीरा को उदास देखा तो उसका हाथ प्यार से अपने हाथ में लेकर कहा,”इन लोगो के लिए जरूर हम कुछ ना कुछ करेंगे वो भी मिलकर !”
अक्षत की बात सुनकर मीरा मुस्कुरा दी तो अक्षत को चैन आया उसने गाड़ी की स्पीड थोड़ी बढ़ा दी और आगे जाकर गाड़ी को बड़ी सड़क की और मोड़ दिया !

“घर तो उस तरफ है , आप इधर क्यों जा रहे है ?”,मीरा ने कहा
“कुछ जरुरी काम याद आ गया !”,अक्षत ने कहा और जेब से फोन निकालकर किसी को फोन करने लगा !
कुछ ही देर बाद दोनों एक ऑफिस के सामने पहुंचे और निचे उतरकर अंदर आये ! अक्षत ने अंदर आकर रिसेप्शन पर किसी के बारे में पूछा और फिर मीरा के साथ अंदर चला आया , मीरा को सोफे पर बैठने को कहा और खुद सामने टेबल के उस पार कुर्सी पर बैठे आदमी की और चला गया !

अक्षत से उसने बड़े ही गर्मजोशी से हाथ मिलाया और दोनों आपस में कुछ बाते करने लगे जो की मीरा को साफ सुनाई नहीं दे रही थी वह सोफे पर बैठी पास ही रखे एक्वेरियम को देख रही थी जिसमे सुनहरी मछलिया तैर रही थी ! मीरा को उन्हें देखना बहुत अच्छा लग रहा था !!
आदमी ने अक्षत से कुछ देर बाते की और फिर एक बड़ी सी फाइल उसे थमा दी साथ में एक लेटर भी ! अक्षत ने एक बार फिर उस से हाथ मिलाया और मीरा के पास आकर कहा,”चले मीरा !”

“वो मछली कितनी सुंदर है ना !”,मीरा ने अक्षत की बात से बेखबर कहा
“हां , अब चले !”,कहते हुए अक्षत उसे लेकर बाहर चला आया !
“आपका काम हो गया ?”,मीरा ने सवाल किया
“हां , अभी एक काम और बाकि है बैठो बताता हु !”,अक्षत ने मीरा के लिए गाड़ी का दरवाजा खोलते हुए कहा !!

दोनों वहा से निकलकर एक ट्रेवल्स वाले के पास पहुंचे वहा से अक्षत ने टिकट्स लिए और गाड़ी में आ बैठा ! मीरा हैरान थी उसे अब भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था ! उसने अक्षत से कहा,”आप कही जा रहे है ?”

“मैं नहीं भाई और भाभी अपने हनीमून पर , मेरी वजह से वो अपनी शादीशुदा जिंदगी ठीक से शुरू भी नहीं कर पाए , इसलिए ये छोटा सा तोहफा उनके लिए !”,अक्षत ने कहा
“हमे लगा आप कही जा रहे है !”,मीरा ने कहा
“तुम्हे छोड़कर कहा जाऊंगा ? शादी के बाद हम भी चलेंगे बताओ कहा जाना चाहोगी ? गोवा , मनाली , लद्दाख , कश्मीर कहा ?”,अक्षत ने कहा
“बनारस !”,मीरा ने आँखों में चमक भरकर कहा

“बनारस ? तुम ना दादू की तरह हो बोरिंग !”,अक्षत ने कहा और गाड़ी स्टार्ट कर वहा से निकला !
“आप कभी बनारस गए है ?”,मीरा ने सवाल किया
“नहीं , और मुझे जाना भी नहीं है”,अक्षत ने कहा
“एक बार जाकर देखिये आपका वापस आने का मन नहीं करेगा वहा से ! वहा के मंदिर , वहा के घाट , पूजा , आरती वहा का शंखनाद सब बहुत अच्छा है वहा की सुबह में अलग सुकून है और शाम में अलग नशा , महादेव की नगरी है वो उस से खूबसूरत जगह हमने आज तक ना देखी है ना सुनी है !”,मीरा ने कहा

