Sanjana Kirodiwal

हाँ ये मोहब्बत है – 2

Haan Ye Mohabbat Hai – 2

Haan Ye Mohabbat Hai
Haan Ye Mohabbat Hai

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Haan Ye Mohabbat Hai – 2

मीरा चाय लेकर हॉल की तरफ आयी और चाय का कप अक्षत की तरफ बढ़ाते हुए कहा,”आपकी चाय”
“थैंक्यू मीरा जी,,,,,,,,,,!!”,अक्षत ने बड़े ही प्यार से मीरा की ओर देखकर कहा
ये “मीरा जी” कहकर अक्षत कभी कभी बुलाया करता था आज यू अचानक सुनकर मीरा ने कहा,”मीरा जी ?”
“तुम भी तो मुझे “अक्षत जी” कहकर बुलाती हो , कभी अक्षत या आशु कहकर बुलाया है”,अक्षत ने चाय पीते हुए कहा


“हम आपको इन नामो से कैसे बुला सकते है ?”,मीरा ने मासूमियत से कहा तो अक्षत एक पल के लिए उसके चेहरे की ओर देखने लगा अक्षत को अपनी तरफ देखता पाकर मीरा ने अपनी भँवे उचकाई तो अक्षत मुस्कुराया और ना में गर्दन हिला दी और अपनी चाय पीने लगा। मीरा जाने लगी तो अक्षत ने फिर उसे टोका,”मीरा जी”
“जी कहिये”,मीरा ने पलटकर कहा क्योकि सुबह सुबह मीरा को बहुत काम होते थे। अक्षत का उसे यू परेशान करना अच्छा लगता था लेकिन काम में उलझे होने की वजह से उसे जल्दी वहा से जाना भी होता था


“लगता है आपका प्यार हमारे लिए कम हो गया है”,अक्षत ने मीरा की तरह बात करते हुए कहा
“ऐसा क्यों कह रहे है आप ?”,मीरा ने फिर मासूमियत से कहा
“वो क्या है ना आज आपने चाय में पूरी चीनी डाली है”,अक्षत ने शरारत के साथ मुस्कुराते हुए कहा तो मीरा भी मुस्कुरा उठी और कहा,”अच्छा हमारे प्यार का चाय से क्या कनेक्शन ?”


“कनेक्शन है और बहुत गहरा कनेक्शन है , तुम चाय नहीं बनाती तो कॉफी पीने वाला लड़का तुम्हारे हाथो की बनी चाय नहीं पीता , चाय नहीं पीता तो तुम बार बार चाय देने के बहाने मुझसे मिलने नहीं आती , मिलने नहीं आती तो तुम्हे मुझसे प्यार नहीं होता , प्यार नहीं होता तो शादी नहीं होती , शादी नहीं होती तो अमु,,,,,,,,,,,,!!”,अक्षत आगे कुछ कहता इस पहले ही मीरा ने आगे बढ़कर अपना हाथ अक्षत के होंठो पर रख दिया और कहा,”सुबह सुबह कैसी बाते कर रहे है आप ?”


“मीरा शादी हो चुकी है हमारी और एक बेटी के पेरेंट्स भी है हम इसका मतलब ये नहीं की मैं रोमांटिक नहीं हो सकता”,अक्षत ने कहा
“रोमांटिक बाद में होना साले साहब पहले चलकर नाश्ता कर लीजिये,,,,,,,,,,,,,ठंडा हो जाएगा”,पास से अर्जुन के साथ गुजरते हुए सोमित जीजू ने ऊँची आवाज में कहा तो मीरा तुरंत अक्षत से दूर हट गयी और सोमित जीजू की तरफ पलटकर कहा,”गुड मॉर्निंग जीजू”