“शादी के बाद मेरी लाइफ बहुत बोरिंग होने वाली है !”,अक्षत ने कहा
“वो क्यों ?”,मीरा ने मासूमियत से कहा
“मुझे इतनी धार्मिक वाइफ जो मिलने वाली है !”,अक्षत ने मीरा को ताना मारते हुए कहा !
मीरा ने सूना तो उसका मुंह बन गया और वह दूसरी और देखने लगी अक्षत को हंसी आ रही थी लेकिन वो अपनी हंसी कंट्रोल करके बैठा था ! दोनों घर पहुंचे ! मीरा ने दरवाजा खोलने की कोशिश की लेकिन उस से खुला नहीं तो अक्षत ने खोलने के लिए हाथ बढ़ाया और उस वक्त दोनों एक दूसरे के बहुत करीब थे ,

धड़कने फिर एक लय में धड़क रही थी मीरा अक्षत की आँखों में देखती रही और वो उसकी आँखों में ! अक्षत ने खुद को सम्हाला और लॉक खोल दिया मीरा निचे उतरी और अक्षत भी ! उसने गाड़ी से वो फाइल , टिकट्स लिफाफा और फूलो का गुच्छा लिया और मीरा के साथ अंदर आ गया ! फाइल और लिफाफा उसने रघु को देकर अपने कमरे में रखकर आने को कहा विजय दादू के साथ ऑफिस गए हुए थे और अर्जुन जाने की तैयारी कर रहा था
जैसे ही वह अपना बैग लेकर आया अक्षत ने रोकते हुए उसका बैग कंधे से उतारा और टिकट्स उसकी और बढ़ा दिए ! अर्जुन ने देखा तो कहा,”ये सब क्या है ?

“मेरी तरफ से आपके और भाभी के लिए छोटा सा तोहफा है !”,अक्षत ने कहा
अर्जुन ने टिकट्स देखे और कहा,”छोटा सा तोहफा , ये मनाली का एक हफ्ते का पैकेज है !”,अर्जुन ने कहा !
“हां तो , आप और भाभी शादी के बाद बाहर नहीं गए , माना के आप थोड़े कंजूस हो लेकिन भाभी का तो मन होगा ना !”,अक्षत ने अर्जुन को छेड़ते हुए कहा

“लेकिन ये सब !”,अर्जुन ने कहना चाहा तो अक्षत ने आगे बढ़कर उसे गले लगाते हुए कहा,”भाई ! मैं जानता हु मेरी वजह से बीते दिनों घर में काफी तनाव रहा है , लेकिन आपने और भाभी ने अपनी खुशिया भूलकर मेरा साथ दिया , मेरे लिए खड़े रहे ,, अब मेरा इतना तो फर्ज बनता है ना की आप दोनों के लिए कुछ खास कर पाऊ , ये एक हफ्ते का हनीमून पैकेज है , गो एंड स्टार्ट योर मैरिड लाइफ !!”
“वो सब तो ठीक है लेकिन पापा को क्या कहूंगा ? और एक हफ्ते के लिए ऑफिस से छुट्टी ,, आलरेडी इतना काम पेंडिंग पड़ा है वहा”,अर्जुन ने कहा

“डोंट वरी आपकी जगह ऑफिस मैं चला जाऊंगा”,अक्षत ने जैसे ही कहा डायनिंग के पास काम करती राधा , नीता , पूजाघर में बैठी दादी माँ और अर्जुन एक साथ बोले,”क्या तुम ?”
उनका रिएक्शन देखकर अक्षत ने कहा,”सो व्हाट ? मैं क्यों नहीं जा सकता , जब तक भाई बाहर रहेगा एक हफ्ते पापा के साथ ऑफिस मैं चला जाऊंगा , वैसे भी मेरा रिजल्ट आने में अभी टाइम है !” अक्षत ने नीता को अपने पास बुलाया और कहा,”भाभी आप जाकर अपना और भाई का बैग पैक करो आज शाम को ही निकलना है आप दोनों को !”

“हम्म्म्म !”,नीता तो इस सरप्राइज से बहुत खुश हो गयी थी जाने लगी तो अक्षत ने कहा,”अरे भाभी सुनो !”
“हां”,नीता पलटी तो अक्षत ने फूलो का गुच्छा उसकी और बढाकर कहा,”ये आपके लिए !”
“थैंक्यू !”,नीता ने कहा और वहा से चली गयी ! अर्जुन ने अक्षत से कहा,”तो फिर आज मेरी जगह ऑफिस तू जा रहा है ना !”
“आज तो मैं आराम करने वाला हु , कल से चला जाऊंगा पक्का !”,कहते हुए अक्षत अर्जुन का बैग अपने साथ ले गया !

पीछे खड़े अर्जुन ने राधा के पास आकर कहा,”ये कभी नहीं सुधरेगा माँ , लेकिन मैं खुश हु की ये अब हम सबको समझने लगा है !!”
“अब तू इमोशनल मत हो और जाकर नीता की हेल्प कर !”,राधा ने कहा और वहा से चली गयी ! अर्जुन भी वापस ऊपर आकर नीता की मदद करने लगा ! अक्षत अपने कमरे में था कुछ देर बाद बाहर आया तो मीरा अपने कमरे के दरवाजे पर ही खड़ी थी अक्षत को देखकर उसने कहा,”सबको एक एक करके घर से भगा रहे है , आखिर इरादा क्या है आपका ?”

अक्षत मीरा के पास आया दरवाजे की चौखट से हाथ लगाकर मीरा की आँखों में देखते हुए कहा,”इरादा तो बड़ा खतरनाक है मीरा जी पर अभी,,,,,,,,,,,,!”
अक्षत ने बात अधूरी छोड़ दी मीरा चौखट से पीठ सटाये खड़ी थी अक्षत का यु करीब आना उसकी धड़कने बढ़ा देता था उसने धीर से कहा,”अभी क्या ?”
अक्षत मीरा के थोड़ा और करीब आया और कहा,”अभी मूड नहीं है !”

कहकर अक्षत पीछे हटकर मुस्कुराने लगा , उसे मीरा को परेशान करने में बहुत मजा आता था , बेचारी मीरा क्या कहती चुपचाप अपने कमरे में चली गयी और अक्षत निचे !! शाम को अर्जुन नीता घर से निकल गए विजय भी घर आ चुके थे तो उन्होंने और राधा ने उन दोनों को अपना ख्याल रखने को कहा !! उनके जाने के बाद विजय राधा के साथ किसी काम से बाहर चले गए दादू अपने कमरे में थे और दादी माँ निधि को लेकर मंदिर चली गयी ! अब घर के ऊपर वाले फ्लोर पर सिर्फ मीरा और अक्षत थे !

मीरा जैसे ही अपने कमरे से बाहर निकली सीढ़ियों के पास खड़ा अक्षत आया और उसका हाथ पकड़ कर उसे अपने साथ ले गया ! अक्षत उसे अपने कमरे में लेकर आया और टेबल पर रखी फाइल उसे थमा दी !
“ये क्या है ?”,मीरा ने कहा
”खुद ही देख लो !”,अक्षत ने अपने हाथो को समेटकर कहा !

मीरा ने फाइल देखी उसमे किसी जमींन के पेपर्स थे जो मीरा के नाम से थे , एक बैंक अकाउंट की डिटेल्स जिसमे मीरा सिंह राजपूत के नाम से लाखो रूपये थे ! कुछ फंड्स थे और कुछ कीमती सामान की लिस्ट !! मीरा ने देखा तो हैरान रह गयी उसने अक्षत की और देखकर कहा,”ये सब क्या है अक्षत जी ? ये सब हमारा नहीं है !”

अक्षत ने उसे प्यार से बैठाते हुए कहा,”ये सब तुम्हारा ही है मीरा , तुम्हारे दादाजी की बनायीं वसीयत मैं उस दिन अपने साथ ले आया था , मैं जानता था उस वक्त तुम वो सब एक्सेप्ट नहीं करोगी लेकिन मैं जानता था कही ना कही ये सब तुम्हारे काम आएगा !! मैंने तुम्हे बिना बताये इन सबके बारे में जानकारी हासिल की और वो सब सच थी ये सब आज भी तुम्हारे नाम से है ! ये जगह , ये पैसे और ये सब सामान तुम्हारा ही है जिसे तुम इस्तेमाल कर सकती हो , जिस पर सिर्फ तुम्हारा हक़ है !
“लेकिन हम ये सब कैसे रख सकते है ?”,मीरा की आँखों में आंसू भर आये !