“गुड़ मॉर्निंग मीरा , तुम्हारे हाथो से बनी एक कप चाय मुझे भी मिलेगी या सारी अपने इस सडु पति को पिला दी”,सोमित जीजू ने पीछे की तरफ झुककर अक्षत को सुनाते हुए कहा
मीरा ने सुना तो मुस्कुरा उठी और हामी भरकर कीचन की तरफ चली गयी लेकिन अक्षत कैसे रिएक्ट ना करता वह उठा और जीजू की तरफ आते हुए कहा,”ए जीजू मुझे कोई सडु नहीं कहेगा , पता नहीं मीरा ने मेरा ऐसा अजीबो गरीब नाम क्यों निकाला है ? और वो कहे तो अच्छा लगता है लेकिन आप लोग नहीं कहोगे”


अक्षत को चिढ़ता देखकर अर्जुन ने उसे रोकते हुए कहा,”फ़िलहाल तो अजीबोगरीब तू लग रहा है , ये दाढ़ी क्यों बढ़ा रखी है ? जीजू देखो ज़रा इसे ये लगता है किसी भी एंगल से वकील”
सोमित जीजू ने गौर से मुंह बनाते , भँवे चढ़ाई और फिर अर्जुन की तरफ पलटकर कहा,”क्रिमिनल लॉयर है ना हो सकता है उसके लिए सीरियस लुक रखा हो”


अक्षत ने सूना तो मुस्कुराने लगा और जीजू को हाई-फाइव दिया ये देखकर अर्जुन ने कहा,”दिस इज नॉट फेयर यार जीजू आप हर बार इसकी साइड हो जाते हो”
“क्या करे यार पुराना प्यार है इतनी आसानी से नहीं छोड़ सकते , समझा कर”,सोमित जीजू ने अर्जुन का सीना थपथपाते हुए कहा और फिर अक्षत की तरफ पलटकर कहा,”वैसे मुझे भी जानना था ये दाढ़ी क्यों बढ़ा रखी है ?”
“अरे जीजू पिछले दो हफ्ते से कोर्ट बंद है , दिनभर घर में ही तो रहता हूँ बाहर कही जाना नहीं होता तो ट्रिम नहीं किया। और अब इस लुक की आदत हो गयी तो नहीं हटाया”,अक्षत ने अपने गालो को सहलाते हुए कहा


“फिर ठीक है मुझे लगा कही “कबीर सिंह” देखकर तू भी तो उस से इंस्पायर नहीं हो गया”,अर्जुन ने कहा
“कबीर सिंह से आजकल के बच्चे इंस्पायर होते है मुझ जैसे लड़के नहीं , उसमे प्यार के लिए सिर्फ पागलपन दिखाया है और कुछ नहीं”,अक्षत ने कहा
अब यहाँ से बहस शुरू होने वाली थी क्योकि भई शाहीद कपूर थे अर्जुन के फेवरेट लेकिन जीजू ने दोनों को बहस का मौका ही नहीं दिया और कहा,”चलो यार नाश्ता ठंडा हो जाएगा , वैसे भी आज संडे है पूरा दिन पड़ा है बहस करने लिए”


जीजू दोनों को लेकर डायनिंग टेबल की ओर चले आये। चीकू काव्या भी नाश्ता करने आ चुके थे। व्यास हॉउस की सबसे प्यारी बात यही तो थी की यहाँ सुबह का नाश्ता सब साथ में करते थे। डायनिंग टेबल के पास अभी सोमित , अर्जुन , अक्षत , काव्या और चीकू ही थे। काव्या बड़ी हो चुकी थी और चीकू भी काव्या के साथ स्कूल जाने लगा था। वही अमायरा अभी छोटी थी इसलिए घर में ही रहती थी
थोड़ी देर बाद दादू और दादी भी चले आये। अमायरा वही खेल रही थी उसने दादू को गुजरते देखा तो वह अपना खिलौना छोड़कर दादू के पास आयी और उनकी सबसे छोटी ऊँगली पकड़ते हुए कहा,”दादू”


अमायरा को देखकर मुस्कुराये और कहा,”छोटी मीरा चलो नाश्ता करते है”
अमायरा ने खुश होकर हाँ में गर्दन हिला दी। दादू अमायरा को लेकर डायनिंग के पास चले आये दादू ने उसे अपनी गोद बैठाने की कोशिश की तो अमायरा ने कहा,”दादू यहाँ नहीं,,,,,,,,,,,,,,भाई के पास”
नन्ही अमायरा ने चीकू की तरफ इशारा करके कहा तो दादू ने उसे जाने दिया। अमायरा आकर चीकू और काव्या के बीच बैठ गयी लेकिन टेबल तो उस से बहुत नीचे था और अमायरा की सिर्फ शक्ल नजर आ रही थी।