“अपनी माँ की निशानी समझकर , जीते जी वो जो तुम्हे नहीं दे पायी वो जाते जाते दे गयी ! मीरा इन सबसे तूम अपना अतीत तो नहीं भुला सकती लेकिन अपनी जिन्दगी को आसान बना सकती हो , अपने सपने पुरे कर सकती हो ! मैंने ये सिर्फ तुम्हारे लिए किया है तुम्हारे सपनो के लिए किया है !

तुम चाहो तो ये सब छोड सकती हो क्योकि मैं तुम्हे वो हर ख़ुशी दे सकता हु जो तुम डिजर्व करती हु और उसके लिए तुम्हारी इस दौलत की मुझे जरूरत नहीं है , पर हां इस से तुम उन लोगो की जिंदगी बेहतर बना सकती हो जो एक अच्छी जिंदगी डिजर्व करते है !”,अक्षत ने मीरा का हाथ अपने हाथ में लेकर बड़े विश्वास के साथ कहा !

मीरा ने फाइल को साइड में रखा और अक्षत के गले आ लगी और कहा,”इतना सब मत कीजिये हमारे लिए”
“मैंने कुछ नहीं किया मीरा , ये सब तुम्हारा ही है !”,अक्षत ने उसे प्यार से समझाते हुए कहा , उसका उदास चेहरा अक्षत को बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था उसने मीरा को उदास देखकर कहा,”अच्छा देखो ये आज मेरा रूम है तो कुछ वक्त बाद ये हम दोनों का रूम होगा !”

मीरा मुस्कुरा उठी तो अक्षत उठा और बताने लगा,”ये बेड थोड़ा छोटा है इसे थोड़ा बढ़ा लेंगे , इसके पीछे वाली ये दिवार (बेड पर चढ़कर दिवार दिखाते हुए) यहाँ अपनी बहुत सारी तस्वीरें लगेंगी , तुम्हारी और मेरी ! (बेड से उतरकर निचे आता है शीशे की और) यहां राईट वाली साइड तुम अपने मेकअप का सामान रखना , वैसे तुम्हे मेकअप की जरूरत तो नहीं है फिर भी चाहता हु काजल तो तुम लगाओ ही , और राईट साइड में इसलिए बिकॉज विमेंस आर ऑलवेज राईट !! (मीरा उसकी बाते सुनते हुए मुस्कुरा रही थी ,

अक्षत बोलते हुए कबर्ड के सामने आया और जैसे ही खोला अंदर रखे सारे कपडे बाहर आ गिरे , उसने उन्हें वापस कबर्ड में रखते हुए कहा) सॉरी ये मेरा है इसलिए थोड़ा फैला हुआ है तुम ये पास वाले में अपने कपडे रखना !! (घूमते हुए उसने सामने लगे पर्दे को साइड किया और खिड़की खोलते हुए कहा) यहाँ खड़े होकर तुम मेरा इंतजार करना !!
“इंतजार क्यों ?”,मीरा ने कहा

अक्षत उसकी और आया और कहा,”अरे जब मैं ऑफिस जाऊंगा और शाम को ऑफिस से वापस आऊंगा तो आते ही सबसे पहले तुम्हे ही तो देखना चाहूंगा ना ! जब थका हारा आऊंगा तुम्हे इंतजार करते देखूंगा तो मेरी थकान तो एक पल में दूर हो जाएगी ना !”
“अच्छा फिर !”,मीरा ने मुस्कुराते हुए कहा
“फिर तुम मेरे लिए चाय बनाना , लेकिन फीकी ही हां क्योकि उसमे मैं तुम्हारे हाथो की मिठास महसूस करना चाहता हु !”,अक्षत ने कहा तो मीरा उसके इस पागलपन पर हसने लगी !

अक्षत उसकी और आया और बेड पर लेट गया और अपना सर उसकी गोद में रखते हुए कहा,”फिर तुम्हारी गोद में सर रखकर तुम्हे दिनभर का सारा हाल चाल बताया करूँगा , और तुम ऐसे ही मुस्कुराते हुए सुनती रहना !!”
“पागल है आप सच में !”,मीरा ने कहा
“नहीं पर इतना जानता हु की आने वाला कल इस से भी खूबसूरत होगा , हम एक बेहतर जिंदगी जियेंगे मीरा एक दूसरे के साथ !”,अक्षत ने कहा

“हम्म्म , अभी हमे जाना है !”,कहते हुए मीरा उठी और जाने लगी तो अक्षत ने उसका हाथ पकड़ा और रोकते हुए कहा,”कहा जा रही हो ?”
“आंटी बाहर गये है , उन्हें आने में देर भी हो सकती है इसलिए किचन में जा रहे है !”,मीरा ने कहा
“हम्म्म्म अच्छा ठीक है”,अक्षत ने कहा और मीरा को जाने दिया !! जाते जाते मीरा रुकी और पलटकर कहा,”खाने में क्या लेंगे आप ?”
“जो तुम प्यार से खिलाना चाहो !”,अक्षत ने प्यार से मुस्कुराते हुए कहा !

मीरा भी मुस्कुरा दी और चली गयी !! निचे आकर वह किचन में रात के खाने की तैयारी करने लगी ! दादी माँ और निधि भी घर आ चुके थे मीरा को किचन में देखकर निधि उसके पास चली आयी और कहा,”अरे वाह आज तो तुम खाना बना रही हो क्या बात है ?”
“हां कोशिश कर रहे है , आंटी बाहर गए है तो हमे लगा उन्हें आने में देर हो जाएगी इसलिए सोचा बना लेते है !”,मीरा ने कहा
“फिर तो आज तुम्हारे हाथ से बना खाना खाने को मिलेगा !”,निधि ने कहा

“हम्म्म्म , तू जाकर हाथ मुंह धो लो हम सब बनाकर डायनिंग पर लगाते है मीरा ने कहा ! निधि वहा से चली गयी मीरा ने खाना बनाकर डायनिंग पर रख दिया वह मन ही मन थोड़ा डर भी रही थी क्योकि उसने पहली बार बनाया था तो घरवालों को अच्छा लगेगा या नहीं बस यही बात उसके मन में चल रही थी !! राधा और विजय बाहर के काम निपटाकर घर आये निधि ने जब उन्हें बताया की आज खाना मीरा ने बनाया है विजय और राधा बहुत खुश हुए विजय ने तो कह भी दिया,”फिर तो जल्दी से खाना लगवाओ , बाद भूख लगी है !”

राधा , विजय , दादू , दादी और निधि सभी डायनिंग टेबल के चारो और आ बैठे ! विजय ने देखा अक्षत वहा नहीं है तो उन्होंने कहा,”अक्षत कहा है ?”
“वो तो कुछ देर पहले बाहर निकल गया !”,दादू ने कहा
“क्यों ?”,विजय ने कहा
“मैंने ही भेजा था , अपनी दवा लेने”,दादू ने कहा
“कोनसी दवा ?”,विजय ने शकभरे स्वर में कहा
“अरे मेरे घुटनो के दर्द वाली , विजय तू आजकल बड़ा शक करने लगा है मुझपे !”,दादू ने कहा

“हां हां मैं अच्छी तरह जानता हु पापा , दादा पोते की छत वाली मीटिंग के बारे में !”,विजय ने कहा तो दादू ने बात टालते हुए कहा,”अरे मीरा बेटा तुम खाना परोसो सबके लिए , खाना ठंडा हो रहा है !!”
मीरा ने सबकी थालियों में खाना परोसा आलू मटर की झोल वाली सब्जी , दाल , चावल , टमाटर की चटनी और साथ में सलाद था , मीठे में उसने बेसन के लड्डू रखे थे ! विजय ने एक टुकड़ा तोड़ कर मुंह में रखा मीरा उन्ही की और देख रही थी पहले तो उन्होंने कुछ नहीं कहा तो मीरा थोड़ा डर गयी की उस से अच्छा बना है या नहीं !