ये देखकर जीजू ने कहा,”देखा अमु दादू की गोद से जाने का नतीजा , इसलिए कहते है कि बड़ो का साथ बहुत जरुरी है”
“हम्म्म्म”, अमायरा ने बिल्कुल अक्षत की तरह मुंह बनाते हुए कहा
“ए अमु ! ये कहा से सीखा तुमने ?”,अर्जुन ने पूछा
“पापा से”,अमायरा ने अक्षत को फंसा दिया लेकिन अक्षत ने अपने चेहरे पर कोई भाव नहीं आने दिए ऐसे दिखाया जैसे उसको कुछ पता ही नहीं यहाँ क्या हो रहा है। दादू ने अक्षत को देखा और कहा,”तू ये सब सिखाता है बच्चो को ?”


“दादू मैंने कहा सिखाया वो मीरा द ग्रेट की बेटी है उसे कुछ सिखाने की जरूरत नहीं है वो सब सीखकर आयी है”,अक्षत ने कहा लेकिन ये भूल गया की मीरा उसके पीछे ही खड़ी है। अक्षत ने नहीं देखा लेकिन बगल में बैठे सोमित जीजू ने देख लिया और कहा,”लगता है तू आज नाश्ता नहीं करेगा”
“क्यों नहीं करूंगा ? इन्फेक्ट मुझे तो बहुत भूख लगी है”,अक्षत ने कहा तो जीजू ने पीछे देखने का इशारा किया।

अक्षत ने जैसे ही देखा उसका बांया हाथ ऑटोमैटिक कान के पास चला गया और अक्षत ने धीरे से कहा,”सॉरी”
“देखा दादू हमने किसी को कुछ नहीं सिखाया फिर भी हमारा नाम आ रहा है”,मीरा ने दादू की तरफ आकर उनके सामने प्लेट रखते हुए कहा
“अरे मीरा ये आशु का किया धरा है घर के सब बच्चे इसके इशारो पर चलते है”,दादू ने कहा


“आपकी मीरा भी,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,अक्षत दादू की तरफ देखते हुए बड़बड़ाया जिसे सिर्फ दादू ही सुन पाए
“जीजू हम आपकी चाय लेकर आते है”,कहकर मीरा वापस चली गयी। दादू ने अक्षत की बढ़ी हुई दाढ़ी को देखा और कहा,”ये जंगल क्यों उगा लिया है तुमने अपने चेहरे पर ?”
“सुबह से ये दोनों मेरे पीछे पड़े थे अब आपको भी मेरी दाढ़ी से दिक्कत हो रही है दादू”,अक्षत ने थोड़ा खीजते हुए कहा


“दिक्कत नहीं है लेकिन ऐसे दाढ़ी रखना , देखकर लग रहा है जैसे किसी हिंदी फिल्म के खलनायक हो”,दादू ने कहा
“वैरी फनी”,अक्षत ने कहा
“तेरे बाप ने देखा नहीं है तुझे ठीक से वरना ये दाढ़ी नहीं दिखती”,दादू ने कहा


“आप डरते होंगे पापा से मैं नहीं डरता , वैसे भी मैं अब बड़ा हो गया हूँ ऐसे कब तक डरूंगा उनसे”,अक्षत ने कहा तो जीजू ने उसकी हाँ में हाँ मिलाई उसे बचाने के लिए नहीं बल्कि उसे फ़साने के लिए क्योकि सामने से ही विजय जी जो आ रहे थे। अर्जुन समझ गया इसलिए टेबल के नीचे से सोमित जीजू को के हाथ पर ताली दी और असली कलाइमेक्स का इंतजार करने लगे। विजय जी आये और कुर्सी खिसकाकर बैठते हुए कहा,”क्या बात है आज सारे ही बड़े चुप चुप बैठे हो”