विजय ने जैसे ही दूसरा निवाला खाया और मीरा की तारीफ में कहा,”वाह मीरा तुम्हारे हाथो में तो जादू है , बहुत अच्छा बना है सब ,, पर तुमने ये सब कहा सीखा ?”
मीरा खुश हो गयी और राधा की और इशारा करके कहा,”हमारी गुरु ये है हमने इन्ही से ये सब बनाना सीखा है !”
“क्या बात है राधा ? पर सच में मीरा खाना बहुत अच्छा बना है थोड़ी सब्जी और दो जरा !”,विजय ने कहा
“हां अंकल लीजिये न !”,मीरा ने कहा

निधि ने खाया तो बोला,”सो टेस्टी मीरा , मुझे तो यकीन नहीं हो रहा ये तुमने बनाया है !
“भई खाना तो काफी लाजवाब बना है”,दादू ने खाते हुए कहा
“हमारी मीरा तो हर काम में परफेक्ट है !”,दादी माँ ने कहा और मीरा को भी बैठकर साथ खाने को कहा !! घर के हर सदस्य से मीरा को अपने लिए तारीफ सुनने को मिली ! मीरा भी उनके साथ बैठ गयी लेकिन बार बार गेट की और देख रही थी की अक्षत क्यों नहीं आया क्योकि असली तारीफ तो उसे उसके ही मुंह से सुननी थी ! अक्षत तो नहीं आया लेकिन तब तक सभी खाना खाकर उठ चुके थे !

कुछ देर बाद अक्षत आया और दादू को उनकी दवाईया देकर कहा,”डॉक्टर ने सुबह सुबह वाक करना बताया है ना आपको फिर क्यों नहीं करते”
“कल से शुरू कर दूंगा बाबा !”,दादू ने कहा और दवाईया लेकर चले गए ! अक्षत अपने कमरे की और जाने लगा तो राधा ने कहा,”आशु खाना नहीं खाओगे”
“चेंज करके आता हु माँ , आप खाना लगाओ !”,अक्षत ने कहा और चला गया !
राधा डायनिंग की तरफ आयी तो मीरा ने कहा,”आंटी उनके लिए खाना हम लगा देंगे आप आराम कीजिये !”

“अरे नहीं मीरा शाम से तुम ये सब कर रही हो , तुम भी थक गयी होगी ना लाओ मैं कर लेती हु ये सब !”,राधा ने कहा
“हम कर लेंगे आंटी , आप लोगो के लिए ये सब करके हमे अच्छा लगता है , ख़ुशी मिलती है !”,मीरा ने राधा का हाथ पकड़कर कहा तो राधा मुस्कुरा उठी और उसके गाल को प्यार से छूकर कहा,”पगली , आशु आ रहा है उसके लिए खाना लगा देना मैं अभी आती हु !”

राधा वहा से अपने कमरे की और चली गयी अक्षत निचे चला आया खाने के लिए आकर बैठा तो मीरा ने उसके लिए खाना लगाया अक्षत प्यार से अपने गाल को हाथ से लगाकर मीरा को देखता रहा ! मीरा ने खाना परोसकर कहा,”खाइये !”‘
“खाना तुमने बनाया है ?”,अक्षत ने कहा
“हम्म्म्म !”, मीरा ने कहा

अक्षत ने उसे पास बैठने का इशारा किया और एक निवाला तोड़कर खाया मीरा उसे देख रही थी अक्षत ने निवाला खाया और मीरा की और देखकर कहा,”ये बिल्कुल वैसा ही बना है जैसा माँ बनाती है , तुम बिल्कुल उनके जैसा खाना बनाती हो !”
मीरा को अक्षत से सबसे अलग सुनने को मिला ! माँ के हाथ से बना खाना हर बेटे का पसंदीदा होता है और मीरा के बने खाने में अक्षत वही स्वाद महसूस कर रहा था ! मीरा ने सूना तो उसे ख़ुशी हुई अक्षत ने एक दो निवाले और खाये और मीरा से कहा,”तुमने खाया ?”