“वो डिस्कशन चल रहा था की घर के बच्चे अब बड़े हो गए है”,अर्जुन ने आग लगाते हुए कहा
“बड़े हो गए ? लेकिन काव्या , चीकू और अमु तो अभी बच्चे ही है”,विजय जी ने थोड़ा असमझ की स्तिथि में कहा
“इनसे बड़े वाले बच्चे मौसाजी”,जीजू ने उस आग में घी डालने का काम किया
“इनसे बड़ा बच्चा कौन है घर में ? कोई है क्या पापा ?”,विजय जी ने कन्फर्म करने के लिए दादू से पूछा तो दादू ने अपने हाथ खड़े कर दिए और ये जता दिया की उन्हें नहीं पता।


अक्षत समझ गया की अर्जुन और सोमित जीजू उसे फसा रहे है इसलिए वह सबको इग्नोर कर शांत बैठ गया लेकिन उसका हाथ उसकी दाढ़ी पर चला गया। विजय जी का ध्यान सहसा ही अक्षत की दाढ़ी पर चला गया जो की इन दिनों थोड़ी बढ़ी हुई थी। आज से पहले अक्षत को ऐसे नहीं देखा था या तो अक्षत हमेशा क्लीन शेव रहता या फिर लाइट ट्रिम रखता पर इस बार दाढ़ी और मुछे दोनों बढ़ा रखी थी। विजय जी कुछ देर अक्षत को देखते रहे और फिर एकदम सहज होकर कहा,”बाहर रघु पोधो की कटाई कर रहा है”


“ये बात आप मुझे क्यों बता रहे है ?”,अक्षत ने हैरानी से कहा
“अगर तुम ज्यादा ही बिजी हो तो तुम भी जाकर अपनी दाढ़ी छंटवा लो”,विजय जी ने कहा
“अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे”,अर्जुन जीजू की तरफ झुककर फुसफुसाया।
“हमारा ऊँट इतनी जल्दी नहीं झुकेगा”,सोमित जीजू ने फिर अक्षत की साइड होकर कहा
“कल ये दिखनी नहीं चाहिए”,विजय जी ना अक्षत की सफाई सुनी ना ही कोई दलील दी बस सीधा फैसला सूना दिया।


“हम्म्म्म”,अक्षत ने कहा और ऐसा करते हुए उसका वैसे ही मुंह बना जैसे कुछ देर पहले अमायरा बना रही थी। अक्षत ने सामने बैठी अमायरा को देखा तो वह मुस्कुरा उठी। उसकी मुस्कराहट देखकर अक्षत सब भूल जाता था। कुछ देर बाद अनु , नीता , दादी माँ , राधा और मीरा भी चली आयी। मीरा और तनु सबके लिए नाश्ता परोसने लगी। नाश्ता करने के बाद सभी उठकर चले गए। अक्षत ने देखा मीरा किचन में अकेली है वह उसके पास चला आया और कहा,”मीरा”


“हाँ कुछ चाहिए था आपको ?”,मीरा ने अक्षत की तरफ पलटकर कहा बालो की एक लट उसके गाल पर झूल रही थी। अक्षत ने अपनी ऊँगली से उसकी लट को साइड किया और कहा,”अच्छा तुम बताओ ये दाढ़ी अच्छी नहीं लग रही मुझ पर ?”
मीरा ने अक्षत के चेहरे को गौर से देखा , इस दाढ़ी की वजह से अक्षत का वो सांवला सा रंग छुप सा गया था जिस से मीरा को बहुत प्यार था

वह अक्षत के थोड़ा सा करीब आयी और उसकी मुछो को ऊपर करते हुए कहा,”सच कहे तो थोड़ी कम अच्छी लग रही है। सब इसलिए बोल रहे है क्योकि इसमें आप पहले से भी ज्यादा सीरियस दिखने लगे है,,,,बाकि आपको पसंद हो तो रहने दीजिये”
“जो हमारी मीरा को नहीं पसंद वो हमे नहीं पसंद”,कहते हुए अक्षत जैसे ही मीरा के गाल की तरफ झुका किचन के दरवाजे पर खड़ी नीता ने खांसने का नाटक किया