“जी हम खा चुके !”,मीरा ने कहा
अक्षत ने एक निवाला तोडा और मीरा को खिलाते हुए कहा,”थोड़ा और खा लो मेरे साथ !”
मीरा ने खाया और आगे अक्षत को खाने को कहा ! खाना खाकर अक्षत ने कहा,”सुबह मुझे पापा के साथ ऑफिस जाना है तो सुबह की चाय मेरे लिए तुम बनाओगी !”
अक्षत ने इतने हक़ से कहा की मीरा मना नहीं कर पाई और बर्तन उठाकर किचन की और चली गयी !

अक्षत अपने रूम में आया उसने फाइल के साथ जो लिफाफा लिया था उसे खोला उसमे कुछ नम्बर्स और एड्रेस थे अक्षत उन पर काम करने लगा ! मीरा निधि के साथ अपने कमरे में सोने चली आयी , बिस्तर पर लेटते ही उसे नींद आ गयी ! इन दिनों उसे कोई टेंशन नहीं थी वक्त काफी अच्छा गुजर रहा था ! अक्षत सुबह जल्दी उठ गया नहाकर तैयार हुआ और निचे चला आया ! डायनिंग के पास टेबल पर आकर बैठते ही उसने आवाज लगाई,”मीरा मेरी चाय कहा है ?”

“जी अभी लाए !”,मीरा ने किचन से ही आवाज दी जैसे ही वह चाय लेकर आयी अक्षत तो बस उसे देखता ही रह गया , पटियाला सूट नहाने के बाद उसने बालो को समेटकर कलचर लगाया हुआ था ! माथे पर एक छोटी काली बिंदी और गले में दुपट्टा ! उसने आकर अक्षत के सामने चाय रखी और जैसे ही जाने लगी अक्षत ने उसका हाथ पकड़कर कहा,”तुम आजकल कुछ ज्यादा ही खूबसूरत नहीं लगने लगी हो मीरा !”

“सुबह सुबह मस्ती !”,कहते हुए मीरा अपना हाथ छुड़ाकर चली गयी ! अक्षत मुस्कुरा उठा और चाय पिने लगा , कुछ देर बाद ही विजय भी चले आये राधा ने अक्षत और विजय के लिए नाश्ता लगाया ! विजय ने अक्षत को सुबह सुबह तैयार देखा तो कहने लगे,”अक्षत कही बाहर जा रहे हो बेटा ?”
“आपके साथ ऑफिस !”,अक्षत ने खाते हुए कहा
“क्या ?”,विजय ने हैरानी से कहा
“डोंट वरी पापा जब तक भाई नहीं है सिर्फ तब तक , उसके बाद आपका ऑफिस आपको ही मुबारक !”,अक्षत ने कहा

विजय को हैरानी के साथ साथ खशी भी हुई की अक्षत धीरे धीरे जिम्मेदारियां समझने लगा है ! विजय ने नाश्ता किया और उठते हुए कहा,”ठीक है फिर तुम बाइक से आ जाना मैं गाड़ी लेकर निकल रहा हु मुझे शर्माजी से भी मिलना है किसी मीटिंग के सिलसिले में !”
“ठीक है पापा !”,अक्षत ने कहा !
विजय चले गए अक्षत ने नाश्ता किया वापस अपने कमरे में आया बैग और जरुरी सामान उठाया और वापस निचे चला आया जैसे ही वह जाने लगा मीरा किचन से दौड़कर आयी उसके हाथ में टिफिन था

उसने गेट पर अक्षत को रोका और टिफिन देते हुए कहा,”इसमें आपका लंच रखा है , खा लीजियेगा !”
अक्षत ने मीरा से टिफिन लिया और उसके थोड़ा करीब आकर कहा,”आजकल आप मेरा बड़ा ध्यान रख रही है मीरा जी कही ऐसा न हो ऑफिस के पहले ही दिन मुझे छुट्टी लेनी पड़े !”
“ऐसा कुछ नहीं होगा , आप जाईये !”,मीरा ने कहा और अंदर चली गयी !
अक्षत भी मुस्कुराते हुए अपनी बाइक की और आया और स्टार्ट कर ऑफिस के लिए निकल गया !!

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संजना किरोड़ीवाल

Kitni Mohabbat Hai by Sanjana Kirodiwal
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