अक्षत ने शर्म से अपना सर सहलाते हुए कहा,”भाभी वो मैं पानी लेने आया था”
“देवर जी,,,,,,,,,,,,,,पानी”,नीता ने पानी का ग्लास अक्षत के सामने करके कहा
“थैंक्यू,,,,,,,,,!”,अक्षत ने पानी लिया और तुरंत वहा से निकल गया इस से पहले की उसकी खिंचाई हो

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संजना किरोड़ीवाल 

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“हाँ कुछ चाहिए था आपको ?”,मीरा ने अक्षत की तरफ पलटकर कहा बालो की एक लट उसके गाल पर झूल रही थी। अक्षत ने अपनी ऊँगली से उसकी लट को साइड किया और कहा,”अच्छा तुम बताओ ये दाढ़ी अच्छी नहीं लग रही मुझ पर ?”
मीरा ने अक्षत के चेहरे को गौर से देखा , इस दाढ़ी की वजह से अक्षत का वो सांवला सा रंग छुप सा गया था जिस से मीरा को बहुत प्यार था

“हाँ कुछ चाहिए था आपको ?”,मीरा ने अक्षत की तरफ पलटकर कहा बालो की एक लट उसके गाल पर झूल रही थी। अक्षत ने अपनी ऊँगली से उसकी लट को साइड किया और कहा,”अच्छा तुम बताओ ये दाढ़ी अच्छी नहीं लग रही मुझ पर ?”
मीरा ने अक्षत के चेहरे को गौर से देखा , इस दाढ़ी की वजह से अक्षत का वो सांवला सा रंग छुप सा गया था जिस से मीरा को बहुत प्यार था

“हाँ कुछ चाहिए था आपको ?”,मीरा ने अक्षत की तरफ पलटकर कहा बालो की एक लट उसके गाल पर झूल रही थी। अक्षत ने अपनी ऊँगली से उसकी लट को साइड किया और कहा,”अच्छा तुम बताओ ये दाढ़ी अच्छी नहीं लग रही मुझ पर ?”
मीरा ने अक्षत के चेहरे को गौर से देखा , इस दाढ़ी की वजह से अक्षत का वो सांवला सा रंग छुप सा गया था जिस से मीरा को बहुत प्यार था

“हाँ कुछ चाहिए था आपको ?”,मीरा ने अक्षत की तरफ पलटकर कहा बालो की एक लट उसके गाल पर झूल रही थी। अक्षत ने अपनी ऊँगली से उसकी लट को साइड किया और कहा,”अच्छा तुम बताओ ये दाढ़ी अच्छी नहीं लग रही मुझ पर ?”
मीरा ने अक्षत के चेहरे को गौर से देखा , इस दाढ़ी की वजह से अक्षत का वो सांवला सा रंग छुप सा गया था जिस से मीरा को बहुत प्यार था

“हाँ कुछ चाहिए था आपको ?”,मीरा ने अक्षत की तरफ पलटकर कहा बालो की एक लट उसके गाल पर झूल रही थी। अक्षत ने अपनी ऊँगली से उसकी लट को साइड किया और कहा,”अच्छा तुम बताओ ये दाढ़ी अच्छी नहीं लग रही मुझ पर ?”
मीरा ने अक्षत के चेहरे को गौर से देखा , इस दाढ़ी की वजह से अक्षत का वो सांवला सा रंग छुप सा गया था जिस से मीरा को बहुत प्यार था

“हाँ कुछ चाहिए था आपको ?”,मीरा ने अक्षत की तरफ पलटकर कहा बालो की एक लट उसके गाल पर झूल रही थी। अक्षत ने अपनी ऊँगली से उसकी लट को साइड किया और कहा,”अच्छा तुम बताओ ये दाढ़ी अच्छी नहीं लग रही मुझ पर ?”
मीरा ने अक्षत के चेहरे को गौर से देखा , इस दाढ़ी की वजह से अक्षत का वो सांवला सा रंग छुप सा गया था जिस से मीरा को बहुत प्यार था

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